एमपी राज्यपाल देने वाले हैं इस्तीफा? हाई कोर्ट के फैसले पर टिकी सब की नजरें

MP Governor about to resign? All eyes on the High Court’s decision विशेष संवाददाता: जितेन्द्र श्रीवास्तव/अर्पिता श्रीवास्तव  जबलपुर । राज्यपाल मंगूभाई पटेल के कार्यकाल को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हुई. जबलपुर कृषि विश्वविद्यालय की सेवानिवृत्त प्रोफेसर डॉ. एमए खान की ओर से दायर याचिका में दावा किया गया है कि मंगूभाई पटेल का 5 वर्ष का कार्यकाल पूरा हो चुका है. इसलिए उन्हें पद से इस्तीफा देना चाहिए. हाई कोर्ट ने इस मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया है. याचिका में पद छोड़ने की मांग याचिका की सुनवाई हाई कोर्ट की जस्टिस आरएन पाठक और जस्टिस बीपी शर्मा की खंडपीठ में हुई. याचिकाकर्ता की ओर से संविधान के अनुच्छेद 153 और 156 का हवाला देते हुए कहा गया “राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं और उनका सामान्य कार्यकाल 5 वर्ष का होता है.” याचिका में मांग की गई है “5 वर्ष पूरे हो जाने पर राज्यपाल अपना पद छोड़ देते हैं पहले ऐसे उदाहरण सामने आए हैं. नया राज्यपाल नियुक्त होने तक राज्यपाल के कामकाज की जिम्मेदारी मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को सौंपी जाए.” केंद्र सरकार ने रखा अलग पक्ष इस मामले में भारत सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ने दलील दी “संविधान के अनुच्छेद 156 के अनुसार राज्यपाल 5 वर्ष की अवधि के लिए पद पर रहते हैं, लेकिन उनका कार्यकाल नए राज्यपाल के पदभार ग्रहण करने तक जारी रह सकता है. ऐसे में केवल 5 वर्ष पूरे होने के आधार पर राज्यपाल का पद स्वतः रिक्त नहीं माना जा सकता.” दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाई कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है. गुजरात में मंत्री रह चुके हैं मंगूभाई राज्यपाल मंगू भाई पटेल का जन्म 1 जून 1944 को गुजरात के नवसारी में हुआ. उन्होंने गुजरात की राजनीति में लंबे समय तक सक्रिय भूमिका निभाई. वह नवसारी से 5 बार और गांदेवी से एक बार विधायक रहे. गुजरात सरकार में वे आदिवासी कल्याण तथा बाद में वन एवं पर्यावरण विभाग के मंत्री रहे. वर्ष 2013 में वे गुजरात विधानसभा के उपाध्यक्ष भी बने. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने जुलाई 2021 में मंगूभाई पटेल को मध्य प्रदेश का राज्यपाल नियुक्त किया था. उन्होंने 8 जुलाई 2021 को मध्य प्रदेश के राज्यपाल के रूप में शपथ ली थी. याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अजय रायजादा ने पक्ष रखा. recent visitors 19

क्या मध्य प्रदेश में फिर से भारतीय किसान संघ सड़कों पर ट्रैक्टर लेकर उतरा नजर आएगा ,धान की MSP 3100 रुपये करने की मांग

Will the Bharatiya Kisan Sangh (BKS) once again take to the streets with tractors in Madhya Pradesh, demanding an MSP of Rs 3,100 for paddy? विशेष संवाददाता जितेन्द्र श्रीवास्तव/अर्पिता श्रीवास्तव  जबलपुर। मध्य प्रदेश में मोहन सरकार के खिलाफ भारतीय जनता पार्टी का ही एक अनुसांगिक संगठन भारतीय किसान संघ (BKS) सड़कों पर उतरा है. दरअसल, मध्य प्रदेश सरकार ने अनाज खरीदी के लिए भावांतर योजना शुरू की है. किसान संगठन का कहना है कि इस योजना से किसानों को नुकसान है और वह चाहते हैं की पूरी खरीदी समर्थन मूल्य पर हो इसके साथ ही किसानों ने धान का समर्थन मूल्य को ₹3100 किए जाने की मांग की है. जबलपुर में किसान संगठन ने ट्रैक्टर रैली निकालकर अपना विरोध प्रदर्शन किया. धान का समर्थन मूल्य 3,100 रुपये किये जाने की मांग मध्य प्रदेश में भाजपा से जुड़े किसानों के संगठन ने जबलपुर में मंगलवार एक ट्रैक्टर रैली निकाली. इस ट्रैक्टर रैली में सैकड़ों की तादाद में किसान ट्रैक्टरों पर सवार होकर जबलपुर कृषि उपज मंडी से रैली के रूप में निकले और शहर की मुख्य सड़कों से होते हुए जबलपुर के घंटाघर चौक पर पहुंचे. भारतीय किसान संघ के पदाधिकारी राघवेंद्र पटेल ने बताया कि “दरअसल राज्य सरकार ने चुनाव के वक्त कहा था कि मध्य प्रदेश में धान का समर्थन मूल्य ₹3100 किया जाएगा, लेकिन राज्य सरकार ने धान के समर्थन मूल्य को मात्र 2,461 रुपए तक ही बढ़ाया है. हमारी मांग है कि धान का समर्थन मूल्य ₹3100 किया जाना चाहिए.” भावांतर योजना फ्लॉप योजना: राघवेंद्र पटेल वहीं, राज्य सरकार ने बीते दिनों भावांतर योजना शुरू की है जिसके तहत यदि कृषि उपज की खरीदी समर्थन मूल्य पर नहीं हो पाती है तो भाव का अंतर सरकार किसान के खाते में डालेगी. राघवेंद्र पटेल का कहना है कि यह एक फ्लॉप योजना है और इससे किसान का फायदा नहीं होता. इसलिए उन्हें भावांतर नहीं चाहिए बल्कि उनका धान, गेहूं, चना समेत सभी उपज समर्थन मूल्य पर खरीदी जानी चाहिए. भारतीय किसान संघ के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य प्रमोद चौधरी ने बताया कि “आज यह हमारा शक्ति प्रदर्शन था और यह शक्ति प्रदर्शन पूरे प्रदेश में तहसील स्तर से लेकर देश की राजधानी तक में किया जाता है ताकि सरकार के सामने किसान अपनी एकजुटता पेश कर सकें. हमारे कई मुद्दे राज्य सरकार के सामने रखे हुए हैं और कुछ मुद्दों पर किसानों का केंद्र सरकार के सामने मतभेद है इसलिए आज के दिन हर साल हम शक्ति प्रदर्शन के माध्यम से अपनी बात सरकार तक पहुंचाते हैं.” मध्य प्रदेश में किसानों की परेशानियां भारतीय किसान संघ के नेताओं का कहना है कि मध्य प्रदेश का किसान राज्य सरकार से बिजली को लेकर परेशान है. वहीं, खाद की पूरी उपलब्धता और खाद वितरण में नए-नए प्रयोग भी किसान को परेशान कर रहे हैं. इन सब मुद्दों पर भी सरकार को ध्यान देना चाहिए, लेकिन भावांतर और समर्थन मूल्य पर किसान संगठन के तेवर गर्म नजर आ रहे हैं. भारत के सकल घरेलू उत्पाद में कृषि का हिस्सा लगभग 18% है और पीरियोडिक लेबर फोर्स (PLFS) सर्वे की 2025 की रिपोर्ट के अनुसार आज भी भारत के 46% लोग कृषि के जरिए रोजगार प्राप्त करते हैं. हालांकि पहले की अपेक्षा यह निर्भरता घटी है. आज भी आधी आबादी कृषि पर आधारित है. ऐसी स्थिति में सरकार को ग्रामीण विकास और कृषि को फायदे का धंधा बनाने के लिए अपनी वर्तमान योजनाओं में परिवर्तन करना ही पड़ेगा. recent visitors 18

मध्य प्रदेश में लंपी वायरस से मचा हड़कंप, अब तक लगभग तीन दर्जन से अधिक गायों की मौत

Lumpi virus causes panic in Madhya Pradesh, more than three dozen cows have died so far. ग्वालियर। लंपी बीमारी के चलते लगातार गायों की मौतों ने जिम्मेदार सिस्टम में हड़कंप मचा दिया है। गायों की मौत का आंकड़ा मंगलवार को 34 पहुंच गया है। रतवाई गौशाला जिसे आइसोलेशन सेंटर बनाया गया है वहां इलाज के नाकाफी इंतजाम की पोल खुलने के बाद मंगलवार से प्रशासन ने 24 घंटे चिकित्सकों की डयूटी लगाने के निर्देश दिए हैं। कलेक्टर रुचिका चौहान ने लंपी वायरस के संबंध में कलेक्ट्रेट में अफसरों की बैठक बुलाई और व्यवस्थाओं की समीक्षा कर लगातार मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए। पशुपालन विभाग द्वारा अब तक जिले में 25 हजार से अधिक गोवंश को गोट पॉक्स वैक्सीन लगाने का दावा किया है इसके बावजूद संक्रमण की रफ्तार पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। शहर के साथ-साथ भितरवार, डबरा और घाटीगांव जैसे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजाना दर्जनों नए संक्रमित मवेशी सामने आ रहे हैं और बीमारी से होने वाली मौतों का आंकड़ा भी लगातार बढ़ रहा है। मंगलवार को भी रतवाई गोशाला में चार संक्रमित गोवंश की मौत हुई है। यह आंकड़ा केवल रतवाई का है जिले की पूरी स्थिति विभाग को भी स्पष्ट नहीं है। रतवाई आइसोलेशन में 24 घंटे तैनात रहेंगे चिकित्सक जिले में गोवंश को लंपी वायरस से बचाने के लिए प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। कलेक्टर रुचिका चौहान ने मंगलवार को कलेक्ट्रेट में नगर निगम, जिला पंचायत और पशु चिकित्सा विभाग के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए। कलेक्टर ने रतवाई गोशाला स्थित आइसोलेशन सेंटर को और व्यवस्थित बनाने के निर्देश दिए। सेंटर पर मवेशियों के लिए शेड, पेयजल और पर्याप्त दवाओं के भंडारण के साथ-साथ तीन पारियों (शिफ्टों) में डाक्टरों की तैनाती की जाएगी। इसके अलावा रात के समय निगरानी और इलाज के लिए एक विशेष मेडिकल टीम तैनात रहेगी। नगर निगम आयुक्त अभिषेक चौधरी ने बताया कि प्रभावित गोवंश को रतवाई सेंटर पहुंचाने के लिए सात विशेष वाहन और एंबुलेंस संचालित की जा रही हैं। जिला पंचायत सीईओ सोजान सिंह रावत ने बताया कि टीकाकरण की निरंतर मॉनिटरिंग की जा रही है। बैठक में उप संचालक पशु चिकित्सा डॉक्टर डीके गुप्ता सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। उप संचालक पशु पालन डॉक्टर गुप्ता के मुताबिक, अभी तक 14 सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं, लेकिन अभी तक रिपोर्ट नहीं आई है। उनका कहा है कि रिपोर्ट केवल एक औपचारिकता है। बीमारी की वजह लंपी वायरस ही है। हालांकि, रिपोर्ट जल्द आ जाएगी। वहीं रतवाई गौशाला में सनातन सेना की टीम ने मंगलवार को गायों को ड्रिप लगवाई और व्यवस्थाओं में सहयोग भी किया। वैक्सीन भी बेअसर, म्यूटेशन और वर्षा बनी बड़ी चुनौती उप संचालक पशु चिकित्सा डॉक्टर दिलीप गुप्ता के मुताबिक, इस बार वायरस का असर ज्यादा खतरनाक साबित हो रहा है। इसके पीछे तीन मुख्य कारण सामने आ रहे हैं। अन्य वायरल बीमारियों की तरह इस बार भी लंपी वायरस के स्ट्रेन में बदलाव आया है, जिससे पुरानी एंटीबाडीज उतनी प्रभावी साबित नहीं हो पा रही हैं। जिन गोवंश में वायरस के शुरुआती लक्षण जैसे बुखार, शरीर पर गांठें बनना आ चुके हैं, उन पर वैक्सीन का कोई प्रभाव नहीं पड़ता। टीकाकरण केवल स्वस्थ गोवंश को बचाने के लिए होता है। लंपी की कोई सटीक एंटीवायरल दवा नहीं होने के कारण मवेशियों का इलाज केवल बुखार, दर्द और घाव सुखाने के लक्षणों के आधार पर ही किया जा रहा है। नमी और मक्खी-मच्छरों का मौसम होने के कारण यह वायरस हवा और कीटों के जरिए तेजी से फैल रहा है। लंपी का इतिहास और बीते दो वर्षों की स्थिति ग्वालियर-चंबल अंचल में लंपी वायरस का पहला बड़ा हमला वर्ष 2022 के मध्य में देखा गया था, जब राजस्थान और गुजरात से सटे सीमावर्ती जिलों के रास्ते यह संक्रमण ग्वालियर पहुंचा था। साल 2022-23 में तीन हजार से अधिक मवेशी इसकी चपेट में आए थे और सैकड़ों गोवंश की मौत हुई थी। इसके बाद प्रशासन ने पशु मेलों, अंतरराज्यीय पशु परिवहन और खुले बाजारों पर प्रतिबंध लगा दिया था। recent visitors 14

एमपी में कानून व्यवस्था ध्वस्त: पुलिस के सामने महिला सरपंच प्रत्याशी का नामांकन फार्म छीनकर भागे दबंग, लिपिक को कुचलने की कोशिश

Law and order collapses in MP: thugs snatch nomination form from female Sarpanch candidate in front of police, attempt to crush clerk छतरपुर। जिले में जनपद पंचायत राजनगर की ग्राम पंचायत सीलोन में सरपंच पद के उपचुनाव के लिए नामांकन जमा करने के अंतिम दिन मंगलवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब एक महिला प्रत्याशी का नामांकन फार्म रिटर्निंग आफिसर के सामने से कुछ युवक छीनकर कार से फरार हो गए। आरोप है कि फार्म लेकर भाग रही कार को रोकने का प्रयास करने पर जनपद पंचायत के लिपिक को वाहन से कुचलने की कोशिश भी की गई। घटना का वीडियो इंटरनेट मीडिया पर बहुप्रसारित हो रहा है। रिटर्निंग ऑफिसर के सामने से नामांकन पत्र लेकर भागे जानकारी के अनुसार, भूसौर निवासी दशोदा यादव सरपंच पद के लिए नामांकन जमा करने जनपद पंचायत राजनगर पहुंची थीं। दोपहर बाद नामांकन पत्र जांच के लिए रिटर्निंग आफिसर के समक्ष प्रस्तुत किया गया। इसी दौरान कुछ युवक वहां पहुंचे और नामांकन पत्र छीनकर बाहर निकल गए। इसके बाद वे सफेद रंग की कार में बैठकर भागने लगे। कार रोकने की कोशिश, लिपिक भी पीछे दौड़ा प्रत्याशी के पुत्र राजेश यादव के अनुसार, उनके स्वजन ने कार को रोकने का प्रयास किया, लेकिन आरोप है कि वाहन सवारों ने उन पर कार चढ़ाने की कोशिश की। इसी बीच जनपद पंचायत के लिपिक हरिनारायण कोरी युवकों के पीछे दौड़े, लेकिन आरोपित कार लेकर फरार हो गए। राजेश ने बताया कि उन्हें कुछ दिनों से धमकी मिल रहीं थी कि नामांकन दाखिल न करें। दो दर्जन से ज्यादा लोग धरने पर बैठे घटना के बाद जनपद पंचायत परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। प्रत्याशी के पक्ष से करीब दो दर्जन लोग शाम तक जनपद पंचायत में धरने पर बैठे रहे और आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग करते रहे। उनका कहना था कि पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में नामांकन पत्र छीनकर ले जाना गंभीर मामला है। दोबारा भरवाया नामांकन फार्म राजनगर के रिटर्निंग ऑफिसर एवं तहसीलदार धीरज गौतम ने बताया कि महिला प्रत्याशी का नामांकन फार्म दोबारा भरवा दिया गया है। मामले में एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं और संबंधित लोगों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। पुलिस बहुप्रसारित वीडियो और उपलब्ध जानकारी के आधार पर घटना में शामिल लोगों तथा वाहन की पहचान में जुटी है। गौरतलब है कि जनवरी में ग्राम पंचायत सीलोन की तत्कालीन सरपंच सोना रैकवार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित हुआ था। इसके बाद पिंकी रैकवार कार्यवाहक सरपंच के रूप में जिम्मेदारी संभाल रही थीं। recent visitors 19

नगर पालिका के धीमे निर्माण कार्य से व्यापारी परेशान, प्रदर्शन कर जताया विरोध।

Traders frustrated by the municipality’s slow construction work; staged a protest to voice their opposition. हरिप्रसाद गोहेआमला। नगर पालिका परिषद आमला द्वारा मुख्यमंत्री शहरी अधोसंरचना विकास योजना अंतर्गत कराये जा रहे सड़क, नाली एवं डिवाइडर निर्माण कार्य की धीमी गति ने व्यापारियों की परेशानी बढ़ा दी है। बताया जा रहा है कि रुद्र कंपनी के ठेकेदार के माध्यम से विगत कई महीनों से निर्माण कार्य कराया जा रहा है, लेकिन कार्य की गति बेहद धीमी है। कई स्थानों पर गड्ढे खोदकर अधूरा छोड़ दिया गया है तथा सड़क आवागमन के लिए बंद पड़ी है। इससे ग्राहक दुकानों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं और व्यापारियों के व्यवसाय में मंदी आ गई है। इसी से नाराज व्यापारियों ने सोमवार को प्रदर्शन कर नगर पालिका से शीघ्र निर्माण कार्य पूरा करने की मांग की। प्रदर्शन का नेतृत्व व्यापारी रवि साहू ने किया। इस दौरान व्यापारी बबलू गोस्वामी, मुन्ना सूरे, लोकेंद्र सिंह राठौर, महेंद्र राजपूत सहित बड़ी संख्या में व्यापारी व आमजन मौजूद रहे। सीएमओ ने कहा – जल्द होगा कार्य पूर्ण इस संबंध में मुख्य नगर पालिका अधिकारी प्रकाश देशमुख ने बताया कि हाईमास्क लाइट के लिए पोल लगाने का कार्य प्रगतिरत है। जल्द ही कार्य पूर्ण कर आवागमन बहाल किया जाएगा तथा व्यापारिक प्रतिष्ठानों के सामने समतलीकरण कर व्यवस्था बनाई जाएगी। recent visitors 93

मध्य प्रदेश में एससी, एसटी में शामिल हुईं कई नई जातियां, 4 जिलों में आरक्षण का मिलेगा लाभ

Several new castes have joined the SC, ST category in Madhya Pradesh, and reservation benefits will be available in four districts. SC ST Categories In MP । मध्यप्रदेश में एक बार फिर एससी, एसटी में कई नई जातियां शामिल हुईं हैं। प्रदेश के कई जिलों में जातियों की आरक्षित श्रेणी तय की गई है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार राज्य के 4 नवगठित जिलों में यह कवायद की गई है। जातियों की आरक्षित श्रेणी में जिन जातियों को शामिल किया गया है उन्हें अब आरक्षण का लाभ मिलेगा। नवगठित 2 जिलों में कु्हार, कु्हार (प्रजापति) और कुंभार को अनुसूचित जाति (एससी) में शामिल किया गया है। इसी तरह पारधी, बहेलिया व इससे संबंधित कुछ अन्य जनजाति को एक नवगठित जिले में अनुसूचित जनजाति (एसटी) में रखा गया है। यह स्पष्ट किया गया है कि नवगठित जिलों में जातियों की आरक्षित श्रेणी, सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देशों के अनुरूप तय की गई हैं। सीएम मोहन यादव ने मानव अधिकार आयोग के कार्यक्रम में अनुसूचित जातियों, जनजातियों के हितों के लिए काम करने का संकल्प दोहराया। एमपी के मैहर, मऊगंज, पांढुर्णा और निवाड़ी नवगठित जिले हैं। इन चारों जिलों में जातियों की आरक्षित श्रेणी तय कर दी गई है। मैहर, मऊगंज, पांढुर्णा और निवाड़ी जिलों में अब इसी के अनुरूप जाति प्रमाण पत्र बनाए जाएंगे। इसकी व्यवस्था भी शुरू कर दी गई है। अधिकारियों के अनुसार नवगठित 4 जिलों में जातियों की आरक्षित श्रेणी तय करते समय सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देशों का पूर्णत: पालन किया गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार मध्ययप्रदेश के कुछ जिलों में कु्हार, कु्हार (प्रजापति) और कुंभार अनुसूचित जाति (एससी) में हैं। मऊगंज और मैहर में भी इस जाति को अनुसूचित जाति के अंतर्गत रखा गया है। अधिकारियों ने बताया कि राज्य के छतरपुर, दतिया, पन्ना, रीवा, सतना, शहडोल, सीधी और टीकमगढ़ जिलों में कु्हार, कु्हार (प्रजापति) और कुंभार अनुसूचित जाति (एससी) में यानि आरक्षित श्रेणी में शामिल हैं। अब 2 अन्य नवगठित जिलों में भी इन जातियों की आरक्षित श्रेणी तय कर दी गई है। 3 नए जिलों में पनिका जाति को आरक्षित श्रेणी में शामिल किया इसी तरह पनिका जाति को राज्य के 3 नए जिलों में आरक्षित श्रेणी में शामिल किया गया है। अभी यह जाति छतरपुर, पन्ना, रीवा, सतना, शहडोल, उमरिया, सीधी, टीकमगढ़ और दतिया की सेंवढ़ा व दतिया तहसील में एसटी के रूप में मान्य है। अब उपरोक्त जिलों के साथ ही नए जिले मऊगंज, मैहर, निवाड़ी में पनिका जाति को अनुसूचित जाति के रूप में आरक्षित श्रेणी में शामिल किया गया है। इस प्रकार यह जाति अब राज्य के 12 जिलों में आरक्षित श्रेणी में शामिल हो गई है। नई जातियों में पारधी और बहेलिया व इनसे संबंधित अन्य उपजातियों को भी खासा लाभ आरक्षण के लिए नई जातियों में पारधी और बहेलिया व इनसे संबंधित अन्य उपजातियों को भी खासा लाभ मिला है। इन्हें नवगठित पांढुर्णा जिले में अनुसूचित जनजाति (एसटी) में रखा गया है। पारधी और बहेलिया के साथ ही बहेल्लिया, चिता पारधी, लंगोली पारधी, फांस पारधी, शिकारी, टाकनकार एवं टाकिया जनजाति को पांढुर्णा जिले में आरक्षित श्रेणी में शामिल किया गया है। recent visitors 72

सावधान: रेलवे रेल नीर और बेसन का सैंपल क्वालिटी जांच में पूरी तरह फेल, रोज होती हैं लाखों की सेल

सावधान: रेलवे रेल नीर और बेसन का सैंपल क्वालिटी जांच में पूरी तरह फेल, रोज होती हैं लाखों की सेल Caution: Railway Rail Neer and Gram Flour samples fail quality tests, selling lakhs of rupees daily. Caution: Railway Rail Neer and Gram Flour samples fail quality tests, selling lakhs of rupees daily भोपाल। ट्रेन के सफर में समय बहुत कम होता है। गाड़ी प्लेटफॉर्म पर कुछ मिनट के लिए रुकती है, यात्री जल्दी से नीचे उतरकर पानी की बोतल या खाने का पैकेट खरीदते हैं और सीटी बजते ही वापस कोच में चढ़ जाते हैं। डिब्बे के अंदर क्या है, इसकी जांच करने का मौका शायद ही कभी मिलता है। यह पूरा सौदा सिर्फ और सिर्फ भरोसे पर टिका होता है। लेकिन अब भोपाल रेलवे डिविजन में भरोसे की इस डोर पर बड़ा सवालिया निशान लग गया है, जब इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड कॉर्पोरेशन द्वारा सप्लाई किए जाने वाले ‘रेल नीर’ का एक सैंपल क्वालिटी जांच में पूरी तरह फेल हो गया। लैब की रिपोर्ट ने उड़ाई नींद, बेसन का सैंपल भी निकला घटिया जुलाई महीने में रूटीन टेस्टिंग के दौरान यह सैंपल कलेक्ट किया गया था। डिविजन की फाइंडिंग्स के मुताबिक, पानी का यह सैंपल तय मानकों पर खरा नहीं उतरा। सिर्फ पानी ही नहीं, बल्कि खाने-पीने की चीज़ों में इस्तेमाल होने वाले खुले बेसन का सैंपल भी क्वालिटी पैरामीटर्स में फेल पाया गया। यात्रियों के लिए यह केवल कोई लैबोरेटरी रिपोर्ट भर नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर उनकी सेहत से जुड़ा हुआ गंभीर मामला है, जो वे सफर के दौरान खाते और पीते हैं। भोपाल रेलवे डिविजन में रूटीन क्वालिटी चेक के दौरान रेल नीर और बेसन का सैंपल फेल हो गया है। भोपाल रेलवे डिविजन में रोजाना औसतन 1.14 लाख यात्री सफर करते हैं, जबकि अकेले भोपाल जंक्शन पर 150 से ज्यादा ट्रेनें रुकती हैं। मंडीदीप प्लांट से भोपाल डिविजन के स्टेशनों पर हर दिन करीब 5,000 रेल नीर की बोतलें सप्लाई होती हैं। इटारसी के बेस किचन में पहले भी छापेमारी कर एक्सपायरी और घटिया फूड मटीरियल नष्ट किया जा चुका है। क्या कहते हैं आंकड़े और यात्री? इस मामले की गंभीरता इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि हर दिन इस पर लाखों लोगों की जिंदगी निर्भर करती है। साल 2025-26 के दौरान भोपाल रेलवे डिविजन ने रोजाना लगभग 1.14 लाख यात्री सफर संभाले हैं। अकेले भोपाल जंक्शन पर रोज 150 से ज्यादा ट्रेनें रुकती हैं और करीब 70,000 यात्रियों का फुटफॉल रहता है। recent visitors 26