नए सिरे से संघठन विस्तार की गाथा गढ़ने में जुटी बाप पार्टी 

Baap Party is busy creating a new story of organizational expansion.  रतलाम। भारत आदिवासी पार्टी (BAP) का दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन रतलाम स्थित हीरा पैलेस में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। अधिवेशन में मध्यप्रदेश सहित राजस्थान, छत्तीसगढ़, गुजरात, महाराष्ट्र, झारखंड, ओडिशा, आंध्रप्रदेश और तेलंगाना के पार्टी पदाधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों ने सहभागिता की। राष्ट्रीय अध्यक्ष मोहनलाल रोत के नेतृत्व में आयोजित अधिवेशन में पार्टी के संगठनात्मक विस्तार, आगामी गतिविधियों एवं कार्यक्रमों सहित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। राष्ट्रीय कमिटी द्वारा पार्टी के विभिन्न पदों में वृद्धि करने के साथ आगामी समय में संगठन को देशभर में मजबूत एवं विस्तारित करने को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। अधिवेशन में विगत वर्ष पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव के निधन के बाद रिक्त हुए पद पर प्रतापगढ़ के मांगीलाल निनामा को राष्ट्रीय महासचिव तथा डूंगरपुर के पोपटलाल खोखरिया को राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया। बांसवाड़ा सांसद राजकुमार ने अपने संबोधन में भारत आदिवासी पार्टी को देश के विभिन्न राज्यों में विस्तार देने तथा लोकतांत्रिक व्यवस्था में आदिवासी समाज और वंचित वर्गों की प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित करने के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने और लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। अधिवेशन को राजस्थान विधानसभा में भारत आदिवासी पार्टी विधायक दल के नेता थावर चंद्र डामोर, आसपुर विधायक उमेश डामोर, बागीदोरा विधायक जयकृष्ण पटेल, महिला मोर्चा अध्यक्ष बबिता कच्छप, झारखंड से विजय कुजूर तथा आंध्रप्रदेश से राजाबाबू सहित मध्यप्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के विभिन्न पदाधिकारियों ने संबोधित किया। दो दिनों तक चले इस राष्ट्रीय अधिवेशन में पार्टी की आगामी रणनीति, संगठन विस्तार, विभिन्न राज्यों में आगामी कार्यक्रमों तथा कार्यकर्ताओं की भूमिका को लेकर महत्वपूर्ण विचार-विमर्श हुआ। अधिवेशन का संचालन सचिन गामड़, ध्यानवीर डामोर एवं दशरथ बारिया ने किया। अधिवेशन के समापन अवसर पर मध्यप्रदेश विधानसभा में भाजपा एवं कांग्रेस के अलावा भारत आदिवासी पार्टी के एकमात्र विधायक एवं सैलाना विधायक कमलेश्वर डोडियार ने सभी राष्ट्रीय एवं प्रदेश पदाधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, कार्यकर्ताओं तथा उपस्थित अतिथियों का आभार व्यक्त किया। विधायक कमलेश्वर डोडियार ने कहा कि भारत आदिवासी पार्टी लोकतांत्रिक मूल्यों, आदिवासी समाज के अधिकारों और सामाजिक न्याय की लड़ाई को मजबूत करते हुए देश के विभिन्न राज्यों में संगठन का विस्तार करेगी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय अधिवेशन में लिए गए निर्णय पार्टी को नई दिशा और नई ऊर्जा प्रदान करेंगे। अधिवेशन में देशभर से आए पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने संगठन को मजबूत करने, पार्टी की विचारधारा को जन-जन तक पहुंचाने तथा आगामी राजनीतिक एवं सामाजिक कार्यक्रमों को प्रभावी रूप से संचालित करने का संकल्प लिया। recent visitors 2

इंदौर में छात्रों की गूंज से पहले राहुल गांधी बोले- बदलाव के लिए आवाज सुनना जरूरी

Before the students’ protest in Indore, Rahul Gandhi said, “It is important to listen to the voice for change.” इंदौर। कांग्रेस नेता व लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि शिक्षा के बड़े केंद्र इंदौर में 19 सितंबर को रहूंगा और युवाओं से संवाद करूंगा। उन्होंने कहा कि सिस्टम को बदलने के लिए छात्रों की आवाज सुनना जरूरी है। बता दें कि इंदौर में छात्रों की गूंज कार्यक्रम की तैयारियां की जा रही हैं, जिसमें प्रदेशभर से छात्रों को जोड़ने की योजना है। इसी के मद्देनजर राहुल गांधी ने पोस्ट कर कहा कि आज एक टूटी हुई शिक्षा व्यवस्था ने छात्रों की उम्मीदों की लौ बुझाकर उनके भविष्य को अंधेरे में धकेल दिया है। मगर इस सिस्टम को बदलने के लिए पूरे देश के हर छात्र की आवाज और उनका दर्द सुना जाना जरूरी है। उन्होंने छात्रों से अपील की कि आपको अपने सपने पूरे करने से क्या रोक रहा है? आप वीडियो बनाकर भी अपनी बात, समस्याएं, चुनौतियां और सुझाव हम तक पहुंचा सकते हैं। उधर, प्रदेश कांग्रेस कार्यालय भोपाल में युवा कांग्रेस पदाधिकारियों की बैठक हुई। इसमें संगठन के प्रदेश अध्यक्ष यश घनघोरिया ने कहा कि इंदौर में होने वाला छात्रों की गूंज कार्यक्रम छात्रों और युवाओं के अधिकारों की लड़ाई के लिए मील का पत्थर साबित होगा। पटाखा बाजार के किराये का तर्क अधिकारियों की ओर से शहर कांग्रेस कमेटी के पास गुरुवार दोपहर संदेश पहुंचा कि मैदान आवंटन के शुल्क के रूप में करीब ढाई लाख रुपये की राशि जमा करवाई जाए। शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे ने कहा कि मैदान के लिए तय शुल्क शुक्रवार को जमा कर दिया जाएगा। रात को फिर आधिकारिक संदेश पहुंचा कि कुल साढ़े दस लाख रुपये शुल्क चुकाना है। शहर अध्यक्ष चिंटू चौकसे ने कहा कि इसी मैदान पर दीपावली के पहले करीब 50 दिन के लिए पटाखा मार्केट लगता है। इसके लिए सिर्फ सात लाख रुपये आइडीए किराया लेता है। जबकि अब सिर्फ एक दिन के लिए साढ़े दस लाख की मांग है। recent visitors 9

मध्य प्रदेश में शिक्षकों की ई-अटेंडेंस नहीं लगने पर नहीं रुकेगा वेतन

In Madhya Pradesh, teachers’ salaries will not be stopped if their e-attendance is not set up. भोपाल। मध्य प्रदेश में ई-अटेंडेंस नहीं लगने पर शिक्षकों का वेतन नहीं रुकेगा. लोक शिक्षण आयुक्त ने प्रदेश के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए. तकनीकी कारण की वजह से ई-अटेंडेंस नहीं लगने पर शिक्षकों का वेतन नहीं रुकेगा. संकुल के प्रिंसिपल कारण पूछकर अटेंडेंस का निराकरण करेंगे. recent visitors 8

₹3,754 का UPS ₹11,247 में खरीदा! चार फर्मों ने आपस में लगाई बोली, MP में ₹10.99 करोड़ का कंप्यूटर खरीदी घोटाला,,,,

A UPS worth ₹3,754 was purchased for ₹11,247! Four firms bid among themselves, revealing a ₹10.99 crore computer purchase scam in Madhya Pradesh. टेंडर सितंबर में निकला, कंप्यूटर जुलाई में ही इंस्टॉल! चार फर्मों के कथित कनेक्शन और तकनीकी गड़बड़ियों पर EOW की FIR ने सरकारी खरीद व्यवस्था की खोली पोल सरकारी खजाने पर भारी पड़ती खरीदी! GeM कीमत से करीब तीन गुना भुगतान, लोकल SSD और संदिग्ध मॉडल की सप्लाई के आरोप; सवाल—करोड़ों की खरीद में जिम्मेदार अधिकारी सो रहे थे या सब कुछ नजरअंदाज किया गया? Sub Editor: Kamlesh  भोपाल। मध्य प्रदेश में सरकारी धन के इस्तेमाल और खरीद प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पूरे सिस्टम पर सवालिया निशान लगा दिया है। सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग में वर्ष 2024 में हुई करीब 10.99 करोड़ रुपये की कंप्यूटर, प्रिंटर और UPS खरीदी को लेकर आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने FIR दर्ज की है। जांच में सामने आई कथित अनियमितताओं ने सरकार की टेंडर व्यवस्था, विभागीय निगरानी और अधिकारियों की जवाबदेही को कटघरे में खड़ा कर दिया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिस UPS की GeM पर कीमत करीब ₹3,754 बताई गई, उसके लिए विभाग ने कथित तौर पर ₹11,247 प्रति नग का भुगतान किया। यानी सरकारी खरीद में कीमत करीब तीन गुना तक पहुंच गई। अब सवाल सिर्फ यह नहीं कि सामान महंगा खरीदा गया या नहीं—सवाल यह है कि सरकारी खजाने से भुगतान होने से पहले कीमतों की जांच किसने की? GeM पर ₹3,754, सरकारी खरीद में ₹11,247—किसके फायदे का सौदा? UPS की कीमतों में सामने आया कथित अंतर इस पूरे मामले का सबसे बड़ा सवाल बन गया है। जांच के अनुसार GeM पर जिस UPS की कीमत करीब ₹3,754 थी, उसी के लिए विभाग ने ₹11,247 प्रति नग का भुगतान किया। वहीं UPS के डिब्बे पर ₹6,086 कीमत अंकित होने की बात भी सामने आई। अगर जांच में यह मूल्य अंतर सही पाया जाता है, तो सरकारी खरीद प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठना स्वाभाविक है। जनता के पैसे से खरीदी में बाजार मूल्य और GeM दर की तुलना क्यों नहीं हुई? इतनी बड़ी कीमत पर भुगतान को मंजूरी किस स्तर पर दी गई? टेंडर सितंबर में… कंप्यूटर जुलाई में ही इंस्टॉल! मामले का सबसे विस्फोटक बिंदु कंप्यूटरों की इंस्टॉलेशन तारीख से जुड़ा है। उपलब्ध वारंटी रिकॉर्ड में कंप्यूटरों की इंस्टॉलेशन तारीख 22 जुलाई 2024 दर्ज होने की बात सामने आई है, जबकि खरीद के लिए टेंडर 23 सितंबर 2024 को जारी किया गया था। यानी रिकॉर्ड के मुताबिक टेंडर आने से करीब दो महीने पहले ही कंप्यूटर इंस्टॉल हो चुके थे। यह सामान्य तकनीकी गलती है, रिकॉर्ड में त्रुटि है या खरीद प्रक्रिया में पहले से सब कुछ तय था—इसका जवाब जांच में सामने आना बाकी है। लेकिन सरकार से सवाल तो बनता है— जब टेंडर ही सितंबर में आया, तो जुलाई में कंप्यूटर किस आदेश पर और किस प्रक्रिया के तहत इंस्टॉल हुए? चार फर्में… और कथित तौर पर आपसी कनेक्शन EOW ने मामले में रणधीर कुमार पटेल की मेसर्स साईं बाबा इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम, हेमलता पटेल की मेसर्स शांति ट्रेडर्स, अशोक कुमार सिंह की मेसर्स HTM India और देवेंद्र सिंह की मेसर्स सूरज इंटरप्राइजेज से जुड़े लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। जांच एजेंसी के अनुसार इन फर्मों के बीच कारोबारी संबंधों के संकेत मिले हैं। GST रिकॉर्ड में शांति ट्रेडर्स और साईं बाबा इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम का एक ही मोबाइल नंबर पाए जाने की बात सामने आई है। वहीं HTM India की ई-मेल आईडी और भोपाल स्थित अतिरिक्त कार्यालय के पते को भी साईं बाबा इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम से जुड़ा पाया गया। अगर चारों कंपनियां अलग-अलग और स्वतंत्र बोलीदाता थीं, तो ये समानताएं कैसे सामने आईं? और यदि इनके बीच कारोबारी संबंध थे, तो टेंडर प्रक्रिया में स्वतंत्र प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी किसकी थी? क्या ‘प्रतिस्पर्धा’ सिर्फ कागजों पर थी? EOW की जांच में यह भी सामने आने की बात कही गई है कि ये फर्में GeM के कई अन्य टेंडरों में भी साथ-साथ बोली लगाती रही थीं। कुछ टेंडरों में बोली दरों में कम अंतर और अलग-अलग मौकों पर इन्हीं फर्मों में से किसी एक को काम मिलने की जानकारी की भी जांच की जा रही है। यदि जांच में कृत्रिम प्रतिस्पर्धा या मिलीभगत साबित होती है, तो मामला सिर्फ एक विभागीय खरीदी का नहीं रहेगा, बल्कि सरकारी ई-टेंडरिंग व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी गंभीर सवाल खड़े होंगे। नए कंप्यूटरों में लोकल SSD? विभागीय तकनीकी कमेटी की जांच में कुछ कंप्यूटरों में टेंडर की निर्धारित शर्तों के विपरीत RAM और स्टोरेज डिवाइस मिलने की बात सामने आई। कुछ Acer कंप्यूटरों में निर्धारित ब्रांड की SSD के स्थान पर लोकल कंपनी की SSD लगी होने की जानकारी भी सामने आई है। यानी जिस सामान के लिए सरकार ने तकनीकी शर्तें तय की थीं, क्या विभाग को उसी स्पेसिफिकेशन का सामान मिला? अगर नहीं मिला, तो तकनीकी सत्यापन के समय इसे किसने पास किया? सरकार से पांच सीधे सवाल 1. ₹3,754 वाले UPS के लिए ₹11,247 भुगतान की मंजूरी कैसे मिली? 2.सितंबर के टेंडर से पहले जुलाई में कंप्यूटर इंस्टॉल कैसे हो गए? 3. चारों फर्मों के कथित आपसी कनेक्शन की टेंडर से पहले जांच क्यों नहीं हुई? 4. निर्धारित स्पेसिफिकेशन के बजाय लोकल SSD मिलने के बावजूद सप्लाई कैसे स्वीकार हुई? 5. करोड़ों की खरीद में विभागीय स्तर पर जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया क्या थी? EOW की FIR के बाद असली परीक्षा सरकार की EOW ने FIR दर्ज कर दी है और जांच आगे बढ़ रही है। अभी आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी। लेकिन मामला सरकार के लिए इसलिए भी गंभीर है क्योंकि इसमें सवाल सीधे सरकारी पैसे, खरीद प्रक्रिया और विभागीय निगरानी से जुड़े हैं। अब सिर्फ फर्मों की भूमिका की जांच काफी नहीं होगी। जनता यह जानना चाहेगी कि करोड़ों रुपये की इस खरीद को मंजूरी देने से लेकर सामान की गुणवत्ता जांचने और भुगतान जारी करने तक कौन-कौन से अधिकारी जिम्मेदार थे। सरकार यदि भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस का दावा करती है, तो इस मामले में भी दोषी चाहे सप्लायर हो या जिम्मेदार अधिकारी—जांच निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़नी चाहिए … Read more