जबलपुर: कालीमठ गरबा महोत्सव का भव्य समापन, गरबा की धुन पर झूमीं महिलाएं और बच्चे

Jabalpur: Kalimath Garba Festival concludes with grand celebrations; women and children dance to the tunes of Garba. विशेष संवाददाता: जितेन्द्र श्रीवास्तव/अर्पिता श्रीवास्तव  जबलपुर। कालीमठ आश्रम, मदन महल में आयोजित कालीमठ गरबा महोत्सव का आज, 12 अक्टूबर को भव्य समापन हुआ। चार दिवसीय गरबा वर्कशॉप के बाद आयोजित ग्रैंड फिनाले गरबा नाइट में महिलाओं और बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों में सजे प्रतिभागियों ने गरबा की मनमोहक प्रस्तुतियों से कार्यक्रम में उत्सव का माहौल बना दिया। महोत्सव का आयोजन विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों के लिए किया गया था। फ्लेक के अनुसार, गरबा वर्कशॉप 8 से 11 अक्टूबर तक आयोजित हुई, जिसमें प्रतिभागियों के लिए अलग-अलग बैच निर्धारित किए गए थे। इसके बाद सोमवार, 12 अक्टूबर को शाम 7 बजे से रात 11 बजे तक ग्रैंड फिनाले गरबा नाइट आयोजित की गई। कार्यक्रम में गरबा और पारंपरिक नृत्य के माध्यम से प्रतिभागियों को अपनी कला और उत्साह प्रदर्शित करने का अवसर मिला। आयोजन का उद्देश्य महिलाओं और बच्चों को सांस्कृतिक गतिविधियों से जोड़ना तथा सामूहिक उत्सव के लिए मंच उपलब्ध कराना रहा। स्थान: कालीमठ आश्रम, मदन महल, जबलपुर। कालीमठ गरबा महोत्सव का समापन उत्साह और सांस्कृतिक रंगों के बीच हुआ। आयोजकों की ओर से प्रतिभागियों की सहभागिता के साथ इस आयोजन को संपन्न किया गया। recent visitors 24

झूले से गिरकर बच्चे का पैर फ्रैक्चर, प्राचार्य और प्रबंधन को कोर्ट का नोटिस।

Child’s leg fractured after falling from a swing, court notice to principal and management. हरिप्रसाद गोहे  आमला। स्कूल परिसर में झूले से गिरकर छात्र का पैर फ्रैक्चर होने का मामला करीब डेढ़ साल बाद न्यायालय पहुंचा है। अप्रैल 2025 में हुई इस घटना में पुलिस द्वारा कार्रवाई नहीं किए जाने पर पीड़ित बच्चे के पिता ने न्यायालय की शरण ली। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, आमला के न्यायालय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्कालीन प्राचार्य और स्कूल प्रबंधन प्रमुख को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 223 के तहत व्यक्तिगत उपस्थिति के नोटिस जारी किए हैं। न्यायालय ने दोनों को आगामी 30 अक्टूबर को न्यायालय में उपस्थित होकर अपना पक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। इलाज में खर्च हुए 20 हजार, प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप। परिवादी पिता के अनुसार हादसे में उनके बच्चे के पैर में गंभीर फ्रैक्चर हुआ था, जिसके उपचार में लगभग 20 हजार रुपए का खर्च आया। पिता ने स्कूल प्रबंधन पर बच्चों की सुरक्षा में कथित लापरवाही बरतने और हादसे के बाद उपचार खर्च में अपेक्षित सहयोग नहीं देने का आरोप लगाया है। बताया गया कि घटना के बाद पुलिस और प्रशासन के समक्ष शिकायत की गई थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने पर पिता ने अधिवक्ता शिवम उपाध्याय के माध्यम से न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत किया। अब न्यायालयीन प्रक्रिया के तहत संबंधित जिम्मेदारों को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के नोटिस जारी किए गए हैं। बच्चों की सुरक्षा स्कूलों की अहम जिम्मेदारी। निजी स्कूलों की जिम्मेदारी बेहतर शिक्षा देने के साथ बच्चों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना भी है। खेल उपकरणों का सुरक्षित रखरखाव, समय-समय पर मेंटेनेंस और बच्चों की उचित निगरानी बेहद जरूरी है। हालांकि इस मामले में लापरवाही की वास्तविक जिम्मेदारी न्यायालयीन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही तय होगी। यह घटना स्कूलों में सुरक्षा व्यवस्थाओं की नियमित समीक्षा और हादसों की स्थिति में समय पर उचित कार्रवाई की आवश्यकता को रेखांकित करती है। recent visitors 18

संभागीय संयुक्त संचालक कार्यालय में भी RTI को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा।

RTI matters are not being taken seriously at the Divisional Joint Director’s office either. हरिप्रसाद गोहेआमला । सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 को पारदर्शिता का सबसे बड़ा हथियार माना जाता है, लेकिन नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग नर्मदापुरम् संभाग में ही इस कानून को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है।प्राप्त जानकारी अनुसार पत्रकार हरिप्रसाद गोहे द्वारा नगर पालिका परिषद आमला के लोक सूचना अधिकारी के विरुद्ध सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 19(1) के तहत प्रथम अपील दायर की गई थी।उक्त प्रथम अपील के निराकरण हेतु कार्यालय संभागीय संयुक्त संचालक, नगरीय प्रशासन एवं विकास नर्मदापुरम् संभाग द्वारा पत्र क्रमांक /स.सं./सू.अ./प्र.क्र.166/2026/1505 दिनांक 05/10/2026 के माध्यम से प्रकरण में सुनवाई हेतु दिनांक 12/10/2026 को दोपहर 12:30 बजे आयुक्त कार्यालय नवीन भवन रूम नंबर 54 में उपस्थित होने हेतु सूचना पत्र जारी किया गया था।नियत तिथि 12 अक्टूबर को अपीलार्थी पत्रकार हरिप्रसाद गोहे निर्धारित समय पर संबंधित कार्यालय में उपस्थित हुए, परंतु खेद का विषय है कि सुनवाई हेतु न तो संभागीय संयुक्त संचालक स्वयं कार्यालय में उपस्थित थे और न ही प्रतिवादी लोक सूचना अधिकारी एवं मुख्य नगर पालिका अधिकारी नगर पालिका परिषद आमला सुनवाई में पहुंचे। जब अधिकारी ही गंभीर नहीं तो अधीनस्थों से क्या उम्मीद – हरिप्रसाद गोहे।इस संबंध में पत्रकार हरिप्रसाद गोहे ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि जब प्रथम अपीलीय अधिकारी संभागीय संयुक्त संचालक स्तर के अधिकारी ही RTI जैसे महत्वपूर्ण अधिनियम की सुनवाई को गंभीरता से नहीं लेते, तो अधीनस्थ कार्यालयों से पारदर्शिता की क्या उम्मीद की जा सकती है।उन्होंने आरोप लगाया कि जनहित से संबंधित कार्यों में अनियमितता और भ्रष्टाचार की शिकायतों के बाद जब नगर पालिका परिषद आमला में RTI के तहत जानकारी चाही जाती है, तो लोक सूचना अधिकारी अनियमितताओं पर पर्दा डालने के उद्देश्य से आवेदकों को जानकारी उपलब्ध ही नहीं कराते हैं।‘सैयां भए कोतवाल तो अब डर काहे का’।नगर में चर्चा है कि नगर पालिका परिषद आमला के प्रभारी मुख्य नगर पालिका अधिकारी को संचालनालय नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त है, जिसके चलते आमला में ‘सैयां भए कोतवाल तो अब डर काहे का’ कहावत चरितार्थ हो रही है।पीड़ित पत्रकार ने बताया कि इस पूरे मामले की शिकायत अब नगरीय विकास एवं आवास मंत्री से करने की तैयारी की जा रही है। recent visitors 17

‘रोज 100 से 300 रुपये की भीख के बदले मिलता है सिर्फ खाना’, बच्चे का वीडियो वायरल

‘Gets only food in exchange for ₹100–₹300 in daily alms’ – video of child from Gwalior goes viral. ग्वालियर। बाल भिक्षावृत्ति को रोकने के अभियान की पोल खोलता एक वीडियो सोमवार को वायरल हुआ। बैजाताल पर बैठे एक बच्चे से वीडियो में युवक बात कर रहा है जिसमें वह बता रहा है कि रोज 100 से 300 रुपये तक भीख मिलती है जिसे मुखिया को दे देता है और बदले में सिर्फ खाना मिलता है। बच्चे के ऐसे और भी कई साथी है, उसने खुद को फूलबाग पर रहना बताया। इस वीडियो से प्रशासन से लेकर बाल भिक्षावृत्ति रोकने वाले विभागों के अभियान पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। पहले इसको लेकर तिराहों व सिग्नलों पर भीख मांगते बच्चों को रेस्क्यू करने का अभियान काफी चला था। ग्वालियर जिले में बाल भिक्षावृत्ति पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से जिला प्रशासन द्वारा विशेष अभियान चलाया था जिसमें इस अभियान में महिला बाल विकास विभाग, श्रम विभाग, विशेष किशोर पुलिस इकाई, नेहरू युवा केंद्र और सेंटर फॉर डेवलपमेंट के सदस्य सक्रिय रूप से शामिल थे। इसके बाद बीच-बीच में चलकर यह अभियान अब सक्रिय नहीं दिखता है। वर्तमान में हकीकत यह है कि मंदिरों से लेकर चौराहों व तिराहों के साथ सिग्नलों पर बाल भिक्षावृत्ति आसानी से देखी जा सकती है लेकिन कार्रवाई नहीं होती है। इधर, मालगाड़ी की चपेट में आने से 25 वर्षीय युवक की मौतबिरलानगर और रायरू रेलवे स्टेशन के बीच सोमवार सुबह मालगाड़ी की चपेट में आने से 25 वर्षीय युवक की मौत हो गई। रेलवे ट्रैक के पास युवक का शव पड़ा होने की सूचना मिलने पर रेलवे सुरक्षा बल और जीआरपी की टीम मौके पर पहुंची। पंचनामा की कार्रवाई के बाद शव को एंबुलेंस से ले जाया गया। रेलवे से मिली जानकारी के अनुसार, सोमवार सुबह 6:55 बजे झांसी मंडल के नियंत्रण कक्ष से सूचना मिली कि बिरलानगर-रायरू के बीच किलोमीटर नंबर 1228/21 पर डाउन मालगाड़ी संख्या 156 से दुर्घटना हुई है। सूचना पर बिरलानगर में तैनात रेलवे सुरक्षा बल के आरक्षक धर्मवीर सिंह और नरपाल घटनास्थल पर पहुंचे। वहां रेलवे ट्रैक के पास एक युवक का शव पड़ा मिला। मौके पर बिरलानगर स्टेशन के पाइंट्समैन सुनील कुमार भी मौजूद थे। कुछ देर बाद जीआरपी ग्वालियर की टीम भी घटनास्थल पर पहुंच गई। मृतक की पहचान दीपक चौरसिया, उम्र 25 वर्ष के रूप में हुई। मौके पर पहुंचे उसके चचेरे भाई शिवदत्त ने उसकी पहचान की। हालांकि, घटना किन परिस्थितियों में हुई, इसकी जानकारी नहीं मिल सकी। मृतक के पास तलाशी के दौरान यात्रा टिकट, पहचान संबंधी दस्तावेज या अन्य सामान नहीं मिला। पंचनामा की कार्रवाई के बाद जीआरपी ने सुबह करीब 10:30 बजे शव को आगे की कार्रवाई के लिए भिजवा दिया। पुलिस घटना के कारणों की जांच कर रही है। recent visitors 21

तिरंगा लेकर जंतर-मंतर पहुंचे: फिर हिरासत में सौरव दास-रांका; दिपके बोले- प्रतिरोध को दबा नहीं सकते

Arrived at Jantar Mantar with the Tricolour: Sourav Das and Ranka detained again; Dipke says resistance cannot be suppressed. दिल्ली के जंतर-मंतर पर मंगलवार सुबह तिरंगा लेकर पहुंचे कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। सीजेपी की ओर से साझा की गई पोस्ट के मुताबिक, हिरासत में लिए गए लोगों में आशुतोष रांका, सौरव दास और अजिंक्य समेत संगठन के अन्य सदस्य शामिल हैं। दिपके ने क्या-क्या कहा?सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक देशभर में प्रदर्शन जारी रहेंगे। उन्होंने सवाल उठाया कि चुनाव आयोग के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने क्या कार्रवाई की है। दिपके ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने का जिक्र करते हुए कहा कि लोगों से कहा गया कि वे इस बार मतदान नहीं कर सकते तो अगली बार कर लेंगे। उन्होंने सवाल किया कि क्या सुप्रीम कोर्ट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी यही कहेगा कि वह इस बार चुनाव न लड़ें और अगली बार लड़ लें? दिपके ने दिल्ली में इंडिया गठबंधन के विरोध प्रदर्शन को बड़ा और महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि विपक्ष समेत पूरे देश को ऐसे प्रदर्शनों के लिए एकजुट होना चाहिए। पहले विमान से हिरासत, फिर रिहाई और अब जंतर-मंतर पर कार्रवाईकॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेताओं को दिल्ली पुलिस ने पहली बार 10 अक्तूबर को हिरासत में लिया था। पार्टी के संयोजक अभिजीत दिपके, सह-संयोजक आशुतोष रांका और मुख्य प्रवक्ता सौरव दास दिल्ली में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में पहुंचने की कोशिश में थे। पुलिस ने तीनों को दिल्ली हवाई अड्डे पर विमान के अंदर से हिरासत में ले लिया। सीजेपी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन करना चाहती थी। पार्टी का आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में अनियमितताएं हुई हैं। इसके बाद 11 अक्तूबर को तीनों नेताओं को कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया। उन्हें एक साल तक शांति बनाए रखने और अच्छे आचरण की शर्त पर 50 हजार रुपये के जमानती मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया गया। प्रदर्शन की अनुमति लेने थाने पहुंचे थे रांका-दासरिहाई के बाद सीजेपी ने प्रदर्शन से पीछे हटने के बजाय आंदोलन जारी रखने का एलान किया। 12 अक्तूबर को आशुतोष रांका और सौरव दास पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन पहुंचे। उन्होंने दिल्ली पुलिस से जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए 24 घंटे के भीतर तारीख और समय तय करने की मांग की। उनका कहना था कि अगर पुलिस तारीख नहीं देती है, तो पार्टी खुद प्रदर्शन का एलान करेगी। इसी बीच दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर रोड को प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थल की सूची से हटा दिया। पुलिस ने प्रदर्शन के लिए रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और सीबीडी मैदान जैसे वैकल्पिक स्थान बताए। सीजेपी ने इस फैसले पर आपत्ति जताई और जंतर-मंतर पर ही प्रदर्शन करने की मांग जारी रखी। इसी घटनाक्रम के बीच 13 अक्तूबर की सुबह सीजेपी के नेता और कार्यकर्ता तिरंगा लेकर जंतर-मंतर पहुंचे। पार्टी के संयोजक अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि आशुतोष रांका, सौरव दास और अजिंक्य शिंदे समेत कई सदस्यों को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया। बार-बार जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की क्यों हो रही है कोशिश?इसकी मुख्य वजह मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और मतदाता सूची में बदलाव को लेकर उठे सवाल हैं। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) और कई छात्र संगठनों का आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान बड़ी संख्या में लोगों के नाम हटाए गए हैं। प्रदर्शनकारी इसे मतदाताओं के अधिकार और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता से जुड़ा मुद्दा बता रहे हैं। इसी विरोध के तहत 10 अक्तूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का एलान किया गया था। recent visitors 17

कूनो में अब तक 28 चीतों की मौत, इस साल 7 ने गंवाई जान; आशा के 8 माह के शावक की भी गई जान

28 cheetahs have died in Kuno so far, with 7 losing their lives this year; Asha’s 8-month-old cub has also died. मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में चीतों की मौत का सिलसिला जारी है। अक्टूबर 2022 में शुरू हुए चीता पुनर्स्थापना प्रोजेक्ट के बाद अब तक 28 चीतों की मौत हो चुकी है। इनमें वयस्क चीते और भारत में जन्मे शावक दोनों शामिल हैं। इस साल अब तक सात चीतों की मौत हुई है। ताजा मामला नामीबियाई मादा चीता आशा के आठ महीने के शावक की मौत का है। शावक की मौत का कारण फिलहाल स्पष्ट नहीं है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति साफ हो सकेगी। 2023 में सबसे ज्यादा 9 चीतों की मौतसरकारी आंकड़ों के अनुसार, प्रोजेक्ट शुरू होने के बाद शुरुआती तीन वर्षों में भी कई चीतों की मौत हुई। सालवार आंकड़े के अनुसार वर्ष 2023 में 6 वयस्क चीते और तीन शवक कुल 9 मौतें। 2024 में 2 वयस्क और चार शावक यानी कुल 6 मौतें। 2025 में एक वयस्क और पांच शावक यानी कुल 6 मौतें। 2026 में 12 अक्टूबर तक दो वयस्क, पांच शावक कुल सात चीतों की मौत हुई। इस प्रकार अब तक 11 वयश्क, 17 शावक समेत कुल 28 चीतों की मौत हो चुकी हैं। इस साल इन घटनाओं में गई जानइस वर्ष सात चीतों की जान गई। इसमें मई 2026 में जंगल में जन्मे चार शावक मृत मिले थे। उनकी मौत के पीछे किसी दूसरे वन्यजीव के हमले की आशंका जताई गई थी। जून 2026 में भारतीय मूल की मादा चीता KGP-11 की मोरेना जिले में चोटों के कारण मौत हुई। सितंबर 2026 में नामीबियाई चीता गौरव की मौत हुई। उसे कमजोर और डिहाइड्रेशन की स्थिति में पाया गया था। अधिकारियों के अनुसार, उसे पहले से एक गंभीर बीमारी थी। वहीं, 12 अक्टूबर 2026 को आशा के आठ महीने के पांच शावकों में से एक मृत मिला। उसकी मौत का कारण अभी स्पष्ट नहीं है। अब भारत में कितने चीते बचे हैं?5 अक्टूबर 2026 को कूनो में पांच शावकों के जन्म के बाद देश में चीतों की संख्या बढ़कर 60 हो गई थी। इसके बाद आशा के एक शावक की मौत के साथ यह संख्या घटकर 59 रह गई है। इनमें कूनो नेशनल पार्क, गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य और वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में मौजूद चीते शामिल हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर भी उठा सवालचीतों की मौत के बीच उनकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं किए जाने का मुद्दा भी सामने आया है। वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे ने प्रोजेक्ट शुरू होने के बाद से मृत चीतों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट मांगी थी। हाल ही में मध्यप्रदेश वन विभाग ने सूचना का अधिकार कानून के तहत मांगी गई जानकारी देने से इनकार करते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी छूट का हवाला दिया। इससे रिपोर्टों की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठे हैं। recent visitors 17

जबलपुर में नर्मदा नदी पर बनेगा 150 मीटर लंबा ब्रिज, हेल्थ मॉनिटरिंग सिस्टम के सेंसर से होगी निगरानी

A 150-meter-long bridge will be built over the Narmada River in Jabalpur; it will be monitored by sensors from a health monitoring system. विशेष संवाददाता जितेन्द्र श्रीवास्तव अर्पिता श्रीवास्तवजबलपुर। जबलपुर की 114 किलोमीटर लंबी आउटर रिंग रोड परियोजना का करीब 75 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। लगभग 3500 करोड़ रुपये की इस परियोजना में नर्मदा नदी पर 150 मीटर स्पान पर एक्स्ट्राडोज्ड ब्रिज बनाया जा रहा है। इसे मार्च 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है। वहीं, अमझर से बरेला तक के पांचवें पैकेज में करीब 30 प्रतिशत काम हुआ है, जिसे दिसंबर 2027 तक पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है। रिंग रोड बनने से शहर के भीतर भारी वाहनों का दबाव कम होने और प्रमुख राजमार्गों के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है। ब्रिज की तकनीकी बारीकियों का निरीक्षणयह जानकारी शनिवार को एनएचएआई के अधिकारियों ने पत्रकारों के साथ रिंग रोड़ निर्माण के निरीक्षण के दौरान कही। उन्होंने बरेला से मनेगांव के बीच नर्मदा नदी पर बन रहे केबल ब्रिज की तकनीकी बारीकियों को देखा और पत्रकारों के सवालों के जवाब दिए।एनएचएआई के प्रोजेक्ट प्रभारी पीयूष रंजन ने दावा किया कि एनएचएआई में यह प्रदेश का पहला केबल ब्रिज है, जो केबल के साथ पिलर पर भी खड़ा है। करीब एक किमी लंबे इस ब्रिज का मुख्य भाग में लगे पिलर के बीच करीब 150 मीटर की दूरी है, जो इसे और मजबूत और आकर्षित बनाता है। उन्होंने बताया कि इस केबल ब्रिज का निर्माण पूरा होने के बाद इसमें एडवांस हेल्थ मानिटरिंग सिस्टम के सेंसर लगाए जाएंगे। इनसे पुल के झुकाव और केबलों के तनाव में होने वाले बदलावों की रियल टाइम निगरानी की जाएगी।डेटा को एटीएमएस कंट्रोल सेंटर से जोड़ने की योजना है। अधिकारियों के अनुसार, स्वतंत्र इंजीनियर इसकी निगरानी करेंगे, ताकि संभावित तकनीकी खामियों का समय रहते पता लगाकर सुधारात्मक कदम उठाए जा सकें। अधिकारियों ने पुलों और प्रमुख संरचनाओं की डिजाइन लाइफ करीब 100 वर्ष बताई है। पुल में लगेंगे प्रोफाइल लाइटिंगनर्मदा पर बन रहे एक्स्ट्राडोज्ड ब्रिज में 150 मीटर का स्पान रखा गया है। सामान्य तकनीक से 50-50 मीटर के स्पान बनाने पर करीब 10 फाउंडेशन की जरूरत होती, जबकि इस डिजाइन में तीन से चार फाउंडेशन से काम पूरा करने की योजना है।इससे नदी के भीतर निर्माण करने में लगने वाले अतिरिक्त प्रयास और संसाधनों की बचत होगी। ब्रिज के एक हिस्से में छह केबल लगाने का काम पूरा हो चुका है। पुराने पुल के जीर्णोद्धार और फसाड लाइटिंग का प्रस्ताव भी है, ताकि घाट की ओर से इसका दृश्य आकर्षक दिखाई दे। पूरी रिंग रोड पर सर्विस रोड एनएचएआई के प्रबंधक तकनीकी पारस बंसल ने बताया कि इस पूरे रिंग रोड़ पर सर्विस रोड भी बनाई है। मुख्य सड़क का उपयोग तेज और भारी वाहनों के लिए होगा, जबकि सर्विस रोड से स्थानीय लोगों को आवाजाही की सुविधा मिलेगी।इससे स्थानीय और तेज गति वाले यातायात के बीच टकराव कम करने में मदद मिल सकती है। मुख्य सड़क से जुड़ने के लिए पैकेज-1 में पांच, पैकेज-2 में छह, पैकेज-3 में आठ और पैकेज-4 में चार प्रवेश-निकास बिंदु रखे गए हैं। पैकेज-5 में एक्सेस कंट्रोल के तहत केवल दो बिंदु प्रस्तावित हैं। पांच साल तक ठेकेदार की जिम्मेदारी पत्रकारों से चर्चा करते हुए एनएचएआई के अधिकारियों ने बताया कि निर्माण पूरा होने के बाद पांच साल तक सड़क के रखरखाव की जिम्मेदारी संविदाकार की होगी। इसके बाद सरकार यातायात की संभावनाओं और वित्तीय जरूरतों के आधार पर सामान्य रखरखाव या मुद्रीकरण पर निर्णय लेगी। उन्होंने नईदुनिया के एक सवाल का जवाब देते हुए कहा कि डामर और सीमेंट-कंक्रीट सड़क में से किस तकनीक का उपयोग किया जाए, यह लागत, यातायात और रखरखाव की जरूरतों पर निर्भर करता है। टायर फटने की घटनाओं के लिए केवल सीसी सड़क को जिम्मेदार नहीं माना जा सकता, तेज गति, टायर का दबाव, ओवरलोडिंग और खराब स्थिति भी इसके कारण हो सकते हैं। recent visitors 24