कांग्रेस विधायक बाबू जंडेल को पुलिस ने किया नजरबंद, बोले- CM को बताना चाहता था क्षेत्र की समस्याएं

Congress MLA Babu Jandel placed under house arrest by police, says he wanted to tell the CM about the problems of the area श्योपुर । बड़ौदा में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के आगमन से पहले कांग्रेस विधायक बाबू जंडेल को पुलिस प्रशासन ने गुरुवार सुबह नजरबंद कर दिया। विधायक जंडेल ने बताया कि वे मुख्यमंत्री से क्षेत्र की समस्याओं को लेकर मुलाकात करना चाहते थे, लेकिन प्रशासन द्वारा उन्हें समय नहीं दिया गया। उनका आरोप है कि कांग्रेस विधायक होने के कारण पुलिस ने उन्हें नजरबंद कर दिया। जानकारी के अनुसार सिटी कोतवाली प्रभारी सतीश चौहान के नेतृत्व में पुलिस टीम ने विधायक को पाली रोड स्थित उनके प्रतिष्ठान से डिटेन किया। उसके बाद पुलिस उन्हें उनके निवास लेकर पहुंची और करीब एक घंटे तक नजरबंद रखा। उसके उपरांत पुलिस फोर्स उन्हें देहात थाना लेकर पहुंची, जहां उनकी नजरबंदी जारी है। उधर, मुख्यमंत्री के दोपहर 1 बजे बड़ौदा पहुंचने का कार्यक्रम है। वे किसानों के राज्य स्तरीय मुआवजा वितरण कार्यक्रम में शामिल होंगे और लगभग दो घंटे रुकने के बाद उनका हेलीकॉप्टर मुरैना के लिए रवाना होगा। विधायक जंडेल के नजरबंद किए जाने की घटना से कांग्रेस कार्यकर्ताओं में नाराजगी देखी जा रही है, जबकि प्रशासन का कहना है कि यह कदम सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है। recent visitors 69

टीचर की गिरफ्तारी की मांग पर बाजार बंद, छात्राओं को भेज रहा था अश्लील मैसेज

टीचर की गिरफ्तारी की मांग पर बाजार बंद, छात्राओं को भेज रहा था अश्लील मैसेज

Markets closed demanding the arrest of a teacher who was sending obscene messages to female students. डिंडौरी। डिंडौरी जिले के ब्लाक मुख्यालय सांदीपनी विद्यालय का मामला सामने आया हैं। गुरुवार को सुबह से दोपहर एक बजे तक दुकान बंद कर विरोध प्रदर्शन किया जा रहा हैं। तत्काल प्रशांत साहू शिक्षक को गिरफ्तार करने का मांग की जा रही हैं। ज्ञापन सौंपकर की इसको लेकर मांग की गई थी। बुधवार को ग्रामीणों व्यापारियों और जनप्रतिनिधियों के व्दारा जनपद पंचायत अमरपुर कार्यालय में अतुल हरदहा चौकी प्रभारी और एसडीओ को कलेक्टर के नाम से ज्ञापन सौंपकर प्रशांत साहू शिक्षक को तत्काल गिरफ्तार करने का मांग की गई थी। ज्ञापन में लिखा गया कि 24 नवबंर को डिंडौरी में सांदीपनी विद्यालय अमरपुर के शिक्षक द्वारा छात्राओं को आपत्तिजनक मैसेज वॉट्सएप पर भेजने के संबंध में शिकायत के बाद भी शिक्षक को अभी तक गिरफ्तार नहीं किया गया हैं। साथ में इसमें सम्मिलित दोषियों के खिलाफ भी कार्रवाई नहीं हो रही है और न ही पदस्त प्राचार्य को नहीं हटाया गया है। लोग मांग कर रहे है कि दोषी शिक्षक को तत्काल गिरफ्तारी किया जाए और सम्मिलित दोषियों के खिलाफ जांच कर कार्रवाई कर उन्हें भी हटाया जाए। recent visitors 86

लोकायुक्त टीम की बड़ी कार्यवाही,नायब तहसीलदार को 4000 की रिश्वत लेते रंगे हाथ दबोचा, राजस्व विभाग हिल गया

लोकायुक्त टीम की बड़ी कार्यवाही,नायब तहसीलदार को 4000 की रिश्वत लेते रंगे हाथ दबोचा, राजस्व विभाग हिल गया

Lokayukta team takes major action, naib tehsildar caught red-handed accepting bribe of Rs 4000, revenue department shaken सिंगरौली। मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त ने एक और बड़ी सफलता हासिल की है। टीम ने नायब तहसीलदार महेंद्र कुमार कोल को 4,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए उनके सरकारी आवास पर रंगे हाथ दबोच लिया। जांच में राजस्व निरीक्षक हरी प्रसाद वैश की भूमिका भी गंभीर रूप से संदिग्ध पाई गई है, जिस पर विभागीय कार्रवाई तेज कर दी गई है। मामला कैसे शुरू हुआ? करौली (सीधी) के प्रवीण चतुर्वेदी ने 2016 में चितरंगी के बालाखण्ड गांव में जमीन खरीदी थी। कब्जे के विवाद को लेकर उन्होंने 2017 में बेदखली के लिए आवेदन दिया। 2021 में आदेश जारी हुआ, लेकिन चार साल तक भी कार्रवाई नहीं हुई। जब शिकायतकर्ता ने लगातार दबाव बनाया, तो नायब तहसीलदार और राजस्व निरीक्षक ने मिलकर 15,000 रुपये की रिश्वत मांग डाली। लोकायुक्त की जांच में खुलासा गिरफ्तारी 25 नवंबर को लोकायुक्त दल ने बैरीटोला खुर्द स्थित सरकारी आवास पर छापा मारा और नायब तहसीलदार महेंद्र कोल को रिश्वत की रकम हाथ में लिए ही पकड़ लिया। उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज कर लिया गया है। वहीं राजस्व निरीक्षक पर भी शिकंजा कसना तय माना जा रहा है, विभागीय कार्रवाई जारी है। recent visitors 84

CM के फैसले से मंत्रीमंडल में हड़कंप: अब अफसर नहीं, मंत्रियों को खुद देना होगा काम का प्रेजेंटेशन

CM के फैसले से मंत्रीमंडल में हड़कंप: अब अफसर नहीं, मंत्रियों को खुद देना होगा काम का प्रेजेंटेशन

CM’s decision stirs cabinet: Now ministers, not officers, will have to give their own presentations. Madhya Pradesh Cabinet Expansion: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 1 दिसंबर से मंत्रियों से पिछले दो साल का व्यक्तिगत प्रेजेंटेशन देने को कहा है. यह कदम सिर्फ काम देखने के लिए नहीं, बल्कि संभावित मंत्रिमंडल विस्तार का आधार भी है. शीतकालीन सत्र के दौरान रिपोर्टिंग होगी, और अमित शाह के दौरे से पहले सरकार को पूरी तरह तैयार दिखाने की कवायद चल रही है. भोपाल ! मध्य प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर इन दिनों ज़ोरदार चर्चाएँ चल रही हैं. इसी बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बड़ा कदम उठाया है. 1 दिसंबर से सभी मंत्री खुद सीएम के सामने अपने पिछले दो साल के काम का प्रेजेंटेशन देंगे. यह प्रेजेंटेशन मंत्री खुद देंगे, उनके विभाग के अफसर नहीं. दरअसल, 13 दिसंबर को मोहन यादव सरकार को दो साल पूरे हो जाएँगे. इस मौके पर सीएम जानना चाहते हैं कि किस मंत्री ने कितना और कैसा काम किया. यह प्रेजेंटेशन एक हफ्ते तक चलेगा. विधानसभा का शीतकालीन सत्र भी 1 से 5 दिसंबर तक है, इसलिए मंत्रियों का शेड्यूल सीएम की उपलब्धता के हिसाब से तय होगा. सूत्रों के मुताबिक यह कवायद सिर्फ काम देखने के लिए नहीं है, बल्कि मंत्रिमंडल में बदलाव का आधार भी बनेगी. सीएम सचिवालय और भाजपा संगठन दोनों स्तरों पर हर मंत्री का परफॉर्मेंस रिपोर्ट तैयार किया जा चुका है. 1 नवंबर को मध्य प्रदेश स्थापना दिवस के मौके पर ही सीएम मोहन यादव ने संकेत दे दिया था कि मंत्रिमंडल में बदलाव होंगे. अभी तक मोहन सरकार में कोई बड़ा फेरबदल नहीं हुआ है. सिर्फ एक अपवाद रहा – कांग्रेस के छह बार के विधायक रामनिवास रावत अप्रैल 2024 में भाजपा में आए और जुलाई में मंत्री बने. लेकिन नवंबर में विजयपुर उपचुनाव हारने के बाद उन्हें मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा. वर्तमान में मंत्रिमंडल में मुख्यमंत्री समेत 31 मंत्री हैं. मध्य प्रदेश में अधिकतम 35 मंत्री हो सकते हैं, यानी अभी चार और मंत्रियों की जगह खाली है. न सबके बीच एक और बड़ी बात है – केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को 18 दिसंबर के आसपास मध्य प्रदेश बुलाया गया है. 2 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की परियोजनाओं का सामूहिक शिलान्यास कार्यक्रम होना है. सीएम चाहते हैं कि उससे पहले सरकार का कामकाज पूरी तरह दुरुस्त दिखे और कमजोर कड़ी को बाहर कर नई टीम तैयार हो.राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि जिन मंत्रियों का काम संतोषजनक नहीं रहा, उन्हें हटाया जा सकता है. साथ ही कुछ नए चेहरों को मौका मिलेगा. कुछ पुराने दिग्गजों की वापसी की भी बात चल रही है. कुल मिलाकर दिसंबर का महीना मोहन सरकार के लिए बहुत अहम होने वाला है. पहले मंत्रियों का रिपोर्ट कार्ड, फिर अमित शाह का दौरा और उसके बाद संभावित मंत्रिमंडल विस्तार – मध्य प्रदेश की सियासत में हलचल तेज़ हो गई है. recent visitors 75

काम का दबाव या बीमारी? 10 दिनों में छह बीएलओ की मौत, परिजन बोले- एसआईआर ने ली जान

काम का दबाव या बीमारी? 10 दिनों में छह बीएलओ की मौत, परिजन बोले- एसआईआर ने ली जान

madhya pradesh blo deaths special intensive revision work pressure health issues election digitization crisis प्रदेश में जारी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान बूथ लेवल ऑफिसरों (BLO) की लगातार मौतों और बीमार होने की घटनाओं ने प्रशासन से लेकर कर्मचारी संगठनों तक सभी को चिंता में डाल दिया है। पिछले 10 दिनों में प्रदेश में 6 बीएलओ की मौत दर्ज की गई है, जबकि कई कर्मचारी अस्पताल में भर्ती हैं। परिजनों का आरोप है कि भारी काम के दबाव और तनाव के कारण मौतें हुई हैं, वहीं निर्वाचन विभाग का कहना है कि मौतों का कारण बीमारियों की अनदेखी और हादसे हैं। दूसरी ओर कर्मचारी संगठन इसे “काम के बोझ का नतीजा” बता रहे हैं। 5.74 करोड़ मतदाताओं का डेटा, 65 हजार बीएलओ पर जिम्मेदारी प्रदेश में 4 नवंबर से मतदाता सूची के डिजिटलाइजेशन का बड़ा अभियान चल रहा है। इसमें लगभग 5.74 करोड़ मतदाताओं की जानकारी अपडेट करने का काम 65 हजार बीएलओ द्वारा किया जा रहा है। निर्धारित डेडलाइन नजदीक आने से कर्मचारियों पर लगातार प्रेशर बढ़ रहा है। घटनाओं की चिंताजनक श्रृंखला सूत्रों के अनुसार, शहडोल के सोहागपुर में बीएलओ मनीराम नापित लोगों से फॉर्म ले रहे थे तभी एक अधिकारी का फोन आया। कॉल के तुरंत बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई और अस्पताल ले जाते समय उनकी मौत हो गई। पिपरिया (नर्मदापुरम) में शिक्षक और बीएलओ सुजान सिंह रघुवंशी एसआईआर सर्वे से लौटते समय ट्रेन की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हुए और बाद में अस्पताल में उनका निधन हो गया। मंडीदीप में ऑनलाइन मीटिंग खत्म होने के कुछ ही मिनट बाद बीएलओ रमाकांत पांडे अचानक बेहोश हुए और अस्पताल ले जाने के दौरान उनकी मौत हो गई। झाबुआ में बीएलओ भुवन सिंह को कुछ दिन पहले लापरवाही बताकर निलंबित किया गया था। परिजनों का कहना है कि निलंबन से वह गहरे मानसिक तनाव में थे और इसी सदमे में उन्हें हार्ट अटैक आया। इसी तरह दमोह और बालाघाट में भी दो बीएलओ की तबीयत बिगड़ने के बाद इलाज के दौरान मौत हो गई। एक परिजन ने आरोप लगाया कि “लगातार काम का दबाव और भागदौड़ ने उनकी स्थिति खराब कर दी।” बीएलओ अस्पताल में भर्ती भोपाल, रीवा और भिंड में कई बीएलओ को हार्ट अटैक और ब्रेन हेमरेज के मामले सामने आए हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि बीमारी के बावजूद अधिकारियों ने उनसे काम पूरा करने का दबाव बनाया। कर्मचारी संघ ने उठाई मुआवजे की मांग मप्र तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के महामंत्री उमाशंकर तिवारी ने चुनाव आयोग को पत्र भेजकर मांग की है कि मृत बीएलओ के परिवारों को 15 लाख रुपये मुआवजा दिया जाए और बीमार कर्मचारियों का इलाज चुनाव ड्यूटी की तरह शासन खर्च पर कराया जाए। एसआईआर प्रगति रिपोर्ट: एमपी चौथे स्थान पर मतदाता सूची के डिजिटाइजेशन को लेकर नवीनतम रिपोर्ट में बताया गया है कि 25 नवंबर दोपहर 12 बजे तक मध्य प्रदेश ने 72.29% काम पूरा कर लिया है। इससे राज्य देशभर में चौथे स्थान पर पहुंचा है। हालांकि बीएलओ को सर्वर की समस्या, लगातार फील्ड विजिट और हजारों रिकॉर्ड के पुनः सत्यापन जैसी बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं राजस्थान देश में पहले स्थान पर है, जहां 3,000 से अधिक बूथों पर 100% डिजिटाइजेशन पूरा कर लिया गया है। 4 दिसंबर तक चलेगा सर्वे निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, 4 दिसंबर तक बीएलओ मतदाताओं के घरों तक फॉर्म पहुंचाने और भरे हुए फॉर्म वापस लेने का काम पूरा करेंगे। इसके बाद 9 दिसंबर को ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी। जिन मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट में नहीं होंगे, वे जिला निर्वाचन अधिकारी के पास अपील कर सकेंगे। यदि वहां अपील खारिज होती है, तो राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के समक्ष भी अपील दायर की जा सकेगी। मध्य प्रदेश की 230 विधानसभा में चार नवंबर से एसआईआर का काम चल रहा हैं। प्रदेश के कुल 5 करोड़ 74 लाख 5 हजार वोटर्स के फार्म डिजिटलाइज होने हैं। इस काम में 65 हजार 14 बूथ लेवल ऑफियर ड्यूटी पर लगे है। recent visitors 86

दिग्विजय सिंह ने कही “मान की बात ” किया बड़ा ऐलान बोले…अब राज्यसभा जाने का मन नहीं

दिग्विजय सिंह ने कही “मान की बात ” किया बड़ा ऐलान बोले…अब राज्यसभा जाने का मन नहीं

Digvijay Singh said “Mann Ki Baat” and made a big announcement saying… now he does not feel like going to Rajya Sabha. भोपाल। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने पॉडकास्ट के जरिये अपने मन की बात बताई है। इस दौरान उन्होंने अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर बड़ा बयान दिया। 78 वर्षीय दिग्विजय सिंह ने स्पष्ट किया कि अब उनका फोकस चुनावी राजनीति से पीछे हटकर संगठन में नई पीढ़ी को आगे बढ़ाने पर रहेगा। उन्होंने कहा कि पिछला लोकसभा चुनाव उन्होंने परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए लड़ा था, पर अब यह समय नए नेतृत्व को मौके देने का है। बता दें सिंह पीएम मोदी से 3 वर्ष बड़े हैं। चर्चा है कि उन्होंने अपनी बढ़ती उम्र के मद्देनजर यह राजनैतिक फैसला लिया है। वे पीएम मोदी की तरह नहीं कि अपनी पार्टी की गाइलाइन को दरकिनार कर पद नहीं छोड़ रहे हैं। नेतृत्व को यह दी सलाह राज्यसभा उम्मीदवारी पर रायदिग्विजय सिंह ने राज्यसभा सीटों पर अपने विचार साझा किए। उनका मानना है कि किसी भी सांसद को लगातार दो बार राज्यसभा की सीट नहीं दी जानी चाहिए। इसके पीछे उनका तर्क है कि यह नई ऊर्जा और सक्रिय नेतृत्व के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि वे इस निर्णय से पूरी तरह संतुष्ट हैं और इसे पार्टी के लिए सकारात्मक बदलाव मानते हैं। लोकसभा चुनाव से इंकारमध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में पार्टी को हुई हार के बाद दिग्विजय सिंह ने साफ कर दिया कि वे आगामी लोकसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे। राजगढ़ के खिलचीपुर में बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि उनकी राज्यसभा सदस्यता अभी जारी है और उनका कार्यकाल दो साल से अधिक बचा है। इसलिए चुनाव लड़ना उनके लिए वर्तमान में विकल्प नहीं है। राजगढ़ से 2024 में चुनाव हारे दिग्विजय सिंह ने राजगढ़ लोकसभा सीट से 2024 में चुनाव लड़ा था, लेकिन भाजपा उम्मीदवार रोडमल नागर से करीब 1.45 लाख वोटों से हार गए थे। राजगढ़ लोकसभा क्षेत्र में उनका प्रभाव वाला राघौगढ़ इलाका आता है और उन्हें 2020 में राज्यसभा भेजा गया था। उन्होंने यह भी कहा कि आगामी चुनाव में उम्मीदवार तय करने का अधिकार कांग्रेस पार्टी का है। नया नेतृत्व समय की जरूरत दिग्विजय सिंह ने यह भी बताया कि उनके पास भविष्य के लिए एक योजना है, हालांकि उन्होंने इसका विवरण साझा नहीं किया। उनका मानना है कि पार्टी में नए विचार और सक्रिय नेतृत्व लाना ही वर्तमान समय की जरूरत है। recent visitors 99

मध्य प्रदेश में छात्रों के आत्महत्या करने के मामले में इंदौर पहले और भोपाल दूसरे नंबर पर

मध्य प्रदेश में छात्रों के आत्महत्या करने के मामले में इंदौर पहले और भोपाल दूसरे नंबर पर

Indore is at first place and Bhopal is at second place in the number of student suicides in Madhya Pradesh. भोपाल ! देशभर में स्वच्छता में पहले स्थान पर आने वाला इंदौर लोगों में बढ़ते तनाव को कम करने में काफी पीछे है। खासकर विद्यार्थियों में तनाव बढ़ता जा रहा है, जिसके कारण वह आत्महत्या कर रहे हैं। इंदौर के कोचिंग संस्थानों (Coaching institutes) में पढ़ने वाले 20 से अधिक विद्यार्थी हर वर्ष तनाव में आत्महत्या कर रहे हैं। सबसे अधिक तनाव नीट(NEET) और जेईई (JEE) की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों में है। आत्महत्या की दर ने सरकार की चिंता बढ़ाईविद्यार्थियों में बढ़ रही आत्महत्या की दर ने सरकार की भी चिंता बढ़ा दी है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) 2023 की रिपोर्ट बताती है कि 2023 में देशभर में 15 हजार से अधिक बच्चों ने आत्महत्या की है। 1668 मामलों के साथ मध्य प्रदेश देश में दूसरे नंबर (महाराष्ट्र के बाद) पर है। वहीं प्रदेश में भी इंदौर पहले और भोपाल जिला दूसरे स्थान पर है। एक्शन में सरकार, एसटीएफ का गठनमानसिक स्वास्थ्य में सुधार के लिए एसटीएफ का गठन सरकार ने बच्चों को आत्मघात से बचाने की जिम्मेदारी शिक्षकों-अफसरों को सौंपी है। उच्चशिक्षा विभाग ने अभिनव प्रयोग करते हुए स्टेट टास्क फोर्स (एसटीएफ) का गठन किया है। यह बल सभी विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और कोचिंग संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी उपायों की निगरानी और सुधार की रूपरेखा तय करेगा। शैक्षणिक संस्थानों में नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं। कॉलेजों में काउंसलिंग कार्यक्रम शुरू किया जा रहा है। एसटीएफ में स्कूल शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा, स्वास्थ्य, पुलिस, बाल सुरक्षा, सामाजिक न्याय तथा नगरीय प्रशासन विभागों के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया गया है। इंदौर में पांच हजार से अधिक कोचिंगइंदौर प्रदेश का कोचिंग हब है। यहां पांच हजार से अधिक कोचिंग संस्थान संचालित होते हैं। इसमें से 200 से अधिक नीट, जेईई और आईआईटी (IIT) की तैयारी की कोचिंग है। भंवरकुआं, गीताभवन, पलासिया, विजय नगर आदि क्षेत्रों में बड़ी संख्या में कोचिंग संस्थान हैं। यहीं सबसे अधिक विद्यार्थी रहते भी हैं। इंदौर में आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में विद्यार्थी पढ़ाई के लिए आते हैं। पढ़ाई का दबाव बना जानलेवाकेस 1ः फरवरी 2025 में भंवरकुआं थाना क्षेत्र में नीट की परीक्षा में चयन न होने से परेशान छात्रा ने फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली थी। छात्रा का नाम गारगी सुमन (23) निवासी श्रीराम नगर पालदा था। गारगी कई वर्षों से नीट की तैयारी कर रही थी। दो बार कम अंक आने के कारण वह सफल नहीं हो सकी। इसके बाद उसने बैंक की परीक्षा की तैयारी की, लेकिन इसमें भी वह सफल नहीं हो सकी। केस 2ः वर्ष 2024 में भंवरकुआं क्षेत्र में एक छात्र ने नोट लिखा कि मैं जीवन में सफल नहीं हो पाया और आत्महत्या कर ली। छात्र नीट की तैयारी कर रहा था। मूलरूप से शिवनी जिले का रहने वाला था। केस 3ः फरवरी 2024 में 20 वर्षीय आर्यन तिवारी ने फांसी लगा ली थी। वह मूलरूप से हुजूर (रीवा) का रहने वाला था। इंदौर रहकर वह नीट की तैयारी कर रहा था। केस 4ः मई 2025 में नर्सिंग की छात्रा आशा कानूनगो (25) ने आत्महत्या कर ली। वह मूलरूप से सिवनी की रहने वाली थी। उसकी दीवार पर कई नोट चिपके हुए थे। उनमें लिखा था कि वह सरकारी नर्स नहीं बन सकती और डिप्रेशन में है।केस 5ः मई 2025 में संयोगितागंज थाना क्षेत्र में नर्स यास्मित्रा ने आत्महत्या की। वह निजी मेडिकल कॉलेज में आगे की पढ़ाई कर रही थी। आशंका जताई गई थी कि पढ़ाई के दबाव के चलते यह कदम उठाया है। विशेषज्ञ ने बताया क्या करें माता-पितामनोचिकित्सक डॉ. राहुल माथुर ने बताया कि अब बच्चों में तनाव सहने की क्षमता कम हो गई है। पढ़ाई का तनाव इतना अधिक ले लेते हैं कि आत्महत्या जैसे कदम उठाते हैं। माता-पिता को ध्यान रखना चाहिए कि वह बच्चों से उम्मीद रखने के बजाय उनके सहायक की भूमिका निभाएं। उनसे खुलकर बात करें। यदि बच्चा कई दिनों से चुपचाप है, अकेला रहने लगा है, रात में जल्दी नहीं सो रहा है, तो हमें इन लक्षणों को पहचानकर विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए। बच्चों को यह लगता है कि परीक्षा में फेल हो गया तो क्या होगा। उन्हें यह समझना होगा कि जो व्यक्ति परीक्षा में सफल नहीं हो पाते हैं, वह भी आगे बढ़ते हैं। विद्यार्थियों में इन लक्षणों को पहचानें recent visitors 101