हर वर्ग को जिनसे मिलता है न्याय, उन सिविल जजों की भर्ती में आरक्षित वर्ग के साथ हुआ बड़ा अन्याय

A grave injustice was done to the reserved category in the recruitment of civil judges from whom every section of society gets justice. भोपाल। भाजपा सरकार भले ही आरक्षित वर्ग को लुभाने के लिए बड़ेबड़े विज्ञापनों को दिखाकर हिमायती होने का डिंडोरा पीट रही है, लेकिन उसकी जमीनी हकीकत उससे बिल्कुल नजर नहीं आती है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण पिछले दिनों आए सिविल जज भर्ती परीक्षा के परिणामों की सूची में देखा जा सकता है। आरक्षित वर्ग के साथ यह भेदभाव अनुचित है।पिछड़ा दलित महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष ददन सिंह यादव ने आरोप लगाते हुए कहा कि वैसे तो हमेशा से आरक्षित वर्ग के साथ शासन स्तर पर भेदभाव होता आया है, जो आज भी हो रहा है। जिससे आरक्षित वर्ग के सभी समुदायों में भारी आक्रोश है।दरअसल, विगत दिनों सिविल जज 2022 की परीक्षा का परिणाम घोषित किया गया, जिसमें SC, ST और OBC वर्ग की पूरी तरह अनदेखी की गई है। कुल 191 पदों में से 121 पद ST वर्ग के थे, लेकिन एक भी अभ्यर्थी का चयन नहीं किया गया। 18 पद SC वर्ग के थे, जिनमें से केवल 1 अभ्यर्थी का चयन हुआ। OBC वर्ग के 9 पद थे, जिनमें से 5 अभ्यर्थियों का चयन किया गया, जबकि 43 अनारक्षित पदों में से 41 पद भर लिए गए। यानि आरक्षित वर्ग के कुल 148 पदों में से केवल 6 पद ही भरे गए। जिससे स्पष्ट होता है कि सरकारी सिस्टम सरकार की मंशा के अनुरूप किस तरीके से आरक्षण को खत्म करने पर तुला है। हमारा संघठन इस षड़यंत्र का कड़ा विरोध करता है। महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री यादव ने कहा कि आज आरक्षित वर्ग में शिक्षित और प्रतिभाशाली युवाओं की कमी नहीं है, लेकिन सरकारी सिस्टम उन्हें आगे आने के लिए रोड़ा अटका रहा है, जिसको समय रहते सुधारना ही होगा। उन्होंने मांग की है कि मुख्यमंत्री इस मसले पर जनता के सामने आएं और जवाब दें। उन्हें ऐसे परिणाम देने वाले षड़यंत्रकारी अधिकारियों और उनकी भेदभाव वाली नीतियों पर नकेल कसना होगी। साथ ही तत्काल प्रभाव से सिविल जज 2022 के परिणामों पर रोक लगाते हुए परीक्षा निरस्त की जाए एवं पुनः केवल MPPSC से ही परीक्षा कराई जाए। नहीं तो हमारा संघठन पूरे प्रदेशभर में बड़ा आंदोलन करेगा, जिसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी। नेता प्रतिपक्ष सिंघार को दिलाई उनकी ताकत याद, बड़े मंच पर मुद्दा उठाने की मांग कुछ सामाजिक संघठनों ने नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार से गुहार लगाई है कि आप भी आरक्षित वर्ग से आते हैं, इसलिए आप इस मामले को प्रमुखता से संज्ञान लें, ताकि आरक्षित वर्ग को न्याय मिल सके। भीम आर्मी ने नेता प्रतिपक्ष से कहा कि है कि आप इस मुद्दे को तत्काल प्रभाव से उचित मंच पर उठाएँ और आरक्षित वर्ग के साथ हो रहे अन्याय को रोकें। अन्यथा, हमारा संगठन एक सप्ताह बाद हजारों कार्यकर्ताओं के साथ पुनः घेराव करने के लिए विवश होगा। recent visitors 78

एमपी गज़ब: विकास या बर्बादी? जिम्मेदार कौन इंजीनियरिंग या सरकार- नगर निगम हो, भोपाल मेट्रो या फिर पीडब्ल्यूडी… सभी में हुई घपलेबाजी

MP Ghazab: Development or ruin? Who is responsible: engineering or government? Whether it’s the municipal corporation Bhopal Metro, or the Public Works Department… they’re all tainted by corruption. भोपाल। municipal corporation Bhopal Metro प्रदेश की राजधानी भोपाल एक बार फिर सरकारी इंजीनियरिंग की गंभीर खामियों को लेकर सुर्खियों में है। विपक्ष का आरोप है कि राज्य में मानो इंजीनियरों के बीच यह होड़ चल रही है कि कौन जनता के पैसों की सबसे ज्यादा बर्बादी कर सकता है। इसी सवाल के साथ कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव को कठघरे में खड़ा किया है। भोपाल विकास की 3 तस्वीरें राज्य के सिस्टम पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहीं हैं पहली तस्वीर: सेकंड स्टॉप के पास बन रहा नगर निगम का प्रदेश का अनोखा 40 करोड़ का “नया ऑफिस”। इसकी बेसिक प्लानिंग में भारी चूक सामने आ रहीं है। भोपाल नगर निगम का नया आठ मंजिला कार्यालय 40 करोड़ रुपये में तैयार किया गया। विपक्ष का आरोप है कि इतनी बड़ी बिल्डिंग में मीटिंग हॉल की बुनियादी प्लानिंग तक सही नहीं की गई। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह फैसला नहीं हो पा रहा कि यह इमारत ऑफिस है या इंजीनियरों का “प्रैक्टिकल लैब”, जहां जनता के पैसों पर प्रयोग किए जा रहे हैं। दूसरी तस्वीर: भोपाल मेट्रो… मानक से कम ऊंचाई पर बना स्टेशन प्रगति पेट्रोल पंम्प और केंद्रीय रिजर्व बैंक के पास भोपाल मेट्रो स्टेशन की ऊंचाई मानकों से कम पाए जाने के बाद बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इन दोनों जगह सड़क और स्टेशन के बीच इतनी कम जगह छोड़ी गई कि बड़ी गाड़ियाँ स्टेशन से टकराने लगीं। तीसरी मुसीबत की तस्वीर: एशबाग के 90 डिग्री रेलवे ओवर ब्रिज की राजधानी के बरखेड़ी स्थित यह सवाल रेलवे ओवरब्रिज बनाने में पीडब्ल्यूडी की इंजीनियरिंग बड़ी फेलुअर साबित हुई है। यहां 90 डिग्री मोड़ वाला ओवर ब्रिज बना दिया, जो बनने से पहले ही जानलेवा बन गया है। करोड़ों रुपये से तैयार ओवर ब्रिज जनता के उपयोग लायक नहीं है। अब इसको उपयोगी बनाने के लिए फिर से करोड़ों रुपये खर्च करने की प्लानिंग बन रहीं है, जिसमें 3 महीने का समय लगना है। विपक्ष का कहना है कि…“यह सिर्फ इंजीनियरिंग गलत नहीं, बल्कि जनता के हजारों करोड़ की योजनाओं के साथ खिलवाड़ है।” विपक्ष का तीखा तंज… मध्यप्रदेश के इंजीनियर बिल्डिंग ब्लॉक गेम खेल रहे हैं”। कांग्रेस ने मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री दोनों पर हमला बोलते हुए कहा कि “मध्यप्रदेश के इंजीनियर्स पहले बिल्डिंग बनाते हैं, फिर तोड़ते हैं, फिर बनाते हैं और फिर से तोड़ देते हैं। मानो यह सरकारी निर्माण नहीं, बच्चों का बिल्डिंग-ब्लॉक गेम हो।” भारी गलतियों के लिए अधिकारी जिम्मेदार कांग्रेस प्रवक्ता संगीता शर्मा और कांग्रेस एससी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार समेत अन्य नेताओं ने सवाल उठाया कि जब एक आम आदमी अपने घर की छोटी से छोटी प्लानिंग में सावधानी रखता है तो फिर सरकारी परियोजनाओं में बार-बार ऐसी भारी गलतियाँ क्यों हो रही हैं? और अगर गलती इंजीनियर की है तो “भरपाई जनता क्यों करे? कार्रवाई इंजीनियर और जिम्मेदार अधिकारियों पर क्यों नहीं होती?” पीएम मोदी और राज्य सरकार पर विपक्ष का सीधा हमला कांग्रेस ने आरोप लगाया कि प्रदेश में निर्माण कार्यों की बार-बार की खामियाँ साबित करती हैं कि “मध्यप्रदेश में सिस्टम नहीं, बर्बादी का मौन राज चल रहा है।” विपक्ष की मांग है कि दोषी इंजीनियरों पर तत्काल सख्त कार्रवाई हो। निर्माण के हर चरण की थर्ड-पार्टी जांच अनिवार्य की जाए और जनता के पैसों की भरपाई उन अधिकारियों से कराई जाए, जिन्होंने योजनाओं को गलत तरीके से पास किया। प्रदेश में लगातार सामने आ रही इंजीनियरिंग की ये गलतियाँ अब एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुकी हैं और जनता पूछ रही है। “विकास के नाम पर आखिर किसके हाथों खेल रही है जनता की गाढ़ी कमाई?” recent visitors 72

नपा के आउटसोर्स कर्मचारियों ने कार्यालय के सामने किया प्रदर्शन 2 माह से नहीं मिला वेतन

नपा के आउटसोर्स कर्मचारियों ने कार्यालय के सामने किया प्रदर्शन 2 माह से नहीं मिला वेतन

Outsourced employees of the Municipal Corporation protested in front of the office, not getting salary for 2 months. इटारसी। नगरपालिका में कार्यरत आधा सैकड़ा से अधिक आउटसोर्स सफाई कर्मचारियों ने मंगलवार को सुबह नगरपालिका कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर अपना विरोध जताया है, कर्मचारियों को दो माह का वेतन नहीं मिलने से नाराज हैं। उन्हें की पारिवारिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। आउटसोर्स कर्मचारियों पर शहर की सफाई व्यवस्था का जिम्मा है, ऐसे में शहर की सफाई व्यवस्था डगमगा सकती है।कर्मचारियों ने बताया की उन्हें कलेक्टर रेट के हिसाब से भी वेतन नहीं दिया जाता है। पिछले दो माह से वेतन नहीं मिला है,जिससे उन्हें आर्थिक परेशानी से जूझना पड़ रहा है। सुबह के प्रदर्शन के बाद कर्मचारियों ने दोपहर में सम्बंधित अधिकारी से मिलकर इस समस्या का समाधान करवाने की बात कही है। recent visitors 92

भारतीय मजदूर संघ ने 46 सूत्रीय मांगें सीएम तक पहुंचाईं, कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा

Bharatiya Mazdoor Sangh conveyed its 46-point demands to the CM and submitted a memorandum to the Collector. शिवपुरी। भारतीय मजदूर संघ, मध्यप्रदेश ने जिला मुख्यालय पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नाम एक 46 सूत्रीय मांगपत्र कलेक्टर को सौंपा। इस ज्ञापन के माध्यम से प्रदेश के लाखों श्रमिक और कर्मचारियों की लंबित मांगों के समाधान की अपील की गई है। संगठन ने बताया कि प्रदेश में विभिन्न वर्गों जैसे दैनिक वेतनभोगी, संविदा कर्मी, आउटसोर्स स्टाफ, अतिथि शिक्षक-विद्वान, बिजली कंपनी कर्मचारी, आंगनवाड़ी-आशा कार्यकर्ता, हम्माल-तुलावटी, पटवारी और पंचायत सचिवों की समस्याएं लंबे समय से अनसुलझी हैं। इन सभी के निराकरण के लिए यह विस्तृत ज्ञापन प्रस्तुत किया गया है। ज्ञापन में प्रमुख मांगों में आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए हरियाणा मॉडल की तर्ज पर सुरक्षा नीति लागू करना, 10 वर्ष पूरे कर चुके दैनिक वेतनभोगियों को नियमित करना और संविदा नीति 2023 की विवादित धाराओं को हटाना शामिल है। इसके अतिरिक्त, अतिथि विद्वानों को 65 वर्ष तक सेवा सुरक्षा प्रदान करने और बिजली कर्मचारियों की वेतन विसंगतियों को दूर करने की मांग भी की गई है। अन्य महत्वपूर्ण मांगों में नवनियुक्त कर्मचारियों की स्टाइपेंड व्यवस्था समाप्त कर नियुक्ति से पूर्ण वेतन बहाल करना, स्वास्थ्य बीमा का प्रावधान, पदोन्नति प्रक्रिया फिर से शुरू करना, आशा, आंगनवाड़ी, रसोईया और हम्मालों का मानदेय बढ़ाना शामिल है। ज्ञापन सौंपते समय भारतीय मजदूर संघ के जिला अध्यक्ष फतेह सिंह गुर्जर, जिला मंत्री जितेंद्र श्रीवास्तव सहित बड़ी संख्या में कर्मचारी और पदाधिकारी उपस्थित रहे। recent visitors 88

छतरपुर- सभी गर्भवती महिलाओं की अनमोल पोर्टल में एंट्री हो : कलेक्टर पार्थ जैसवाल

Chhatarpur- All pregnant women should be entered in the Anmol portal: Collector Parth Jaiswal छतरपुर। कलेक्टर पार्थ जैसवाल की अध्यक्षता में जिला पंचायत सभाकक्ष में जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक संपन्न हुई। बैठक में जिला पंचायत सीईओ नमः शिवाय अरजरिया, सीएमएचओ डॉक्टर आर.पी. गुप्ता सहित डॉक्टर, बीएमओ बीपीएम, बीसीएम अन्य समिति सदस्य उपस्थित रहे। कलेक्टर  जैसवाल ने मैटरनल हेल्थ की समीक्षा करते हुए अनमोल पोर्टल में कुछ गर्भवती महिलाओं के रजिस्ट्रेशन समग्र आईडी नहीं होने की वजह से नहीं होने पर बक्सवाहा बीएमओ को कड़ी फटकार लगाई और कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। साथ ही बीसीएम की एक दिवस का वेतन काटने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने कहा सीईओ जनपद के निरंतर संपर्क में रहें और आशाओं को कार्य में लगाएं। उन्होंने कहा लापरवाही बिल्कुल भी स्वीकार नहीं की जाएगी। कलेक्टर ने हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं के चिन्हांकन की पोर्टल में कम एंट्री होने पर बड़ामलहरा बीएमओ की वेतन वृद्धि रोकने संबंधी कारण बताओ नोटिस जारी करने एवं छतरपुर ग्रामीण एवं शहरी बीएमओ को हाई रिस्क महिलाओं का मैनेजमेंट नहीं होने पर 1 दिवस का वेतन काटने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने सभी बीएमओ को हाई रिस्क महिलाओं के चिन्हांकन के विशेष निर्देश दिए।  कलेक्टर ने ब्लॉकवार समीक्षा करते हुए बड़ामलहरा सहित अन्य ब्लॉकों को चतुर्थ एएनसी चैकअप बढ़ाने के निर्देश दिए।  कलेक्टर ने सरबई, बारीगढ़, गौरिहार, बाजना और बक्सवाहा में भी ज्यादा से ज्यादा एएनसी चैकअप कैम्प आयोजित करने एवं घुवारा पीएचसी पर भी कैम्प लगाने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने कहा डिलीवरी के संबंध में शासकीय एवं प्राइवेट अस्पतालों का डेटा एचआईएमएस एवं अनमोल पोर्टल में प्रमुख रूप से अपडेट हो। कलेक्टर ने गर्भवती महिलाओं एवं धात्री महिलाओं की ईकेवायसी और डीबीटी शतप्रतिशत कराने के निर्देश दिए।  एएनएम की वेतन वृद्धि रोकने, आशा को हटाने एवं 108 एम्बुलेंस पर पेनाल्टी के निर्देश कलेक्टर ने दो गर्भवती महिलाओं की लापरवाही के कारण मृत्यु होने के संबंध में संबंधित पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए है। पहला प्रकरण भूरी आदिवासी ग्राम ब्रजपुरा किशनगढ़ दो घंटे विलंब से 108 पहुंचने के संबंध में एमडी को पेनाल्टी लगाने के संबंध में पत्र लिखने के निर्देश दिए। साथ ही एएनसी चैकअप नहीं करने पर एएनएम की वेतन वृद्धि रोकने एवं आशा कार्यकर्ता की सेवा समाप्त करने के निर्देश दिए। इसके अलावा ग्राम चौपरा बक्सवाहा पूनम आदिवासी का प्लेसेंटा न निकलने से मृत्यु हो जाने के संबंध में सीएमएचओ को बीएमओ और बीसीएम की जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने एसएनसीयू और पीआईसीयू और लो बर्थ एवं लिंगानुपात की समीक्षा करते हुए यूविन पोर्टल में एंट्री बढ़ाने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने राजनगर अंतर्गत टीकाकरण कार्य में सुधार लाने के निर्देश दिए।  कलेक्टर ने एनसीडी स्क्रीनिंग में लवकुशनगर एवं राजनगर में खराब स्थिति होने पर प्रोग्रेस बढ़ाने के निर्देश दिए। साथ ही लवकुशनगर बीएमओ को कारण बताओ नोटिस जारी करने और सीएचओ पर कार्यवाही करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा हाइपरटेंशन एवं डायबिटीज की स्क्रीनिंग बढ़ाएं।  कलेक्टर ने टीबी स्क्रीनिंग के संबंध में लापरवाही पर राजनगर बीएमओ को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। साथ ही गौरिहार, लवकुशनगर एवं राजनगर के टीबी प्रभारी एवं डीटीओ की तीन दिवस का वेतन काटने के निर्देश दिए।  कलेक्टर ने निक्षय पोषण योजना में गौरिहार, बिजावर और बक्सवाहा में डीबीटी की कम प्रोग्रेस होने पर बढ़ाने के निर्देश दिए।  कलेक्टर ने नो फंग्शनल डिलीवरी प्वाइंट की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि स्टाफ की पदस्थापना के संबंध में अन्य जगह के स्टाफ की ड्यूटी लगाने के संबंध में आवश्यक कार्यवाही करें। साथ ही पदस्थापना होने के बाद भी कार्य में लापरवाही करने पर कर्री के डॉक्टर पर कार्यवाही का प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए।  कलेक्टर जैसवाल ने सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को शिकायतकर्ता से स्वयं बात कर शिकायतों को संतुष्टि से बंद करने की निर्देश दिए।  कलेक्टर ने बड़ामलहरा, बिजावर,  लवकुशनगर बीएमओ को सीएम हेल्पलाइन की ग्रेडिंग के संबंध में जानकारी नहीं होने पर एक-एक दिवस का वेतन काटने के निर्देश दिए। साथ ही कहा कि जो बीएमओ पिछले 6 महीने से लगातार सी एवं डी ग्रेड में आ रहे हैं उनके खिलाफ कार्रवाई का प्रस्ताव भेजें। recent visitors 112

कंपनियों से निकलने वाला रासायनिक सीवेज का पानी बेतवा नदी को कर रहा है प्रदूषित

कंपनियों से निकलने वाला रासायनिक सीवेज का पानी बेतवा नदी को कर रहा है प्रदूषित

Chemical sewage water from companies is polluting the Betwa River. मंडीदीप। polluting the Betwa River मध्य प्रदेश सरकार नदियों को संभालने के लिए भरसक प्रयास कर रही है परंतु राजधानी के सटीक औद्योगिक शहर मंडीदीप मे कंपनियों से निकलने वाले रासायनिक केमिकलो से नदियां प्रदूषित हो रही है जिसको रोकने में प्रशासन नाकाम साबित हो रहा है प्राप्त जानकारी के अनुसार नदियों की हालत यह है कि कंपनियों से निकलने वाला काला रसायन युक्त पानी एवं सीवेज का पानी नदियों में मिलने से बदबू चारों ओर फैल रही है जिसके कारण नदी प्रदूषित हो ही रही है। साथ ही बदबू आने से लोगों का आवागमन दुश्वार है जिसकी चमक अब बेतवा नदी के अस्तित्व पर भारी पड़ती नजर आ रही है। यहां की दर्जनों औद्योगिक इकाइयों से प्रतिदिन हजारों लीटर गंदा पानी बिना शोधन के नदी में गिराया जा रहा है। परिणामस्वरूप बेतवा का जल पूरी तरह प्रदूषित हो चुका है और इसका असर मानव, पशु एवं पर्यावरण पर सीधा पड़ रहा है। कंपनियां कर रही है प्रदूषितमंडीदीप औद्योगिक क्षेत्र की कई बड़ी इकाइयों से निकलने वाला रासायनिक युक्त अपशिष्ट सीधे नालों के माध्यम से बहकर बेतवा नदी में जा रहा है। शुद्धिकरण संयंत्र (ETP) केवल कागजों में सक्रिय हैं, हकीकत में अधिकांश इकाइयों में उनका संचालन नहीं किया जा रहा। नाला बनकर नदी में बहाते हे गंदा पानी polluting the Betwa Riverऔद्योगिक क्षेत्र से लेकर बेतवा के किनारों तक छोटे-बड़े नाले दिखाई देते हैं, जिनसे लगातार काला और बदबूदार पानी नदी में मिल रहा है। यह दृश्य न केवल प्रदूषण की भयावहता को दर्शाता है, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही को भी उजागर करता है। बेतवा नदी मंडीदीप पहुंचते ही गंदे पानी से हो जाती है दूषित polluting the Betwa Riverबेतवा नदी जब मंडीदीप सीमा में प्रवेश करती है, तो उसका जल बिल्कुल साफ दिखाई देता है। लेकिन कुछ ही किलोमीटर बाद पानी का रंग हरा-काला पड़ जाता है, जिसमें झाग और तेल की परतें स्पष्ट नजर आती हैं। दूषित जल में जलीय जीवों की हो रही है मृत्युरासायनिक अपशिष्ट और ऑक्सीजन की कमी के कारण नदी में मछलियों और अन्य जलीय जीवों की मृत्यु हो रही है। स्थानीय मछुआरे बताते हैं कि अब नदी में जीव-जंतुओं की संख्या तेजी से घट गई है। किसान अपने खेतों में नहीं देते बेतवा का पानीबेतवा का पानी इतना जहरीला हो गया है कि किसान अब इससे अपने खेतों की सिंचाई करने से बच रहे हैं। उनका कहना है कि इस पानी से फसलें खराब हो जाती हैं और मिट्टी की उर्वरता घटती जा रही है। जानवर भी नहीं पीते बेतवा का पानीस्थानीय पशुपालक बताते हैं कि अब उनके मवेशी भी बेतवा नदी का पानी नहीं पीते। नदी के किनारे जब पशु चराने जाते हैं, तो बदबू और झाग देखकर वे स्वयं पीछे हट जाते हैं। बेतवा नदी का अस्तित्व खतरे में प्रशासन को रहना पड़ेगा सतर्क polluting the Betwa Riverयदि यही हाल रहा तो आने वाले वर्षों में बेतवा नदी का प्राकृतिक अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। एक ओर उद्योगों की संख्या बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर पर्यावरणीय सुरक्षा के मानक पूरी तरह नजरअंदाज किए जा रहे हैं। प्रशासन को सतर्क होकर नदियों का अस्तित्व बचाना चाहिए जिम्मेदार अधिकारी मूखदर्शक दर्शक बने देख रहे हैं तमाशास्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों द्वारा कई बार प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, नगर पालिका और जिला प्रशासन को शिकायतें दी गईं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अधिकारी एक-दूसरे पर जिम्मेदारी टाल रहे हैं और प्रदूषण फैलाने वाले उद्योग निश्चिंत होकर पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहे हैं। जनता की मांग बेतवा को बचाने तुरंत हो सख्त कार्रवाईपर्यावरण प्रेमियों ने मुख्यमंत्री एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से मांग की है कि मंडीदीप की सभी औद्योगिक इकाइयों की जांच की जाए, दोषी उद्योगों पर भारी जुर्माना लगाया जाए और बेतवा नदी को बचाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए। इनका कहना है। प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी शीघ्र ही कार्रवाई कीजाएगी ओर बेतवा नदी को प्रदूषित होने होने से बचाने के लिए प्रशासन हर संभव प्रयास करेगा और शीघ्र ही कठोर कदम उठाए जाएंगे।चंद्रशेखर श्रीवास्तव एसडीएम गोहरगंज recent visitors 106

राज्यरानी समेत 8 ट्रैने जल्दी ही भोपाल से नहीं बल्कि रानी कमलापति स्टेशन से चलेंगी

राज्यरानी समेत 8 ट्रैने जल्दी ही भोपाल से नहीं बल्कि रानी कमलापति स्टेशन से चलेंगी

8 trains including Rajya Rani will soon run from Rani Kamlapati station instead of Bhopal. भोपाल। रेलवे प्रशासन कुछ ट्रेनों का संचालन भोपाल स्टेशन की जगह अब रानी कमलापति स्टेशन (RKMP) से शुरू करने की तैयारी में है। इसका सबसे ज्यादा फायदा नए भोपाल की कुछ कॉलोनियो की बजाय रानी कमलापति रेलवे स्टेशन के ठेकेदार को होगा। जिन ट्रेनों के शिफ्ट होने की जानकारी सामने आ रही है। उसके मुताबिक, भोपाल-दमोह राज्यरानी एक्सप्रेस, ग्वालियर इंटरसिटी, विंध्याचल एक्सप्रेस सहित कुल 8 प्रमुख ट्रेनें शामिल हैं। इनके चलने के समय में परिवर्तन होगा या नहीं, रेलवे ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है। रेलवे इस प्रस्ताव पर फीजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार कर रहा है। अगर अध्ययन में यात्रियों की डिमांड अधिक पाई गई और आरकेएमपी स्टेशन पर नया पिट लाइन बनने के बाद संचालन में दिक्कत नहीं हुई, तो ट्रेनों की शिफ्टिंग कर दी जाएगी। रेल अधिकारियों के अनुसार, इन आठ ट्रेनों से प्रतिदिन करीब 12,000 यात्री एक तरफ से यात्रा करते हैं।हालांकि इस नई व्यवस्था से आंशिक तौर पर नर्मदापुरम रोड, अरेरा कॉलोनी, शाहपुरा, गुलमोहर, बावड़िया कला में रहने वाले करीब 2.5 लाख यात्रियों को फायदा मिलने की उम्मीद है। भोपाल स्टेशन से ये 8 ट्रेनें होंगी शिफ्ट recent visitors 95