मध्य प्रदेश के लोगों को निगल रहा गुटखा, तंबाकू ने माउथ कैंसर के मरीज 40 फीसदी बढ़ाए, देश में सबसे ज्यादा मामले यहां

People in Madhya Pradesh are swallowing gutkha, tobacco has increased the incidence of mouth cancer by 40 percent, with the highest number of cases in the country. भोपाल । मध्यप्रदेश में जुगाड़ का गुटखा मुंह के कैंसर के मामलों में हर साल बढ़ोत्तरी कर रहा है. मुंह के कैंसर के बढ़ते मामलों को देखते हुए मध्यप्रदेश में करीबन 14 साल पहले गुटखा की बिक्री पर रोक लगाई गई थी, लेकिन इसके बाद पाउच का स्थान ‘जुगाड़ के गुटखे’ ने ले लिया. तंबाकू-चूने और जुगाड़ के गुटखे के चलते देश में सबसे ज्यादा मुंह के कैंसर के मरीज मध्य प्रदेश में सामने आ रहे हैं. मध्यप्रदेश में साल 2025 में 48 हजार 694 कैंसर के मरीज मिले थे, जिनमें से करीबन 40 फीसदी मरीज ओरल कैंसर के थे. भोपाल में सबसे ज्यादा मुंह का कैंसर नेशनल कैंसर रजिस्ट्री प्रोग्राम इंवेस्टीगेटर की रिपोर्ट के मुताबिक, मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में मुंह के कैंसर के सबसे ज्यादा मामले सामने आते हैं. राजधानी भोपाल में 1 लाख लोगों की आबादी में 41 लोग मुंह के कैंसर से पीड़ित मिल रहे हैं. इसके अलावा प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में भी मुंह के कैंसर से पीड़ित मरीज बड़ी संख्या में मिल रहे हैं. गुटखे पर पाबंदी तो जुगाड़ वाला गुटखा चला कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. श्याम अग्रवाल के मुताबिक, ” मुंह के कैंसर पर रोक लगाने के लिए ही 1 अप्रेल 2012 को मध्यप्रदेश में तंबाकू पाउच की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया गया था, लेकिन इसके बाद जुगाड़ का पाउच आ गया. अब एक पाउच में सादा गुटखा होता है, और दूसरे में तंबाकू, चूना आदि. इस सबको मिलाकर यह वहीं तंबाकू का गुटखा बन जाता है, जिस पर प्रतिबंध लगाया गया था. यही वजह है कि प्रदेश में मुंह के कैंसर के रोगी कम होने के स्थान पर बढ़ गए हैं.” अब युवाओं में आ रहे कैंसर के मामले, एमपी में सबसे तेज डॉ. श्याम अग्रवाल कहते हैं, ” अब मुंह के कैंसर के मरीजों के मामले में एक अहम बदलाव आया है. कुछ साल पहले तक मुंह के कैंसर के मरीज की औसत उम्र 50 साल और उससे अधिक ही होती थी, लेकिन अब 20-25 साल की नई उम्र के युवा भी कैंसर मरीज बन रहे हैं. कारण सिर्फ तंबाकू का सेवन है. पूरे विश्व में भारत, पाकिस्तान सहित कुछ देशों में ही मुंह के कैंसर के मरीज सामने आते हैं, इसमें भी मध्यप्रदेश में सबसे ज्यादा. मध्यप्रदेश में कैंसर के मरीजों की संख्या में हर साल 10.55 फीसदी की बढ़ोत्तरी हो रही है, जबकि इसमें मुंह के कैंसर के मरीज 40 फीसदी बढ़ रहे हैं. भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद के राष्ट्रीय महामारी विज्ञान संस्थान के अनुसार मध्यप्रदेश में साल 2021 से 2025 के दौरान कैंसर के मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है. 40 फीसदी मामले माउथ कैंसर के ही प्रदेश में मुंह के कैंसर के मामले औसत कैंसर के मामलों से ज्यादा बढ़ रहे हैं. देश में भी मिलने वाले कैंसर के कुल मामलों में 40 फीसदी सिर्फ मुंह के कैंसर के मामले होते हैं. भोपाल स्थिति जवाहरलाल नेहरू कैंसर हॉस्पिटल के आंकड़ों को देखें तो हॉस्पिटल में साल 2012 में मुंह के कैंसर के मरीजों की संख्या 1836 थी, जो साल 2025 में बढ़कर 2614 तक पहुंच गई हैं. यहां इलाज कराने के लिए प्रदेश के कई जिलों से मरीज पहुंचते हैं. मुंह के कैंसर के मरीजों की संख्या में लगातार बढ़त देखी जा रही है, जो खतरनाह है. साल 2020 में हॉस्पिटल में 2118 ओरल कैंसर के मरीज मिले थे, जो साल 2021 में बढ़कर 2519 हो गए. साल 2022 में यहां 2492 मरीज इलाज कराने पहुंचे. वहीं, साल 2023 में 2566 मरीज, 2024 में 2743 और साल 2025 में 2614 ओरल कैंसर के मरीज सामने आए हैं. मुंह में सफेद, लाल दाग हो तो सर्तक हो जाएं जवाहरलाल नेहरू कैंसर हॉस्पिटल भोपाल के मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. विजय भार्गव कहते हैं, ” गुटखा, पाउच, तंबाखू खाने और सिगरेट पीने वाले लोग मुंह में होने वाले शुरुआती लक्षणों को बिलकुल भी नजरअंदाज न करें. यदि धीरे-धीरे मुंह खुलना कम हो जाए या मुंह में किसी तरह के लाल-सफेद धब्बे बन जाएं तो तुरंत तंबाकू, गुटखा खाना बंद कर दें और चैकअप कराएं. शुरुआती स्तर पर ही जांच और दवा के जरिए गंभीर बीमारी को टाला जा सकता है.” डॉक्टर आगे कहते हैं, ”लगातार तंबाकू, गुटखा खाने वालों और सिगरेट पीने वालों के मुंह में सफेद या लाल धब्बे बन जाते हैं, यह एक तरह की चेतावनी होती है, जो शरीर आपको देता है. ऐसी स्थिति में तुरंत तंबाकू-पाउच खाना बंद करना चाहिए. कई बार लोग तर्क देते हैं कि सिर्फ तंबाकू और चूना खाने से कुछ नहीं होता, लेकिन जब तंबाकू को चूना के साथ मिलाया जाता है तो यह निकोटीन को खून में तेजी से घोलता है और इससे तंबाकू की लत को और मजबूत करता है, इसके साथ ही और मुंह में छाले बनाता है, जो आगे चलकर कैंसर का कारण बन जाता है.” recent visitors 13

स्टाफ की भारी कमी से जूझ रहा आबकारी महकमा, हर दिन बहती है 1400 लीटर अवैध शराब, फिर भी 900 से ज्यादा पद खाली

स्टाफ की भारी कमी से जूझ रहा आबकारी महकमा, हर दिन बहती है 1400 लीटर अवैध शराब, फिर भी 900 से ज्यादा पद खाली The excise department is grappling with a severe staff shortage, with 1,400 liters of illicit liquor being transported daily, yet over 900 posts remain vacant. सागर में हुई जहरीली शराब की त्रासदी के बाद मध्य प्रदेश के आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। राज्य में हर दिन औसतन 1,400 लीटर अवैध शराब जब्त होने के बावजूद, महकमा भारी स्टाफ की कमी से जूझ रहा है। राज्य में सैकड़ों पद खाली पड़े हैं, जिससे अवैध शराब के कारोबार पर पूरी तरह लगाम कसना एक बड़ी चुनौती बन गया है। विशेष संवाददाता : राम मेहरा भोपाल। एमपी में हर दिन औसतन लगभग 1,400 लीटर अवैध देसी शराब जब्त की जा रही है, लेकिन इसके बावजूद आबकारी प्रवर्तन मशीनरी भारी मैनपावर की कमी से जूझ रही है। सागर में हाल ही में हुई दर्दनाक जहरीली शराब त्रासदी, जिसमें कम से कम 22 लोगों की जान चली गई, के बाद इस प्रशासनिक लाचारी और मैदानी अमले की कमी पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हर दिन हो रही है हजारों लीटर अवैध शराब की जब्ती आबकारी विभाग के रिकॉर्ड से चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान दिसंबर तक कुल 3,74,639 लीटर अवैध देसी शराब जब्त की गई, जिसका दैनिक औसत लगभग 1,388 लीटर बनता है। खास बात यह है कि जब्ती का यह पैमाना ऐसे समय में दर्ज किया गया है जब अवैध डिस्टिलेशन, अवैध कब्जे, तस्करी और अवैध बिक्री के तहत दर्ज किए जाने वाले आबकारी अधिनियम के मामलों की संख्या पिछले पांच वर्षों में अपने सबसे निचले स्तर पर आ गई थी। कागजों पर सख्ती और महकमे में भारी खालीपन एक तरफ जहां अवैध शराब का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है, वहीं दूसरी तरफ आबकारी विभाग खुद अंदरूनी रूप से कर्मचारियों और अधिकारियों के भारी संकट का सामना कर रहा है। महकमे के पास जमीनी स्तर पर काम करने के लिए पर्याप्त अमला ही नहीं बचा है। मध्य प्रदेश में हर दिन औसतन करीब 1,400 लीटर अवैध देसी शराब की जा रही है जब्त। सागर में जहरीली शराब पीने से कम से कम 22 लोगों की हो चुकी है दर्दनाक मौत। आबकारी विभाग के क्लास I और II के आधे से ज्यादा पद खाली पड़े हैं। क्लास III के 1,877 स्वीकृत पदों में से 704 पद अभी भी रिक्त चल रहे हैं। सरकार का दावा है कि नई भर्तियों की प्रक्रिया जारी है, लेकिन ट्रेनिंग और प्रक्रिया में समय लगेगा। पड़ोसी राज्यों तक फैले हैं अवैध शराब के जाल के तार मध्य प्रदेश की आबकारी व्यवस्था लगातार पड़ोसी राज्यों में हो रही त्रासदियों के बाद से ही रडार पर बनी हुई है। हाल ही में गुजरात के भावनगर में एक बड़ी जहरीली शराब की घटना सामने आई थी, जिसमें 12 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी। गुजरात पुलिस की जांच में यह खुलासा हुआ था कि इस कांड के दो मुख्य आरोपी मध्य प्रदेश के रहने वाले थे और वे ही अवैध जहरीली शराब बनाने के लिए आवश्यक कैमिकल की प्रोक्योरमेंट (खरीद-फरोख्त) में सीधे तौर पर शामिल थे। recent visitors 17

अल्पेश यशवंत ने ली मध्य प्रदेश के 30वें चीफ जस्टिस की शपथ, क्राइम केस में बड़े फैसलों के लिए मशहूर

अल्पेश यशवंत ने ली मध्य प्रदेश के 30वें चीफ जस्टिस की शपथ, क्राइम केस में बड़े फैसलों के लिए मशहूर Alpesh Yashwant was sworn in as the 30th Chief Justice of Madhya Pradesh, known for his landmark decisions in criminal cases. विशेष संवाददाता जितेन्द्र श्रीवास्तव अर्पिता  जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट को नया स्थायी मुख्य न्यायाधीश मिल गया है. प्रदेश के 30 वें चीफ जस्टिस के रूप में अल्पेश यशवंत कोगजे ने राजभवन में पद और गोपनीयता की शपथ ली. राजभवन में हुए शपथ ग्रहण समारोह में राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने मुख्य न्यायाधीश पद की शपथ दिलाई. इस मौके पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सहित कई मंत्री और अधिकारी मौजूद दे. शपथ ग्रहण समारोह के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मुख्य न्यायाधीश को बधाई दी है. वकालत से शुरू हुआ था सफर नव नियुक्त चीफ जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे का जन्म 16 जुलाई 1969 में हुआ था. उन्होंने बीएससी केमिस्ट्री और 1990 में एलएलबी की थी और 1993 से गुजरात में वकालत कर रहे थे. मध्य प्रदेश के चीफ जस्टिस बनाए जाने के पहले अल्पेश यशवंत कोगज गुजरात न्यायालय में वरिष्ठ न्यायाधीश के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे. प्रदेश के नए चीफ जस्टिस वकील के रूप में लंबी सेवाएं दी हैं. 1993 में बड़ौदा के महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय से एलएलबी करने के बाद उन्होंन गुजराज में वकील के रूप काम करना शुरू किया संतुलित कार्यप्रणाली और विधिक क्षेत्र में उनकी गहरी समझ को देखते हुए 2001 में उन्हें असिस्टेंट गवर्नमेंट प्लीडर और इसके बाद 2002 में एडिशनल पब्लिक प्रोसिक्यूटर बनाया गया. 6 अप्रैल 2016 में गुजराज उच्च न्यायालय में अतिरिक्त मुख्य न्यायाधीश नियुक्ति किय गया. उन्होंने आपराधिक न्यायप्रणाली, प्रशासनिक निष्पक्षता को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय दिए हैं. कैसे चुनाव जाता है हाईकोर्ट चीफ जस्टिस उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है. हालांकि यह पूरी प्रक्रिया कॉलेजियम प्रणाली के जरिए होती है. सुप्रीम कोर्ट का कॉलेजियम नामों की सिफारिश केन्द्र सरकार के विधि और न्याय मंत्रालय को करता है और इसके बाद राष्ट्रपति द्वारा मंजूरी दी जाती है. इसके बाद अधिसूचना जारी होती है. उच्च न्यायाधीश के रूप में चुनने के पहले संबंधित की कानूनी समझ, कार्यप्रणाली आदि को देखा जाता है. न्यायाधीश के लिए कम से कम 10 सालों तक किसी न्यायिक पद पर कार्य करने का अनुभव के अलावा बतौर अधिवक्ता 10 साल तक कार्य का अनुभव जरूरी होता है. recent visitors 27

ईद मिलादुन्नबी पर युवा कांग्रेस ने किया जुलूस-ए-मोहम्मदी का भव्य स्वागत

Youth Congress accorded a grand welcome to the Juloos-e-Muhammadi on Eid-e-Milad-un-Nabi. हरिप्रसाद गोहेआमला। ईद मिलादुन्नबी के अवसर पर बोड़खी में निकाले गए जुलूस-ए-मोहम्मदी का युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भव्य स्वागत किया। विधानसभा उपाध्यक्ष राकेश सोने और नगर महासचिव दीपक बेले के नेतृत्व में जुलूस में शामिल लोगों को स्वल्पाहार वितरित किया गया और ईद की मुबारकबाद दी गई। इस अवसर पर युवा नेता अक्षय बामने ने कहा कि ईद मिलादुन्नबी प्रेम, शांति, अमन और भाईचारे का संदेश देती है। ऐसे धार्मिक आयोजन समाज में आपसी सद्भाव और एकता को मजबूत करने का काम करते हैं। कार्यक्रम के दौरान पूर्व पार्षद विजय अतुलकर, शहर अध्यक्ष अजय सोलंकी, विजय सोनू बछले, वीरू तोमर, बंटू बेले सहित युवा कांग्रेस के कार्यकर्ता मौजूद रहे। कार्यकर्ताओं ने जुलूस का स्वागत कर सामाजिक सौहार्द और भाईचारे का संदेश दिया। recent visitors 23

MP NEWS खाद बिक्री बंद: पोर्टल के मिलान के नाम पर किसानों पर फिर संकट, सरकार के किसान हितैषी दावों पर उठे सवाल

MP NEWS: Fertilizer sales halted: Farmers face another crisis due to portal matching, raising questions about the government’s farmer-friendly claims. भोपाल। मध्य प्रदेश में किसानों को खेती के लिए खाद की जरूरत के बीच सरकार के एक आदेश ने नई चिंता खड़ी कर दी है। सामने आए आदेश के मुताबिक 14 अगस्त 2026 की शाम 7 बजे से प्रदेश में उर्वरक की बिक्री आगामी आदेश तक बंद कर दी गई है। आदेश में भारत सरकार के FMS पोर्टल और प्रदेश के उर्वरक विक्रेताओं के वास्तविक स्टॉक का Reconciliation यानी मिलान किए जाने का हवाला दिया गया है। आदेश के अनुसार बिक्री बंद रहने की अवधि में विपणन संघ के विक्रय केंद्रों, प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों और अन्य संबंधित केंद्रों से किसी भी प्रकार के अनुदानित उर्वरक का विक्रय नहीं किया जाएगा। पोर्टल का मिलान जरूरी, लेकिन किसानों की परेशानी का क्या? सरकार की ओर से स्टॉक और पोर्टल के आंकड़ों का मिलान पारदर्शिता तथा वास्तविक उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए किया जा रहा हो सकता है, लेकिन सवाल यह है कि इस प्रक्रिया का सीधा असर किसान पर क्यों पड़े? खेती के मौसम में किसान को समय पर खाद नहीं मिली तो फसल प्रभावित होने का खतरा रहता है। ऐसे में बिक्री अचानक रोकने के फैसले से किसानों को खाद के लिए भटकना पड़ सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में पहले से ही खाद की उपलब्धता और वितरण को लेकर किसानों की चिंता रहती है। किसान पूछ रहे—खाद चाहिए या पोर्टल की प्रक्रिया? सरकार लगातार किसान हित और कृषि को प्राथमिकता देने की बात करती है। लेकिन दूसरी तरफ, खाद बिक्री रोकने के आदेश ने सरकार की किसान-हितैषी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। किसानों का सवाल है कि FMS पोर्टल का स्टॉक मिलान विभागीय स्तर पर करते हुए खाद की बिक्री जारी क्यों नहीं रखी जा सकती? यदि व्यवस्था में तकनीकी या स्टॉक संबंधी समस्या है तो उसका खामियाजा किसान क्यों भुगते? क्या यह फैसला किसान विरोधी साबित होगा? विपक्ष और किसान संगठनों को सरकार के इस फैसले पर सवाल उठाने का मौका मिल सकता है। किसानों के बीच यह धारणा बन सकती है कि सरकारी सिस्टम की तकनीकी प्रक्रिया और प्रशासनिक निर्णयों का बोझ आखिरकार अन्नदाता पर ही डाला जा रहा है। सरकार से किसानों के सवाल खाद बिक्री बंद करने की जरूरत क्यों पड़ी? बिक्री दोबारा शुरू करने की निश्चित तारीख क्यों नहीं बताई गई? स्टॉक मिलान की प्रक्रिया कितने समय में पूरी होगी? इस दौरान जरूरतमंद किसानों को खाद कैसे मिलेगी? यदि किसी किसान की फसल खाद के अभाव में प्रभावित होती है तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? अब निगाह इस बात पर है कि सरकार खाद बिक्री दोबारा कब शुरू करती है और किसानों को इस दौरान खाद उपलब्ध कराने के लिए क्या वैकल्पिक व्यवस्था करती है। recent visitors 21

मध्यप्रदेश विद्युत मण्डल में अयोग्य अधिकारियों को सौंपे मलाईदार पद

Lucrative posts in the Madhya Pradesh Electricity Board handed over to incompetent officials. भोपाल। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड में कार्यपालन यंत्री (डीजीएम) के पदों पर अपात्रों को करंट चार्ज सौंपे जा रहे हैं। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड में मण्डल (बोर्ड) संवर्ग के अधिकारियों के लिए सुरक्षित रखे गए कार्यपालन यंत्री के पदों पर कंपनी संवर्ग के ऐसे सहायक अभियंताओं (AE) को करंट चार्ज दिया गया है, जो हाल ही में संपन्न पदोन्नति प्रक्रिया में कार्यपालन यंत्री पद पर नियमित पदोन्नति के लिए पात्र नहीं पाए गए। मध्यप्रदेश विद्युत मण्डल पत्रोपाधि अभियंता संघ ने इस व्यवस्था पर गंभीर आपत्ति जताई है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड में जिस अधिकारी को विभाग ने कार्यपालन यंत्री पद पर नियमित पदोन्नति के योग्य नहीं माना, उसी अधिकारी को करंट चार्ज के माध्यम से उसी पद का दायित्व सौंप दिया गया है। इससे पदोन्नति प्रक्रिया की निष्पक्षता, पारदर्शिता एवं प्रशासनिक औचित्य पर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं। ले रहे वित्तीय निर्णय वरिष्ठ अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। यदि कोई अधिकारी निर्धारित सेवा नियमों एवं पात्रता की कसौटी पर कार्यपालन यंत्री बनने के योग्य नहीं है, तो उसे उसी पद का करंट चार्ज किस नियम, किस प्रशासनिक आवश्यकता और किस सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति से दिया गया। ऐसे अधिकारी उसी पद के प्रशासनिक, तकनीकी एवं वित्तीय निर्णय ले रहे हैं, जबकि नियमित पदोन्नति के लिए उन्हें पात्र नहीं माना गया। समकक्ष अधिकारियों में पनप रही कुंठा संघ पदाधिकारियों का कहना है कि इस व्यवस्था से मण्डल संवर्ग के वरिष्ठ एवं पात्र अधिकारियों के वैधानिक अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। अनेक अधिकारी 35 से 38 वर्षों की सेवा पूर्ण करने के बाद भी अपनी पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जबकि उनके लिए सुरक्षित पदों पर अन्य संवर्ग के अधिकारियों से करंट चार्ज के माध्यम से कार्य कराया जा रहा है। इस भेदभावपूर्ण व्यवस्था से समकक्ष अधिकारियों में कुंठा का भाव पनप रहा है। कार्यपालन यंत्री के करंट चार्ज की निष्पक्ष समीक्षा की मांग मध्यप्रदेश विद्युत मण्डल पत्रोपाधि अभियंता संघ भोपाल के प्रभारी अध्यक्ष केके आर्य ने राज्य शासन एवं विद्युत कंपनी प्रबंधन से मांग की है कि बोर्ड संवर्ग के लिए सुरक्षित कार्यपालन यंत्री पदों पर दिए गए सभी करंट चार्ज की निष्पक्ष समीक्षा कराई जाए। संबंधित आदेशों को सार्वजनिक किया जाए। पात्र अधिकारियों को ही उक्त पदों का दायित्व सौंपा जाए। recent visitors 34

MP में 24×7 खुलेंगे Hotel-Mall-Shops! राज्यपाल की मंजूरी के बाद नए नियम लागू, जानिए पूरी खबर

Hotels, malls, and shops in MP to remain open 24×7! New rules implemented following the Governor’s approval—read the full story. भोपाल । मध्यप्रदेश में होटल, मॉल, रेस्टोरेंट और अन्य व्यवसायिक संस्थान अब दिन ही नहीं, बल्कि पूरी रात भी खुले रह सकेंगे. मध्यप्रदेश विधानसभा के बाद अब राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने मध्यप्रदेश कार्यस्थल सशक्तिकरण संहिता 2026 को अपनी मंजूरी दे दी है. इसके साथ ही यह अधिनियम अब प्रदेश भर में लागू हो गया है. प्रदेश में होटल, मॉल आदि प्रतिष्ठिान 24 घंटे और सभी 7 दिन खुल सकेंगे. इससे लोग रात में भी जाकर खरीदारी कर सकेंगे. इसके साथ ही लोगों को भी रात में काम के अवसर मिलेंगे. संस्थानों को अलग-अलग शिफ्ट में कर्मचारियों को रखना होगा. हालांकि, शराब की दुकानों की समय सीमा का निर्णय स्थानीय प्रशासन लेगा. कराना होगा सिर्फ एक बार रजिस्ट्रेशनराज्य सरकार ने नए अधिनियम में संस्थानों के लिए अपने प्रतिष्ठिान के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया भी आसान कर दी है. अब संस्थान को इसकी नियमानुसार विभाग को सूचना देनी होगी. इसके बाद उनका रजिस्ट्रेशन कर उन्हें इसका सर्टिफिकेट दे दिया जाएगा. रजिस्ट्रेशन बार-बार रिन्यु नहीं कराना होगा. संस्थान बंद होने पर लिखित में इसकी सूचना देनी होगी, इसके बाद रजिस्ट्रेशन निरस्त कर दिया जाएगा. काम के घंटे लेबर लॉ के हिसाब से हीभले ही मॉल, दुकान और अन्य संस्थानों को 24 घंटे खोलने का नियम बना दिया गया हो, लेकिन संचालकों को कर्मचारियों को रखने और उसने कार्य कराने के लिए श्रम विभाग के न्यूनतम कार्य के घंटों के नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा. किसी भी कर्मचारी से हर दिन के निर्धारित और साप्ताहिक 48 घंटों से अधिक काम कराने की अनुमति नहीं होगी. रात्रि के समय महिलाओं को भी काम की अनुमति होगी, लेकिन इसके लिए नियोक्ता को सुरक्षा, परिवहन और बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था करनी होगी. अतिरिक्त काम कराने के लिए संस्थान को ओवरटाइम वेतन कर्मचारी को देना होगा. दवाब बनाने नहीं रख सकेंगे कर्मचारी के डॉक्युमेंटनए नियमों में कर्मचारियों के मूल डॉक्युमेंट और कोई अन्य सामान संस्थान द्वारा रखे जाने पर रोक लगा दी है. दरअसल, कई बार शिकायतें सामने आती हैं कि नियोक्ता द्वारा कर्मचारी के मूल दस्तावेज या कोई दूसरा सामान रख लिया जाता है, ताकि कर्मचारी काम छोड़कर न जा सके. नई संहिता में कर्मचारियों की सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाओं के संबंध में भी प्रावधान किया गया है. प्रतिष्ठान को कार्यस्थल पर साफ-सफाई, सुरक्षा उपकरण और आपात स्थिति से बचाव के लिए पर्याप्त व्यवस्था करनी होगी. शिकायतों के लिए बनाई जाएंगी समितियांकर्मचारियों की समस्याओं को निपटाने के लिए समितियां बनाई जाएंगी. कर्मचारी संबंधित समितियों और इसके बाद प्रशासनिक अधिकारी को अपनी शिकायत दर्ज करा सकें. श्रम विभाग को अधिकार होंगे कि वे जरूरत पड़ने पर संबंधित प्रतिष्ठिान की जांच कर सकेंगे और दस्तावेज मांगकर उसकी जांच कर सकेंगे. यदि जांच के दौरान किसी तरह के नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जा सकेगी. recent visitors 26