बकाया बिजली बिल भरेगी सरकार

Government will pay the outstanding electricity bill भोपाल। मध्य प्रदेश की सरकार ने नगरीय निकायों के करोड़ों रुपये के बकाया बिजली बिल चुकाने का निर्णय लिया है। आर्थिक संकट में फंसे इन निकायों की सहायता के लिए चुंगी क्षतिपूर्ति की राशि का उपयोग किया जाएगा, जिससे उनकी बिजली की देनदारी चुकाई जा सकेगी। 60 करोड़ रुपये की स्वीकृति मप्र नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने इस मद से 60 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की है। इसमें से सबसे अधिक 31 करोड़ रुपये पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी को दिए जाएंगे, जिससे इंदौर नगर निगम के 23 करोड़ रुपये का बकाया बिल समायोजित किया जाएगा। इसके अलावा भोपाल नगर निगम के 5 करोड़, जबलपुर के 5.5 करोड़ और ग्वालियर के 2.5 करोड़ रुपये का बिल भी चुकाया जाएगा। वित्तीय स्थिति की चुनौती मध्य प्रदेश के नगरीय निकायों की वित्तीय स्थिति इस कदर बिगड़ चुकी है कि वे अपने बिजली के बिल समय पर चुकाने में असमर्थ हैं। इसके पीछे मुख्य कारण है कि इन निकायों की वसूली बेहद कम है। पेयजल, स्ट्रीट लाइट आदि के लिए विद्युत वितरण कंपनियों से बिजली की आपूर्ति की जाती है, लेकिन स्थानीय निकायों द्वारा रहवासियों से शुल्क की वसूली में कमी आई है। सरकार का निर्णय इस स्थिति को देखते हुए सरकार ने चुंगी क्षतिपूर्ति की राशि का उपयोग बिजली के बकाया बिलों का भुगतान करने का निर्णय लिया है। यह राशि अब मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति के बजाय बिजली बिल चुकाने में खर्च की जाएगी। इससे विद्युत वितरण कंपनियों पर भी दबाव कम होगा और उनकी सेवा में भी कोई बाधा नहीं आएगी। recent visitors 176

महिलाओं को सरकार का एक और तोहफा, नौकरियों में मिलेगा 35 प्रतिशत आरक्षण

Another gift from the government to women, they will get 35 percent reservation in jobs. भोपाल। प्रदेशकी मोहन सरकार ने महिलाओं के हित में बड़ा कदम उठाया है। सिविल सेवाओं में महिलाओं के लिए अब 33 के बजाय 35 प्रतिशत पद आरक्षित होंगे। मंगलवार को मंत्रालय में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव पर सर्वसम्मति से मुहर लगाई गई। कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए डिप्टी सीएम और लोक स्वास्थ्य व चिकित्सा शिक्षा मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा, बैठक के दौरान सीएम डॉ. मोहन यादव ने ग्वालियर में मानसिक आरोग्यशाला, मंदसौर में कल्याण विभाग, स्कूल शिक्षा विभाग, वन विभाग में पीएससी से भरे जाने वाले पदों की जानकारी मांगी है। खाद के लिए 254 नए उवर्रक खरीदी केंद्र मंजूर शुक्ल ने बताया- महिलाओं को आरक्षण के अलावा कैबिनेट ने 254 नए नकद उर्वरक केंद्रों की स्वीकृति दी है। इससे खाद के लिए परेशान हो रहे किसानों को राहत मिलेगी। खासतौर पर जो डिफॉल्टर किसान हैं, उन्हें नकद खाद मिल सकेगी।सुपर क्रिटिकल पावर प्लांट में तब्दील होगा सतपुड़ा थर्मल स्टेशनसारणी में सतपुड़ा थर्मल पावर स्टेशन की 410 मेगावाट की दो और 420 मेगावाट की दो यूनिट्स मिलाकर कुल 830 मेगावाट की चार यूनिट्स को डिकमीशन किया जाएगा। फिर 660 मेगावाट का सुपर क्रिटिकल पावर प्लांट विकसित किया जाएगा। असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर आवेदन के लिए आयु सीमा बढ़ी फैसलों की जानकारी देते हुए शुक्ल ने बताया- मेडिकल कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर आवेदन के लिए आयु सीमा 40 से बढ़ाकर 50 साल की गई है। कैबिनेट ने तय किया है कि केंद्र सरकार द्वारा गठित पैरा मेडिकल काउंसिल के नियम अब तक जारी नहीं किए गए हैं इसलिए एमपी पैरामेडिकल काउंसिल के नियमों को रीएस्टेट किया जाएगा ताकि एडमिशन और परीक्षाएं हो सकें। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में पर्यवेक्षण समिति गठितउधर, सिंहस्थ वर्ष-2028 की तैयारियों के लिए मप्र शासन द्वारा मुख्य सचिव की अध्यक्षता में पर्यवेक्षण समिति गठित कर दी गई है। पर्यवेक्षण समिति सिंहस्थ के अंतर्गत मंत्रि-परिषद समिति के निर्देशों का पालन, मंत्रि-परिषद समिति के समक्ष रखे जाने समस्त नीतिगत प्रकरणों का परीक्षण कार्य तथा विभिन्न विभागों की सिंहस्थ मद कार्य योजना की समीक्षा करेगी। समिति में अपर मुख्य सचिव, गृह, उर्जा, लोक निर्माण, जल संसाधन, परिवहन, प्रमुख सचिव, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, राजस्व, वित्त, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व, संस्कृति एवं पर्यटन, सदस्य होंगे। प्रमुख सचिव, नगरीय विकास एवं आवास समिति के सदस्य सचिव होंगे। recent visitors 140

सीधी जिले में रिश्वतखोरी पर कड़ा प्रहार: जिला पंचायत सीईओ अंशुमान राज का साहसिक कदम

Attempt to give bribe in the district failed: CEO Anshuman Raj’s bold step सीधी ! जिले में रिश्वतखोरी के मामलों में तेजी से वृद्धि हो रही है, लेकिन सोमवार को जिला पंचायत सीईओ और अपर कलेक्टर अंशुमान राज ने एक साहसिक कदम उठाकर इस प्रवृत्ति पर कड़ा संदेश दिया। एक पूर्व पंचायत सदस्य, अखिलेश कुशवाहा, अंशुमान राज के चैंबर में मिठाई का डिब्बा और नोटों से भरा लिफाफा लेकर पहुंचे थे। परंतु, जैसे ही अंशुमान राज ने मिठाई का डिब्बा खोला, उन्होंने उसके नीचे एक नोटों से भरा लिफाफा पाया, जिससे उन्हें रिश्वत का अंदेशा हुआ। बिना किसी संकोच के, उन्होंने वह मिठाई का डिब्बा कुशवाहा के मुंह पर फेंक दिया और तुरंत पुलिस को सूचित कर दिया। पुलिस ने की तुरंत कार्रवाई सूचना मिलते ही कोतवाली थाना प्रभारी अभिषेक उपाध्याय अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और दोनों व्यक्तियों को थाने ले जाकर पूछताछ की। थाना प्रभारी के अनुसार, जांच के बाद इस मामले में उचित कार्रवाई की जाएगी। दोनों संदिग्धों ने अब तक रिश्वत के आरोपों को अस्वीकार किया है, लेकिन मौके पर मौजूद साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की संभावना है। सीईओ की ईमानदार छवि पर मुहर सीईओ अंशुमान राज की इस घटना के बाद जिले में चर्चा है। उनकी ईमानदार छवि और कार्य के प्रति समर्पण को देखते हुए जनता में उनकी सराहना हो रही है। जिले में अपनी तैनाती के बाद से ही उन्होंने कई भ्रष्टाचार के मामलों में सख्त कदम उठाए हैं। कई रोजगार सहायकों और सचिवों के खिलाफ की गई कार्रवाई उनके दृढ़ निश्चय को दर्शाती है। आरोपी का बयान: “रिश्वत का उद्देश्य नहीं था” दूसरी ओर, पूर्व जिला पंचायत सदस्य अखिलेश कुशवाहा ने इस मामले में सफाई दी है। उनका कहना है कि वे पहली बार जिला पंचायत सीईओ से मिलने गए थे और मिठाई का डिब्बा लेकर गए थे। उनके अनुसार, उनके पास जो पैसे थे, वे उनके निजी कार्य के लिए थे और उनका रिश्वत देने का कोई इरादा नहीं था। उनका दावा है कि सीईओ को इस संबंध में गलतफहमी हो गई है। यह घटना न केवल रिश्वतखोरी के प्रति प्रशासन की कठोर नीति को दर्शाती है, बल्कि ईमानदारी और निडरता के प्रतीक के रूप में अंशुमान राज के प्रति जिले की जनता का विश्वास और अधिक बढ़ा है। recent visitors 149

भोपाल के वन विहार में आम आदमी पाल सकेंगे शेर और बाग, जाने  प्रक्रिया

Common man will be able to keep lions and gardens in Bhopal’s Van Vihar, know the process भोपाल। वन विहार नेशनल पार्क के बाघों व सिंह को 17 हजार रुपए में तीन माह तो दो लाख रुपये में एक साल तक गोद ले सकेंगे। इस साल छह लोगों ने वन्य प्राणी को गोद लिया है। इसमें बाघ को गोद लेने वालों की संख्या अधिक है। यह संख्या पिछले दो-तीन सालों की अपेक्षा में बढ़ी है। लेकिन 2009 में जब यह योजना शुरू की गई। तब से लगातार गोद लेने वालों की संख्या में कमी देखने को मिली है।  शुरुआती साल में करीब 18 लोगों ने वन्य प्राणी को गोद लिया था। पार्क प्रबंधन ने गोद लेने के लिए नए सिरे से शुल्क और प्रक्रिया तय की है। बाघों को एक साल तक गोद लेने का खर्च दो लाख रुपये तय किया है। इस तरह दूसरे वन्यप्राणियों के लिए भी खर्च तय किया गया है। गोद लेने के बदले दी गई राशि से संबंधित वन्यप्राणियों का संरक्षण और बेहतर खानपान की व्यवस्था की जाती है। वन्यप्राणी प्रेमी, सामाजिक कार्यकर्ता, सरकारी, गैर सकारी संस्थानों ने बाघ, तेंदुए, सिंह समेत दूसरे वन्यप्राणियों को गोद लिया है। इस योजना का मकसद वन्यप्राणियों के संरक्षण को बढ़ावा देना है। बाघ व भालू गोद लेना पहली पंसद   इस साल छह वन्य प्राणी को गोद लिया है। इसमें दो भालू, दो बाघ, एक सिंह और एक तेंदुआ शामिल है। वहीं अभी तक सबसे ज्याद बाघ को 41 बार गोद लिया गया है, इसमें मादा और नर बाघ शामिल हैं। पांच बार गौरी और रिद्धी को एक वर्ष के लिए गोद लिया गया है। वहीं, पन्ना को छह बार गोद लिया गया है। इससे 12 लाख रुपये का प्राप्त हुए हैं। वन्य जीवों को गोद लेने की यह है प्रक्रिया अगर कोई व्यक्ति या संस्था वन्य प्राणी को गोद लेना चाहते हैं, तो वन विहार प्रबंधन को लिखित आवेदन देना होगा। जिसमें कितने माह व साल के लिए  जानवर गोद लेना है। यह उल्लेख कराना होता है। उसके हिसाब से जो राशि तय की गई है, उतने रुपए का चेक से प्रबंधन को देना होता है। फिलहाल वन विहार में बाघ, शेर, लोमड़ी, अजगर, पायथन सहित कुछ प्राणियों को कापोर्रेट कंपनियों ने गोद ले रखा है।  अधिकारियों ने बताया कि वन्य प्राणियों को गोद देने की योजना 2009 में शुरू की गई थी और अब तक 96 प्राणी गोद लिए जा चुके हैं। तो वहीं वन्य प्राणी को गोद लेने वालों को इनकम टैक्स की दान धारा 80 जी के तहत छूट मिलती है। किसी भी ट्रस्ट, चैरिटेबल संस्थान या स्वीकृत शिक्षा संस्थान को दिया गया दान टैक्स छूट के दायरे में आता है। यह छूट दान की गई रकम के 50 फीसदी या 100 फीसदी तक हो सकती है। recent visitors 214

मध्य प्रदेश मौसम अपडेट: नवंबर में ठंड ने ढाया कहर कई शहरों में तापमान 20 डिग्री से नीचे

Madhya Pradesh weather update: Cold wreaked havoc in November, temperature below 20 degrees in many cities भोपाल। नवंबर शुरू होते ही गुलाबी ठंड ने दस्तक दे दी है। एमपी के अधिकांश शहरों में रात का तापमान 20 डिग्री सेल्सियस से नीचे बना हुआ है। अनूपपुर के अमरकंटक और नर्मदापुरम के पचमढ़ी में ठंड का असर सबसे ज्यादा है। सोमवार रात यहां का तापमान 13 डिग्री सेल्सियस से भी नीचे रहा।  ग्वालियर-चंबल संभाग में ठंड का असर तेज होता है, लेकिन शुरुआत में अभी भोपाल और जबलपुर की तुलना में ग्वालियर थोड़ा गर्म है। रविवार-सोमवार की रात भोपाल और जबलपुर में तापमान 17 डिग्री रहा। जबकि, ग्वालियर में 17.3 डिग्री, उज्जैन में 18.3 डिग्री और इंदौर में 18.6 डिग्री रिकॉर्ड किया गया।  मंडला, रीवा और राजगढ़ में तापमान  मंडला, मलाजखंड, रीवा, उमरिया सहित अन्य शहरों में भी रात का पारा लुढ़का है। रविवार सोमवार की रात अमरकंटक में 12.2 डिग्री, पचमढ़ी में 12.4 डिग्री, मंडला में 13.6 डिग्री, रीवा में 14.4 डिग्री और मलाजखंड में 14.8 डिग्री तापमान रिकॉर्ड किया गया। उमरिया में तापमान 15.3 डिग्री, राजगढ़ में 16 डिग्री और बैतूल-सतना में 16.7 डिग्री सेल्सियस रहा। अगले सप्ताह बढ़ेगी ठंड मौसम विभाग की मानें तो नवंबर के दूसरे सप्ताह ठंड का असर बढ़ेगा। इस दौरान उत्तर भारत में बर्फबारी की संभावना है। इसका असर मध्यप्रदेश में भी देखने को मिल सकता है।   बड़े शहरों में नवंबर का मौसम भोपाल में नवंबर महीने में रात का तापमान 9 से 12 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है। 30 नवंबर 1941 को सबसे कम 6.1 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया था। इंदौर में नवंबर के दूसरे सप्ताह से ठंड बढ़ने लगती है। रात का तापमान 10 से 12 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाता है। 25 नवंबर 1938 को इंदौर में  5.6 डिग्री तापमान रिकॉर्ड किया गया था  ग्वालियर में पिछले 10 साल में न्यूनतम तापमान 6 डिग्री तक गिरा है। 1970 में यह 3 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।  जबलपुर में न्यूनतम तापमान 7.8 डिग्री तक जा चुका है। 12 नवंबर 1989 को यह 3.9 डिग्री सेल्सियस रहा।  उज्जैन में न्यूनतम तापमान 10-11 डिग्री के बीच रहता है। 30 नवंबर 1974 को 2.8 डिग्री सेल्सियस रहा है।  recent visitors 185

मध्यप्रदेश: शिक्षा विभाग में बड़ा खेल, 1.46 लाख सरकारी कर्मचारी किए गए इनएक्टिव, जांच शुरू

Madhya Pradesh: Big game in education department, 1.46 lakh government employees made inactive, investigation started भोपाल। मध्यप्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग में बड़ी अनियमितता सामने आई है, जिसमें राज्य के अलग-अलग जिलों में लगभग 1 लाख 46 हजार 333 सरकारी कर्मचारियों को अचानक “इनएक्टिव” कर दिया गया है। कर्मचारियों द्वारा इस मामले की शिकायत किए जाने के बाद ही विभाग ने मामले को संज्ञान में लिया और अब जांच की तैयारी की जा रही है। जांच के बाद दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। कैसे हुआ यह मामला? एजुकेशन पोर्टल पर यह अनियमितता तब सामने आई जब लगभग 2 लाख शिक्षा विभाग के कर्मचारियों को इनएक्टिव कर दिया गया। विभाग ने अपनी ओर से कर्मचारियों को इनएक्टिव करने के लिए विभिन्न कारण दिए। इनमें 22 हजार 672 कर्मचारियों को मृत घोषित किया गया, जबकि 1 लाख 2 हजार 637 कर्मचारियों को सेवानिवृत्त मानकर इनएक्टिव किया गया। इसके अलावा, 2781 कर्मचारियों को “टर्मिनेट” यानी सेवा समाप्त बताकर हटा दिया गया, और 18 हजार 243 कर्मचारियों को इस्तीफा देने का हवाला देकर उनके नामों को पोर्टल से हटा दिया गया। कर्मचारियों की शिकायत के बाद विभाग हरकत में इस बड़े पैमाने पर हुई इनएक्टिव कार्रवाई के बाद प्रभावित कर्मचारियों ने शिक्षा विभाग से शिकायत की, जिसके बाद ही विभाग ने अपनी गलती मानी और इस मामले की जांच करने का निर्णय लिया। विभाग ने इस कार्रवाई के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के नाम और पदों की जानकारी मांगी है। आगे की कार्रवाई और विभाग पर उठ रहे सवाल जांच के बाद दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने की बात कही गई है, लेकिन इस घटना ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। यह पहली बार है जब इतनी बड़ी संख्या में कर्मचारियों को एक साथ इनएक्टिव किया गया है। शिक्षा विभाग पर सवालों की बौछार इस मामले के बाद शिक्षा विभाग सवालों के घेरे में आ गया है कि इतनी बड़ी गलती कैसे हुई और इसकी जिम्मेदारी किसकी है। कर्मचारियों को अचानक इनएक्टिव करने का कारण समझ से परे है, और इससे यह भी अंदेशा जताया जा रहा है कि पोर्टल पर डेटा एंट्री और सत्यापन में भारी गड़बड़ी हुई है। इस तरह की अनियमितता ने कर्मचारियों में असुरक्षा का माहौल पैदा कर दिया है और पूरे प्रदेश में इस घटना की तीखी आलोचना हो रही है। अब देखना होगा कि जांच में कौन दोषी साबित होता है और क्या सुधारात्मक कदम उठाए जाते हैं ताकि भविष्य में इस प्रकार की अनियमितता न हो। recent visitors 131

अचल संपत्ति गाइडलाइन नियम: संशोधन, प्रक्रिया और प्रशासनिक सवाल

Real Estate Guideline Rules: Amendments, Procedures and Administrative Questions भोपाल। मध्यप्रदेश में अचल संपत्ति के बाजार मूल्य का निर्धारण “मार्गदर्शक बाजार मूल्य सिद्धांत” के आधार पर किया जाता है। यह सिद्धांत राज्य में वर्ष 2000 में लागू हुआ था, और इसके अनुसार प्रत्येक वर्ष संपत्ति की गाइडलाइन दरें निर्धारित की जाती हैं। हाल ही में इस प्रक्रिया के अंतर्गत कुछ संशोधन किए गए हैं, जिनमें नए गजट नोटिफिकेशन और संभावित अध्यादेशों की बात सामने आई है। इसके संदर्भ में जनहित के कुछ सवाल और मुद्दे उठे हैं। गाइडलाइन निर्धारण की प्रक्रिया और केंद्रीय मूल्यांकन समिति केंद्रीय मूल्यांकन समिति का गठन गाइडलाइन दरों का निर्धारण करने और उनकी समीक्षा के लिए होता है। इंदौर में गाइडलाइन दरों को लेकर अंतिम बैठक 20 अक्टूबर 2024 को आयोजित हुई, लेकिन इसके बावजूद गाइडलाइन दरें कई स्थानों पर मीडिया में पहले ही लीक हो गईं। इसे लेकर यह सवाल उठता है कि मीडिया तक यह सटीक जानकारी कैसे पहुंची। जिला मूल्यांकन समिति और दावे-आपत्तियों का समय इस बार गाइडलाइन पर दावे और आपत्तियों की अंतिम तिथि 4 नवंबर 2024 को निर्धारित की गई है। लेकिन यह समय दीपावली पर्व के अवकाश के बीच आता है, जो कि मध्यप्रदेश में एक महत्वपूर्ण त्योहार है। इस दौरान लगातार अवकाश होने के कारण यह प्रश्न उठता है कि क्या अवकाश के दिनों में संबंधित कार्यालय खुले थे और क्या लोगों को दावे-आपत्ति दर्ज करने का पूरा अवसर मिला। जनसंपर्क विभाग या जिला प्रशासन ने इस संबंध में क्या सूचनाएं दीं और क्या संबंधित अधिकारियों के बैठने की व्यवस्था थी, इस पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। प्रस्तावित गाइडलाइन के मैन्युअल अवलोकन और सूचना पटल पर जानकारी प्रस्तावित गाइडलाइन को आम जनता के अवलोकन हेतु कहां रखा गया था, क्या मैन्युअल रूप से इसका निरीक्षण संभव था, और क्या सूचना पटल पर इसकी जानकारी उपलब्ध कराई गई थी? इन सवालों के संदर्भ में वैधानिकता और पारदर्शिता को लेकर चिंताएं सामने आई हैं। संपदा प्रणाली और बाजार मूल्य के संबंध प्रश्न यह भी उठता है कि यदि बाजार मूल्य गाइडलाइन दर से कम है, तो क्या संपदा प्रणाली इसे मान्यता देती है? धारा 31 के तहत मूल्य निर्धारण में उपपंजीयक गणों की भूमिका क्या है और कितने जिला पंजीयकों ने इस नियम के तहत दस्तावेज स्पष्ट किए हैं? आयकर विभाग और गाइडलाइन का संबंध आयकर विभाग संपत्ति का मूल्य निर्धारण गाइडलाइन दर के अनुसार करता है। क्या यह कानून आयकर विभाग के लिए अब भी लागू है या इसमें किसी प्रकार का संशोधन हुआ है? साथ ही, यदि गाइडलाइन दर को जिला पंजीयक के आदेश से मान्यता मिलती है, तो क्या व्यवहार मूल्य की मान्यता आयकर नियमों के अनुरूप है? मौखिक निर्देश और वैधानिक नियम मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा इस संबंध में मौखिक निर्देश दिए गए हैं, लेकिन कानून की दृष्टि से मौखिक निर्देशों की तुलना में लिखित और वैधानिक नियम अधिक महत्वपूर्ण होते हैं। अतः यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि यह गाइडलाइन किस कानून, किस वर्ष और किस विधान के अंतर्गत आती है। इन प्रश्नों का तथ्यात्मक और नीतिगत उत्तर देकर प्रशासन को पारदर्शिता बनाए रखनी होगी, ताकि आम जनता के अधिकारों की रक्षा हो सके और गाइडलाइन प्रक्रिया के बारे में भ्रम दूर हो सके। recent visitors 179