Gen-G को साधने भाजपा, सरकार और संघ की नई रणनीति, स्कूल-कॉलेज से सोशल मीडिया तक बढ़ेगा संवाद

BJP, Government, and Sangh’s new strategy to engage Gen-G: Outreach to expand from schools and colleges to social media. मध्य प्रदेश में युवा वोटरों, खासकर जेन-जी और जेन-अल्फा तक पहुंच बनाने के लिए भाजपा, सरकार और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अपनी गतिविधियां बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है। युवाओं से सीधे संवाद के साथ सोशल मीडिया पर प्रभाव रखने वाले युवाओं और इन्फ्लुएंसर्स से संपर्क बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है। युवा पीढ़ी के बदलते रुझान और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए राजनीतिक संगठन अब पारंपरिक बैठकों के साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म को भी अपनी रणनीति का अहम हिस्सा बना रहे हैं। इसका मकसद युवाओं की समस्याओं, उनकी पसंद और भविष्य से जुड़ी अपेक्षाओं को समझना भी है। बता दें मध्य प्रदेश में 1.40 करोड़ से ज्यादा 18 से 29 साल के वोटर्स हैं। यह वोटर्स आगामी नगरीय निकाय, पंचायत और विधानसभा चुनाव में अहम भूमिका निभाएंगे। इसको लेकर ही राजनीति पार्टियों ने युवाओं को साधने पर अपना फोकस बढ़ा दिया हैं। स्कूल-कॉलेज और छात्रावासों तक पहुंचेगा युवा मोर्चाभाजपा संगठन ने युवाओं से संपर्क बढ़ाने की जिम्मेदारी अपने युवा मोर्चे को दी है। इसके तहत स्कूल, कॉलेज और छात्रावासों में संपर्क कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। मंत्री, सांसद और विधायक भी शैक्षणिक संस्थानों में जाकर युवाओं से संवाद करेंगे। इन कार्यक्रमों में केवल सरकार की योजनाओं की जानकारी देने के बजाय युवाओं की समस्याओं और रोजगार, शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण जैसे मुद्दों पर बातचीत करने की कोशिश होगी। सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स पर भी फोकसभाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल जिलों में सोशल मीडिया पर सक्रिय युवा इन्फ्लुएंसर्स से संवाद करेंगे। इसके लिए अलग-अलग जिलों में कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की जा रही है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने भी नई पीढ़ी के साथ सीधे संवाद की तैयारी की है। शुरुआती चरण में सितंबर में भोपाल में संघ के पदाधिकारी युवाओं से संवाद करेंगे। एआई और स्किल ट्रेनिंग को भी बनाया आधारसरकार अगले वर्ष को युवा वर्ष के रूप में मनाने की घोषणा कर चुकी है। साथ ही युवाओं को जोड़ने के लिए कौशल विकास और नई तकनीक से जुड़े कार्यक्रमों पर जोर दिया जा रहा है। इसमें एआई स्किल ट्रेनिंग, ऑनलाइन कोचिंग और रोजगार से जुड़े प्रशिक्षण प्रमुख हैं। भाजपा प्रवक्ता मिलन भार्गव ने कहा कि भाजपा युवाओं के साथ लगातार संवाद करती है। इसमें अब तेजी लाई गई हैं। भाजपा ही ऐसी पार्टी है, जो हर वर्ग को साध लेकर चलने का काम कर रही हैं। recent visitors 24

MP में MBBS की पढ़ाई हुई महंगी: प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों की फीस में 10% तक बढ़ोतरी, सरकारी कॉलेजों में कोई बदलाव नहीं

MBBS education becomes costlier in MP: Fees in private medical colleges hiked by up to 10%; no change in government colleges. भोपाल। मध्य प्रदेश में NEET-UG 2026-27 की काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही मेडिकल और डेंटल शिक्षा का नया फीस स्ट्रक्चर लागू कर दिया गया है। नए फीस ढांचे के मुताबिक प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में MBBS की फीस में कोई बदलाव नहीं किया गया है, जबकि निजी मेडिकल कॉलेजों में MBBS की पढ़ाई पिछले सत्र की तुलना में करीब 10 प्रतिशत तक महंगी हो गई है। वहीं, निजी BDS पाठ्यक्रम की फीस में भी बढ़ोतरी की गई है। सरकारी मेडिकल कॉलेजों में फीस स्थिर प्रदेश के 20 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में MBBS की सालाना फीस 1.14 लाख रुपये निर्धारित है। इसमें शिक्षण और सुरक्षा शुल्क शामिल हैं। वहीं, ESIC मेडिकल कॉलेज इंदौर में सुरक्षा शुल्क कम होने के कारण सालाना फीस करीब 1.05 लाख रुपये रहेगी। सरकारी मेडिकल कॉलेजों में पिछले तीन वर्षों से यही फीस लागू है और इस सत्र में इसमें कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। निजी मेडिकल कॉलेजों में बढ़ा फीस का बोझ निजी मेडिकल कॉलेजों में MBBS की फीस में कॉलेज के अनुसार अलग-अलग बढ़ोतरी हुई है। भोपाल के LN Medical College में सालाना फीस में 1.58 लाख रुपये की वृद्धि हुई है। अब यहां MBBS की सालाना फीस करीब 18.08 लाख रुपये हो गई है। वहीं, भोपाल के RK Medical College में फीस में करीब 81 हजार रुपये की बढ़ोतरी हुई है। यहां MBBS की सालाना फीस 11.31 लाख रुपये निर्धारित की गई है। इस बढ़ोतरी से निजी मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों और उनके परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ना तय माना जा रहा है। NRI कोटे की फीस में बड़ा उछाल निजी मेडिकल कॉलेजों में NRI कोटे से प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों के लिए फीस में सबसे बड़ा बदलाव देखने को मिला है। नए फीस स्ट्रक्चर में NRI कोटे की कुल फीस कई कॉलेजों में 60 लाख रुपये से अधिक पहुंच गई है। श्री अरबिंदो मेडिकल कॉलेज, इंदौर: 60,92,700 रुपयेLN मेडिकल College, भोपाल: 53.99 लाख रुपयेPeople’s Medical College, भोपाल: 53.33 लाख रुपये श्री अरबिंदो मेडिकल कॉलेज में NRI फीस में करीब 5.5 लाख रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। BDS की पढ़ाई भी हुई महंगी MBBS के साथ निजी BDS पाठ्यक्रम की फीस में भी वृद्धि की गई है। प्रदेश के एकमात्र सरकारी डेंटल कॉलेज, शासकीय डेंटल यूनिवर्सिटी इंदौर, में BDS की फीस पिछले वर्ष की तरह 1.14 लाख रुपये रखी गई है। वहीं, निजी BDS कॉलेजों में फीस में करीब 10 हजार से 15 हजार रुपये तक की वृद्धि हुई है। नए फीस स्ट्रक्चर के अनुसार निजी BDS की सालाना फीस कॉलेज के अनुसार करीब 1.98 लाख से 2.85 लाख रुपये तक हो गई है। MP में MBBS की 5,200 सीटें NEET-UG 2026-27 सत्र में मध्य प्रदेश में MBBS की कुल 5,200 सीटें उपलब्ध होंगी। पिछले सत्र में यह संख्या करीब 5,050 सीटें थी। यानी इस बार 150 सीटों का इजाफा हुआ है। इनमें सरकारी मेडिकल कॉलेजों की 3,000 सीटें और निजी मेडिकल कॉलेजों की 2,200 सीटें शामिल हैं। सीटों में बढ़ोतरी नए सरकारी मेडिकल कॉलेजों और मौजूदा कॉलेजों में सीटें बढ़ाए जाने के कारण हुई है। खरगोन, मंदसौर और रतलाम में नए सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 50-50 सीटें तथा सागर के बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में 50 अतिरिक्त सीटें शामिल होने से राज्य में मेडिकल सीटों की संख्या बढ़ी है। छात्रों के लिए बढ़ी चुनौती एक तरफ प्रदेश में MBBS की सीटों की संख्या बढ़ी है, वहीं निजी मेडिकल कॉलेजों की फीस में बढ़ोतरी ने मेडिकल शिक्षा की लागत को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है। सरकारी कॉलेजों में फीस स्थिर रहने से कम खर्च में MBBS करने का विकल्प विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण बना हुआ है, लेकिन सीमित सरकारी सीटों के कारण निजी कॉलेजों की ओर जाने वाले छात्रों को अब पहले से अधिक आर्थिक खर्च उठाना पड़ सकता है। NEET-UG 2026-27 के लिए छात्रों को प्रवेश लेने से पहले संबंधित कॉलेज की नवीनतम फीस, हॉस्टल, अन्य शुल्क और प्रवेश नियमों की आधिकारिक जानकारी जरूर जांचनी चाहिए। recent visitors 18

दातासिंह वाला बॉर्डर सील: चार लेयर सुरक्षा में रोका गया किसानों का जत्था, 29 अगस्त तक पड़ाव का ऐलान

Datasinghwala border sealed: Farmers’ convoy halted by four-layer security; encampment announced until August 29. नई दिल्ली। पंजाब के किसानों के दिल्ली कूच के ऐलान के बाद हरियाणा प्रशासन ने दातासिंह वाला (खनौरी) बॉर्डर पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। रविवार को बॉर्डर को चार लेयर सुरक्षा घेरे में सील कर दिया गया। पंजाब की ओर से दिल्ली जाने के लिए पहुंचे 51 किसानों के जत्थे को हरियाणा में प्रवेश नहीं दिया गया। किसानों और प्रशासन के बीच करीब डेढ़ घंटे में दो दौर की बातचीत हुई, लेकिन दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन सकी। किसान केंद्रीय कृषि मंत्री से बातचीत कराने और प्रस्तावित ट्रेड डील को रद्द करने की मांग पर अड़े रहे। किसानों ने स्पष्ट किया कि मांगें पूरी होने तक वे 29 अगस्त तक बॉर्डर पर ही पड़ाव जारी रखेंगे। पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल से हुई बातचीत दोपहर बाद पंजाब की ओर से किसानों का जत्था हरियाणा की तरफ बढ़ा तो प्रशासन ने किसान नेताओं के पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को वार्ता के लिए बुलाया। प्रतिनिधिमंडल में काका सिंह कोटड़ा, बलदेव सिंह सरसा, इंद्रजीत पन्नीवाल, सुखदेव भोजराज और अमनजीत सिंह अरोड़ा शामिल रहे। जींद की डीसी डॉ. वैशाली शर्मा और एसपी कुलदीप सिंह ने किसानों की संख्या कम करने और मुख्यमंत्री से बातचीत कराने का प्रस्ताव रखा। किसान नेताओं ने इसे स्वीकार नहीं किया। उनका कहना था कि उनका मुख्य मुद्दा प्रस्तावित ट्रेड डील से जुड़ा है, इसलिए इस पर केंद्रीय कृषि मंत्री के स्तर पर बातचीत होनी चाहिए। पैदल दिल्ली जाने पर अड़े किसान किसान नेताओं ने कहा कि उनका उद्देश्य पैदल दिल्ली पहुंचना है। प्रशासन के साथ बातचीत विफल होने के बाद किसान नेता पंजाब की ओर लौट गए और खनौरी-दातासिंह वाला बॉर्डर पर दोबारा पड़ाव डाल दिया। किसानों ने ऐलान किया है कि मांगें पूरी होने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा और 29 अगस्त तक बॉर्डर पर डटे रहेंगे। हरियाणा के किसानों को भी हिरासत में लिया गया दिल्ली की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहे हरियाणा के 33 किसानों को पुलिस ने हिरासत में लिया। वहीं, कैथल की ओर से किसान नेता अभिमन्यु कोहाड़ के नेतृत्व में बॉर्डर की तरफ पहुंच रहे 18 किसानों को भी पुलिस ने हिरासत में लिया। शुभकरण सिंह की मौत स्थल से मिट्टी लेकर जाएंगे दिल्ली किसानों ने आंदोलन को भावनात्मक रूप देने के लिए खनौरी में उस स्थान से मिट्टी एकत्र की, जहां 21 फरवरी 2024 को किसान शुभकरण सिंह की मौत हुई थी। किसान नेताओं के अनुसार, इस मिट्टी को दिल्ली के जंतर-मंतर तक ले जाया जाएगा। गैर-एसकेएम किसान संगठनों की ओर से जगजीत सिंह डल्लेवाल के नेतृत्व में प्रस्तावित पदयात्रा के दौरान इस मिट्टी को दिल्ली ले जाने की बात कही गई है। आंदोलन फिर गरमाने के संकेत दातासिंह वाला बॉर्डर पर बढ़ाई गई सुरक्षा और किसानों के दिल्ली कूच के प्रयास के बीच एक बार फिर किसान आंदोलन को लेकर तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। एक ओर प्रशासन किसानों को हरियाणा में प्रवेश देने के पक्ष में नहीं है, वहीं किसान अपनी मांगों पर पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में बॉर्डर पर सुरक्षा और आंदोलन दोनों को लेकर स्थिति महत्वपूर्ण बनी रह सकती है। recent visitors 20

MP NEWS खाद बिक्री बंद: पोर्टल के मिलान के नाम पर किसानों पर फिर संकट, सरकार के किसान हितैषी दावों पर उठे सवाल

MP NEWS: Fertilizer sales halted: Farmers face another crisis due to portal matching, raising questions about the government’s farmer-friendly claims. भोपाल। मध्य प्रदेश में किसानों को खेती के लिए खाद की जरूरत के बीच सरकार के एक आदेश ने नई चिंता खड़ी कर दी है। सामने आए आदेश के मुताबिक 14 अगस्त 2026 की शाम 7 बजे से प्रदेश में उर्वरक की बिक्री आगामी आदेश तक बंद कर दी गई है। आदेश में भारत सरकार के FMS पोर्टल और प्रदेश के उर्वरक विक्रेताओं के वास्तविक स्टॉक का Reconciliation यानी मिलान किए जाने का हवाला दिया गया है। आदेश के अनुसार बिक्री बंद रहने की अवधि में विपणन संघ के विक्रय केंद्रों, प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों और अन्य संबंधित केंद्रों से किसी भी प्रकार के अनुदानित उर्वरक का विक्रय नहीं किया जाएगा। पोर्टल का मिलान जरूरी, लेकिन किसानों की परेशानी का क्या? सरकार की ओर से स्टॉक और पोर्टल के आंकड़ों का मिलान पारदर्शिता तथा वास्तविक उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए किया जा रहा हो सकता है, लेकिन सवाल यह है कि इस प्रक्रिया का सीधा असर किसान पर क्यों पड़े? खेती के मौसम में किसान को समय पर खाद नहीं मिली तो फसल प्रभावित होने का खतरा रहता है। ऐसे में बिक्री अचानक रोकने के फैसले से किसानों को खाद के लिए भटकना पड़ सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में पहले से ही खाद की उपलब्धता और वितरण को लेकर किसानों की चिंता रहती है। किसान पूछ रहे—खाद चाहिए या पोर्टल की प्रक्रिया? सरकार लगातार किसान हित और कृषि को प्राथमिकता देने की बात करती है। लेकिन दूसरी तरफ, खाद बिक्री रोकने के आदेश ने सरकार की किसान-हितैषी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। किसानों का सवाल है कि FMS पोर्टल का स्टॉक मिलान विभागीय स्तर पर करते हुए खाद की बिक्री जारी क्यों नहीं रखी जा सकती? यदि व्यवस्था में तकनीकी या स्टॉक संबंधी समस्या है तो उसका खामियाजा किसान क्यों भुगते? क्या यह फैसला किसान विरोधी साबित होगा? विपक्ष और किसान संगठनों को सरकार के इस फैसले पर सवाल उठाने का मौका मिल सकता है। किसानों के बीच यह धारणा बन सकती है कि सरकारी सिस्टम की तकनीकी प्रक्रिया और प्रशासनिक निर्णयों का बोझ आखिरकार अन्नदाता पर ही डाला जा रहा है। सरकार से किसानों के सवाल खाद बिक्री बंद करने की जरूरत क्यों पड़ी? बिक्री दोबारा शुरू करने की निश्चित तारीख क्यों नहीं बताई गई? स्टॉक मिलान की प्रक्रिया कितने समय में पूरी होगी? इस दौरान जरूरतमंद किसानों को खाद कैसे मिलेगी? यदि किसी किसान की फसल खाद के अभाव में प्रभावित होती है तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? अब निगाह इस बात पर है कि सरकार खाद बिक्री दोबारा कब शुरू करती है और किसानों को इस दौरान खाद उपलब्ध कराने के लिए क्या वैकल्पिक व्यवस्था करती है। recent visitors 20

सीएम योगी बोले- 1947 का बंटवारा कांग्रेस की कायरता का प्रमाण, पीएम मोदी होते तो कोई बाल भी बांका न कर पाता

CM Yogi said the Partition of 1947 was proof of the Congress’s cowardice; had PM Modi been in charge, no one could have caused even the slightest harm. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 1947 में हुआ देश का बंटवारा कांग्रेस की कायरता का प्रमाण है। उस समय अगर सरदार पटेल देश के प्रधानमंत्री होते या फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैसा नेतृत्व देश के पास होता तो कोई भी हमारे देश का बाल भी बांका नहीं कर पाता पर कांग्रेस की बुजदिली के कारण देश का बंटवारा हुआ। इस दौरान लाखों की संख्या में हिंदू, बौद्ध, जैन और सिखों का कत्लेआम हुआ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को लखनऊ के लोकभवन में आयोजित विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि दो कारणों से भारत गुलाम हुआ था जिनमें से एक कारण आपसी अंतर्विरोध था। जाति, क्षेत्र और भाषा को लेकर अंतर्विरोध और षड्यंत्रों के कारण देश कमजोर होता चला गया। इसका परिणाम गुलामी के रूप में आया। अंतर्विरोधों के कारण हम सामूहिक रूप से लड़ ही नहीं सकें। इसका दुष्परिणाम सामने आना ही था। देश गुलाम हो गया। सनातन काल से जो भारत एक भारत था वो टुकड़ों में बंट गया। आजादी के बाद शत्रु संपत्तियों की बंदरबांट हुईमुख्यमंत्री योगी ने कहा कि बंटरवारे के बाद कांग्रेस राज में शत्रु संपत्तियों की बंदरबांट हुई। निजी संपत्तियां बनाई गईं। होना तो ये चाहिए था कि पाकिस्तान से जो हिंदू, जैन, बौद्ध और सिख आए थे उन्हें बसाने के लिए मदद करनी चाहिए थी पर उनकी मदद नहीं की गई। जमीनों की बंदरबांट हुई। उन्होंन कहा कि पहले की तरह आज भी सपा और कांग्रेस की मानसिकता विभाजनकारी है। ये लोग देश को और समाज को बांटने की राजनीति करते हैं। सीएम योगी ने निकाला पैदल मार्च, डिप्टी सीएम हुए शामिलविभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर लखनऊ में पटेल प्रतिमा से लेकर लोकभवन तक पैदल मार्च निकाला गया जिसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक व अन्य भाजपा नेता शामिल हुए। recent visitors 42

MP Board का बड़ा फैसला! अनाथ बच्चों की परीक्षा फीस माफ, 2026-27 से मिलेगा फायदा

Major decision by MP Board! Exam fees for orphaned children waived; benefits to start from the 2026-27 academic session. भोपाल। आर्थिक तंगी के कारण किसी बच्चे की पढ़ाई और परीक्षा न रुके, इसे ध्यान में रखते हुए माध्यमिक शिक्षा मंडल, मध्यप्रदेश ने अनाथ विद्यार्थियों के लिए बड़ा राहतभरा फैसला लिया है। अब जिन विद्यार्थियों के माता और पिता दोनों का निधन हो चुका है, उन्हें मंडल की परीक्षाओं में शामिल होने के लिए परीक्षा शुल्क और नामांकन शुल्क नहीं देना होगा। मंडल के जारी आदेश के अनुसार, ऐसे विद्यार्थी जो माता-पिता की मृत्यु के बाद किसी रिश्तेदार के आश्रय में रहकर पढ़ाई कर रहे हैं अथवा शासन द्वारा संचालित अनाथालय में रहकर शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, उन्हें मंडल द्वारा आयोजित परीक्षाओं में शामिल होने के लिए शुल्क से पूरी तरह छूट दी जाएगी। आर्थिक परेशानी के चलते पढ़ाई न छूटे, इसलिए फैसलामंडल ने आदेश में माना है कि माता-पिता दोनों को खो चुके कई विद्यार्थी रिश्तेदारों या अनाथालय के सहारे अपनी पढ़ाई जारी रखते हैं। आर्थिक संसाधनों की कमी के कारण इनके सामने परीक्षा शुल्क जमा करना भी चुनौती बन सकता है। ऐसे विद्यार्थियों की शिक्षा प्रभावित न हो, इसलिए उन्हें परीक्षा और नामांकन शुल्क से राहत देने की व्यवस्था की गई है। लाभ लेने के लिए प्रमाण-पत्र जरूरीशुल्क माफी का लाभ लेने के लिए विद्यार्थी को परीक्षा फॉर्म भरते समय माता और पिता दोनों के मृत्यु प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करने होंगे। इसके साथ ही शासन द्वारा संचालित अथवा मान्यता प्राप्त संस्था की ओर से ऐसा प्रमाण-पत्र देना होगा, जिसमें यह प्रमाणित हो कि संबंधित विद्यार्थी वहां रहकर शिक्षा प्राप्त कर रहा है। मंडल ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित प्रमाण-पत्र प्रस्तुत नहीं करने पर विद्यार्थी शुल्क छूट का पात्र नहीं होगा। 2026-27 की परीक्षाओं से लागूयह सुविधा शैक्षणिक सत्र 2026-27 की परीक्षाओं से लागू की गई है। यानी आगामी मंडल परीक्षाओं में पात्र विद्यार्थियों को इसका लाभ मिलेगा। माध्यमिक शिक्षा मंडल की यह पहल उन विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जो माता-पिता के निधन के बाद भी विपरीत परिस्थितियों में अपनी पढ़ाई जारी रखे हुए हैं। recent visitors 40

मध्यप्रदेश विद्युत मण्डल में अयोग्य अधिकारियों को सौंपे मलाईदार पद

Lucrative posts in the Madhya Pradesh Electricity Board handed over to incompetent officials. भोपाल। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड में कार्यपालन यंत्री (डीजीएम) के पदों पर अपात्रों को करंट चार्ज सौंपे जा रहे हैं। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड में मण्डल (बोर्ड) संवर्ग के अधिकारियों के लिए सुरक्षित रखे गए कार्यपालन यंत्री के पदों पर कंपनी संवर्ग के ऐसे सहायक अभियंताओं (AE) को करंट चार्ज दिया गया है, जो हाल ही में संपन्न पदोन्नति प्रक्रिया में कार्यपालन यंत्री पद पर नियमित पदोन्नति के लिए पात्र नहीं पाए गए। मध्यप्रदेश विद्युत मण्डल पत्रोपाधि अभियंता संघ ने इस व्यवस्था पर गंभीर आपत्ति जताई है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड में जिस अधिकारी को विभाग ने कार्यपालन यंत्री पद पर नियमित पदोन्नति के योग्य नहीं माना, उसी अधिकारी को करंट चार्ज के माध्यम से उसी पद का दायित्व सौंप दिया गया है। इससे पदोन्नति प्रक्रिया की निष्पक्षता, पारदर्शिता एवं प्रशासनिक औचित्य पर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं। ले रहे वित्तीय निर्णय वरिष्ठ अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। यदि कोई अधिकारी निर्धारित सेवा नियमों एवं पात्रता की कसौटी पर कार्यपालन यंत्री बनने के योग्य नहीं है, तो उसे उसी पद का करंट चार्ज किस नियम, किस प्रशासनिक आवश्यकता और किस सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति से दिया गया। ऐसे अधिकारी उसी पद के प्रशासनिक, तकनीकी एवं वित्तीय निर्णय ले रहे हैं, जबकि नियमित पदोन्नति के लिए उन्हें पात्र नहीं माना गया। समकक्ष अधिकारियों में पनप रही कुंठा संघ पदाधिकारियों का कहना है कि इस व्यवस्था से मण्डल संवर्ग के वरिष्ठ एवं पात्र अधिकारियों के वैधानिक अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। अनेक अधिकारी 35 से 38 वर्षों की सेवा पूर्ण करने के बाद भी अपनी पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जबकि उनके लिए सुरक्षित पदों पर अन्य संवर्ग के अधिकारियों से करंट चार्ज के माध्यम से कार्य कराया जा रहा है। इस भेदभावपूर्ण व्यवस्था से समकक्ष अधिकारियों में कुंठा का भाव पनप रहा है। कार्यपालन यंत्री के करंट चार्ज की निष्पक्ष समीक्षा की मांग मध्यप्रदेश विद्युत मण्डल पत्रोपाधि अभियंता संघ भोपाल के प्रभारी अध्यक्ष केके आर्य ने राज्य शासन एवं विद्युत कंपनी प्रबंधन से मांग की है कि बोर्ड संवर्ग के लिए सुरक्षित कार्यपालन यंत्री पदों पर दिए गए सभी करंट चार्ज की निष्पक्ष समीक्षा कराई जाए। संबंधित आदेशों को सार्वजनिक किया जाए। पात्र अधिकारियों को ही उक्त पदों का दायित्व सौंपा जाए। recent visitors 32