भोपाल के फूड विभाग ने खबर के तत्काल बाद न्यू हकीम होटल को भेजा नोटिस

Bhopal’s food department sent notice to New Hakeem Hotel immediately after the news. भोपाल। राजधानी भोपाल के बोर्ड ऑफिस के सामने न्यू हकीम होटल के किचन में पसरी गंदगी, बहते सीवेज और किचन को 15 दिनों में व्यवस्थित करना पड़ेगा, नहीं तो लाइसेंस निरस्त होगा। अब होटल संचालक की मनमानी नहीं चलेगी। बता दें, हाल ही 19 नवंबर 2024 को “माय सीक्रेट न्यूज़. कॉम” वेबसाइट” ने न्यू हकीम होटल की किचन में गंदगी और खुले में बहते सीवेज के बीच बन रहे नॉनवेज खाना की खबर को फोटो वीडियोज के साथ प्रसारित किया था। जिस पर फूड विभाग ने तत्काल संज्ञान लिया है। खबर प्रसारित होने के अगले दिन 20 नवंबर 2024 को फूड विभाग ने होटल संचालक को 15 दिन में सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के निर्देश दिए हैं। “My secret news. Com” वेबसाइट जनहितैषी और खोजपरक खबरों को खोज कर उसे प्राथमिकता से प्रसारित करता है। red https://mysecretnews.com/bhopals-new-hakeem-hotel लोगों का कहना है कि होटल संचालकों द्वारा लोगों की सेहत के साथ खेलने का काम उस शहर में चल रहा है, जहाँ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से लेकर उनके तमाम जिम्मेदार अधिकारी बैठे हों। न्यू हकीम होटल संचालक की लापरवाही के चलते हजारों लोगों की सेहत बहुत पर बुरा असर पड़ा होगा। लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने का सिलसिला वर्षों से चल रहा था। यह दशा किसी एक होटल की नहीं, बल्कि राजधानी के अमूमन सभी छोटे-बड़े होटलों की है। एक अनुमान के मुताबिक राजधानी में करीब 8 लाख की आबादी होटलों और रेस्टोरेंट के चाय, नाश्ता और खाना पर निर्भर है। इसमें वेज और नॉनवेज दोनों स्तर के लोग शामिल हैं। इतनी बड़ी आबादी के स्वास्थ्य को अँधेरे में रख उन्हें भोजन परोसा जा रहा है। यही कारण है कि राजधानी की सभी अस्पतालों में मरीजों की कतार दिन पर दिन बढ़ती जा रही है। इतनी गंभीर लापरवाही की ओर फूड विभाग के अधिकारियों को और अधिक सख़्ती दिखाना होगी, तभी विभाग की छवि स्वच्छ नजर आएगी। recent visitors 314

भाड़े के शिक्षक मामले में सियासत तेज, उमंग सिंघार बोले- ‘स्कूलों में भी डबल इंजन की…’

Politics intensifies in the case of hired teachers, Umang Singhar said – ‘Double engine is used in schools also…’ सागर ! मझेरा गांव भाड़े के शिक्षक रखने के मामले में सुर्खियों में आ गया है. दरअसल, मझेरा गांव में स्थित शासकीय प्राथमिक स्कूल के शिक्षक ने अपने स्थान पर पढ़ाने के लिए किराए पर शिक्षिका रख ली. मामला उजागर होने के बाद से मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस, सरकार पर जमकर हमलावर है. नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने एक्स ट्वीट कर लिखा कि- मोहन बाबू क्या ये भी डबल इंजन वाली व्यवस्था है? सोशल मीडिया के एक्स पर कांग्रेस के अधिकृत अकाउंट से ट्वीट किया गया कि- मास्टर जी ने केंद्रीय मंत्री की सेवा चाकरी और जी हजूरी कर ली, फिर बच्चों का भविष्य बर्बाद हो तो भी परवाह किसे? मध्यप्रदेश में शिक्षा का स्तर लगातार गिरता जा रहा है. सत्ता के संरक्षण में शिक्षक पढ़ाने नहीं जाते. मोटी तनख्वाह वसूल रहे शिक्षक एवजी पर 3 हजार के मजदूर शिक्षक भेज देते हैं. मगर भारतीय जनता पार्टी सरकार को बच्चियों के भविष्य और शिक्षा की गुणवत्ता की कोई चिंता नहीं है. ‘स्कूलों में भी डबल इंजन की सरकार’ नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने एक्स पर ट्वीट कर लिखा कि लगता है प्रदेश के स्कूलों में भी डबल इंजन की सरकार चल रही. सागर जिले के ग्रामीण इलाके मझेरा के स्कूल का असल शिक्षक इंद्र विक्रम, मंत्री वीरेन्द्र खटीक का मुंह लगा है. इस शिक्षक ने अपनी जगह स्कूल में एवजी शिक्षक ममता को तीन हजार रुपए महीने पर नौकरी पर रख लिया, वो इनकी जगह क्लास लेती है और ये मंत्री के हाथों खीर खाते हैं. नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघा ने लिखा कि मोहन बाबू क्या ये भी डबल इंजन वाली व्यवस्था है? सिर्फ यही नहीं प्रदेश के कई सरकारी स्कूलों में ऐसे एवजी शिक्षक पढ़ा रहे हैं. राजनीतिक संरक्षण वाले शिक्षकों ने एवजियों को पढ़ाने का काम सौंप दिया और खुद राजनीति करते हैं. अब देखना है कि सागर जिले के शिक्षक इंद्र विक्रम पर सरकार क्या कार्रवाई करती है. शिक्षक का 40 हजार रुपए वेतन मझेरा गांव के शासकीय प्राथमिक स्कूल में पढ़ाने वाले शिक्षक इंद्र विक्रम सिंह परमार उर्फ वट्टू राजा का 40 हजार रुपए वेतन है, जबकि उन्होंने 3000 रुपए महीने में ममता नामक महिला को पढ़ाने के लिए रख रखा है, वह एक साल से इस स्कूल में पढ़ा रही हैं. इधर इस मामले में प्रधानाध्यापक धर्मेन्द्र सिंह का कहना है कि कई बार मना किया, फिर भी ममता स्कूल आ रही हैं. उपस्थिति रजिस्टर में लाइन खींच दी, फिर भी इंद्र महीने में एक बार आकर हस्ताक्षर कर रहे हैं. वहीं शिक्षक इंद्र का कहना है कि सुबह-शाम केंद्रीय मंत्री के साथ समय व्यतीत करता हूं. दिन में स्कूल जाता हूं. कभी-कभी नहीं जा पाता, वह अलग बात है. बता दें यह केवल एक स्कूल का हाल नहीं है, बल्कि सागर जिले के ही बिलहरा के बंजरिया, भलैयां, रेहटी, कजरई के अलावा नर्मदापुरम के खोकसर के स्कूलों में भी यही हाल है. यहां 40 से 80 हजार रुपए मासिक वेतन पाने वाले शिक्षकों ने किराए के शिक्षक रख रखे हैं. recent visitors 135

RGPV में घोटाला: स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के नाम पर बड़ा घपला, छात्रों ने उच्च शिक्षा मंत्री को सौंपा ज्ञापन

Scam in RGPV: Big scam in the name of sports complex, ABVP students submitted memorandum to Higher Education Minister भोपाल। राजधानी भोपाल का राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (RGPV) एक बार फिर सुर्ख़ियों में आ गया है। अब यहां स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के नाम पर बड़ा घोटाला किया गया है। जिसकी शिकायत अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार को ज्ञापन सौंपकर की है। साथ ही इस मामले की जांच कर कार्रवाई की मांग की है। ABVP के छात्रों ने आरोप लगाते हुए कहा कि RGPV यूनिवर्सिटी में स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के नाम पर करोड़ों का भ्रष्टाचार हुआ है। उन्होंने कहा कि 2015 में विश्वविद्यालय द्वारा आउटडोर-इनडोर स्पोर्ट्स कांप्लेक्स के निर्माण के लिए 16 करोड़ 50 लाख की राशि स्वीकृत की गई थी। साल 2019 में इस राशि को बढ़ाकर 19 करोड़ 16 लाख रुपए कर दिया गया। इसके निर्माण की जिम्मेदारी सीपीए को दी गई थी। वह निर्माण कार्य आज भी चल रहा है। ABVP के छात्रों का कहना है कि कोटेशन में दिखाए गए 10 एग्जॉस्ट फैन के स्थान पर एक भी एग्जॉस्ट फैन नहीं लगाया गया। वुडन फ्लोरिंग मे भी खराब प्लास्टिक का उपयोग किया गया है। उच्च शिक्षा मंत्री को ज्ञापन सौंपकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने पूरे मामले की जांच करने की मांग की है। recent visitors 131

‘पीले-पीले ओ मोरे राजा…’, शराब के लिए भिड़ गए दोस्त, बीच सड़क चले लात-घूंसे

‘Pile-Pile O More Raja…’, friends fought over liquor, kicked and punched in the middle of the road, ग्वालियर। आपने एक गाना ‘पीले-पीले ओ मोरे राजा, पीले-पीले ओर मोरे जानी, यार की यारी है निभानी…”, जरूर सुना होगा। इस गाने में जाम छलकाते हुए दो दोस्त झूमते रहते हैं। लेकिन मध्य प्रदेश के ग्वालियर में शराब का एक पैग, यारों के बीच मारपीट की वजह बन गया। हालात यह हो गए कि बीच सड़क पर लात-घूंसे चलने लगे। मामला फूल बाग स्थित शराब दुकान के बाहर का है। जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। दोस्त का पैग पीने पर चले लात-घूंसेदरअसल, इन दिनों शादियों का सीजन चल रहा है। ऐसे में दावत उड़ाने से पहले जमकर शराब के जाम भी छलकाए जा रहे हैं। ऐसी ही एक शादी में शामिल होने से पहले आधा दर्जन से अधिक दोस्तों ने शराब खरीदी और फिर दुकान के पास ही खड़े होकर जाम छलकाए। इस दौरान उनमें से एक ने ‘पीले-पीले ओ मोरे राजा…’ फिल्मी गाना लगाकर जमकर शराब पी। तभी एक दोस्त ने नशे में धुत हो चुके दूसरे दोस्त के ग्लास में भरा हुआ पैग पी लिया। यह देखकर उसका शराबी दोस्त आग-बबूला हो गया और साथी से मारपीट शुरू कर दी। देखते ही देखते विवाद दो गुटों में तब्दील हो गया और एक-दूसरे पर लात-घूंसे बरसाने लगे। खुलेआम शराबखोरी की तस्वीर हुई उजागर वायरल वीडियो को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि शराब के नशे में युवक इतने धुत हो चुके थे कि ठीक से चल भी नहीं पा रहे थे। बहरहाल, इस घटना के बाद एक बार फिर शराब दुकानों के पास खुलेआम शराबखोरी की काली तस्वीर उजागर हुई है। recent visitors 317

हाथियों के बाद इंसानों को मुसीबत बढ़ा रहा है कोदो कुटकी खाने से लोग बीमार

After elephants, people are facing problems, people are falling ill after eating Kodo Kutki. सतना। मध्य प्रदेश में एक ओर जहां कोदो खाने से 10 हाथियों की मौत हो गई, वहीं अब कोदो की रोटी खाने से एक परिवार की जान पर बन आई है। मामला सतना से सामने आया है। जहां पति-पत्नी और बेटी को गंभीर हालत में जिला अस्पताल में भर्ती किया गया है। दरअसल, सतना जिले के रैगांव चौकी क्षेत्र अंतर्गत डिलौरी गांव में पति दयाराम कुशवाहा, पत्नी शंखी कुशवाहा और 18 वर्षीय बेटी सरोज कुशवाहा की तबियत कोदो की रोटी खाने के बाद अचानक बिगड़ गई। तीनों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जहां उनका इलाज किया जा रहा है। दयाराम के भतीजे ने बताया कि, आज तीनों ने घर में कोदो की रोटी खाई है। तब ही से इन्हें उल्टियां हो रही और अब बेहोशी की हालत में सतना जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बतादें कि, अभी हाल ही में बांधवगढ़ में 10 हाथियों की मौत के पीछे भी हाथियों द्वारा कोदो की फसल खाने की बात बताई गई थी। वहीं अब इस घटना पर कोदो अनाज को लेकर तरह-तरह की चर्चाओं का बाजार गर्म है। मामला जांच का विषय बन गया है। देखना होगा कि अब जिला प्रशान इस मामले को लेकर कितना संजीदा नजर आता है। हालाकि इस घटना को लेकर अबतक जिला प्रशान ने कोई सुध नहीं ली है। इतना ही नहीं गंभीर बीमार मरीज जैसे तैसे ऑटो से सतना जिला अस्पताल पहुंचे तो, न तो उन्हें स्ट्रेचर नसीब हुआ और न ही बेड। एक बेड पर मां बेटी तो जमीन में अर्ध नग्न हालत में पिता तड़पता नजर आया। हालांकि कुछ देर बाद दयाराम को बिस्तर नसीब हुआ। इस घटना ने गंभीर मरीजों को मिलने वाली बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के सरकारी सिस्टम की भी पोल खोल कर रख दी है। recent visitors 156

शादी कैंसिल होने पर मैरिज गार्डन संचालक लौटाएंगे पूरी राशि : ‘आगे एडजस्ट कर लेंगे’ कह कर पैसे नहीं रख सकते; कंज्यूमर आयोग का फैसला

Marriage garden operators will return the entire amount if the wedding is cancelled: They cannot keep the money saying ‘we will adjust it later’; Consumer Commission’s decision भोपाल। अगर आप शादी हॉल या मैरिज गार्डन बुक करते हैं और किसी कारणवश कार्यक्रम कैंसिल हो जाए, तो मैरिज गार्डन या शादी हॉल संचालक को बुकिंग कैंसिल होने के तुरंत बाद रकम लौटानी होगी। संचालक एडवांस राशि वापस करने से यह कहकर इनकार नहीं कर सकते कि ‘आगे एडजस्ट कर लेंगे’ या ‘जब कार्यक्रम होगा, तब एडजस्ट कर लेंगे’। दरअसल, भोपाल कंज्यूमर आयोग की बेंच-1 ने ऐसा ही एक फैसला सुनाया हैं। आयोग ने कहा कि विपक्षी द्वारा बुकिंग राशि वापस न करना सेवा में कमी के तहत आता है। यह फैसला अध्यक्ष योगेश दत्त शुक्ल ने सुनाया। कोलार के वैभव मैरिज गार्डन के खिलाफ सुनाया फैसला शिवाजी नगर निवासी राजरूप पटेल ने अपनी बेटी की शादी के लिए नवंबर 2022 में कार्यक्रम रखा था। इसके लिए उन्होंने जून 2022 में 21 हजार रुपये में कोलार स्थित वैभव मैरिज गार्डन बुक किया। बाद में विवाह कैंसिल हो गया, और उन्होंने जुलाई 2022 में बुकिंग निरस्त कर दी। उन्होंने बार-बार गार्डन प्रबंधन से जमा राशि वापस करने की गुजारिश की। गार्डन प्रबंधन ने कहा कि भविष्य में होने वाले विवाह के समय राशि एडजस्ट कर दी जाएगी। इसके बावजूद लगभग दो वर्ष बीत गए, और विवाह गार्डन में आयोजित नहीं हुआ। इसके बाद भी गार्डन प्रबंधन ने राशि वापस करने से इनकार कर दिया। दूसरी तरफ नोटिस जारी होने के बाद भी गार्डन प्रबंधन की ओर से कोई भी आयोग में उपस्थित नहीं हुआ। आयोग ने उपभोक्ता के पक्ष में फैसला सुनाया उपभोक्ता ने 21 हजार रुपये एडवांस के तौर पर दिए थे। मामले में विपक्षी ने बुकिंग राशि वापस करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया। नोटिस के बावजूद विपक्षी ने न तो आयोग में उपस्थिति दर्ज कराई और न ही कोई दस्तावेज प्रस्तुत किए। आयोग ने कहा कि बुकिंग राशि वापस न करना सेवा में कमी का प्रमाण है। अब देना होगी ब्याज सहित राशि आयोग ने आदेश दिया कि विपक्षी, आदेश की प्रति प्राप्ति दिनांक से 2 माह के भीतर परिवादी को 21,000 रुपये की राशि 9% वार्षिक ब्याज सहित अदा करे। साथ ही, मानसिक कष्ट के लिए 5,000 रुपये और परिवाद व्यय के लिए 3,000 रुपये भी अदा किए जाएं। यदि राशि तय समय पर अदा नहीं की जाती, तो परिवाद प्रस्तुति दिनांक से अदायगी दिनांक तक 9% वार्षिक ब्याज देय होगा। recent visitors 183

विश्वविद्यालयों का भगवाकरण : नियम दरकिनार कर सरकार ने भाजपा और संघ के लोगों को बनाया कुलपति

Saffronization of universities: Ignoring the rules, the government made people from BJP and Sangh as vice chancellors. भोपाल। भारतीय राष्ट्रीय संगठन छात्र (एनएसयूआई) के प्रदेश अध्यक्ष आशुतोष चौकसे ने मध्यप्रदेश के शासकीय विश्वविद्यालयों में कुलगुरुओं की नियुक्तियों में गंभीर अनियमितता और धांधली करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि नियमों का उल्लंघन कर भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लोगों को उपकृत करने के लिए तमाम सरकारी और गैर सरकारी विश्वविद्यालयों में कुलपित के तौर पर नियुक्त किया जा रहा है। सरकार के शिक्षा का भगवाकरण करने का सीधा असर उच्च शिक्षा की गुणवत्ता पर पड़ा है। शिक्षा व्यवस्था में राजनीतिकरण से योग्यता बोनी भोपाल में संवाददाताओं से चर्चा करते हुए चौकसे ने कहा कि हाल में मध्यप्रदेश निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग ने राज्य के 53 निजी विश्वविद्यालयों में से 32 विश्वविद्यालयों के कुलगुरुओं की नियुक्तियों को अवैध ठहराते हुए निरस्त कर दिया है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के मानकों के विपरीत इन नियुक्तियों के कारण यह निर्णय लिया गया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि उच्च शिक्षा में मानकों और योग्यताओं की अवहेलना की जा रही है। मध्यप्रदेश के नए शासकीय विश्वविद्यालय रानी अवंतीबाई लोधी विश्वविद्यालय सागर के पद पर भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष विनोद मिश्रा को नियुक्त किया गया है। शिक्षा व्यवस्था का राजनीतिकरण करने और इस तरह की नियुक्तियों के कारण राष्ट्रीय संस्थागत रैकिंग फ्रेमवर्क (एनआईआरएफ) में मध्यप्रदेश का केवल एक शासकीय विश्वविद्यालय स्थान पा सका है। बाकी सभी शासकीय विश्वविद्यालयों की रैंकिंग अत्यंत निम्न स्तर की है। इससे शिक्षा की गुणवत्ता पर सवाल खड़ा होता है। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर के कुलपति प्रो. राजेश कुमार वर्मा की नियुक्ति में गंभीर अनियमितताएं पाई गई हैं। कुलपति बनने पीएचडी होने के 10 साल का अनुभव जरुरी प्रो. राजेश कुमार वर्मा ने पीएचडी की उपाधि 25 नवंबर 2008 को प्राप्त की थी, जबकि 19 जनवरी 2009 को मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग ने प्राध्यापक पद के लिए विज्ञापन जारी किया। इस पद के लिए न्यूनतम योग्यता में पीएचडी उपाधि के बाद 10 सालों का अध्यापन अनुभव अनिवार्य था, जो वर्मा के पास नहीं था। उनकी नियुक्ति भी सीधे प्राध्यापक के पद पर की गई है। चौकसे ने कहा कि मध्यप्रदेश के समस्त शासकीय विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की नियुक्तियों की जांच की जाए। नियमों के उल्लंघन में दोषी पाए जाने पर प्रो. वर्मा सहित अन्य को पद से हटाया जाए और शिक्षा में सुधार के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं। recent visitors 166