प्रदेश के मौसम में परिवर्तन, सुबह-शाम ठंड का अहसास, पड़ेगी कड़ाके की सर्दी ?

Change in the weather of the state, feeling of cold in the morning and evening, will there be severe cold? भोपाल। मध्य प्रदेश के मौसम में परिवर्तन देखने को मिल रहा है। तापमान में गिरावट की वजह से सुबह और शाम लोगों को ठंड महसूस होने लगी है। वहीं दिन का मौसम सामान्य बना हुआ है। IMD के मुताबिक, प्रदेश में अगले हफ्ते से ठंड बढ़ सकती है।मौसम विभाग के मुताबिक, प्रदेश में उत्तरी हवा चलने से तापमान में गिरावट आएगी। पचमढ़ी, मलाजखंड, अमरकंटक समेत कई जिलों के मौसम में परिवर्तन होगा। आज प्रदेश में ठंडी हवाएं चलेंगी। जिसकी वजह से भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर सहित कई शहरों में ठंड बढ़ेगी।नवंबर महीने में उत्तर भारत में होने वाली बर्फबारी की वजह से प्रदेश के मौसम में परिवर्तन आता है, जिसकी वजह से ठंड भी बढ़ जाती है, पिछले लगभग 10 सालों से प्रदेश में यही ड्रेंड चल रहा है, इस बार भी नवंबर के दूसरे सप्ताह में उत्तर से ठंडी हवाएं आ सकती हैं, जिससे ठंड का असर और भी ज्यादा बढ़ जाएगा।प्रदेश में नवंबर के दूसरे सप्ताह में ठंड का असर बढ़ेगा। उत्तर भारत में होने वाली बर्फबारी की वजह से प्रदेश के तापमान में परिवर्तन होता है। जिससे ठंड भी बढ़ जाती है। बीते 10 सालों से यही ट्रेंड चल रहा है। बात करें पिछले पिछले 24 घंटों की तो प्रदेश में सबसे कम तापमान पचमढ़ी में 12.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। वहीं नर्मदापुरम में सबसे अधिक 35 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया है। recent visitors 168

विधायक का अनोखा अंदाज: बुलडोजर पर सवार होकर मेला देखने पहुंचीं

 Unique style of female MLA: She reached the fair riding on a bulldozer  बुरहानपुर। विधायक अर्चना चिटनिस फोपनार में आयोजित मेले में पहुंची. जहां मेला स्थल पर पानी जमा होने के चलते विधायक जेसीबी पर सवार हो गईं. अपने समर्थकों के साथ विधायक ने जेसीबी पर सवार होकर नदी को पार कर मेला स्थल पर पहुंचीं और मेले का आनंद उठाया. गौरतलब है कि प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी दीपावली के बाद बुरहानपुर के फोपनार क्षेत्र में पाडो की टक्कर एवं मेला आयोजित किया जाता है. जिसे देखने के लिए बुरहानपुर विधायक अर्चना चिटनिस फोपनार पहुंची थीं.  लेकिन नदी में पानी होने के चलते वह जेसीबी पर सवार होकर मेला स्थल के मंच तक पहुंचीं. उनके इस अंदाज को देखकर लोगों ने वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया. जो अब जमकर वायरल भी हो रहा है recent visitors 158

भोपाल में लोकायुक्त की छापेमारी: नगर निगम कार्यालय में कर्मचारी 3 हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार

Lokayukta raid in Bhopal: Municipal Corporation employee arrested red handed taking bribe of Rs 3 thousand भोपाल। राजधानी भोपाल (Bhopal) में लोकायुक्त (Lokayukta Raid) ने छापामार कार्रवाई की है। माता मंदिर स्थित नगर निगम (Municipal council) कार्यालय में पदस्थ कर्मचारी को 3 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। आरोपी ने पेंशन प्रकरण में नाम ट्रांसफर करने के एवज में घूस मांगी थी। दरअसल, आवेदक के पिता की पिछले महीने मृत्यु हो गई थी। जिसके बाद उसने पेंशन विभाग में इसे मां के नाम ट्रांसफर करवाने के लिए आवेदन दिया था।काम करने के बदले में कर्मचारी दौलत कुमार घोसले ने 5 हजार रुपए रिश्वत की मांग की थी। जिसके बाद दोनों के बीच 3 हजार रुपए में सौदा तय हो गया। आवेदक ने 4 नंबर को इसकी शिकायत लोकायुक्त में कर दी। जिसके बाद प्लान बनाकर युवक को घूस के पैसे देने के लिए भेजा गया। जैसे ही उसने 3 हजार रुपए दिए, टीम ने दबिश देकर आरोपी को रंगे हाथ पकड़ लिया। फिलहाल कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। recent visitors 165

कांग्रेस कार्यकर्ताओं का पानी की किल्लत के खिलाफ प्रदर्शन, महापौर बंगले का घेराव

Congress workers protest against water shortage in Ujjain, siege of Mayor’s bungalow उज्जैन। मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले में भरपूर बारिश और डैम के फूल होने के बाद भी शहर में पानी की किल्लत को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को खाली बाल्टी लेकर प्रदर्शन किया। साथ ही महापौर के बंगले का घेराव किया। इस दौरान कांग्रेसियों ने शहर की जनता को परेशान करने का आरोप लगाया। साथ ही जल्द से जल्द पानी की समस्या को दूर करने की मांग की। प्रदर्शन को देखते हुए महापौर बंगले के सामने भारी पुलिस बल तैनात रहा। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मेयर बंगले के सामने जमकर नारेबाजी की। इसके बाद जब महापौर मुकेश टटवाल पहुंचे, तो उनके हाथ में खाली बाल्टी थमा कर पानी मांगा। कांग्रेस नेता राजेंद्र वशिष्ठ ने बताया कि, महाकाल की नगरी उज्जैन में डैम में भरपूर पानी उपलब्ध होने के बावजूद भी शहर की जनता पीने के पानी के त्राहिमाम कर रही है। प्रथम नागरिक महापौर को जनता की परेशानी से कोई लेना देना नहीं है। महापौर और नगर निगम के भाजपा बोर्ड को गहरी नींद से जगाने के लिए और जनता की पीड़ा बताने के लिए कांग्रेस के सभी वरिष्ठजन, सेवादल, पार्षदगण, महिला कांग्रेस, यूथ कांग्रेस, एनएसयूआई, आईटी सेल, ब्लॉक अध्यक्ष, ब्लॉक प्रभारी, समस्त प्रकोष्ठ, मंडलम अध्यक्ष सेक्टर अध्यक्ष, सहित सभी कार्यकर्ता महापौर ने बंगले पर धरना प्रदर्शन किया। recent visitors 143

20 हजार रूपये देने पर नौगांव पुलिस थाना ने लिखी रिपोर्ट, फिर भी नहीं मिला न्याय, पुलिस अधीक्षक से माँगा न्याय

Naugaon police station wrote a report on giving 20 thousand rupees, still did not get justice, sought justice from Superintendent of Police छतरपुर। एसपी ऑफिस के बाहर जमीन पर लेटा यह युवक पुलिस अधीक्षक से न्याय की भीख मांगने आया है। गांव के दबंगो ने इतना पीटा की वह चल भी नही सकता। परिवार ने बताया कि नौगांव थाने में रिपोर्ट लिखाने जब गए तो पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने के नाम पर 20 हजार रुपये ले लिए। इसके हत्या के प्रयास की धारा बढ़ाने के लिए टीआई साहब के नाम पर 50 हजार रुपये की और मांग की गई। परिवार का कहना है कि पुलिस के द्वारा दबंग पर मामला दर्ज तो कर लिए लेकिन उन्हें गिरफ्तार नही किया। दबंग खुलेआम घूम रहे हैं और जान से मारने की धमकी दे रहे हैं। नौगांव थाने में पैसे लगने के बाद भी जब पीड़ितों को न्याय नहीं मिला तो वह एसपी ऑफिस चले आए और एसपी ऑफिस के सामने जमीन पर लेटे युवक ने पुलिस अधीक्षक से न्याय की गुहार लगाई है। गौरतलब है कि नौगांव थाना क्षेत्र के ग्राम बिलहरी में विगत 3 नवंबर 2024 को बिलहरी गांव निवासी राम प्रकाश अहिरवार पिता छोटेलाल अहिरवार को गांव के ही मनोज अंकित अखिल ने लाठी डंडों से बेरहमी से पीटा था। recent visitors 216

डॉ . प्रियंका प्रियांजलि को अटल गौरव अवार्ड सहित अनेक साहित्यिक सम्मानों से नवाजा गया

Dr . Priyanka Priyanjali was awarded many literary honors including Atal Gaurav Award. भोपाल। नेवरी में आयोजित प्रतिभा सम्मान समारोह में सम्मानित हुईं कवयित्री डॉ. प्रियंका प्रियांजलि को अटल गौरव अवार्ड से सम्मानित किया गया। इससे पूर्व भी उनके साहित्यिक योगदान के लिए उन्हें उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ में सम्मानित किया जा चुका है। उनकी रचनाओं को वरिष्ठ साहित्यकारों द्वारा सराहा गया है, जो समसामयिक विषयों पर आधारित होती हैं। डॉ. प्रियंका प्रियांजलि को निर्भया सम्मान, राष्ट्रीय शब्दाक्षर प्रतीक चिन्ह, कायस्थ कुलभूषण सम्मान और उभरती कवयित्री के लिए प्रतिभा सम्मान से विभूषित किया गया है। अपनी इस उपलब्धि पर उन्होंने साहित्यिक संस्थाओं, कवि मित्रों, परिवार और प्रशंसकों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि इन्हीं सबके समर्थन और प्रेरणा से उन्हें बेहतर लेखन की प्रेरणा मिलती रही है। हिंदी साहित्य के प्रति समर्पण अपनी सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए डॉ. प्रियंका प्रियांजलि ने कहा कि हिंदी साहित्य को बढ़ावा देने और राजभाषा हिंदी के उन्नयन के लिए कार्य करना ही उनका मुख्य उद्देश्य है। वे चाहती हैं कि अधिक से अधिक गैर-हिंदी भाषी क्षेत्रों के लोग हिंदी से जुड़ें और हिंदी साहित्य में रूचि लें। इस उद्देश्य के साथ वे नवांकुर साहित्य मनीषियों को भी हिंदी सृजन के लिए प्रेरित करना चाहती हैं। डॉ. प्रियंका का यह संकल्प हिंदी भाषा और साहित्य को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। उनके लेखन और विचारों से हिंदी साहित्य को एक नई दिशा मिल रही है। recent visitors 396

स्मृति शेष : सियासत के महानायक स्व. अर्जुन सिंह, रहेंगे हर दौर याद

Smriti remaining: Late great leader of politics. Arjun Singh, every phase will be remembered स्व. अर्जुन सिंह जी, देश व प्रदेश का ऐसा नाम जिनका जिक्र आते ही मन में कई तरह के रूप सामने आने लगते हैं। कभी गरीबों के मसीहा के रुप में तो कभी उद्योगपतियों के रहनुमा के रूप में, तो कभी अफसरों के मार्गदर्शक के रूप में तो कभी एक व्यक्तित्वपरख राजनेता के रूप में। आज सारा देश, मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं केन्द्रीय मंत्री रहे स्व. अर्जुन सिंह का जन्म दिन मना रहा है।अर्जुन सिंह का जन्म 5 नवंबर 1930 को एक राजपूत परिवार में हुआ था। वे शिव बहादुर सिंह के बेटे थे, जो एक जागीरदार और चुरहट राजघराने के 26वें राव और कांग्रेस के राजनीतिज्ञ थे। अर्जुन सिंह सही मायने में सियासत के एक महानायक कहे जाते हैं। हम देश के नव निर्माण के लिए पूर्व प्रधानमंत्री स्व. जवाहरलाल नेहरू एवं राष्ट्र पिता महात्मा गांधी के सुझाए उपायों पर अमल करने की बात कहते हैं पर अर्जुन सिंह सचमुच उनके अनुरुप ही आचरण किया करते थे। विंध्य क्षेत्र की रिमही जनता उन्हें सम्मान पूर्वक दाऊ साहब के नाम से ही संबोधित किया करती थी। मेरे ख्याल से लगभग पूरा प्रदेश ही उन्हें इस नाम से संबोधित किया करता था। आम जनता के इस संबोधन का दाऊ साहब पूर ख्याल भी रखते थे। सचमुच वह एक पालक की भूमिका का निर्वाहन भी करते थे। बताते हैं कि उनके प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने के पहले तक पूरा विंध्य क्षेत्र शिक्षा के क्षेत्र में काफी पिछड़ा था। जब उन्होंने प्रदेश की बागडोर सम्हाली तो विंध्य क्षेत्र के साथ पूरे प्रदेश में शिक्षा का अलख जग गया। इतना ही उनके मुख्यमंत्री रहते उन्होंने हर उस आदमी का भला किया है जो उनके पास तक पहुंचा या महज जिसकी जानकारी भी उन तक पहुंची है। दाऊ साहब की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि वह किसी जाति या धर्म को विशेष महत्व नहीं देते थे। उनकी नजरों में हर जाति- धर्म का आदमी एक समान था। प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने के बाद भी वह सिर्फ अपने प्रदेश के लोगों का भला नहीं सोचते थे, उनकी सोच समग्र थी। देश में पहली बार तेन्दूपत्ता के राष्ट्रीयकरण का काम उनकी ही देन है। जेठ की दुपहरी में रोजी-रोटी के लिए जंगलों की खाक छानने वाले बीड़ी मजदूरों की पीड़ा को समझने का काम सिर्फ अर्जुन सिंह ही कर सकते थे। गरीबों के प्रति उनका बेहद स्नेह इस कदर जज्बाती था कि, मुख्यमंत्री का पद संभालते ही उन्होंने प्रदेश के सभी झुग्गीवासियों को, जहां वह रह रहे थे, पट्टे देने का ऐलान कर दिया। वह सही मायने में एक महान युग प्रणेता थे। देश-प्रदेश के हर तबके का ख्याल उनके जेहन में हमेशा रहा करता था। दाऊ साहब की राजनीतिक दक्षता का तो कोई सानी नहीं था। उन्हें इसी कुशलता के कारण राजनीति का चाणक्य कहा जाता था। राजनीतिक मसलों को हल करने की जो कला उनमें थी, देश के चुनिंदा नेताओं में ही मानी जा सकती है। फिर चाहे वह आतंकवाद की आग से झुलसते पंजाब में शांति वहाल कराना हो या पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिंहाराव के साथ तत्कालीन मतभेदों के चलते घुटने न टेकने का हो। वह हर मामले में अव्वल रहे हैं। उन्होंने एक कुशल प्रशासक के रूप में भी अपनी अमिट छाम छोड़ी है। वह प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री थे जिन्होंने लापरवाही के आरोप से घिरे एक आईएएस अफसर जो तत्कालीन मुख्य सचिव थे, को निलंबित करने का काम किया था। कहते हैं प्रदेश के पूर्व विधानसभा अध्यक्ष स्व. श्रीनिवास तिवारी जी, जो उस समय दाऊ साहब के मंत्रिमंडल में स्वास्थ्य मंत्रालय का कामकाज देख रहे थे। इसी दौरान उन्होंने रीवा मेडिकल कालेज के कुछ प्रोफेसरों का तबादला तब अविभाजित मप्र में रायपुर कर दिया। कुछ दिन बाद उन्हीं प्रोफेसरों के तबादले कैंसिल भी हो गये। उस समय उप्र के इलाहाबाद जिले से प्रकाशित एक प्रसिद्ध समाचार पाक्षिक पत्रिका में इन तबादलों में लेनदेन की खबर छपी। बताते हैं कि समाचार पत्रिका के बाजार में आते ही बतौर मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह ने तिवारी जी का स्तीफा मांग लिया था। इस घटना का जिक्र करने का कारण सिर्फ यह है कि प्रदेश की जनता को एक निष्पक्ष प्रशासन देने के मामले में वह किसी से कोई समझौता नहीं करते थे। कहते हैं कि काम के मामले में वह लापरवाही बर्दास्त नहीं करते थे। पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री रहे चरणदास महंत ने मुझसे एक साक्षात्कार में बताया था कि दाऊ साहब समय के बहुत ही पाबंद थे। वह हमेशा निर्धारित समय पर पहुंचना पसंद करते थे। उनकी बैठकों में नेता या अफसर निर्धारित समय से पहले ही अपना स्थान ग्रहण कर लेता था। समय की प्रतिबद्धता मप्र के पूर्व मुख्यमंत्री रहे स्व. बाबूलाल गौर ने दाऊ साहब स्व. अर्जुन सिंह से ही सीखी थी। शायद यही कारण था कि उनके कार्यकाल में अफसरशाही कभी हावी नहीं रही। आज दाऊ साहब हमारे बीच नहीं है पर उनकी कर्मठता, कर्तव्य परायणता, देश के लिए कुछ कर गुजरने की लगन हमे हमारे कर्म करने की प्रधानता को मजबूत संबल प्रदान कर रही है। recent visitors 300