मध्यप्रदेश: जनपद पंचायत के लेखापाल को रिश्वत लेते लोकायुक्त ने रंगे हाथों पकड़ा

Madhya Pradesh: Lokayukta caught the Accountant of District Panchayat red handed taking bribe in Dhar district धार। मध्यप्रदेश के धार जिले के गंधवानी जनपद पंचायत के लेखापाल मनोज कुमार बैरागी को रिश्वत लेते हुए लोकायुक्त ने रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। ग्राम पंचायत बलवारी कला के सरपंच प्रतिनिधि गुलाब सिंह अजनारे की शिकायत पर कार्रवाई हुई है। ग्राम पंचायत में 10 लाख रुपये की राशि से सीसी रोड का निर्माण के लिए ₹3 लाख की पहली किस्त पंचायत के खाते में जारी हो चुकी थी। शेष राशि को जारी करने लेखापाल की ओर से एक मांग पत्र जिला पंचायत कार्यालय को भेजा जाना था। आवेदक गुलाब सिंह का आरोप है कि उक्त मांग पत्र को जिला पंचायत कार्यालय भेजने के एवज में लेखापाल मनोज बैरागी ने ₹50,000 की रिश्वत मांगी। इस राशि की मांग से परेशान होकर उसने पुलिस अधीक्षक लोकायुक्त राजेश सहाय को शिकायत की। लोकायुक्त द्वारा शिकायत की सत्यता की जांच में सही पाया गया। लोकायुक्त इंदौर इकाई ने आज 9 नवंबर 2024 को जनपद पंचायत कार्यालय गंधवानी में आवेदक गुलाब सिंह ने तय राशि में से ₹40,000 की राशि लेखापाल को दी, जिसे मनोज बैरागी ने जैसे ही लिया, लोकायुक्त टीम ने उसे रंगे हाथों पकड़ लिया। उसके खिलाफ धारा 7 के तहत मामला दर्ज किया गया है। कानूनी कार्यवाही जारी है। लोकायुक्त टीम मामले की बारीकी से जांच कर रही है, और आरोपी से अन्य संभावित भ्रष्टाचार के मामलों की भी पूछताछ की जा रही है। recent visitors 205

मध्य प्रदेश नर्सिंग कॉलेज घोटाला: सीबीआई जांच में 500 कॉलेजों के संचालन योग्य न होने का खुलासा

Madhya Pradesh Nursing College Scam: CBI investigation reveals that 500 colleges are not fit for operation. मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश पर हुई CBI जांच में खुलासा हुआ है कि सूबे में चल रहे 700 में से 500 नर्सिंग कॉलेज संचालन योग्य ही नहीं है। ग्वालियर कोर्ट में चल रहे मामे भी जबलपुर हाईकोर्ट ट्रांसफर होंगे। मध्य प्रदेश में संचालित बहुचर्चित नर्सिंग कॉलेजेस के घोटाले के मामलों में चल रही सीबीआई जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। नर्सिंग कॉलेजों को लेकर सीबीआई द्वारा की जा रही जांच में पता चला है कि प्रदेशभर में चल रहे 700 नर्सिंग कॉलेजेस में से 500 कॉलेज संचालन योग्य ही नहीं हैं। आपको बता दें कि, इसके पहले हुई सीबीआई जांच में सामने आया था कि, प्रदेश में संचालित सभी कॉलेजों में से महज 169 नर्सिंग कॉलेज ही योग्य थे। हालांकि, हाईकोर्ट ने सीबीआई द्वारा कराई उस जांच को एक बार फिर से बारीकी के साथ जांच करने के निर्देश दिए थे। जांच में 73 कॉलेज ही योग्य माने गए है। ग्वालियर बेंच से भी जबलपुर ट्रांसफर होंगे केस नर्सिंग कॉलेजेस से संबंधित चल रहे मामले ग्वालियर बेंच से भी जबलपुर हाईकोर्ट ही ट्रांसफर किए जाएंगे। जिन नर्सिंग कॉलेजों की सीबीआई जांच पर सवाल उठे हैं, उनमें एक और नया खुलासा हुआ है। जिन कॉलेजों में नर्सिंग काउंसिल की तरफ से पत्र भेजा गया है, उसमें से 8 डिफिशिएंट की सूची में हैं, जबकि 8 अनसूटेबल कैटेगरी में आ रहे हैं। नर्सिंग काउंसिल ने सभी 66 अनसूटेबल पाए गए नर्सिंग कॉलेज की सभी सत्रों और पाठ्यक्रमों की मान्यता निरस्त कर दिया है। recent visitors 179

खाद संकट और नर्सिंग कॉलेज मुद्दे पर जीतू पटवारी ने मोहन सरकार को घेरा

Jitu Patwari cornered Mohan government on fertilizer crisis and nursing college issue भोपाल। मध्य प्रदेश में होने वाले उपचुनाव को लेकर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस बीजेपी सरकार पर हमलावर हो गई है। खाद संकट और नर्सिंग कॉलेज मामले को लेकर पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने मोहन सरकार पर जमकर निशाना साधा है। प्रदेश में किसानों को हो रहे खाद संकट पर पटवारी ने कहा कि बुधनी जो केंद्रीय कृषि मंत्री का क्षेत्र है वहां भी लोगों को खाद की परेशानी हो रही है। बीजेपी के लोग बार-बार खाद की समस्या न होने की बात करते हैं, जबकि स्थितियां सबके सामने है। उन्होंने सवाल पूछते हुए कहा कि बीजेपी के नेता बताएं रवि और खरीफ के लिए कितना खाद चाहिए था, सरकार ने कितनी मांग की है और उसके एवज में कितनी आपूर्ति हुई है। यदि बुधनी में पर्याप्त खाद किसानों को मिला होगा तो पिछली बार एक लाख आठ हजार से बीजेपी जीती थी, इस बार 1 लाख 9000 से चुनाव जीतना चाहिए। नर्सिंग कॉलेज मामले पर भी साधा निशाना पीसीसी चीफ ने नर्सिंग कॉलेज मामले पर भी सरकार पर हमला बोला है। जीतू पटवारी ने कहा कि लंबी जांच के बाद यह स्थिति स्पष्ट हो गई है कि प्रदेश में केवल 200 कॉलेज ही ऐसे हैं, जो नियमों की पूर्ति करते हैं। उन्होंने कहा कि हम लोग लगातार भ्रष्टाचार की बात उठा रहे थे, वह सच साबित हुई। ऐसे में अब जिन लोगों ने इन कॉलेजों को मान्यता दी चाहे वह अधिकारी हो मंत्री हो या कर्मचारी हो सब पर कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मैं एक बार फिर इन सब पर कार्रवाई की मांग करता हूं और मंत्री को पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। बीजेपी विजयपुर में लूट के जरिए जीत दर्ज करना चाहती है विजयपुर विधानसभा उपचुनाव को लेकर पटवारी ने कहा कि बीजेपी विजयपुर में लूट के जरिए जीत दर्ज करना चाहती है। लेकिन कांग्रेस का एक-एक कार्यकर्ता इस लूट के खिलाफ शासन प्रशासन और बीजेपी नेताओं से लड़ने के लिए तैयार खड़ा है। उन्होंने कहा मैं खुद 11 तारीख तक विजयपुर में रहूंगा उसके बाद विजयपुर के आसपास सबलगढ़ शिवपुरी और श्योपुर में डेरा डालूंगा। ताकि विजयपुर में जनमत के साथ लूट ना हो सके। उमंग सिंगार के आरोपों पर पटवारी ने कहा उमंग सिंगार के आरोपों पर जीतू पटवारी ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष एक जिम्मेदार पद पर है। यदि उन्होंने कोई बात कही है तो बिल्कुल प्रमाणिक होगी। रही बात बीजेपी को प्रमाण देने की तो बीजेपी बताएं कि रामनिवास रावत क्या फ्री फोकट में बीजेपी गए हैं। 2020 में जो बड़ी संख्या में विधायक जॉइन कराए, क्या वह मुफ्त में बीजेपी ज्वाइन किया और समय आने पर प्रमाण भी उपलब्ध करा दिए जाएंगे। बीजेपी के नेता तो खुद ही इस बात को स्वीकारते हैं कि भाजपा नेता खरीद फरोख्त करते हैं। लाड़ली बहनों से की वादाखिलाफी लाड़ली बहन की किस्त जारी करने पर जीतू पटवारी ने कहा कि सरकार ने महिलाओं को 3000 रुपए देने का वादा किया था। लेकिन केवल 1250 रुपए दे रहे हैं। यह सीधे तौर पर महिलाओं के साथ छलावा है। महिलाएं भी अपने आप को छला हुआ महसूस कर रही है। इन दोनों उप चुनाव में महिलाएं इसका जवाब देंगी। पीएम मोदी के “एक रहोगे सेफ रहोगे” के बयान पर किया पलटवार पीएम मोदी के एक रहोगे सेफ रहोगे वाले बयान पर भी पटवारी ने निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि भारत के संविधान की भी यही भावना है कि सब भारत के लोग एक साथ मिलजुल कर रहे। लेकिन बीजेपी के लोग मंच से तो सबके एकजुटता होने की बात करते हैं। लेकिन पीछे के रास्ते समाज में बांटने का काम करते हैं। काम, संविधान को कमजोर करने का मोदी प्रयास करते हैं। उन्होंने कहा राहुल गांधी भी यही कहते हैं कि भारत की अखंडता बनी रहनी चाहिए। प्रधानमंत्री को यह नारा भी लगाना चाहिए कि हिंदू मुस्लिम सिख इसाई हम आपस में भाई-भाई। भारत की संस्कृति में सबको एकजुट रहने की बात कही गई है। recent visitors 157

अगर महाविकास अघाड़ी जीत जाएगा तो वह किसानों की जमीन वक्फ को दे देगा: अमित शाह

सतारा महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे करीब आ रहा है, विरोधी दल एक दूसरे पर हमले तेज कर रहे हैं।  गृह मंत्री अमित शाह ने सतारा जिले के कराड में रैली की और महाविकास अघाड़ी गढबंधन पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने वक्फ कानून में बदलाव किए जिससे कि वक्फ बोर्ड किसी की भी जमीन पर कब्जा करने लगा। कर्नाटक की सरकार ने पूरा का पूरा गांव वक्फ को दे दिया। उन्होंने कहा, अगर महाविकास अघाड़ी जीत जाएगा तो वह किसानों की जमीन वक्फ को दे देगा। पवार और राहुल गांधी नहीं चाहते कि वक्फ कानून में संशोधन किया जाए। हमने ड्राफ्ट तैयार कर लिया है और आने वाले सेशन में इसे पास करवाएंगे। अमित शाह ने शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) प्रमुख उद्धव ठाकरे पर हमला करते हुए शुक्रवार को कहा कि उन्हें उन लोगों के साथ गठबंधन करने के लिए शर्म आनी चाहिए जो हिंदुत्व को पाखंड कहते हैं, भगवान राम के अस्तित्व पर सवाल उठाते हैं और आतंकवादी अजमल कसाब को बिरयानी खिलाते हैं। शाह ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा शरद पवार) प्रमुख शरद पवार पर यह झूठ बोलने का आरोप लगाया कि महाराष्ट्र में निवेश नहीं आ रहा है। शाह ने पवार पर पलटवार करते हुए कहा कि महा विकास आघाडी (एमवीए) के शासन के दौरान विकास के मामले में राज्य की ‘रैंकिंग’ गिर गई थी लेकिन अब महायुति सरकार के तहत यह प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) आकर्षित कर रहा है। शाह ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को ‘झूठ की फैक्टरी’’ करार दिया और आरोप लगाया कि वह अग्निपथ योजना के बारे में गलत सूचना फैला रहे हैं।केन्द्रीय गृह मंत्री ने ठाकरे पर निशाना साधते हुए कहा कि ठाकरे उन लोगों के साथ बैठे हैं जो हिंदुत्व को ‘पाखंड’ कहते हैं। उन्होंने कहा, ‘आप उन लोगों के साथ बैठे हैं जिन्होंने अफजल खान और औरंगजेब की कब्रों की रक्षा की। आप उन लोगों के साथ बैठे हैं जो हिंदुओं को आतंकवादी कहते हैं। आप उन लोगों के साथ बैठे हैं जिन्होंने (26/11 मुंबई आतंकवादी हमले के दोषी) अजमल कसाब को बिरयानी खिलाई। आप उन लोगों के साथ बैठे हैं जो भगवान राम के अस्तित्व पर सवाल उठाते हैं। आपको शर्म आनी चाहिए।’’ महाराष्ट्र में 2019 के विधानसभा चुनाव के बाद ठाकरे ने कांग्रेस और एनसीपी के साथ हाथ मिला लिया था। शाह ने कहा, ‘शरद पवार इस उम्र में भी झूठ बोलने से बाज नहीं आ रहे। वह कहते हैं कि महाराष्ट्र में निवेश नहीं आ रहा है। मैं आपको बताना चाहता हूं कि उद्धव जी के साथ आपकी सरकार के दौरान महाराष्ट्र की विकास रैंकिंग गिर गई थी लेकिन (देवेंद्र) फडणवीस और (एकनाथ) शिंदे के नेतृत्व वाली हमारी सरकार के सत्ता में आने के बाद महाराष्ट्र में एफडीआई आ रहा है।’ शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने फडणवीस और शिंदे के माध्यम से महाराष्ट्र में सड़क संपर्क, समृद्धि एक्सप्रेसवे, मुंबई कोस्टल रोड, अटल सेतु, मुंबई और पुणे में मेट्रो ट्रेनें, सिंचाई परियोजनाओं जैसी कई परियोजनाएं शुरू की हैं। सातारा को वीरों की भूमि बताते हुए उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र के हजारों युवा सेना में सेवारत हैं। उन्होंने कहा, ‘इंदिरा गांधी ने ‘एक रैंक एक पेंशन’ का वादा किया था लेकिन कांग्रेस के 40 साल तक सत्ता में रहने के बावजूद वादा पूरा नहीं किया गया। मोदी ने इसे पूरा किया।’ recent visitors 91

HC में नर्मदा के किनारे की जमीन पर वक्फ बोर्ड के दावे-आपत्ति पर उठे सवाल

जबलपुर  मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) हाई कोर्ट (MP High Court) में एक याचिका दाखिल की गई है, जिसमें नर्मदा नदी (Narmada River) के किनारे की सरकारी जमीन पर वक्फ का दावा किए जाने पर सवाल उठाया गया है. मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice) सुरेश कुमार कैत और न्यायमूर्ति विवेक जैन की पीठ ने मामले की प्राथमिक सुनवाई के बाद स्थिति को बनाए रखने का अंतरिम आदेश दिया है. साथ ही, राज्य सरकार और संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करते हुए उनसे जवाब मांगा गया है. याचिकाकर्ता ने क्या कहा? नर्मदापुरम के समाजसेवी ओमप्रकाश शर्मा ने अदालत में अपनी याचिका में बताया कि उन्होंने नर्मदा किनारे की जमीन पर बड़े पैमाने पर पौधारोपण किया था, जिससे वहां हरियाली बढ़ी और मृदा क्षरण की समस्या में कमी आयी है. वहीं इससे नर्मदा के तटबंधों को भी स्थिरता मिली है. याचिका में दावा किया गया कि मोहम्मद मकसूद नामक व्यक्ति ने इस जमीन को वक्फ की बता कर शरद सिंह के नाम पर पंजीकृत करा दिया है. इस विवाद के चलते वहां के पेड़ काटकर निर्माण कार्य की तैयारी की जा रही है. वक्फ बोर्ड की है ये आपत्ति सुनवाई के दौरान कोर्ट को सूचित किया गया कि जब जमीन के नामांतरण का आवेदन किया गया, तब वक्फ बोर्ड ने इस पर आपत्ति जताई थी. इससे पहले भी कोर्ट ने एक जनहित याचिका के दौरान यह निर्देश दिया था कि नर्मदा के किनारे 300 मीटर के दायरे में किसी भी तरह का निर्माण नहीं किया जा सकता. ऐसे में, यह सवाल उठता है कि नजूल सीट नंबर-46 पर स्थित सरकारी जमीन, जिसे दस्तावेजों में 'बंगला' के रूप में दर्ज किया गया है, वक्फ बोर्ड की जमीन कैसे मानी जा सकती है. अगली सुनवाई कब होगी? इस मामले की अगली सुनवाई के लिए संबंधित पक्षों से उनके जवाब आने के बाद कोर्ट अगला कदम तय करेगा. recent visitors 73

छत्‍तीसगढ़ पुलिस विभाग में फेरबदल, 36 अफसरों का तबादला, गृह विभाग ने जारी किया आदेश

रायपुर छत्तीसगढ़ में नगरीय निकाय चुनाव होने हैं. चुनाव की घोषणा के पहले अफसरों के ट्रांसफर का सिलसिला शुरू हो गया है. पुलिस विभाग में राज्य प्रशासनिक सेवा के 36 अफसरों का ट्रांसफर किया गया है. पीएचक्यू ने शुक्रवार की देर रात अफसरों के ट्रांसफर की सूची जारी की है. इनमें 11 अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) और 25 उप पुलिस अधीक्षक (DSP) शामिल हैं. अंतागढ़ के एसडीओपी अमरनाथ सिदार को उप पुलिस अधीक्षक रायपुर पदस्थ करते हुए गृहमंत्री का सुरक्षा अधिकारी बनाया गया है. इन अफसरों का ट्रांसफर जारी सूची के मुताबिक़ अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक बिलासपुर उमेश कश्यप को अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक जांजगीर-चाम्पा, शैलेंद्र कुमार पांडे को अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक धमतरी, दुर्ग की अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ऋचा मिश्रा को अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक यातायात दुर्ग बनाया गया है. इसके अलावा गरिमा द्विवेदी को गरियाबंद का अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक,मोनिका ठाकुर को बालोद की अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, राजेंद्र जायसवाल बिलासपुर के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक होंगे. मेघा टेंभुरकर को सेनानी, 3री वाहिनी अमलेश्वर दुर्ग में पदस्थापना दी गई है यूलैंडन यार्क को बीजापुर का अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, उद्यन बेहार को अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक बिलासपुर निमिषा पांडेय को अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सारंगढ़ और दिनेश कुमार सिन्हा को कांकेर का अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक बनाया गया है. डीएसपी का भी ट्रांसफर एएसपी के अलावा 25 सीएसपी रैंक के अफसरों का अभी ट्रांसफर हुआ है. उप पुलिस अधीक्षक जितेंद्र खूटे को  जांजगीर-चांपा, रागिनी मिश्रा को एसडीओपी कुरूद,  इरफान हसन काजी को  सुभाषचंद्र बोस, राज्य पुलिस अकादमी, चंदखुरी, अकीक खोखर को सहायक सेनानी, 13वीं वाहिनी बांगो,  ललिता मेहर को एसडीओपी सरायपाली, रमेश चंद्रा को  उप पुलिस अधीक्षक, मुख्यालय, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, मंजूलता बाज को  बालक विरूद्ध अपराध अन्वेषण शाखा जशपुर,  मिलिंद पाण्डेय को बागबहरा एसडीओपी बनाया गया है. इसके अलावा दिलीप कोसले को एसडीओपी बगीचा जशपुर, अरूण नेताम को एसडीओपी केशकाल, मयंक तिवारी को  एसडीओपी, मुंगेली, सतीश ठाकुर को  उप पुलिस अधीक्षक यातायात रायपुर (नवा रायपुर) रश्मित कौर चांवला को उप पुलिस अधीक्षक बिलासपुर और कविता ठाकुर को उप पुलिस अधीक्षक जांजगीर-चांपा ट्रांसफर किया गया है. सिदार बने गृहमंत्री के सुरक्षा अधिकारी इसी प्रकार सुमित गुप्ता को एसडीओपी चंद्रपुर, शिवचरण सिंह परिहार को  उप पुलिस अधीक्षक यातायात, बिलासपुर,  आकर्षि कश्यप को  उप पुलिस अधीक्षक दुर्ग, अखिलेश कौशिक- एसडीओपी बोड़ला, कवर्धा, मोनिका सिंह परिहार को  सहायक सेनानी 17वीं वाहिनी, छसबल, कवर्धा, संजय तिवारी को सहायक सेनानी, 2वीं वाहिनी, छसबल, सकरी बिलासपुर, अमरनाथ सिदार को उप पुलिस अधीक्षक रायपुर पदस्थ करते हुए गृहमंत्री का सुरक्षा अधिकारी बनाया गया है. निमितेश सिंह को एसडीओपी पंडरिया, कवर्धा, आशीष शुक्ला को उप पुलिस अधीक्षक मुख्यालय कवर्धा, सतीश धुर्वे  को उप पुलिस अधीक्षक एसटीएफ बघेरा, दुर्ग, साधना सिंह को रायगढ़ का उप पुलिस अधीक्षक बनाया गया है. recent visitors 97

विधानसभा चुनावों में बीजेपी को मजबूत करने RSS ने चलाया महाअभियान, 65 संगठन भी साथ

मुंबई  राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ अपने 65 से भी ज्यादा सहयोगी संगठनों के जरिए महाराष्ट्र में 'सजग रहो' नाम से एक अभियान चला रहा है। इस अभियान का मकसद सिर्फ विधानसभा चुनावों में बीजेपी को मजबूत करना ही नहीं है, बल्कि इसे 'हिंदुओं को बांटने और उन्हें और भी छोटे-छोटे समूहों में विभाजित करने के बड़े प्रयास' के खिलाफ एक जवाबी कार्रवाई के तौर पर भी देखता है। आरएसएस का मानना है कि इस प्रयास का असर राजनीति से भी आगे तक होगा। यह अभियान ऐसे समय में चलाया जा रहा है जब महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों की सुगबुगाहट तेज हो गई है। इस दौरान बीजेपी और महायुति को हिंदू वोट बैंक को अपने पाले में लाने की कोशिशें भी तेज़ होती दिखाई दे रही हैं। आरएसएस का 'सजग रहो' अभियान लोकसभा चुनावों और बांग्लादेश में हिंदुओं पर हाल ही में हुए हमलों के बाद चलाए जा रहे तीन राष्ट्रीय अभियान का सबसे नया हिस्सा है। इस तीन सूत्रीय अभियान के पहले दो सूत्र हैं योगी आदित्यनाथ की टिप्पणी 'बांटेंगे तो काटेंगे' और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की टिप्पणी 'एक है तो सेफ हैं'। पीएम ने धुले में दिया था ये बयान प्रधानमंत्री मोदी ने 'एक है तो सेफ है' टिप्पणी धुले में की थी, जहां बीजेपी-आरएसएस का कहना है कि मालेगांव में मुस्लिम वोटों के एकजुट होने के कारण लोकसभा चुनावों में बीजेपी उम्मीदवार को मामूली अंतर से हार का सामना करना पड़ा था। इसी कड़ी में योगी आदित्यनाथ ने महाराष्ट्र के वाशिम में कहा था 'एक है तो नेक हैं'। यहां 'नेक' का मतलब है कि अगर हिंदुओं को बांटा नहीं गया तो वे नेक बने रहेंगे। उन्हें सिर्फ़ आत्मरक्षा के हिंसा का सहारा लेने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ेगा। "किसी के खिलाफ नहीं है ये अभियान' हालांकि संघ के सूत्रों ने कहा कि 'सजग रहो' और 'एक है तो सेफ हैं' किसी के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि इनका मकसद हिंदुओं के बीच जाति विभाजन को खत्म करना है। बीजेपी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा कि आरएसएस के 'स्वयंसेवकों' और 65 से ज़्यादा गैर सरकारी संगठनों द्वारा इस संदेश को लोगों तक पहुंचाने के लिए बैठकें आयोजित की जा रही हैं। संघ के सूत्रों के मुताबिक, हालांकि इस अभियान का तात्कालिक उद्देश्य महाराष्ट्र चुनाव हैं, लेकिन यह एक बड़ी घटना के जवाब में वैचारिक और बौद्धिक प्रतिक्रिया के उभार को दर्शाता है। यह घटना यह है कि जहां एक तरफ हिंदू जाति के आधार पर बंटे हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ़ मुस्लिम अपने मतभेदों को भुलाकर एकजुट होकर वोट बैंक के रूप में उभर रहे हैं और उनका मकसद बीजेपी को सत्ता से बाहर देखना है। इस अभियान में ये शामिल इस अभियान में शामिल समूहों में चाणक्य प्रतिष्ठान, मातंग साहित्य परिषद और रणरागिनी सेवाभावी संस्था शामिल हैं। महाराष्ट्र में संघ की सभी चारों 'प्रांत' या क्षेत्रीय इकाइयां- कोंकण (मुंबई और गोवा सहित), देवगिरि (मराठवाड़ा), पश्चिम महाराष्ट्र (जिसमें नासिक और उत्तरी महाराष्ट्र के कुछ हिस्से शामिल हैं) और विदर्भ (जहां RSS का मुख्यालय है) शाखा स्तर पर बैठकें आयोजित करके इस अभियान में शामिल हैं। इस अभियान के मुख्य आकर्षणों में से एक है धुले लोकसभा और मुंबई उत्तर पूर्व लोकसभा सीट के नतीजों का उदाहरण के तौर पर इस्तेमाल करना। यह उस चीज़ की ओर इशारा करता है जिसे संघ 'मालेगांव मॉडल' कहता है और जिसके बारे में उसका कहना है कि इससे 'बंटे हुए' हिंदू समुदाय को नुकसान पहुंचा है। आधिकारित तौर पर इस अभियान की जिम्मेदारी नहीं ले रहा आरएसएस आरएसएस आधिकारिक तौर पर संगठन के तौर पर इस अभियान की ज़िम्मेदारी नहीं ले रहा है, बल्कि इसे केवल 'स्वयंसेवकों की एक पहल' बता रहा है। आरएसएस के एक पदाधिकारी ने कहा कि स्वयंसेवकों ने हिंदू समाज को यह बताने की अगुवाई की है कि उन्हें जाति के आधार पर विभाजित नहीं होना चाहिए, खास तौर पर ऐसे समय में जब राज्य में मराठा-ओबीसी विभाजन गहरा गया है। recent visitors 86