Monday, July 6, 2026 9:07 am

मल्लिकर्जुन खड़गे की मोदी सरकार पर तीखी टिप्पणी: ओबीसी आरक्षण और जातिगत जनगणना का दोगला रुख

Mallikarjun Kharge’s sharp comment on Modi government: Double stance on OBC reservation and caste census नई दिल्ली: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकर्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। खड़गे ने कहा कि मोदी जी चुनावी लाभ के लिए खुद को बार-बार ओबीसी बताने का दावा करते हैं, लेकिन यह कभी नहीं बताते कि वे जातिगत जनगणना से पिछड़ी जातियों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति को क्यों छुपाए रखना चाहते हैं।खड़गे ने इस संदर्भ में मोदी सरकार की नीतियों पर सवाल उठाया और कहा, “जब मंडल आयोग की सिफारिशें लागू की गईं, तो बीजेपी ने इसका विरोध करते हुए यात्रा निकाली थी। अब मोदी जी ओबीसी वोट हासिल करने के लिए ओबीसी होने का दावा करते हैं, लेकिन जब बात उनके वास्तविक कामकाजी रुख की आती है, तो वे पिछड़ों के हक में कभी खड़े नहीं हुए।” राहुल गांधी के हालिया बयान का हवाला देते हुए खड़गे ने कहा कि हाल ही में धनबाद में राहुल गांधी ने यह खुलासा किया था कि देश की लगभग 50 प्रतिशत आबादी ओबीसी वर्ग से है, 15 प्रतिशत दलित हैं, और 8 प्रतिशत आदिवासी वर्ग के लोग हैं। इन वर्गों की बेहतर सामाजिक और राजनीतिक भागीदारी सुनिश्चित करने का सबसे बड़ा तरीका जातिगत जनगणना है।खड़गे ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ओबीसी, दलित और आदिवासी वर्ग के खिलाफ है, और यह बात झारखंड की गठबंधन सरकार द्वारा किए गए एक बड़े कदम से स्पष्ट होती है। झारखंड विधानसभा ने OBC आरक्षण को 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने के लिए प्रस्ताव पारित किया था, लेकिन मोदी सरकार ने इसे गवर्नर से रोकवा दिया। “यह दोहरा चरित्र दर्शाता है कि मोदी जी अपने घोषणापत्र में OBC आरक्षण बढ़ाने की बात करते हैं, लेकिन जब असल में इसे लागू करने का समय आता है, तो वे उसे रोकने में किसी भी हद तक जा सकते हैं। क्या इस तरह के दावे पर आप लोग विश्वास करेंगे?” खड़गे ने सवाल उठाया। खड़गे ने यह भी कहा कि मोदी सरकार का यह दोगला रुख ही उनकी असल नीयत को दर्शाता है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे इस मुद्दे पर गंभीर सोच-विचार करें और सही पक्ष का समर्थन करें। recent visitors 117

मध्य प्रदेश में एमएसपी पर धान, ज्वार एवं बाजरा की उपार्जन नीति जारी

भोपल मध्य प्रदेश सरकार (Madhya Pradesh Government) ने आगामी खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर धान, ज्वार और बाजरा की उपार्जन नीति घोषित कर दी है. सरकार धान 2300, ज्वार 3371 और बाजरा 2625 रुपये क्विंटल MSP की दर पर खरीदेंगी. समर्थन मूल्य पर ज्वार और बाजरा की 22 नवंबर और धान की ख़रीदी 2 दिसंबर से की जाएगी. इन अफसरों को दिए गए निर्देश खाद्य व नागरिक आपूर्ति विभाग के मंत्री गोबिन्द सिंह राजपूत ने प्रदेश के कलेक्टर, नागरिक आपूर्ति निगम और वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के अफ़सरों को निर्देश दिए हैं. साथ ही लापरवाही मिलने पर उपार्जन कार्य से जुड़े अधिकारी कर्मचारियों पर कार्रवाई की जाएगी. उपार्जन केंद्रों का निर्धारण किसानों की सुविधा के अनुसार किया जाएगा, जिनकी प्राथमिकता गोदाम और कैप परिसर में होगी. किसानों की सुविधा अनुसार होगा उपार्जन केन्द्रों का निर्धारण मंत्री श्री राजपूत ने बताया कि उपार्जन केन्द्र के स्थान का निर्धारण किसानों की सुविधा अनुसार किया जाएगा। उपार्जन केन्द्र प्राथमिकता से गोदाम/केप परिसर में स्थापित किए जाएंगे। गोदाम/केप उपलब्ध न होने पर समिति एवं अन्य स्तर पर उपार्जन केन्द्र स्थापित किए जा सकेंगे। जिले में उपार्जन केन्द्रों की संख्या का निर्धारण किसान पंजीयन, पंजीयन में दर्ज बोया गया रकबा एवं विगत वर्ष निर्धारित उपार्जन केन्द्रों के आधार पर राज्य उपार्जन समिति द्वारा किया जाएगा। यह होंगी उपार्जन करने वाली संस्थाएँ उपार्जन कार्य सहकारी समितियां, बहुउद्देश्यीय प्राथमिक कृषि सहकारी संस्थाएँ, ब्लाक स्तरीय विपणन सहकारी संस्थाएँ, जिला थोक उपभोक्ता भण्डार, महिला स्व-सहायता समूह एवं क्लस्टर लेवल फेडरेशन, उपार्जन कार्य करने के लिए सहमति देने वाली अन्य संस्थाओं को दिया जा सकेगा। संस्थाओं की पात्रता का निर्धारण विभाग द्वारा किया जाएगा। बारदाना व्यवस्था समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन के लिये 46 प्रतिशत पुराने और 54 प्रतिशत नवीन जूट बारदाने उपयोग किये जायेंगे। बारदानों की व्यवस्था उपार्जन एजेंसी द्वारा की जायेगी। ज्वार एवं बाजरे का उपार्जन नवीन जूट बारदानों में किया जायेगा। केन्द्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय द्वारा धान, ज्वार एवं बाजरा के समर्थन मूल्य पर उपार्जन के लिये निर्धारित यूनिफार्म स्पेसिफिकेशन्स के अनुसार एवं समय-समय पर इसमें दी गई शिथिलता के अनुसार उपार्जन किया जायेगा। गुणवत्ता परीक्षण का दायित्व उपार्जन केन्द्र में उपार्जन करने वाली संस्था और भण्डारण स्थल पर उपार्जन एजेंसी का होगा। कृषि उपज मण्डियों में एफएक्यू मानक की धान, ज्वार एवं बाजरा की खरीदी समर्थन मूल्य से कम पर क्रय नहीं किया जायेगा। नॉन एफएक्यू उपज का सैम्पल कृषि उपज मण्डी द्वारा संधारित किया जायेगा। किसान पंजीयन में दर्ज फसल के रकबे एवं राजस्व विभाग द्वारा तहसीलवार निर्धारित उत्पादकता के आधार पर कृषक द्वारा खाद्यान्न की विक्रय योग्य अधिकतम मात्रा का निर्धारण किया जायेगा। कृषक द्वारा उपज बेचने के लिये उपार्जन केन्द्र एवं विक्रय दिनांक के चयन के लिये www.mpeuparjan.nic.in पर स्लॉट बुकिंग करानी होगी। उपार्जित खाद्यान्न का उपार्जन केन्द्र से गोदाम तक परिवहन का दायित्व उपार्जन एजेंसी का और धान को उपार्जन केन्द्र/गोदाम से सीधे मिलर्स तक परिवहन का दायित्व मिलर्स का होगा। पंजीकरण और बोए गए रकबे के आधार पर होगा उपार्जन केंद्रों का निर्धारण यदि जहां गोदाम या कैप उपलब्ध नहीं है वहां अन्य स्थलों पर भी उपार्जन केंद्र स्थापित किए जाएंगे. उपार्जन केंद्रों की संख्या का निर्धारण किसानों के पंजीकरण और बोए गए रकबे के आधार पर किया जाए. उपार्जन कार्य के लिए सहकारी समितियां, बहुउद्देश्यीय प्राथमिक कृषि सहकारी संस्थाएं, महिला स्व-सहायता समूह और अन्य संस्थाएं शामिल की जाएंगी. इन संस्थाओं की पात्रता का निर्धारण विभाग द्वारा किया जाएगा. जूट बारदाने का किया जाएगा उपयोग समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन के लिए 40 प्रतिशत पुराने और 54 प्रतिशत नवीन जूट बारदाने का उपयोग किया जाएगा. धान, ज्वार और बाजरा की गुणवत्ता परीक्षण का दायित्व उपार्जन केंद्र और भंडारण स्थल पर उपार्जन एजेंसियों का होगा. वहीं ज्वार और बाजरा का उपार्जन नवीन जूट बारदानों में किया जाएगा.   recent visitors 172

कोटवार संघ वर्षों से लंबित आदेशों का पालन शीघ्र कराने 12 को सौंपेगा ज्ञापन

मंडला मंगलवार 12 नवंबर को जिले भर के समस्त कोटवार मंडला पहुंचकर आजाद कोटवार कर्मचारी संघ के आवाहन पर कलेक्टर को 12 बजे जनसुनवाई में आवेदन करेंगे और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन 3 बजे कलेक्टर के हाथों सौंपेंगे ।      बताया गया है,कि मध्यप्रदेश सरकार के द्वारा कोटवारों के हित में कार्यवाही करने सत्रह वर्ष पहले 2007 में जारी आदेश का पालन जिला प्रशासन के द्वारा अभी तक नहीं कराया जा सका है।साथ ही मुख्यमंत्री के द्वारा चौदह महीने पहले किये गए आदेशों का पालन भी स्वयं मध्यप्रदेश सरकार नहीं कर रही है। जिससे कोटवारों को भारी निराशा के साथ बहुत नुक्सान भी उठाना पड़ रहा है। अनगिनत बार ज्ञापन,भेंट के बाद भी असफल होते आक्रोशित भी होते जा रहे हैं। जनसुनवाई में जाने और ज्ञापन सौपे जाने के पहले रपटघाट स्थित गोंडी पब्लिक ट्रस्ट हॉल में मध्य प्रदेश आजाद कोटवार कर्मचारी संघ जिला शाखा मंडला की संक्षिप्त पर अति आवश्यक बैठक भी होगी। जिसके लिए जिला उपाध्यक्ष एवं प्रदेश प्रवक्ता शंकर दास पड़वार ने समस्त कोटवारों को 11 बजे मीटिंग स्थल पर अधिक से अधिक संख्या में पहुंचने की अपील की है। recent visitors 66

प्रेमी युगल ने जंगल में फांसी लगाकर की आत्महत्या

भानुप्रतापपुर कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर से लगे मिचीपारा गांव के जंगल में प्रेमी युगल ने फांसी लगाकर आत्महत्या की है. युवक-युवती ने गांव से लगभग 3 किमी अंदर जंगल में फांसी लगाई है इसलिए ग्रामीणों को घटना की जानकारी देर से हुई. ग्रामीणों ने इसकी सूचना पुलिस को दी. भानुप्रतापपुर पुलिस मौके पर पहुंची है. जानकारी के मुताबिक, प्रेमी एवं प्रेमिका अलग-अलग समाज के थे. मृतक युवक का नाम महरू यादव है. वहीं मृतिका आदिवासी समाज की थी और बालोद जिले के साल्हे गांव की रहने वाली थी. कुछ दिन पहले ही युवक अपनी प्रेमिका को अपने घर लेकर आया था. इसके बाद युवती के परिजन उसे समझाकर वापस ले जाने युवक के घर आए थे. इस घटना के बाद ही युवक-युवती ने आत्महत्या की है. ग्रामीणों की सूचना पर भानुप्रतापपुर पुलिस मौके पर पहुंची है. थाना प्रभारी रामेश्वर देशमुख ने बताया कि ग्रामीणों की सूचना पर घटना की जानकारी मिली. पंचनामा करवाई कर आगे की कार्रवाई की जा रही है. अभी मृतिका के परिजनों का इंतजार किया जा रहा है. उनके आने के बाद ही शव को फंदे से उतारा जाएगा. मृतक प्रेमी युगल ने दो दिन पूर्व फांसी लगाई होगी ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है, क्योंकि उनका शव से बदबू आ रही है. recent visitors 82

वन अधिकार अधिनियम के तहत दावों का समुचित विधिक प्रक्रिया से निराकरण किया जा रहा

भोपाल वन अधिकार अधिनियम 2006 का जनवरी 2008 से मध्यप्रदेश में सुचारू तरीके से क्रियान्वयन किया जा रहा है। प्रदेश में अब तक 2 लाख 75 हजार 352 से अधिक व्यक्तिगत वन अधिकार दावे मान्य किये गये हैं। इसके अतिरिक्त 29 हजार 996 सामुदायिक वन अधिकार दावों को भी मान्यता प्रदान की गई है। वन अधिकार अधिनियम के अंतर्गत प्राप्त वन अधिकार दावों का निर्धारित पात्रता अनुसार समुचित विधिक प्रक्रिया से निराकरण किया जा रहा है। 792 वन ग्राम बने राजस्व ग्राम वन अधिकार अधिनियम में प्रदेश में अब तक 792 वन ग्रामों को राजस्व ग्राम में सम्परिवर्तन कर दिया गया है। इसके लिये संबंधित जिला कलेक्टर्स द्वारा विधिवत अधिसूचनाएं भी जारी कर दी गई हैं। सभी जिलों का एफआरए एटलस भी तैयार केन्द्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय, नई दिल्ली के निर्देशानुसार वन अधिकार अधिनियम के पोटेंशियल एरिया की मैपिंग के लिए प्रदेश के सभी जिलों का एफआरए एटलस भी तैयार कर लिया गया है। एफआरए एटलस की सहायता से सामुदायिक वन संसाधनों के संरक्षण, संवर्धन एवं प्रबंधन के सामुदायिक अधिकारों सहित अन्य जरूरी अधिकारों को भी कानूनी मान्यता देने की कार्यवाही की जा रही है। शासकीय योजनाओं का लाभ प्रदाय मध्यप्रदेश में सभी वन अधिकार पत्र धारकों को विभिन्न प्रकार की शासकीय योजनाओं का लाभ भी दिया जा रहा है। अब तक 55 हजार 357 वन अधिकार पत्र धारकों को कपिलधारा कूप, 58 हजार 796 को भूमि सुधार/मेंढ़-बंधान, 61 हजार 54 को पक्का आवास/प्रधानमंत्री आवास, 1 लाख 86 हजार 131 को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ देकर 21 हजार 514 वन अधिकार पत्र धारकों को किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) योजना से भी जोड़ा गया है। क्या है वन अधिकार अधिनियम उल्लेखनीय है कि वन अधिकार अधिनियम केन्द्र सरकार द्वारा 2006 में लागू किया गया एक महत्वपूर्ण कानून है। इसका उद्देश्य वन क्षेत्रों में रहने वाले जनजातीय समुदायों और अन्य पारंपरिक वनवासियों के अधिकारों की रक्षा करना है। इसे अनुसूचित जनजातियों और अन्य पारंपरिक वन निवासियों के अधिकारों को मान्यता देने के लिए लागू किया गया था। इसमें वन क्षेत्रों में रह रहे आदिवासी और अन्य परंपरागत वन निवासी अपने पुश्तैनी निवास और कृषि भूमि पर मालिकाना हक हासिल कर सकते हैं। इन्हें जंगलों के संसाधनों अर्थात वनोपज पर अधिकार दिया गया है। जैसे लकड़ी, फल, शहद, जड़ी-बूटी आदि का संग्रहण। सामुदायिक स्तर पर वे जंगल की भूमि और अन्य संसाधनों का संरक्षण और प्रबंधन कर सकते है। यह अधिनियम वनवासियों को व्यक्तिगत और सामुदायिक दोनों तरह के अधिकार प्रदान करता है। ग्राम सभा दावों की पुष्टि करती है और उन्हें मंजूरी देती है। इसके तहत सरकार की अनुमति के बिना वन क्षेत्रों से विस्थापन नहीं किया जा सकता है। स्थानीय समुदायों को वन क्षेत्रों के संरक्षण में भागीदारी का अधिकार मिलता है। इस अधिनियम ने वनवासियों को उनके पूर्वजों की भूमि पर अधिकार दिया है, जिससे उनके जीवन-यापन के साधनों को मजबूती मिली है। वन अधिकार अधिनियम से वनवासियों की आजीविका में सुधार आया है और इससे इन्हें अपनी सांस्कृतिक पहचान बनाए रखने का अधिकार मिला है। यह अधिनियम जनजातीय और वन समुदायों के अधिकारों को मान्यता देने के साथ ही उनके पारम्परिक जीवन और संस्कृति की सुरक्षा भी सुनिश्चित करता है।   recent visitors 59

दिल्ली में 347 दर्ज किया गया औसत एक्यूआई, कम नहीं हो रहा वायु प्रदूषण

नई दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण की स्थिति लगातार खराब बनी हुई है। सोमवार को यहां का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 347 दर्ज किया गया। केंद्रीय प्रदूषण एवं नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुसार राजधानी दिल्ली में सोमवार सुबह 7:30 बजे तक औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक 347 दर्ज किया गया है। जबकि दिल्ली एनसीआर के शहर फरीदाबाद में एक्यूआई 165, गुरुग्राम में 302, गाजियाबाद में 242, ग्रेटर नोएडा में 271 और नोएडा में 237 बना हुआ है। वहीं, दिल्ली के जहांगीरपुरी में एक्यूआई सबसे अधिक 409 दर्ज किया गया। राजधानी दिल्ली के अधिकांश इलाकों में एक्यूआई का स्तर 300 से 400 के बीच में बना हुआ है, जिसमें आनंद विहार में 378, अलीपुर में 397, अशोक विहार में 389, बवाना में 400, बुराड़ी क्रॉसिंग में 352, मथुरा रोड में 316, द्वारका सेक्टर 8 में 356, डॉ करणी सिंह शूटिंग रेंज में 344, डीटीयू में 311 और आईजीआई एयरपोर्ट में 336 एक्यूआई दर्ज किया गया। इसके अलावा आईटीओ में 338, जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में 216, लोधी रोड में 308, मेजर ध्यानचंद स्टेडियम में 369, मुंडका में 389, मंदिर मार्ग में 344, नरेला में 352, नेहरू नगर में 368, नॉर्थ कैंपस डीयू में 363, नजफगढ़ में 356, पटपड़गंज में 366, ओखला फेस 2 में 339, एनएसआईटी द्वारका में 369, आरके पुरम में 368, रोहिणी में 384, शादीपुर में 383, सिरी फोर्ट में 337, विवेक विहार में 372 और वजीरपुर में 391 एक्यूआई दर्ज किया गया। पूर्वी जिले की गीता कॉलोनी के आसपास एक्यूआई 325 मापा गया। यहां पर सड़कों पर पानी द्वारा छिड़काव किया जा रहा है, जिससे सड़कों पर उड़ने वाली धूल वहीं पर जम जाए और हवा में ना फैले। धूल के कण हवा में फैलने से लोगों को खासकर बच्चों और बूढ़ों को सांस लेने में परेशानी का सामना करना पड़ता है।   recent visitors 69

भाजपा की दिल्ली इकाई के कार्यालय में आप के पूर्व पार्षद पार्टी में हुए शामिल

नई दिल्ली आम आदमी पार्टी (आप) के पूर्व पार्षद राम नारायण भारद्वाज सोमवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की दिल्ली इकाई के कार्यालय में पार्टी में शामिल हो गए। भाजपा की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा और उत्तर-पश्चिम दिल्ली के सांसद योगेंद्र चंदोलिया ने समारोह में भारद्वाज का पार्टी में स्वागत किया और उन्हें ‘पटका’ और मिठाई भेंट की। सचदेवा ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि भारद्वाज 2017-2022 के दौरान उत्तरी दिल्ली नगर निगम के बाकानेर वार्ड से आप पार्षद थे।   recent visitors 61