जीएडी के नियमों को ठेंगा बता पीएचई विभाग, पदोन्नति देने ठोकी अपनी शर्तें, अधिकारों से वंचित कर्मचारी

Flouting GAD rules, the PHE Department has imposed its own conditions for granting promotions, leaving employees deprived of their rights. भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशों एवं कर्मचारी हितैषी मंशा अनुरूप जीएडी के नियमों के मुताबिक सभी विभागों में पदोन्नति का बड़ा काम चल रहा है। लेकिन कुछ विभाग उदासीनता भी दिखा रहे हैं। ऐसा ही कुछ पीएचई विभाग में चल रहा है। विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की मनमानी से सैकड़ों कर्मचारी पदोन्नति से बाहर होने की कगार पर पहुंच गए हैं।वैसे तो जीएडी ने सभी विभागों को विस्तृत दिशा निर्देश दिए हैं। मध्यप्रदेश शासन के अनेक विभागों में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को तृतीय श्रेणी पदों पर पदोन्नत कर दिया गया है। कंप्यूटर डिप्लोमा एवं सीपीसीटी (CPCT) की अनिवार्यता पूर्ण करने के लिए 5 वर्ष का समय भी दिया गया है। जानकारी के अनुसार, लोक निर्माण विभाग (PWD), स्वास्थ्य विभाग, पशुपालन विभाग, उद्योग विभाग, जनसंपर्क विभाग तथा संभागीय उपायुक्त, वाणिज्यिक कर विभाग सहित कई विभागों में जीएडी नियमों के तहत कर्मचारियों की पदोन्नति का कार्य बड़ी तेजी से चल रहा है। वहीं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) विभाग में पात्र कर्मचारियों की पदोन्नति अब तक लंबित है। पीएचई विभाग के कर्मचारियों का कहना है कि जब समान शासन, समान सेवा नियम और समान परिस्थितियों में अन्य विभागों के कर्मचारियों को पदोन्नति का लाभ मिल चुका है, तब पीएचई विभाग के कर्मचारियों को इस अधिकार से वंचित रखा जा रहा है। इससे कर्मचारियों में असंतोष और भेदभाव की भावना उत्पन्न हो रही है। कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मांग की है कि पीएचई विभाग के कर्मचारियों को भी शासन की मंशा के अनुरूप तत्काल आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए जाएं, ताकि पात्र कर्मचारियों को शीघ्र पदोन्नति प्रदान की जा सके तथा कंप्यूटर डिप्लोमा एवं सीपीसीटी की पूर्ति के लिए अन्य विभागों की तरह पाँच वर्ष का अवसर उपलब्ध कराया जाए। कर्मचारियों ने विश्वास व्यक्त किया है कि मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप से पीएचई विभाग के कर्मचारियों को भी समान न्याय मिलेगा और पूरे प्रदेश में एक समान पदोन्नति नीति लागू होगी। recent visitors 31

छतरपुर:  गुरु पूर्णिमा महोत्सव , 29 जुलाई को रविदास मंदिर अबार बनेगा श्रद्धा और भक्ति का केंद्र

Chhatarpur: Guru Purnima Festival, on July 29, Ravidas Temple Abar will become a center of faith and devotion. छतरपुर/रामटौरिया। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर संत रविदास मंदिर अबार माता तहसील घुवारा जिला छतरपुर में 29 जुलाई 2026 बुधवार को गुरु पूजन एवं विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा। इस धार्मिक आयोजन को लेकर समिति द्वारा आमंत्रण पत्र जारी कर समाज के लोगों से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर धर्म लाभ अर्जित करने की अपील की गई है। आयोजन आल इंडिया आदि धर्म मिशन के तत्वाधान में रैदास समाज सेवा समिति रविदास मंदिर अबार, तथा रविदास मंदिर समिति अबार माता के तत्वावधान में संपन्न होगा। कार्यक्रम के अनुसार दोपहर 12 बजे गुरु पूजन किया जाएगा। जबकि शाम 4 बजे से प्रसाद वितरण एवं भंडारा प्रारंभ होगा। समिति ने अपने संदेश में समाज के सभी गुरु प्रेमी बंधुओं, माताओं, बहनों एवं युवाओं से तन, मन और धन से सहयोग करने का आह्वान किया है। आमंत्रण पत्र में श्रद्धालुओं से विनम्र आग्रह किया गया है कि वे परिवार सहित कार्यक्रम में पहुंचकर गुरुजनों का आशीर्वाद प्राप्त करें तथा धार्मिक आयोजन को सफल बनाने में सहभागिता निभाएं। कार्यक्रम में स्थानीय समाजजन, क्षेत्रवासी एवं आसपास के ग्रामीणों की बड़ी संख्या में शामिल होने की संभावना है। आयोजन स्थल रविदास मंदिर अवार (अबार माता), तह. घुवारा जिला छतरपुर निर्धारित किया गया है। समिति का संदेश: भजन मंडली एवं कीर्तन के साथ कार्यक्रम की शोभा बढ़ाएं तथा गुरु कृपा प्राप्त करें। recent visitors 60

एपी गज़ब फर्जी डॉक्टर ने सरकार को लगाया लाखों का चूना, एक साथ तीन जिलों में करता रहा नौकरी

Bizarre case from AP: Fake doctor swindles the government out of lakhs; held jobs in three districts simultaneously. मध्यप्रदेश में फर्जीवाड़े का एक बड़ा मामला सामने आया है। शहडोल के जयसिंहनगर विकासखंड स्थित उफरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ तथाकथित डॉक्टर महेश चंद शर्मा के रिश्वत लेते पकड़े जाने के बाद एक-एक कर चौंका देने वाले खुलासे हो रहे हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि तथाकथित फर्जी डॉक्टर एक ही समय में प्रदेश के तीन जिलों में नौकरी कर रहा था और वेतन ले रहा था। जानकारी के मुताबिक वो अब तक तीनों जिलों में मिलाकर 64 लाख रुपये के करीब वेतन ले चुका है। तीन जिलों में एक साथ नौकरीमध्यप्रदेश के शहडोल, खरगोन और श्योपुर तीनों जिलों में डॉक्टर महेश चंद शर्मा की अलग-अलग कर्मचारी आईडी, अलग-अलग पैन नंबर और अलग-अलग आधार संबंधी विवरण दर्ज थे, लेकिन एनएचएम और स्वास्थ्य विभाग की जांच प्रणाली इस फर्जीवाड़े को वर्षों तक पकड़ नहीं सकी। शुरुआती आंकलन के अनुसार आरोपी ने वेतन के रूप में सरकार को करीब 64 लाख रुपए की आर्थिक क्षति पहुंचाई है। तीन पहचान, नहीं पकड़ पाया सिस्टमजांच में सामने आया कि आरोपी ने प्रत्येक जिले में अलग-अलग दस्तावेजों के आधार पर नियुक्ति हासिल की। सबसे बड़ा सवाल यह है कि शहडोल में आधार का अधूरा नंबर जमा होने के बावजूद नियुक्ति कैसे मिल गई और दस्तावेजों का सत्यापन किस स्तर पर हुआ। घर बैठे लगती रही ऑनलाइन हाजिरीविभागीय सूत्रों के अनुसार आरोपी उफरी स्वास्थ्य केंद्र में शायद ही कभी दिखाई देता था। वह सार्थक ऐप के माध्यम से जिले और कई बार प्रदेश की सीमा से बाहर रहकर भी अपनी ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करा देता था। ब्लॉक और जिला स्तर के अधिकारियों के औचक निरीक्षण में भी वह कई बार अनुपस्थित मिला, जिसके कारण नोटिस भी जारी किए गए, लेकिन इसके बावजूद उसके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। लाखों रुपये वेतन लिया पड़ताल में सामने आया है कि आरोपी को तीनों जिलों से प्रतिमाह लगभग 50 से 55 हजार रुपए मानदेय मिलता था। अनुमानित भुगतान इस प्रकार है- इस प्रकार आरोपी ने तीनों जिलों से मिलाकर करीब 64 लाख रुपए का सरकारी भुगतान प्राप्त किया। स्वास्थ्य मंत्री बोले- एफआइआर भी होगी, वसूली भीमामले पर संज्ञान लेते हुए प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने शहडोल प्रवास के दौरान सख्त कार्रवाई के संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि आरोपी की सेवा समाप्त करने के साथ उसके द्वारा लिए गए पूरे वेतन की वसूली की जाएगी और उसके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई जाएगी। साथ ही उन अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय होगी, जिन्होंने दस्तावेजों का सत्यापन किए बिना नियुक्ति प्रक्रिया पूरी की, ऑनलाइन उपस्थिति पर निगरानी नहीं रखी और समय रहते अनियमितताओं की जानकारी उच्च अधिकारियों तक नहीं पहुंचाई। recent visitors 37

डेयरी की आड़ में चल रहा था अवैध बूचड़खाना, पुलिस ने किया खुलासा; बेटे-दामाद व मुख्य आरोपी गिरफ्तार

Illegal slaughterhouse operating under the guise of a dairy exposed by police; son, son-in-law, and main accused arrested. भोपाल । निशातपुरा थाना क्षेत्र के कमला नगर में मिला संदिग्ध मांस गोवंश का ही निकला है। हालांकि अभी तक एफएसएल की रिपोर्ट नहीं मिली है, लेकिन पुलिस ने एक गाय का धड़ बरामद करने के बाद यह मानकर चल रही है कि यह मामला गोकशी का ही है। पुलिस ने डेयरी की आड़ में अवैध बूचडख़ाना संचालित करने वाले मुख्य आरोपी अजीज और बेअे आसिफ तथा दामाद जुबैर को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी लंबे समय से सड़कों पर घूमने वाली आवारा गायों और गौवंश चुराकर लाते और लोगों को बताते की वह डेयरी का संचालन कर रहे हैं। हालांकि जहां कथित तौर पर डेयरी का संचालन आरोपी बता रहे हैं, वह जमीन भी शासकीय बताई जा रही है। जिला प्रशासन जमीन की भी जांच शुरू कर दिया है। अवैध अतिक्रमण कर कथित डेयरी के नाम पर बूचडख़ाना संचालित किए जाने का खुलासा होने के बाद मामला सुर्खियों में है। उल्लेखनीय है कि गुरुवार-शुक्रवार की दरमियानी देर रात बजरंगदल के डेढ़ दर्जन से अधिक कार्यकर्ताओं ने एक ऑटो से ले जाए जा रहे मांस को पकड़कर हंगामा कर गोकशी का आरोप लगाया था। इसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर तीनों आरोपियों को रिगफ्तार कर लिया है। गौपाल रखे हुए थे नजरपुलिस सूत्रों के अनुसार गोकशी के बाद गायों की हड्डियों और सिर को पास की बंजर जमीन और खेतों में गड्ढे कर मिट्टी के अंदर गाड़ देते थे, ताकि पड़ोसियों को गोकशी का पता नहीं चले। कमला नगर क्षेत्र में रहने वाले सत्येंद्र ने दावा किया कि पिछले तीन महीने में उनकी चार गायों चोरी हो चुकी हैं। मेरे साथ इस कॉलोनी और अन्य कॉलोनियों की कई गायों और गोवंश चोरी हो चुके हैं। इसके बाद हम लोग बजरंगदल के कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर गायों की निगरानी करते थे। जानें कैसे हुआ खुलासा?तभी पता चला कि अजीज और उससे जुड़े लड़के सड़कों पर घूमने वाली गायों को चुराते हैं। इसके बाद निगरानी की गई तो पता चला कि गायों तो चुराकर लाते हैं, लेकिन इनके यहां ज्यादा दिन तक गायें रहती रहीं। ऐसे में खुलासा हुआ कि जब यह व्यक्ति गायों को बेचता नहीं तो क्या करता है? इसके बाद गोकशी का खुलासा हुआ। कई दिनों से कॉलोनी के लड़के निगरानी कर रहे थे, तब पता चला कि यह गायों को काटकर मांस बेचने का कार्य कर रहा है। इसके बाद मांस को पकड़ा गया है। पुलिस अब यह भी पता कर रही है कि गोवंश की मांस की सप्लाई कहां की जा रही थी। संदिग्ध मांस की एफएसएल रिपोर्ट आने के बाद अगर गाय का मांस की रिपोर्ट आती है तौर कुछ और लोगों की गिरफ्तारी संभव है। recent visitors 41

डिंपल यादव बोलीं- BJP वाले सफेद चादर का कफन लेकर आए, सोनम वांगचुक को दबाना, देश की आत्मा को दबाना

Dimple Yadav said—the BJP has come with a white shroud; suppressing Sonam Wangchuk means suppressing the soul of the nation. समाजवादी पार्टी सांसद डिंपल यादव ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को पुलिस द्वारा अस्पताल ले जाने की घटना को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने अपने एक्स अकाउंट पर लिखा- ‘बीजेपी वाले देश के लिए सफेद चादर का कफन लेकर आए हैं। जब शांतिपूर्ण आवाजो को दबाया जाता है, तो संविधान और लोकतंत्र भी आहत होते हैं। सोनम वांगचुक जैसे लोगों की आवाज दबाना, देश की आत्मा को दबाना है।’ दरअसल, शनिवार सुबह दिल्ली के जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक को पुलिस सफदरजंग अस्पताल लेकर गई। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने पुलिस कार्रवाई का विरोध किया, जिससे मौके पर हंगामे की स्थिति बन गई। ये पुलिस नहीं आरएसएस के गुंडे हैंकॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया कि ‘सुबह सात बजे जब मैं फ्रेश होने के लिए यहां से निकला, तो पुलिस के गुंडे वहां आए। वे सोनम सर को गालियां देते हुए घसीटकर लेकर गए। 60 साल का एक व्यक्ति, जो 20 दिनों से भूख हड़ताल पर था उन्हें दिल्ली पुलिस जबरदस्ती घसीटकर यहां से लेकर गई। हमें नहीं पता कि कहां लेकर गए हैं। जैसे ही मुझे खबर मिली, मैं जंतर-मंतर आ रहा था, तो पुलिस ने मेरे साथ भी मारपीट की। ये पुलिस नहीं आरएसएस के गुंडे हैं। मैं विदेश से अपने देश वापस आया था, क्या मैं कोई अपराधी हूं? मुझे इन लोगों ने सड़कों पर मारा। सोनम वांगचुक 21 दिनों से अनशन पर बैठेसोनम वांगचुक पेपर लीक मामले की निष्पक्ष जांच और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर 21 दिनों से अनशन पर बैठे हैं। लंबे अनशन के कारण उनकी सेहत लगातार बिगड़ रही थी और उनका वजन करीब 9.5 किलोग्राम कम हो चुका है। इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को केंद्र और दिल्ली सरकार को निर्देश दिया था कि वांगचुक का प्रतिदिन मेडिकल परीक्षण कराया जाए और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें तत्काल उपचार उपलब्ध कराया जाए। इसी आदेश के अनुपालन में पुलिस उन्हें शनिवार सुबह अस्पताल लेकर गई। घटना के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। recent visitors 47

बरगद का एक पौधा लगाओ, 500 साल पुण्य कमाओ: पर्यावरण संरक्षण के लिए देशभर में जागरूकता अभियान

Plant a banyan sapling, earn 500 years of merit: Nationwide awareness campaign for environmental conservation. पुणे (महाराष्ट्र)। पर्यावरण संरक्षण और आने वाली पीढ़ियों के लिए हरियाली सुरक्षित रखने के उद्देश्य से सुशिलादेवी सोशल वेल्फेअर फाउंडेशन, पुणे (महाराष्ट्र) ने एक अनूठा जन-जागरूकता अभियान शुरू किया है। संस्था के संस्थापक संतोष जाधव ने देशवासियों से अपील करते हुए कहा है कि बरगद का एक पौधा लगाओ, 500 साल पुण्य कमाओ। संस्था का मानना है कि यदि प्रत्येक गांव, शहर, मोहल्ले और कॉलोनी में बरगद सहित दीर्घायु वृक्षों का बड़े स्तर पर रोपण किया जाए तो आने वाले वर्षों में भारत का प्राकृतिक स्वरूप पूरी तरह बदल सकता है। यह अभियान केवल पौधारोपण तक सीमित नहीं है, बल्कि आने वाली दस पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संपदा सुरक्षित रखने का संदेश भी देता है। पहले घर में तैयार करें पौधा, फिर सुरक्षित स्थान पर लगाएं संस्था ने सुझाव दिया है कि जिन लोगों के पास फिलहाल जमीन उपलब्ध नहीं है, वे बरगद का पौधा गमले या पॉलीबैग में तैयार करें। जब पौधा लगभग 4 से 5 फीट का हो जाए, तब उसे किसी सुरक्षित स्थान जैसे मंदिर परिसर, गांव की सार्वजनिक भूमि, वन क्षेत्र, अनुपयोगी जमीन या अन्य उपयुक्त स्थान पर स्थानीय लोगों की सहमति से रोपित करें। विशेष अवसरों पर करें पौधारोपण अभियान के तहत नागरिकों से अपील की गई है कि वे जन्मदिन, विवाह वर्षगांठ, किसी प्रियजन की स्मृति, सम्मान समारोह या पुरस्कार प्राप्ति जैसे विशेष अवसरों पर बरगद का पौधा लगाकर प्रकृति को अनमोल उपहार दें। हर गांव में 50 से 500 पौधे लगाने का लक्ष्य फाउंडेशन का लक्ष्य है कि प्रत्येक गांव में कम से कम 50 से 500 बरगद सहित बड़े वृक्षों का रोपण किया जाए। यदि यह संकल्प पूरे देश में सफल होता है तो अगले 10 से 15 वर्षों में हजारों गांव हरियाली, जल संरक्षण और स्वच्छ वातावरण के केंद्र बन सकते हैं। पर्यावरण और जैव विविधता को मिलेगा बड़ा लाभ विशेषज्ञों के अनुसार बड़े वृक्ष केवल ऑक्सीजन ही नहीं देते, बल्कि मधुमक्खी, तितली, गिलहरी, चिड़िया, कौवा सहित अनेक जीव-जंतुओं के लिए सुरक्षित आवास भी बनते हैं। इससे जैव विविधता का संरक्षण होता है और प्राकृतिक संतुलन मजबूत होता है। बरगद जैसे विशाल वृक्ष वर्षा जल संरक्षण, भूजल स्तर बढ़ाने, मिट्टी के कटाव को रोकने और प्राकृतिक खाद तैयार करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। आने वाली पीढ़ियों के लिए अमूल्य धरोहर संस्था का कहना है कि एक बरगद का वृक्ष कई सौ वर्षों तक जीवित रह सकता है। इसलिए आज लगाया गया एक पौधा आने वाली कई पीढ़ियों को स्वच्छ हवा, छाया, जल संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों का लाभ देगा। यही कारण है कि अभियान का संदेश है एक बरगद का पौधा लगाना केवल पर्यावरण सेवा नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए अमूल्य धरोहर छोड़ना है संस्था की अपील सुशिलादेवी सोशल वेल्फेअर फाउंडेशन ने सभी राज्यों, जिलों, तहसीलों, ग्राम पंचायतों, सामाजिक संगठनों, विद्यालयों, महाविद्यालयों और आम नागरिकों से इस अभियान में सक्रिय भागीदारी की अपील की है। संस्था का विश्वास है कि यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में कम से कम एक बरगद का पौधा अवश्य लगाए, तो भारत को हरित, समृद्ध और पर्यावरण की दृष्टि से आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सकता है। recent visitors 39

केंद्र सरकार पर भड़के केजरीवाल: धर्मेंद्र प्रधान का मांगा इस्तीफा, बोले- सोनम वांगचुक को बनाएं देश का शिक्षा मंत्री

Kejriwal lashes out at the Central Government: Demands Dharmendra Pradhan’s resignation, says Sonam Wangchuk should be made the country’s Education Minister. नीट-यूजी 2026 परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक विवाद को लेकर देश की सियासत गरमा गई है। आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने गुरुवार को केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। जंतर-मंतर पर युवाओं के नेतृत्व में चल रहे विरोध प्रदर्शन और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के अनशन को अपना समर्थन देते हुए केजरीवाल ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर दी है। केंद्र को केजरीवाल की चेतावनीप्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार को चेतावनी भरे लहजे में कहा कि युवाओं की आवाज, इस आंदोलन और सोनम वांगचुक की बात को सुनिए, वरना तीन साल बाद (आगामी चुनावों में) केंद्र सरकार का वही हश्र होगा जो 2014 में तत्कालीन सरकार का हुआ था। पीएम मोदी को दिया अनोखा प्रस्तावशिक्षा क्षेत्र में जवाबदेही तय करने की मांग उठाते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने केंद्रीय कैबिनेट में बड़े बदलाव का प्रस्ताव रखा। केजरीवाल ने कहा कि मेरा प्रधानमंत्री को एक सुझाव और प्रस्ताव है कि धर्मेंद्र प्रधान को उनके पद से हटाया जाना चाहिए और पीएम को लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को देश का नया केंद्रीय शिक्षा मंत्री बनाना चाहिए। सोनम वांगचुक के अनशन का 19वां दिनयह पूरा विवाद 2026 की नीट-यूजी परीक्षा में हुई धांधली और पेपर लीक के आरोपों से जुड़ा है। लद्दाख के प्रसिद्ध इंजीनियर, शिक्षा सुधारक और पर्यावरणविद सोनम वांगचुक इसी मुद्दे को लेकर जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। गुरुवार को उनके इस आमरण अनशन का 19वां दिन था। वांगचुक की मुख्य मांग शिक्षा मंत्री का इस्तीफा और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाना है। वांगचुक की सेहत की रोजाना हो क्लीनिकल मॉनिटरिंगसोनम वांगचुक के लगातार बिगड़ते स्वास्थ्य को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका (पीआईएल) दायर की गई थी, जिस पर गुरुवार को अदालत ने बड़ा आदेश जारी किया। अदालत की टिप्पणी: चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की खंडपीठ ने कहा कि हर नागरिक का जीवन अनमोल है और सरकार को इसे बचाने के लिए हर संभव प्रयास करने चाहिए। हाईकोर्ट का निर्देश: कोर्ट ने आदेश दिया है कि जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल के दौरान सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य की रोजाना क्लीनिकल मॉनिटरिंग (जांच) की जाए। अगर सरकारी डॉक्टरों की राय में किसी भी तरह के मेडिकल ट्रीटमेंट की जरूरत होती है, तो बिना किसी देरी के उन्हें तुरंत चिकित्सा सुविधा दी जाए। केंद्र सरकार ने कोर्ट को दिया भरोसासुनवाई के दौरान केंद्र और दिल्ली सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि सरकारी डॉक्टरों और चिकित्सा विशेषज्ञों की टीम पहले से ही रोजाना वांगचुक के स्वास्थ्य की निगरानी कर रही है। उन्होंने बेंच को भरोसा दिलाया कि यदि जरूरत पड़ी तो डॉक्टरों की एक और अतिरिक्त टीम भी तैनात की जा सकती है। कोर्ट ने सरकार के इस आश्वासन के बाद राकेश कुमार साहनी द्वारा दायर की गई इस जनहित याचिका का निपटारा कर दिया। recent visitors 49