NGT cracks down on stone crusher units; bans operations within 500 meters of inhabited areas, temples, and government construction sites.

विशेष संवाददाता: जितेन्द्र श्रीवास्तव अर्पिता श्रीवास्तव
जबलपुर। मध्य प्रदेश में स्टोन क्रशर इकाइयों के संचालन और पर्यावरणीय मानकों को लेकर एनजीटी ने सख्ती दिखाई है। एनजीटी की सेंट्रल जोन बेंच ने क्रशर इकाइयों के वास्तविक उत्पादन की निगरानी के लिए बिजली खपत को आधार बनाने के निर्देश दिए हैं।
मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को बिजली वितरण कंपनियों से क्रशर इकाइयों की मासिक बिजली खपत का रिकॉर्ड लेकर मशीनरी की क्षमता और ऊर्जा खपत से उसका मिलान करना होगा। इससे कागजों में दर्शाए जा रहे उत्पादन और वास्तविक उत्पादन के बीच अंतर की जांच की जा सकेगी।
क्रशर इकाइयों पर कार्रवाई के निर्देश
आबादी, स्कूल और मंदिर आदि संवेदनशील स्थानों से 500 मीटर की परिधि में संचालित क्रशर इकाइयों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। बिना वैध पर्यावरणीय अनुमति और कन्सेंट टू एस्टेब्लिश व कन्सेंट टू ऑपरेट के संचालित इकाइयों को बंद या सील किया जा सकेगा। भू-जल का उपयोग करने वाली इकाइयों को केंद्रीय भूजल प्राधिकरण की एनओसी लेना भी जरूरी होगा।
एनजीटी ने क्रशर क्षेत्रों में पीएम-10 और पीएम-2.5 की निगरानी, धूल नियंत्रण के लिए पानी के छिड़काव, सामग्री को ढंककर रखने, कन्वेयर बेल्ट पर मिस्ट स्प्रे तथा पांच मीटर चौड़ी हरित पट्टी विकसित करने जैसे उपायों पर भी जोर दिया है।
खनिज विभाग के पोर्टल और ई-ट्रांजिट पास व्यवस्था से उत्पादन संबंधी जानकारी को जोड़ने से खनन, परिवहन और क्रशर संचालन के आंकड़ों का आपसी मिलान किया जा सकेगा।