मणिपुर चुनाव अपडेट: भाजपा सरकार के बने रहने की संभावना, CM पद की दौड़ में यह नेता और डिप्टी

इम्फाल क्या मणिपुर में फिर से भाजपा की सरकार बनेगी? इसके कयास तेज हो गए हैं क्योंकि भाजपा में मणिपुर से लेकर दिल्ली तक भागदौड़ तेज हो गई है। मणिपुर के 20 से ज्यादा भाजपा विधायक दिल्ली पहुंचे थे और अब पार्टी ने विधायक दल का नेता चुनने के लिए पर्यवेक्षक नियुक्त कर दिया है। राज्य में अगले साल ही राष्ट्रपति शासन खत्म होने वाला है और उससे पहले पार्टी के नेता चाहते हैं कि सरकार बना ली जाए। सोमवार को भाजपा ने मणिपुर में पर्यवेक्षक के तौर पर तरुण चुग को नियुक्त कर दिया है, जो पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव हैं। अब किसी भी दिन मणिपुर में एनडीए विधायकों की मीटिंग हो सकती है और नेता का चुनाव हो सकता है। भाजपा सूत्रों का कहना है कि नई सरकार में राज्य में एक डिप्टी सीएम भी होगा। मैतेई समुदाय से मुख्यमंत्री बनने की संभावना है तो वहीं कुकी समुदाय के किसी नेता को डिप्टी सीएम के तौर पर जिम्मेदारी दी जा सकती है। ऐसा इसलिए ताकि राज्य में यह संदेश जाए कि सरकार सभी को साथ लेकर चल रही है। बीते सालों में मैतेई और कुकी समुदाय के बीच तनाव देखा गया था और भीषण हिंसा हुई थी। इसी स्थिति से बचाव के लिए भाजपा अब कुकी समाज से एक डिप्टी सीएम बना सकती है। अब बात मुख्यमंत्री की करें तो बीरेन सिंह की सरकार में असेंबली स्पीकर रहे सत्यब्रत सिंह और पूर्व मंत्री टीएच बिस्वजीत सिंह और के. गोविंद दास को मौका मिल सकता है। ये सभी नेता मैतेई समुदाय के ही हैं। दरअसल भाजपा के भीतर भी तनाव की स्थिति है। कुकी विधायकों का कहना है कि उनके समुदाय का दबाव है। ऐसी स्थिति में यदि कुकी समुदाय को उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिला तो उनके लिए सरकार का हिस्सा बनना मुश्किल होगा। ऐसी मांग कुकी विधायकों ने केंद्रीय नेतृत्व से की है। इसी को लेकर सरकार अब विचार कर रही है। यही नहीं कुछ विधायकों का कहना है कि मणिपुर को केंद्र शासित प्रदेश ही बना देना चाहिए, जिसकी अपनी विधानसभा भी हो। एक साल से मणिपुर में चल रहा है राष्ट्रपति शासन बता दें कि मणिपुर में पहली बार 13 फरवरी 2025 को राष्ट्रपति शासन लागू किया था। यह 6 महीने के लिए ही था और फिर अगस्त 2025 में एक बार फिर से इसे 6 महीने के लिए बढ़ा दिया गया। एन. बीरेन सिंह ने बीते साल फरवरी में ही सीएम पद छोड़ दिया था। बता दें कि मणिपुर में विधानसभा का कार्यकाल 2027 तक है। ऐसे में विधायक चाहते हैं कि कम से कम एक साल के लिए ही नए सिरे से सरकार का गठन हो और कुछ काम करके ही जनता के बीच चुनाव में जाया जाए। फिलहाल 60 सीटों वाले मणिपुर सदन में भाजपा के 37 विधायक हैं। recent visitors 50

फिर 5200 करोड़ रूपए कर्ज ले रही मोहन सरकार, सिर्फ एक वित्तीय वर्ष में ले चुकी 62,300 करोड़

फिर 5200 करोड़ रूपए कर्ज ले रही मोहन सरकार, सिर्फ एक वित्तीय वर्ष में ले चुकी 62,300 करोड़

Mohan Bhagwat government is taking another ₹5,200 crore loan, having already borrowed ₹62,300 crore in just one financial year. Mohan Government : मोहन सरकार एक बार फिर 5200 करोड़ का कर्ज ले रही है। साल 2026 में सरकार दूसरी बार ऋण लेने जा रही है। जबकि चालू वित्तीय वर्ष में ये कर्ज 57,100 करोड़ लिया जा चुका हैं। इस तरह नया कर्ज मिलाकर इसी चालू वर्ष में कुल 62,300 करोड़ रुपए का हो जाएगा। Mohan Government :मध्य प्रदेश की मोहन सरकार एक बार फिर 5200 करोड़ का कर्ज लेने जा रही है। साल 2026 में सरकार दूसरी बार ऋण लेने जा रही है। जबकि चालू वित्तीय वर्ष में ये कर्ज 57,100 करोड़ लिया जा चुका हैं। इस तरह नया कर्ज लेने के बाद अब ये इसी चालू वर्ष में कुल 62,300 करोड़ रुपए का हो जाएगा। बता दें कि, राज्य सरकार साल 2026 में ही दूसरी बार कर्ज ले रही है। इस बार 7 फरवरी को 5200 करोड़ की राशि मिलेगी, जिसकी पहली किस्त 1200 करोड़ रुपए 7 साल के लिए ब्याज समेत भुगतान की तारीख 4 फरवरी 2033 तारीख की है। 2000 करोड़ का कर्ज 17 साल के लिए लिया जा रहा है जो 4 फरवरी 2043 तक के लिए है। जबकि, तीसरी किस्त 2000 करोड़ रुपए 22 साल की अवधि में ब्याज के साथ चुकता किया जाएगा। सिर्फ एक चालू वर्ष में ही 62,300 करोड़ कर्जआपको बता दें कि, मध्य प्रदेश सरकार ने चालू वित्त वर्ष में 57,100 करोड़ का कर्ज ले चुकी है। 5200 करोड़ का कर्ज लेने के बाद यह आंकड़ा 62,300 करोड़ रुपए पहुंच जाएगा। वित्तीय वर्ष 2025-26 में कब-कब लिया गया कर्ज recent visitors 63

भव्य शैला महोत्सव में उमड़ा उत्साह, विधायक नारायण सिंह पट्टा ने लोगों को किया प्रेरित

शैला महोत्सव का भव्य आयोजन, विधायक नारायण सिंह पट्टा ने बढ़ाया उत्साह ख़मतरा में शैला महोत्सव की धूम, विधायक नारायण सिंह पट्टा ने दिखाई सहभागिता भव्य शैला महोत्सव में उमड़ा उत्साह, विधायक नारायण सिंह पट्टा ने लोगों को किया प्रेरित     ख़मतरा  आदिवासी समाज की गौरवशाली विरासत और परंपराओं को सहेजने के उद्देश्य से 1 फरवरी को पैतृक ग्राम ख़मतरा (घुघरी) में 'शैला महोत्सव' का गरिमामय आयोजन किया गया। रात्रि 9 बजे आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में क्षेत्रीय विधायक श्री नारायण सिंह पट्टा उपस्थित रहे। संस्कृति और परंपरा का अनूठा संगम महोत्सव के दौरान पूरा वातावरण आदिवासी संस्कृति के रंगों में सराबोर नजर आया। ढोल और मांदर की थाप पर थिरकते नर्तक दलों ने अपनी कला से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस अवसर पर विधायक पट्टा ने समाज के लोगों के साथ मिलकर अपनी जड़ों और रीति-रिवाजों का उत्सव मनाया। एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को विरासत सौंपने का पर्व उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए यह संदेश दिया गया कि हमारी नृत्य कलाएं, उत्सव और परंपराएं केवल मनोरंजन का साधन नहीं हैं। बल्कि, ये वे अनमोल क्षण हैं जब हम अपनी सांस्कृतिक धरोहर को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को सौंपते हैं। यह महोत्सव हमारी पहचान को जीवित रखने और युवाओं को अपने मूल से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम बना।  * पारंपरिक शैला नृत्य: नर्तक दलों द्वारा अनुशासन और तालमेल का अद्भुत प्रदर्शन।  * रीति-रिवाज का संरक्षणसमाज की प्राचीन परंपराओं का जीवंत चित्रण।  * एकता का संदेश: 'जय सेवा' और 'जय जोहार' के उद्घोष से गूंजा आयोजन स्थल। recent visitors 33

21 दिन, एक बड़ी बाज़ी! India-US डील के पीछे जिस शख्स ने पलट दिया पूरा खेल

 नई दिल्ली    भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता हो गया है. पिछले करीब 10 महीने से टैरिफ को लेकर खींचतान चल रही थी, कई बार दोनों देशों के रिश्तों में तनाव भी देखने को मिला. लेकिन दोनों देशों के बीच बातचीत नहीं रुकी. बीच-बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना प्रिय मित्र बताते रहे, बदले में पीएम मोदी भी ट्रंप को अपना दोस्त कहते रहे.  दरअसल अमेरिका ने पहली बार अप्रैल में भारत पर 25 फीसदी टैरिफ लगाया, फिर रूसी तेल खरीदने का आरोप लगाकर 25 फीसदी अतिरिक्त पेनॉल्टी थोप दिया. जिससे भारत पर कुल टैरिफ बढ़कर 50 फीसदी हो गया था. लेकिन अब भारत को लेकर ट्रंप ने अपनी सच्ची दोस्ती दिखाई और टैरिफ को घटाकर केवल 18 फीसदी कर दिया है.  डील के पीछे इस शख्स की बड़ी भूमिका टैरिफ को लेकर दोनों देशों के बीच लगातार बैठकें चल रही थीं. लेकिन जब से सर्जियो गोर ने भारत में अमेरिकी राजदूत का पद संभाला, तब से ट्रेड डील को लेकर धीरे-धीरे तस्वीरें साफ होने लगीं. सर्जियो गोर ने अमेरिकी राजदूत (United States Ambassador to India) का पद 12 जनवरी 2026 को संभाला था.  उन्होंने पद संभालते ही कहा था कि भारत और अमेरिका के बीच सबकुछ All Is Well है, उन्होंने कहा कि बातचीत सकारात्मक दिशा में चल रही है, जल्द अच्छे परिणाम आने वाले हैं, भारत और अमेरिका के बीच रिश्ते बेहद अच्छे हैं, दोनों देश एक-दूसरे को तरजीह देते हैं.  इससे पहले गोर व्हाइट हाउस प्रेसिडेंशियल पर्सनल ऑफिस के डायरेक्टर थे, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भरोसेमंद सहयोगी माने जाते हैं. ट्रंप ने भारत की कमान उन्हें ऐसे समय पर सौंपी, जब भारत–अमेरिका के रिश्तों में टैरिफ और व्यापार मुद्दों को लेकर तनाव बढ़ रहा था.  राजदूत के पद पर नियुक्ति के तुरंत बाद गोर ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता (trade deal) की बातचीत जारी है और दोनों देशों को इसे अंतिम रूप देने पर मिलकर काम करना चाहिए. अपने नियुक्त के अगले दिन यानी 13 जनवरी 2026 को ही भारत और अमेरिका के अधिकारियों के बीच ट्रेड डील पर बातचीत के संकेत दिए थे. उसके बाद उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच करीब 7 दौर की बैठकें हो चुकी हैं, और सबकुछ सकारात्मक दिशा में है. दोनों देशों के बीच रिश्ते बेहतर: सर्जियो गोर  इस बीच सर्जियो गोर (Sergio Gor) की नियुक्ति के 21वें दिन ही भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील का ऐलान हो गया है. कहा जा रहा है कि इस डील को अंतिम रूप देने में अमेरिकी राजदूत की बड़ी भूमिका रही है, क्योंकि ये डोनाल्ड ट्रंप के बेहद करीबी हैं और उन्हें ये जिम्मेदारी दी गई थी.  गोर ने अपने पहले बड़े सार्वजनिक संबोधन में कहा था कि कोई भी साझेदार भारत जितना महत्वपूर्ण नहीं है और भारत-अमेरिका का रिश्ता इस सदी की सबसे महत्वपूर्ण वैश्विक साझेदारी है. उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों देशों को व्यापार के साथ-साथ सुरक्षा, तकनीक, ऊर्जा और शिक्षा जैसे अन्य क्षेत्रों में भी मजबूत सहयोग की आवश्यकता है.  ट्रेड डील को लेकर गोर का बयान डील के ऐलान के बाद गोर ने कहा कि भारत और अमेरिका के रिश्तों में अनंत संभावनाएं हैं और यह समझौता दोनों के लिए एक लैंडमार्क क्षण है. उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप भी वास्तव में प्रधानमंत्री मोदी को एक सच्चा मित्र मानते हैं, और इसी व्यक्तिगत भरोसे ने व्यापार वार्ता को तेजी से आगे बढ़ाया है.  गोर ने कहा कि डील के तहत भारतीय वस्तुओं पर लगने वाला टैरिफ पहले के 50% से घटकर 18% हो गया है, जो दोनों देशों के सहयोग को आसान बनाता है और व्यापारिक तनाव को कम करता है.  recent visitors 50

भारत में कनाडा का ट्रेड मिशन, कारोबार और निवेश के नए अवसरों की खोज में

नई दिल्ली   कनाडा के न्यू ब्रंसविक प्रांत से एक ट्रेड मिशन  6 फरवरी, 2026 तक भारत आएगा। इसका मकसद दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते मार्केट में से एक में कमर्शियल संबंधों को मजबूत करना और साझेदारी के नए मौके तलाशना है। बता दें, कनाडा के पूर्व पीएम जस्टिन ट्रूडो के कार्यकाल में भारत के साथ इसके तनाव में कड़वाहट देखने को मिली थी। हालांकि, वर्तमान पीएम मार्क कार्नी के शासन में भारत-कनाडा के संबंधों में सुधार देखने को मिल रहा है। कनाडा भारत के साथ अपने बिगड़े हुए संबंधों को सुधारने की पहल कर रहा है। कनाडाई ट्रेड मिशन का भारत आना उन्हीं पहलों में से एक है। इस मिशन को अपॉर्चुनिटीज न्यू ब्रंसविक (ओएनबी) का समर्थन है और यह उस व्यापार पर फोकस करेगा जो अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विविधता लाना चाहते हैं, भारत में विस्तार करना चाहते हैं और नई कमर्शियल और सप्लाई-चेन साझेदारी विकसित करना चाहते हैं। लक्षित बिजनेस-टू-बिजनेस मीटिंग, मार्केट ब्रीफिंग और ऑन-द-ग्राउंड समर्थन के जरिए हिस्सा लेने वाली कंपनियों को संभावित खरीदारों, साझेदारों और निर्णय लेने वालों तक सीधी पहुंच मिलेगी। यह मिशन भारतीय बाजार के लिए न्यू ब्रंसविक की लंबे समय की प्रतिबद्धता को मजबूत करता है और प्रांत की इन-मार्केट उपस्थिति को बढ़ाता है। इससे कंपनियों को स्थानीय व्यापार के माहौल में आगे बढ़ने और विकास के अवसर पहचानने में मदद मिलती है। यह ओएनबी के मार्च 2025 के भारत के व्यापार मिशन की सफलता पर भी आधारित है। इसमें व्यापार संबंधों को गहरा करने, निर्यात बढ़ोतरी को समर्थन करने और न्यू ब्रंसविक को व्यापार और निवेश के लिए एक कॉम्पिटिटिव और भरोसेमंद साझेदार के तौर पर स्थापित करने पर लगातार केंद्रित किया गया है। ल्यूक रैंडल, अपॉर्चुनिटीज एनबी और आर्थिक विकास और छोटे बिजनेस के लिए जिम्मेदार मंत्री हैं। वह इस मिशन को लीड करेंगे। रैंडल ने कहा, “वैश्विक व्यापार ऑर्डर तेजी से बदल रहे हैं, और न्यू ब्रंसविक भारत जैसे खास मार्केट के साथ अपने जुड़ाव को और मजबूत कर रहा है। हमारा प्रांत भारत में आर्थिक अवसरों को पहचानने वाला अकेला नहीं है, बल्कि हम इन-मार्केट टीम वाला अकेला अटलांटिक प्रांत हैं और इसके नतीजे में हमने मजबूत साझेदारी बनाई हैं जो नए अवसरों के दरवाजे खोल रही हैं जो लंबे समय की विकास, विविधता और रेसिलिएंस का समर्थन करती हैं।” इस मिशन में चार न्यू ब्रंसविक कंपनियां और एक एकेडमिक इंस्टिट्यूशन शामिल हैं, जो एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, एग्री-फूड, एडटेक, एजुकेशनल और प्रोफेशनल सेवाएं और एकेडमिक रिसर्च जैसे खास सेक्टर का प्रतिनिधित्व करते हैं। अपॉर्चुनिटीज एनबी, कनाडा के न्यू ब्रंसविक प्रांत के लिए लीड बिजनेस डेवलपमेंट एजेंसी है। यह स्थानीय व्यापार का समर्थन करता है और आर्थिक और जॉब ग्रोथ को बढ़ावा देने के लिए दुनिया भर से नया निवेश आकर्षित करता है। recent visitors 45

3.72 करोड़ का शिक्षा विभाग घोटाला मैहर में, स्कूल निर्माण के लिए किए गए वित्तीय कुप्रबंधन का पर्दाफाश

मैहर  मध्य प्रदेश के मैहर जिले में स्कूलों में लघु निर्माण कार्य जैसे पार्किंग शेड और साइकिल स्टैंड बनाने के नाम पर हुए 3.72 करोड़ रुपये के कथित घोटाले की जांच शुरू हो गई है. दरअसल खबर प्रसारित होने के बाद प्रशासन हरकत में आया और कलेक्टर के निर्देश पर एसडीएम के नेतृत्व में पांच सदस्यीय जांच दल गठित कर दिया गया. जांच में सामने आया कि जिन स्कूलों में लाखों रुपये का भुगतान दिखाया गया, वहां ज़मीन पर कोई ठोस निर्माण कार्य नजर ही नहीं आया. जांच टीम को क्या मिला? एसडीएम एस.पी. मिश्रा के नेतृत्व में बनी टीम ने कई स्कूलों का भौतिक सत्यापन किया. टीम में संदीपनी विद्यालय मैहर के प्राचार्य दिनेश गोस्वामी, तहसीलदार ललित धार्वे, बीईओ राजेश द्विवेदी, बीआरसीसी चंद्र प्रताप शुक्ला, सहायक लेखपाल विनय सिंह और पटवारी आनंद पांडेय शामिल थे. टीम ने पाया कि अधिकांश स्कूलों में सिर्फ रंगाई-पुताई दिखाई दी, जबकि पार्किंग शेड और साइकिल स्टैंड जैसे निर्माण कार्य का कोई प्रमाण नहीं मिला. किन फर्मों को हुआ भुगतान जांच में सामने आया कि भोपाल की वाणी इंफ्रास्ट्रक्चर, मैहर की श्री रुद्र इंटरप्राइजेज और सतना की श्री महाकाल ट्रेडर्स को करोड़ों रुपये का भुगतान किया गया. विभिन्न स्कूलों से 21 लाख से 24 लाख रुपये तक के बिलों का भुगतान दर्शाया गया है. कुल मिलाकर 17 स्कूलों में लगभग 3 करोड़ 72 लाख रुपये के बिल पास किए गए.  फर्जी हस्ताक्षरों की आशंका कई प्राचार्यों का कहना है कि उन्होंने न तो कोई वर्क ऑर्डर जारी किया और न ही ऐसे किसी बिल को मंजूरी दी. इससे फर्जी हस्ताक्षरों और दस्तावेजी हेराफेरी की आशंका गहरा गई है. प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, इस मामले में आपराधिक प्रकरण दर्ज होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. जांच समिति ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट कलेक्टर को सौंप दी है. रिपोर्ट में संबंधित फर्मों के साथ-साथ लगभग 14 प्राचार्यों की भूमिका की जांच की सिफारिश की गई है. माना जा रहा है कि जल्द ही निलंबन, एफआईआर और वित्तीय वसूली जैसी कड़ी कार्रवाई हो सकती है. फिलहाल, मामला संभागीय स्तर तक पहुंच चुका है और आगे की कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं. recent visitors 42

भोपाल मंडल का बड़ा कदम: 9 महीनों में ट्रैक कायाकल्प से सुरक्षित सफर की तैयारी

भोपाल  पश्चिम मध्य रेल के भोपाल मंडल में अधोसंरचना विकास के साथ-साथ अनुरक्षण कार्यों को प्राथमिकता देते हुए रेलवे ट्रैक नवीनीकरण का कार्य तेजी से किया जा रहा है। पंकज त्यागी के मार्गदर्शन में इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के समन्वित प्रयासों से ट्रैक अनुरक्षण से जुड़े संरक्षा-आधारित कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। भोपाल मंडल में कंप्लीट ट्रैक रिन्यूअल (सीटीआर), थ्रू रेल रिन्यूअल (टीआरआर), थ्रू स्लीपर रिन्यूअल (टीएसआर), थ्रू टर्नआउट रिन्यूअल (टीटीआर) तथा डीप स्क्रीनिंग जैसे महत्वपूर्ण कार्य आवश्यक ट्रैफिक ब्लॉक लेकर उच्च संरक्षा मानकों के अनुरूप निष्पादित किए जा रहे हैं। नौ माह में हुआ व्यापक ट्रैक नवीनीकरण वित्तीय वर्ष 2025-26 के अप्रैल से दिसंबर तक नौ माह की अवधि में 100.741 ट्रैक किलोमीटर में सीटीआर, 121.23 ट्रैक किलोमीटर में टीआरआर, 80.245 ट्रैक किलोमीटर में टीएसआर तथा 80.250 समतुल्य यूनिट्स में टीटीआर का कार्य पूर्ण किया गया है। इसके अतिरिक्त 55 टर्नआउट्स एवं 168.391 ट्रैक किलोमीटर प्लेन ट्रैक की डीप स्क्रीनिंग भी की गई।   recent visitors 45