गडकरी ने फिर बोला अपनी ही पार्टी पर हमला, भाजपा की फसल में लग गए हैं कीड़े

Gadkari again attacked his own party, BJP’s crop is infested with insects बड़ी हो चुकी है BJP की फसल, लग गए हैं कुछ कीड़े; नितिन गडकरी बोले- छिड़कने होंगे कीटनाशक गडकरी ने भारतीय संविधान में निहित धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांतों को भी रेखांकित किया और कहा कि सरकार और प्रशासन का धर्मनिरपेक्ष होना जरूरी है भोपाल। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने शनिवार को भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में दागी नेताओं के घुसपैठ को लेकर चिंता जताई। गडकरी ने कहा कि जैसे-जैसे पार्टी का विस्तार हो रहा है, कुछ समस्याएं भी उत्पन्न हो रही हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी को अपनी स्वच्छता बनाए रखने के लिए कदम उठाने होंगे। मीडिया से बातचीत करते हुए नितिन गडकरी ने ‘बीमारी वाले फसलों’ का उदाहरण देते हुए कहा है कि पार्टी को ‘कीटनाशक’ छिड़कने की आवश्यकता पर जोर देना चाहिए। गडकरी ने कहा, “जब फसल बढ़ती है तो बीमारियां भी बढ़ती हैं। बीजेपी की फसल बहुत बड़ी हो गई है, जिसमें अच्छे अनाज के साथ-साथ कुछ बीमारियां भी आ रही हैं। इसलिए हमें ऐसे बीमार फसलों पर कीटनाशक छिड़कने होंगे।” उन्होंने आगे कहा कि बीजेपी की बढ़ती सदस्यता के साथ राजनीतिक नेताओं के पार्टी में शामिल होने की प्रक्रिया पर भी नजर रखनी होगी। साथ ही नए सदस्यों को पार्टी की विचारधारा और संस्कृति से अवगत कराना जरूरी है। उन्होंने कहा, “बीजेपी कार्यकर्ताओं की पार्टी है। नए लोग अलग-अलग कारणों से आ रहे हैं। यह हमारी जिम्मेदारी है कि उन्हें प्रशिक्षण दें, विचारधारा सिखाएं और उन्हें हमारे कार्यकर्ता बनाएं। हमारे प्रयास लगातार जारी हैं। हजारों कार्यकर्ता उठते हैं, लेकिन कभी-कभी एक कार्यकर्ता कुछ ऐसा कहता है जिससे हजारों कार्यकर्ताओं के प्रयास विफल हो जाते हैं।” नितिन गडकरी के ये बयान महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों के संदर्भ में आए हैं। यहां बीजेपी महायुति गठबंधन के तहत शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) और अजीत पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के साथ मिलकर चुनावी मैदान में है। सरकार का धर्मनिरपेक्ष होना जरूरी गडकरी ने भारतीय संविधान में निहित धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांतों को भी रेखांकित किया और कहा कि सरकार और प्रशासन का धर्मनिरपेक्ष होना जरूरी है। उन्होंने कहा, “एक व्यक्ति कभी धर्मनिरपेक्ष नहीं हो सकता, लेकिन राज्य, सरकार और प्रशासन का धर्मनिरपेक्ष होना चाहिए।” महाराष्ट्र में बीजेपी के प्रदर्शन और 2024 लोकसभा चुनावों में पार्टी की सीटों की संख्या में आई कमी पर नितिन गडकरी ने प्रदेश के स्थानीय नेतृत्व की क्षमता पर विश्वास जताया। उन्होंने यह भी कहा कि भले ही उनका राज्य में कोई औपचारिक पद नहीं है, लेकिन उन्हें जब भी जरूरत पड़े वे सहायता के लिए उपलब्ध हैं। गडकरी ने कहा, “मुझे महाराष्ट्र में कोई औपचारिक भूमिका नहीं है। यहां के नेता सक्षम हैं। उन्हें अभी मेरी आवश्यकता नहीं है। लेकिन जब भी उन्हें मेरी आवश्यकता होगी मैं सहायता के लिए उपलब्ध रहूंगा recent visitors 248

पीसीबी चैंपियंस ट्रॉफ़ी 2025 के लिए हाइब्रिड मॉडल अपनाने को तैयार नहीं

लाहौर  पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) के प्रमुख मोहसिन नक़वी ने कहा है कि वह चैंपियंस ट्रॉफ़ी 2025 के लिए हाइब्रिड मॉडल अपनाने को तैयार नहीं हैं। लाहौर के गद्दाफ़ी स्टेडियम में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा, “उनकी इस बारे में बीसीसीआई से कोई आधिकारिक बात नहीं हुई है और ना ही बीसीसीआई ने आधिकारिक रूप से कोई आपत्ति जताई है।” नक़वी ने आगे कहा, “मैंने इस बारे में अपनी टीम से बात की है और हमारा रूख़ साफ़ है कि अगर उन्हें कोई आपत्ति है तो हमें इसको लिखित रूप में दें। तब तक हाइब्रिड मॉडल के बारे में कोई भी बात नहीं होगी और हम इसे स्वीकार करने को तैयार भी नहीं हैं। भारतीय मीडिया भले ही ऐसा कुछ रिपोर्ट कर रही हो, लेकिन अभी तक पीसीबी से इस बारे में कोई औपचारिक बात नहीं हुई है।” नक़वी ने यह भी कहा कि पाकिस्तान ने पिछले साल वनडे विश्व कप के लिए भारत का दौरा किया था, इसलिए भारत को भी पाकिस्तान आना चाहिए। उन्होंने कहा, “अगर हमें भारत से कोई पत्र मिलता है तो हम अपनी सरकार के पास जाएंगे और उनके निर्णय को मानेंगे। इससे पहले पाकिस्तान ने भारत के लिए बड़ा दिल दिखाते हुए एशिया कप का आयोजन हाइब्रिड मॉडल पर किया था और पाकिस्तान की टीम वनडे विश्व कप के लिए वहां गई थी। लेकिन हर बार ऐसा नहीं हो सकता। अगर ऐसा होता है तो अगली बार से हम भी भारत में किसी टूर्नामेंट में जाने के लिए सरकार से अनुमति लेंगे, ना कि पीसीबी कोई निर्णय लेगी।” राजनीतिक तनाव के कारण 2012-13 के बाद से दोनों देशों के बीच कोई भी द्विपक्षीय सीरीज़ नहीं हुई है, वहीं दोनों देशों के बीच आख़िरी टेस्ट 2007 में हुआ था। नक़वी ने कहा कि क्रिकेट, राजनीति से मुक्त होना चाहिए। चैंपियंस ट्रॉफ़ी के लिए लाहौर, रावलपिंडी और कराची तीन मैदान निर्धारित किए गए हैं, लेकिन भारत को प्रस्ताव दिया गया है कि वे अपने सभी मैच लाहौर में खेल सकते हैं, जो कि भारतीय बॉर्डर से काफ़ी पास है। इससे भारतीय दर्शकों को भी सुविधा होगी। पीसीबी ने बताया है कि उसने भारतीय दर्शकों के लिए लगभग 17,000 वीज़ा की व्यवस्था की है। नक़वी ने कहा, “लगभग सभी देश चाहते हैं कि टूर्नामेंट पाकिस्तान में हो और पीसीबी उन्हें हर सुविधा देने को तैयार है। मैं कुछ बोर्ड के भी संपर्क में हूं और सभी यहां खेलने के लिए उत्साहित हैं। मुझे नहीं लगता कि इसे कोई राजनीतिक मुद्दा बनाना चाहिए। हम हर टीम को हर तरह की सुविधा देंगे। हम चाहते हैं कि इस टूर्नामेंट के लिए विदेशों से भी फ़ैंस आएं।” ईएसपीएन क्रिकइंफो को मिली जानकारी के मुताबिक़ बीसीसीआई ने भले ही इस मामले को औपचारिक रूप से साझा नहीं किया है, लेकिन उनका रूख़ बदलने वाला नहीं है। वे पाकिस्तान जाने के लिए भारत सरकार की अनुमति का इंतज़ार करते रहे हैं और अभी भी वही करेंगे। हालांकि अभी साफ़ नहीं हो पाया है कि बीसीसीआई ने अभी तक इस टूर्नामेंट के लिए अनुमोदन मांगा है या नहीं। ग़ौरतलब है कि यह टूर्नामेंट पाकिस्तान में 19 फ़रवरी से 9 मार्च के बीच होने वाला है, जिसके शेड्यूल की औपचारिक घोषणा आईसीसी द्वारा अभी होनी बाक़ी है।     recent visitors 114

उपचुनाव: भाजपा-कांग्रेस दोनों जातिगत समीकरण साधने लगा रहे ताकत, आदिवासी वोटर होंगे निर्णायक

By-election: Both BJP and Congress are trying to balance caste equations, tribal voters will be decisive मध्य प्रदेश में दो सीटों बुधनी और विजयपुर सीट पर 13 नवंबर को उपचुनाव के लिए मतदान होना है। इन दोनों ही सीटों पर प्रमुख राजनीतिक दल जातीय समीकरण साधने पर जोर लगा रहे हैं। विजयपुर में आदिवासी वोटर निर्णायक भूमिका में है।  भोपाल। प्रदेश की उपचुनाव वाली बुधनी और विजयपुर विधानसभा सीट पर सियासी पारा तेज हो गया है। दोनों ही प्रमुख दल भाजपा और कांग्रेस ने जातिगत समीकरण साधने के लिए नेताओं की पूरी फौज उतार दी है। विजयपुर सीट पर अनुसूचित जनजाति वोटर निर्णायक भूमिका में है। यह सीट कांग्रेस विधायक रामनिवास रावत के इस्तीफा देने के बाद खाली हुई है। कांग्रेस इस सीट पर अभी तक ओबीसी प्रत्याशी उतारती आई थी। इस बार कांग्रेस ने आदिवासी कार्ड खेला है। कांग्रेस ने इस सीट पर मुकेश मल्होत्रा को प्रत्याशी बनाया है। उन्होंने पिछली बार निर्दलीय चुनाव लड़ते हुए 44 हजार वोट प्राप्त किए थे।  विजयपुर में आदिवासी वोट 60 हजार से ज्यादा हैं। यहां पर सहरिया जनजाति के अलावा कुशवाह, धाकड़ व गुर्जर वोटर बड़ी संख्या में हैं। भाजपा ने सहरिया वोट साधने के लिए पूर्व भाजपा विधायक सीताराम आदिवासी को सहरिया विकास प्राधिकरण का अध्यक्ष बनाया है। भील भिलाला वोटर्स को साधने के लिए मंत्री निर्मला भूरिया को जिम्मेदारी दी है। वहीं, कांग्रेस ने अनुसूचित जाति के लोगों को साधने के लिए आदिवासी कांग्रेस के अध्यक्ष रामू टेकाम और विधायक हीरालाल अलावा समेत अन्य नेताओं को जिम्मेदारी दी है। विजयपुर में अब तक 15 चुनाव हुए हैं। इसमें नौ बार कांग्रेस और छह बार भाजपा चुनाव जीती है। भाजपा काम तो कांग्रेस ने कुपोषण-गरीबी के साथ ही बिकाऊ और टिकाऊ का नाराज दिया है बुधनी सीट दिग्गजों ने झोंकी ताकत बुधनी विधानसभा सीट केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के इस्तीफा देने के बाद खाली हुई है। इस सीट पर लंबे समय से भाजपा का कब्जा है। यहां पर किरार, पवार, ब्राह्मण, यादव ओर राजपूत के साथ ही आदिवासी वोटर्स भी है। इस सीट पर 2003 से लगातार भाजपा चुनाव जीतते आ रही है। इस सीट पर भाजपा ने रमाकांत भार्गव और कांग्रेस ने राजकुमार पटेल को प्रत्याशी बनाया है। पटेल किरार समाज से आते हैं, जो बुधनी में निर्णायक वोट बैंक माना जाता है। इसलिए यहां पर चुनाव कांटे की टक्कर वाला है। वह 1993 में इस सीट पर चुनाव जीत चुके हैं। बुधनी में 1957 से अब तक 17 बार चुनाव हुए हैं। इसमें 11 बार भाजपा और 5 बार कांग्रेस चुनाव जीती है। एक बार 1962 में निर्दलीय उम्मीदवार ने जीत दर्ज की है। यहां पर भाजपा विकास तो कांग्रेस सरकार को जगाने जनता से वोट मांग रही है। इस सीट पर भाजपा की तरफ से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा समेत कई दिग्गज चुनाव मैंदान में जुटे हुए हैं। recent visitors 121

प्रयागराज महाकुंभ :स्वच्छ कुंभ कोष के माध्यम से सफाईकर्मीयों के रहने, खाने-पीने और बच्चों के लिए निःशुल्क शिक्षा की व्यवस्था की जा रही

प्रयागराज  प्रयागराज महाकुंभ 2025 को स्वच्छ और सुंदर बनाने के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संकल्प को साकार करने में मेला प्रशासन पूरी तत्परता से जुट गया है। लगभग 10 हजार सफाईकर्मी दिन रात पूरे महाकुंभ क्षेत्र को चमकाने के लिए लगाए गए हैं। ये सभी सफाईकर्मी सीएम योगी की मंशा के अनुरूप स्वच्छ महाकुंभ की दिशा में कार्य कर रहे हैं। महाकुंभ जैसे जैसे नजदीक आ रहा है, इनकी गतिविधियों में भी तेजी आ रही है। योगी सरकार भी इन कर्मियों की सुविधा और सम्मान का विशेष ध्यान रख रही है। स्वच्छ कुंभ कोष के माध्यम से इनके रहने, खाने-पीने और बच्चों के लिए निःशुल्क शिक्षा की व्यवस्था की जा रही है। योगी सरकार की इस पहल से न केवल महाकुंभ की स्वच्छता सुनिश्चित हो रही है, बल्कि सफाईकर्मियों और उनके परिवारों को शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक सुरक्षा भी मिल रही है। सेनिटेशन कॉलोनी का निर्माण महाकुंभ मेला की विशेष कार्याधिकारी आकांक्षा राणा ने बताया कि महाकुंभ को स्वच्छ महाकुंभ बनाने में सफाईकर्मियों का महत्वपूर्ण योगदान है। ये सफाईकर्मी दिन रात अपने काम में लगे हैं। ऐसे में सीएम योगी के निर्देशों के अनुरूप इनकी सुरक्षा और सुविधा की जिम्मेदारी का निर्वहन किया जा रहा है। मेला क्षेत्र में सफाईकर्मियों के लिए एक सैनिटेशन कॉलोनी बनाई गई है, जहां उनके खाने-पीने और रहने की पूरी व्यवस्था निःशुल्क की गई है। इस पहल से सफाईकर्मियों को आराम और सुरक्षा दोनों मिल रही है। बच्चों के लिए प्राइमरी स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र महाकुंभ में सफाईकर्मियों के बच्चों की शिक्षा का भी विशेष ध्यान रखा जा रहा है। हर सेक्टर में एक प्राइमरी स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र खोले जा रहे हैं। शुक्रवार को ही मेला क्षेत्र में एक प्राइमरी विद्यालय की स्थापना की गई है, जहां बच्चों को शिक्षा के साथ ही खेलकूद गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा। इन विद्यालयों में बच्चों को मिड डे मील जैसी सुविधाएं भी प्राप्त हों सकेंगी। जरूरत पड़ने पर कुछ सेक्टर्स में एक से ज्यादा प्राइमरी स्कूल भी स्थापित किए जा सकते हैं। ये सुविधाएं महाकुंभ के दौरान अस्थाई रूप से संचालित की जाएंगी। मानदेय का डीबीटी के माध्यम से भुगतान सफाईकर्मियों के मानदेय का भुगतान भी त्वरित गति से किया जा रहा है, ताकि उनकी दैनिक जरूरतें आसानी से पूरी हो सकें। तय व्यवस्था के अनुसार उनका निर्धारित मानदेय हर 15 दिन में डीबीटी के माध्यम से सीधे उनके खाते में हस्तांतरित किया जा रहा है। महाकुंभ को सफल और स्वच्छ बनाने के लिए सफाईकर्मियों के लिए एक विशेष स्वच्छ कुंभ कोष की स्थापना की गई है। इसके माध्यम से सफाईकर्मियों को हर संभव सहायता दी जा रही है। साथ ही, केंद्र और राज्य सरकार की अन्य योजनाओं से भी इन्हें जोड़ने का प्रयास हो रहा है, ताकि वे सामाजिक और आर्थिक रूप से सशक्त हो सकें। recent visitors 137

उच्च और मध्यम आय वाले देशों के युवाओं में बढ़ रहे कैंसर के मामलों की मुख्य वजहें मोटापा: शोध

वॉशिंगट  कैंसर आजकल केवल वृद्ध लोगों की समस्या नहीं रह गया है, बल्कि यह तेजी से युवाओं को भी अपनी चपेट में ले रहा है। हाल ही में 44 देशों के कैंसर रजिस्ट्री डेटा की समीक्षा में यह तथ्य सामने आया है कि आंत और पाचन तंत्र से जुड़े 13 प्रकार के कैंसर के शुरुआती मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, खासकर 50 साल से कम उम्र के लोगों में। यह वृद्धि विशेष रूप से उच्च और मध्यम आय वाले देशों में देखी जा रही है, जहां जीवनशैली और खानपान में बदलाव इसके प्रमुख कारण हो सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि युवाओं में बढ़ रहे कैंसर के मामलों की मुख्य वजहें मोटापा, निष्क्रियता, डायबिटीज, स्मोकिंग, एल्कोहल का सेवन, प्रदूषण और पश्चिमी देशों में रेड मीट का अत्यधिक सेवन हो सकती हैं। उनका यह भी माना कि कुछ अज्ञात कारक जैसे खाद्य पदार्थों में मिलाए जाने वाले रासायनिक तत्व भी इस समस्या को बढ़ा रहे हैं, जिनका अभी तक सही ढंग से पता नहीं चला है। विशेषज्ञों के अनुसार, कैंसर के अधिकतर मामले पेट और पाचन तंत्र से जुड़े होते हैं। उनका कहना है कि हर साल अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस और जापान में कोलोरेक्टल कैंसर के मामलों में औसतन दो फीसदी की वृद्धि हो रही है। ब्रिटेन में यह दर तीन फीसदी  है, जबकि कोरिया और इक्वाडोर में यह बढ़ोतरी 5% तक पहुंच गई है। ओगिनो इसे मुद्रास्फीति के जैसे बढ़ते आंकड़ों से तुलना करते हुए बताते हैं कि अगर यह वृद्धि जारी रही तो अगले 10-20 सालों में इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। मोटापा अब एक सामान्य समस्या बन चुका है, जो कैंसर के जोखिम को और बढ़ा रहा है। डॉ. एलिजाबेथ प्लैट्ज़, जो जॉन्स हॉपकिन्स ब्लूमबर्ग स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ की महामारी विज्ञानी हैं, मानती हैं कि यह रिव्यू इस बात को उजागर करता है कि युवा पीढ़ी भी अब कैंसर के शिकार हो रही है। वे कहती हैं कि मोटापा अब एक आम समस्या बन चुका है, जो पहले दुर्लभ था, और यह अब युवाओं में भी तेजी से बढ़ रहा है। वर्तमान समय में, कैंसर एक ऐसी बीमारी बन गई है जो न केवल बुढ़ापे बल्कि युवाओं में भी फैल रही है। युवा वर्ग में इसकी बढ़ती घटनाओं को देखते हुए, विशेषज्ञों का कहना है कि स्वस्थ जीवनशैली, नियमित शारीरिक गतिविधि, और संतुलित आहार को प्राथमिकता देना आवश्यक है, ताकि इस जानलेवा बीमारी से बचा जा सके।     recent visitors 106

सपा को तय करना है कि वह मुझे कहां देखना चाहते हैं: राकेश प्रताप

अमेठी  समाजवादी पार्टी से विधायक राकेश प्रताप सिंह अयोध्या दर्शन पदयात्रा निकालेंगे। यह यात्रा 11 नवंबर से शुरू होगी और 14 नवंबर को समाप्त होगी। 14 नवंबर को यात्रा में शामिल लोग प्रभु श्रीराम लला का दर्शन करेंगे। सपा विधायक ने कहा है कि यह यात्रा उन विरोधियों को करारा जवाब देने का काम करेगी जो राम के अस्तित्व पर सवाल उठाते हैं। जो अयोध्या में राम के जन्म पर सवाल उठाते हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उन्होंने पोस्ट किया। पोस्ट में लिखा, “श्रीराम जी के प्रति अपनी सामूहिक आस्था एवं विश्वास के बल पर अयोध्या दर्शन पदयात्रा का आयोजन किया गया है। आप सभी को स्नेह और आदरपूर्वक अयोध्या चलने के लिए आमंत्रित करते हुए विनम्र आग्रह है कि मेरे साथ अयोध्या धाम चलकर प्रभु राम जी के दर्शन कर परम पुण्य के भागीदार बनें।” बता दें कि यह यात्रा 11 नवंबर को गौरीगंज से शुरू होगी। 14 नवंबर को यात्रा में शामिल लोग अयोध्या के सरयू घाट पहुंचेंगे। इसके बाद हनुमान गढ़ी और प्रभु श्रीराम लला का दर्शन करेंगे। इस यात्रा को लेकर हाल ही में विधायक राकेश प्रताप सिंह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी मिले थे। उन्होंने पोस्ट में लिखा, “गोरक्ष पीठ के पीठाधीश्वर और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से आगामी 11 नवंबर 2024 से अपने गौरीगंज से अयोध्या धाम तक शुरू हो रहे श्रीराम दर्शन यात्रा को लेकर उनका मार्गदर्शन एवं आशीर्वाद प्राप्त हुआ। मुख्यमंत्री ने यात्रा सकुशल संपन्न हो और प्रभु मर्यादा पुरुषोत्तम राम जी की कृपा आप पर सदैव बनी रही ऐसी शुभकामनाएं दीं।” राकेश प्रताप सिंह की भाजपा से करीबी का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि लोकसभा चुनाव के दौरान उनके भाई समेत 11 लोगों ने भाजपा का दामन थाम लिया था। एक सवाल के जवाब में राकेश प्रताप सिंह ने कहा था कि सपा को तय करना है कि वह मुझे कहां देखना चाहते हैं।   recent visitors 97

स्पेन में बाढ़ से मरने वालों की संख्या 223 से ज्यादा हुई, 50 साल का रिकॉर्ड तोड़ा

वैलेंसिया स्पेन के पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी हिस्से वैलेंसिया, कैस्टिला-ला मांचा और अंडालूसिया में 29 अक्टूबर को अचानक से मूसलाधार बारिश के बाद बाढ़ आ गई। इस बाढ़ ने प्रभावित क्षेत्रों में तबाही मचा दी। बाढ़ की वजह से प्रभावित इलाकों में हर जगह पानी के साथ ही कीचड़ भी हो गया है। जब बाढ़ आई, तो उसमें कई गाड़ियाँ बह गई, पुल टूट गए, रेलवे की सुरंगें ध्वस्त हो गई जिससे कई जगह की ट्रेनें ठप हो गई , फसलें तबाह हो गई। कई घरों को भी बाढ़ की वजह से काफी नुकसान पहुंचा। बड़ी संख्या में घरों की बिजली गुल हो गई। कच्चे घर तो बाढ़ की चपेट में आ गए और बह गए। बाढ़ की वजह से मरने वालों की संख्या अभी भी बढ़ रही है। मरने वालों की संख्या पहुंची 223 स्पेन के वैलेंसिया, कैस्टिला-ला मांचा और अंडालूसिया में अचानक आई इस बाढ़ की वजह से मरने वालों की संख्या अब तक 223 पहुंच चुकी है। स्पेन के परिवहन मंत्री की तरफ से यह जानकारी दी गई है। 78 लोग अभी भी लापता बाढ़ की वजह से स्पेन के वैलेंसिया, कैस्टिला-ला मांचा और अंडालूसिया में अभी भी करीब 78 लोग लापता हैं। लापता लोगों की तलाश जारी है। बचाव टीम ने अब तक हज़ार से ज़्यादा लापता लोगों को ढूंढ निकाला है। मरने वालों का आंकड़ा बढ़ सकता है बाढ़ के इतने दिन बाद भी कई लोगों के लापता होने से मरने वालों का आंकड़ा बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। बचाव टीम ने हज़ारों लोगों को बाढ़ से बचाकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है। recent visitors 115