यात्रियों को तत्काल टिकट बुकिंग में परेशानियों का सामना करना पड़ा, जब IRCTC की सेवाएं ठप हुई, ऐसा हुआ तीसरी बार

नई दिल्ली नए साल पर घर जाने के लिए तत्काल टिकट बुक कर रहे लाखों यात्रियों को तब निराशा हाथ लगी, जब इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन (IRCTC) की सेवाएं ठप हो गईं। इस महीने यह तीसरी बार हुआ है, जब IRCTC की सेवाएं ठप हो गईं और यात्रियों को तत्काल टिकट बुकिंग में परेशानियों का सामना करना पड़ा। पेमेंट्स से लेकर ट्रेन्स के चुनाव तक में यूजर्स को ऐप और वेबसाइट दोनों पर कई दिक्कतें आईं। दिसंबर महीने में ही इससे पहले दो बार IRCTC की सेवाएं ठप हो चुकी हैं। इस बार भी यूजर्स को लंबे वक्त तक डाउनटाइम मेसेद दिखता रहा। कई यूजर्स ने इसे लेकर नाराजगी जताई और सोशल मीडिया पर रेल मंत्री को टैग करते हुए इसकी शिकायत की। इससे पहले 9 दिसंबर को भी ठीक ऐसा ही मेसेज करीब एक घंटे तक वेबसाइट पर दिख रहा था और दूसरा मामला बीते 26 दिसंबर को सामने आया था, जब यात्रियों को परेशान होना पड़ा था। IRCTC की ओर से नहीं आई कोई प्रतिक्रिया प्लेटफॉर्म पर दिख रहे डाउनटाइम मेसेज में लिखा है कि 'सभी साइट के लिए बुकिंग और कैंसिलेशन सेवा अगले एक घंटे के लिए उपलब्ध नहीं है। आप कैंसिलेशन या TRD फाइल करने के लिए 139 पर कस्टम केयर को कॉल कर सकते हैं।' यूजर्स को यह मेसेज दिखता रहा और वे सेवाएं ऐक्सेस नहीं कर सके। इसके अलावा कई यूजर्स को मेंटिनेंस मेसेज दिखाया गया कि साइट पर काम चल रहा है, इसलिए सेवाएं कुछ देर के लिए बंद हैं। फिलहाल इसपर IRCTC की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है और सेवाएं डाउन होने की कोई वजह सामने नहीं आई है। इन वजहों से डाउन हो सकती हैं सेवाएं वैसे तो वेबसाइट के सर्वर में खराबी, सॉफ्टवेयर में गड़बड़ी या नेटवर्क कनेक्शन में दिक्कत होने से वेबसाइट डाउन होती है, लेकिन कई बार त्योहारों या छुट्टियों के मौसम में जब ट्रेन टिकट बुक करने वालों की संख्या बहुत ज्यादा होती है, तब भी वेबसाइट ज्यादा लोड के चलते डाउन हो सकती है। बाकी वेबसाइट को अपडेट करने या सुधार करने के लिए समय-समय पर मेंटेनेंस किया जाता है, जिसके दौरान वेबसाइट कुछ समय के लिए डाउन रह सकती है। कई यूजर्स को डर है कि बार-बार सेवाएं प्रभावित और डाउन होने के लिए कोई साइबर अटैक तो जिम्मेदार नहीं है। फिलहाल आप कुछ वक्त इंतजार कर सकते हैं या फिर IRCTC हेल्पलाइन पर कॉल कर सकते हैं। recent visitors 82

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सीएम मोहन पर कसा तंज: ‘कर्ज़ में डूबा प्रदेश, बढ़ रही मुख्यमंत्री की संपत्ति

मध्यप्रदेश में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि प्रदेश कर्ज़ के बोझ तले दबता जा रहा है, जबकि मुख्यमंत्री की संपत्ति दिन-ब-दिन बढ़ रही है। नेता प्रतिपक्ष ने बताया कि मध्यप्रदेश पर प्रति व्यक्ति क़र्ज़ ₹52,000 है, और कुल मिलाकर प्रदेश पर लगभग ₹4 लाख करोड़ का कर्ज़ है। उन्होंने इसे प्रदेश की बदहाल आर्थिक स्थिति का परिचायक बताया। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव देश के पांचवें सबसे अमीर मुख्यमंत्री हैं। विधानसभा चुनाव 2023 के दौरान, उनकी कुल चल संपत्ति ₹5.66 करोड़ थी, जबकि उनकी पत्नी सीमा यादव के पास ₹3.23 करोड़ की संपत्ति थी। इसके अतिरिक्त, उनकी अचल संपत्ति का मूल्य ₹13.36 करोड़ और उनकी पत्नी की ₹18.75 करोड़ था। रिपोर्ट के अनुसार, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ₹931 करोड़ की संपत्ति के साथ देश के सबसे अमीर मुख्यमंत्री हैं। वहीं, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के पास सबसे कम ₹15 लाख की संपत्ति है। देश के 31 मुख्यमंत्रियों की कुल संपत्ति ₹1630 करोड़ है। उमंग सिंघार ने कहा, “प्रदेश गर्त में जा रहा है और विकास हो रहा है तो केवल मुख्यमंत्री की तिजोरी का।” उन्होंने इसे प्रदेश की जनता के साथ अन्याय और आर्थिक प्रबंधन में विफलता बताया। भारत की 2023-24 की प्रति व्यक्ति राष्ट्रीय आय ₹85,854 थी, जबकि मुख्यमंत्रियों की औसत आय ₹13,64,310 है, जो औसत आय का लगभग 7.3 गुना है। विपक्ष का आरोप है कि प्रदेश में कर्ज़ बढ़ाने की नीतियां जनता के हित में नहीं हैं और इसका लाभ केवल कुछ चुनिंदा लोगों को मिल रहा है। उमंग सिंगार ने मुख्यमंत्री से उनकी संपत्ति में हुई वृद्धि का स्पष्टीकरण मांगा है। नेता प्रतिपक्ष के इन आरोपों ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि मुख्यमंत्री या सरकार इन सवालों का क्या जवाब देती है और क्या जनता इन मुद्दों को आगामी चुनावों में गंभीरता से लेगी। recent visitors 387

बांग्लादेश में कट्टरपंथी दौर में राष्ट्रपति और सेना प्रमुख के पद होंगे खत्म, संविधान की हो सकती है विदाई

ढाका पूरी दुनिया में नए साल 2025 के स्वागत की तैयारियां हो रही हैं, लेकिन भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश में अलग ही माहौल है। खबरों के मुताबिक आज यानी 31 दिसंबर को बांग्लादेश में उस संविधान को ही खत्म करने का ऐलान हो सकता है, जो 1972 में शेख मुजीबर रहमान के दौर में बना था। इसके अलावा राष्ट्रपति और सेना प्रमुख जैसे पदों का भी खात्मा हो सकता है। वहीं जुलाई में शेख हसीना के खिलाफ हुए आंदोलन को क्रांति का दर्जा दिया जा सकता है। यह ईरानी क्रांति जैसा होगा, जिसके बाद शेख हसीना ने पद से इस्तीफा दे दिया था और वह भारत आ गई थीं। खबर है कि शेख हसीना सरकार के खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व करने वाले छात्र संगठन की ओर से नए रिपब्लिक का ऐलान किया जा सकता है। स्टूडेंट्स अगेंस्ट डिस्क्रिमिनेशन की ओर से नए रिपब्लिक की घोषणा किए जाने की तैयारी है। अब तक यह जानकारी नहीं मिली है कि बांग्लादेश को इस्लामिक देश घोषित किया जाएगा या फिर सेकुलर गणराज्य बनाया जाएगा। फिलहाल अस्थिरता का आलम है और राष्ट्रपति एवं आर्मी चीफ जैसे पदों को समाप्त करने से यह और बढ़ सकती है। इससे भारत जैसे पड़ोसी मुल्कों के लिए भी चिंता बढ़ जाएगी। भारत के लिए एक चुनौती तो यही है कि यदि बांग्लादेश में किसी से बात की जाए तो वह कौन होगा। वहां फिलहाल कोई चुनी हुई सरकार नहीं है और अंतरिम सरकार के मुखिया नोबेल विजेता अर्थशास्त्री मोहम्मद यूनुस हैं। उन्होंने अपने कार्य़काल के दौरान कट्टरपंथियों का खूब साथ दिया है, जिसे लेकर भारत समेत कई मुल्क चिंतित हैं। अमेरिका तक ने इसे लेकर चिंता जाहिर की है। छात्र नेता हसनत अब्दुल्ला ने बांग्लादेश के मौजूदा संविधान को लेकर कहा कि वह तो मुजीबवादी कानून है। उसे हम समाप्त करेंगे और दफन करेंगे। यही नहीं अब्दुल्ला ने भारत के खिलाफ भी अपनी नफरत को उजागर कर दिया। हसनत ने कहा कि 1972 के उस संविधान के चलते भारत को बांग्लादेश में दखल देने का मौका मिला। अब्दुल्ला ने कहा कि हम 31 दिसंबर की दोपहर को ढाका के सेंट्रल शहीद मीनार में ऐलान करेंगे और बताएंगे कि भविष्य का बांग्लादेश कैसा होगा। माना जा रहा है कि बांग्लादेश में इस तरह कट्टरपंथी विचारधारा के विस्तार लेने के पीछे पाकिस्तान है। यही नहीं छात्र आंदोलन के नाम पर तख्तापलट करने वाले नेता लगातार पाकिस्तान के दूतावास के संपर्क में हैं। यही नहीं हाल ही में इस्लामिक देशों के संगठन डी-8 की मीटिंग में मोहम्मद यूनुस और शहबाज शरीफ की मुलाकात हुई थी। इस मीटिंग में दोनों के बीच संबंधों को लेकर बात हुई। इसके अलावा बांग्लादेश ने पाकिस्तान से कारोबार में भी इजाफा किया है। अब बांग्लादेश के चटगांव बंदरगाह तक पाकिस्तान का माल सीधे पहुंच रहा है और उनकी फिजिकल चेकिंग के नियम को भी खत्म कर दिया गया है। recent visitors 115

आख‍िरकार अलग हो गए अरबपत‍ि एक्टर ब्रैड पिट- एंजेलिना जोली

लंदन हॉलीवुड स्टार्स एंजेलिना जोली और ब्रैड पिट का आधिकारिक तौर पर तलाक हो गया है। उनके बीच 8 साल तक कानूनी लड़ाई चली। पावर कपल ने सोमवार, 30 दिसंबर को अपने तलाक के कागजात को अंतिम रूप दे दिया। Angelina Jolie के वकील जेम्स साइमन ने बताया कि 'ओरिजिनल सिन' की एक्ट्रेस इस मुकाम पर पहुंचकर राहत महसूस कर रही हैं। जेम्स साइमन ने कहा, 'सच कहूं तो एंजेलिना थक चुकी हैं।' एंजेलिना ने दी थी तलाक की अर्जी वो कहते हैं, '8 साल से भी ज्यादा समय पहले, एंजेलिना ने मिस्टर ब्रैड पिट से तलाक के लिए अर्जी दी थी। उन्होंने और बच्चों ने ब्रैड पिट के साथ शेयर की गई सारी संपत्ति छोड़ दी और तब से वह अपने परिवार के साथ शांति की खोज कर रही हैं और हील कर रही हैं।' एक विवाद अभी भी बाकी तलाक के समझौते को अंतिम रूप दे दिया गया है, लेकिन पूर्व पावर कपल फ्रांस में शैटो मिरावल वाइनयार्ड को लेकर कानूनी विवाद में उलझा हुआ है। ब्रैड ने एंजेलिना पर आरोप लगाया है कि उन्होंने वाइनरी में अपनी हिस्सेदारी बिना उनकी सहमति के स्टोली ग्रुप को बेच दी है। डेली मेल ने बताया कि दोनों ने मामले को मध्यस्थता के माध्यम से सुलझाने या मामले को जूरी ट्रायल में ले जाने की इच्छा व्यक्त की है। किसी के पास है पावर और विशेषाधिकार! एक सूत्र ने बताया कि एंजेलिना जोली 'अंधकारमय समय के बाद रोशनी में आने की पूरी कोशिश कर रही हैं। वह सार्वजनिक रूप से या निजी तौर पर उनके बारे में बुरा नहीं बोलती। बच्चे यह देखकर बड़े हुए हैं कि कुछ लोगों के पास इतनी पावर और विशेषाधिकार हैं कि उनकी आवाज का कोई महत्व नहीं है। उनका दर्द कोई मायने नहीं रखता।' ब्रैड पिट ने किया था बुरा बर्ताव एंजेलिना ने साल 2016 में तलाक की अर्जी दी थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि यूरोप से लौटते समय प्राइवेट जेट फ्लाइट में ब्रैड पिट ने उनके और बच्चों के साथ दुर्व्यवहार किया। साल 2019 में जज ने एंजेलिना को तलाकशुदा और सिंगल घोषित कर दिया था, लेकिन संपत्तियों और बच्चों की कस्टडी का मामला अभी भी लंबित था।   recent visitors 90

कोर्ट ने कहा- जीजा और साली का रिश्ता अनैतिक है, अगर महिला वयस्क है तो इस रिश्ते को बलात्कार नहीं माना जा सकता

इलाहाबाद पत्नी की बहन यानी साली के साथ बलात्कार के एक मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आरोपी पति को राहत दी है। अदालत का कहना है कि भले ही जीजा और साली के बीच रिश्ता अनैतिक है, लेकिन अगर महिला वयस्क है तो इस रिश्ते को बलात्कार नहीं माना जा सकता है। आरोपी को जुलाई 2024 में गिरफ्तार किया गया था और अब अदालत ने जमानत दे दी है। जस्टिस समीर जैन की बेंच मामले की सुनवाई कर रही थी। लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, आवेदक के वकील ने अदालत को बताया कि इस मामले में मुवक्किल के खिलाफ झूठे आरोप लगाए गए हैं। उन्होंने बेंच को जानकारी दी है कि जीजा और साली के बीच अवैध संबंध बने थे और जब इसकी जानकारी सूचनादाता को लगी, तब उन्होंने FIR दर्ज कराई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, कोर्ट को बताया गया था कि कथित पीड़िता बालिग है और उसने CrPC की धारा 161 के तहत दिए बयान में आरोपों से इनकार किया था। बाद में CrPC की धारा 164 के तहत बयान बदला था और अभियोजन पक्ष के मामले का समर्थन किया था। इधर, जमानत का विरोध कर रहे AGA इस तथ्य से इनकार नहीं कर सके कि कथित पीड़िता बालिग है और रिकॉर्ड से यह पता नहीं चलता है कि उसने सहमति नहीं दी थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने आरोपी के खिलाफ लगे आरोप, दोनों पक्षों की दलीलें और इस तथ्य को भी विचार में लिया कि कथित पीड़िता ने पहले आरोपों से इनकार किया था और बाद में बयान बदला था। साथ ही कहा था कि उसने आवेदक और शादीशुदा शख्स के साथ संबंध बनाए थे। ऐसे में कोर्ट का कहना है कि रिश्ता अनैतिक है, लेकिन कथित पीड़िता के बालिग होने के चलते इसे बलात्कार नहीं माना जा सकता है। कोर्ट ने इस बात पर भी विचार किया कि आवेदक और पीड़िता के बीच अवैध संबंध बने थे। आरोपी का कोई आपराधिक इतिहास नहीं रहा और उसे जुलाई 2024 में गिरफ्तार किया गया था। इन तथ्यों को ध्यान में रखकर कोर्ट ने आरोपी को जमानत दे दी। recent visitors 80

वाटर फॉल, नर्मदा नदी और प्राचीन मंदिर…जबलपुर के भेड़ाघाट में मनाइए नए साल का जश्न

भेड़ाघाट ! जबलपुर के पास स्थित एक शांत और ऐतिहासिक स्थल है, जो संगमरमर की वादियों, धुआंधार जलप्रपात, और पवित्र नर्मदा नदी के लिए प्रसिद्ध है. यहां के प्राचीन मंदिरों और प्राकृतिक सुंदरता का अनुभव करना हर पर्यटक के लिए अविस्मरणीय होता है. यह स्थल विशेष रूप से नए साल के जश्न या किसी भी खास अवसर पर शांति और सुकून का आनंद लेने के लिए सही है. https://youtu.be/V5wcMkX490o?si=TF8QyG53-KavifTw भारत में प्रकृति की अपार धरोहरें हर कोने में फैली हुई हैं, और मध्य प्रदेश का जबलपुर शहर इन धरोहरों का प्रमुख केंद्र है. अगर आप नए साल का जश्न प्रकृति के करीब और शांत वातावरण में मनाना चाहते हैं, तो जबलपुर का भेड़ाघाट और इसके आसपास के स्थल आपके लिए आदर्श स्थान हो सकते हैं. जबलपुर को ‘संस्कारधानी’ के नाम से भी जाना जाता है, और यह शहर नर्मदा नदी के किनारे स्थित है. इस शहर के प्रमुख स्थल भेड़ाघाट, बरगी डेम, धुआंधार जलप्रपात, 64 योगिनी मंदिर, त्रिपुर सुंदरी मंदिर और अन्य ऐतिहासिक स्थल न केवल प्रकृति की मनमोहक सुंदरता का अनुभव कराते हैं, बल्कि भारतीय संस्कृति, इतिहास और पौराणिक कथाओं के महत्व को भी जीवित रखते हैं. संगमरमर वादियों में नाव की सैर, रोपवे से धुआंधार का नज़ारा, और नर्मदा की लहरों का संगीत इस अनुभव को यादगार बना देंगे. इसके साथ बरगी डेम में क्रूज पर भी यात्रा कर सकते है. भेड़ाघाट का प्रमुख आकर्षण धुआंधार जलप्रपात है, जहां नर्मदा नदी लगभग 30 मीटर की ऊंचाई से गिरती है. गिरते हुए पानी से उठता झाग धुएं जैसा प्रतीत होता है, इसलिए इसे ‘धुआंधार’ नाम दिया गया. इसकी तुलना अक्सर नियाग्रा फॉल्स से की जाती है. रोपवे के जरिए इस जलप्रपात का दृश्य और भी रोमांचक बनता है. भेड़ाघाट में संगमरमर के पहाड़ नर्मदा नदी के साथ दो किलोमीटर तक फैले हुए हैं. इन संगमरमर की चट्टानों में सफेद, गुलाबी, हरी, और काली रंगों की छटा देखने को मिलती है. सूर्योदय और सूर्यास्त के समय इन वादियों का दृश्य और भी मनोरम होता है. संगमरमर की इन चट्टानों के बीच ‘बंदर कूदनी’ नामक स्थान है, जहां चट्टानों की निकटता के कारण ऐसा प्रतीत होता है कि एक बंदर कूदकर इसे पार कर सकता है. यह स्थल कई पौराणिक कथाओं और किंवदंतियों से जुड़ा हुआ है. यह 9वीं शताब्दी का प्राचीन मंदिर भेड़ाघाट के पहाड़ पर स्थित है. यह मंदिर शक्ति.पासना का केंद्र था और इसे तांत्रिकों की विश्वविद्यालय माना जाता है. मंदिर में चौसठ योगिनियों की मूर्तियां हैं, जो हरियाली लिए पीले बलुआ पत्थरों से बनी हैं. इस मंदिर का निर्माण कल्चुरी राजाओं द्वारा किया गया था. भेड़ाघाट से कुछ दूरी पर स्थित त्रिपुर सुंदरी मंदिर कल्चुरी काल की उत्कृष्ट कृति है. यहां देवी के तीन रूप महाकाली, महालक्ष्मी, और महासरस्वती की पूजा होती है. यह स्थान तीन शहरों की सुंदर देवियों के वास का प्रतीक है. लम्हेटा घाट पर स्थित यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान राम ने यहां लक्ष्मण के साथ शिव की आराधना की थी. इंद्र गया वह स्थान है जहां इंद्रदेव ने अपने पिता की अस्थियों का विसर्जन किया था. यह स्थान आज भी धार्मिक कर्मकांडों के लिए प्रसिद्ध है. यह स्थान नर्मदा किनारे डायनासोर के अंडों के अवशेषों के लिए जाना जाता है. यहां डायनासोर के जीवाश्म मिलने के प्रमाण भी मिले हैं, जो इसे वैज्ञानिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बनाते हैं. भेड़ाघाट के संगमरमर वादियों में कई फिल्मों की शूटिंग हुई है. यह स्थान भारतीय फिल्म उद्योग के लिए भी आकर्षण का केंद्र रहा है. भेड़ाघाट में नाव यात्रा पर्यटकों के लिए विशेष अनुभव है. नाविक की रोचक कमेंट्री, जिसमें ऐतिहासिक और पौराणिक कथाओं का जिक्र होता है, सैर को और भी यादगार बनाती है. नए साल के जश्न या किसी भी अन्य अवसर पर भेड़ाघाट एक अद्भुत पर्यटन स्थल है. यहां के प्राकृतिक और ऐतिहासिक स्थान परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताने के लिए उपयुक्त हैं. भेड़ाघाट न केवल मध्य प्रदेश बल्कि पूरे भारत के लिए एक अनमोल धरोहर है. इसकी प्राकृतिक सुंदरता, ऐतिहासिक महत्व और पौराणिक कहानियां इसे विशेष बनाती हैं. यह स्थान न केवल देखने और महसूस करने का है बल्कि आत्मा को शांति और सुकून देने वाला है. यहां की यात्रा हर किसी को जीवन में एक बार अवश्य करनी चाहिए. recent visitors 299

Gaza में रिफ्यूजी कैंप पर Israel का हवाई हमला, 27 फिलिस्तीनियों की मौत

गाजा गाजा में इजरायली हमले लगातार जारी हैं. आईडीएफ के ताजा हमले में 27 फिलिस्तिनियों की मौत हो गई, जबकि 150 से अधिक लोग घायल हुए हैं. मरने वालों में महिलाओं और बच्चों की संख्या अधिक है. इससे पहले रविवार को हमास के नाम पर फिर से एक अस्पताल को निशाना बनाया गया, जिसमें सात लोगों की मौत हो गई. वहीं एक जुड़वा नवजात की भी बिना इलाज के मौत हो गई. पिछले साल 7 अक्टूबर को हमास के हमलों के बाद से इजराली अटैक लगातार जारी हैं. इन हमलों में अबतक 45 हज़ार 500 से ज़्यादा फिलिस्तीन मारे जा चुके हैं. करीब एक लाख लोग घायल हैं. वहीं हमलों की वजह से गाज़ा की करीब 90 फीसदी आबादी को कई बार विस्थापित होना पड़ा है. बताया जा रहा है कि आईडीएफ ने वफा अस्पताल पर हमला किया, जिसमें अस्पताल मलबे में ढ़ेर हो गया. फिलिस्तीनी सिविल डिफेंस सदस्य महमूद बसल ने कहा, "इजरायली सेना ने गाजा शहर में अल-वफ़ा मेडिकल अस्पताल को निशाना बनाया. इसमें कई लोगों की मौत हो गई. अस्पताल के कर्मचारियों ने सात मृतकों के शव बरामद किए हैं. कई घायलों को बचाकर अल-अहली अस्पताल में पहुंचाया गया है. ये सभी लोग अस्पताल के बगल में स्थित एक रिफ्यूजी कैंप में शरण लिए हुए थे.'' इन हमले के बाद इजरायल की रटी रटाई प्रतिक्रिया सामने आई है. इसमें कहा गया है कि उसने इमारत के अंदर हमास के लड़ाकों को निशाना बनाकर हमला किया है. वहीं दो मासूम जुड़वा बच्चों की मौत के बाद मातम छाया है. ये जुड़वा बच्चे जन्म के महज़ 20 दिन बाद ही दुनिया से रुख्सत हो गए. उनकी मौत की वजह हाइपोथर्मिया बीमारी बताया जा रहा है. इसका इलाज चल रहा था. बताया जा रहा है कि शरीर का तापमान 35 डिग्री सेल्सियस से कम होने पर ये बीमारी होती है. इन जुड़वा बच्चों का जन्म वक्त से एक महीना पहले हुआ था. लिहाज़ा पर्याप्त इलाज ना मिलने से और ठंड की वजह से दोनों ने दम तोड़ दिया. ऐसे ही कई अन्य बच्चों ने भी टेंट में रहने की वजह से ठंड लगने से मौत का शिकार हो चुके हैं. पूरे गाजा में हाहाकार मचा हुआ है. सीजफायर की मांग हो रही है. उधर, इजरायल की राजधानी तेल अवीव में लोग लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. वहां की सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से इस्तीफा भी मांगा. देश में आम चुनाव कराए जाने की भी मांग की है. उनका दावा है कि पीएम नेतन्याहू बंधकों को छुड़ाने में अबतक असमर्थन रहे हैं. ऐसे में उन्हे पद छोड़ देना चाहिए. इस वक्त 100 से अधिक बंधक हमास के पास हैं. हजारों की संख्या में सड़क पर उतरे प्रदर्शनकारियों ने इजरायल की सरकार से बंधकों की रिहाई के लिए गाजा में बमबारी रोकने और हमास से तुरंत समझौते की मांग की है. बंधक बनाए गए लोगों के परिजनों और दोस्तों को डर है कि अगर हमास के साथ जल्द समझौता नहीं होता तो और ज्यादा बंधक मारे जाएंगे. ये प्रदर्शन ऐसे समय हुआ जब गाजा में युद्धविराम के लिए बातचीत अंतिम दौर में हैं.   recent visitors 79