संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने में जुटी कांग्रेस, जीतू पटवारी ने पदाधिकारियों को दिए चुनावी मंत्र

Congress gears up to strengthen the organization down to the booth level; Jitu Patwari shares election strategy with office-bearers. झाबुआ। मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने शुक्रवार को झाबुआ जिले में आयोजित संगठनात्मक प्रशिक्षण शिविर में पार्टी पदाधिकारियों को बूथ स्तर तक संगठन मजबूत करने का मंत्र दिया। शिविर में जिले के सभी ब्लॉक अध्यक्ष, नगर अध्यक्ष और मंडलम अध्यक्षों ने भाग लिया। इस अवसर पर पूर्व केंद्रीय मंत्री कांतिलाल भूरिया, आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष विक्रांत भूरिया, प्रशिक्षण विभाग के प्रभारी महेंद्र जोशी, झाबुआ जिला कांग्रेस अध्यक्ष प्रकाश रांका सहित कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता एवं पदाधिकारी मौजूद रहे। बूथ स्तर तक संगठन मजबूत करने पर जोर प्रशिक्षण शिविर को संबोधित करते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि कांग्रेस संगठन की असली ताकत कार्यकर्ता हैं। उन्होंने पदाधिकारियों से बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय और मजबूत बनाने का आह्वान किया, ताकि पार्टी की विचारधारा प्रत्येक गांव और हर मतदाता तक प्रभावी ढंग से पहुंच सके। जनसरोकारों के मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बैठक में महंगाई, बेरोजगारी, किसानों, युवाओं और आदिवासी समाज से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाने पर भी विस्तृत चर्चा हुई। नेताओं ने कहा कि कांग्रेस जनता के मुद्दों को लेकर लगातार संघर्ष करेगी और प्रत्येक कार्यकर्ता को जनता की आवाज बनने की जिम्मेदारी निभानी होगी। आगामी चुनावों को लेकर बनाई रणनीति शिविर में आगामी राजनीतिक चुनौतियों और चुनावी तैयारियों पर भी विस्तार से मंथन किया गया। नेताओं ने संगठन को अधिक प्रभावी, अनुशासित और सक्रिय बनाने के लिए प्रशिक्षण, संवाद और जनसंपर्क अभियान को तेज करने पर जोर दिया।प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि मजबूत संगठन ही कांग्रेस की सबसे बड़ी ताकत है और सभी पदाधिकारी पूरी ऊर्जा के साथ जनता के बीच जाकर पार्टी की नीतियों और विचारधारा को पहुंचाएं। recent visitors 37

10 अगस्त तक जमा करें चौरसिया प्रतिभा सम्मान हेतु प्रविष्टियाँ

Submit entries for the Chaurasia Pratibha Samman by August 10. विशेष संवाददाता: जितेन्द्र श्रीवास्तव अर्पिता श्रीवास्तव जबलपुर। चौरसिया समाज जबलपुर (पंजीयत) द्वारा परंपरानुसार आयोजित किए जा रहे 38वें “चौरसिया दिवस समारोह” के अवसर पर इस वर्ष भी समाज के मेधावी छात्र-छात्राओं एवं विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाली निस्वार्थ विभूतियों का सम्मान किया जाएगा। यह गरिमामयी समारोह रविवार, 23 अगस्त 2026 को दोपहर 2:00 बजे से शाम 7:00 बजे तक स्थानीय मानस भवन, राइट टाउन, जबलपुर में आयोजित होगा। समारोह संयोजक एम.आर. राहुल चौरसिया एवं समाज अध्यक्ष शिव कुमार चौरसिया ने समाजजनों से आग्रह किया है कि प्रतिभा सम्मान के लिए पात्र विद्यार्थियों एवं प्रतिभाओं की प्रविष्टियाँ सोमवार, 10 अगस्त 2026 तक अनिवार्य रूप से निर्धारित केंद्रों पर जमा कर दें। प्रतिभा सम्मान के लिए पात्रता के अनुसार नर्सरी से कक्षा 5वीं तक 70 प्रतिशत, कक्षा 6वीं से 8वीं तक 65 प्रतिशत तथा कक्षा 9वीं से महाविद्यालय स्तर तक 60 प्रतिशत या उससे अधिक अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त नीट, जेईई, पीएससी अथवा अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में चयनित अभ्यर्थियों तथा कला, संगीत, खेलकूद एवं अन्य क्षेत्रों में विशिष्ट उपलब्धि प्राप्त करने वाले समाज के प्रतिभाशाली व्यक्तियों को भी सम्मानित किया जाएगा। आवेदन के साथ संबंधित अंकसूची अथवा प्रमाण-पत्र की छायाप्रति संलग्न करना आवश्यक होगा। प्रत्येक प्रति के पीछे अभिभावक का नाम, पता एवं मोबाइल नंबर स्पष्ट रूप से अंकित होना चाहिए। समिति ने स्पष्ट किया है कि चौरसिया दिवस समारोह में दिए जाने वाले पुरस्कार प्रतिभागी स्वयं अथवा उनके परिजन मंच से ही प्राप्त करेंगे। समारोह समाप्त होने के बाद पुरस्कार प्रदान करने की जिम्मेदारी समिति की नहीं होगी।यह जानकारी मीडिया प्रभारी अनिकेत चौरसिया ने दी। recent visitors 32

भू-माफियाओं के हौसले बुलंद: मध्य प्रदेश के एकमात्र यहूदी कब्रिस्तान में तोड़फोड़ और कब्जे पर उठे सवाल

Land mafia emboldened: Questions raised over vandalism and encroachment at Madhya Pradesh’s only Jewish cemetery. विशेष संवाददाता: जितेंद्र श्रीवास्तव जबलपुर। मध्य प्रदेश का एकमात्र यहूदी कब्रिस्तान अब वैश्विक चर्चा में है। जबलपुर स्थित लगभग सौ वर्ष पुराने इस ऐतिहासिक स्थल पर कथित अतिक्रमण, तोड़फोड़ और भूमि कब्जे के आरोपों का मामला मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में विचाराधीन है। इसी बीच इजरायल में बसे भारतीय मूल के यहूदियों ने भी विरासत बचाने के लिए अपनी सरकार और राजनयिक मिशनों से हस्तक्षेप की मांग की है। इसके साथ ही यह विवाद स्थानीय सीमाओं से निकलकर अंतरराष्ट्रीय महत्व का विषय बन गया है। रानीताल की खामोश जमीन पर दफन इतिहास आज अदालत में संरक्षण की उम्मीद लगाए बैठा है। यह लड़ाई केवल कुछ कब्रों की नहीं, बल्कि उस साझा सांस्कृतिक विरासत की है, जिसने कभी जबलपुर को विविध आस्थाओं का सम्मान करने वाली संस्कारधानी के रूप में पहचान दिलाई है। अब निगाहें हाई कोर्ट की सुनवाई और प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं। यहूदी समुदाय की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता मनीष वर्मा ने बताया कि कब्रिस्तान की सुरक्षा, अतिक्रमण हटाने और विरासत संरक्षण संबंधी याचिका हाई कोर्ट में विचाराधीन है। ब्रिटिश शासनकाल में जबलपुर में करीब 200 यहूदी परिवार रहते थे। उनके अंतिम संस्कार के लिए तत्कालीन जिला प्रशासन ने लगभग पांच हजार वर्गफीट भूमि आवंटित की थी। आज इस परिसर में 100 से अधिक कब्रें हैं। स्थानीय मान्यता के अनुसार, इनमें कुछ ऐसे यहूदियों की कब्रें भी हैं, जिन्होंने ब्रिटिश भारतीय सेना में सेवा दी थी। आजादी के बाद अधिकांश परिवार इजराइल चले गए और अब शहर में केवल तीन-चार परिवार शेष हैं। उनका आरोप है कि भू-माफिया इस ऐतिहासिक स्थल पर कब्जे की कोशिश कर रहा है। recent visitors 68

भाजपा विधायक प्रीतम लोधी का बेटा विशेष अदालत से फरार घोषित, कोर्ट ने जारी किया स्थायी गिरफ्तारी वारंट

BJP MLA Pritam Lodhi’s son declared absconder by special court; court issues permanent arrest warrant. ग्वालियर। ग्वालियर की विशेष एससी-एसटी अदालत ने भाजपा विधायक प्रीतम सिंह लोधी के बेटे दिनेश लोधी को फरार घोषित करते हुए उसके खिलाफ स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी करने का आदेश दिया है। अदालत ने निर्देश दिए हैं कि प्रकरण के रिकॉर्ड के मुख्य पृष्ठ पर लाल स्याही से “अभियुक्त फरार है” अंकित किया जाए और प्रकरण को नियमानुसार सुरक्षित रखा जाए। दिनेश लोधी (40), निवासी ग्राम जलालपुर, के विरुद्ध पुरानी छावनी थाने में एससी-एसटी एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज है। न्यायालय के रिकॉर्ड के मुताबिक उसके खिलाफ 28 दिसंबर 2023 को गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया था, लेकिन उसके बाद भी वह पुलिस की पकड़ में नहीं आया। गुरुवार को सुनवाई के दौरान पुरानी छावनी थाने के प्रधान आरक्षक संजय द्विवेदी ने अदालत में वारंट की अदम तामील रिपोर्ट और तस्दीक पंचनामा पेश किया। रिकॉर्ड का परीक्षण करने के बाद विशेष न्यायाधीश नवीन कुमार शर्मा ने अभियुक्त को फरार घोषित करते हुए उसके खिलाफ स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी करने के आदेश पारित किए। recent visitors 38

दफ्तर के चक्करों से मुक्ति! अब आपकी ग्राम पंचायत में होगी जनसुनवाई, मौके पर निराकरण

No more running around to government offices! Public hearings will now be held in your Gram Panchayat, with on-the-spot resolution of issues. शहडोल ! अकसर देखा गया है कि लोग जनसुनवाई में दूर-दराज से आते हैं, लेकिन तब भी उनकी सुनवाई नहीं हो पाती. जिससे उन्हें बहुत परेशानी होती है. इसी को लेकर दूर दराज से आने वाले ग्रामीण क्षेत्रों के आमजन की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए शहडोल जिले के सोहागपुर ब्लॉक की एसडीएम अमृता गर्ग ने एक अनोखी पहल की है. जिसके तहत सोहागपुर अनुभाग के ग्राम पंचायतों में भी प्रत्येक मंगलवार को जनसुनवाई का आयोजन किया जाएगा. यहां ग्रामीणों की समस्याएं सुनी जाएंगी और मौके पर समाधान निकाला जाएगा. अब ग्राम पंचायत में जनसुनवाईसोहागपुर ब्लाक की एसडीएम अमृता गर्ग इन दिनों चर्चाओं में हैं. क्योंकि वो नित नए नवाचार कर रही हैं. इसी के तहत उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए उनके आने जाने में होने वाले तकलीफों का ध्यान रखते हुए अब गांव में ही जनसुनवाई कराने का फैसला किया है. जिसके तहत सुबह 11:00 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक ग्राम पंचायत स्तरीय जनसुनवाई आयोजित की जाएगी. जनसुनवाई में कौन-कौन होगा?एसडीएम अमृता गर्ग ने बताया है कि, ”जनसुनवाई में संबंधित ग्राम पंचायत के सचिव, हल्का पटवारी, राजस्व निरीक्षक, आशा कार्यकर्ता, महिला सुपरवाइजर सहित अन्य मैदानी अधिकारी उपस्थित रहेंगे. जनसुनवाई के दौरान लोगों की समस्याएं एवं शिकायतें सुनी जाएंगी और प्राप्त आवेदनों का यथासंभव मौके पर ही निराकरण किया जाएगा.” एसडीएम अमृता गर्ग ने बताया कि, ”ग्राम पंचायत में आयोजित होने वाली जनसुनवाई से आमजनों को अब अपनी समस्याओं के समाधान के लिए कमिश्नर या कलेक्टर कार्यालय तक आने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी. इससे समय और धन दोनों की बचत होगी और प्रशासन की सेवाएं सीधे गांव स्तर पर उपलब्ध हो सकेंगी. यदि किसी आवेदन का तत्काल निराकरण संभव नहीं होगा, तो संबंधित आवेदक को स्पष्ट रूप से बताया जाएगा कि समस्या के समाधान में कितना समय लगेगा और उसका निराकरण कब तक किया जाएगा.” recent visitors 77

200 करोड़ की शंकराचार्य प्रतिमा के निर्माण में सुरक्षा मानकों की अनदेखी, मुख्य पिलर में आया झुकाव, लोकायुक्त ने शुरू की जांच

Safety standards ignored in the construction of the ₹200-crore Shankaracharya statue; main pillar develops a tilt; Lokayukta initiates an investigation. भोपाल। ओंकारेश्वर में आदि गुरु शंकराचार्य की नव-निर्मित 108 फीट ऊंची प्रतिमा (स्टैच्यू ऑफ वननेस) के एक पिलर को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। इंटरनेशनल स्ट्रक्चरल एनालिसिस सॉफ्टवेयर (ईटीएबीएस) की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, इस विशाल प्रतिमा के मुख्य आंतरिक स्टील पिलर पर तय सीमा से करीब 24 प्रतिशत अधिक दबाव पड़ रहा है। मानकों के मुताबिक सुरक्षा का स्ट्रेस रेशियो 0.85 होना चाहिए, जो बढ़कर 1.244 तक पहुंच गया है। इस दबाव के कारण मुख्य पिलर में हल्का झुकाव भी देखा गया है। सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गई2,300 करोड़ रुपये के इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट में सुरक्षा और तकनीकी खामियों की शिकायत अब सीबीआई, लोकायुक्त और मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव तक पहुंच चुकी है। यह शिकायत प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंट (पीएमसी) के तत्कालीन फील्ड डायरेक्टर विश्वजीत बनर्जी ने दर्ज कराई है। बनर्जी का आरोप है कि वे पिछले 6 महीनों से मध्य प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम और निर्माण कंपनी एलएंडटी को लिखित में इस खतरे की चेतावनी दे रहे थे, लेकिन कोई सुधार नहीं किया गया। चौंकाने वाली बात यह है कि इस गंभीर गड़बड़ी को उजागर करने के बाद फील्ड डायरेक्टर विश्वजीत बनर्जी को उनके पदों से हटा दिया गया है। बता दें कि 200 करोड़ की इस प्रतिमा को 140 से 170 किमी/घंटा की रफ्तार वाली हवाओं को झेलने के लिए डिजाइन किया गया था, लेकिन जांच के अनुसार यह 120 किमी/घंटा की हवा भी नहीं झेल सकती। फिलहाल इंदौर लोकायुक्त कार्यालय ने इस मामले की जांच शुरू करते हुए शिकायतकर्ता से सभी जरूरी दस्तावेज मांगे हैं। अधिकारियों का पक्षइस मामले पर आदि शंकराचार्य न्यास के सीईओ डॉक्टर मनीष पांडेय का कहना है कि एकात्म धाम प्रोजेक्ट का संचालन पर्यटन विभाग द्वारा हो रहा है, इसलिए इस विषय पर पर्यटन निगम ही बात कर सकता है। वहीं, मप्र पर्यटन विकास निगम के एमडी दिलीप यादव ने निर्माण में किसी भी तरह की कमी से साफ इनकार किया है। उनका दावा है कि विशेषज्ञों की देखरेख में काम हुआ है और गुणवत्ता में किसी लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं है। recent visitors 128

भड़काऊ पोस्ट करने वाले कर्मचारियों पर कसा शकंजा मप्र सरकार ने जारी किया फरमान

Employees who post inflammatory posts are being prosecuted. The Madhya Pradesh government has issued a decree. भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर कड़े नियम जारी किए हैं। अब भड़काऊ पोस्ट, राजनीतिक कमेंट या विवादित चीजें शेयर करने पर कड़ी विभागीय और कानूनी कार्रवाई होगी। मध्यप्रदेश में सरकारी कर्मचारियों की सोशल मीडिया गतिविधियों पर अब सरकार की सीधी नजर रहेगी। सामान्य प्रशासन विभाग ने इस बारे में विस्तृत आदेश जारी किया है। आदेश में साफ कहा गया है कि कोई भी शासकीय सेवक ऐसी सामग्री साझा नहीं करेगा, जिससे सामाजिक वैमनस्य फैलने का खतरा हो। सरकार ने इसे शासकीय सेवा आचरण का जरुरी हिस्सा बताया है। फेसबुक, एक्स, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप और यूट्यूब सभी प्लेटफॉर्म आदेश के दायरे में आते हैं। किसी धर्म, जाति या समुदाय के खिलाफ घृणा फैलाने वाली सामग्री पोस्ट करना सख्त मना है। खास बात यह है कि सिर्फ पोस्ट करना ही नहीं, विवादित सामग्री को लाइक, शेयर या फॉरवर्ड करना भी नियम उल्लंघन माना जाएगा। यानी कर्मचारियों को अब सोशल मीडिया पर हर एक्टिविटी में सतर्क रहना होगा। आदेश के मुताबिक कोई भी सरकारी कर्मचारी सोशल मीडिया पर किसी राजनीतिक दल के समर्थन या विरोध में प्रचार नहीं करेगा। किसी राजनीतिक अभियान पर सार्वजनिक टिप्पणी करना भी नियम विरुद्ध होगा। सरकार ने इसे मध्यप्रदेश सिविल सेवा आचरण नियमों का सीधा उल्लंघन बताया है। इसका मकसद प्रशासनिक तटस्थता बनाए रखना है। इसके अलावा विभाग ने कर्मचारियों को सोशल मीडिया पर होने वाली बहस और क्रॉस-कमेंट से भी दूर रहने को कहा है। तर्क है कि किसी भी सार्वजनिक टिप्पणी को सीधे सरकार की छवि से जोड़ा जाता है। इसलिए कर्मचारियों से संयम और जिम्मेदारी के साथ सोशल मीडिया इस्तेमाल करने की अपेक्षा की गई है। यह सलाह हर स्तर के कर्मचारी पर लागू होगी। सामान्य प्रशासन विभाग ने चेतावनी दी है कि उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी। इसमें मप्र सिविल सेवा आचरण नियम, 1965 और भारतीय न्याय संहिता दोनों लागू हो सकते हैं। यानी सिर्फ विभागीय कार्रवाई ही नहीं, कानूनी कार्रवाई का भी सामना करना पड़ सकता है। सभी विभागाध्यक्षों को आदेश का तुरंत पालन कराने के निर्देश दिए गए हैं। सामान्य प्रशासन विभाग ने चेतावनी दी है कि उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी। इसमें मप्र सिविल सेवा आचरण नियम, 1965 और भारतीय न्याय संहिता दोनों लागू हो सकते हैं। यानी सिर्फ विभागीय कार्रवाई ही नहीं, कानूनी कार्रवाई का भी सामना करना पड़ सकता है। सभी विभागाध्यक्षों को आदेश का तुरंत पालन कराने के निर्देश दिए गए हैं। इस आदेश के बाद प्रदेश के लाखों सरकारी कर्मचारियों को अपनी सोशल मीडिया गतिविधियों पर पुनर्विचार करना होगा। recent visitors 39