स्मृति शेष : सियासत के महानायक स्व. अर्जुन सिंह, रहेंगे हर दौर याद

Smriti remaining: Late great leader of politics. Arjun Singh, every phase will be remembered स्व. अर्जुन सिंह जी, देश व प्रदेश का ऐसा नाम जिनका जिक्र आते ही मन में कई तरह के रूप सामने आने लगते हैं। कभी गरीबों के मसीहा के रुप में तो कभी उद्योगपतियों के रहनुमा के रूप में, तो कभी अफसरों के मार्गदर्शक के रूप में तो कभी एक व्यक्तित्वपरख राजनेता के रूप में। आज सारा देश, मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं केन्द्रीय मंत्री रहे स्व. अर्जुन सिंह का जन्म दिन मना रहा है।अर्जुन सिंह का जन्म 5 नवंबर 1930 को एक राजपूत परिवार में हुआ था। वे शिव बहादुर सिंह के बेटे थे, जो एक जागीरदार और चुरहट राजघराने के 26वें राव और कांग्रेस के राजनीतिज्ञ थे। अर्जुन सिंह सही मायने में सियासत के एक महानायक कहे जाते हैं। हम देश के नव निर्माण के लिए पूर्व प्रधानमंत्री स्व. जवाहरलाल नेहरू एवं राष्ट्र पिता महात्मा गांधी के सुझाए उपायों पर अमल करने की बात कहते हैं पर अर्जुन सिंह सचमुच उनके अनुरुप ही आचरण किया करते थे। विंध्य क्षेत्र की रिमही जनता उन्हें सम्मान पूर्वक दाऊ साहब के नाम से ही संबोधित किया करती थी। मेरे ख्याल से लगभग पूरा प्रदेश ही उन्हें इस नाम से संबोधित किया करता था। आम जनता के इस संबोधन का दाऊ साहब पूर ख्याल भी रखते थे। सचमुच वह एक पालक की भूमिका का निर्वाहन भी करते थे। बताते हैं कि उनके प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने के पहले तक पूरा विंध्य क्षेत्र शिक्षा के क्षेत्र में काफी पिछड़ा था। जब उन्होंने प्रदेश की बागडोर सम्हाली तो विंध्य क्षेत्र के साथ पूरे प्रदेश में शिक्षा का अलख जग गया। इतना ही उनके मुख्यमंत्री रहते उन्होंने हर उस आदमी का भला किया है जो उनके पास तक पहुंचा या महज जिसकी जानकारी भी उन तक पहुंची है। दाऊ साहब की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि वह किसी जाति या धर्म को विशेष महत्व नहीं देते थे। उनकी नजरों में हर जाति- धर्म का आदमी एक समान था। प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने के बाद भी वह सिर्फ अपने प्रदेश के लोगों का भला नहीं सोचते थे, उनकी सोच समग्र थी। देश में पहली बार तेन्दूपत्ता के राष्ट्रीयकरण का काम उनकी ही देन है। जेठ की दुपहरी में रोजी-रोटी के लिए जंगलों की खाक छानने वाले बीड़ी मजदूरों की पीड़ा को समझने का काम सिर्फ अर्जुन सिंह ही कर सकते थे। गरीबों के प्रति उनका बेहद स्नेह इस कदर जज्बाती था कि, मुख्यमंत्री का पद संभालते ही उन्होंने प्रदेश के सभी झुग्गीवासियों को, जहां वह रह रहे थे, पट्टे देने का ऐलान कर दिया। वह सही मायने में एक महान युग प्रणेता थे। देश-प्रदेश के हर तबके का ख्याल उनके जेहन में हमेशा रहा करता था। दाऊ साहब की राजनीतिक दक्षता का तो कोई सानी नहीं था। उन्हें इसी कुशलता के कारण राजनीति का चाणक्य कहा जाता था। राजनीतिक मसलों को हल करने की जो कला उनमें थी, देश के चुनिंदा नेताओं में ही मानी जा सकती है। फिर चाहे वह आतंकवाद की आग से झुलसते पंजाब में शांति वहाल कराना हो या पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिंहाराव के साथ तत्कालीन मतभेदों के चलते घुटने न टेकने का हो। वह हर मामले में अव्वल रहे हैं। उन्होंने एक कुशल प्रशासक के रूप में भी अपनी अमिट छाम छोड़ी है। वह प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री थे जिन्होंने लापरवाही के आरोप से घिरे एक आईएएस अफसर जो तत्कालीन मुख्य सचिव थे, को निलंबित करने का काम किया था। कहते हैं प्रदेश के पूर्व विधानसभा अध्यक्ष स्व. श्रीनिवास तिवारी जी, जो उस समय दाऊ साहब के मंत्रिमंडल में स्वास्थ्य मंत्रालय का कामकाज देख रहे थे। इसी दौरान उन्होंने रीवा मेडिकल कालेज के कुछ प्रोफेसरों का तबादला तब अविभाजित मप्र में रायपुर कर दिया। कुछ दिन बाद उन्हीं प्रोफेसरों के तबादले कैंसिल भी हो गये। उस समय उप्र के इलाहाबाद जिले से प्रकाशित एक प्रसिद्ध समाचार पाक्षिक पत्रिका में इन तबादलों में लेनदेन की खबर छपी। बताते हैं कि समाचार पत्रिका के बाजार में आते ही बतौर मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह ने तिवारी जी का स्तीफा मांग लिया था। इस घटना का जिक्र करने का कारण सिर्फ यह है कि प्रदेश की जनता को एक निष्पक्ष प्रशासन देने के मामले में वह किसी से कोई समझौता नहीं करते थे। कहते हैं कि काम के मामले में वह लापरवाही बर्दास्त नहीं करते थे। पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री रहे चरणदास महंत ने मुझसे एक साक्षात्कार में बताया था कि दाऊ साहब समय के बहुत ही पाबंद थे। वह हमेशा निर्धारित समय पर पहुंचना पसंद करते थे। उनकी बैठकों में नेता या अफसर निर्धारित समय से पहले ही अपना स्थान ग्रहण कर लेता था। समय की प्रतिबद्धता मप्र के पूर्व मुख्यमंत्री रहे स्व. बाबूलाल गौर ने दाऊ साहब स्व. अर्जुन सिंह से ही सीखी थी। शायद यही कारण था कि उनके कार्यकाल में अफसरशाही कभी हावी नहीं रही। आज दाऊ साहब हमारे बीच नहीं है पर उनकी कर्मठता, कर्तव्य परायणता, देश के लिए कुछ कर गुजरने की लगन हमे हमारे कर्म करने की प्रधानता को मजबूत संबल प्रदान कर रही है। recent visitors 310

अचल संपत्ति गाइडलाइन नियम: संशोधन, प्रक्रिया और प्रशासनिक सवाल

Real Estate Guideline Rules: Amendments, Procedures and Administrative Questions भोपाल। मध्यप्रदेश में अचल संपत्ति के बाजार मूल्य का निर्धारण “मार्गदर्शक बाजार मूल्य सिद्धांत” के आधार पर किया जाता है। यह सिद्धांत राज्य में वर्ष 2000 में लागू हुआ था, और इसके अनुसार प्रत्येक वर्ष संपत्ति की गाइडलाइन दरें निर्धारित की जाती हैं। हाल ही में इस प्रक्रिया के अंतर्गत कुछ संशोधन किए गए हैं, जिनमें नए गजट नोटिफिकेशन और संभावित अध्यादेशों की बात सामने आई है। इसके संदर्भ में जनहित के कुछ सवाल और मुद्दे उठे हैं। गाइडलाइन निर्धारण की प्रक्रिया और केंद्रीय मूल्यांकन समिति केंद्रीय मूल्यांकन समिति का गठन गाइडलाइन दरों का निर्धारण करने और उनकी समीक्षा के लिए होता है। इंदौर में गाइडलाइन दरों को लेकर अंतिम बैठक 20 अक्टूबर 2024 को आयोजित हुई, लेकिन इसके बावजूद गाइडलाइन दरें कई स्थानों पर मीडिया में पहले ही लीक हो गईं। इसे लेकर यह सवाल उठता है कि मीडिया तक यह सटीक जानकारी कैसे पहुंची। जिला मूल्यांकन समिति और दावे-आपत्तियों का समय इस बार गाइडलाइन पर दावे और आपत्तियों की अंतिम तिथि 4 नवंबर 2024 को निर्धारित की गई है। लेकिन यह समय दीपावली पर्व के अवकाश के बीच आता है, जो कि मध्यप्रदेश में एक महत्वपूर्ण त्योहार है। इस दौरान लगातार अवकाश होने के कारण यह प्रश्न उठता है कि क्या अवकाश के दिनों में संबंधित कार्यालय खुले थे और क्या लोगों को दावे-आपत्ति दर्ज करने का पूरा अवसर मिला। जनसंपर्क विभाग या जिला प्रशासन ने इस संबंध में क्या सूचनाएं दीं और क्या संबंधित अधिकारियों के बैठने की व्यवस्था थी, इस पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। प्रस्तावित गाइडलाइन के मैन्युअल अवलोकन और सूचना पटल पर जानकारी प्रस्तावित गाइडलाइन को आम जनता के अवलोकन हेतु कहां रखा गया था, क्या मैन्युअल रूप से इसका निरीक्षण संभव था, और क्या सूचना पटल पर इसकी जानकारी उपलब्ध कराई गई थी? इन सवालों के संदर्भ में वैधानिकता और पारदर्शिता को लेकर चिंताएं सामने आई हैं। संपदा प्रणाली और बाजार मूल्य के संबंध प्रश्न यह भी उठता है कि यदि बाजार मूल्य गाइडलाइन दर से कम है, तो क्या संपदा प्रणाली इसे मान्यता देती है? धारा 31 के तहत मूल्य निर्धारण में उपपंजीयक गणों की भूमिका क्या है और कितने जिला पंजीयकों ने इस नियम के तहत दस्तावेज स्पष्ट किए हैं? आयकर विभाग और गाइडलाइन का संबंध आयकर विभाग संपत्ति का मूल्य निर्धारण गाइडलाइन दर के अनुसार करता है। क्या यह कानून आयकर विभाग के लिए अब भी लागू है या इसमें किसी प्रकार का संशोधन हुआ है? साथ ही, यदि गाइडलाइन दर को जिला पंजीयक के आदेश से मान्यता मिलती है, तो क्या व्यवहार मूल्य की मान्यता आयकर नियमों के अनुरूप है? मौखिक निर्देश और वैधानिक नियम मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा इस संबंध में मौखिक निर्देश दिए गए हैं, लेकिन कानून की दृष्टि से मौखिक निर्देशों की तुलना में लिखित और वैधानिक नियम अधिक महत्वपूर्ण होते हैं। अतः यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि यह गाइडलाइन किस कानून, किस वर्ष और किस विधान के अंतर्गत आती है। इन प्रश्नों का तथ्यात्मक और नीतिगत उत्तर देकर प्रशासन को पारदर्शिता बनाए रखनी होगी, ताकि आम जनता के अधिकारों की रक्षा हो सके और गाइडलाइन प्रक्रिया के बारे में भ्रम दूर हो सके। recent visitors 184

भोपाल: BJP नेता की गुंडागर्दी का वीडियो वायरल, धमकी भरे अंदाज़ में गालियां देते नजर आए

Bhopal: Video of BJP leader’s hooliganism goes viral, seen abusing in a threatening manner भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से भारतीय जनता पार्टी के एक नेता की गुंडागर्दी का वीडियो सामने आया है, जो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में शिवाजी नगर वार्ड 49 के पूर्व पार्षद आशाराम शर्मा कथित रूप से भद्दी-भद्दी गालियां देते हुए दिखाई दे रहे हैं। बताया जा रहा है कि ये वीडियो शहर के अर्जुन नगर का है, जहां शर्मा स्थानीय लोगों को धमकाने और नशीले पदार्थों की बिक्री रोकने की बात करते दिख रहे हैं। वीडियो में क्या है? वीडियो में आशाराम शर्मा गुस्से में स्थानीय व्यक्ति रमेश को धमकाते हुए कह रहे हैं, “लठ निकालो लठ, रमेश तू अब हट जा और गलत काम छोड़ दे, मेरी बात सुन गांजा बेचना बंद कर दें।” इस पूरे घटनाक्रम के दौरान वहां कई लोग मौजूद थे, और किसी ने इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा कर दिया। अब यह वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है और लोग इस पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। नेता के आरोप और पुलिस की प्रतिक्रिया आशाराम शर्मा का दावा है कि उनके इलाके में अवैध रूप से चरस, गांजा और शराब की बिक्री हो रही है। वहीं, जब इस मामले में टीटी नगर थाना क्षेत्र के टीआई से संपर्क किया गया, तो उन्होंने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनके इलाके में ऐसी किसी भी तरह की अवैध गतिविधियां नहीं हो रही हैं। वायरल वीडियो पर सवाल इस घटना ने एक बड़ी बहस को जन्म दिया है कि जनप्रतिनिधियों को इस तरह से खुलेआम धमकी भरे अंदाज में गाली-गलौज करने का अधिकार किसने दिया? क्या इस तरह का व्यवहार जनता के सामने सही संदेश भेज रहा है? वहीं, इस तरह के मामलों में यदि वाकई नशे का कारोबार हो रहा है तो उसकी रोकथाम के लिए पुलिस को कदम उठाना चाहिए, न कि किसी नेता को कानून अपने हाथ में लेकर खुलेआम धमकियां देनी चाहिए। जनता की प्रतिक्रिया इस घटना से लोगों में नाराजगी है, और कई लोगों ने आशाराम शर्मा की इस हरकत पर सवाल उठाए हैं। जनता की ओर से ये सवाल उठाया जा रहा है कि क्या जनप्रतिनिधियों का इस तरह का बर्ताव उचित है और क्या इससे जनता में भय का माहौल बन रहा है? recent visitors 108

बीना विधायक निर्मला सप्रे के मुंह पर भाजपा ने बांध दी पट्टी, नहीं कर सकती हैं मीडिया से बात

BJP has tied a bandage on the mouth of Bina MLA Nirmala Sapre, she cannot talk to the media भोपाल। मध्य प्रदेश भारतीय जनता पार्टी संगठन ने बीना विधायक निर्मला सप्रे पर इस बात की पाबंदी लगा दी है कि वे अब मीडिया से बात नहीं कर सकेंगे। दरअसल मीडिया ने कोशिश की वो उनसे मिलें बातचीत करें और उनसे जाने कि निर्मला का अगला कदम क्या होगा, लेकिन सप्रे ने साफ साफ कह दिया है कि मीडिया से बात नहीं करने के लिए मुझे ऊपर से आदेश है।मतलब भारतीय जनता पार्टी के संगठन से आदेश है कि जब तक वे अंतिम निर्णय नहीं लेती है जब तक कि वे किस पार्टी में है किसमें नहीं है, यह तय नहीं कर लेती हैं तब तक अब मीडिया से बातचीत नहीं करेंगे। निर्मला 2023 में कांग्रेस के टिकट पर बीना से विधायक चुनी गई थी।लेकिन 3 मई 2024 को रात में उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव के सामने भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ले ली। भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता लेने के बाद आज तक निर्मला सप्रे ने अपने पद से इस्तीफा नहीं दिया है। वे चाहतीं तो इस्तीफा देकर बीजेपी से चुनाव लड़ेगी, लेकिन ऐसी कुछ परिस्थितियां बन गई है कि विधायक सप्रे अब इस्तीफा देने को तैयार नहीं है। सब जानते हैं कि जो निर्मला सप्रे ने अपने मतदाताओं और कार्यकर्ताओं व अपने समर्थकों से जो कहा था कि अभी बीना के विकास के लिए इस्तीफा दे रही है। प्रदेश में अभी भारतीय जनता पार्टी की सरकार है तो बीना का विकास होगा। बीना जिला भी बनेगा, लेकिन यह बात तय हो गई है कि अब भारतीय जनता पार्टी बीना को जिला नहीं बनाएगी। क्योंकि बीना और खुरई के बीच में जिला बनाने को लेकर विवाद चल रहा है। कौन जिला बनना चाहिए, कौन नहीं बनना चाहिए। दूसरा मध्यप्रदेश में अब जिलों को लेकर एक परिसीमन समिति का गठन कर दिया गया है।जब तक वह समिति की रिपोर्ट नहीं आती है तब तक बीना जिला नहीं बनेगा। बेशक मुख्यमंत्री ने बीना का दौरा कर लिया है। तमाम विकास कार्यों की घोषणा कर दी है, लेकिन निर्मला सप्रे आज भी हिम्मत नहीं कर पा रही है कि वे कांग्रेस से इस्तीफा दे दें और बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़े। एक इंटरव्यू में सप्रे ने यह दावा था कि अक्टूबर में वे कांग्रेस के विधायक पद से इस्तीफा दे देंगे और भारतीय जनता पार्टी के लिए चुनाव का रास्ता सुगम कर देंगी। लेकिन आप जानते हैं कि उस समय से लेकर आज तक निर्मला सप्रे लगातार कहती रही है कि वह जल्द निर्णय लेंगी, लेकिन उन्होंने ऐसा अभी तक नहीं किया। पिछले दिनों भारतीय जनता पार्टी कार्यालय में उनको देखा गया। उनसे मीडिया ने कुछ सवाल जानने की कोशिश की, लेकिन वे भाग निकली। भाजपा ने उनके मुँह पर पट्टी बांध दी है कि कुछ भी हो जाए, लेकिन अब आपका कोई भी बयान मीडिया में नहीं आना चाहिए। वरना आपके लिए खतरा पैदा हो सकता है। क्योंकि अब यह पूरा मामला कोर्ट कचहरी की ओर जा रहा है। मध्यप्रदेश विधानसभा अध्यक्ष ने अभी तक कोई फैसला नहीं लिया है। मध्यप्रदेश कांग्रेस ने बाकायदा एक शिकायत विधानसभा स्पीकर को दी है कि सप्रे को अब आप दलबदल कानून के तहत बाहर का रास्ता दिखाएं। उन्हें नोटिस भी मिले।एक नहीं तीन तीन नोटिस मिले। उन्होंने जवाब भी दे दिया कि कांग्रेस की विधायक हैं। बीजेपी में गई नहीं है। कितना झूठ बोल सकते हैं वो सारे झूठ के सहारे ले लिए गए हैं। उसके बाद अभी तक अध्यक्ष ने अपना फैसला नहीं सुनाया है। निश्चित तौर पर जैसे ही अध्यक्ष का फैसला आएगा, उन्हें तीन महीने में निर्णय लेना होता है। जैसे फैसला आएगा कांग्रेस हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट का रास्ता खुला वहां जा सकती है। यही कारण है कि भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेताओं ने निर्मला से कहा है बिल्कुल चुप रहना है। एक शब्द नहीं बोलना है। आपका एक भी शब्द हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट में बयान माना जा सकता है। बीना में इस बात की भी चर्चा है कि उन्हें उपचुनाव में शायद हार का मुँह देखना पड़ सकता है इसलिए वे इस्तीफा नहीं दे रहीं हैं। वे बुधनी और विजयपुर उपचुनाव के हालात से भी डरी हुई हैं। recent visitors 226

गोवर्धन पूजा हमें प्रकृति से जोड़ती है, गौ माता में सभी देवताओं का वास : गोविंद सिंह राजपूत

Govardhan Puja connects us with nature, all gods reside in cow: Govind Singh Rajput भोपाल। गोवर्धन पूजा हमारी संस्कृतक धार्मिक संपन्नता का प्रतीक है । यह पूजन हमारा और प्रकृति का संबंध दिखता है। मध्यप्रदेश सरकार तथा मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव द्वारा संपूर्ण प्रदेश में गोवर्धन पूजा एवं गौ पूजा के कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं ताकि नागरिकों को पुरातन परंपरा और संस्कृति से जोड़ा जा सके। यह बात खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने सागर में जिला गौपालन एवं पशुधन संवर्धन समिति द्वारा आयोजित जिला स्तरीय गोवर्धन पूजा एवं गौपूजा कार्यक्रम के दौरान आचार्य विद्यासागर गौसंवर्धन केंद्र रतौना में कही। मंत्री राजपूत ने कहा कि गोवर्धन पूजा एवं गौ पूजा पुरातन समय से होती आ रही है । भाजपा सरकार ने इसे शासकीय तौर पर पूरे प्रदेश में आयोजित कर लोगों के लिए पुरातन परंपराओं और हमारी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का कार्य किया है। गौ माता में सभी देवताओं का वास होता है। गाय की सेवा से सभी देवताओं की पूजा हो जाती है । उन्होंने कहा मध्यप्रदेश सरकार लगातार सांस्कृतिक, धार्मिक कार्यक्रमों में अपनी सहभागिता करके हमारी सनातनी परंपराओं और संस्कृति का प्रचार प्रसार कर रही है।इसी प्रकार से दशहरा पर शस्त्र पूजा आरंभ कराई गई । मंत्री राजपूत में कहा कि आचार्य विद्यासागर भगवान थे। उनके चरण जहां पड़े वहां का उद्धार होता रहा है ।आचार्य जी ने सागर के लिए बहुत कुछ दिया है आज हमें उनके पद चिन्हों पर चलकर सागर के विकास की संबंध में आगे बढ़ाना है।इस अवसर पर कार्यक्रम में शामिल सागर विधायक शैलेंद्र जैन ने कहा कि गोवर्धन पूजा अब शासकीय कार्यक्रम के रूप में पूरे प्रदेश में आयोजित किया गया है ताकि लोग हमारी परंपराओं से जुड़े आने वाली पीढ़ी को भी हमारी परंपराओं की जानकारी हो सके। नरयावली विधायक प्रदीप लारिया ने कहा कि हमारी संस्कृति में पेड़, पत्थर पहाड़ सभी पूजे जाते हैं गोवर्धन पूजा हमारी संस्कृति का अनुपम उदाहरण है दिवारी गीत पर जनता के साथ खूब थिरके मंत्री कार्यक्रम के दौरान खाद्य नागरिक का पूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने दिवारी गीत गाकर जमकर नृत्य किया ।मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के इस अंदाज से कार्यक्रम में शामिल सभी लोग अति उत्साहित हुए और सभी ने मंत्री राजपूत के साथ नृत्य करते हुए गोवर्धन पूजा को परंपरा अनुसार धूमधाम से मनाया मंत्री राजपूत ने सभी को दीपावली व गोवर्धन पूजा की शुभकामनाएं दी। गौशाला में की गौ माता की विधि विधान से पूजा : कार्यक्रम की शुरुआत में मंत्री गोविंद सिंह राजपूत, सागर विधायक शैलेंद्र जैन, विधायक प्रदीप लारिया ने गौशाला में पहुंचकर गौ माता की विधि विधान अनुसार तिलक रोरी लगाकर पूजन किया एवं रोटी खिलाई साथ ही गौशाला का निरीक्षण करते हुए गौशाला प्रबंधन की तारीफ की ।जहां सुरक्षित एवं स्वस्थ गौ माता को आसरा मिला है। मंत्री राजपूत ने कार्यक्रम के दौरान कहा कि यहां जो भी आवश्यकता होगी उसके लिए वह पूरा करेंगे पानी की समस्या को लेकर समिति द्वारा बात कही गई थी जिस पर मंत्री राजपूत ने आश्वासन दिया कि जल्द ही यहां पानी की व्यवस्था की जाएगी।इस अवसर पर पशुपालन एवं डेयरी विभाग जिला गोपालन पशु संवर्धन समिति के सदस्यसहित संभागायुक्त वीरेंद्र सिंह रावत,कलेक्टर संदीप जी आर एवं जिला पंचायत सीईओ विवेक के.वी निगमायुक्त राजकुमार खत्री,एमआईसी सदस्य, पार्षदों सहित नगर के गणमान्य जन मौजूद थे। recent visitors 133

भोपाल में पूर्व प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री का अपमान, पीसीसी के पूर्व चीफ अरुण यादव ने जताई नाराजी

Anti-social elements garlanded the statue of former Prime Minister Lal Bahadur Shastri with shoes in Bhopal भोपाल। देश के पूर्व प्रधानमंत्री स्व. लालबहादुर शास्त्री के भोपाल में अपमान का मामला सामने आया है। इस मामले की वीडियो एक्स पर कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव ने वायरल कर तीखी नाराजगी जताई है। देश के महान नेताओं का सम्मान उनकी पुण्य तिथि और जयंती पर किया जाता है, लेकिन उनके अपमान के लिए शरारती तत्व कोई भी मौका नहीं चूकते। महान नेताओं की सार्वजनिक स्थानों व चौराहा-तिराहों पर उनकी स्थापित प्रतिमाएं की देखरेख को लेकर कोई जिम्मेदारी नहीं लेता और इसका परिणाम आए दिन महान नेताओं के अपमान की घटनाएं सामने आती हैं। एक ताजा मामला भोपाल का सामने आया है जिसे कांग्रेस के नेता ने एक्स पर वीडियो के साथ शेयर किया है।भोपाल में पुरानी विधानसभा के सामने पूर्व प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री की प्रतिमा तिराहा पर स्थापित है। जिस पर उनकी पुण्यतिथि और जयंती पर फूल माला डालने के लिए राजनीतिक दलों के नेता पहुंचते हैं। मगर इसके बाद शायद ही कभी कोई नेता इनकी तरफ देखता होगा। प्रतिमा पर धूल चढ़ी रहती है लेकिन अभी एक्स पर पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव ने इस प्रतिमा का एक वीडियो शेयर किया है। इस वीडियो से भोपाल शहर शर्मसार हो रहा है क्योंकि पूर्व पीएम शास्त्री की प्रतिमा पर किसी शरारती तत्व ने जूतों की माला पहना दी है। पूर्व पीसीसी अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव ने इस मामले में दोषियों पर कठोर कार्यवाही की मांग की है। साथ ही घटना को घोर निंदनीय एवं अपमानजनक बताया है। उन्होंने सरकार से मांग है कि दोषियों पर कठोर से कठोर कार्यवाही की जाए। वहीं, अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के कार्यकारी अध्यक्ष और मोहन सरकार के मंत्री विश्वास सारंग ने भी इसकी निंदा करते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। recent visitors 206

योगी दलितों का अपमान कर रहे, अयोध्या दीपोत्सव में अवधेश को नहीं बुलाया: भाजपा कुछ भी कर सकती है: चंद्रशेखर आजाद

Yogi is insulting Dalits, did not invite Awadhesh to Ayodhya Deepotsav: BJP can do anything: Chandrashekhar Azad यूपी उपचुनाव की सरगर्मी तेज हो गई है। सीएम योगी के ‘बंटेंगे तो कटेंगे’ बयान पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने कहा, ‘कहीं कोई बांट नहीं रहा है और न ही लोगों में मतभेद कर रहा है। ये काम विशेषकर भाजपा करती है। यह भाजपा का काम है। विपक्ष, INDIA गठबंधन और कांग्रेस मजबूती से अपना काम कर रही है। ‘नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद ने कहा- चुनावी रैलियों में ‘बटेंगे तो कटेंगे’ का नारा देने वाले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक मंच पर समाज को ‘हरिजन’ और ‘गैर हरिजन’ में बांट रहे हैं। क्या इस ‘हरिजन’ शब्द के प्रयोग से उनका तथाकथित हिंदू खतरे में नहीं आता? कानपुर की सीसामऊ सीट से सपा प्रत्याशी नसीम सोलंकी ने दिवाली पर वनखंडेश्वर मंदिर में शिवलिंग जल चढ़ाया। दीपक भी जलाए।इधर, लखनऊ में सपा ने एक और नया पोस्टर लगवाया है। इसमें अखिलेश यादव की फोटो के साथ लिखा जुड़ेंगे तो जीतेंगे…। सपा के नेता विजय प्रताप यादव ने यह पोस्टर लगवाया है। इससे पहले, सपा ने अखिलेश यादव के जन्मदिन पर पोस्टर लगवाया था, जिसमें लिखा था- 27 के सत्ताधीश..। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने अखिलेश यादव पर निशाना। कहा- सपा के लोग AC रूम में बैठ कर नेतागिरी करते हैं। इनका प्रदेश की जनता से कोई मतलब नहीं है। जब-जब ये पावर में आए, तब-तब गुंडे, बदमाश पले-बढ़े। प्रदेश की जनता इनको जानती है। recent visitors 208