गांदरबल में बड़े पैमाने पर आतंकवादियों का पता लगाने के लिए तलाशी अभियान शुरू

श्रीनगर कश्मीर में नागरिकों पर लंबे समय बाद हुए सबसे घातक हमलों में से एक के लिए जिम्मेदार आतंकवादियों का पता लगाने के लिए सुरक्षा बलों ने सोमवार को बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान जारी रखा। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। रणनीतिक श्रीनगर-लेह राजमार्ग पर पर्यटक रिजॉर्ट सोनमर्ग के पास एक श्रमिक शिविर पर आतंकवादी हमले में एक कश्मीरी डॉक्टर सहित एक अवसंरचना कंपनी के सात कर्मचारी मारे गए। हमले में पांच अन्य कर्मचारी घायल भी हुए। श्रमिकों पर यह हमला जम्मू-कश्मीर सरकार द्वारा सामान्य स्थिति दिखाने के लिए श्रीनगर में एक प्रमुख खेल आयोजन ‘कश्मीर मैराथन’ की मेजबानी के कुछ घंटों बाद हुआ। अधिकारियों ने बताया कि हमले के तुरंत बाद पुलिस और सेना ने हमलावरों का पता लगाने के लिए क्षेत्र में एक संयुक्त तलाशी अभियान शुरू किया, जिनकी संख्या दो से तीन होने का संदेह है। उन्होंने कहा, ‘‘आतंकवादियों का पता लगाने के लिए बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान जारी है।” उन्होंने बताया कि सुरक्षा बलों ने आसपास के जंगलों में तलाशी के लिए ड्रोन और खोजी कुत्तों को भी तैनात किया है। शीर्ष सुरक्षा अधिकारी अभियान की निगरानी के लिए गांदरबल में डेरा डाले हुए हैं। शुरुआती जांच में मदद के लिए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की टीम भी गांदरबल पहुंच गयी है। आतंकवादी समूह द रेसिस्टेंस फ्रंट, जिसे लश्कर-ए-तैयबा का छाया समूह माना जाता है, ने निर्माण श्रमिकों पर हमले की जिम्मेदारी ली है। पुलिस सूत्रों ने बताया कि आतंकवादियों ने रविवार शाम को श्रीनगर-सोनमर्ग मार्ग पर गगनगीर के पास 6.5 किमी लंबी जेड-मोड़ सुरंग का निर्माण करने वाली बुनियादी ढांचा कंपनी द्वारा स्थापित एक शिविर को निशाना बनाकर हमला किया। जेड-मोड़ सुरंग उन दो सुरंगों में से एक है जो लद्दाख को हर मौसम में खुली रहने वाली सड़क के माध्यम से बाहरी दुनिया से जोड़ेगी। इसका निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है। हमले में मारे गए लोगों में एक कश्मीरी डॉक्टर के अलावा जम्मू-कश्मीर के दो, बिहार के तीन और पंजाब तथा मध्य प्रदेश के एक-एक व्यक्ति शामिल हैं।   recent visitors 65

स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल: मंत्री को नहीं पता शू-कवर और सर्जिकल कवर का अंतर

Question on health system: Minister does not know the difference between shoe-cover and surgical cover बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था का हाल: मंत्री और स्वास्थ्य कर्मियों की चूक ने उजागर की स्थिति पटना ! बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था पर एक और चौंकाने वाली घटना ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया है। हाल ही में एक अस्पताल में, स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों ने एक बेहद ही अजीब और शर्मनाक गलती की। उन्होंने अस्पताल के एक उच्चाधिकारी को सर्जिकल हेड कवर की बजाय सिर पर शू-कवर पहना दिया। यह घटना तब और गंभीर हो गई जब खुद मंत्री जी को इस अंतर का एहसास नहीं हुआ और वे इसे सामान्य मानते रहे। यह घटना बिहार की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था का एक और उदाहरण है, जिसमें ना केवल संसाधनों की कमी है बल्कि प्रशासनिक क्षमता और जागरूकता का भी अभाव है। मंत्री जी का इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया ना देना और इसे नजरअंदाज करना, उनके कार्यकाल पर गंभीर सवाल खड़े करता है। कई लोग यह दावा कर रहे हैं कि बिहार के वर्तमान स्वास्थ्य मंत्री अब तक के सबसे नाकारा और असफल मंत्री रहे हैं। उनके नेतृत्व में अस्पतालों की स्थिति और भी खराब हुई है, जहां कर्मचारियों को बुनियादी चिकित्सा उपकरणों और प्रक्रियाओं का ज्ञान तक नहीं है। इस घटना ने बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था की खस्ता हालत को उजागर किया है और आम जनता के बीच गहरी नाराजगी और निराशा पैदा की है। अब यह देखना होगा कि इस पर कोई सुधारात्मक कदम उठाए जाते हैं या फिर यह भी बिहार की अन्य समस्याओं की तरह भुला दिया जाएगा। अब सवाल उठता है? बिहार की जनता ने स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार की उम्मीदें जताई थीं, लेकिन इस तरह की घटनाएं यह दर्शाती हैं कि सुधार की राह अभी बहुत लंबी है। जनता अब कार्रवाई की उम्मीद कर रही है, ताकि ऐसे लापरवाह कदमों से राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार हो सके। recent visitors 148

मैं जम्मू- कश्मीर के गांदरबल में हुए कायरतापूर्ण आतंकवादी हमले की हम कड़ी निंदा करता हूं: खरगे

नई दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी तथा पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने जम्मू-कश्मीर के गांदरबल में हुए आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा करते हुए पीड़ित परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है। श्री खरगे ने सोमवार को कहा, ‘‘मैं जम्मू- कश्मीर के गांदरबल में हुए कायरतापूर्ण आतंकवादी हमले की हम कड़ी निंदा करता हूं जिसमे कई श्रमिक और एक डॉक्टर मारे गए हैं। लक्षित हिंसा का यह अमानवीय और घृणित कृत्य से भारत जम्मू-कश्मीर में प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के निर्माण से पीछे नहीं हटेगा। एक राष्ट्र के रूप में, हम आतंकवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई में एक साथ हैं। पीड़ितों के परिवारों के प्रति हमारी हार्दिक संवेदना। हम घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हैं।” श्री गांधी ने कहा, ‘‘गांदरबल में आतंकवादी हमले में एक डॉक्टर और प्रवासी मज़दूरों समेत कई लोगों की हत्या बहुत ही कायरतापूर्ण और अक्षम्य अपराध है। सभी शोकाकुल परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त करता हूं और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की आशा करता हूं।” उन्होंने कहा, ‘‘आतंकवादियों का यह दुस्साहस जम्मू-कश्मीर में निर्माण का क्रम और लोगों का विश्वास कभी नहीं तोड़ पाएगा। आतंकवाद के खिलाफ इस लड़ाई में पूरा देश एकजुट है।” श्रीमती वाड्रा ने कहा, ‘‘जम्मू- कश्मीर के गांदरबल में कायराना आतंकी हमले में पांच मजदूरों समेत छह नागरिकों की हत्या अत्यंत निंदनीय है। निर्दोष नागरिकों की हत्या करके आम जनता के बीच हिंसा और दहशत फैलाने जैसे कृत्य मानवता के विरुद्ध अपराध हैं। इसके खिलाफ पूरा देश एकजुट है। शोक- संतप्त परिवारों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं एवं घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना।”   recent visitors 88

कौन हैं कमाल फारूकी? कांग्रेस में पूरे 20 साल बाद फिर से वरिष्ठ नेता कमाल फारूकी हुए शामिल

मुंबई महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस अल्पसंख्यक कमेटी के पूर्व अध्यक्ष और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) के सदस्य रहे वरिष्ठ नेता कमाल फारूकी आज (सोमवार, 21 अक्तूबर को) दो दशक यानी पूरे 20 साल बाद फिर से कांग्रेस में शामिल हो गए हैं। फारूकी अपने बेटे और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के पूर्व प्रवक्ता उमर कमाल फारूकी के साथ कांग्रेस में लौटे हैं। वह 2013 तक समाजवादी पार्टी में भी रह चुके हैं। महाराष्ट्र चुनावों से पहले कमाल फारूकी ने कांग्रेस पार्टी में अपनी वापसी बारे में एक बयान जारी कर जानकारी दी है। अपने बयान में फारूकी ने कहा, "भाजपा और उसके जैसे दलों की सांप्रदायिक घृणास्पद दक्षिणपंथी विचारधारा को हराने के लिए कांग्रेस में वापसी करने का फैसला किया है। मौजूदा माहौल में कांग्रेस ही एकमात्र पार्टी है जो वास्तव में हमारे देश की सच्ची भावना का नेतृत्व कर सकती है और उसे पुनर्स्थापित कर सकती है।" फारूकी की घर वापसी को महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में कांग्रेस पार्टी के लिए एक बड़ी बढ़त के रूप में देखा जा रहा है। कौन हैं कमाल फारूकी कमाल फारूकी महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र के वरिष्ठ नेता हैं। 2004 में कांग्रेस छोड़ने के बाद फारूकी ने बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) के टिकट पर चुनाव लड़ाा था, लेकिन बाद में शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) में शामिल हो गए थे। उनके बेटे उमर कमाल फारूकी एनसीपी के राज्य प्रवक्ता होने के साथ-साथ एनसीपी की छात्र शाखा के उपाध्यक्ष के रूप में भी काम कर चुके हैं। कांग्रेस का क्या प्लान? दरअसल, महाराष्ट्र चुनावों से ऐन पहले कमाल फारूकी की घर वापसी से कांग्रेस पार्टी को उम्मीद है कि इससे उन्हें महाराष्ट्र के करीब 11.5% मुस्लिम वोटों को अपने पक्ष में लामबंद करने में मदद मिलेगी। हाल के कुछ वर्षों में असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) जैसी पार्टियों ने कई क्षेत्रों में, खासकर औरंगाबाद जैसे जिलों में अपनी पैठ बना ली है, जो कभी कांग्रेस का गढ़ हुआ करता था, लेकिन हाल के वर्षों में यहां मुस्लिम मतदाताओं का कांग्रेस के प्रति समर्थन घटता जा रहा है। recent visitors 144

हरियाणा में हुए मंत्रिमंडल के विभागों का आवंटन, मुख्यमंत्री नायब सिंह को कई महत्वपूर्ण विभाग सौंपे गए

चंडीगढ़ हरियाणा सरकार ने मंत्रिमंडल के विभागों के आवंटन की अधिसूचना जारी कर दी है। राज्य के मुख्यमंत्री नायब सिंह को कई महत्वपूर्ण विभाग सौंपे गए हैं, जिनमें गृह, वित्त, योजना, नगर और ग्राम विकास, सूचना और जनसंपर्क, न्याय प्रशासन, और कई अन्य शामिल हैं। इनके अलावा, अन्य मंत्रियों को भी विभिन्न विभाग आवंटित किए गए हैं, जैसे अनिल विज को ऊर्जा, परिवहन और श्रम विभाग, कृष्ण लाल पंवार को विकास और पंचायत, खनन और भूविज्ञान विभाग आदि। सीएम नायब सिंह सैनी को गृह विभाग, वित्त विभाग, आबकारी एवं कराधान विभाग, योजना विभाग, नगर एवं ग्राम नियोजन और शहरी संपदा विभाग सूचना, जनसंपर्क एवं भाषा-संस्कृति विभाग, अभियोजन विभाग, सामान्य प्रशासन हाउसिंग फॉर ऑल, सीआईडी, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग, कानून एवं विधायी विभाग और वो सभी विभाग जो किसी को अलॉट नहीं हुए हैं, आवंटित किए गए हैं। कैबिनेट मंत्री अनिल विज को परिवहन विभाग, श्रम विभाग और ऊर्जा विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। कैबिनेट मंत्री कृष्ण लाल पंवार को पंचायत एवं विकास और खान एवं भूविज्ञान विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। कैबिनेट मंत्री राव नरबीर को उद्योग एवं वाणिज्य विभाग, पर्यावरण एवं वन विभाग, विदेश सहयोग विभाग और सैनिक एवं अर्धसैनिक कल्याण की जिम्मेदारी दी गई है। कैबिनेट मंत्री महिपाल ढांडा को बेसिक शिक्षा एवं उच्च शिक्षा विभाग, संसदीय कार्य, अभिलेखागार विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल को राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग, शहरी स्थानीय निकाय विभाग और नागरिक उड्डयन विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। कैबिनेट मंत्री अरविंद शर्मा को सहकारिता विभाग, जेल विभाग, चुनाव विभाग और विरासत एवं पर्यटन विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। कैबिनेट मंत्री श्याम सिंह राणा को कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, पशुपालन एवं डेयरी विभाग और मछली पालन विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। कैबिनेट मंत्री रणबीर गंगवा को जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग और लोक निर्माण विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। कैबिनेट मंत्री कृष्ण बेदी को सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता, अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण और अंत्योदय (सेवा) विभाग, आतिथ्य विभाग और वास्तुकला विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। कैबिनेट मंत्री श्रुति चौधरी को महिला एवं बाल विकास विभाग, सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। कैबिनेट मंत्री आरती राव को स्वास्थ्य विभाग, चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान और आयुष विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) राजेश नागर को खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले (स्वतंत्र प्रभार) और मुद्रण एवं लेखन सामग्री विभाग( स्वतंत्र प्रभार) की जिम्मेदारी दी गई है। राज्यमंत्री गौरव गौतम को युवा सशक्तिकरण एवं उद्यमिता (स्वतंत्र प्रभार), खेल विभाग (स्वतंत्र प्रभार) और कानून एवं विधायी विभाग ( सलंग्न मुख्यमंत्री) की जिम्मेदारी दी गई है।   recent visitors 74

‘सोनमर्ग क्षेत्र के गगनगीर में गैर-स्थानीय मजदूरों पर नृशंस और कायरतापूर्ण हमले की बहुत दुखद खबर है: उमर अब्दुल्ला

जम्मू-कश्मीर जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने गांदरबल आतंकी हमले पर जो प्रतिक्रिया दी है, उसे लेकर इंटरनेट यूजर्स भड़के हुए हैं। अब्दुल्ला ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट करके कहा था, 'सोनमर्ग क्षेत्र के गगनगीर में गैर-स्थानीय मजदूरों पर नृशंस और कायरतापूर्ण हमले की बहुत दुखद खबर है। ये लोग क्षेत्र में एक प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजना पर काम कर रहे थे। इस उग्रवादी हमले में 2 लोग मारे गए हैं और दो से तीन अन्य घायल हुए हैं। मैं निहत्थे निर्दोष लोगों पर इस हमले की कड़ी निंदा करता हूं और उनके प्रियजनों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करता हूं।' उमर अब्दुल्ला ने इस हमले की निंदा की, जो इस केंद्र शासित प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में उनके शपथ ग्रहण के महज 4 दिन बाद हुआ। उन्होंने घटना के कुछ वक्त बाद दूसरी पोस्ट में लिखा था, ‘गगनगीर हमले में मृतकों की संख्या अंतिम नहीं है क्योंकि स्थानीय और गैर-स्थानीय दोनों तरह के कई मजदूर घायल हुए हैं। मैं घायलों के पूरी तरह ठीक होने की प्रार्थना कर रहा हूं क्योंकि गंभीर रूप से घायलों को श्रीनगर के एसकेआईएमएस में रेफर किया जा रहा है।’ 'आतंकवादी के बजाय उग्रवादी शब्द चुना' गांदरबल हमले की उमर अब्दुल्ला ने निंदा जरूर की, मगर इंटरनेट यूजर्स को यह बात नागवार गुजरी कि सीएम ने इस घटना के लिए उग्रवादी हमले का इस्तेमाल किया। लोग इस बात को लेकर भड़के हुए हैं कि उन्होंने इसे आतंकवादी हमला क्यों नहीं बताया। उमर अब्दुल्ला की पोस्ट को लेकर सोशल मीडिया पर कई लोगों की टिप्पणियां आईं, जिसमें बताया गया कि कैसे उन्होंने 'आतंकवादी' के बजाय 'उग्रवादी' शब्द चुना। एक यूजर ने लिखा, 'ओह, उग्रवादी वापस आ गए हैं।' इंटरनेट यूजर्स ने लगाई फटकार एक अन्य यूजर ने लिखा, ‘याद रखिए कि आप केंद्रशासित प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं। आपकी हरकतों पर ध्यान दिया जा रहा है। इससे राज्य का दर्जा रद्द किए जाने की संभावना बन सकती है।’ बता दें कि जम्मू-कश्मीर के गांदरबल जिले में श्रीनगर-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग पर सुरंग निर्माण स्थल पर आतंकवादी हमला हुआ। इसमें एक डॉक्टर और 6 श्रमिकों की मौत हो गई। आतंकवादियों ने मजदूरों के समूह पर अंधाधुंध गोलीबारी की, जिसमें स्थानीय और बाहरी लोग दोनों शामिल थे। माना जाता है कि आंतकवादियों की संख्या कम से कम 2 थी। दो श्रमिकों की मौके पर ही मौत हो गयी जबकि 4 अन्य घायल श्रमिकों एवं एक डॉक्टर ने बाद में दम तोड़ दिया। recent visitors 70

पीएम मोदी की डिग्री वाले केस में अरविंद केजरीवाल के राष्ट्रीय संयोजक की याचिका को सर्वोच्च अदालत ने खारिज किया

नई दिल्ली पीएम नरेंद्र मोदी की डिग्री को लेकर की गई टिप्पणी वाले मामले में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को सुप्रीम कोर्ट से झटका मिला है। आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक की याचिका को सर्वोच्च अदालत ने खारिज कर दिया है। गुजरात यूनिवर्सिटी की ओर दर्ज मानहानि केस में केजरीवाल के खिलाफ ट्रायल कोर्ट ने समन जारी किया था। पूर्व सीएम ने इसे रद्द कराने के लिए पहले हाई कोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। जस्टिस ऋषिकेश रॉय और एसवीएन भाटी की बेंच ने हस्तक्षेप से इनकार करते हुए कहा कि इसी तरह की याचिका आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने भी दायर की थी और इस अदालत ने खारिज कर दिया था। बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, गुजरात हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए दायर याचिका को खारिज करते हुए अदालत ने कहा, 'हम हस्तक्षेप के इच्छुक नहीं हैं, एक याचिकाकर्ता हमारे पास आए थे और इसे खारिज कर दिया गया था।' केजरीवाल की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि संजय सिंह की ओर से दिया गया बयान अलग था, लेकिन बेंच ने इसे नहीं माना। इससे पहले गुजरात हाई कोर्ट ने फरवरी में समन पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। हाई कोर्ट से निराशा हाथ लगने के बाद पूर्व सीएम ने देश की सबसे बड़ी अदालत का रुख किया था। अब यहां से भी राहत नहीं मिलने के बाद उन्हें गुजरात की अदालत में पेश होना पड़ेगा। केजरीवाल और संजय सिंह के खिलाफ दायर मानहानि केस में आरोप लगाया गया है कि दोनों नेताओं ने पीएम मोदी की डिग्री को लेकर गुजरात यूनिवर्सिटी के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां कीं। एडिशनल चीफ मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट की ओर से दोनों के खिलाफ पिछले साल अप्रैल में समन जारी किया गया था। हाई कोर्ट में दोनों नेताओं ने दलील दी थी कि याचिका सुनवाई योग्य नहीं है क्योंकि उन्होंने यूनिवर्सिटी को लेकर बयान नहीं दिया था। वहीं गुजरात यूनिवर्सिटी की ओर से कहा गया कि उसकी छवि को नुकसान पहुंचाया गया और इसके लिए उन्हें ट्रायल का सामना करना चाहिए। recent visitors 76