Saturday, July 4, 2026 4:10 am

‘बिग बॉस 18’: रजत दलाल और अविनाश मिश्रा में हाथापाई

मुंबई, ‘बिग बॉस 18’ के घरवालों का पारा हर दिन चढ़ता जा रहा है और प्रतियोगी हर गुजरते दिन के साथ एक-दूसरे के साथ बदतमीजी कर रहे हैं।‘बिग बॉस 18’ के आगामी एपिसोड में रजत और “टाइम गॉड” विवियन डी’सेना के बीच बहस में अविनाश मिश्रा कूद पड़ते है, जिसके बाद रजत दलाल प्रतियोगी अविनाश मिश्रा पर अपना आपा खोते हुए दिखाई देते है। शो के प्रोमो में रजत और अविनाश एक भयंकर लड़ाई में उलझे हुए दिखाई देते हैं और उन्हें ईशा सिंह, दिग्विजय सिंह राठी और अरफीन खान रोकते हैं। लड़ाई तब शुरू होती है जब विवियन रजत से पूछते हैं कि जेल में रहने के दौरान उन्होंने सभी घरवालों के बीच बराबर खाना क्यों नहीं बांटा। रजत को विवियन से खुद के लिए बोलने के लिए कहते हुए सुना जाता है, जिसके बाद टेलीविजन स्टार यह कहते हुए पलटवार करते हैं कि उन्हें लोगों को सिर्फ बोलने से ज्याादा सबक सिखाना पसंद है। जिसके बाद रजत विवियन के कंधे को छूते हैं और कहते हैं कि वह जो चाहें कर सकते हैं क्योंकि विवियन जैसे कई लोग आते हैं। इससे अभिनेता नाराज हो जाते हैं और कहते हैं कि वह उन्हें बाहर निकलने के दरवाजे तक छोड़ देंगे। अविनाश के हस्तक्षेप के बाद लड़ाई और भी बढ़ जाती है और रजत उसे “चेला” कहकर बुलाता है। अविनाश फिर कहता है कि रजत उससे डरता है और दोनों के बीच हाथापाई हो जाती है। दिग्विजय, अरफीन और ईशा झगड़े को रोकने के लिए बीच-बचाव करने की कोशिश करते हैं। ईशा फर्श पर गिर जाती है और उन्हेंे चोट लगती है। प्रोमो के अंत में विवियन को यह कहते हुए सुना जाता है कि जो लोग सभ्य तरीके से व्यवहार नहीं कर सकते वे शो छोड़ सकते हैं और किसी को भी किसी के साथ दुर्व्यवहार करने की अनुमति नहीं है। बता दें कि ‘बिग बॉस 18’ के आगामी एपिसोड में एक नॉमिनेशन टास्क भी होगा, जहां विवियन के पास उन नामों के लिए वोट करने का अधिकार होगा, जिन्हें वह बाहर करना चाहते हैं। प्रोमो के अनुसार, रजत, श्रुतिका, चाहत पांडे और सारा अरफीन खान उन आठ नामों में शामिल हैं जिन्हें वह नॉमिनेट करेंगे। यह शो 6 अक्टूबर को शुरू हुआ था। “बिग बॉस 18” से शहजादा धामी, गुणरत्न सदावर्ते, हेमलता शर्मा, मुस्कान बामने और न्यारा बनर्जी जैसे प्रतियोगी बाहर हो चुके हैं। वर्तमान में शो में करण वीर मेहरा, अविनाश, चुम दारंग, चाहत पांडे, विवियन डीसेना, ईशा सिंह, रजत दलाल, शिल्पा शिरोडकर, सारा अरफीन खान, मिश्रा, तजिंदर पाल सिंह बग्गा, श्रुतिका अर्जुन राज, शहजादा धामी, एलिस कौशिक और अरफीन खान बने हुए हैं।   recent visitors 73

दर्जनों डीपी को बना दिया कबाड़, राजस्थान-केकड़ी में ट्रांसफार्मर से तेल चुरा रहा गिरोह

केकड़ी. केकड़ी जिले के भिनाय उपखण्ड क्षेत्र में बिजली के ट्रांसफार्मर से तेल चुराने वाले चोरों का गिरोह सक्रिय हैं। यह गिरोह पिछले दो माह से दर्जनों ट्रांसफार्मर से तेल चुराने के साथ-साथ उसमें लगी कीमती धातु भी चुरा रहे हैं, जिससे ट्रांसफार्मर अब कबाड़ बन चुके हैं। चोरों की इन कारगुजारियों से बिजली विभाग को लाखों रुपयों का नुकसान हो चुका है। वहीं किसान भी परेशान हैं। केकड़ी जिले के भिनाय उपखण्ड क्षेत्र में अज्ञात चोरों ने बिजली विभाग की नाक में दम कर दिया है। पिछले दो माह में दर्जनों ट्रांसफार्मर को निशाना बना कर ये चोर उनमें भरा तेल व अन्य कीमती धातु निकालकर रफूचक्कर हो जाते हैं। यह चोरों का कोई गिरोह है, जो तकनीकी रूप से बिजली सप्लाई के मैकेनिज्म के भी जानकार हैं। ये चोर चलती लाइन में यह कारगुजारी कर डालते हैं। बताया गया कि एक ट्रांसफार्मर की कीमत उसकी क्षमता के अनुसार करीब 80-90 हजार से 2 लाख रुपये तक होती है। आये दिन डीपी से तेल और धातु चोरी होने की वारदात हो रही हैं, जिससे विद्युत निगम के अधिकारी व कर्मचारी परेशान हैं। उनकी रातों की नींद हराम हो गई है। दूसरी ओर इन दिनों किसान फसलों की बुवाई के लिए सिंचाई कर रहे हैं। आये दिन वारदात होने से निगम सहित किसानों को भी भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। रविवार रात को भी ग्राम बनेडिया में चोर दो डीपी की ब्रशिंग तोड़कर तेल चोरी कर ले गए। चोरी से पहले उन्होनें दोनों डीपी के जम्पर काटे, उसके बाद आसानी से तेल चोरी कर लिया। जिसका खामियाजा नई डीपी लगाने अथवा डीपी में तेल भरने तक बनेड़िया के किसानों को उठाना पड़ेगा। उधर स्थानीय पुलिस के पास इस तरह के दर्जनों मुकदमें दर्ज हैं। मगर जांच के दावे करने के बावजूद पुलिस एक भी मामले का खुलासा नहीं कर पाई, जिससे भिनाय क्षेत्र में डीपी तेल चोरों के हौंसले बुलंद है। उधर, निगम की भी मजबूरी है कि बिना मुकदमे के उन्हें निगम मुख्यालय से नई डीपी, तेल अथवा अन्य सामग्री उपलब्ध नहीं हो पाती। recent visitors 122

महिलाओं को सरकार का एक और तोहफा, नौकरियों में मिलेगा 35 प्रतिशत आरक्षण

Another gift from the government to women, they will get 35 percent reservation in jobs. भोपाल। प्रदेशकी मोहन सरकार ने महिलाओं के हित में बड़ा कदम उठाया है। सिविल सेवाओं में महिलाओं के लिए अब 33 के बजाय 35 प्रतिशत पद आरक्षित होंगे। मंगलवार को मंत्रालय में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव पर सर्वसम्मति से मुहर लगाई गई। कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए डिप्टी सीएम और लोक स्वास्थ्य व चिकित्सा शिक्षा मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा, बैठक के दौरान सीएम डॉ. मोहन यादव ने ग्वालियर में मानसिक आरोग्यशाला, मंदसौर में कल्याण विभाग, स्कूल शिक्षा विभाग, वन विभाग में पीएससी से भरे जाने वाले पदों की जानकारी मांगी है। खाद के लिए 254 नए उवर्रक खरीदी केंद्र मंजूर शुक्ल ने बताया- महिलाओं को आरक्षण के अलावा कैबिनेट ने 254 नए नकद उर्वरक केंद्रों की स्वीकृति दी है। इससे खाद के लिए परेशान हो रहे किसानों को राहत मिलेगी। खासतौर पर जो डिफॉल्टर किसान हैं, उन्हें नकद खाद मिल सकेगी।सुपर क्रिटिकल पावर प्लांट में तब्दील होगा सतपुड़ा थर्मल स्टेशनसारणी में सतपुड़ा थर्मल पावर स्टेशन की 410 मेगावाट की दो और 420 मेगावाट की दो यूनिट्स मिलाकर कुल 830 मेगावाट की चार यूनिट्स को डिकमीशन किया जाएगा। फिर 660 मेगावाट का सुपर क्रिटिकल पावर प्लांट विकसित किया जाएगा। असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर आवेदन के लिए आयु सीमा बढ़ी फैसलों की जानकारी देते हुए शुक्ल ने बताया- मेडिकल कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर आवेदन के लिए आयु सीमा 40 से बढ़ाकर 50 साल की गई है। कैबिनेट ने तय किया है कि केंद्र सरकार द्वारा गठित पैरा मेडिकल काउंसिल के नियम अब तक जारी नहीं किए गए हैं इसलिए एमपी पैरामेडिकल काउंसिल के नियमों को रीएस्टेट किया जाएगा ताकि एडमिशन और परीक्षाएं हो सकें। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में पर्यवेक्षण समिति गठितउधर, सिंहस्थ वर्ष-2028 की तैयारियों के लिए मप्र शासन द्वारा मुख्य सचिव की अध्यक्षता में पर्यवेक्षण समिति गठित कर दी गई है। पर्यवेक्षण समिति सिंहस्थ के अंतर्गत मंत्रि-परिषद समिति के निर्देशों का पालन, मंत्रि-परिषद समिति के समक्ष रखे जाने समस्त नीतिगत प्रकरणों का परीक्षण कार्य तथा विभिन्न विभागों की सिंहस्थ मद कार्य योजना की समीक्षा करेगी। समिति में अपर मुख्य सचिव, गृह, उर्जा, लोक निर्माण, जल संसाधन, परिवहन, प्रमुख सचिव, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, राजस्व, वित्त, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व, संस्कृति एवं पर्यटन, सदस्य होंगे। प्रमुख सचिव, नगरीय विकास एवं आवास समिति के सदस्य सचिव होंगे। recent visitors 130

लुधियाना में बम फेंकने वाले 4 बदमाश गिरफ्तार, बब्बर खालसा गैंग से संबंध

  लुधियाना काउंटर इंटेलिजेंस और लुधियाना पुलिस ने संयुक्त रूप से कार्रवाई करते हुए विदेश में रह रहे हरजीत सिंह उर्फ ​​लाडी और साबी द्वारा संचालित बब्बर खालसा इंटरनेशनल (बीकेआई) के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया है। पंजाब पुलिस के महानिदेशक गौरव यादव ने मंगलवार को बताया कि इस अभियान के तहत शिवसेना नेताओं को निशाना बनाकर की गई पेट्रोल बम की घटनाओं को सफलतापूर्वक सुलझाया है, जिसमें 16 अक्टूबर, 2024 को योगेश बख्शी के आवास पर हमला और हाल ही में 02 नवंबर, 2024 को लुधियाना के मॉडल टाउन एक्सटेंशन में हरकीरत सिंह खुराना के घर पर हुई घटना शामिल है। श्री यादव ने बताया कि मॉड्यूल के चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है, और टोही तथा ट्रैकिंग के लिए इस्तेमाल की जाने वाली एक मोटरसाइकिल और दो मोबाइल फोन जब्त किए गए हैं। उन्होंने कहा कि आरोपियों के संपर्कों का पता लगाने के लिए आगे की जांच जारी है और अतिरिक्त गिरफ्तारियां की जानी हैं। डीजीपी ने कहा कि हरजीत सिंह उर्फ ​​लाडी भी पंजाब के नांगल में विकास प्रभाकर की हत्या के मामले में वांछित आरोपी है और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने उस पर 10 लाख रुपये का इनाम घोषित किया है। कई हिन्दू नेते थे टारगेट पुलिस कमिश्नर चहल ने कहा कि गिरफ्तार आरोपियों ने माना है कि उनके सरगना के निशाने पर कई और नेता भी है। वह जिस भी नेता पर हमला करने या माहौल खराब करने के लिए पेट्रोल बम फेंकने के आदेश देते थे, वहां पर वह अंजाम देकर आते थे। पुलिस कमिश्नर ने कहा कि अब आरोपियों का अदालत से रिमांड हासिल कर गहनता से पूछताछ की जाएगी। इन आरोपियों के बाकी कौन से और साथी पंजाब में सक्रिय है उनके बारे भी गहनता से पड़ताल की जा रही है। बदमाशों के मोबाइल नंबर भी खंगाले जा रहे है ताकि हरजीत सिंह खालसा की लोकेशन पता चल सके। सोशल साइट्स के जरिए कंटेक्ट में आए पुलिस कमिश्नर चहल ने कहा कि आरोपी बबर खालसा से सोशल साइट्स के जरिए कॉन्टैक्ट में आए है। आतंकी युवाओं को पैसों का लालच देकर सोशल साइट्स पर निशाना बनाते है। जो युवक पकड़े गए है इन पर नशा तस्करी जैसे कई मामले दर्ज है।   recent visitors 103

Supreme Court:निजी संपत्तियां ‘समुदाय के भौतिक संसाधन’ नहीं, राज्य नहीं कर सकता जबरन अधिग्रहण

Supreme Court: Private properties are not ‘physical resources of the community’, the state cannot forcibly acquire them नई दिल्ली ! सर्वोच्च न्यायालय ने आज एक ऐतिहासिक फैसले में कहा कि सभी निजी स्वामित्व वाली संपत्तियां सामुदायिक संसाधन नहीं होतीं, जिन्हें राज्य आम भलाई के लिए अपने अधीन कर सकता है। भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली नौ न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने 8-1 के बहुमत से इस विवादास्पद मुद्दे पर फैसला सुनाया। तीन फैसले लिखे गएमुख्य न्यायाधीश ने अपने और छह सहयोगियों के लिए एक फैसला लिखा, न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना ने एक समवर्ती लेकिन अलग फैसला लिखा और न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया ने असहमति जताई। पीठ में मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति हृषिकेश रॉय, न्यायमूर्ति नागरत्ना बीवी, न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया, न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला, न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा, न्यायमूर्ति राजेश बिंदल, न्यायमूर्ति एससी शर्मा और न्यायमूर्ति एजी मसीह शामिल थे।यह मामला संविधान के अनुच्छेद 31सी से संबंधित है जो राज्य द्वारा राज्य नीति के निर्देशक सिद्धांतों को पूरा करने के लिए बनाए गए कानूनों की रक्षा करता है – संविधान सरकारों को कानून और नीतियां बनाते समय पालन करने के लिए दिशा-निर्देश देता है। अनुच्छेद 31सी जिन कानूनों की रक्षा करता है उनमें अनुच्छेद 39बी भी शामिल है। अनुच्छेद 39बी में प्रावधान है कि राज्य अपनी नीति इस प्रकार बनाएगा कि समुदाय के भौतिक संसाधनों का स्वामित्व और नियंत्रण इस प्रकार वितरित हो कि सर्वजन हिताय हो।किसी की निजी संपत्ति नहीं हो सकती पब्लिकइस पर मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी की, “क्या 39बी में इस्तेमाल किए गए समुदाय के भौतिक संसाधन में निजी स्वामित्व वाले संसाधन शामिल हैं? सैद्धांतिक रूप से, इसका उत्तर हां है, इस वाक्यांश में निजी स्वामित्व वाले संसाधन शामिल हो सकते हैं। हालांकि, यह न्यायालय रंगनाथ रेड्डी में न्यायमूर्ति अय्यर के अल्पमत के दृष्टिकोण से सहमत नहीं है। हमारा मानना ​​है कि किसी व्यक्ति के स्वामित्व वाले प्रत्येक संसाधन को केवल इसलिए समुदाय का भौतिक संसाधन नहीं माना जा सकता क्योंकि वह भौतिक आवश्यकताओं की योग्यता को पूरा करता है।”उन्होंने कहा, “39बी के अंतर्गत आने वाले संसाधन के बारे में जांच विवाद-विशिष्ट होनी चाहिए और संसाधन की प्रकृति, विशेषताओं, समुदाय की भलाई पर संसाधन के प्रभाव, संसाधन की कमी और ऐसे संसाधन के निजी लोगों के हाथों में केंद्रित होने के परिणामों जैसे कारकों की एक गैर-संपूर्ण सूची के अधीन होनी चाहिए, इस न्यायालय द्वारा विकसित सार्वजनिक ट्रस्ट सिद्धांत भी उन संसाधनों की पहचान करने में मदद कर सकता है जो समुदाय के भौतिक संसाधन के दायरे में आते हैं।”46 साल बाद पलटा फैसला1977 में, सात न्यायाधीशों की पीठ ने 4:3 बहुमत से फैसला सुनाया था कि निजी स्वामित्व वाली सभी संपत्ति समुदाय के भौतिक संसाधनों के दायरे में नहीं आती है। हालाँकि, अल्पमत की राय में, न्यायमूर्ति कृष्ण अय्यर ने माना कि सार्वजनिक और निजी दोनों संसाधन अनुच्छेद 39(बी) के तहत “समुदाय के भौतिक संसाधनों” के दायरे में आते हैं। अपने अलग फैसले में, न्यायमूर्ति नागरत्ना ने न्यायमूर्ति अय्यर के फैसले पर उनकी टिप्पणियों पर मुख्य न्यायाधीश से असहमति जताई। recent visitors 118

बेनीवाल के जमकर लगाए जयकारे, राजस्थान-नागौर में विकास पर भाजपा प्रत्याशी के भाषण पर भड़के लोग

नागौर. खींवसर उपचुनाव से पहले ही भाजपा प्रत्याशी रेवंतराम डांगा की जनसभा में विकास के कार्यों को लेकर विरोध तू-तड़ाक पर पहुंच गया। खींवसर उपचुनाव में जनसभा के लिए पहुंचे रेवंतराम डांगा अपना उद्बोधन शुरू ही किया तभी सामने बैठे लोगों ने कहा कि खींवसर में आपने क्या विकास कार्य करवाए। खींवसर में जितना विकास कार्य हुआ है वह बेनीवाल ने करवाया है। इसी को लेकर तू ताड़क हो गई। बता दें कि खींवसर उपचुनाव के दौरान देर रात्रि में भाजपा प्रत्याशी रेवंतराम डांगा अपने विधानसभा क्षेत्र में चुनावी सभा करने रोल ग्राम पंचायत के चोपड़ों गुजरों की ढाणी में अपनी चुनावी सभा करने पहुंचे। जैसे ही वो सभा को संबोधित करने पहुंचे उसी दौरान वहां पर कुछ लोग जमकर बेनीवाल के जयकारे लगाने लगे। इसके बाद बीजेपी की ओर से भी रेवत राम डांगा के जयकारे लगाए जाने लगे। उसके बाद रेवंतराम डांगा के और बेनीवाल के समर्थक दोनों ही आमने-सामने हो गए। रेवत राम डांगा अपने चुनावी कार्यक्रम को संबोधित करने लग गए। विकास कार्यों को लेकर बात शुरू की। तभी स्थानीय लोगों ने विरोध शुरू कर दिया। भाजपा प्रत्याशी रेवंतराम डांगा के बीच जंग छिड़ गई। स्थानीय लोगों ने कहा कि आपने क्या खींवसर के लिए विकास का कार्य करवाया। विकास का कार्य तो सारा ही हनुमान बेनीवाल ने ही करवाया है। इस पर रेवंतराम डांगा ने बोला कि हनुमान बेनीवाल ने क्या करवाया है यह सब विकास कार्य मैंने करवाया है। इस बात पर माहौल बिगड़ता चला गया। recent visitors 63

UP मदरसा एक्ट को सुप्रीम कोर्ट की मान्यता, जानें अहम फैसले के मायने

नई दिल्ली उत्तर प्रदेश के मदरसों में पढ़ने वाले लाखों छात्रों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. सर्वोच्च अदालत ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस फैसले को रद्द कर दिया है, जिसमें अदालत ने मदरसा एक्ट को संविधान के खिलाफ बताया था. मदरसा एक्ट पर यह फैसला चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने सुनाया है. पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट का फैसला ठीक नहीं था. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने मदरसा एक्ट को भी सही बताया है. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से उत्तर प्रदेश के 16 हजार मदरसों को राहत मिल गई है. यानी अब यूपी में मदरसे चलते रहेंगे. यूपी प्रदेश में मदरसों की कुल संख्या लगभग 23,500 है. इनमें 16,513 मदरसे मान्यता प्राप्त हैं. यानी ये सभी रजिस्टर्ड हैं. इसके अलावा करीब 8000 मदरसे गैर मान्यता प्राप्त हैं. मान्यता प्राप्त मदरसों में 560 ऐसे हैं, जो एडेड हैं. यानी 560 मदरसों का संचालन सरकारी पैसों से होता है. बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने 22 अक्टूबर को सुनवाई पूरी करते हुए फैसला सुरक्षित रख लिया था. हालांकि, सुनवाई के दौरान सीजेआई ने कहा कि फाजिल और कामिल के तहत डिग्री देना राज्य के दायरे में नहीं है. यह यूजीसी अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन करता है. HC ने क्यों रद्द किया था कानून? मदरसा बोर्ड कानून के खिलाफ अंशुमान सिंह राठौड़ नाम के शख्स ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी. राठौड़ ने इस कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी थी. इसी पर हाईकोर्ट ने 22 मार्च को फैसला सुनाया था. हाईकोर्ट ने कहा था कि यूपी बोर्ड ऑफ मदरसा एजुकेशन एक्ट 2004 'असंवैधानिक' है और इससे धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत का उल्लंघन होता है. साथ ही राज्य सरकार को मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों को सामान्य स्कूलिंग सिस्टम में शामिल करने का आदेश दिया था. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा था, 'मदरसा कानून 2004 धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत का उल्लंघन है, जो भारत के संविधान के बुनियादी ढांचे का हिस्सा है.' अदालत ने ये भी कहा था कि सरकार के पास धार्मिक शिक्षा के लिए बोर्ड बनाने या किसी विशेष धर्म के लिए स्कूली शिक्षा के लिए बोर्ड बनाने का अधिकार नहीं है. क्या है मदरसा एक्ट? उत्तर प्रदेश में 2004 में ये कानून बनाया गया था. इसके तहत मदरसा बोर्ड का गठन किया गया था. इसका मकसद मदरसा शिक्षा को सुव्यवस्थित करना था. इसमें अरबी, उर्दू, फारसी, इस्लामिक स्टडीज, तिब्ब (ट्रेडिशनल मेडिसिन), फिलोसॉफी जैसी शिक्षा को परिभाषित किया गया है. यूपी में 25 हजार मदरसे हैं, जिनमें से लगभग 16 हजार को यूपी बोर्ड ऑफ मदरसा से मान्यता मिली हुई है. साढ़े आठ हजार मदरसे ऐसे हैं, जिन्हें मदरसा बोर्ड ने मान्यता नहीं दी है. मदरसा बोर्ड 'कामिल' नाम से अंडर ग्रेजुएशन और 'फाजिल' नाम से पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री देता है. इसके तहत डिप्लोमा भी किया जाता है, जिसे 'कारी' कहा जाता है. बोर्ड हर साल मुंशी और मौलवी (10वीं क्लास) और आलिम (12वीं क्लास) के एग्जाम भी करवाता है.   recent visitors 66