डॉ . प्रियंका प्रियांजलि को अटल गौरव अवार्ड सहित अनेक साहित्यिक सम्मानों से नवाजा गया

Dr . Priyanka Priyanjali was awarded many literary honors including Atal Gaurav Award. भोपाल। नेवरी में आयोजित प्रतिभा सम्मान समारोह में सम्मानित हुईं कवयित्री डॉ. प्रियंका प्रियांजलि को अटल गौरव अवार्ड से सम्मानित किया गया। इससे पूर्व भी उनके साहित्यिक योगदान के लिए उन्हें उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ में सम्मानित किया जा चुका है। उनकी रचनाओं को वरिष्ठ साहित्यकारों द्वारा सराहा गया है, जो समसामयिक विषयों पर आधारित होती हैं। डॉ. प्रियंका प्रियांजलि को निर्भया सम्मान, राष्ट्रीय शब्दाक्षर प्रतीक चिन्ह, कायस्थ कुलभूषण सम्मान और उभरती कवयित्री के लिए प्रतिभा सम्मान से विभूषित किया गया है। अपनी इस उपलब्धि पर उन्होंने साहित्यिक संस्थाओं, कवि मित्रों, परिवार और प्रशंसकों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि इन्हीं सबके समर्थन और प्रेरणा से उन्हें बेहतर लेखन की प्रेरणा मिलती रही है। हिंदी साहित्य के प्रति समर्पण अपनी सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए डॉ. प्रियंका प्रियांजलि ने कहा कि हिंदी साहित्य को बढ़ावा देने और राजभाषा हिंदी के उन्नयन के लिए कार्य करना ही उनका मुख्य उद्देश्य है। वे चाहती हैं कि अधिक से अधिक गैर-हिंदी भाषी क्षेत्रों के लोग हिंदी से जुड़ें और हिंदी साहित्य में रूचि लें। इस उद्देश्य के साथ वे नवांकुर साहित्य मनीषियों को भी हिंदी सृजन के लिए प्रेरित करना चाहती हैं। डॉ. प्रियंका का यह संकल्प हिंदी भाषा और साहित्य को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। उनके लेखन और विचारों से हिंदी साहित्य को एक नई दिशा मिल रही है। recent visitors 389

स्मृति शेष : सियासत के महानायक स्व. अर्जुन सिंह, रहेंगे हर दौर याद

Smriti remaining: Late great leader of politics. Arjun Singh, every phase will be remembered स्व. अर्जुन सिंह जी, देश व प्रदेश का ऐसा नाम जिनका जिक्र आते ही मन में कई तरह के रूप सामने आने लगते हैं। कभी गरीबों के मसीहा के रुप में तो कभी उद्योगपतियों के रहनुमा के रूप में, तो कभी अफसरों के मार्गदर्शक के रूप में तो कभी एक व्यक्तित्वपरख राजनेता के रूप में। आज सारा देश, मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं केन्द्रीय मंत्री रहे स्व. अर्जुन सिंह का जन्म दिन मना रहा है।अर्जुन सिंह का जन्म 5 नवंबर 1930 को एक राजपूत परिवार में हुआ था। वे शिव बहादुर सिंह के बेटे थे, जो एक जागीरदार और चुरहट राजघराने के 26वें राव और कांग्रेस के राजनीतिज्ञ थे। अर्जुन सिंह सही मायने में सियासत के एक महानायक कहे जाते हैं। हम देश के नव निर्माण के लिए पूर्व प्रधानमंत्री स्व. जवाहरलाल नेहरू एवं राष्ट्र पिता महात्मा गांधी के सुझाए उपायों पर अमल करने की बात कहते हैं पर अर्जुन सिंह सचमुच उनके अनुरुप ही आचरण किया करते थे। विंध्य क्षेत्र की रिमही जनता उन्हें सम्मान पूर्वक दाऊ साहब के नाम से ही संबोधित किया करती थी। मेरे ख्याल से लगभग पूरा प्रदेश ही उन्हें इस नाम से संबोधित किया करता था। आम जनता के इस संबोधन का दाऊ साहब पूर ख्याल भी रखते थे। सचमुच वह एक पालक की भूमिका का निर्वाहन भी करते थे। बताते हैं कि उनके प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने के पहले तक पूरा विंध्य क्षेत्र शिक्षा के क्षेत्र में काफी पिछड़ा था। जब उन्होंने प्रदेश की बागडोर सम्हाली तो विंध्य क्षेत्र के साथ पूरे प्रदेश में शिक्षा का अलख जग गया। इतना ही उनके मुख्यमंत्री रहते उन्होंने हर उस आदमी का भला किया है जो उनके पास तक पहुंचा या महज जिसकी जानकारी भी उन तक पहुंची है। दाऊ साहब की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि वह किसी जाति या धर्म को विशेष महत्व नहीं देते थे। उनकी नजरों में हर जाति- धर्म का आदमी एक समान था। प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने के बाद भी वह सिर्फ अपने प्रदेश के लोगों का भला नहीं सोचते थे, उनकी सोच समग्र थी। देश में पहली बार तेन्दूपत्ता के राष्ट्रीयकरण का काम उनकी ही देन है। जेठ की दुपहरी में रोजी-रोटी के लिए जंगलों की खाक छानने वाले बीड़ी मजदूरों की पीड़ा को समझने का काम सिर्फ अर्जुन सिंह ही कर सकते थे। गरीबों के प्रति उनका बेहद स्नेह इस कदर जज्बाती था कि, मुख्यमंत्री का पद संभालते ही उन्होंने प्रदेश के सभी झुग्गीवासियों को, जहां वह रह रहे थे, पट्टे देने का ऐलान कर दिया। वह सही मायने में एक महान युग प्रणेता थे। देश-प्रदेश के हर तबके का ख्याल उनके जेहन में हमेशा रहा करता था। दाऊ साहब की राजनीतिक दक्षता का तो कोई सानी नहीं था। उन्हें इसी कुशलता के कारण राजनीति का चाणक्य कहा जाता था। राजनीतिक मसलों को हल करने की जो कला उनमें थी, देश के चुनिंदा नेताओं में ही मानी जा सकती है। फिर चाहे वह आतंकवाद की आग से झुलसते पंजाब में शांति वहाल कराना हो या पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिंहाराव के साथ तत्कालीन मतभेदों के चलते घुटने न टेकने का हो। वह हर मामले में अव्वल रहे हैं। उन्होंने एक कुशल प्रशासक के रूप में भी अपनी अमिट छाम छोड़ी है। वह प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री थे जिन्होंने लापरवाही के आरोप से घिरे एक आईएएस अफसर जो तत्कालीन मुख्य सचिव थे, को निलंबित करने का काम किया था। कहते हैं प्रदेश के पूर्व विधानसभा अध्यक्ष स्व. श्रीनिवास तिवारी जी, जो उस समय दाऊ साहब के मंत्रिमंडल में स्वास्थ्य मंत्रालय का कामकाज देख रहे थे। इसी दौरान उन्होंने रीवा मेडिकल कालेज के कुछ प्रोफेसरों का तबादला तब अविभाजित मप्र में रायपुर कर दिया। कुछ दिन बाद उन्हीं प्रोफेसरों के तबादले कैंसिल भी हो गये। उस समय उप्र के इलाहाबाद जिले से प्रकाशित एक प्रसिद्ध समाचार पाक्षिक पत्रिका में इन तबादलों में लेनदेन की खबर छपी। बताते हैं कि समाचार पत्रिका के बाजार में आते ही बतौर मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह ने तिवारी जी का स्तीफा मांग लिया था। इस घटना का जिक्र करने का कारण सिर्फ यह है कि प्रदेश की जनता को एक निष्पक्ष प्रशासन देने के मामले में वह किसी से कोई समझौता नहीं करते थे। कहते हैं कि काम के मामले में वह लापरवाही बर्दास्त नहीं करते थे। पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री रहे चरणदास महंत ने मुझसे एक साक्षात्कार में बताया था कि दाऊ साहब समय के बहुत ही पाबंद थे। वह हमेशा निर्धारित समय पर पहुंचना पसंद करते थे। उनकी बैठकों में नेता या अफसर निर्धारित समय से पहले ही अपना स्थान ग्रहण कर लेता था। समय की प्रतिबद्धता मप्र के पूर्व मुख्यमंत्री रहे स्व. बाबूलाल गौर ने दाऊ साहब स्व. अर्जुन सिंह से ही सीखी थी। शायद यही कारण था कि उनके कार्यकाल में अफसरशाही कभी हावी नहीं रही। आज दाऊ साहब हमारे बीच नहीं है पर उनकी कर्मठता, कर्तव्य परायणता, देश के लिए कुछ कर गुजरने की लगन हमे हमारे कर्म करने की प्रधानता को मजबूत संबल प्रदान कर रही है। recent visitors 295

बकाया बिजली बिल भरेगी सरकार

Government will pay the outstanding electricity bill भोपाल। मध्य प्रदेश की सरकार ने नगरीय निकायों के करोड़ों रुपये के बकाया बिजली बिल चुकाने का निर्णय लिया है। आर्थिक संकट में फंसे इन निकायों की सहायता के लिए चुंगी क्षतिपूर्ति की राशि का उपयोग किया जाएगा, जिससे उनकी बिजली की देनदारी चुकाई जा सकेगी। 60 करोड़ रुपये की स्वीकृति मप्र नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने इस मद से 60 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की है। इसमें से सबसे अधिक 31 करोड़ रुपये पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी को दिए जाएंगे, जिससे इंदौर नगर निगम के 23 करोड़ रुपये का बकाया बिल समायोजित किया जाएगा। इसके अलावा भोपाल नगर निगम के 5 करोड़, जबलपुर के 5.5 करोड़ और ग्वालियर के 2.5 करोड़ रुपये का बिल भी चुकाया जाएगा। वित्तीय स्थिति की चुनौती मध्य प्रदेश के नगरीय निकायों की वित्तीय स्थिति इस कदर बिगड़ चुकी है कि वे अपने बिजली के बिल समय पर चुकाने में असमर्थ हैं। इसके पीछे मुख्य कारण है कि इन निकायों की वसूली बेहद कम है। पेयजल, स्ट्रीट लाइट आदि के लिए विद्युत वितरण कंपनियों से बिजली की आपूर्ति की जाती है, लेकिन स्थानीय निकायों द्वारा रहवासियों से शुल्क की वसूली में कमी आई है। सरकार का निर्णय इस स्थिति को देखते हुए सरकार ने चुंगी क्षतिपूर्ति की राशि का उपयोग बिजली के बकाया बिलों का भुगतान करने का निर्णय लिया है। यह राशि अब मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति के बजाय बिजली बिल चुकाने में खर्च की जाएगी। इससे विद्युत वितरण कंपनियों पर भी दबाव कम होगा और उनकी सेवा में भी कोई बाधा नहीं आएगी। recent visitors 171

महिलाओं को सरकार का एक और तोहफा, नौकरियों में मिलेगा 35 प्रतिशत आरक्षण

Another gift from the government to women, they will get 35 percent reservation in jobs. भोपाल। प्रदेशकी मोहन सरकार ने महिलाओं के हित में बड़ा कदम उठाया है। सिविल सेवाओं में महिलाओं के लिए अब 33 के बजाय 35 प्रतिशत पद आरक्षित होंगे। मंगलवार को मंत्रालय में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव पर सर्वसम्मति से मुहर लगाई गई। कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए डिप्टी सीएम और लोक स्वास्थ्य व चिकित्सा शिक्षा मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा, बैठक के दौरान सीएम डॉ. मोहन यादव ने ग्वालियर में मानसिक आरोग्यशाला, मंदसौर में कल्याण विभाग, स्कूल शिक्षा विभाग, वन विभाग में पीएससी से भरे जाने वाले पदों की जानकारी मांगी है। खाद के लिए 254 नए उवर्रक खरीदी केंद्र मंजूर शुक्ल ने बताया- महिलाओं को आरक्षण के अलावा कैबिनेट ने 254 नए नकद उर्वरक केंद्रों की स्वीकृति दी है। इससे खाद के लिए परेशान हो रहे किसानों को राहत मिलेगी। खासतौर पर जो डिफॉल्टर किसान हैं, उन्हें नकद खाद मिल सकेगी।सुपर क्रिटिकल पावर प्लांट में तब्दील होगा सतपुड़ा थर्मल स्टेशनसारणी में सतपुड़ा थर्मल पावर स्टेशन की 410 मेगावाट की दो और 420 मेगावाट की दो यूनिट्स मिलाकर कुल 830 मेगावाट की चार यूनिट्स को डिकमीशन किया जाएगा। फिर 660 मेगावाट का सुपर क्रिटिकल पावर प्लांट विकसित किया जाएगा। असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर आवेदन के लिए आयु सीमा बढ़ी फैसलों की जानकारी देते हुए शुक्ल ने बताया- मेडिकल कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर आवेदन के लिए आयु सीमा 40 से बढ़ाकर 50 साल की गई है। कैबिनेट ने तय किया है कि केंद्र सरकार द्वारा गठित पैरा मेडिकल काउंसिल के नियम अब तक जारी नहीं किए गए हैं इसलिए एमपी पैरामेडिकल काउंसिल के नियमों को रीएस्टेट किया जाएगा ताकि एडमिशन और परीक्षाएं हो सकें। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में पर्यवेक्षण समिति गठितउधर, सिंहस्थ वर्ष-2028 की तैयारियों के लिए मप्र शासन द्वारा मुख्य सचिव की अध्यक्षता में पर्यवेक्षण समिति गठित कर दी गई है। पर्यवेक्षण समिति सिंहस्थ के अंतर्गत मंत्रि-परिषद समिति के निर्देशों का पालन, मंत्रि-परिषद समिति के समक्ष रखे जाने समस्त नीतिगत प्रकरणों का परीक्षण कार्य तथा विभिन्न विभागों की सिंहस्थ मद कार्य योजना की समीक्षा करेगी। समिति में अपर मुख्य सचिव, गृह, उर्जा, लोक निर्माण, जल संसाधन, परिवहन, प्रमुख सचिव, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, राजस्व, वित्त, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व, संस्कृति एवं पर्यटन, सदस्य होंगे। प्रमुख सचिव, नगरीय विकास एवं आवास समिति के सदस्य सचिव होंगे। recent visitors 135

सीधी जिले में रिश्वतखोरी पर कड़ा प्रहार: जिला पंचायत सीईओ अंशुमान राज का साहसिक कदम

Attempt to give bribe in the district failed: CEO Anshuman Raj’s bold step सीधी ! जिले में रिश्वतखोरी के मामलों में तेजी से वृद्धि हो रही है, लेकिन सोमवार को जिला पंचायत सीईओ और अपर कलेक्टर अंशुमान राज ने एक साहसिक कदम उठाकर इस प्रवृत्ति पर कड़ा संदेश दिया। एक पूर्व पंचायत सदस्य, अखिलेश कुशवाहा, अंशुमान राज के चैंबर में मिठाई का डिब्बा और नोटों से भरा लिफाफा लेकर पहुंचे थे। परंतु, जैसे ही अंशुमान राज ने मिठाई का डिब्बा खोला, उन्होंने उसके नीचे एक नोटों से भरा लिफाफा पाया, जिससे उन्हें रिश्वत का अंदेशा हुआ। बिना किसी संकोच के, उन्होंने वह मिठाई का डिब्बा कुशवाहा के मुंह पर फेंक दिया और तुरंत पुलिस को सूचित कर दिया। पुलिस ने की तुरंत कार्रवाई सूचना मिलते ही कोतवाली थाना प्रभारी अभिषेक उपाध्याय अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और दोनों व्यक्तियों को थाने ले जाकर पूछताछ की। थाना प्रभारी के अनुसार, जांच के बाद इस मामले में उचित कार्रवाई की जाएगी। दोनों संदिग्धों ने अब तक रिश्वत के आरोपों को अस्वीकार किया है, लेकिन मौके पर मौजूद साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की संभावना है। सीईओ की ईमानदार छवि पर मुहर सीईओ अंशुमान राज की इस घटना के बाद जिले में चर्चा है। उनकी ईमानदार छवि और कार्य के प्रति समर्पण को देखते हुए जनता में उनकी सराहना हो रही है। जिले में अपनी तैनाती के बाद से ही उन्होंने कई भ्रष्टाचार के मामलों में सख्त कदम उठाए हैं। कई रोजगार सहायकों और सचिवों के खिलाफ की गई कार्रवाई उनके दृढ़ निश्चय को दर्शाती है। आरोपी का बयान: “रिश्वत का उद्देश्य नहीं था” दूसरी ओर, पूर्व जिला पंचायत सदस्य अखिलेश कुशवाहा ने इस मामले में सफाई दी है। उनका कहना है कि वे पहली बार जिला पंचायत सीईओ से मिलने गए थे और मिठाई का डिब्बा लेकर गए थे। उनके अनुसार, उनके पास जो पैसे थे, वे उनके निजी कार्य के लिए थे और उनका रिश्वत देने का कोई इरादा नहीं था। उनका दावा है कि सीईओ को इस संबंध में गलतफहमी हो गई है। यह घटना न केवल रिश्वतखोरी के प्रति प्रशासन की कठोर नीति को दर्शाती है, बल्कि ईमानदारी और निडरता के प्रतीक के रूप में अंशुमान राज के प्रति जिले की जनता का विश्वास और अधिक बढ़ा है। recent visitors 145

भोपाल के वन विहार में आम आदमी पाल सकेंगे शेर और बाग, जाने  प्रक्रिया

Common man will be able to keep lions and gardens in Bhopal’s Van Vihar, know the process भोपाल। वन विहार नेशनल पार्क के बाघों व सिंह को 17 हजार रुपए में तीन माह तो दो लाख रुपये में एक साल तक गोद ले सकेंगे। इस साल छह लोगों ने वन्य प्राणी को गोद लिया है। इसमें बाघ को गोद लेने वालों की संख्या अधिक है। यह संख्या पिछले दो-तीन सालों की अपेक्षा में बढ़ी है। लेकिन 2009 में जब यह योजना शुरू की गई। तब से लगातार गोद लेने वालों की संख्या में कमी देखने को मिली है।  शुरुआती साल में करीब 18 लोगों ने वन्य प्राणी को गोद लिया था। पार्क प्रबंधन ने गोद लेने के लिए नए सिरे से शुल्क और प्रक्रिया तय की है। बाघों को एक साल तक गोद लेने का खर्च दो लाख रुपये तय किया है। इस तरह दूसरे वन्यप्राणियों के लिए भी खर्च तय किया गया है। गोद लेने के बदले दी गई राशि से संबंधित वन्यप्राणियों का संरक्षण और बेहतर खानपान की व्यवस्था की जाती है। वन्यप्राणी प्रेमी, सामाजिक कार्यकर्ता, सरकारी, गैर सकारी संस्थानों ने बाघ, तेंदुए, सिंह समेत दूसरे वन्यप्राणियों को गोद लिया है। इस योजना का मकसद वन्यप्राणियों के संरक्षण को बढ़ावा देना है। बाघ व भालू गोद लेना पहली पंसद   इस साल छह वन्य प्राणी को गोद लिया है। इसमें दो भालू, दो बाघ, एक सिंह और एक तेंदुआ शामिल है। वहीं अभी तक सबसे ज्याद बाघ को 41 बार गोद लिया गया है, इसमें मादा और नर बाघ शामिल हैं। पांच बार गौरी और रिद्धी को एक वर्ष के लिए गोद लिया गया है। वहीं, पन्ना को छह बार गोद लिया गया है। इससे 12 लाख रुपये का प्राप्त हुए हैं। वन्य जीवों को गोद लेने की यह है प्रक्रिया अगर कोई व्यक्ति या संस्था वन्य प्राणी को गोद लेना चाहते हैं, तो वन विहार प्रबंधन को लिखित आवेदन देना होगा। जिसमें कितने माह व साल के लिए  जानवर गोद लेना है। यह उल्लेख कराना होता है। उसके हिसाब से जो राशि तय की गई है, उतने रुपए का चेक से प्रबंधन को देना होता है। फिलहाल वन विहार में बाघ, शेर, लोमड़ी, अजगर, पायथन सहित कुछ प्राणियों को कापोर्रेट कंपनियों ने गोद ले रखा है।  अधिकारियों ने बताया कि वन्य प्राणियों को गोद देने की योजना 2009 में शुरू की गई थी और अब तक 96 प्राणी गोद लिए जा चुके हैं। तो वहीं वन्य प्राणी को गोद लेने वालों को इनकम टैक्स की दान धारा 80 जी के तहत छूट मिलती है। किसी भी ट्रस्ट, चैरिटेबल संस्थान या स्वीकृत शिक्षा संस्थान को दिया गया दान टैक्स छूट के दायरे में आता है। यह छूट दान की गई रकम के 50 फीसदी या 100 फीसदी तक हो सकती है। recent visitors 207

मध्य प्रदेश मौसम अपडेट: नवंबर में ठंड ने ढाया कहर कई शहरों में तापमान 20 डिग्री से नीचे

Madhya Pradesh weather update: Cold wreaked havoc in November, temperature below 20 degrees in many cities भोपाल। नवंबर शुरू होते ही गुलाबी ठंड ने दस्तक दे दी है। एमपी के अधिकांश शहरों में रात का तापमान 20 डिग्री सेल्सियस से नीचे बना हुआ है। अनूपपुर के अमरकंटक और नर्मदापुरम के पचमढ़ी में ठंड का असर सबसे ज्यादा है। सोमवार रात यहां का तापमान 13 डिग्री सेल्सियस से भी नीचे रहा।  ग्वालियर-चंबल संभाग में ठंड का असर तेज होता है, लेकिन शुरुआत में अभी भोपाल और जबलपुर की तुलना में ग्वालियर थोड़ा गर्म है। रविवार-सोमवार की रात भोपाल और जबलपुर में तापमान 17 डिग्री रहा। जबकि, ग्वालियर में 17.3 डिग्री, उज्जैन में 18.3 डिग्री और इंदौर में 18.6 डिग्री रिकॉर्ड किया गया।  मंडला, रीवा और राजगढ़ में तापमान  मंडला, मलाजखंड, रीवा, उमरिया सहित अन्य शहरों में भी रात का पारा लुढ़का है। रविवार सोमवार की रात अमरकंटक में 12.2 डिग्री, पचमढ़ी में 12.4 डिग्री, मंडला में 13.6 डिग्री, रीवा में 14.4 डिग्री और मलाजखंड में 14.8 डिग्री तापमान रिकॉर्ड किया गया। उमरिया में तापमान 15.3 डिग्री, राजगढ़ में 16 डिग्री और बैतूल-सतना में 16.7 डिग्री सेल्सियस रहा। अगले सप्ताह बढ़ेगी ठंड मौसम विभाग की मानें तो नवंबर के दूसरे सप्ताह ठंड का असर बढ़ेगा। इस दौरान उत्तर भारत में बर्फबारी की संभावना है। इसका असर मध्यप्रदेश में भी देखने को मिल सकता है।   बड़े शहरों में नवंबर का मौसम भोपाल में नवंबर महीने में रात का तापमान 9 से 12 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है। 30 नवंबर 1941 को सबसे कम 6.1 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया था। इंदौर में नवंबर के दूसरे सप्ताह से ठंड बढ़ने लगती है। रात का तापमान 10 से 12 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाता है। 25 नवंबर 1938 को इंदौर में  5.6 डिग्री तापमान रिकॉर्ड किया गया था  ग्वालियर में पिछले 10 साल में न्यूनतम तापमान 6 डिग्री तक गिरा है। 1970 में यह 3 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।  जबलपुर में न्यूनतम तापमान 7.8 डिग्री तक जा चुका है। 12 नवंबर 1989 को यह 3.9 डिग्री सेल्सियस रहा।  उज्जैन में न्यूनतम तापमान 10-11 डिग्री के बीच रहता है। 30 नवंबर 1974 को 2.8 डिग्री सेल्सियस रहा है।  recent visitors 178