भोपाल का न्यू हकीम होटल: किचन में बहते सीवेज के पास बन रहा खाना

Bhopal’s New Hakeem Hotel: Food being cooked near flowing sewage in the kitchen भोपाल। बोर्ड ऑफिस चैराहा स्थित न्यू हकीम होटल में अगर आप नाॅनवेज खाना खाने जाते हैं, तो सावधान हो जाइऐ। यहां नाॅनवेज खाना खुले में बह रहे सीवेज के पास तैयार हो रहा है। वहीं किचन के चारों तरफ गंदगी का अंबार लगा हुआ है। होटल के पीछे बनी किचन की जांच पडताल की गई तो खुले में सीवेज बहता मिला। वहीं होटल संचालक बेफिक्र है, क्योंकि इसके संचालक भोपाल जिला भाजपा कार्यकारिणी में बडे पद पर है। सूत्रों के अनुसार संचालक भाजपा जिला उपाध्यक्ष है, ऐसी होटल संचालक बताता है और कहता है कि मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता है। इसलिए प्रषासन भी दबाववष कार्यवाही करने की बजाय वह धीरे से अपनी जेब गरम करने में भलाई समझते हैं। इसके पहले भी इस होटल के साफ-सफाई और स्वास्थ्य मानकों की अनदेखी के गंभीर मामले सामने आ चुके हैं। यहां खाना गंदगी के बीच तैयार किया जा रहा है जो ग्राहकों की सेहत के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। नाॅनवेज किसका है यह नहीं बताया जाता होटल में जो मांस या मछली लोगों को परोसी जाती है, वह कितने दिन की रखी है। साथ ही लोगों को खिलाये जाने वाले मांस या मछली की क्या क्वालिटी है? इस मांस या मछली की क्वालिटी को किस डाॅक्टर ने खाने योग्य अपनी सहमति दी, यह किसी को नहीं बताया जाता है? कुछ लोगों ने बताया कि नानवेज की क्वालिटी बेकार है। किचन में स्वच्छता का अभाव होटल में देखा गया कि किचन में न तो सफाई की कोई व्यवस्था है और न ही स्वास्थ्य सुरक्षा के बुनियादी नियमों का पालन किया जा रहा है। खाना बनाने में इस्तेमाल होने वाले बर्तनों और सामग्री की हालत खराब है। ऐसे अस्वच्छ वातावरण में तैयार खाना लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है।संचालकों की लापरवाहीहोटल संचालकों द्वारा ग्राहकों की सेहत को नजरअंदाज किया जा रहा है। गंदगी के बीच भोजन तैयार करना न केवल गैर-जिम्मेदाराना है बल्कि यह स्वास्थ्य विभाग के नियमों का भी सीधा उल्लंघन है। स्थानीय प्रशासन की भूमिका इस मामले ने स्थानीय प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या ऐसे होटलों पर नियमित जांच और कार्रवाई की जा रही है? यदि नहीं, तो यह प्रशासन की बड़ी लापरवाही मानी जाएगी। इस मुद्दे पर लोगों ने प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है ताकि ऐसी लापरवाही दोबारा न हो।स्वास्थ्य सुरक्षा की अनदेखी बर्दाश्त नहींखाने-पीने की जगहों पर स्वच्छता और स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। गंदगी में तैयार खाना सिर्फ होटल आने वाले ग्राहकों को ही नहीं, बल्कि व्यापक स्तर पर समाज के स्वास्थ्य को भी प्रभावित करता है।इस तरह की घटनाएं न केवल होटल संचालकों की लापरवाही को उजागर करती हैं बल्कि प्रशासन की जिम्मेदारी पर भी कई सवाल खडे करती है? समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो इसके परिणाम समाज के स्वास्थ्य पर दूरगामी असर डाल सकते हैं। क्या होना चाहिए अगला कदम? recent visitors 641

मामूली विवाद के बाद घर में घुसकर चाचा भतीजे को गोली मारी, 3 लोग घायल

After a minor dispute, uncle entered the house and shot nephew, 3 people injured छतरपुर ! छतरपुर जिले में बढ़ते अपराध थमने का नाम नहीं ले रहे। ताजा मामला बमीठा थाना क्षेत्र के कुटिया गांव का है, जहां रात में हुए मामूली विवाद में सुबह बाइक सवारों ने घर आकार चाचा-भतीजे को गोली मार दी। जहां चाचा को गोली बांए हाथ में तो वहीं भतीजे को सिर में लगी है। दोनों को गंभीर हालत में जिला अस्पताल लाया गया जहां इलाज चल रहा है। इनमें से एक (भतीजे) की हालत गंभीर होने पर उसे रेफर किया गया है। मामले में पीड़ित और आरोपी आपस में रिश्तेदार हैं। आरोपी घटना को अंजाम देकर फरार हो गए हैं और पुलिस मामले की जांच पीड़ित घायलों से पूछताछ आरोपियों की तलाश/गिरफ्तारी और अग्रिम कार्यवाही में जुट गई है। यह है पूरा मामलाजानकारी के मुताबिक घटना जिले के बमीठा थाना क्षेत्र के कुटिया गांव का है। जहां बीती रात हुए चौक समारोह में दोनों पक्षों जो आपस में रिश्तेदार भी है। उनमें खाने-पीने के दौरान मामूली विवाद हो गया। जिसपर कि रात में 100 डायल पुलिस पहुंची थी और मामला समझकर वापिस भी आ गई पर आज सुबह एक पक्ष ने दूसरे पक्ष के घर बाइक से जाकर फायरिंग कर दी। जिसमें से एक घायल को गोली उसके हाथ में तो वहीं दूसरे 37 वर्षीय घायल को गोली उसके सिर में लगी है। वहीं तीसरे व्यक्ति को मामूली चोटें आई हैं। ग्वालियर रेफर37 वर्षीय घायल जिसकी कनपटी/सिर में गोली लगी है जिसकी हालत गंभीर होने पर उसे पहले शहर के मिशन अस्पताल और वहां से ग्वालियर मेडिकल रेफर किया गया है। जिला आपताल में सिटी कोतवाली थाना एवं बमीठा थाना पुलिस पहुंचकर पूछताछ और मामले की जांच में जुटी हुई है। recent visitors 144

wedding parties: में खाना बनाने और बनवाने वाले हो जाएं सावधान,शासन ने जारी की गई नई एडवाइजरी

Those who prepare or prepare food for wedding parties should be careful, government has issued a new advisory. शिवपुरी: बीते दिनों शिवपुरी के एक शादी समारोह में खाना खाने से 100 से ज्यादा लोगों की तबीयत बिगड़ गई थी. इसी मामले को संज्ञान में लेते हुए जिला प्रशासन हरकत में आ गया है. जिला कलेक्टर रवींद्र कुमार चौधरी ने शादी समारोह समेत विभिन्न आयोजनों में खाना बनाने को लेकर एक खास एडवाइजरी जारी की है. इस एडवाइजरी में मैरिज गार्डन संचालक, होटल संचालक, रेस्टोरेंट और डेयरी मालिकों की भी जिम्मेदारी तय कर दी गई है. खाने की क्वालिटी को लेकर जिम्मेदारी तय कलेक्टर द्वारा जारी एडवाइजरी में कहा गया है कि होटल और मैरिज गार्डन संचालक अथवा कार्यक्रम आयोजक ऐसे लोगों को खाना बनाने का ठेका देंगे जो खाद्य सुरक्षा और मानव प्राधिकरण के पोर्टल पर रजिस्टर्ड सामान का इस्तेमाल करते हैं. आयोजक खाना बनाने वालों या केटरर के साथ एग्रीमेंट करेंगे कि क्या-क्या चीजें खाने में बनाई जाएंगी. भोजन को गुणवत्ता पूर्ण रखने की जिम्मेदारी खाना बनाने वाले और कार्यक्रम संचालक दोनों की होगी. साथ ही आदेश में कहा गया है कि खाना बनाने वाले (केटरर) और कार्यक्रम संचालक दोनों को खाना बनाने में प्रयोग होने वाली सामग्री में से 2 किलो 7 दिनों तक बचाकर रखना होगा, जिससे जरूरत पड़ने पर इन नमूनों की जांच की जा सके. पैक सामग्री को लेकर भी नियम इसी के साथ पैक सामग्री के लिए भी एडवाइजरी जारी की गई है. पैक सामग्री का इस्तेमाल करने के बाद एक्सपायरी डेट, लॉट नंबर और बैच नंबर को कार्यक्रम समाप्त होने के बाद 7 दिनों बाद तक सुरक्षित रखा जाएगा. वहीं, दूध, दही, पनीर, मावा इत्यादि को 2 से 8 डिग्री सेल्सियस पर फ्रिजर में रखने को कहा गया है. खाना बनकर तैयार होने के बाद 4 घंटे के कंज्यूम करना होगा. बासा खाना किसी को खाने के लिए नहीं दिया जाएगा और ना ही बांटा जाएगा. अगर 500 सौ से अधिक लोगों का खाना एक साथ बनाया जाता है, तो ऐसी स्थिति में यह सुनिश्चित किया जाए कि खाना बनाने वाला व्यक्ति या उस कार्य में शामिल किसी व्यक्ति को कोई संक्रामक रोग न हो. recent visitors 176

छिंदवाड़ा, शहडोल और सिंगरौली के एसपी बदले: 10 आईपीएस अधिकारियों के ट्रांसफर

SP of Chhindwara, Shahdol and Singrauli changed: 10 IPS officers transferred भोपाल ! मध्यप्रदेश शासन ने सोमवार को 10 आईपीएस अधिकारियों की तबादला सूची जारी की। साथ ही राज्य पुलिस सेवा के भी दो अधिकारियों के ट्रांसफर किए गए हैं। देखिए लिस्ट recent visitors 130

बम जैसा फटा गैस सिलेंडर, 50 लोग झूलसे, गंभीर हालात में भर्ती

Gas cylinder exploded like a bomb, 50 people burnt, admitted in critical condition छतरपुर । बीच बाजार गैस सिलेंडर में ब्लास्ट हो गया। हादसे में 38 लोग झुलस गए। इनमें बच्चे और महिलाएं भी शामिल हैं। 34 घायलों को जिला अस्पताल रेफर किया गया है। वहीं, 4 मामूली घायलों का बिजावर के निजी क्लिनिक पर ही इलाज किया गया। घटना रविवार दोपहर ढाई बजे बिजावर के बस स्टैंड पर हुई। घायलों में शामिल एक स्थानीय दुकानदार नीलू बघेल ने बताया कि पेटीज के ठेले पर सिलेंडर से पहले गैस लीक हुई और फिर ब्लास्ट हो गया। ब्लास्ट के बाद मची भगदड़ घायलों ने बताया कि पेटीज की दुकान में तीन सिलेंडर रखे हुए थे। इनमें से एक फट गया। रविवार को बाजार लगता है इसलिए वहां बहुत भीड़ थी। धमाके के बाद भगदड़ जैसे हालात बन गए। आसपास के 100 मीटर तक के दायरे में लपटें उठीं। कई लोगों ने भागने की कोशिश की, फिर भी जल गए। recent visitors 218

Happy Birthday : कमलनाथ का व्यक्तित्व व कृतित्व जनसेवा के लिए समर्पित

18 November Happy Birthday: Kamal Nath’s personality and work are dedicated to public service भोपाल। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री, पूर्व केंद्रीय मंत्री और नौ बार सांसद रहे कमलनाथ के लिए जन सेवा ही जीवन का एकमात्र उद्देश्य है। स्वर्गीय इंदिरा गांधी के तीसरे बेटे माने जाने वाले कमलनाथ के जन्मदिवस पर उनके व्यक्तित्व और कृतित्व पर निगाहें डालें तो पिछले 45 वर्ष से छिंदवाड़ा और मध्य प्रदेश की राजनीति में सक्रिय कमलनाथ मितभाषी और मृदुभाषी नेताओं में से एक हैं। भारतीय राजनीति के शीर्ष चार नेताओं में शामिल होने के बाद भी उदारता और सहजता उनका स्वभाव है। उनके चाहने वाले तो आज भी उन्हें वर्तमान युग का दानवीर कर्ण ही मानते हैं। कमलनाथ के सार्वजनिक जीवन पर दृष्टि डालें तो उनका बुनियादी लक्ष्य हमेशा से यही रहा है कि समाज के सबसे कमजोर लोग, सबसे कमजोर इलाके और सबसे कमजोर वर्ग को किस तरह से अधिक से अधिक फायदा पहुंचाया जा सके। वह भी इस तरह कि लाल फीताशाही की भूमिका न्यूनतम हो जाए। इसी लक्ष्य को निगाह में रखकर उन्होंने जन कल्याण का जो मॉडल अपनाया उसी को आज देश और दुनिया छिंदवाड़ा मॉडल के नाम से जानती है। केंद्र की राजनीति में अत्यंत शक्तिशाली और प्रभावशाली पदों पर रहते हुए कमलनाथ ने अपनी भूमिका सिर्फ यहां तक सीमित नहीं की कि वे छिंदवाड़ा और मध्य प्रदेश में महत्वपूर्ण सरकारी परियोजनाएं पहुंचा दें, उन्होंने यह भी सुनिश्चित किया कि वह परियोजनाएं बहुत तेजी से लोगों के पास पहुंचे और उनका स्वरूप इस तरह का हो कि वे भविष्य में भी रोजगार और विकास का सृजन करती रहे। जैसे, जब उन्होंने छिंदवाड़ा और आसपास के क्षेत्र में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना का जाल बिछाया तो उनकी निगाह में यह बात रही कि सड़क लोगों को आवागमन में तेजी तो उपलब्ध कराएंगी ही, साथ ही इनके निर्माण कार्य में स्थानीय लोगों को बड़े पैमाने पर रोजगार मिलेगा और सबसे बढ़कर छोटे-छोटे गांव से लेकर कस्बों तक और बड़े शहरों तक आर्थिक गतिविधि में तेज आएगी, जो पूरे इलाके की आर्थिक समृद्धि में और खुशहाली में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई की। इसी तरह 1980 के दशक में ही उन्होंने इस बात की कल्पना कर ली थी कि आने वाले समय में समाज और देश के आर्थिक विकास में निजी क्षेत्र का महत्वपूर्ण योगदान होगा। इसीलिए उन्होंने बड़ी-बड़ी निजी कंपनियों की उत्पादन इकाइयों को छिंदवाड़ा और आसपास के इलाकों में स्थापित कराया जिससे रोजगार का स्थाई साधन छिंदवाड़ा की जनता के लिए उपलब्ध हुआ। यह दोनों काम करते हुए भी उन्होंने यहां की परंपरागत कोयला खदान को पहले से ज्यादा मजबूत किया और जब तक उनकी औद्योगिक उपयोगिता रही तब तक इन कोयला खदानों ने नए छिंदवाड़ा को गढ़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। छिंदवाड़ा से नेशनल हाईवे और रेल मार्ग जोड़ना भी कमलनाथ की इसी विकास दृष्टि का परिचायक है। इन्हीं सब पहलुओं को मिलाकर छिंदवाड़ा मॉडल का विकास हुआ है। कमलनाथ जब दिसंबर 2018 में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री बने तो अपनी इसी जनकल्याणकारी दृष्टि को उन्होंने मध्य प्रदेश के समग्र विकास पर केंद्रित किया। उन्होंने सबसे पहले फैसला यह किया कि मध्य प्रदेश के किसानों का कर्ज माफ किया जाए। जब किसान कर्ज के बोझ से मुक्त हो जाएंगे तो उनकी आमदनी बढ़ेगी और उनके पास जो सर प्लस पैसा आएगा उससे वे खरीदारी करेंगे। जीवन स्तर को सुधारेंगे। इस तरह से पूरे मध्य प्रदेश की आर्थिक गतिविधि को नई ऊंचाई मिलेगी। जब बैंकों ने किसानों का कर्ज माफ करने में ना-नुकुर की तो कमलनाथ जी ने अपने लंबे प्रशासनिक अनुभव के आधार पर ऐसी चाणक्य नीति का परिचय दिया कि बैंक बड़ी आसानी से कर्ज माफ करने के लिए तैयार हो गए और सरकारी खजाने पर ज्यादा बोझ भी नहीं पड़ा। सरकार बनने के तुरंत बाद उन्होंने 27 लाख किसानों का कर्ज माफ कर दिया और अगर सरकार नहीं गिराई जाती तो मध्य प्रदेश के करीब 3 करोड़ किसानों का कर्ज़ वर्ष 2021 तक माफ हो चुका होता। किसानों के साथ ही कमलनाथ ने शहरी नागरिकों के लिए बिजली के बिल सस्ते कर दिए और ₹100 में 100 यूनिट बिजली उपलब्ध कराकर एक किस्म का चमत्कार कर दिया। उनकी दृष्टि समाज के वंचित वर्गों पर पड़ी और वृद्ध, विधवा, विकलांग तथा अन्य तरह की पेंशन को उन्होंने तुरंत दोगुना कर दिया। हनुमान जी के भक्त कमलनाथ के लिए धर्मार्थ कार्य भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसीलिए उन्होंने अपने कार्यकाल में राम वन गमन पथ, महाकाल कॉरिडोर, ओरछा के राम राजा मंदिर के लिए विशेष प्रावधान किया तथा गौ माता की रक्षा के लिए 1000 गौशालाओं के निर्माण के आदेश दिए। बेरोजगारों को रोजगार देने के लिए कमलनाथ बेरोजगारी भत्ता देना चाहते थे और उसके साथ ही उन्होंने बड़े पैमाने पर सिंगल विंडो सिस्टम के आधार पर प्रदेश में ऐसी औद्योगिक इकाइयों की स्थापना का खाका तैयार कर लिया था जो बड़े पैमाने पर मध्य प्रदेश के नौजवानों को सम्मानजनक रोजगार दे। सामाजिक न्याय उनके लिए हमेशा से शीर्ष प्राथमिकता रहा है इसलिए कमलनाथ जी की सरकार ने एक तरफ तो अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए प्रदेश में 27 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया और दूसरी ओर आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग के लिए 10% आरक्षण की व्यवस्था की। कमलनाथ के जन हितैषी कार्यों से जनता में हर्ष की लहर दौड़ गई और मध्य प्रदेश विकास के राजमार्ग पर सरपट दौड़ने लगा। इससे विरोधी दलों में खलबली मच गई और फिर कुछ गद्दारों के सहयोग से विपक्षी दलों ने कमलनाथ सरकार गिरा दी। लेकिन इससे कमलनाथ जी के जन कल्याण के इरादे पर कोई फर्क नहीं पड़ा और वह एक विधायक और समाजसेवी के रूप में आज भी मध्य प्रदेश और छिंदवाड़ा की सेवा में संलग्न है। चाहे दिल्ली हो भोपाल हो या छिंदवाड़ा आज भी अगर कोई जरूरतमंद अपना कोई भी काम लेकर कमलनाथ के पास जाता है तो भी यथाशक्ति उसकी मदद करने की न सिर्फ कोशिश करते हैं बल्कि मदद प्रदान भी करते हैं। इसलिए उनका जन्मदिन सिर्फ एक व्यक्ति का जन्मदिन नहीं है बल्कि ऐसी विचारधारा और संस्था का जन्मदिन है जिसे अपना संपूर्णए जीवन जन-जन की सेवा के लिए समर्पित कर दिया है। recent visitors 589

दृश्य देखिए और फिर सरकारी दावा, हमारी आस्था भी,,,,?

See the scene and then the government’s claim, our faith also,,,,? इंदौर । कार्तिक पूर्णिमा को,नदी में स्नान करना और दीपदान करना चाहिए ऐसा कहां भी जाता है माना भी जाता है। नर्मदा नदी,चंबल नदी, कालीसिंध नदी, श्रिपा नदी कुछेक और हमारे प्रदेश में है। यह दृश्य श्रिपा गांव का है और श्रिपा नदी का है तथा इंदौर देवास सड़क के पूल से मैंने ही लिया है। इस क्षैत्र के जनप्रतिनिधि मप्र शासन के जल एवं सिंचाई विभाग के केबिनेट मंत्री तुलसीराम सिलावट है,,, तो इंदौर, उज्जैन के लिए श्रिपा नदी महत्वपूर्ण,,। इसके सामने के क्षेत्र में गांव के पास तट, मंदिर है वो थोड़ा साफ है। गंदगी होती,गंदे नाले का पानी आता तो मैं दृष्टिकोण अपना अलग रखता यह तो कज्जी है, मतलब पानी बहता हुआ नहीं है, एकत्रित पानी है,,,। और सरकारी ध्यान भी नहीं  धर्म आस्था और श्रद्धा का संगम आदिकाल से, कालांतर से चल रहा, पंरतु जागरुकता भी चलती रही, ईस्तेहार देकर करोड़ों रुपए खर्च करके इंवेट करने से नदी, जलाशय, तालाब स्वच्छ निर्मल नहीं हो सकते उसके खातिर सजगता और चाक चौबंद निगाहें भी चाहिए,,,कार में भले शीशे हो पर निगाह बान निगाहें चाहिए, सैकड़ों लोग रोज निकलते हैं पर आवाज भी निकलती, हम श्रिपा नदी की यह हालत देख रहे,, नर्मदा नदी की भी हालत भी बताऊंगा खूद जाकर देखकर,, क्या अधिकारियों को जनप्रतिनिधि गणों को नहीं दिखता, धार्मिक संगठन और सामाजिक संगठन चुप क्यों, सजगता की आवश्यकता है नदी पूजते हैं तो पूज्यनीय स्थल ऐसे होंगे, करोड़ों रुपए हर माह तनख्वाह बंटती है अधिकारियों की तनख्वाह में किस लिए,,, मैंने लिखा था मैं तह तक जाकर सही स्थिति हर नदी और तालाब की हर माह जाकर एक खुलासा करूंगा,,,। श्रिपा नर्मदा लिंक परियोजना के नाम पर खेल हुआ, जहां मां श्रिपा नदी का उद्गम हुआ वे वहां से 7किलो मीटर दूर तक विलुप्त है,,, उसके बाद आगे प्रगट होती है और श्रिपा नदी का यह रुप श्रिपा गांव में दिखता है,एक तट साफ है जहां मंदिर है। दुसरा तट ऐसा, जल्दी ही मैं आगे बढती इसी नदी का रुप दिखाऊंगा तथा फिर फैक्ट्री आदि मिलते फिर उज्जैन में रामघाट, मंगलनाथ मंदिर सामने का, फिर ड्रैनेज चैम्बरों के पानी के मिलते दृश्य, इंवेट और मैनेजमेंट को हकीकत का आईना दिखाइये,, मेरा यह अभिमत  “प्रमोद कुमार व्दिवेदी एड्वोकेट” recent visitors 145