आईडीए सीईओ अहिरवार की यादगार बिदाई

आईडीए सीईओ अहिरवार की यादगार बिदाई

Memorable farewell of IDA CEO Ahirwar इंदौर ! आईडीए सीईओ रामप्रकाश अहिरवार का कल कार्यालय सभागृह में बिदाई समारोह हुआ. उनके विदाई समारोह में बड़े से लेकर छोटे से छोटे कर्मचारी ने उक्त समारोह में ना सिर्फ भाग लिया, बल्कि पूरे समय और नीचे कार तक छोड़ने तक साथ रहे. आईडीए में चर्चा थी कि ऐसी बिदाई किसी सीईओ की नहीं हुई. अधिकांश अधिकारी आते है और एक दूसरे को पदभार सौंप कर चले जाते है.बिदाई समारोह में सीईओ ने कहा कि मेरे द्वारा किसी कार्य के दौरान कुछ कहा भी हो तो उसे उसी समय तक मन छोड़ देना. मैंने किसी का नुकसान करने के लिए कोई फाइल पर कुछ नहीं लिखा. आप लोगों को भी मेरी सलाह है कि वरिष्ठ अधिकारी का गुस्सा क्षणिक होता है और उसको भूल जाना चाहिए. मुझे सभी ने टीम वर्क के साथ सहयोग किया, जिसके कारण आज आईडीए का नाम विकास की ऊंचाइयों पर पहुंचा सका हूं. काम के साथ अपने परिवार को भी समय दे यहेरी व्यक्तिगत राय है. आप सभी खूब और स्वस्थ रहे यही मेरी शुभकामनाएं है. आप कभी जबलपुर आए तो आप सभी का स्वागत है. कोई भी कर्मचारी या अधिकारी मुझसे जो घूमने में सहयोग होगा पूरा करूंगा. आपका आभार. recent visitors 77

सादगी की राजनीति या सियासत का नया गणित? — हेमंत खंडेलवाल के नाम एक पड़ाव

सादगी की राजनीति या सियासत का नया गणित? — हेमंत खंडेलवाल के नाम एक पड़ाव

Politics of simplicity or new mathematics of politics? — A milestone in the name of Hemant Khandelwal भोपाल ! BJP President Hemant Khandelwal मध्य प्रदेश की राजनीति में कभी-कभी ऐसे चेहरे सामने आते हैं, जिनकी चमक न तो पोस्टरों से आती है और न ही बड़ी-बड़ी रैलियों की भीड़ से। हेमंत खंडेलवाल ऐसा ही एक नाम हैं—जो बिना ढोल-नगाड़े, बिना सत्ता का शोर मचाए आज भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी तक पहुँच गए। सवाल यह है कि क्या यह सफर केवल सादगी और संघर्ष का है, या फिर संगठन की राजनीतिक गणित का भी खेल? हेमंत खंडेलवाल सिर्फ भाजपा के अध्यक्ष नहीं, बल्कि संघर्ष, सादगी और संगठन के उस दर्शन का चेहरा हैं जो राजनीति को जनसेवा का सच्चा माध्यम बनाता है। BJP President Hemant Khandelwal 3 सितंबर 1964 को मथुरा में जन्मे हेमंत खंडेलवाल ने बैतूल में पढ़ाई की और धीरे-धीरे राजनीति में कदम रखा। पिता विजय कुमार खंडेलवाल चार बार सांसद रहे, इसलिए राजनीतिक माहौल घर में मौजूद था। लेकिन यहाँ भी दिलचस्प मोड़ यह है कि हेमंत ने विरासत की मलाई खाने के बजाय खुद को संघर्ष के रास्ते में झोंक दिया। वरना आजकल तो नेता जी का बेटा सीधे ‘उत्तराधिकारी’ घोषित हो जाता है। 2008 में पिता के निधन के बाद बैतूल उपचुनाव से सांसद बने। यही वह पल था जब उन्हें राष्ट्रीय राजनीति की रोशनी मिली। लेकिन उनके साथ विडंबना यह रही कि वे लंबे समय तक सत्ता की गाड़ी के इंजन से दूर रहे—कभी विधायक, कभी जिला अध्यक्ष, कभी कोषाध्यक्ष, और कभी प्रवासी प्रभारी। कहते हैं, उन्होंने राजनीति को ‘करियर’ नहीं, बल्कि ‘धैर्य की परीक्षा’ मान लिया था। Read more: जब मंत्री ही अपराध के कटघरे में हों, तो न्याय किससे मांगे जनता? BJP President Hemant Khandelwal की सबसे बड़ी पूंजी उनकी सादगी है। सुना है, कार्यकर्ताओं को शर्ट तक दे दी और कभी स्कूटर तक। अब सोचिए, जिस दौर में नेता जी चुनाव में नोटों की बारिश कर रहे हों, उसमें कोई नेता अपनी शर्ट उतारकर कार्यकर्ता को दे दे—ये दृश्य राजनीति की किताब में दुर्लभ ही है। लेकिन राजनीति केवल सादगी से नहीं चलती। 2020 की सत्ता पलट की पटकथा में उनकी भूमिका किसी पर्दे के पीछे के निर्देशक जैसी रही। कमलनाथ सरकार जब गिर रही थी, तब खंडेलवाल ने सिंधिया खेमे और भाजपा के बीच पुल का काम किया। और कहते हैं, यही पुल उन्हें प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी तक ले आया। राजनीति में ऐसे मौके हर किसी को नहीं मिलते—यह किस्मत और कौशल का संगम है। अब वे प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हैं। सवाल यह है कि क्या वे भाजपा को बूथ स्तर तक और मजबूत बना पाएंगे, या फिर संगठनात्मक जोड़-तोड़ में ही उलझ जाएंगे? याद रखिए, प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी केवल शोभा की वस्तु नहीं है; यह वह कुर्सी है जिस पर बैठकर पार्टी का भविष्य तय होता है। एक और दिलचस्प पहलू यह है कि 31 साल बाद वैश्य समाज से किसी नेता को यह जिम्मेदारी मिली है। तो क्या यह केवल जातीय संतुलन साधने की कोशिश है, या फिर सचमुच संगठन के ‘सच्चे सेवक’ को उसकी मेहनत का इनाम? जनता तो यही देख रही है कि सियासी समीकरणों में जनता का हिस्सा कितना है। BJP President Hemant Khandelwal के पास अब मौका है कि वे यह साबित करें कि राजनीति सिर्फ ‘सत्ता का गणित’ नहीं, बल्कि सेवा और संघर्ष का भी नाम है। क्योंकि अगर वे भी बाकी नेताओं की तरह महंगे काफिलों और बेतहाशा पोस्टरों में उलझ गए, तो जनता उन्हें भी उसी भीड़ में गुम कर देगी, जहाँ नेता बदलते रहते हैं, लेकिन जनता की उम्मीदें वही की वही रहती हैं। हेमंत खंडेलवाल का नया अध्याय केवल भाजपा के संगठन का नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश की राजनीति का भी इम्तिहान है। देखना दिलचस्प होगा कि वे अपनी सादगी और संघर्ष को कायम रखते हैं या फिर सत्ता के गलियारों की चकाचौंध उन्हें भी उसी रंग में रंग देती है, जिसमें बाकी नेता डूब चुके हैं। recent visitors 71

कलेक्टर नहीं, मप्र में मुख्यमंत्री को स्वयं बदलने की जरूरत : संगीता शर्मा

कलेक्टर नहीं, मप्र में मुख्यमंत्री को स्वयं बदलने की जरूरत : संगीता शर्मा

Not the collector, but the Chief Minister himself needs to be changed in Madhya Pradesh: Sangeeta Sharma भोपाल। प्रदेश की राजनीतिक हलचल के बीच मुख्यमंत्री मोहन यादव पर कांग्रेस ने तीखा हमला बोला है। हाल ही में भिंड में विधायक और कलेक्टर के बीच हुए टकराव को निशाना बनाते हुए कांग्रेस ने कहा कि सरकार में जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच तालमेल पूरी तरह बिगड़ चुका है। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के राज में न तो जनप्रतिनिधियों की सुनवाई हो रही है और न सरकार प्रशासन की साख बचा पा रही है।राज महिला आयोग की पूर्व सदस्य एवं प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता संगीता शर्मा ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री कलेक्टर को हटाने की बात कर रहे हैं, जबकि हकीकत यह है कि प्रदेश में किसानों पर लाठियाँ बरस रही हैं, मासूम अस्पतालों में दम तोड़ रहे हैं और अधिकारी भ्रष्टाचार में डूबे हैं।उन्होंने कहा कि खाद के लिए किसान घंटों कतारों में खड़े अपमान झेल रहे हैं और उन पर पुलिस की लाठियाँ बरसाई जा रही हैं। इंदौर के एमवाय अस्पताल में दो बच्चों की मौत चूहों के काटने से होना सरकार की गंभीर लापरवाही को उजागर करता है। वहीं कुत्तों के इलाज के नाम पर आए करोड़ों रुपये निकाय अफसरों की जेबों में चले जा रहे हैं।शर्मा ने सवाल उठाया कि क्या यही भाजपा की “डबल इंजन” सरकार का सुशासन है? उनका कहना है कि मुख्यमंत्री को कलेक्टर नहीं, बल्कि खुद को बदलने की जरूरत है। recent visitors 70

बिना बिल के आपका घर होगा रोशन, किफायती दर पर सोलर पैनल होगा स्थापित

बिना बिल के आपका घर होगा रोशन, किफायती दर पर सोलर पैनल होगा स्थापित

Your house will be illuminated without bills, solar panels will be installed at affordable rates भोपाल। बिना बिजली बिल के आपका घर रोशन होने का सपना जल्द ही पूरा होता हुआ दिखेगा। इस सपने को साकार करने के लिए भोपाल में रोहित नगर F-1, f-2 प्रथम तल दुर्गा टावर रिलायंस मार्ट के पास ‘अर्थ वेव टेक्नोलॉजी प्राथमिक लिमिटेड’ के ऑफिस का महापौर मालती राय व गिरीश शर्मा ने शुभारंभ किया। इस मौके पर कंपनी के डायरेक्टर अल्पेश पटेल, पार्थ पटेल, केयूर गजेरा, हार्दिक काछड़िया तथा एमपीईवी के सेवानिवृत जीएम राकेश नायक, ऊर्जा विकास निगम के अनिल समुद्री, भोपाल डेवलपमेंट अथॉरिटी नवीन श्रीवास्तव, शंकर भाई पटेल, आरएस पांडे, संजय पटेल, प्रवीण भाई काछड़िया के अलावा बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। महापौर मल्टी राय ने अर्थवेव सोलर टेक्नोलॉजी प्राथमिक लिमिटेड के डायरेक्टर और उनकी टीम को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि जो भी प्रोडक्ट लोगों को उपलब्ध कराएं, वह उनकी उम्मीदों पर खरा उतरे। महापौर राय ने लोगों से आग्रह किया है कि सभी लोग सोलर ऊर्जा से ही अपने घर रोशन करें और बिजली बिलों से मुक्ति पाएं। वहीं मुख्य अतिथि गिरीश शर्मा ने कहा कि पूरी दुनिया ग्लोबल वार्मिंग से जूझ रही है, ऐसे में हमें अब प्राकृतिक संसाधनों का दोहन करने से बचना चाहिए। सूर्य हमें बिना किसी रुकावट के उजाला दे रहा है। इसके उपयोग से हमारे घर भी रोशन होंगे, तो पर्यावरण का संतुलन नहीं बिगड़ेगा। इससे लाखों टन कोयला की बचत होगी। कंपनी के डायरेक्टर अल्पेश पटेल ने बताया कि हमारी कंपनी 4 राज्यों में काम कर रही है। कंपनी का पहला ऑफिस गुजरात से शुरू हुआ। इसके बाद उत्तर प्रदेश, तेलंगाना और अब मध्य प्रदेश में शुभारंभ हो गया है। उन्होंने दावा किया कि हमारी कंपनी जो भी प्रोडक्ट और सर्विस प्रोवाइडर कराती है, वह क्वालिटी और क्वांटिटी बेस पर आधारित होती है। हमारी यही कोशिश रहती है कि किसी को शिकायत का मौका नहीं मिले। उन्होंने बताया कि वेव सोलर कंपनी इनवर्टर का निर्माण करती है। यह प्रोडक्ट 10 साल का गारंटेड है। हमारी कंपनी ने यह ऐसा प्रोडक्ट बनाया है, जिसमें लोगों को शिकायत करने का मौका नहीं मिलेगा। recent visitors 93

जब मंत्री ही अपराध के कटघरे में हों, तो न्याय किससे मांगे जनता?

जब मंत्री ही अपराध के कटघरे में हों, तो न्याय किससे मांगे जनता?

When the ministers themselves are in the dock for crime, then from whom should the public seek justice? भोपाल ! Shivraj government to ministers MP आई ताज़ा रिपोर्ट ने शिवराज सरकार की छवि पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) के विश्लेषण ने साफ कर दिया है कि प्रदेश सरकार का मंत्रिमंडल स्वच्छ राजनीति का दावा करने के बावजूद विवादों और आपराधिक मामलों में गहराई तक उलझा हुआ है। प्रदेश की कैबिनेट में शामिल 31 मंत्रियों में से 12 मंत्री आपराधिक मामलों का सामना कर रहे हैं। इनमें से 3 मंत्री तो हत्या के प्रयास, महिलाओं के प्रति अपमानजनक व्यवहार और भड़काऊ भाषण जैसे गंभीर आरोपों में घिरे हुए हैं। शेष 9 मंत्री भी हल्की धाराओं में ही सही, लेकिन कानून के शिकंजे में फंसे हुए हैं। सवाल यह है कि जब मंत्रिमंडल ही दागदार हो तो आम जनता किससे न्याय और सुरक्षा की उम्मीद करे? कैलाश विजयवर्गीय का मामला – सबसे चौंकाने वाला Shivraj government to ministers MP इस सूची में सबसे ऊपर नाम है भाजपा के वरिष्ठ नेता और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का। उनके खिलाफ कुल 5 एफआईआर दर्ज हैं, जिनमें 6 गंभीर आईपीसी की धाराएँ और 14 अन्य धाराएँ शामिल हैं। इनमें साम्प्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने, धार्मिक भावनाएँ भड़काने और भड़काऊ भाषण देने जैसे गंभीर आरोप हैं। अधिकतर मामले पश्चिम बंगाल की अदालतों में लंबित हैं। सवाल यह नहीं है कि अब तक आरोप तय क्यों नहीं हुए, बल्कि यह है कि ऐसे व्यक्ति को मंत्रिमंडल में बैठने का अधिकार आखिर कैसे दिया गया? लोकतंत्र का मज़ाक Shivraj government to ministers MPमध्यप्रदेश की शिवराज सरकार बार-बार सुशासन और भ्रष्टाचार मुक्त राजनीति का दावा करती है, लेकिन ADR की रिपोर्ट ने इस दावे की पोल खोल दी है। जब सत्ता के गलियारों में बैठे लोग ही अपराध के मामलों में लिप्त हों, तो यह लोकतंत्र का मज़ाक है। जनता का भरोसा टूटना स्वाभाविक है। महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल Shivraj government to ministers MPरिपोर्ट बताती है कि कुछ मंत्रियों पर महिलाओं के प्रति अपमानजनक व्यवहार के गंभीर मामले दर्ज हैं। यह तब है, जब सरकार बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ जैसे नारों के सहारे खुद को महिलाओं की हितैषी बताती है। लेकिन हकीकत यह है कि जो नेता खुद कटघरे में खड़े हों, वे महिलाओं की सुरक्षा की गारंटी कैसे दे सकते हैं? जनता की जिम्मेदारी Shivraj government to ministers MPयह मामला केवल सरकार की नाकामी का नहीं, बल्कि जनता की जिम्मेदारी का भी है। आखिरकार ये मंत्री चुनाव जीतकर विधानसभा पहुँचे और वहीं से कैबिनेट में शामिल किए गए। यदि हम जातीय, धार्मिक या भावनात्मक मुद्दों से ऊपर उठकर “स्वच्छ छवि” वाले उम्मीदवारों का चयन नहीं करेंगे, तो लोकतंत्र में ऐसे ही दागदार चेहरे सत्ता की कुर्सी तक पहुँचते रहेंगे। Read more: कर्ज़ का बोझ, विकास का खोखला वादा – 2020 से 2025 तक मध्य प्रदेश सरकार ने जनता को दिया सिर्फ़ कर्ज़ का पहाड़ ADR की रिपोर्ट एक चेतावनी है। यह केवल आँकड़े नहीं, बल्कि लोकतंत्र की गिरती साख का आईना है। मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार को चाहिए कि वह ऐसे दागी चेहरों को मंत्रिमंडल से बाहर का रास्ता दिखाए और राजनीति को स्वच्छ बनाने का वास्तविक साहस दिखाए। वरना यह याद रखना होगा जब सत्ता अपराधियों से घिर जाती है, तो लोकतंत्र कमजोर होता है और जनता सबसे बड़ा नुकसान उठाती है। recent visitors 120

कर्ज़ का बोझ, विकास का खोखला वादा – 2020 से 2025 तक मध्य प्रदेश सरकार ने जनता को दिया सिर्फ़ कर्ज़ का पहाड़

कर्ज़ का बोझ, विकास का खोखला वादा – 2020 से 2025 तक मध्य प्रदेश सरकार ने जनता को दिया सिर्फ़ कर्ज़ का पहाड़

MP government Debt burden, empty promise of development – ​​from 2020 to 2025, the Madhya Pradesh government gave the people only a mountain of debt भोपाल ! MP government Debt burden पिछले पाँच सालों (2020 से 2025) में मध्य प्रदेश सरकार ने इतना कर्ज़ लिया कि अब हर नागरिक के सिर पर इसका बोझ साफ दिखाई देने लगा है। आंकड़े बताते हैं कि मार्च 2025 तक प्रदेश पर ₹4.21 लाख करोड़ का कर्ज़ चढ़ चुका है, जो जल्द ही ₹4.35 लाख करोड़ को पार कर जाएगा। सवाल ये है कि इतना पैसा आखिर गया कहां? पांच साल… 2020 से 2025 तक। मध्य प्रदेश सरकार ने जनता के नाम पर कर्ज़ पर कर्ज़ लिया। आंकड़े गवाह हैं — MP government Debt burden अब जनता पूछ रही है — इतना पैसा आखिर गया कहां? MP government Debt burden सड़कें टूटी, स्कूल जर्जर, अस्पताल बेहालअगर कर्ज़ विकास के नाम पर लिया गया तो क्यों आज भी गाँवों में बच्चे खंडहरनुमा स्कूलों में पढ़ रहे हैं? क्यों सड़कें अधूरी और अस्पतालों में दवाई नदारद है? 370 योजनाएं ठंडे बस्ते में क्यों?जब शिक्षा, कृषि और बुनियादी योजनाएं बंद करनी थीं तो फिर कर्ज़ का ढोल क्यों पीटा गया? गैर-जरूरी खर्च किसके लिए?सरकार ने जेट विमान, नई गाड़ियाँ और आलीशान मरम्मत पर करोड़ों लुटाए। क्या जनता की गाढ़ी कमाई का कर्ज़ नेताओं की ऐशो-आराम में डुबोने के लिए था? “लाड़ली बहना” और कर्ज़ का गणितहर महीने योजना पर ₹1,500 करोड़ से ज्यादा खर्च। क्या आने वाली पीढ़ियों को गिरवी रखकर वोट खरीदना विकास कहलाता है? कटघरे में सरकार MP government Debt burden यह साफ है कि सरकार ने 2020 से 2025 तक कर्ज़ की राजनीति की है, विकास की नहीं। और अब जनता के पास यही सवाल है — ये कर्ज़ हमारा भविष्य सुधारने के लिए था, या नेताओं के वर्तमान को चमकाने के लिए? recent visitors 227

कांग्रेस का बड़ा सियासी धमाका, बीजेपी-बीएसपी के नेताओं ने जीतू पटवारी कि मौजूदगी में कांग्रेस का दामन थाम

कांग्रेस का बड़ा सियासी धमाका, बीजेपी-बीएसपी के नेताओं ने जीतू पटवारी कि मौजूदगी में कांग्रेस का दामन थाम

Big political by Congress, BJP-BSP leaders joined Congress in the presence of Jeetu Patwari ग्वालियर। Big political by Congress ग्वालियर-चंबल अंचल की राजनीति में नए समीकरण बनने लगे हैं। रविवार को ग्वालियर ग्रामीण से बीजेपी और बीएसपी के कई नेता व कार्यकर्ता कांग्रेस में शामिल हुए। इस कदम ने कांग्रेस के संगठन को नई ताकत और सियासी परिदृश्य को नया मोड़ दिया है। ग्वालियर ग्रामीण विधानसभा की राजनीति ने रविवार को नया मोड़ ले लिया। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) से जुड़े कई नेताओं और कार्यकर्ताओं ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी की मौजूदगी में कांग्रेस का दामन थाम लिया। इस मौके पर पटवारी ने कहा – कांग्रेस परिवार में सभी का स्वागत और हृदय से अभिनंदन करता हूं। लोकतंत्र और संविधान बचाने की लड़ाई, हम सब मिलकर लड़ेंगे। ग्वालियर-चंबल: सत्ता की कुंजी वाला क्षेत्र Big political by Congress मध्यप्रदेश की राजनीति में ग्वालियर-चंबल अंचल हमेशा निर्णायक रहा है। यहाँ की दिशा ही कई बार सत्ता की दशा तय करती आई है। बीजेपी और बीएसपी से कांग्रेस में हुआ यह जुड़ाव स्थानीय और राज्य स्तरीय समीकरणों को गहराई से प्रभावित करेगा। लोकतंत्र बनाम सत्ता की राजनीति Big political by Congress पटवारी का वक्तव्य यह स्पष्ट करता है कि कांग्रेस केवल सत्ता की लड़ाई नहीं लड़ रही, बल्कि लोकतंत्र और संविधान को बचाने के लिए संघर्षरत है। मौजूदा हालात में जब विपक्ष पर दबाव और संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं, कांग्रेस ने खुद को लोकतांत्रिक मूल्यों का संरक्षक बताने की कोशिश की है। नए कार्यकर्ता, नई ऊर्जा Big political by Congress किसी भी राजनीतिक दल की ताकत उसके कार्यकर्ता होते हैं। बीजेपी और बीएसपी छोड़कर कांग्रेस में आए इन कार्यकर्ताओं से न केवल संगठन को मजबूती मिलेगी बल्कि गांव-गांव में कांग्रेस का जनाधार भी और गहराएगा। यह बदलाव कार्यकर्ताओं की नाराजगी और जनता की नई उम्मीदों दोनों को दर्शाता है। बीजेपी और बीएसपी को झटका Big political by Congress ग्वालियर ग्रामीण में यह घटना बीजेपी और बीएसपी के लिए बड़ा झटका है। यहाँ के जातीय और सामाजिक समीकरण अक्सर चुनावी नतीजों को प्रभावित करते हैं। कांग्रेस में हुए इस जुड़ाव से विपक्षी दलों का परंपरागत वोट बैंक प्रभावित होना तय माना जा रहा है। जनता की प्राथमिकताएँ बदल रही हैं Big political by Congress महंगाई, बेरोजगारी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मुद्दों से जूझती जनता अब ऐसे नेतृत्व की तलाश में है, जो सच्चे अर्थों में उनकी आवाज बने। कांग्रेस में शामिल हुए नए नेता और कार्यकर्ता इस उम्मीद को मजबूत कर सकते हैं। राजनीतिक संदेश स्पष्ट Big political by Congress यह सदस्यता अभियान केवल दल-बदल की औपचारिकता नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक संदेश है जनता बदलाव चाहती है। ग्वालियर ग्रामीण की यह तस्वीर प्रदेश में नई राजनीति की पृष्ठभूमि तैयार करती दिख रही है। ग्वालियर ग्रामीण का यह घटनाक्रम कांग्रेस के लिए नई ऊर्जा लेकर आया है। वहीं बीजेपी और बीएसपी के लिए यह चेतावनी है कि जनता अब उनके पारंपरिक वादों से आगे बढ़कर लोकतांत्रिक मूल्यों और वास्तविक मुद्दों को प्राथमिकता दे रही है।कांग्रेस का बढ़ता परिवार प्रदेश की राजनीति में नई करवट का संकेत है—बदलाव अब सिर्फ शुरुआत है, असली लड़ाई आगे है। ग्वालियर-चंबल अंचल की राजनीति में हलचल, जब बीजेपी और बीएसपी के कई नेताओं ने कांग्रेस का दामन थामा। जीतू पटवारी ने कहा – लोकतंत्र और संविधान की रक्षा ही अब असली राजनीति है। recent visitors 98