बिना काम के मोहन सरकार का एक साल पूरा… बधाई कौन देगा?

भोपाल ! मध्यप्रदेश में 13 दिसंबर 2023 को भाजपा ने डॉ. मोहन यादव को प्रदेश की कमान सौंपी। एक साल के कार्यकाल में मोहन यादव ने कई मायनों में यह साबित कर दिया कि उन्हें मुख्यमंत्री बनाने का भाजपा का फैसला दूरदर्शी था। चुनौतियां कई थीं, पर उन्होंने काल के प्रवाह में इन फैसलों को मजबूती में बदलकर नेतृत्व के फैसले को सही साबित किया। शहर से ग्रामीण व्यवस्था तक हर मोर्चे पर सरकार ने अपना विजन बनाकर काम शुरू किया। जो काम प्रदेश में 20 साल में भी नहीं हुए थे उन पर सरकार ने सबसे ज्यादा फोकस किया। 27 नवंबर2500 करोड़ का कर्ज 20 साल के लिए2055 करोड़ का कर्ज 14 साल के लिए9 अक्टूबर2500 करोड़ का कर्ज 11 साल के लिए2500 करोड़ का कर्ज 19 साल के लिए25 सितंबर2500 करोड़ का कर्ज 12 साल के लिए2500 करोड़ का कर्ज 19 साल के लिए28 अगस्त2500 करोड़ का कर्ज 14 साल के लिए2500 करोड़ का कर्ज 21 साल के लिएऔर 28 अगस्त को ही2500 करोड़ का कर्ज 11 साल के लिए2500 करोड़ का कर्ज 21 साल के लिए नर्सिंग घोटाले के बाद नर्सिंग शिक्षा पर लगा कलंक मिटाना। कॉलेज कम हुए। परीक्षाएं समय पर नहीं हो सकीं। हालांकि अब परीक्षाएं शुरू हुई हैं। परीक्षाएं न होने से नर्सिंग स्टाफ कम हुआ है। कोर्ट की निगरानी में जांच जारी है। कई कॉलेजों की मान्यता समाप्त हो चुकी है। घोटाले को लेकर छात्र संगठन भी मुखर हैं। वर्ष 2016 से राज्य के अधिकारी और कर्मचारियों का प्रमोशन नहीं हो रहा। हाईकोर्ट ने पदोन्नति नियम निरस्त कर दिए हैं। सरकार के इस दिशा में प्रयास नाकाफी रहे। प्रमोशन का इंतजार करते-करते एक लाख से ज्यादा कर्मचारी रिटायर हो गए, लेकिन प्रमोशन का रास्ता नहीं निकला। इससे कर्मी नाराज हैं। मोहन सरकार ने एक लाख पदों पर नियुक्तियों का वादा किया है, प्रक्रिया दिसंबर तक शुरू होनी थी, लेकिन ज्यादातर विभागों में कागजी घोड़े ही दौड़ रहे हैं। खाली पदों की जानकारी भी नहीं भेज पाए हैं। विभागों में नियुक्तियां न होने से होने युवा ओवरएज हो रहे हैं। युवा आंदोलनरत भी हैं। आय से ज्यादा राज्य में खर्च है। कर्ज का बोझ बढ़ा है। लगातार कर्ज लेने का नतीजा यह है कि बजट से ज्यादा कर्ज हो गया है। कर्ज का बोझ कम करने के उपाय खोजे जा रहे हैं। सरकार में फिजूलखर्ची पर रोक लगाई गई है, लेकिन सकारात्मक परिणाम नहीं दिख रहे। राज्य में बढ़ते अपराध बड़ी चुनौती हैं। अपराधों के नए तरीके आने से लोग चिंतित हैं। साइबर क्राइम भी चुनौती है। इससे निपटने के लिए सरकार प्रयास कर रही है, लेकिन पुलता इंतजाम नहीं हो पाए हैं। लोगों को जागरूक किया जा रहा है। विपक्षी दल कांग्रेस इसको लेकर सरकार की लगातार घेराबंदी कर रही है। शहरों में बढ़ता प्रदूषण स्वास्थ्य के लिए खतरे की घंटी है। चिंता यह है कि यदि प्रदूषण इसी तरह बढ़ता रहा तो कहीं दिल्ली जैसी हालत न बन जाएं, उसे रोकना किसी चुनौती से कम नहीं। प्रदूषण रोकने के लिए बजट में लगातार प्रावधान किया जा रह है, लेकिन धरातल पर यह नजर नहीं आता। 4000 वकीलों के सामने मुलयमंत्री ने वकीलों के हित के लिए घोषणा की थी। यह सरकार महज घोषणा करना जानती है, वादा पूरा नहीं करती। इसलिए सरकार के कामकाज से संतुष्ट नहीं हैं। एडवोकेट प्रोटेशन एट भी लागू नहीं किया है।-पवन पाठक, अध्यक्ष, हाईकोर्ट बार एसो. ग्वालियर नया चेहरा होने के बावजूद सीएम डॉ. मोहन यादव ने शासन-प्रशासन पर मजबूत पकड़ बनाई है। औद्योगिक निवेशक लाने के लिए देश-विदेश में दौरों के भविष्य में अच्छे परिणाम दिखेंगे। शहरों में सड़क कनेक्टिविटी के लिए काम हो रहा है।-संजय गोरानी, सचिव यशवंत क्लब इंदौर सरकार ने आदिवासी बहुल क्षेत्रों में रोजगार के अवसर प्रदान करने एमएसएमई, स्टार्टअह्रश्वस और कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देने के प्रयास किए हैं। आदिवासी परिवारों को मुलयधारा से जोडऩे के लिए उठाए गए कदमों के परिणाम देखने को मिल रहे हैं। -संजीव कुमार बैगा, युवा, शहडोल recent visitors 287

झांसी में मुफ्ती खालिद पूछताछ के बाद छोड़ा, टीम पर हमला करने वाले 110 लोगों पर ऐक्शन

झांसी झांसी में एनआईए व एटीएस की संयुक्त कार्यवाही के दौरान पूछताछ के लिए हिरासत में लिए गए मुफ्ती मोहमद खालिद को एनआईए ने छोड़ा दिया। वहीं घर में छापेमारी और पूछताछ के लिए हिरासत में ले जाने पर समर्थकों द्वारा धक्का मुक्की कर मुफ्ती को छुड़ाने के मामले में कोतवाली पुलिस ने 110 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। इस सभी टीम पर हमला करने का आरोप है। विदेशी फंडिंग के मामले में मुफ्ती मोहम्मद खालिद के घर गुरुवार तड़के सुबह एनआईए व एटीएस ने छापामारी की थी। पूछताछ कर जांच में मिले दस्तावेज जब्त कर जांच एजेंसियां खालिद को हिरासत में लेकर जा रही थी। इसी दौरान मोहल्ले वासियों के साथ समर्थकों ने जांच एजेंसी को घेरकर धक्का मुक्की कर खालिद को छुड़ाकर मस्जिद के अंदर ले गई। इस मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए महिलाओं सहित 110 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। सीओ सिटी रामवीर सिंह ने बताया कि महिलाओं सहित 110 लोगों पर मामला दर्ज कर कार्रवाई की जा रही है। recent visitors 73

संविधान दिवस पर चर्चा के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आज कांग्रेस पार्टी पर जमकर हमले बोले

नई दिल्ली संविधान दिवस पर चर्चा के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आज कांग्रेस पार्टी पर जमकर हमले बोले। उन्होंने कहा कि आज लोग संविधान की रक्षा की बात कर रहे हैं। लेकिन ये समझने की जरूरत है कि किसने संविधान का सम्मान किया है और किसने अपमान किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी के शासनकाल में कुल 62 बार संविधान संशोधन किया गया। अब तक 62 बार संशोधन राजनाथ ने सत्ता पक्ष की तरफ से बहस की शुरुआत करते हुए कहा कि आजाद भारत के इतिहास को देख लीजिए। कांग्रेस ने न केवल संविधान संशोधन किया है बल्कि दुर्भावना के साथ-साथ धीरे-धीरे संविधान को बदलने का प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि पंडित जवाहर लाल नेहरू जब देश के पीएम थे,तो उस समय लगभग 17 बार संविधान में बदलाव किया गया। इंदिरा गांधी के समय लगभग 28 बार संविधान में बदलाव किए गए। राजीव गांधी के समय लगभग 10 बार और मनमोहन सिंह के वक्त 7 बार संविधान में बदलाव किया गया। प्रेस पर भी किया हमला राजनाथ सिंह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकारों द्वारा किए गए अधिकांश संविधानिक संशोधन या तो विरोधियों और आलोचकों को चुप कराने के लिए किए गए या तो गलत नीतियों को लागू करने के लिए किए गए। उन्होंने कहा कि आप पहले संविधान संशोधन को ही ले लीजिए, साल 1950 में प्रेस में कांग्रेस सरकार की गलत नीतियों की आलोचना हो रही थी। ऐसे में तब की कांग्रेस की सरकार ने आरएसएस के साप्ताहिक प्रकाशन ऑर्गेनाइजर और मद्रास से निकलने वाली पत्रिका क्रॉस रोड को प्रतिबंधित कर दिया था। एक पूर्व जस्टिस का राजनाथ ने किया जिक्र राजनाथ ने कहा कि आज संविधान की रक्षा की बात की जा रही है,ये समझने की जरूरत है कि किसने संविधान का सम्मान किया है और किसने अपमान किया है? उन्होंने इसी संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस एच आर खन्ना की आत्मकथा,नाइदर रोजेज नॉर थार्न किताब से एक पंक्ति उदृत किया। उन्होंने कहा कि जस्टिस खन्ना ने लिखा कि मैं अपनी छोटी बहन संतोष को कहा कि मैंने एक जजमेंट तैयार किया है जिसके कारण मैं देश का चीफ जस्टिस नहीं बन पाऊंगा। recent visitors 85

पाकिस्तान क्रिकेट टीम में फ‍िर भूचाल, 1 घंटे बाद साउथ अफ्रीका के लिए होना था रवाना… हेड कोच ने दिया इस्तीफा

कराची पाकिस्तान क्रिकेट टीम लंबे समय से विभिन्न कारणों से सुर्खियों में रही है, और हाल ही में एक और बड़ी घटना ने इस चर्चा को और बढ़ा दिया है. पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) के साथ टीम मैनेजमेंट में उथल-पुथल जारी है, जिसमें कप्तान, कोच और सेलेक्टर्स के इस्तीफे शामिल हैं. अब, पाकिस्तान क्रिकेट के लिए एक और झटका सामने आया है, जब कोच जेसन गिलेस्पी (Jason Gillespie) ने पाकिस्तान की टेस्ट टीम के साथ दक्षिण अफ्रीका के आगामी दौरे पर जाने से इनकार कर दिया है और रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने पीसीबी को अपना इस्तीफा भी सौंप दिया है. पाकिस्तान क्रिकेट की बिगड़ती हालत इस घटना के पीछे कुछ अहम कारण सामने आए हैं. पाकिस्तान टीम की वर्तमान स्थिति वर्ल्ड क्रिकेट में बिगड़ती जा रही है, और टीम के प्रदर्शन में निरंतर गिरावट दिखाई दे रही है. साल की शुरुआत में, पाकिस्तान ने भारत को वर्ल्ड चैंपियन बनाने वाले कोच गैरी कर्स्टन को व्हाइट-बॉल फॉर्मेट में हेड कोच की जिम्मेदारी दी थी, लेकिन कुछ महीनों बाद ही उन्होंने पाकिस्तान क्रिकेट टीम से अपने कार्यकाल को बीच में छोड़ दिया. अब, जेसन गिलेस्पी ने भी पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड को बड़ा झटका दिया है. वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के प्वाइंट्स टेबल में पाकिस्तान की स्थिति पहले से ही नाजुक है, और टीम के लिए स्थिति को बचाने का अंतिम मौका दक्षिण अफ्रीका दौरे से जुड़ा हुआ था. लेकिन क्रिकबज की रिपोर्ट्स के अनुसार, गिलेस्पी ने पाकिस्तान टीम के साथ इस दौरे पर जाने से साफ इनकार कर दिया है. इसके अलावा, उन्होंने अपने पद से इस्तीफा भी दे दिया है. इस्तीफे के पीछे मुख्य वजह गिलेस्पी की कोचिंग में पाकिस्तान ने हाल ही में इंग्लैंड और बांग्लादेश के खिलाफ टेस्ट सीरीज खेली थी. इंग्लैंड के खिलाफ पाकिस्तान ने 2-1 से सीरीज जीतने में सफलता हासिल की, लेकिन बांग्लादेश के खिलाफ टीम को ऐतिहासिक हार का सामना करना पड़ा. गिलेस्पी के इस्तीफे के पीछे मुख्य वजह पीसीबी के कुछ फैसले हैं, जिनसे वह नाखुश थे. खासकर सहायक कोच टिम नीलसन के कॉन्ट्रैक्ट को न बढ़ाने का फैसला, गिलेस्पी के लिए निराशाजनक था, और इसी कारण उन्होंने यह महत्वपूर्ण कदम उठाया है. अब, पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड को एक बार फिर अपनी टीम मैनेजमेंट के मामलों को लेकर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है, क्योंकि लगातार हो रहे बदलाव टीम के प्रदर्शन पर गहरा प्रभाव डाल रहे हैं. recent visitors 70

चारों धामों का तापमान माइनस में, पर्यटक स्थलों में मसूरी और चकराता सबसे ठंडे

शिमला  हिमाचल प्रदेश में तापमान के गिरने से कड़ाके की ठंड पड़ने लगी है। पूरा प्रदेश भीषण शीतलहर से जूझ रहा है। पिछले तीन दिनों से राज्य भर में अच्छी धूप निकलने से अधिकतम तापमान में सुधार आया है। लेकिन न्यूनतम तापमान में लगातार गिरावट आने से रातें बेहद सर्द हो गईं हैं और पहाड़ों से लेकर मैदानी इलाकों तक लोग ठंड से ठिठुर रहे हैं। शुक्रवार को इस सीजन में पहली बार प्रदेश के 12 में से नौ जिलों का न्यूनतम तापमान शून्य से नीचे चला गया। बिलासपुर, ऊना, हमीरपुर, मंडी जैसे मैदानी जिलों का पारा माइनस में पहुंच गया है। मौसम विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक मैदानी इलाकों में बिलासपुर का बरठीं सबसे ठंडा स्थल रहा, जहां न्यूनतम पारा -1.5 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। ऊना में -0.8 डिग्री, हमीरपुर में -0.4 डिग्री और मंडी जिला के सुंदरनगर में -0.1 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। लाहौल-स्पीति जिला का ताबो राज्य में सबसे ठंडा रहा। यहां न्यूनतम तापमान -7.5 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड हुआ। इसी जिला के कुकुमसेरी, समधो व सियोबाग में पारा क्रमशः -7.2 डिग्री, -3.9 व -1 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड हुआ है। किन्नौर जिला के कल्पा में -5.2 डिग्री व रिकांगपिओ में -1.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। कुल्लू जिला के भुंतर में -0.5 डिग्री, बजुआरा में -0.6 डिग्री व मनाली में -0.2 डिग्री, शिमला जिला के नारकण्डा में -1.2 डिग्री, सोलन में -0.5 डिग्री और चम्बा जिला के भरमौर में -0.5 डिग्री सेल्सियस रहा। राज्य के अन्य प्रमुख शहरों में शिमला में न्यूनतम तापमान 4.4 डिग्री, धर्मशाला में 3.5 डिग्री, पालमपुर में 1 डिग्री, कांगड़ा में 1.9 डिग्री, मंडी में 1.2 डिग्री, बिलासपुर में 1.1 डिग्री, चम्बा में 1.5 डिग्री, कुफ़री में 0.3 डिग्री और घोलाकुआँ में 2.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के निदेशक कुलदीप श्रीवास्तव ने बताया कि पिछले 24 घण्टों के दौरान राज्य के औसतन न्यूनतम तापमान में 1.5 डिग्री की गिरावट रही वहीं न्यूनतम तापमान सामान्य से 3.5 डिग्री सेल्सियस नीचे दर्ज किया गया। उन्होंने बताया कि अगले एक सप्ताह तक राज्य में पश्चिमी विक्षोभ का कोई असर नज़र नहीं आएगा। 19 दिसम्बर तक कहीं भी बारिश-बर्फबारी नहीं होगी। इस अवधि तक दिन में धूप रहने से अधिकतम तापमान सामान्य बना रहेगा, लेकिन रात के तापमान में गिरावट आ सकती है। चारों धामों का तापमान माइनस में, पर्यटक स्थलों में मसूरी और चकराता सबसे ठंडे  उत्तराखंड में रविवार और सोमवार को जोरदार बर्फबारी हुई थी. तब तापमान काफी गिरने से कड़ाके की ठंड पड़ने लगी थी. शीत लहर चलने लगी थी. मंगलवार, बुधवार और गुरुवार को अच्छी धूप निकली. इसके बाद तापमान थोड़ा संभला है. आज चार धामों में सिर्फ बदरीनाथ धाम के ही दोनों तापमान माइनस में हैं. बाकी तीन धामों के तापमान माइनस से ऊपर आ गए हैं. बदरीनाथ अभी भी सबसे सबसे ठंडा: चमोली जिले में स्थित बदरीनाथ धाम सबसे ठंडा बना हुआ है. यहां दोनों तापमान माइनस में चल रहे हैं. बदरीनाथ धाम का अधिकतम तापमान -3° सेल्सियस है तो न्यूनतम तापमान भी -13° है. इस कारण यहां कड़ाके की ठंड है. धाम के आसपास के झरने और झीलें जम गई हैं. केदारनाथ में ऐसा है तापमान: भगवान शिव के केदारनाथ धाम में तीन दिन अच्छी धूप निकलने से अधिकतम तापमान थोड़ा सुधरा है और माइनस से बाहर निकल आया है. केदारनाथ धाम का अधिकतम तापमान 1° सेल्सियस है तो न्यूनतम तापमान -11° सेल्सियस है. सुबह-शाम कड़ाके की ठंड है. दिन में मौसम ठीक है. गंगोत्री धाम में अधिकतम तापमान माइनस से बाहर आया: उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में स्थित गंगोत्री धाम में न्यूनतम तापमान तो माइनस में है, लेकिन अधिकतम तापमान अब माइनस से बाहर आ गया है. गंगोत्री धाम का अधिकतम तापमान 4° सेल्सियस है तो न्यूनतम तापमान -8° सेल्सियस है. यानी बर्फ जमने से भी 8° सेल्सियस नीचे. यमुनोत्री का तापमान: उत्तरकाशी जिले में स्थित यमुनोत्री धाम का अधिकतम तापमान फ्रीजिंग प्वाइंट पर है. आज यमुनोत्री का अधिकतम तापमान 0° सेल्सियस है तो न्यूनतम तापमान -9° सेल्सियस है. दो दिन पहले यमुनोत्री के दोनों तापमान माइनस में चल रहे थे. पिछले तीन दिन की कड़ी धूप ने तापमान में इतना बदलाव ला दिया है. ये है पर्यटन स्थलों का तापमान: उत्तराखंड के पर्यटन स्थलों में विंटर टूरिज्म के लिए शानदार मौसम है. पहाड़ों की रानी मसूरी में इस समय अधिकतम तापमान 10° सेल्सियस और न्यूनतम तापमान -2° सेल्सियस चल रहा है. सोमवार को मसूरी में भी बर्फबारी हुई थी. इससे यहां पर्यटकों की भीड़ उमड़ पड़ी. तीन दिन धूप पड़ी तो अधिकतम तापमान थोड़ा चढ़ गया लेकिन न्यूनतम तापमान अभी माइनस में ही है. नैनीताल: सरोवर नगरी नैनीताल में घूमने के लिए बहुत बढ़िया मौसम है. यहां भी बर्फ पड़ चुकी है. नैनीताल का अधिकतम तापमान 15° सेल्सियस तो न्यूनतम तापमान 2° सेल्सियस है. ऐसे में फिर कभी भी सरोवर नगरी में बर्फ पड़ सकती है. रानीखेत: अल्मोड़ा जिले के रानीखेत का तापमान मिलाजुला है. दिन में धूप पड़ रही है तो रानीखेत का अधिकतम तापमान 14° डिग्री है. सुबह-शाम और रात में कड़ाके की ठंड के कारण न्यूनतम तापमान फ्रीजिंग प्वाइंट से भी नीचे -2° सेल्सियस हो रहा है. नैनीताल जिले के पर्यटक स्थल मुक्तेश्वर में सर्दियों के पर्यटन का आनंद लेने लायक मौसम है. मुक्तेश्वर का अधिकतम तापमान 12° सेल्सियस है तो न्यूनतम तापमान -1° सेल्सियस है. कौसानी: बागेश्वर जिले के पर्यटक स्थल कौसानी का अधिकतम तापमान 17° सेल्सियस है. यहां कभी भी बर्फ पड़ सकती है. क्योंकि यहां का न्यूनतम तापमान फ्रीजिंग प्वाइंट के करीब 1° सेल्सियस है. रुद्रप्रयाग जिले के बेहतरीन पर्यटन स्थल चोपता बर्फबारी के बाद निखर गया है. गुलाबी ठंड के साथ मौसम भी सुहावना है. चोपता का अधिकतम तापमान 17° सेल्सियस है तो न्यूनतम तापमान 4° सेल्सियस है. चकराता: देहरादून जिले के जौनसार बावर इलाके में स्थित चकराता में बर्फबारी के बाद से ठंड बनी हुई है. चकराता का अधिकतम तापमान 12° सेल्सियस है तो न्यूनतम तापमान -2° सेल्सियस है. अगर आप मैदानी इलाकों के प्रदूषण से परेशान हैं, काम के बोझ से थक गए हैं तो उत्तराखंड के ये पर्यटन स्थल आपको रिफ्रेश कर देंगे. तो फिर उठाइए बैग और उसमें सर्दियों वाले कपड़े डालकर पहुंच जाइए उत्तराखंड. recent visitors 113

रातापानी टाइगर रिजर्व के संरक्षण के लिए निकाली बाइक रैली, CM ने की शुरुआत, रणदीप हुड्डा भी रहे शामिल

रातापानी जंगल के संरक्षण के लिए राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे जागरूकता अभियान के तहत एक विशेष बाइक रैली का आयोजन किया गया। “विरासत से विकास” अभियान के अंतर्गत यह रैली कोलार रोड स्थित गोल जोड़ चौराहे से शुरू हुई। रैली में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ अभिनेता रणदीप हुड्डा ने भी भाग लिया और अभियान की सराहना की। अभियान के दौरान अभिनेता रणदीप हुड्डा ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को उनके कार्यकाल के एक साल पूरे होने पर बधाई दी और कहा कि मैं कुरुक्षेत्र की धरती से आता हूं, जहां भगवान श्री कृष्ण ने अन्याय के खिलाफ संदेश दिया। आज मैं उस प्रदेश में हूं, जहां भगवान ने शिक्षा पाई और जहां जल, जंगल और गायों की सुरक्षा का संदेश दिया गया। रणदीप हुड्डा ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन की भी प्रशंसा करते हुए कहा कि श्री कृष्ण के संदेश को आगे बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री ने जो कार्य किए हैं, वह सराहनीय हैं। विशेषकर जंगलों और वन्य जीवों के संरक्षण के लिए उनकी प्रतिबद्धता प्रशंसा योग्य है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस अवसर पर वीर सावरकर की तारीफ करते हुए कहा कि वीर सावरकर को दो बार कालापानी की सजा हुई, लेकिन वे कभी नहीं झुके। उनका आदर्श आज भी हमें प्रेरणा देता है। रातापानी टाइगर रिजर्व से एक नई इबारत लिखी जाएगी, जहां टाइगर का संरक्षण किया जाएगा। उन्होंने आगे कहा, “जंगल का राजा टाइगर ही होता है, क्योंकि टाइगर अपने पराक्रम से शिकार करता है। टाइगर रिजर्व की स्थापना के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि यह न केवल प्रदेश के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व की बात है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि इस टाइगर रिजर्व के उद्घाटन के लिए बाइक रैली का आयोजन रोजगार और प्रदेश को गौरव देने का एक महत्वपूर्ण कदम है। साथ ही उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भोपाल और आसपास के क्षेत्र में भूगर्भीय परिवर्तन के कारण प्राचीन चित्रकला और अन्य ऐतिहासिक धरोहरें भी पाई जाती हैं। सीएम ने कहा कि भोपाल एक ऐसी राजधानी जिसके आंगन ने अपना टाइगर रिजर्व बना है। recent visitors 219

कांग्रेस नेता ने फांसी लगाकर की आत्महत्या, कुछ दिनों पहले दर्ज हुई थी धोखाधड़ी की FIR

ग्वालियर ग्वालियर में कांग्रेस के कार्यकारी शहर अध्यक्ष अमर सिंह माहौर ने अपने घर में फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। घटना के वक्त वे घर में अकेले थे। दामाद केशव दुकान गए थे और बेटी कीर्ति यूनिवर्सिटी। बेटी जब घर लौटी, तो कमरा अंदर से बंद मिला। उसने अपने पति और अन्य रिश्तेदारों को फोन किया। सभी के आने पर दरवाजा तोड़ा गया। अंदर देखा गया कि अमर सिंह का शव फांसी पर लटका हुआ था। दामाद ने बताया कि अमर सिंह जमीन के नामांकन संबंधी फर्जी दस्तावेज तैयार करने के आरोप में दर्ज केस से परेशान थे। वे ज्यादातर समय घर पर ही रहते थे और फोन भी अक्सर बंद रखते थे। बताया गया कि पान पत्ते की गोठ निवासी अमर सिंह पेशे से एडवोकेट थे। उनका कोई बेटा नहीं है। माधौगंज थाना प्रभारी प्रशांत शर्मा ने बताया कि मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। परिवार के लोग फिलहाल बयान देने की स्थिति में नहीं हैं। इसलिए यह स्पष्ट नहीं हो सका कि उन्होंने ऐसा कदम क्यों उठाया। जमीन के फर्जी दस्तावेज बनवाने के लगे थे आरोप पुलिस ने बताया कि 26 नवंबर को अदालत के आदेश पर पद्मपुर खेरिया निवासी धारा सिंह की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई थी। इस मामले में अमर सिंह के साथ प्रॉपर्टी डीलर संदीप सिंह चौहान को आरोपी बनाया गया था। बताया गया है कि संदीप ने करीब 12 बीघा जमीन के नामांकन दस्तावेज नोटरी अमर सिंह के माध्यम से तैयार कराए थे। धारा सिंह का आरोप था कि दस्तावेज फर्जी थे। इस मामले में अमर सिंह को हाईकोर्ट से एक लाख रुपए की सशर्त अग्रिम जमानत मिली थी। छात्र जीवन से राजनीति से जुड़े अमर सिंह 1976-78 में माधव महाविद्यालय छात्र संघ में पदाधिकारी बने। इसके बाद ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन से जुड़कर छात्र राजनीति की। फिर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की सदस्यता ली। 1984 में माधवराव सिंधिया की मुरार में प्रचार सभा के दौरान उन्होंने कांग्रेस की सदस्यता ली। वे संगठन में लगातार सक्रिय रहे। ग्वालियर विकास प्राधिकरण (जीडीए) के उपाध्यक्ष के रूप में कार्य करते हुए उन्होंने बीड़ी श्रमिकों के लिए 1 रुपए की किश्त पर 18 आवासों का आवंटन कराया था, जिससे वे चर्चा में आए थे। recent visitors 108