सेंट जान्स चर्च में संध्या कालीन प्रार्थना का आयोजन

Evening prayer held at St John’s Church भोपाल (सुशील दामले) ! राजधानी में 40 दिवसीय उपवास की शुरुआत हो गई है,प्रभु यीशु मसीह के क्रूस पर दिए बलिदान के पवित्र दिनों का आरंभ हो गए हैं,ईसाई समाज के लोग 40 दिनों तक उपवास रखकर प्रभु यीशु की आराधना करते हैं,इस दौरान जाने-अनजाने में जो भी पाप अथवा गलत कार्य किए गए हैं और किसी के दिल को ठेस पहुंचाया है,उनसे हृदय से क्षमा याचना करते हैं,अपनी क्षमता के अनुसार गरीब परिवारों की मदद करते हैं,यह 40 दिन के उपवास में लोग प्रार्थना,परहेज और उपवास के रूप में मनाते हैं,वहीं गोविंदपुरा स्थित सेंट जॉन चर्च में भी प्रतिदिन संध्या कालीन प्रार्थना हो रही है,फॉदर अनिल मार्टिन ने हमें बताया कि,प्रभु यीशु के बलिदान के गीत गाने के साथ ही प्रार्थना की जा रही हैं,प्रभु यीशु के क्रूस पर दिए गए बलिदान को पवित्र दिनों के रूप में याद किया जाता हैं,ये विशेष दिनों को दुख भोग के दिन होते हैं इन दिनों में विशेष रूप से क्षेत्र अनुसार मसीही परिवार प्रतिदिन संध्या कालीन प्रार्थना करते हैं,और साथ ही सेवा के कार्य करते हैं,जैसे वृद्ध आश्रम,अनाथ आश्रम सहित ऐसे लोग जो मोहताज एवं विकलांग हैं,ऐसे लोगों की सेवा करते हैं,वहीं 20अप्रैल को इस पवित्र महा का समापन होगा,तत्पश्चात ईस्टर के रूप में ये पर्व मनाया जाएगा recent visitors 83

गोंडवाना गणतंत्र पार्टी को मजबूत करने का संकल्प: नए प्रदेशाध्यक्ष का बड़ा बयान

Resolution to strengthen the Gondwana Ganatantra Party: Big statement by the new state president भोपाल (सुशील दामले)! गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष तिरुमाल दादा तुलेश्वर सिंह मरकाम ने मुझे प्रदेशाध्यक्ष पद का दायित्व सौंपा हैं। मैं पार्टी का एक साधारण सा कार्यकर्ता हूं, पेनवासी दादा हीरा सिंह मरकाम के महान आंदोलन का समर्पित सिपाही हूं। जो जिम्मेदारी मुझे दी गई हैं वो आप सब के आशीर्वाद और सहयोग से पूरा करने में अपना सब कुछ समर्पित कर दूंगा। किसी भी पार्टी का कार्यकर्ता ही उसकी असल पूंजी हैं, मैं नेता नहीं पार्टी एक सिपाही हूं और मैं पार्टी को सामूहिक नेतृत्व देने का वादा करता हूं। गोंडवाना गणतंत्र पार्टी की रीति, नीति,विचार और सिद्धातों को आप सब के साथ मिलकर और अधिक मजबूत करने का भरकस प्रयास करूंगा। मध्यप्रदेश में रहने वाले आदिवासी समाज के साथ ही साथ इस अंचल में रहने वाले सभी वर्गों के लोगों को सरकार की उपेक्षाओं, भ्रष्टाचार और शोषण से निजाद दिलाने के लिए हम सब एक मंच पर मिलकर संघर्ष करेंगे और आदिवासी अंचल के विकास के लिए कार्य करेंगे। समाज को मजबूती से संगठित किया जाएगा आदिवासी समाज को जागरूक और एकजुट करने की दिशा में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी का प्रदेश संगठन पूरी ताकत से काम करेगा। जल, जंगल और जमीन के मुद्दे पर आदिवासियों के अधिकारों की लड़ाई गोंडवाना गणतंत्र पार्टी पूरी ताकत से लड़ेगी। प्रदेश में दिखावे के तौर पर लागू पेसा एक्ट को पूरी तरह से लागू करने की मांग की जाएगी। मैं गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के मुखिया के तौर पर पार्टी और आदिवासी समाज के हितों की रक्षा के लिए कृत संकल्पित होकर कार्य करूंगा। आदिवासी समाज को जागरूक और एकजुट करने की दिशा में प्रदेश संगठन पूरी ताकत से काम करेगा। जल, जंगल और जमीन पर आदिवासियों के अधिकारों की लड़ाई गोंडवाना गणतंत्र पार्टी पूरी ताकत से लड़ेगी। आदिवासी क्षेत्रों में उपलब्ध खनिजों पर आदिवासियों को हक दिलाने। वनोपज पर आदिवासियों का अधिकार सुनिश्चित किए जाने हेतु प्रयास करेंगे। वर्तमान समय में प्रदेश में आदिवासी समाज की जनसंख्या कुल आबादी का 25 प्रतिशत है। विधानसभा में आदिवासी जनप्रतिनिधियों के लिए 25% स्थान आरक्षित कराए जाने का प्रयास किया जाएगा। प्रदेश के 25% आदिवासियों के बिना कोई सरकार नहीं बना सकता प्रदेश में आदिवासियों की जनसंख्या लगभग 2 करोड़ है। मध्यप्रदेश में आदिवासी मतदाता 21% से अधिक है। गोंडवाना गणतंत्र पार्टी पिछले 35 वर्षों से आदिवासी समाज के बीच संघर्ष कर रही है, किंतु पार्टी को राजनीतिक सफलता नहीं मिल पाई, वर्तमान में प्रदेश में एक भी विधायक नहीं है। जबकि उत्तर प्रदेश में मात्र 15% दलित मतदाता है जिनकी एकता के कारण बसपा तीन बार सरकार बनाने में सफल रही। बसपा के उत्तर प्रदेश के मतदाताओं की एकजुटता के कारण आज राष्ट्रीय दल की श्रेणी में है। वही छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश में अनुसूचित जनजाति की अच्छी खासी आबादी होने के बाद भी गोंडवाना गणतंत्र पार्टी को विशेष सफलता नहीं मिल पाई है। इसके पीछे एक कारण यह भी है कि प्रदेश में भाजपा और कांग्रेस आदिवासी मतदाताओं को भ्रमित करने में सफल हो जाती है। आदिवासी क्षेत्रों की आरक्षित सीटों पर राष्ट्रीय पार्टियों से जितने वाले हमारे समाज के नेता समाज की बात कभी नहीं उठाते वे अपनी पार्टी लाइन पर काम करते है। यदि कारण है कि प्रदेश में आदिवासी समाज की कोई आवाज उठाने वाला नहीं है, कोई सुनने वाला नहीं है। प्रदेश में आदिवासियों का शोषण और उत्पीड़न चरम पर है। नौकरियों की ठेका प्रथा और पलायन आदिवासियों के खिलाफ साजिश है आदिवासी समाज दिनों दिन पिछड़ता जा रहा है। सरकारी नौकरियों में अनुसूचित जन जाति वर्ग के आरक्षण का लाभ समाज को नहीं मिल पा रहा है। क्योंकि अधिकांश नौकरियों ठेके और आउटसोर्सिंग के हवाले कर दी गई है। जिसका सबसे अधिक खमियाजा आदिवासी समाज के युवाओं को उठाना पड़ रहा है। आजादी के 75 साल बाद आदिवासी अंचल में लोगों अच्छे रोजगार के अवसर तो छोड़िए मजदूरी तक नहीं मिल पा रही है। मध्यप्रदेश के मजदूर अन्य प्रदेशों में जाकर मजदूरी कर रहे है। प्रदेश की सरकार मजदूरों का पलायन रोकने का प्रयास नहीं कर रही है। प्रदेश में मजदूरों को काम नहीं मिल पा रहा है। दूसरी ओर रोजगार गारंटी योजना में हमारे श्रमिकों के नाम पर करोड़ो रूपये का भ्रष्टाचार हो रहा है। इतने बड़े स्तर पर गांव गांव में भ्रष्टाचार व्याप्त है जिसके बाद भी जिला और प्रदेश प्रशासन दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों पर किसी तरह की कार्यवाही नहीं कर रहा है। ये सरकारें नहीं चाहती कि आदिवासी मजदूर आर्थिक रूप से मजबूत हो इसलिए इन्हें गांवों में मजदूरी देने का प्रयास बंद कर दिया है, गांव और छोटे परिवारों के काबिल नौकरियों ठेके पर दे दी जिससे आदिवासी समाज को आरक्षण का लाभ न मिल पाए। दूसरे प्रदेशों में मजदूरों के पलायन के पीछे इनकी सोच है आदिवासी समाज को कमजोर करना, बड़ी संख्या में इनके प्रदेश से बाहर रहने से आदिवासियों का संख्या बल कम होता है। खनिजों की लूट मची है मध्यप्रदेश के आदिवासी अंचल में ही सबसे अधिक खनिज भंडार है, पर इससे किसी भी तरह का लाभ आदिवासी समाज की नहीं मिलता। इसका लाभ बड़े उद्योगपति और बाहरी व्यापारियों द्वारा उठाया जाता है। इन क्षेत्रों में रहने वाले जनजाति लोगों को इन खनिज भंडारों से कोई लाभ नहीं मिलता दूसरी और इन क्षेत्रों से आदिवासियों को विस्थापित होना पड़ रहा रहा। आदिवासियों का न तो उचित ढंग से पुनर्वास हो रहा है और न ही उन्हें उचित मुआवजा मिलता है और न ही रोजगार दिया जा रहा है। इन खनिज भंडारों से होने वाली अरबों खरबों की आय से उद्योगपति, नेता और सरकार अपनी जेबें भर रही है अधिकारी जमकर भ्रष्टाचार कर रहे है। खनिजों से होने वाली आय से पूरे प्रदेश में विकास कार्य करवाए जाते है और सबसे कम राशि आदिवासी क्षेत्रों पर खर्च किया जाता है जिसके कारण ये क्षेत्र आज भी पिछड़े है।आदिवासी अंचल से खनिजों से होने वाली आय का उपयोग आदिवासीओ के विकास और हित में नहीं किया जा रहा है जो आदिवासियों के साथ खुला अन्याय है। आदिवासी अंचल में रेत खदानों पर बाहरी माफियाओं का कब्जा करवा दिया गया है गरीब, आदिवासी, किसान खुद की रेत … Read more

ग्वालियर किला अब निजी हाथों में, इंडिगो एयरलाइंस से 5 साल का करार

Gwalior Fort is now in private hands, 5 year agreement with Indigo Airlines Gwalior Fort: नरेंद्र कुइया. लियर के किले को अब निजी हाथों में देने की तैयारी है। इसके लिए भोपाल में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में पर्यटन-संस्कृति विभाग ने इंटरग्लोब एविएशन लिमिटेड (इंडिगो एयरलाइंस) के साथ एमओयू किया है। इसमें आगा खान कल्चरल सर्विसेज फोरम (एकेसीएसएफ) को शामिल किया है। अभी 5 साल के करार में किले के संरक्षण और सौंदर्यीकरण होगा। बाद में पांच साल और बढ़ेगा। इसकी फंडिंग इंडिगो एयरलाइंस करेगी, एकेसीएसएफ संरक्षण करेगी। इनके संरक्षण का कार्य भी वे ही करते हैं। ग्वालियर दुर्ग पर एमओयू (MOU) के बाद की प्रक्रिया शुरू करने से पहले मप्र टूरिज्म(MP Tourism), इंडिगो एयरलाइंस (Indigo Airlines) और एकेसीएसएफ की 100 लोगों की टीम 7 मार्च को शाम 4 बजे किले पर पहुंचेगी। संरक्षण कार्य तो पहले से हो रहाइस एमओयू में ग्वालियर किले के वि₹म महल, कर्ण महल, गूजरी महल, जहांगीर महल, शाहजहां महल, हुमायू महल और जौहर कुंड सहित कई ऐतिहासिक संरचनाओं के दस्तावेजीकरण और संरक्षण करने की बात कही गई है। जबकि राज्य पुरातत्व विभाग की ओर से संरक्षित स्मारकों के संरक्षण का कार्य पूर्व में भी किया गया है और वर्तमान में भी किया जा रहा है। राज्य पुरातत्व विभाग ने 2016-17 में करीब एक से डेढ़ करोड़ रुपए खर्च कर यहां संरक्षण कार्य किए थे। वहीं अब यहां लगभग 75 लाख रुपए से अधिक खर्च कर रिनोवेशन कार्य किए जा रहे हैं। साथ ही यहां पाथवे का निर्माण कार्य भी जारी है। ऐसे में निजी कंपनी से संरक्षण कार्य कराने की क्या जरूरत आन पड़ी है। एमओयू में ऐसे तथ्य● ग्वालियर किला कंजर्वेशन और इल्यूमिनेशन परियोजना बहुआयामी प्रयास।● पर्यटकों के लिए सुविधाजनक पहुंच मार्ग, सुविधाओं का विस्तार।● मौजूदा स्थानों का उपयोग कर कैफे व प्रदर्शनी स्थलों का विकास। तब विरोध पर रुका था होटल निर्माणग्वालियर किले पर बनी भीमसिंह राणा की छत्री पर शासन ने 2022-23 में होटल की योजना बनाई थी। जाट समाज के विरोध के बाद योजना ठंडे बस्ते में चली गई थी। श्योपुर का किला, बलदेवगढ़ का किला, दतिया का राजगढ़ पैलेस राज्य पुरातत्व विभाग से असंरक्षित कर पर्यटन निगम को दिए थे। 50 लाख रुपए मासिक आयग्वालियर किले पर 50 लाख रु. मासिक आय ग्वालियर दुर्ग पर बने केंद्र-राज्य पुरातत्व विभाग के स्मारकों को देखने विदेशों से सैलानी आते हैं। मासिक आय 50 लाख तक है। विशेष दिनों में यह बढ़ जाती है। संरक्षण कार्य तो पहले से हो रहाइस एमओयू में ग्वालियर किले के विक्रम महल, कर्ण महल, गूजरी महल, जहांगीर महल, शाहजहां महल, हुमायू महल और जौहर कुंड सहित कई ऐतिहासिक संरचनाओं के दस्तावेजीकरण और संरक्षण करने की बात कही गई है। जबकि राज्य पुरातत्व विभाग की ओर से संरक्षित स्मारकों के संरक्षण का कार्य पूर्व में भी किया गया है और वर्तमान में भी किया जा रहा है। राज्य पुरातत्व विभाग ने 2016-17 में करीब एक से डेढ़ करोड़ रुपए खर्च कर यहां संरक्षण कार्य किए थे। वहीं अब यहां लगभग 75 लाख रुपए से अधिक खर्च कर रिनोवेशन कार्य किए जा रहे हैं। साथ ही यहां पाथवे का निर्माण कार्य भी जारी है। ऐसे में निजी कंपनी से संरक्षण कार्य कराने की क्या जरूरत आन पड़ी है। ऐसे काम पहले भी हो चुके हैंनिजी कंपनियों को पुरातत्व संरक्षित स्मारकों की जानकारी नहीं होती। वे धरोहरों का संरक्षण कार्य कैसे कर सकती हैं। ऐसे काम पहले भी हो चुके हैं। ये सब मिलीभगत से होते हैं। recent visitors 254

शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार का एक और मामला उजागर, टीचर ने छात्रा से मांगे 50 हजार रुपये

Ratlam: Another case of corruption exposed in the education department, teacher demanded 50 thousand rupees from a student रतलाम! मध्यप्रदेश के रतलाम जिले में शिक्षा विभाग से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जिले के आलोट क्षेत्र में स्थित न्यू आर्यवीर सीनियर सेकंडरी स्कूल के एक शिक्षक प्रदीप सिंह को 12वीं कक्षा की एक छात्रा से 50 हजार रुपये मांगने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने आरोपी टीचर को कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे 6 मार्च तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है। प्रैक्टिकल का रिजल्ट बिगाड़ने की धमकी आरोप के अनुसार, शिक्षक प्रदीप सिंह ने छात्रा को धमकाया कि अगर उसने पैसे नहीं दिए, तो उसका प्रैक्टिकल परीक्षा का रिजल्ट खराब कर दिया जाएगा और उसका भविष्य बर्बाद हो जाएगा। इतना ही नहीं, आरोपी शिक्षक ने कथित रूप से छात्रा को उसके माता-पिता की जान से मारने की धमकी भी दी। छात्रा के परिजनों की शिकायत पर कार्रवाई पीड़िता की शिकायत के बाद परिजनों ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई। शिकायत के अनुसार, एक मार्च को छात्रा स्कूल की एक्सट्रा क्लास में गई थी, जहां टीचर प्रदीप सिंह ने उसे अलग बुलाकर पैसे लाने के लिए धमकाया। जब छात्रा ने घर आकर अपने माता-पिता से 50 हजार रुपये मांगे, तो उन्होंने कारण पूछा, जिस पर छात्रा ने पूरा मामला उजागर कर दिया। इसके बाद परिजनों ने तुरंत पुलिस से संपर्क किया। पुलिस जांच में जुटी शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी शिक्षक को गिरफ्तार कर लिया और उससे पूछताछ कर रही है। प्रारंभिक जांच में आरोपी पर लगे आरोप सही पाए गए हैं। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या आरोपी पहले भी इस तरह की हरकतों में शामिल रहा है। शिक्षा विभाग पर उठे सवाल इस घटना ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक शिक्षक, जो बच्चों को सही दिशा देने के लिए जिम्मेदार होता है, अगर इस तरह के अपराध में लिप्त पाया जाता है, तो यह पूरे शिक्षा तंत्र के लिए एक चिंता का विषय बन जाता है। इस मामले के उजागर होने के बाद अभिभावकों में भी भय और आक्रोश है। पुलिस जल्द ही पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट पेश करेगी और आरोपी शिक्षक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है। recent visitors 113

एमपी गजब : BEO-Clerk together defrauded ने मिल कर शिक्षा विभाग को लगाया 5 करोड़ का चुना: शिक्षकों का वेतन रिश्तेदारों के खातों में डाला, प्राचार्यों की मिलीभगत से फर्जीवाड़ा

भोपाल (कमलेश)। मध्यप्रदेश में शिक्षा विभाग के कर्मचारी भ्रष्टाचार करने के लिए पत्नियों और रिश्तेदारों के बैंक खातों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसका खुलासा शिक्षा विभाग की ही जांच में हुआ है। पिछले महीने रायसेन के सिलवानी बीईओ दफ्तर में 1 करोड़ के गबन के मामले में 26 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। BEO-Clerk together defrauded इनमें शिक्षा विभाग के कर्मचारी, प्राचार्य और रिटायर्ड प्राचार्य शामिल हैं। इनके अलावा जिन 12 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है, वो इन कर्मचारियों की पत्नियां और रिश्तेदार हैं। ये एकलौता मामला नहीं है। 5 अन्य जिलों में भी गबन के ऐसे ही मामले सामने आए हैं, जिनमें पत्नियों और रिश्तेदारों के अकाउंट में भ्रष्टाचार की करीब 5 करोड़ की रकम ट्रांसफर की गई। 10 मार्च से शुरू हो रहे विधानसभा के बजट सत्र में भी ये मामला उठ सकता है। आखिर किस तरह पत्नी और रिश्तेदारों के खातों से किया गया भ्रष्टाचार और इन मामलों में क्या एक्शन लिया गया, पढ़िए रिपोर्ट… अब जानिए, कैसे किया एक करोड़ का गबन रायसेन के जिला शिक्षा अधिकारी डीडी रजक के मुताबिक, ये पूरा हेरफेर साल 2018 से 2022 के बीच किया गया। सिलवानी विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय में पदस्थ क्लर्क चंदन अहिरवार इस गबन का मास्टरमाइंड है। चंदन के पास विकासखंड के अंतर्गत आने वाले हर स्कूल के शिक्षक की बैंक अकाउंट डिटेल होती थी। रजक बताते हैं कि 2022 तक शिक्षक और अतिथि शिक्षकों की सैलरी का भुगतान वेंडर के जरिए होता था। तब ऑफलाइन ट्रांजेक्शन भी हो जाता था। इसी का फायदा आरोपियों ने उठाया है। चंदन शिक्षक और अतिथि शिक्षकों के नाम के आगे अपने रिश्तेदार या पत्नी का बैंक अकाउंट दर्ज कर वेतन और मानदेय की राशि ट्रांसफर करता था। उसने पत्नी सुमन अहिरवार के बैंक अकाउंट में 37 लाख रुपए जमा कराए। इसी तरह इस गबन में शामिल बाकी लोगों ने भी करीब 58 लाख रुपए की रकम पत्नियों और रिश्तेदारों के अकाउंट में जमा कराई। प्राचार्यों की भी मिलीभगत, 3 रिटायर हो चुकेजिला शिक्षा अधिकारी डीडी रजक बताते हैं कि सरकार ने पहले स्कूल के प्राचार्यों को ही डीडीओ (आहरण एवं संवितरण) के अधिकार दिए थे। ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि शिक्षकों को सैलरी के लिए संकुल कार्यालय पहुंचना पड़ता था। मगर, शिक्षा विभाग के कर्मचारी और प्राचार्यों ने मिलीभगत कर इस व्यवस्था को पलीता लगाया। रजक के मुताबिक, इस दौरान पांच स्कूलों के प्राचार्यों को डीडीओ की जिम्मेदारी दी गई थी। इनके साइन से ही रिश्तेदारों के खातों में ये राशि पहुंचाई गई। इसमें इनकी बराबर की भागीदारी है। गड़बड़ी सामने आने के बाद विभागीय स्तर पर जांच की गई तो इनके खिलाफ भी एफआईआर दर्ज कराई गई है। अब जानिए, कैसे किया पूरा गबन पासवर्ड बांट दिया: नियमों के मुताबिक, डीडीओ अपना पासवर्ड किसी को साझा नहीं कर सकता। जांच में पाया गया कि डीडीओ ने अपना पासवर्ड कर्मचारियों को दे दिया। इसका इस्तेमाल कर कोषालय से पैसा निकाला गया। महीने की समीक्षा नहीं हुई: नियमानुसार हर महीने भुगतान की समीक्षा करना जरूरी है, ताकि गड़बड़ियों का पता लगाया जा सके। सिलवानी बीईओ दफ्तर में ये प्रक्रिया नहीं अपनाई गई। इससे ये पता नहीं चला कि सही व्यक्ति के खाते में पैसा पहुंचा या नहीं। ई-भुगतान का सत्यापन नहीं: हर महीने ये जांच होना चाहिए कि जो भी ऑनलाइन भुगतान किए हैं, वो सही बैंक अकाउंट में पहुंचे या नहीं। यहां इस प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ। असली दावेदारों का नाम गायब किया: जब किसी व्यक्ति को भुगतान किया जाता है, तो उसका नाम और बैंक खाता सरकारी डेटाबेस में दर्ज करना जरूरी होता है। जांच में पाया गया कि इस प्रक्रिया को भी नहीं अपनाया गया। बिल तैयार करने में लापरवाही: कोषालय संहिता 2020 के नियमों के अनुसार, बिल (देयक) बनाने की जिम्मेदारी क्रिएटर की होती है। उसे सॉफ्टवेयर में अपने पासवर्ड से लॉगिन कर भुगतान लेने वाले व्यक्ति का नाम, बैंक खाता नंबर दर्ज करना होता है। अप्रूवर इस बिल की जांच कर कोषालय में जमा करता है। जांच में पाया गया कि इस प्रक्रिया का सही तरीके से पालन नहीं किया गया। स्वीकृति आदेश में अनियमितता: जब किसी भुगतान को स्वीकृत किया जाता है, तो उसके साथ स्वीकृति आदेश (Approval Order) संलग्न किया जाता है। लेकिन जांच में पाया गया कि कई मामलों में अलग-अलग भुगतान के लिए एक ही स्वीकृति आदेश का उपयोग किया गया। इसके अलावा, कई अधूरे स्वीकृति आदेश भी जारी किए गए और कुछ मामलों में आदेश अटैच ही नहीं किए गए। ऐसे पांच और मामलों की जांच की जा रही है रायसेन का ये अकेला मामला नहीं है। पिछले दो साल में गबन के ऐसे 5 और मामले हैं, जिनकी विभागीय जांच की जा रही है। इनमें भी विभागीय अधिकारी, शिक्षक और कर्मचारियों की मिलीभगत पाई गई है। छिंदवाड़ा: रिश्तेदार-पत्नी और बहन के खातों में 1 करोड़ 32 लाख ट्रांसफर छिंदवाड़ा जिले के जुन्नारदेव शिक्षा अधिकारी कार्यालय में 1.32 करोड़ रुपए के गबन का खुलासा जुलाई 2024 में हुआ था। जबलपुर वित्त विभाग की टीम ने सात दिन की जांच के बाद यह फर्जीवाड़ा पकड़ा। इस मामले में पूर्व बीईओ एमआई खान और चौरई संकुल के बाबू तौसिफ खान की मिलीभगत पाई गई। आरोपियों ने कोरोना में मृत कर्मचारियों की सहायता राशि भी हड़प ली और सरकारी धन को अपने रिश्तेदारों के खातों में ट्रांसफर किया गया। वित्त विभाग की टीम को जुन्नारदेव में तकरीबन 1 करोड़ 44 लाख के घोटाले की आशंका थी। इसमें से 1 करोड़ 32 लाख की पुष्टि हो चुकी है। क्या हुआ: जिला शिक्षा अधिकारी गोपाल सिंह बघेल ने बताया कि आरोपियों पर एफआईआर दर्ज की जा चुकी है। सभी को निलंबित कर दिया है। उनसे राशि वसूल करने की प्रक्रिया जारी है। Read more : स्कूलों में शारीरिक दंड पर पूर्ण प्रतिबंध,बच्चों को मारने पर शिक्षकों पर होगी कार्रवाई: एमपी सरकार का बड़ा फैसला  ग्वालियर: अलग-अलग खातों में 47 लाख ट्रांसफर ग्वालियर के विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) कार्यालय डबरा में 2024 में 47 लाख रुपए के गबन का मामला सामने आया था। इस गड़बड़ी को भोपाल की ऑडिट टीम ने पकड़ा था। यह राशि सात अलग-अलग खातों में ट्रांसफर की गई, जिनमें तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी विकास … Read more

स्कूलों में शारीरिक दंड पर पूर्ण प्रतिबंध,बच्चों को मारने पर शिक्षकों पर होगी कार्रवाई: एमपी सरकार का बड़ा फैसला 

Teachers will be punished for beating children: MP government’s big decision, complete ban on corporal punishment in schools भोपाल। मध्य प्रदेश के सरकारी और निजी स्कूलों में अब छात्र-छात्राओं के साथ मारपीट या किसी भी तरह की शारीरिक सजा पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है। टीचर्स और अन्य जिम्मेदार कर्मचारियों पर कानूनी कार्रवाई भी होगी। बाल अधिकार संरक्षण आयोग की चिट्ठी के बाद स्कूल शिक्षा विभाग ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी करते हुए ऐसी हालत में कार्रवाई के लिए कहा है। साथ ही ऐसे मामलों की रिपोर्ट भी देने के लिए कहा गया है। लोक शिक्षण संचालनालय के अपर संचालक रवीन्द्र कुमार सिंह की ओर से शारीरिक दंड (कॉर्पोरल पनिशमेंट) पर पूर्ण प्रतिबंध और कड़ी कार्रवाई संबंधी निर्देश मंगलवार को जारी किए गए हैं। मध्य प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने इसको लेकर 4 फरवरी 2025 को स्कूल शिक्षा विभाग को पत्र लिखा था। आदेश के बाद अब इस मामले में सख्त एक्शन के निर्देश दिए जा रहे हैं। अपर संचालक ने कहा है कि मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा अधिनियम 2009 की धारा 17 (1) में शारीरिक मानसिक प्रताड़ना और भेदभाव पूरी तरह प्रतिबंधित है। साथ ही धारा 17 (2) के तहत ऐसा करना दंडनीय अपराध है। भारतीय दंड संहिता की धारा 323 के तहत शारीरिक दंड भी प्रतिबंधित है। इसलिए प्रदेश के सभी जिलों में संचालित सरकारी और निजी स्कूलों में छात्रों को शारीरिक दंड देने की घटनाओं की त्वरित पहचान करने और इस तरह की स्थितियों पर रोक लगाने के लिए उचित कदम उठाए जाएं। सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को ये निर्देश भी दिए गए हैं कि किसी स्कूल या शिक्षक द्वारा शारीरिक दंड देने के मामले में तत्काल एक्शन लेकर अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई की जाए। इस तरह का एक मामला दो माह पहले भोपाल में हो चुका है। यहां सेंट माइकल स्कूल के टीचर ने 11वीं के छात्र को इतना पीटा था कि उसके दोनों पैरों की चमड़ी निकल गई थी। छात्र का कहना था कि टीचर ने उसके पैरों पर फुटबॉल के शूट की तरह मारा। इसके बाद छात्र के परिजनों ने जिला शिक्षा अधिकारी को इसकी शिकायत की थी जिस पर जांच समिति बनाई गई थी। recent visitors 283

भाजपा नेता की गुंडागर्दी, ASI से धक्का-मुक्की कर नेम प्लेट तोड़ी, नपा उपाध्यक्ष को भी पीटा

bjp leader jinesh jain hooliganism pushed asi and broke his name plate also beatup nagar palika vice president मुरैना ! जिले में भाजपा नेता की गुंडागर्दी का मामला सामने आया है। जहां धार्मिक कार्यक्रम के नाम पर अश्लीलता परोसी जा रही थी, जिसे बंद कराने आए ASI के साथ भाजपा नेता धक्का-मुक्की की और वर्दी में लगे नेम प्लेट भी तोड़ दिया। इतनी ही नहीं उसने गनर और अन्य लोगों के साथ मिलकर नगर पालिका उपाध्यक्ष के साथ भी मारपीट की। बता दें कि, ये मामला अंबाह थाना इलाके में चल रहे जयेश्वर महादेव मेला का है। आरोप है कि, यहां जयेश्वर महादेव मेले में चल रहे धार्मिक कार्यक्रम के दौरान अश्लील डांस कराया जा रहा रहा था। फूहड़ गानों पर महिला डांसर के ठुमके लगवाए जा रहे थे। इस संबंध में जब एएसआई किशन सिंह को सूचना मिली तो वो उस फूहड़ डांस को बंद कराने मौके पर पहुंचे। इस दौरान भाजपा नेता जिनेश जैन ने सत्ता का रोब दिखाते हुए न सिर्फ एएसआई के धक्का-मुक्की की। साथ ही उनकी वर्दी पर लगी नेम प्लेट भी खींसकर निकाली और उसे तोड़ दिया। यही नहीं भाजपा नेता पुलिस जवान का मोबाइल भी छीनकर फेंक दिया। भाजपा नेता ने यहीं बस नहीं किया। मेले के बाहर चाय की दुकान पर बैठे नगर पालिका उपाध्यक्ष उमेश जैन के साथ भी जिनेश जैन अपने गनर और अन्य लोगों ने मारपीट की। भाजपा नेता जिनेश जैन नगर पालिका अध्यक्ष अंजली जैन के पति हैं। बताया जा रहा है कि उसी ने अश्लील डांस का कार्यक्रम आयोजित कराया था। फिलहाल, एएसआई और उपाध्यक्ष की शिकायत पर पुलिस ने भाजपा नेता जिनेश जैन गनर बबलू शर्मा, बुलंद सिंह परिहार सहित 10-15 अज्ञात लोगों पर शासकीय कार्य में बाधा डालने और एससी-एसटी एक्ट सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज कर लिया है। recent visitors 177