कांग्रेस कार्यकर्ताओं का पानी की किल्लत के खिलाफ प्रदर्शन, महापौर बंगले का घेराव

Congress workers protest against water shortage in Ujjain, siege of Mayor’s bungalow उज्जैन। मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले में भरपूर बारिश और डैम के फूल होने के बाद भी शहर में पानी की किल्लत को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को खाली बाल्टी लेकर प्रदर्शन किया। साथ ही महापौर के बंगले का घेराव किया। इस दौरान कांग्रेसियों ने शहर की जनता को परेशान करने का आरोप लगाया। साथ ही जल्द से जल्द पानी की समस्या को दूर करने की मांग की। प्रदर्शन को देखते हुए महापौर बंगले के सामने भारी पुलिस बल तैनात रहा। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मेयर बंगले के सामने जमकर नारेबाजी की। इसके बाद जब महापौर मुकेश टटवाल पहुंचे, तो उनके हाथ में खाली बाल्टी थमा कर पानी मांगा। कांग्रेस नेता राजेंद्र वशिष्ठ ने बताया कि, महाकाल की नगरी उज्जैन में डैम में भरपूर पानी उपलब्ध होने के बावजूद भी शहर की जनता पीने के पानी के त्राहिमाम कर रही है। प्रथम नागरिक महापौर को जनता की परेशानी से कोई लेना देना नहीं है। महापौर और नगर निगम के भाजपा बोर्ड को गहरी नींद से जगाने के लिए और जनता की पीड़ा बताने के लिए कांग्रेस के सभी वरिष्ठजन, सेवादल, पार्षदगण, महिला कांग्रेस, यूथ कांग्रेस, एनएसयूआई, आईटी सेल, ब्लॉक अध्यक्ष, ब्लॉक प्रभारी, समस्त प्रकोष्ठ, मंडलम अध्यक्ष सेक्टर अध्यक्ष, सहित सभी कार्यकर्ता महापौर ने बंगले पर धरना प्रदर्शन किया। recent visitors 150

स्मृति शेष : सियासत के महानायक स्व. अर्जुन सिंह, रहेंगे हर दौर याद

Smriti remaining: Late great leader of politics. Arjun Singh, every phase will be remembered स्व. अर्जुन सिंह जी, देश व प्रदेश का ऐसा नाम जिनका जिक्र आते ही मन में कई तरह के रूप सामने आने लगते हैं। कभी गरीबों के मसीहा के रुप में तो कभी उद्योगपतियों के रहनुमा के रूप में, तो कभी अफसरों के मार्गदर्शक के रूप में तो कभी एक व्यक्तित्वपरख राजनेता के रूप में। आज सारा देश, मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं केन्द्रीय मंत्री रहे स्व. अर्जुन सिंह का जन्म दिन मना रहा है।अर्जुन सिंह का जन्म 5 नवंबर 1930 को एक राजपूत परिवार में हुआ था। वे शिव बहादुर सिंह के बेटे थे, जो एक जागीरदार और चुरहट राजघराने के 26वें राव और कांग्रेस के राजनीतिज्ञ थे। अर्जुन सिंह सही मायने में सियासत के एक महानायक कहे जाते हैं। हम देश के नव निर्माण के लिए पूर्व प्रधानमंत्री स्व. जवाहरलाल नेहरू एवं राष्ट्र पिता महात्मा गांधी के सुझाए उपायों पर अमल करने की बात कहते हैं पर अर्जुन सिंह सचमुच उनके अनुरुप ही आचरण किया करते थे। विंध्य क्षेत्र की रिमही जनता उन्हें सम्मान पूर्वक दाऊ साहब के नाम से ही संबोधित किया करती थी। मेरे ख्याल से लगभग पूरा प्रदेश ही उन्हें इस नाम से संबोधित किया करता था। आम जनता के इस संबोधन का दाऊ साहब पूर ख्याल भी रखते थे। सचमुच वह एक पालक की भूमिका का निर्वाहन भी करते थे। बताते हैं कि उनके प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने के पहले तक पूरा विंध्य क्षेत्र शिक्षा के क्षेत्र में काफी पिछड़ा था। जब उन्होंने प्रदेश की बागडोर सम्हाली तो विंध्य क्षेत्र के साथ पूरे प्रदेश में शिक्षा का अलख जग गया। इतना ही उनके मुख्यमंत्री रहते उन्होंने हर उस आदमी का भला किया है जो उनके पास तक पहुंचा या महज जिसकी जानकारी भी उन तक पहुंची है। दाऊ साहब की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि वह किसी जाति या धर्म को विशेष महत्व नहीं देते थे। उनकी नजरों में हर जाति- धर्म का आदमी एक समान था। प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने के बाद भी वह सिर्फ अपने प्रदेश के लोगों का भला नहीं सोचते थे, उनकी सोच समग्र थी। देश में पहली बार तेन्दूपत्ता के राष्ट्रीयकरण का काम उनकी ही देन है। जेठ की दुपहरी में रोजी-रोटी के लिए जंगलों की खाक छानने वाले बीड़ी मजदूरों की पीड़ा को समझने का काम सिर्फ अर्जुन सिंह ही कर सकते थे। गरीबों के प्रति उनका बेहद स्नेह इस कदर जज्बाती था कि, मुख्यमंत्री का पद संभालते ही उन्होंने प्रदेश के सभी झुग्गीवासियों को, जहां वह रह रहे थे, पट्टे देने का ऐलान कर दिया। वह सही मायने में एक महान युग प्रणेता थे। देश-प्रदेश के हर तबके का ख्याल उनके जेहन में हमेशा रहा करता था। दाऊ साहब की राजनीतिक दक्षता का तो कोई सानी नहीं था। उन्हें इसी कुशलता के कारण राजनीति का चाणक्य कहा जाता था। राजनीतिक मसलों को हल करने की जो कला उनमें थी, देश के चुनिंदा नेताओं में ही मानी जा सकती है। फिर चाहे वह आतंकवाद की आग से झुलसते पंजाब में शांति वहाल कराना हो या पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिंहाराव के साथ तत्कालीन मतभेदों के चलते घुटने न टेकने का हो। वह हर मामले में अव्वल रहे हैं। उन्होंने एक कुशल प्रशासक के रूप में भी अपनी अमिट छाम छोड़ी है। वह प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री थे जिन्होंने लापरवाही के आरोप से घिरे एक आईएएस अफसर जो तत्कालीन मुख्य सचिव थे, को निलंबित करने का काम किया था। कहते हैं प्रदेश के पूर्व विधानसभा अध्यक्ष स्व. श्रीनिवास तिवारी जी, जो उस समय दाऊ साहब के मंत्रिमंडल में स्वास्थ्य मंत्रालय का कामकाज देख रहे थे। इसी दौरान उन्होंने रीवा मेडिकल कालेज के कुछ प्रोफेसरों का तबादला तब अविभाजित मप्र में रायपुर कर दिया। कुछ दिन बाद उन्हीं प्रोफेसरों के तबादले कैंसिल भी हो गये। उस समय उप्र के इलाहाबाद जिले से प्रकाशित एक प्रसिद्ध समाचार पाक्षिक पत्रिका में इन तबादलों में लेनदेन की खबर छपी। बताते हैं कि समाचार पत्रिका के बाजार में आते ही बतौर मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह ने तिवारी जी का स्तीफा मांग लिया था। इस घटना का जिक्र करने का कारण सिर्फ यह है कि प्रदेश की जनता को एक निष्पक्ष प्रशासन देने के मामले में वह किसी से कोई समझौता नहीं करते थे। कहते हैं कि काम के मामले में वह लापरवाही बर्दास्त नहीं करते थे। पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री रहे चरणदास महंत ने मुझसे एक साक्षात्कार में बताया था कि दाऊ साहब समय के बहुत ही पाबंद थे। वह हमेशा निर्धारित समय पर पहुंचना पसंद करते थे। उनकी बैठकों में नेता या अफसर निर्धारित समय से पहले ही अपना स्थान ग्रहण कर लेता था। समय की प्रतिबद्धता मप्र के पूर्व मुख्यमंत्री रहे स्व. बाबूलाल गौर ने दाऊ साहब स्व. अर्जुन सिंह से ही सीखी थी। शायद यही कारण था कि उनके कार्यकाल में अफसरशाही कभी हावी नहीं रही। आज दाऊ साहब हमारे बीच नहीं है पर उनकी कर्मठता, कर्तव्य परायणता, देश के लिए कुछ कर गुजरने की लगन हमे हमारे कर्म करने की प्रधानता को मजबूत संबल प्रदान कर रही है। recent visitors 312

अचल संपत्ति गाइडलाइन नियम: संशोधन, प्रक्रिया और प्रशासनिक सवाल

Real Estate Guideline Rules: Amendments, Procedures and Administrative Questions भोपाल। मध्यप्रदेश में अचल संपत्ति के बाजार मूल्य का निर्धारण “मार्गदर्शक बाजार मूल्य सिद्धांत” के आधार पर किया जाता है। यह सिद्धांत राज्य में वर्ष 2000 में लागू हुआ था, और इसके अनुसार प्रत्येक वर्ष संपत्ति की गाइडलाइन दरें निर्धारित की जाती हैं। हाल ही में इस प्रक्रिया के अंतर्गत कुछ संशोधन किए गए हैं, जिनमें नए गजट नोटिफिकेशन और संभावित अध्यादेशों की बात सामने आई है। इसके संदर्भ में जनहित के कुछ सवाल और मुद्दे उठे हैं। गाइडलाइन निर्धारण की प्रक्रिया और केंद्रीय मूल्यांकन समिति केंद्रीय मूल्यांकन समिति का गठन गाइडलाइन दरों का निर्धारण करने और उनकी समीक्षा के लिए होता है। इंदौर में गाइडलाइन दरों को लेकर अंतिम बैठक 20 अक्टूबर 2024 को आयोजित हुई, लेकिन इसके बावजूद गाइडलाइन दरें कई स्थानों पर मीडिया में पहले ही लीक हो गईं। इसे लेकर यह सवाल उठता है कि मीडिया तक यह सटीक जानकारी कैसे पहुंची। जिला मूल्यांकन समिति और दावे-आपत्तियों का समय इस बार गाइडलाइन पर दावे और आपत्तियों की अंतिम तिथि 4 नवंबर 2024 को निर्धारित की गई है। लेकिन यह समय दीपावली पर्व के अवकाश के बीच आता है, जो कि मध्यप्रदेश में एक महत्वपूर्ण त्योहार है। इस दौरान लगातार अवकाश होने के कारण यह प्रश्न उठता है कि क्या अवकाश के दिनों में संबंधित कार्यालय खुले थे और क्या लोगों को दावे-आपत्ति दर्ज करने का पूरा अवसर मिला। जनसंपर्क विभाग या जिला प्रशासन ने इस संबंध में क्या सूचनाएं दीं और क्या संबंधित अधिकारियों के बैठने की व्यवस्था थी, इस पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। प्रस्तावित गाइडलाइन के मैन्युअल अवलोकन और सूचना पटल पर जानकारी प्रस्तावित गाइडलाइन को आम जनता के अवलोकन हेतु कहां रखा गया था, क्या मैन्युअल रूप से इसका निरीक्षण संभव था, और क्या सूचना पटल पर इसकी जानकारी उपलब्ध कराई गई थी? इन सवालों के संदर्भ में वैधानिकता और पारदर्शिता को लेकर चिंताएं सामने आई हैं। संपदा प्रणाली और बाजार मूल्य के संबंध प्रश्न यह भी उठता है कि यदि बाजार मूल्य गाइडलाइन दर से कम है, तो क्या संपदा प्रणाली इसे मान्यता देती है? धारा 31 के तहत मूल्य निर्धारण में उपपंजीयक गणों की भूमिका क्या है और कितने जिला पंजीयकों ने इस नियम के तहत दस्तावेज स्पष्ट किए हैं? आयकर विभाग और गाइडलाइन का संबंध आयकर विभाग संपत्ति का मूल्य निर्धारण गाइडलाइन दर के अनुसार करता है। क्या यह कानून आयकर विभाग के लिए अब भी लागू है या इसमें किसी प्रकार का संशोधन हुआ है? साथ ही, यदि गाइडलाइन दर को जिला पंजीयक के आदेश से मान्यता मिलती है, तो क्या व्यवहार मूल्य की मान्यता आयकर नियमों के अनुरूप है? मौखिक निर्देश और वैधानिक नियम मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा इस संबंध में मौखिक निर्देश दिए गए हैं, लेकिन कानून की दृष्टि से मौखिक निर्देशों की तुलना में लिखित और वैधानिक नियम अधिक महत्वपूर्ण होते हैं। अतः यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि यह गाइडलाइन किस कानून, किस वर्ष और किस विधान के अंतर्गत आती है। इन प्रश्नों का तथ्यात्मक और नीतिगत उत्तर देकर प्रशासन को पारदर्शिता बनाए रखनी होगी, ताकि आम जनता के अधिकारों की रक्षा हो सके और गाइडलाइन प्रक्रिया के बारे में भ्रम दूर हो सके। recent visitors 189

बीना विधायक निर्मला सप्रे के मुंह पर भाजपा ने बांध दी पट्टी, नहीं कर सकती हैं मीडिया से बात

BJP has tied a bandage on the mouth of Bina MLA Nirmala Sapre, she cannot talk to the media भोपाल। मध्य प्रदेश भारतीय जनता पार्टी संगठन ने बीना विधायक निर्मला सप्रे पर इस बात की पाबंदी लगा दी है कि वे अब मीडिया से बात नहीं कर सकेंगे। दरअसल मीडिया ने कोशिश की वो उनसे मिलें बातचीत करें और उनसे जाने कि निर्मला का अगला कदम क्या होगा, लेकिन सप्रे ने साफ साफ कह दिया है कि मीडिया से बात नहीं करने के लिए मुझे ऊपर से आदेश है।मतलब भारतीय जनता पार्टी के संगठन से आदेश है कि जब तक वे अंतिम निर्णय नहीं लेती है जब तक कि वे किस पार्टी में है किसमें नहीं है, यह तय नहीं कर लेती हैं तब तक अब मीडिया से बातचीत नहीं करेंगे। निर्मला 2023 में कांग्रेस के टिकट पर बीना से विधायक चुनी गई थी।लेकिन 3 मई 2024 को रात में उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव के सामने भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ले ली। भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता लेने के बाद आज तक निर्मला सप्रे ने अपने पद से इस्तीफा नहीं दिया है। वे चाहतीं तो इस्तीफा देकर बीजेपी से चुनाव लड़ेगी, लेकिन ऐसी कुछ परिस्थितियां बन गई है कि विधायक सप्रे अब इस्तीफा देने को तैयार नहीं है। सब जानते हैं कि जो निर्मला सप्रे ने अपने मतदाताओं और कार्यकर्ताओं व अपने समर्थकों से जो कहा था कि अभी बीना के विकास के लिए इस्तीफा दे रही है। प्रदेश में अभी भारतीय जनता पार्टी की सरकार है तो बीना का विकास होगा। बीना जिला भी बनेगा, लेकिन यह बात तय हो गई है कि अब भारतीय जनता पार्टी बीना को जिला नहीं बनाएगी। क्योंकि बीना और खुरई के बीच में जिला बनाने को लेकर विवाद चल रहा है। कौन जिला बनना चाहिए, कौन नहीं बनना चाहिए। दूसरा मध्यप्रदेश में अब जिलों को लेकर एक परिसीमन समिति का गठन कर दिया गया है।जब तक वह समिति की रिपोर्ट नहीं आती है तब तक बीना जिला नहीं बनेगा। बेशक मुख्यमंत्री ने बीना का दौरा कर लिया है। तमाम विकास कार्यों की घोषणा कर दी है, लेकिन निर्मला सप्रे आज भी हिम्मत नहीं कर पा रही है कि वे कांग्रेस से इस्तीफा दे दें और बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़े। एक इंटरव्यू में सप्रे ने यह दावा था कि अक्टूबर में वे कांग्रेस के विधायक पद से इस्तीफा दे देंगे और भारतीय जनता पार्टी के लिए चुनाव का रास्ता सुगम कर देंगी। लेकिन आप जानते हैं कि उस समय से लेकर आज तक निर्मला सप्रे लगातार कहती रही है कि वह जल्द निर्णय लेंगी, लेकिन उन्होंने ऐसा अभी तक नहीं किया। पिछले दिनों भारतीय जनता पार्टी कार्यालय में उनको देखा गया। उनसे मीडिया ने कुछ सवाल जानने की कोशिश की, लेकिन वे भाग निकली। भाजपा ने उनके मुँह पर पट्टी बांध दी है कि कुछ भी हो जाए, लेकिन अब आपका कोई भी बयान मीडिया में नहीं आना चाहिए। वरना आपके लिए खतरा पैदा हो सकता है। क्योंकि अब यह पूरा मामला कोर्ट कचहरी की ओर जा रहा है। मध्यप्रदेश विधानसभा अध्यक्ष ने अभी तक कोई फैसला नहीं लिया है। मध्यप्रदेश कांग्रेस ने बाकायदा एक शिकायत विधानसभा स्पीकर को दी है कि सप्रे को अब आप दलबदल कानून के तहत बाहर का रास्ता दिखाएं। उन्हें नोटिस भी मिले।एक नहीं तीन तीन नोटिस मिले। उन्होंने जवाब भी दे दिया कि कांग्रेस की विधायक हैं। बीजेपी में गई नहीं है। कितना झूठ बोल सकते हैं वो सारे झूठ के सहारे ले लिए गए हैं। उसके बाद अभी तक अध्यक्ष ने अपना फैसला नहीं सुनाया है। निश्चित तौर पर जैसे ही अध्यक्ष का फैसला आएगा, उन्हें तीन महीने में निर्णय लेना होता है। जैसे फैसला आएगा कांग्रेस हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट का रास्ता खुला वहां जा सकती है। यही कारण है कि भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेताओं ने निर्मला से कहा है बिल्कुल चुप रहना है। एक शब्द नहीं बोलना है। आपका एक भी शब्द हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट में बयान माना जा सकता है। बीना में इस बात की भी चर्चा है कि उन्हें उपचुनाव में शायद हार का मुँह देखना पड़ सकता है इसलिए वे इस्तीफा नहीं दे रहीं हैं। वे बुधनी और विजयपुर उपचुनाव के हालात से भी डरी हुई हैं। recent visitors 228

पूर्व प्रधानमंत्री की प्रतिमा पर जूते रखने वाला आरोपी गिरफ्तार, कांग्रेस ने किया था प्रदर्शन

The accused who put shoes on the statue of the former Prime Minister has been arrested; Congress had protested भोपाल । पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की प्रतिमा पर शरारती तत्वों के द्वारा जूता रखने का मामला सामने आया है. कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इसकी शिकायत अरेरा हिल्स थाने में की है. साथ ही उन्होंने 7 दिन में आरोपियों को पकड़ने का पुलिस को अल्टीमेटम दिया है. साथ ही कार्यकर्ताओं ने पूर्व प्रधानमंत्री की प्रतिमा की पानी से धुलाई की और दूध से अभिषेक भी किया. इसके बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया है. कांग्रेसियों ने नारेबाजी कर थाने में की शिकायत दरअसल, किसी अज्ञात व्यक्ति ने पुरानी विधानसभा मिंटो हाल (कुशाभाऊ ठाकरे सभागार) के सामने चौराहे पर स्थापित लाल बहादुर शास्त्री की प्रतिमा पर दो जूते रख दिए थे. शनिवार दिन में यूथ कांग्रेस के प्रवक्ता गौरव अवस्थी वहां से निकले तो उनकी नजर प्रतिमा के कंधों पर रखे जूतों पर पड़ी. उन्होंने तत्काल सूचना विधायक आरिफ मसूद व कांग्रेस के प्रदेश सचिव अब्दुल नफीस को दी. देखते ही देखते घटनास्थल पर बड़ी संख्या में कांग्रेसी एकत्रित हो गए. फिर नारेबाजी कर विरोध जताया गया. जहांगीराबाद के ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष यसवंत यादव ने अरेरा हिल्स थाने में शिकायत आवेदन दिया. साथ ही प्रतिमा का दूध से अभिषेक कर माला पहनाई गई. आरोपी को अरेरा हिल्स पुलिस ने किया गिरफ्तार कांग्रेस के प्रदेश सचिव अब्दुल नफीस ने कहा, ”शास्त्री जी के इस अपमान को कांग्रेस बर्दाश्त नहीं करेगी, जिस प्रकार असामाजिक तत्वों के द्वारा उनका अपमान किया जा रहा है, ये अशोभनीय है. यदि एक सप्ताह के भीतर पुलिस जूते रखने वाले को गिरफ्तार नहीं करती है तो कांग्रेसी सड़कों पर उतरेंगे. जिस प्रधानमंत्री ने जय जवान, जय किसान का नारा दिया. देश को संकट के समय उबारा. उस प्रधानमंत्री का किसी ने अपमान किया.” अरेरा हिल्स थाना पुलिस ने देर रात एक आरोपी करन बैरागी को गिरफ्तार कर लिया है. recent visitors 178

सीसीटीवी कैमरे और रखरखाव।

CCTV Cameras and Maintenance. इंदौर नगर निगम ने नियम बना दिया है कि सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे मुख्य चौराहे व खास जगहों पर,निजी प्रतिष्ठान भी लगाऐं, खैर अच्छा है।अब आते हैं हम लगे हुए सीसीटीवी कैमरे पर और उनकी व्यवस्था पर, इंदौर के प्रशासनिक संकुल में 22सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, नब्बे फीसदी बंद है या कैमरों पर धुल जमी हुई है,। पुलिस थानों में अब लगेंगे जो लगे हैं अधिकांश समझ सकते हैं क्या औपचारिकता पूरी करते हैं।शहर के अधिकांश धार्मिक स्थलों पर भी सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं सरकारी नियंत्रण वाले खजराना गणेश मंदिर, बाबा रणजीत मंदिर, बिजासन माता मंदिर पर तो अन्य धार्मिक स्थलों पर भी संचालन करने वालों ने, तो क्या सभी काम कर रहे, व्यवस्थित रूप से रिकार्डिंग होती है, कैमरों का ऐंगल खुराफाती लोगों ने मोड़ा या ऊपर नीचे तो नहीं किया, कैमरे पर गंदगी तो नहीं,,,सवाल आम आदमी की जरूरत का सुरक्षा का भी है। तथा सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं तो अपराधिक घटनाएं करने वाले के मन में भय भी रहे तथा अपने कर्मचारियों में भी भय रहे।पंरतु मेरी जानकारी में है कि मैटेनस सही तरीके से नहीं हो रहे,अगर होते तो मैटेनस साथ-साथ निगाहें तथा जागरुकता दोनों के परिणाम सामने आते।आप बड़े बड़े व्यवसायिक प्रतिष्ठान में जाए आपको लगेगा सीसीटीवी कैमरे का मतलब और उपयोगिता, कुछेक धार्मिक स्थलों पर भी,, बाकी राम भरोसे व्यवस्था चल रही,मैं बिना तथ्य के कुछ भी नहीं लिखता और खूद को कसौटी पर रखकर,,,आवश्यकता है कि सीसीटीवी कैमरे जहां जहां लगे हैं लगवाए गए हैं उनकी उपयोगिता सुनिश्चित हो,,, आवश्यकता है । प्रमोद कुमार व्दिवेदी एड्वोकेट recent visitors 167

संत शरण में जीतू पटवारी, पीठाधीश्वर शांडिल्य महाराज से लिया आशीर्वाद

Jeetu Patwari took refuge in saint, took blessings from Peethadheeshwar Shandilya Maharaj भोपाल। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने शनिवार, 2 नवंबर को करुणाधाम आश्रम, नेहरू नगर का दौरा कर पीठाधीश्वर सुदेश शांडिल्य महाराज से मुलाकात की और उनका आशीर्वाद लिया। इस अवसर पर जीतू पटवारी ने महाराज को दीपावली की शुभकामनाएं भी दीं और उन्हें सम्मान स्वरूप शॉल व श्रीफल भेंट किया। इस मुलाकात में पटवारी के साथ कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता भी मौजूद रहे, जिनमें पूर्व मंत्री पीसी शर्मा, भोपाल जिला शहर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष प्रवीण सक्सेना, महामंत्री संजीव सक्सेना, अमित शर्मा और गुड्डू चौहान प्रमुख थे। कांग्रेस नेताओं ने इस अवसर पर संत शांडिल्य महाराज के दर्शन किए और प्रदेश में समृद्धि व शांति की कामना की।  जीतू पटवारी का यह दौरा पार्टी की धार्मिक सहिष्णुता और आध्यात्मिक जुड़ाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। recent visitors 163