मुंबई आतंकी हमले का आरोपी तहव्वुर राणा का प्रत्यर्पण संभव: कोर्ट

 कैलिफोर्निया अमेरिका की एक अदालत ने मुंबई में हुए आतंकवादी हमलों में संलिप्तता के आरोपी एवं पाकिस्तानी मूल के कनाडाई व्यवसायी तहव्वुर राणा को बड़ा झटका देते हुए फैसला सुनाया है कि उसे प्रत्यर्पण संधि के तहत भारत को प्रत्यर्पित किया जा सकता है। ‘यूएस कोर्ट ऑफ अपील्स फॉर नाइंथ सर्किट’ ने 15 अगस्त को सुनाए अपने फैसले में कहा, ‘भारत अमेरिका प्रत्यर्पण संधि राणा के प्रत्यर्पण की अनुमति देती है।’ राणा ने कैलिफोर्निया में अमेरिकी ‘डिस्ट्रिक्ट कोर्ट’ के आदेश के खिलाफ ‘यूएस कोर्ट ऑफ अपील्स फॉर नाइंथ सर्किट’ में याचिका दायर की थी। कैलिफोर्निया की अदालत ने उसकी बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को अस्वीकार कर दिया था। बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका में मुंबई में आतंकवादी हमलों में राणा की कथित संलिप्तता के लिए उसे भारत प्रत्यर्पित किए जाने के मजिस्ट्रेट न्यायाधीश के आदेश को चुनौती दी गई थी। ‘यूएस कोर्ट ऑफ अपील्स फॉर नाइंथ सर्किट’ के न्यायाधीशों के पैनल ने ‘डिस्ट्रिक्ट कोर्ट’ के फैसले की पुष्टि की। प्रत्यर्पण आदेश की बंदी प्रत्यक्षीकरण समीक्षा के सीमित दायरे के तहत, पैनल ने माना कि राणा पर लगाए गए आरोप अमेरिका और भारत के बीच प्रत्यर्पण संधि की शर्तों के अंतर्गत आते हैं। इस संधि में प्रत्यर्पण के लिए ‘नॉन बिस इन आइडेम’ (किसी व्यक्ति को एक अपराध के लिए दो बार दंडित नहीं किए जाने का सिद्धांत) अपवाद शामिल है। जिस देश से प्रत्यर्पण का अनुरोध किया गया हो, यदि ‘‘वांछित व्यक्ति को उस देश में उन अपराधों के लिए दोषी ठहराया गया हो या दोषमुक्त कर दिया गया हो, जिनके लिए प्रत्यर्पण का अनुरोध किया गया है’’, तो ऐसी स्थिति में यह अपवाद लागू होता है। पैनल ने संधि की विषय वस्तु, विदेश मंत्रालय के तकनीकी विश्लेषण और अन्य सर्किट अदालतों में इस प्रकार के मामलों पर गौर करते हुए माना कि ‘‘अपराध’’ शब्द अंतर्निहित कृत्यों के बजाय आरोपों को संदर्भित करता है तथा इसके लिए प्रत्येक अपराध के तत्वों का विश्लेषण आवश्यक है। तीन न्यायाधीशों के पैनल ने निष्कर्ष निकाला कि सह-साजिशकर्ता की दलीलों के आधार पर किया गया समझौता किसी अलग नतीजे पर पहुंचने के लिए बाध्य नहीं करता। पैनल ने माना कि ‘नॉन बिस इन आइडेम’ अपवाद इस मामले पर लागू नहीं होता, क्योंकि भारतीय आरोपों में उन आरोपों से भिन्न तत्व शामिल हैं, जिनके लिए राणा को अमेरिका में बरी कर दिया गया था। पैनल ने अपने फैसले में यह भी माना कि भारत ने मजिस्ट्रेट जज के इस निष्कर्ष का समर्थन करने के लिए पर्याप्त सक्षम सबूत पेश किए हैं कि राणा ने वे अपराध किए हैं, जिनका उस पर आरोप लगाया गया है। पैनल के तीन न्यायाधीशों में मिलन डी स्मिथ, ब्रिजेट एस बेड और सिडनी ए फिट्जवाटर शामिल थे। पाकिस्तानी नागरिक राणा पर अमेरिका की एक जिला अदालत में मुंबई में बड़े पैमाने पर आतंकवादी हमले करने वाले एक आतंकवादी संगठन को समर्थन देने के आरोप में मुकदमा चलाया गया था। जूरी ने राणा को एक विदेशी आतंकवादी संगठन को सहायता प्रदान करने और डेनमार्क में आतंकवादी हमलों को अंजाम देने की नाकाम साजिश में सहायता प्रदान करने की साजिश रचने का दोषी ठहराया था। हालांकि, इस जूरी ने भारत में हमलों से संबंधित आतंकवादी कृत्यों में सहायता प्रदान करने की साजिश रचने के आरोप से राणा को बरी कर दिया था। राणा को जिन आरोपों के तहत दोषी ठहराया गया था, उसने उनके लिए सात साल जेल में काटे और उसकी रिहाई के बाद भारत ने मुंबई हमलों में उसकी संलिप्तता के मामले में उस पर मुकदमा चलाने के लिए उसके प्रत्यर्पण का अनुरोध किया था। राणा को प्रत्यर्पित किए जा सकने का सबसे पहले फैसला सुनाने वाले मजिस्ट्रेट न्यायाधीश के समक्ष उसने दलील दी थी कि भारत के साथ अमेरिका की प्रत्यर्पण संधि उसे ‘नॉन बिस इन आइडेम’ प्रावधान के कारण प्रत्यर्पण से संरक्षण प्रदान करती है। उन्होंने यह भी दलील दी थी कि भारत ने यह साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं दिए कि अपराध उसने ही किए हैं। अदालत ने राणा की इन दलीलों को खारिज करने के बाद उसे प्रत्यर्पित किए जा सकने का प्रमाणपत्र जारी किया था। अमेरिका की जेल में बंद राणा मुंबई हमलों में संलिप्तता के आरोपों का सामना कर रहा है। उसे पाकिस्तानी-अमेरिकी आतंकवादी डेविड कोलमैन हेडली का साथी माना जाता है, जो 26 नवंबर 2008 को मुंबई में हुए हमलों के मुख्य साजिशकर्ताओं में से एक है। इन आतंकवादी हमलों में छह अमेरिकी नागरिकों समेत कुल 166 लोगों की मौत हो गई थी। recent visitors 99

सीवन नदी घाट से कुबेरेश्वर धाम तक शुरू हुई कांवड़ यात्रा, कुबेरेश्वर धाम तक उमड़ा आस्था का सैलाब

सीहोर  पवित्र श्रावण मास में शनिवार को सीहोर में भव्य कांवड़ यात्रा निकाली जा रही है। सीवन नदी के तट से शुरू होने वाली इस कावड़ यात्रा को लेकर शुक्रवार देर शाम से ही शहर में श्रद्धालु नजर आने लगे थे। सुबह होते-होते हजारों की सख्या में श्रद्धालु पहुंचने से पूरा सीवन तट केसरिया रंग में रंगे कावड़ियों से पट गया। सुबह नो बजे शुरू हुई कावड़ यात्रा 11 किमी का सफर कर कुबेरेश्वर धाम पहुंचेगी। जगह-जगह स्वागत के इंतजाम भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए उनके उपासक कई तरह के उपाय करते हैं, जिनमें से एक कांवड़ यात्रा भी शामिल है। शनिवार को शहर के सीवन तट से करीब 11 किलोमीटर तक यह कांवड यात्रा क्षेत्र वासियों ने लिए संजीवनी से कम नहीं है। यात्रा में शामिल होने के लिए कांवड यात्री शहर में आकर आस्था और उत्साह के साथ कुबेरेश्वरधाम पर पहुंच रहे हैं। इस दौरान शहर सहित आस-पास के शहरवासी, ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों के अलावा जनप्रतिनिधियों के द्वारा 200 से अधिक स्थानों पर स्वागत और पेयजल सहित अन्य की व्यवस्था की गई, वहीं करीब 450 किलोमीटर दूर अमरावती से पांच से अधिक कांवड यात्री पैदल चलते हुए सीहोर पहुंच रहे है। यह है कांवड़ यात्रा का मार्ग कावड़ यात्रा सुबह नौ बजे शहर के सीवन नदी तट से आरंभ हुई जो जगदीश मंदिर, कोतवाली चौराहा, मेन रोड, इंदौर नाके, सोया चौपाल होते हुए कुबेरेश्वर धाम पर पहुंचेगी। कांवड़ यात्रा में दो दर्जन से अधिक डीजे व बैंड पार्टियां शामिल हैं। इसके अलावा आकर्षक झांकियों के साथ डमरू दल भी शिवभक्ति में मगन होकर झूमते-नाचते चल रहा है। इस संबंध में सभी शिवभक्तों को कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने संदेश देते हुए कहा कि कांवड़ यात्रा को लेकर विठलेश सेवा समिति सहित क्षेत्रवासियों ने अपने-अपने स्तर पर तैयारियां की है। शहर सहित ग्रामीण क्षेत्र के सभी समाज के लोगों ने बैठकों के द्वारा यात्रा में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं के पोहा, नश्ता, पेयजल, भोजन आदि की निश्शुल्क व्यवस्था की है। वहीं शहर के अनेक शासकीय और अशासकीय विद्यालयों में भी हजारों श्रद्धालुओं के ठहरने की व्यवस्था प्रशासन ने की है। recent visitors 175

कर्नाटक के सीएम सिद्धारमैया जमीन घोटाले में फंसे , राज्यपाल ने दी केस की मंजूरी

बेंगलुरु कर्नाटक से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जो आने वाले समय में राज्य की राजनीति में भूचाल ला सकती है। वहां के राज्यपाल ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के खिलाफ उनके परिवार से जुड़े MUDA मामले में मुकदमा चलाने की अनुमति दे दी है। राज्यपाल थावरचंद गहलोत को दो कार्यकर्ताओं की शिकायतें मिली हैं, जिनमें से एक आरटीआई कार्यकर्ता टीजे अब्राहम भी हैं। दूसरी शिकायत सामाजिक कार्यकर्ता स्नेहमयी कृष्णा द्वारा हाल ही में की गई थी। शिकायत में कहा गया है कि सीएम सिद्धारमैया द्वारा कानून का पालन करने के बार-बार दावों के बावजूद सिद्धारमैया की पत्नी को MUDA द्वारा 14 साइटें आवंटित करने में स्पष्ट उल्लंघन हुआ है। इससे पहले कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने भी मुख्यमंत्री को कारण बताओ नोटिस जारी करके पूछा है कि उनके खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति क्यों न दी जाए। जवाब में, कर्नाटक कैबिनेट ने "दृढ़ता से सिफारिश" की कि राज्यपाल मुख्यमंत्री को जारी नोटिस वापस लें। क्या है मामला? कर्नाटक में भूमि आवंटन घोटाला सुर्खियों में रहा है। कर्नाटक के मुख्यमंत्री की पत्नी 2021 में भाजपा के कार्यकाल के दौरान MUDA की लाभार्थी थीं। उस समय मैसूर के प्रमुख स्थानों में 38,284 वर्ग फुट भूमि उन्हें उनकी 3.16 एकड़ जमीन के कथित अवैध अधिग्रहण के मुआवजे के रूप में आवंटित की गई थी। मैसूर के केसारे गांव में उनकी 3.16 एकड़ जमीन उनके भाई मल्लिकार्जुन ने उन्हें उपहार में दी थी। मुआवजे के तौर पर दक्षिण मैसूर में एक प्रमुख इलाके में उन्हें जमीन दी गई। आरोप है कि केसर गांव की जमीन की तुलना में इसकी कीमत काफी अधिक है। इसके कारण मुआवजे की निष्पक्षता पर सवाल उठाए गए हैं। सिद्धारमैया ने इस भूमि आवंटन का बचाव करते हुए कहा था कि यह पिछली भाजपा सरकार के दौरान किया गया था। recent visitors 76

सरकारी सिस्टम की वादाखिलाफी का शिकार हुए बुंदेलखंड के ‘दशरथ मांझी’

छतरपुर  बुंदेलखंड के दशरथ मांझी के नाम से पहचाने जाने वाले सीता राम लोधी सरकारी सिस्टम के शिकार हो गए। जिला प्रशासन और नेताओं के द्वारा किए गए वादे पूरे नहीं होने से उनकी सरकार से उम्मीद टूटती दिख रही है। 2018 में छतरपुर जिले के प्रताप पुरा पंचायत के हडुआ गांव में रहने वाले सीताराम लोधी ने बड़ा कारनामा किया था। 70 साल की उम्र में अकेले ही उन्होंने गांव के खेत में एक कुआं खोद दिया था। सीता राम लोधी का कहना है कि गांव में पानी की कमी है। खेत में सिंचाई के लिए पानी की जरूरत थी। इसीलिए अपनी दम पर लगभग 18 माह की कड़ी मेहनत के बाद उन्होंने अपने खेत में एक कुआं खोद दिया था। प्रशासन ने किया था आर्थिक मदद का वादा सीताराम लोधी और उनके परिवार ने दावा किया है कि कुंआ बनने के बाद जिला प्रशासन एवं स्थानीय नेताओं ने उनकी खूब तारीफ की। इसके साथ ही कुएं के लिए आर्थिक मदद की बात कही थी। उस समय सीताराम लोधी खूब सुर्खियां में भी रहे थे। 6 साल बाद भी किसी ने नहीं ली सुध सीता राम लोधी का कहना है कि उन्होंने 2018 में यह कुआं खोदा था। स्थानीय प्रशासन एवं जन प्रतिनिधियों ने आर्थिक मदद देने की बात कही थी। तत्कालीन कलेक्टर ने भी दो लाख रुपए देने के लिए कहा था। जिससे उनका कच्चा कुआं पक्का हो सके। पर 6 साल बाद भी सीताराम लोधी की किसी ने सुध तक नहीं ली है। वर्तमान में भी वे अपने हाथों से खोदे गए कुएं को लेकर परेशान हैं। हर बरसात में कुआं खिसक जाता है और फिर वापस कुएं से मिट्टी निकालनी पड़ती है। जिसमें दुर्घटना का भी खतरा रहता है। सरकारी वादे खोखले निकले उनका कहना है कि जिला प्रशासन और उस समय के कई नेताओं ने आर्थिक मदद के तौर पर 2 लाख 10 हजार देने की बात कही थी। इससे कच्चे कुएं को बांधा जा सके। साथ ही सरकारी योजनाएं दिलाने की भी कही गई थी। पर सारे सरकारी दावे और वादे खोखले निकले। आलम यह की अब बरसात के मौसम में कुआं पूरी तरह से खिसक रहा है। पूर्व क्रिकेटर ने की थी सराहना सीताराम लोधी की मेहनत देखकर पूर्व क्रिकेटर वीवीएस लक्ष्मण ने उनकी तारीफ करते हुए एक ट्वीट किया था। जिसके बाद जिला प्रशासन हरकत में आया था। उनके क्षेत्र के तहसीलदार ने उनका एक गरीबी रेखा का राशन कार्ड बना दिया। इसके अलावा आज तक उन्हे कुछ नही मिला है। सीताराम लोधी का कहना है कि न तो उनको आवास योजना का लाभ मिला है। न ही उनका सरकारी शौचालय का लाभ मिला है| उनके परिजनों का कहना है जिला प्रशासन के अधिकारियों ने वाह वाही लूटने के लिए झूठे वादे किए थे। किसी ने भी उनकी कोई सुध नहीं ली है। कई बार वह स्थानीय नेताओं के चक्कर भी काट चुके हैं। अभी भी उन्होंने हार नही मानी है। उनका कहना है कि जैसे ही बरसात कम होगी एक बार फिर किए के काम में लग जाएंगे। उन्हे अफसोस इस बात का है कि जिला प्रशासन ने जो वादे किए थे उन्हें पूरे नही किया। आर्थिक मदद मिलती तो शायद उनका कुआं नहीं गिरता। recent visitors 90

नीमच में दर्दनाक सड़क हादसा, पुलिस सहित 3 लोगों की मौत

नीमच मध्यप्रदेश के नीमच जिले में दर्दनाक हादसा हुआ है। जिसमें पुलिस ड्राइवर सहित 3 लोगों की मौत हो गई है। बाकी 7 अन्य लोग घायल हैं। जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बताया जा रहा है कि ट्रक ने पीछे से टक्कर मार दी। हालांकि, पुलिस मामले की जांच में जुट गई है। जानकारी के मुताबिक, यह दर्दनाक हादसा शनिवार को सुबह-सुबह हुआ है। पुलिस सागरान के पास पेट्रोलिंग कर रही थी। तभी पिकअप वाहन को जोरदार टक्कर मार दी। इसके साथ ही पुलिस की गाड़ी भी खड़ी हुई थी। इस हादसे में दो पिकअप सवार और एक पुलिस ड्राइवर की मौत हो गई। वहीं कई पुलिसकर्मी सहित सात लोग घायल हैं। ट्रक ने मारी जोरदार टक्कर गश्त के दौरान पुलिस पिकअप को रोककर पूछताछ कर रही थी। तभी अचानक पीछे से आ रहे तेज रफ्तार ट्रक ने दोनों गाड़ियों को टक्कर मार दी। जिसमें पुलिस ड्राइवर सहित तीन लोगों की मौत हो गई। हादसे के तुरंत ही बाद ड्राइवर मौके से फरार हो गया। एसपी अंकित जायसवाल ने बताया कि पिकअप गाड़ी और थाना मोबाइल गाड़ी खड़ी थी। जिसमें पीछे से आए आयशर ट्रक ने जोरदार टक्कर मार दी। जिस वजह से दोनों वाहन पलट गए। जिसमें पुलिस ड्राइवर सहित तीन लोगों की मौत हो गई। recent visitors 91

शिवराज सिंह बुधनी दौरे के दौरान वह तिरंगा यात्रा में शामिल होने के साथ ही लाडली बहनों से भी संवाद करेंगे

भोपाल / बुधनी मध्य प्रदेश की बुधनी विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव को लेकर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान आज से तैयारियों का आगाज करने जा रहे हैं. केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान आज शनिवार (17 अगस्त) को बुधनी विधानसभा के बुधनी और रेहटी दौरे पर रहेंगे. इस दौरे के दौरान वह तिरंगा यात्रा में शामिल होने के साथ ही लाडली बहनों से भी संवाद करेंगे. केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान करीब 6 घंटे तक बुधनी विधानसभा में रहेंगे. शिवराज सिंह चौहान ने विदिशा से सांसद निर्वाचित होने के बाद बुधनी विधानसभा सीट से इस्तीफा दे दिया. शिवराज सिंह की पारंपरिक सीट है बुधनी इससे पहले वर्ष 2005-06 से तत्कालीन सीएम शिवराज सिंह चौहान बुधनी विधानसभा सीट से विधायक रहे, लेकिन हाल ही में संपन्न हुए संसदीय चुनाव में पार्टी ने उन्हें विदिशा संसदीय सीट से अपना उम्मीदवार बनाया. शिवराज सिंह चौहान ने विदिशा से रिकार्ड मतों से जीत दर्ज की. विदिशा से जीत के बाद शिवराज सिंह चौहान को केंद्र में कृषि मंत्री का दायित्व सौंपा गया. केंद्रीय मंत्री बनने के बाद शिवराज सिंह चौहान ने बुधनी विधानसभा सीट के विधायक पद से इस्तीफा दिया है. तभी से यह सीट रिक्त है. अब इस सीट पर उपचुनाव होना है. जीतू पटवारी खुद कर रहे लीड दूसरी तरफ बुधनी विधानसभा में होने वाले उपचुनाव को लेकर कांग्रेस की तरफ से पीसीसी चीफ जीतू पटवारी खुद अगुवाई कर रहे हैं. जीतू पटवारी दो बार बुधनी विधानसभा क्षेत्र का दौरा कर चुके हैं. इस मौके पर जीतू पटवारी ने कार्यकर्ताओं के साथ टिफिन पार्टी भी की है. जबकि जीतू पटवारी ने बुधनी विधानसभा क्षेत्र में पदयात्रा का भी ऐलान किया हुआ है. कांग्रेस के बाद अब बीजेपी भी आज से चुनाव तैयारियों का आगाज करने जा रही है. शिवराज सिंह चौहान का शेड्यूल जारी दौरा कार्यक्रम अनुसार केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान सुबह 10.35 बजे भोपाल स्थित निवास से निकलकर 10.40 बजे स्मार्ट सिटी पार्क पहुंचकर पौधरोपण करेंगे. जबकि 11 बजे स्मार्ट सिटी पार्क से निकलकर 12.30 बजे बुधनी पहुंचेंगे. दोपहर 12.30 बजे बुधनी रेलवे के पास तिरंगा यात्रा में शामिल होंगे. इसके बाद दोपहर 1 बजे नया बस स्टैंड आएंगे, जहां लाडली बहनों से जनसंवाद करेंगे. दोपहर 2.30 बजे निजी कार्यक्रम में शामिल होंगे. जबकि 2.40 बजे बुधनी से निकलकर 3.10 बजे रेहटी पहुंचेंगे, जहां तिरंगा यात्रा में शामिल होंगे. रेहटी में 3.30 से 4.30 बजे तक जनसंवाद कार्यक्रम में शामिल होंगे. रात 7 बजे भोपाल पहुंचेंगे. recent visitors 87

हाईकोर्ट ने डॉक्टरों की हड़ताल को बताया अवैधानिक, जारी किया नोटिस, आज होगी सुनवाई

जबलपुर मध्य प्रदेश में जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल को हाईकोर्ट ने अवैधानिक बताया है। उन्होंने 24 घंटे में जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन गांधी हॉस्पिटल भोपाल को नोटिस देते हए जवाब मांगा है। बता दें कि पश्चिम बंगाल में ट्रेनी महिला डॉक्टर की दुष्कर्म और हत्या के विरोध में प्रदेश के डॉक्टर हड़ताल पर उतर गए थे। इस हड़ताल को चुनौती देने वाली याचिका हाईकोर्ट में लगाई गई थी। हाईकोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा तथा जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि पूर्व में दायर याचिका की सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश शासकीय चिकित्सा महासंघ तथा मेडिकल ऑफिसर एसोसिएशन को निर्देशित किया गया था कि वह हाईकोर्ट में बिना सूचित किए सांकेतिक हड़ताल तक नहीं करेंगे। युगलपीठ ने जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन गांधी हॉस्पिटल भोपाल को उक्त आदेश की प्रति नोटिस के साथ भेजने के आदेश देते हुए अगली सुनवाई शनिवार 17 अगस्त को सुनवाई निर्धारित की है। नरसिंहपुर निवासी अंशुल तिवारी की तरफ से दायर याचिका में कहा गया था कि पश्चिम बंगाल में एक महिला डॉक्टर के साथ हुई घटना के विरोध में देशभर के डॉक्टर आंदोलनरत हैं। प्रदेश के डॉक्टर भी घटना के विरोध में हड़ताल पर चले गए हैं। पूर्व में इंदरजीत सिंह शेरू की तरफ से दायर याचिका पर हाईकोर्ट द्वारा फरवरी 2023 में दिए गए आदेश का हवाला देते हुए कहा गया कि उस समय डॉक्टरों की हड़ताल को अवैधानिक करार दिया था। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में चिकित्सा सेवा को अत्यावश्यक सेवा घोषित करते हुए कहा था कि अत्यावश्यक सेवा संधारण तथा विचिन्नता निवारण अधिनियम 1979 के तहत चिकित्सा सेवा के कर्मचारी सामूहिक अवकाश तथा हड़ताल पर नहीं जा सकते। हाईकोर्ट ने मध्य प्रदेश शासकीय व स्व शासकीय  चिकित्सा महासंघ तथा मेडिकल ऑफिसर एसोसिएशन को निर्देशित किया था कि वे हाईकोर्ट में बिना सूचित किए सांकेतिक हड़ताल तक नहीं करेंगे। याचिका की सुनवाई करते हुए युगलपीठ ने प्रमुख सचिव स्वास्थ्य विभाग, डीन गांधी मेडिकल कॉलेज तथा जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन गांधी मेडिकल कॉलेज को नोटिस जारी करते हुए 24 घंटों में जवाब मांगा है। युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन को इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से नोटिस के साथ पूर्व में पारित आदेश की प्रति भेजी जाए। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता संजय अग्रवाल ने पैरवी की। recent visitors 95