झारखंड चुनाव में ड्यूटी पर लगाये IPS किशन सहाय मीणा को ड्यूटी छोड़कर राजस्थान लौटने पर चुनाव आयोग हुआ सख्त

जयपुर राजस्थान कैडर के आईपीएस किशन सहाय मीणा को चुनाव आयोग ने सस्पेंड कर दिया है। ड्यूटी में लापरवाही बरतने पर उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया। चुनाव आयोग की ओर से आईपीएस किशन सहाय मीणा की ड्यूटी झारखंड विधानसभा चुनाव में लगाई थी। पिछले दिनों वे झारखंड पहुंच गए थे लेकिन बाद वे बिना किसी को सूचना दिए राजस्थान लौट आए। चुनाव आयोग को बिना सूचना दिए ड्यूटी छोड़कर राजस्थान लौटने पर आयोग ने उनके खिलाफ एक्शन लिया है। आयोग की ओर से अब उन्हें चार्जशीट भी थमाई जाएगी। प्रमोटी आईपीएस हैं किशन सहाय मीणा आईपीएस किशन सहाय मीणा राजस्थान के अलवर जिले के रहने वाले हैं। वे पहले राजस्थान पुलिस सेवा (आरपीएस) के रूप में भर्ती हुए थे। वर्ष 2013 में उनका प्रमोशन हुआ। वे आरपीएस से आईपीएस बन गए। उन्हें वर्ष 2004 का बैच अलॉट किया गया। पिछले दस साल में विभिन्न पदों पर उन्होंने सेवाएं दी। अब ड्यूटी में लापरवाही बरतने पर उन्हें निलंबित किया गया है। दस साल में अमूमन नॉन फील्ड ही रहे वर्ष 2013 से लेकर अब तक अमूमन वे नॉन फील्ड ही रहे। आईपीएस बनने के बाद अगस्त 2013 में उन्हें टोंक जिले का एसपी लगाया गया। टोंक एसपी के पद पर वे करीब पांच महीने ही रहे। इसके बाद जनवरी 2014 में टोंक एसपी पद से हटाकर जीआरपी अजमेर लगाया दिया गया। इसके बाद करीब छह महीने तक वे एपीओ रहे। बाद में सीआईडी सीबी, जेल और आरएसी में पदस्थ रहे। वर्तमान में वे ह्युमन राईट सेल के आईजी पद पर कार्य कर रहे थे।   recent visitors 217

नंदिनी ने दुनिया की सबसे कम उम्र की महिला चार्टर्ड अकाउंटेंट बनने का कीर्तिमान हासिल किया

 मुरैना  मध्य प्रदेश के छोटे से शहर मुरैना की नंदिनी अग्रवाल ने भारत का नाम रोशन करते हुए इतिहास रच डाला। नंदिनी ने दुनिया की सबसे कम उम्र की महिला चार्टर्ड अकाउंटेंट बनने का कीर्तिमान हासिल किया है, जिसे गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने भी मान्यता दी है। और यही नहीं, उन्होंने CA फाइनल परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 1 (AIR 1) हासिल कर अपने अद्भुत टैलेंट और मेहनत का सबूत भी दिया। 16 साल की उम्र में शुरू किया CA का सफर महज 16 साल की उम्र में नंदिनी ने CA बनने का सपना देखा। अपने यूनिक टैलेंट के बल पर, उन्होंने 13 साल की उम्र में 10वीं और 15 साल में 12वीं की परीक्षा पास की। इसके बाद उन्होंने CA के लिए पढ़ाई शुरू की और असाधारण सफलता हासिल की। रचा नया रिकॉर्ड, हासिल किए 76.75% अंक 29 नवंबर 2021 को, नंदिनी ने CA फाइनल में 800 में से 614 अंक (76.75%) प्राप्त किए और AIR 1 हासिल की। यह उपलब्धि उन्होंने सिर्फ 19 साल, 8 महीने और 18 दिन की उम्र में पाई, जो किसी भी महिला के लिए सबसे कम उम्र का रिकॉर्ड है। प्रेरणा बनी बचपन की एक खास मुलाकात नंदिनी ने अपने स्कूल के दिनों में एक गिनीज रिकॉर्ड होल्डर से मुलाकात की थी। तभी से उन्होंने एक ऐसा रिकॉर्ड बनाने का सपना देखा जो तोड़ पाना मुश्किल हो। इसी सपने ने उन्हें CA फाइनल जैसे जैलेंजेज एग्जाम के लिए प्रेरित किया। कम उम्र की चुनौतियां और मजबूत इरादे इतनी कम उम्र में इंटर्नशिप पाने में उन्हें कई दिक्कतों का सामना करना पड़ा। कई कंपनियों ने उम्र को वजह बताते हुए मना किया, लेकिन नंदिनी ने हार नहीं मानी और अपनी तैयारी में जुटी रहीं। भाई का मिला हौसला और परिवार का संबल उनके भाई सचिन ने भी CA परीक्षा में 2021 में ऑल इंडिया 18वीं रैंक हासिल की और दोनों ने मिलकर एक-दूसरे को प्रेरित किया। नंदिनी के पिता नरेश चंद्र गुप्ता, जो एक टैक्स प्रैक्टिशनर हैं और मां डिंपल गुप्ता ने हमेशा उनके सपनों को सपोर्ट किया। नंदिनी अग्रवाल की यह उपलब्धि हर भारतीय के लिए गर्व का विषय है और युवाओं के लिए प्रेरणा कि सही मेहनत और हौसले से कोई भी ऊंचाई हासिल की जा सकती है। recent visitors 197

भगवान बिरसा मुंडा की 149वीं जयंती : एक ऐतिहासिक प्रेरणा

राष्ट्रीय जनजातीय गौरव दिवस पर विशेष डॉ. कुंवर विजय शाह भोपाल भारत के समृद्ध इतिहास में भगवान बिरसा मुंडा का नाम एक ऐसे वीर योद्धा और समाज-सुधारक के रूप में अंकित है, जिन्होंने अपने जीवन को जनजातीय समाज की उन्नति और उनके अधिकारों के लिए समर्पित कर दिया। देश में हर साल 15 नवम्बर को उनकी जयंती पर भारत में राष्ट्रीय जनजातीय गौरव दिवस मनाया जाता है। यह दिन न केवल उनकी शहादत और योगदान को याद करने का है, बल्कि यह जनजातीय समुदाय की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत, अनवरत संघर्ष और स्वाभिमान का उत्सव भी है। भगवान बिरसा मुंडा का जीवन और उनका संघर्ष बिरसा मुंडा जी का जन्म 15 नवम्बर 1875 को झारखंड के उलीहातू गांव में एक साधारण मुंडा परिवार में हुआ था। उनका जीवन बेहद कठिनाइयों से भरा था और उन्हें बाल्यावस्था से ही आर्थिक संघर्षों का सामना करना पड़ा। सामाजिक असमानता, अत्याचार और विदेशी शासकों द्वारा जनजातियों पर निरंतर हो रहे शोषण ने बिरसा मुंडा के अंतर्मन को विद्रोह की भावना से भर दिया। उन्होंने अंग्रेजों द्वारा लागू जमींदारी प्रथा, धर्मांतरण और जनजातियों के पारम्परिक जीवन पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ संघर्ष किया। उलगुलान आंदोलन का नेतृत्व बिरसा मुंडा जी ने "उलगुलान" नामक जनजातीय विद्रोह का नेतृत्व किया, जो अंग्रेजी शासन और उनके द्वारा किए जा रहे अत्याचार के खिलाफ था। "उलगुलान" का अर्थ है 'महान विद्रोह'। इस आंदोलन का उद्देश्य अंग्रेजों द्वारा लागू की गई भूमि नीतियों, जबरन धर्मांतरण और जनजातियों की पारम्परिक जीवनशैली में दखल देने वाले कानूनों के खिलाफ आवाज उठाना था। भगवान बिरसा मुंडा के नेतृत्व में इस आंदोलन ने पूरे क्षेत्र में जनक्रांति की लहर पैदा कर दी और उन्हें "धरती आबा" या "धरती पिता" या धरा पितृ के रूप में सम्मानित किया जाने लगा। भगवान बिरसा मुंडा का समाज सुधारक के रूप में योगदान भगवान बिरसा मुंडा केवल एक स्वतंत्रता सेनानी ही नहीं, बल्कि एक महान समाज सुधारक भी थे। उन्होंने तत्कालीन जनजातीय समाज में व्याप्त कुरीतियों जैसे अंध-विश्वास, जाति-भेद, नशाखोरी, जातीय संघर्ष और अन्य सामाजिक बुराइयों के खिलाफ जागरूकता फैलाई। उन्होंने अपने अनुयायियों को शिक्षा का महत्व समझाया और उन्हें एकता में रहने का संदेश दिया। बिरसा मुंडा ने "बिरसाइत" नामक एक धार्मिक आंदोलन भी चलाया, जिसमें उन्होंने अपने अनुयायियों को आचार-विचार की शुचिता, सादगी और सत्य के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया। राष्ट्रीय जनजातीय गौरव दिवस की स्थापना वर्ष 2021 में केन्द्र सरकार ने भगवान बिरसा मुंडा की जयंती 15 नवंबर को राष्ट्रीय जनजातीय गौरव दिवस के रूप में घोषित किया। इसका उद्देश्य भगवान बिरसा मुंडा और अन्य जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान का सम्मान करना है। इस दिन देशभर में जनजातीय समाज की सांस्कृतिक धरोहर, उनकी परंपराओं और उनके गौरवशाली इतिहास को समझने और सम्मानित करने के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। यह दिवस जनजातीय समाज के संघर्षों और उनके योगदान को याद करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। बिरसा मुंडा का भारतीय स्वातंत्र्य आंदोलन में योगदान भारतीय स्वातंत्र्य आंदोलन में भगवान बिरसा मुंडा का योगदान अतुलनीय है। वे न केवल अपने क्षेत्र की जनजातियों के नेता थे, बल्कि उनके संघर्ष और बलिदान ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को भी एक नई दिशा दी। उनके "उलगुलान" आंदोलन ने अन्य जनजातीय समुदायों को भी संगठित किया और स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भागीदारी करने की प्रेरणा दी। भगवान बिरसा मुंडा मात्र 24 साल 7 महीने की अल्पायु में 9 जून 1900 को वीरगति को प्राप्त हुए। उनकी विरासत आज भी जनजातीय समाज के दिलों में जीवित है और उन्हें एक महान क्रांतिकारी जननायक के रूप में याद किया जाता है। राष्ट्रीय जनजातीय गौरव दिवस का महत्व राष्ट्रीय जनजातीय गौरव दिवस का महत्व केवल बिरसा मुंडा जी के योगदान को याद करने तक सीमित नहीं है। यह जनजातीय समाज की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान का जश्न मनाने का भी दिन है। जनजातीय समाज ने भारत के इतिहास में अहम भूमिका निभाई है। यह गौरव दिवस उनकी सांस्कृतिक धरोहर, संघर्षों और उपलब्धियों का सम्मान करता है। यह अवसर सभी भारतीयों को यह याद दिलाने का भी है कि जनजातीय समाज भारत की संस्कृति का एक महत्वपूर्ण व अभिन्न हिस्सा है और उनके योगदान को हमें सदैव संजोकर रखना चाहिए। भगवान बिरसा मुंडा का जीवन प्रेरणा का स्रोत है, जो हमें साहस, संघर्ष और सामाजिक न्याय के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का संदेश देता है। राष्ट्रीय जनजातीय गौरव दिवस हमें उनकी शिक्षाओं, राष्ट्रप्रेम और उनके संघर्ष को याद करने और जनजातीय समाज के अधिकारों और सम्मान के प्रति संवेदनशील बने रहने के लिए प्रेरित करता है। जनजातीय समाज के स्वाभिमान और उनके अधिकारों की रक्षा में भगवान बिरसा मुंडा का योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा। राष्ट्रीय जनजातीय गौरव दिवस उनके प्रति हमारी कृतज्ञता, आदर और श्रृद्धांजलि का प्रतीक है।   recent visitors 89

हाईकोर्ट ने कहा केंद्र सरकार हमें लिखकर दें कि BMHRC और AIIMS विलय का प्लान नहीं

भोपाल  गैस त्रासदी पीड़ितों के लिए उचित चिकित्सा सुविधा की मांग वाली याचिका पर एमपी हाईकोर्ट ने सुनवाई की है। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने केंद्र से लिखित में जवाब मांगा है कि एम्स-भोपाल और बीएमएचआरसी का विलय नहीं किया जाएगा। यह मामला 1984 के भोपाल गैस पीड़ितों के इलाज से जुड़ा है। पीड़ितों के लिए काम करने वाला संगठन ने किया विरोध दरअसल, गैस पीड़ितों के लिए काम करने वाले एक NGO ने BMHRC को AIIMS में मिलाने के प्रस्ताव का विरोध किया था। इसी याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की खंडपीठ ने ICMR और केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए वकील विक्रम सिंह से यह लिखित जवाब मांगा है कि दोनों अस्पतालों का विलय नहीं होगा। ICMR के पास है प्रशासनिक नियंत्रण गौरतलब है कि BMHRC, ICMR के प्रशासनिक नियंत्रण में है। सुनवाई के दौरान, विक्रम सिंह ने कहा कि विलय के प्रस्ताव को पहले ही ठुकराया जा चुका है। अदालत को बताया गया कि एक NGO ने गैस पीड़ितों की बेहतर देखभाल के लिए दोनों अस्पतालों को मिलाने के लिए पत्र लिखा था। इस प्रस्ताव पर विचार करने के बाद, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण संबंधी संसदीय समिति ने 2018 में स्वास्थ्य मंत्रालय को विलय का प्रस्ताव भेजा था लेकिन इसे ठुकरा दिया गया था। विलय का हो रहा था विरोध हालांकि, भोपाल ग्रुप फॉर इंफॉर्मेशन एंड एक्शन (BGIA), जिसने विलय का विरोध करते हुए आवेदन दिया था। संगठन ने कहा कि AIIMS-भोपाल और BMHRC के विलय के लिए एक कैबिनेट नोट फिर से चलन में है। इसके बाद, अदालत ने केंद्र सरकार से लिखित जवाब मांगा कि विलय का कोई प्रस्ताव नहीं है। डिजिटलीकरण के लिए निकाला जाएगा टेंडर अदालत को केंद्र की ओर से यह भी बताया गया कि भोपाल गैस पीड़ितों के मेडिकल रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण के लिए एक टेंडर निकाला गया था, लेकिन इसे रद्द कर दिया गया, क्योंकि केवल एक ही प्रस्ताव प्राप्त हुआ था। सरकारी वकील ने कहा कि एक और टेंडर निकाला जाएगा। रिपोर्ट पेश करने को कहा उच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय पर्यावरण स्वास्थ्य अनुसंधान संस्थान (NIREH), भोपाल को अगस्त 2012 के सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन पर एक रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा। दरअसल, BGIA ने आरोप लगाया था कि NIREH ने 2012 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा सौंपे गए काम को छोड़ दिया था। BGIA का आरोप है कि NIREH, भोपाल गैस पीड़ितों के स्वास्थ्य पर MIC गैस के प्रभाव के बजाय दूसरे विषयों पर शोध कर रहा था। गौरतलब है कि अगस्त 2012 में, सुप्रीम कोर्ट ने भोपाल गैस पीड़ितों की चिकित्सा देखभाल के लिए अदालत के हस्तक्षेप की मांग करने वाली जनहित याचिका को मप्र उच्च न्यायालय को स्थानांतरित कर दिया था। न्यायमूर्ति वीके अग्रवाल की अध्यक्षता में एक निगरानी समिति का गठन भी किया गया था, ताकि गैस पीड़ितों को प्रदान की जा रही चिकित्सा सुविधाओं पर नजर रखी जा सके और अपनी सिफारिशों के साथ मप्र उच्च न्यायालय को त्रैमासिक रिपोर्ट प्रस्तुत की जा सके। बाद में, याचिकाकर्ताओं ने एक अवमानना याचिका दायर की, जिसमें आरोप लगाया गया कि निगरानी समिति की सिफारिशों के आधार पर सुप्रीम कोर्ट और उच्च न्यायालय के निर्देशों का पालन केंद्र और राज्य सरकारों और राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) के अधिकारियों द्वारा नहीं किया गया। recent visitors 98

MP हाईकोर्ट ने कहा धार कार्ड में लिखी उम्र नहीं मानी जाएगी सही, आयु नहीं पहचान का दस्तावेज है कार्ड

जबलपुर  मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति जीएस आहलूवालिया की एकलपीठ ने अपने एक महत्वपूर्ण आदेश में साफ किया कि आधारकार्ड आयु नहीं बल्कि पहचान का दस्तावेज है। इस टिप्पणी के साथ कोर्ट ने आदेश की प्रति राज्य के मुख्य सचिव को भेजने की व्यवस्था दे दी। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि मुख्य सचिव सभी जिला कलेक्टरों को इस संबंध में अवगत करा दें। यह मामला नरसिंहपुर अंतर्गत सिंहपुर पंचायत निवासी सुनीता बाई साहू की याचिका से संबंधित था। याचिकाकर्ता का कहना था कि उसके पति मोहनलाल साहू की करंट लगने से मृत्यु हो गई थी। लिहाजा, शासकीय योजना अंतर्गत आर्थिक सहायता के लिए आवेदन किया गया था। किंतु वह आवेदन इस आधार पर निरस्त कर दिया गया कि दिवंगत पति की आयु 64 वर्ष से अधिक थी। जबकि आधार कार्ड में दर्ज आयु के अनुसार मृत्यु के समय पति की आयु 64 वर्ष से कम थी। राज्य शासन की ओर से स्पष्ट किया गया कि जनपद पंचायत ने संबंधित दस्तावेजों के आधार पर पाया था कि मृतक की आयु 64 वर्ष से अधिक थी। इसके अलावा 2023 में जारी एक परिपत्र में भी यह साफ किया गया था कि आधार कार्ड का उपयोग पहचान के लिए किया जाना चाहिए न कि जन्मतिथि सत्यापन के लिए। ऐसा इसलिए क्योंकि वह जन्मतिथि का प्रमाण-पत्र नहीं है। मप्र हाई कोर्ट सहित देश के अन्य हाई कोर्ट भी अपने पूर्व आदेशों में यह रेखांकित कर चुके हैं कि आधार कार्ड पहचान पत्र है न कि जन्मतिथि का प्रमाण पत्र। चेक-कैंट बोर्ड वार्षिक वेतनवृद्धि के लाभ पर निर्णय ले : हाई कोर्ट हाई कोर्ट ने कैंट बोर्ड, जबलपुर को निर्देश दिए हैं कि याचिकाकर्ता कर्मी को वार्षिक वेतनवृद्धि का लाभ प्रदान करने पर निर्णय लें। न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने याचिकाकर्ता को 10 दिन के भीतर कैंट सीईओ को फ्रेश अभ्यावेदन प्रस्तुत करने कहा। कोर्ट ने सीईओ को निर्देश दिए हैं कि अभ्यावेदन पर विचार कर 30 दिन के भीतर उचित निर्णय पारित करें। जबलपुर निवासी याचिकाकर्ता सुरेश कुमार डुमार की ओर से अधिवक्ता सौरभ तिवारी व मौसम पासी ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि याचिकाकर्ता कैंट बोर्ड में सफाई कर्मचारी के रूप में पदस्थ है। याचिकाकर्ता 2001 से वार्षिक वेतनवृद्धि पाने का हकदार है। याचिकाकर्ता को उत्कृष्ट कर्मचारी का अवार्ड भी मिला है। इस संबंध में कैंट बोर्ड में अभ्यावेदन प्रस्तुत किया गया। जब कोई कार्रवाई नहीं की गई तो याचिका दायर की गई।   recent visitors 111

हेमंत सोरेन अपनी पत्नी कल्पना सोरेन दोनों ने अपने मताधिकार का प्रयोग करते हुए वोट डाला

रांची आज यानी बुधवार को झारखंड की 43 सीटों पर मतदान जारी है। इसके चलते मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपनी पत्नी कल्पना सोरेन के साथ वोट करने पहुंचे। दोनों ने अपने मताधिकार का प्रयोग करते हुए वोट डाला। इस दौरान पत्रकारों से बातचीत करते हुए झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने झारखंड की जनता से अपील करते हुए कहा है कि आज लोकतंत्र का पर्व है। आज हम लोगों ने अपने-अपने मतदान केंद्र में जाकर के अपने मतों का प्रयोग किया और मैं राज्य के हर एक नागरिक से अपील करता हूं कि लोकतंत्र के इस महापर्व को, इस व्यवस्था को और मजबूत करें। वर्षों बरस से चलने वाली इस लोकतंत्र के पर्व को हमें मनाना चाहिए और मजबूत करना चाहिए। बता दें कि झारखंड विधानसभा चुनाव के 43 सीटों पर सुबह 7 बजे से ही मतदान जारी है। भारी संख्या में लोग मतदान केंद्र में जाकर मतदान कर रहे हैं। साथ ही अलग-अलग पार्टी के नेता भी सुबह से ही मतदान करने में जुटे हुए हैं। recent visitors 114

CG में जनजातीय गौरव दिवस समारोह, भगवान बिरसा मुंडा के सम्मान में डॉ. मनसुख मांडविया करेंगे पदयात्रा

जशपुर केंद्रीय युवा कार्यक्रम और खेल तथा श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ मनसुख मांडविया (Dr Mansukh Mandaviya) छत्तीसगढ़ के सीएम विष्णु देव (CM Vishnu Deo Sai) के साथ 13 नवंबर 2024 को छत्तीसगढ़ के जशपुर में जनजातीय गौरव दिवस (Janjatiya Gaurav Divas) के अवसर पर एक खास पदयात्रा का नेतृत्व करेंगे. इस कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के मंत्रीगण भी शामिल होंगे. इस पदयात्रा का आयोजन भगवान बिरसा मुंडा की जयंती (Birsa Munda Jayanti) के उपलक्ष्य में किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य आदिवासी समुदायों की सांस्कृतिक धरोहर और राष्ट्र निर्माण में उनके अमूल्य योगदान का सम्मान करना है. 10 हजार से ज्यादा वॉलेंटियर लेंगे हिस्सा इस मौके पर 10 हजार से अधिक माई भारत यूथ वालंटियर्स भाग लेंगे, जो आदिवासी विरासत की रक्षा, समावेशिता को बढ़ावा देने और सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए समर्पित होंगे. इस पदयात्रा के दौरान एक प्रदर्शनी स्थल पर ऐतिहासिक आदिवासी आंदोलनों, आदिवासी नायकों को श्रद्धांजलि और भारत के आदिवासी समुदायों की अनूठी कलात्मकता और शिल्प कौशल का प्रदर्शन किया जाएगा. इस पदयात्रा के मार्ग के ठहराव स्थलों पर आदिवासी संस्कृति, सुंदर रंगोली कलाकृतियां, पेंटिंग और पारंपरिक आदिवासी कला का उत्सव मनाने वाले नाटकों का प्रदर्शन किया जाएगा. सीधी प्रसारित कार्यशालाएं उपस्थित लोगों को आदिवासी नृत्य, संगीत और साहित्य के साथ एक परस्पर अनुभव प्रदान करेंगी जबकि आदिवासी खाद्य पदार्थों का चयन उनके स्वास्थ्य लाभों के बारे में बताएगा. पदयात्रा के मुख्य आकर्षण     सांस्कृतिक कार्यक्रम – सांस्कृतिक समृद्धि का उत्सव मनाते आदिवासी नृत्य और संगीत. स्वतंत्रता संग्राम में आदिवासी नेताओं के योगदान को दर्शाते हुए आदिवासी नृत्य और सांस्कृतिक प्रदर्शन.     आदिवासी आंदोलनों पर प्रदर्शनी – ऐतिहासिक आदिवासी आंदोलनों, आदिवासी नायकों को श्रद्धांजलि और आदिवासी समुदायों की कला व शिल्प कौशल का प्रदर्शन.     जागरूकता कियोस्क – सरकारी योजनाओं और महिला लाभार्थियों के बारे में जानकारी.     कला कार्यशालाएं – रंगोली, पेंटिंग, और आदिवासी कला-संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए कार्यशालाएं.     युवाओं के योगदान का उत्सव – माय भारत पोर्टल और एनवायकेएस उपलब्धियां दर्शाना.     आदिवासी नेताओं को श्रद्धांजलि – प्रतिभागी प्रमुख आदिवासी हस्तियों की वेशभूषा में होंगे.     आदिवासी उत्कृष्टता का सम्मान – पद्म पुरस्कार विजेताओं का अभिनंदन और पारंपरिक खेलों का प्रोत्साहन.     आदिवासी भोजन: स्वास्थ्य और तंदुरुस्ती को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न प्रकार के आदिवासी खाद्य पदार्थ परोसना. इस आयोजन का उद्देश्य आदिवासी विरासत और संस्कृति की गहन समझ को बढ़ावा देना और सरकारी कल्याणकारी पहलों में आदिवासी समुदाय को सक्रिय रूप से शामिल करना है. युवाओं को भारत की समृद्ध आदिवासी विरासत से जुड़ने, समझने और उसका सम्मान करने का अवसर देने के लिए युवा कार्यक्रम विभाग माई भारत पोर्टल के माध्यम से देशभर के युवाओं को इस पदयात्रा में शामिल होने का आमंत्रण देता है. recent visitors 68