स्थाई शिक्षक भर्ती 2018 को पूर्ण करने पात्र अभ्यर्थियों ने डिप्टी सीएम से लगाई गुहार

Eligible candidates appealed to the Deputy CM to complete the Permanent Teacher Recruitment 2018. निराशा के नहीं छट रहे बादल, तीसरी काउंसलिंग की मांग  भोपाल। मध्य प्रदेश में स्थाई शिक्षकों की भारी कमी होने के बावजूद शिक्षा विभाग पद भरने को लेकर गंभीर दिखाई नहीं दे रहा है। वर्ष 2018 की स्थाई शिक्षक भर्ती आज तक अधूरी है। जिसको तीसरी काउंसलिंग के साथ पूर्ण कराने की मांग को लेकर चयनित अभ्यर्थियों ने उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा को ज्ञापन पत्र सौंपा है। पांच सदस्यों के प्रतिनिधिमंडल ने उपमुख्यमंत्री के अलावा, मुख्यमंत्री कार्यालय एवं आयुक्त लोक शिक्षण संचालनालय को ज्ञापन देकर भर्ती प्रकिया पूरी करने की मांग की है। 2018 से चल रही प्रक्रिया फिर भी अधूरी, हो रहे ओवरयेज  शिक्षक भर्ती 2018 के चयनित उम्मीदवार नियुक्ति पत्र का इंतजार पिछले 6 से 7 वर्षों से कर रहे हैं। चयनित अभ्यर्थियों की मुख्य मांग है कि उच्च माध्यमिक शिक्षक के 5,935 और माध्यमिक शिक्षक के 2,237 पहली काउंसिलिंग से रिक्त रहे पदों पर तीसरी काउंसलिंग आयोजित की जाए, ताकि शेष पदों पर चयन सूची जारी हो और नियुक्ति पत्र वितरित किए जाएं। अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि विभाग की उदासीनता के कारण कई उम्मीदवार ओवरएज हो चुके हैं, जिससे उनका भविष्य अधर में लटक गया है। अधिकार मिलने तक लड़ाई जारी पात्रता परीक्षा संघ के प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल रविदास सहित दिनेश बामनिया, लीलेश कुमार आदि ने बताया कि हमने वर्षों तक मेहनत की और परीक्षा पास की, लेकिन सरकार और शिक्षा विभाग की लापरवाही के कारण हमें नियुक्ति नहीं मिल रही। हमारी मांग है कि तत्काल शेष पदों पर तीसरी काउंसलिंग कर भर्ती प्रक्रिया पूरी की जाए।अभ्यर्थियों का साफ कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होती हैं, तब तक आंदोलन जारी रखेंगे। recent visitors 39

मध्य प्रदेश: आज किसानों का भोपाल कूच व CM हाउस के घेराव की तैयारी, मूंग की 100% खरीदी पर अड़े; अब आगे क्या?

Madhya Pradesh: Farmers set to march to Bhopal and lay siege to the CM’s residence today, adamant on 100% procurement of moong; what next? मध्यप्रदेश में मूंग की पूरी उपज समर्थन मूल्य पर खरीदने समेत किसानों की आठ सूत्रीय मांगों को लेकर शुरू हुआ आंदोलन मंगलवार को और तेज हो गया है। नर्मदापुरम से भोपाल के लिए निकली संयुक्त किसान मोर्चा की पदयात्रा सोमवार को प्रशासन की रोक-टोक के बावजूद आगे बढ़ती रही। किसानों के भोपाल की ओर बढ़ने के साथ ओबैदुल्लागंज से भोपाल की तरफ जाने वाला हाईवे बंद है, वहीं जबलपुर की तरफ से सुल्तानपुर मार्ग भी प्रभावित है। किसान नेताओं ने साफ किया है कि वे मुख्यमंत्री आवास तक पहुंचकर अपनी मांगें रखेंगे। आंदोलन की सबसे प्रमुख मांग मूंग की शत-प्रतिशत खरीदी है। इसके अलावा ई-टोकन व्यवस्था खत्म करने, एमएसपी पर खरीद की कानूनी गारंटी, फसल बीमा में सुधार, बिजली कटौती बंद करने और ट्रांसफार्मर उपलब्ध कराने समेत अन्य मांगें भी शामिल हैं। नर्मदापुरम से निकले किसान, रास्ते में कई बार रोका गयाकिसान पदयात्रा सोमवार को नर्मदापुरम से आगे बढ़ी। प्रशासन ने रास्ते में बैरिकेडिंग कर किसानों को रोकने की कोशिश की, लेकिन प्रदर्शनकारी आगे बढ़ते रहे। नर्मदा पुल के पास से लेकर बुधनी क्षेत्र तक कई जगह पुलिस और किसानों के बीच आमना-सामना हुआ। किसानों ने रास्ते में लगाए गए पांच बैरिकेड हटाकर आगे का रास्ता बनाया। इसके बाद यात्रा बरखेड़ा तक पहुंची। रात में विश्राम के बाद मंगलवार को किसानों ने भोपाल की तरफ फिर कूच किया। सुबह से शाम तक पुलिस-किसानों में खींचतानपहले दिन करीब सुबह 9 बजे से शाम 7:30 बजे तक अलग-अलग स्थानों पर किसानों और पुलिस के बीच गतिरोध बना रहा। प्रशासन ने नर्मदापुरम शहर में प्रवेश से लेकर सेठानी घाट, इंदिरा चौक, भोपाल चौराहा और डोंगरवाड़ा सहित कई जगहों पर किसानों को रोकने का प्रयास किया। हालांकि, किसान पीछे हटने को तैयार नहीं हुए। पदयात्रा में युवा किसानों के साथ बुजुर्ग भी शामिल रहे। सोमवार की लंबी पैदल यात्रा के बाद किसान बरखेड़ा पहुंचे और मंगलवार को फिर राजधानी की ओर बढ़े। हाईवे पर यातायात प्रभावित, वैकल्पिक रास्तों का दबावकिसानों के भोपाल की ओर बढ़ने के कारण ओबैदुल्लागंज-भोपाल मार्ग पर यातायात प्रभावित है। इसके साथ जबलपुर की ओर से आने वाले वाहनों के लिए सुल्तानपुर मार्ग भी प्रभावित होने की सूचना है। ऐसे में भोपाल की तरफ आने-जाने वाले यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यह आंदोलन ऐसे समय तेज हुआ है जब मूंग की एमएसपी खरीदी को लेकर प्रदेश में किसान पहले से प्रदर्शन कर रहे हैं। इससे पहले भी किसानों ने हाईवे जाम और विधानसभा घेराव की चेतावनी दी थी। गुरुद्वारा बंद कराने का किसान नेताओं ने लगाया आरोपकिसान नेताओं ने आरोप लगाया कि औबेदुल्लागंज स्थित गुरुद्वारे में किसानों के ठहरने की व्यवस्था थी, लेकिन प्रशासन ने गुरुद्वारा बंद करा दिया। उनका कहना है कि नर्मदापुरम में आंदोलन के चलते देरी होने के बाद किसानों को रात बरखेड़ा में गुजारनी पड़ी। इन मांगों पर अड़े किसानकिसानों की मांगों की सूची में मूंग की 100 प्रतिशत उपज समर्थन मूल्य पर खरीदी जाए, ई-टोकन व्यवस्था खत्म की जाए, एमएसपी पर खरीद की कानूनी गारंटी दी जाए, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में सुधार किया जाए, अघोषित बिजली कटौती बंद की जाए, अनुदान पर ट्रांसफार्मर उपलब्ध कराए जाएं, ग्रामीण सड़कों का निर्माण कराया जाए, भारत-अमेरिका ट्रेड डील समाप्त करने की मांग की है। किसानों का ऐलान-मांग पूरी होने तक आंदोलनसंयुक्त किसान मोर्चा ने कहा है कि सिर्फ आश्वासन से आंदोलन खत्म नहीं होगा। किसानों का कहना है कि सरकार को मूंग की पूरी उपज एमएसपी पर खरीदने सहित सभी मांगों पर ठोस फैसला लेना होगा। इसके बाद ही आंदोलन वापस लेने पर विचार किया जाएगा। फिलहाल किसानों का काफिला राजधानी की तरफ बढ़ रहा है और दो प्रमुख मार्गों पर यातायात प्रभावित होने से प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था के साथ ट्रैफिक मैनेजमेंट की भी चुनौती खड़ी हो गई है। recent visitors 30

एपी गज़ब फर्जी डॉक्टर ने सरकार को लगाया लाखों का चूना, एक साथ तीन जिलों में करता रहा नौकरी

Bizarre case from AP: Fake doctor swindles the government out of lakhs; held jobs in three districts simultaneously. मध्यप्रदेश में फर्जीवाड़े का एक बड़ा मामला सामने आया है। शहडोल के जयसिंहनगर विकासखंड स्थित उफरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ तथाकथित डॉक्टर महेश चंद शर्मा के रिश्वत लेते पकड़े जाने के बाद एक-एक कर चौंका देने वाले खुलासे हो रहे हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि तथाकथित फर्जी डॉक्टर एक ही समय में प्रदेश के तीन जिलों में नौकरी कर रहा था और वेतन ले रहा था। जानकारी के मुताबिक वो अब तक तीनों जिलों में मिलाकर 64 लाख रुपये के करीब वेतन ले चुका है। तीन जिलों में एक साथ नौकरीमध्यप्रदेश के शहडोल, खरगोन और श्योपुर तीनों जिलों में डॉक्टर महेश चंद शर्मा की अलग-अलग कर्मचारी आईडी, अलग-अलग पैन नंबर और अलग-अलग आधार संबंधी विवरण दर्ज थे, लेकिन एनएचएम और स्वास्थ्य विभाग की जांच प्रणाली इस फर्जीवाड़े को वर्षों तक पकड़ नहीं सकी। शुरुआती आंकलन के अनुसार आरोपी ने वेतन के रूप में सरकार को करीब 64 लाख रुपए की आर्थिक क्षति पहुंचाई है। तीन पहचान, नहीं पकड़ पाया सिस्टमजांच में सामने आया कि आरोपी ने प्रत्येक जिले में अलग-अलग दस्तावेजों के आधार पर नियुक्ति हासिल की। सबसे बड़ा सवाल यह है कि शहडोल में आधार का अधूरा नंबर जमा होने के बावजूद नियुक्ति कैसे मिल गई और दस्तावेजों का सत्यापन किस स्तर पर हुआ। घर बैठे लगती रही ऑनलाइन हाजिरीविभागीय सूत्रों के अनुसार आरोपी उफरी स्वास्थ्य केंद्र में शायद ही कभी दिखाई देता था। वह सार्थक ऐप के माध्यम से जिले और कई बार प्रदेश की सीमा से बाहर रहकर भी अपनी ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करा देता था। ब्लॉक और जिला स्तर के अधिकारियों के औचक निरीक्षण में भी वह कई बार अनुपस्थित मिला, जिसके कारण नोटिस भी जारी किए गए, लेकिन इसके बावजूद उसके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। लाखों रुपये वेतन लिया पड़ताल में सामने आया है कि आरोपी को तीनों जिलों से प्रतिमाह लगभग 50 से 55 हजार रुपए मानदेय मिलता था। अनुमानित भुगतान इस प्रकार है- इस प्रकार आरोपी ने तीनों जिलों से मिलाकर करीब 64 लाख रुपए का सरकारी भुगतान प्राप्त किया। स्वास्थ्य मंत्री बोले- एफआइआर भी होगी, वसूली भीमामले पर संज्ञान लेते हुए प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने शहडोल प्रवास के दौरान सख्त कार्रवाई के संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि आरोपी की सेवा समाप्त करने के साथ उसके द्वारा लिए गए पूरे वेतन की वसूली की जाएगी और उसके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई जाएगी। साथ ही उन अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय होगी, जिन्होंने दस्तावेजों का सत्यापन किए बिना नियुक्ति प्रक्रिया पूरी की, ऑनलाइन उपस्थिति पर निगरानी नहीं रखी और समय रहते अनियमितताओं की जानकारी उच्च अधिकारियों तक नहीं पहुंचाई। recent visitors 36

दतिया में जीत के लिए विजयपुर का फार्मूला अपनाएगी कांग्रेस, विधानसभा क्षेत्र को पांच क्लस्टर में बांटा

Congress to adopt the Vijaypur formula for victory in Datia; assembly constituency divided into five clusters. भोपाल। दतिया विधानसभा सीट के उपचुनाव में जीत के लिए कांग्रेस विजयपुर विधानसभा के उपचुनाव का फार्मूला अपनाएगी। श्योपुर जिले के विजयपुर विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव में कांग्रेस के मुकेश मल्होत्रा ने तत्कालीन वन मंत्री रामनिवास रावत को इसी फार्मूले से हराया था। दतिया विधानसभा क्षेत्र को पांच क्लस्टर में बांटा गया है। इनकी कमान पूर्व मंत्री लाखन सिंह, सचिन यादव, विधायक दिनेश गुर्जर, पूर्व विधायक सत्यपाल सिंह सिकरवार और प्रभु सिंह ठाकुर को दी है। प्रत्येक क्लस्टर को 8 से 10 सेक्टर में बांटकर नेताओं को तीन से छह बूथ की जिम्मेदारी दी गई है। इन्हें न तो सभा करनी है और न ही रैली निकालनी है। इनका काम निर्धारित बूथों पर मतदाता संपर्क अभियान चलाना है। इसमें बूथ कमेटियां सहयोगी की भूमिका में रहेंगी। ग्रामीण क्षेत्र पर फोकस recent visitors 29

MP के मंत्री लखन पटेल का वापस लिया गया प्रभार, क्या हैं इसके मायने; समझें

MP Minister Lakhan Patel stripped of his portfolio; understand the implications. मध्य प्रदेश के मंत्री लखन पटेल का प्रभार वापस ले लिया गया है। पशुपालन और डेयरी विकास विभाग अब मोहन यादव ने अपने पास रख लिया है। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा था कि केंद्रीय नेतृत्व समीक्षा करेगा, और बदलाव की भोपाल ! मध्य प्रदेश मंत्रिमंडल में अचानक बदलाव किया गया है। देर रात राज्य मंत्री लखन पटेल से पशुपालन और डेयरी विकास विभाग का प्रभार वापस ले लिया गया है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, मंगलवार देर रात लखन पटेल का प्रभार वापस लिया गया और उसके तुरंत बाद गज नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया। अब पशुपालन और डेयरी विकास विभाग मुख्यमंत्री ने अपने पास रख लिया है। अब संभावना जताई जा रही है कि जल्द ही मध्य प्रदेश कैबिनेट में बदलाव हो सकता है। क्या बोले लखन पटेल इस मामले की जानकारी सामने आने के बाद लखन पटेल का बयान सामने आया है। पटेल ने कहा कि किसी मंत्री को विभाग सौंपना या उससे विभाग वापस लेना मुख्यमंत्री का अधिकार है। इस तरह अब मध्य प्रदेश कैबिनेट में बदलाव की संभावना जताई जा रही है। इस मामले के ठीक पहले मध्य प्रदेश के बीजेपी अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने इंटरव्यू में कहा था कि सरकार और पार्टी ने हर मंत्री के राजनीतिक प्रभाव, उसके कामकाज के क्षेत्र और विभागीय प्रदर्शन की समीक्षा करने के बाद उसकी रिपोर्ट केंद्रीय नेतृत्व को सौंप दिया है। हालांकि, इस मामले को भाजपा प्रशासनिक फैसला बता सकती है, लेकिन विभाग वापस लेने के समय से साफ हो गया है कि यह मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा के बाद लिए गए फैसले का नतीजा है। मंत्रिमंडल में कब होगा बदलाव बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल से जब पूछा गया कि क्या एमपी कैबिनेट में बदलाव की संभावना है। इसका जवाब देते हुए खंडेलवाल ने किसी तरह के बदलाव से इनकार नहीं किया। उन्होंने कहा कि जब बदलाव जरूरी होंगे, सही समय पर किया जाएंगे। उन्होंने कहा कि फिलहाल बदलाव की कोई संभावना नहीं है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय नेतृत्व जब फैसला करेगा, तभी मंत्रिमंडल में बदलाव किए जाएंगे। इस मामले पर बात करते हुए प्रदेश अध्यक्ष खंडेलवाल ने कहा कि मंत्रियों की समीक्षा पूरी हो चुकी है। उन्होंने बताया कि रिपोर्ट दिल्ली भी पहुंच चुकी है। ऐसे में माना जा रहा है कि पटेल से विभाग वापस लेने वाले फैसले को कैबिनेट में बड़े फेरबदल के पहले बड़ा कदम माना जा रहा है। इस मामले पर जब खंडेलवाल से पूछा गया कि क्या कोई मंत्री उम्मदी के मुताबिक काम नहीं कर रहा है. तो उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन उन्होंने साफ किया कि पार्टी संगठन के पास मंत्रियों के कामकाज की पूरी जानकारी है उन्होंने कहा कि पार्टी को मंत्रियों के कामकाज ओर उनके व्यवहार के बारे में केंद्रीय नेतृत्व को जानकारी मिलती रहती है। recent visitors 34

भोजशाला परिसर में नमाज पर रोक जारी, राज्य सरकार को परिसर के पास नई जगह देने का निर्देश

Ban on Namaz within the Bhojshala complex remains in force; State government directed to provide an alternative site near the complex. सुप्रीम कोर्ट ने भोजशाला मामले पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ विभिन्न मुस्लिम पक्षों द्वारा दायर याचिकाओं पर मंगलवार को सुनवाई की। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ ने याचिकाओं पर फिलहाल कोई अंतरिम आदेश जारी करने से इनकार कर दिया और हाईकोर्ट के फैसले से पूर्व की स्थिति बहाल करने से इनकार कर दिया। जिसके चलते अभी भोजशाला परिसर में नमाज पर रोक जारी रहेगी। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई), हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस तथा अन्य हिंदू पक्षकारों को नोटिस जारी किया। अदालत ने क्या दिया निर्देश?पीठ ने हालांकि राज्य सरकार को निर्देश दिया कि मुस्लिम पक्ष को भोजशाला के पास ही अलग जगह दी जाए, जहां मुस्लिम शुक्रवार को दोपहर 1 बजे से 3 बजे के बीच नमाज अदा कर सकें। पीठ ने साफ किया कि अंतिम फैसले तक यह निर्देश अस्थायी है। मुस्लिम पक्ष के वकील हुजैफा अहमदी की याचिका को स्वीकार करते हुए पीठ ने निर्देश दिया कि एएसआई, बिना अदालत की मंजूरी के भोजशाला परिसर में ढांचागत बदलाव नहीं करेगा। मुस्लिम पक्ष ने दी ये दलीलेंअदालत ने यह भी कहा कि मामले को अंतिम सुनवाई के लिए शीघ्र सूचीबद्ध किया जाएगा। पीठ ने कहा कि वे इस मामले पर जुलाई के तीसरे हफ्ते में अंतिम सुनवाई कर सकते हैं। सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष के वकील हुजैफा अहमदी ने कहा कि हाईकोर्ट ने उन्हें सुप्रीम कोर्ट में अपील का मौका भी नहीं दिया। साल 2003 में एएसआई ने आदेश दिया था कि हफ्ते में एक दिन शुक्रवार को नमाज अदा की जाएगी और एक दिन मंगलवार को पूजा होगी। आज हमें पूरी तरह से बाहर कर दिया गया है? ये बहुत गलत है। मुस्लिम पक्ष के वकील ने कहा कि एएसआई की रिपोर्ट करने वाले लोगों से पूछताछ भी नहीं की गई। हुजैफा ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक की मांग की। वरिष्ठ वकील सिंघवी ने कहा कि कुछ जगहों पर मंदिर हो सकते हैं, लेकिन इतिहास में पीछे जाने की जरूरत नहीं है। सिंघवी ने कहा, यहां 700 वर्षों से यहां नमाज हो रही है। 1927 -28 के सर्वे में कहा गया कि ये एक मस्जिद है। एमपी वक्फ एक्ट का नोटिफिकेशन भी यही कहता है। साल 1977 से यहां नमाज के साथ बसंत पंचमी की पूजा भी हो रही है, लेकिन हिंदू पक्ष की रिट याचिका पर आदेश पारित कर दिया गया। सॉलिसिटर जनरल ने क्या कहा?इस पर सरकार का पक्ष रख रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भोजशाला परिसर में नमाज का विरोध किया और कहा कि आदेश को दिए हुए दो महीने बीत चुके हैं। काफी कुछ हो चुका है। अगर फिर से नमाज का निर्देश दिया जाता है तो इससे प्रशासनिक परेशानी हो सकती है। सीजेआई ने कहा- ये बेहद संवेदनशील मुद्दा, सोच-समझकर आगे बढ़ने की जरूरतसीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि ये बहुत संवेदनशील मुद्दा है। इसमें बहुत सोच समझ कर आगे बढ़ने और टिप्पणी करने की जरूरत है, वर्ना जनता में गलत संदेश जाएगा और गलत प्रभाव पड़ेगा। बेहतर होगा कि हम इसे अगले 10-20 दिनों के भीतर एक सुविधाजनक तारीख पर सुनवाई के लिए तय करते हैं। सीजेआई ने कहा कि हमें बहुत ज्यादा सावधान रहना चाहिए। ऐसा ऑर्डर पास नहीं करना चाहिए जिसका प्रभाव लॉ एंड ऑर्डर पर पड़े। एएसआई के इंतजाम करने के बावजूद, वहां पर दिक्कतें रही हैं। यह एक ऐसा मामला है जहां दोनों पक्षों को धैर्य रखना चाहिए। इसमें दो से तीन सप्ताह लग सकते हैं। सभी को तैयार रहना चाहिए। बता दें कि मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने 15 मई 2026 को धार के ऐतिहासिक भोजशाला परिसर को मां वाग्देवी (सरस्वती) का प्राचीन मंदिर घोषित करते हुए हिंदू पक्ष में फैसला सुनाया था। recent visitors 32

भाजपा विधायक प्रीतम लोधी का बेटा विशेष अदालत से फरार घोषित, कोर्ट ने जारी किया स्थायी गिरफ्तारी वारंट

BJP MLA Pritam Lodhi’s son declared absconder by special court; court issues permanent arrest warrant. ग्वालियर। ग्वालियर की विशेष एससी-एसटी अदालत ने भाजपा विधायक प्रीतम सिंह लोधी के बेटे दिनेश लोधी को फरार घोषित करते हुए उसके खिलाफ स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी करने का आदेश दिया है। अदालत ने निर्देश दिए हैं कि प्रकरण के रिकॉर्ड के मुख्य पृष्ठ पर लाल स्याही से “अभियुक्त फरार है” अंकित किया जाए और प्रकरण को नियमानुसार सुरक्षित रखा जाए। दिनेश लोधी (40), निवासी ग्राम जलालपुर, के विरुद्ध पुरानी छावनी थाने में एससी-एसटी एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज है। न्यायालय के रिकॉर्ड के मुताबिक उसके खिलाफ 28 दिसंबर 2023 को गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया था, लेकिन उसके बाद भी वह पुलिस की पकड़ में नहीं आया। गुरुवार को सुनवाई के दौरान पुरानी छावनी थाने के प्रधान आरक्षक संजय द्विवेदी ने अदालत में वारंट की अदम तामील रिपोर्ट और तस्दीक पंचनामा पेश किया। रिकॉर्ड का परीक्षण करने के बाद विशेष न्यायाधीश नवीन कुमार शर्मा ने अभियुक्त को फरार घोषित करते हुए उसके खिलाफ स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी करने के आदेश पारित किए। recent visitors 37