मध्यप्रदेश विद्युत मण्डल में अयोग्य अधिकारियों को सौंपे मलाईदार पद

Lucrative posts in the Madhya Pradesh Electricity Board handed over to incompetent officials. भोपाल। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड में कार्यपालन यंत्री (डीजीएम) के पदों पर अपात्रों को करंट चार्ज सौंपे जा रहे हैं। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड में मण्डल (बोर्ड) संवर्ग के अधिकारियों के लिए सुरक्षित रखे गए कार्यपालन यंत्री के पदों पर कंपनी संवर्ग के ऐसे सहायक अभियंताओं (AE) को करंट चार्ज दिया गया है, जो हाल ही में संपन्न पदोन्नति प्रक्रिया में कार्यपालन यंत्री पद पर नियमित पदोन्नति के लिए पात्र नहीं पाए गए। मध्यप्रदेश विद्युत मण्डल पत्रोपाधि अभियंता संघ ने इस व्यवस्था पर गंभीर आपत्ति जताई है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड में जिस अधिकारी को विभाग ने कार्यपालन यंत्री पद पर नियमित पदोन्नति के योग्य नहीं माना, उसी अधिकारी को करंट चार्ज के माध्यम से उसी पद का दायित्व सौंप दिया गया है। इससे पदोन्नति प्रक्रिया की निष्पक्षता, पारदर्शिता एवं प्रशासनिक औचित्य पर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं। ले रहे वित्तीय निर्णय वरिष्ठ अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। यदि कोई अधिकारी निर्धारित सेवा नियमों एवं पात्रता की कसौटी पर कार्यपालन यंत्री बनने के योग्य नहीं है, तो उसे उसी पद का करंट चार्ज किस नियम, किस प्रशासनिक आवश्यकता और किस सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति से दिया गया। ऐसे अधिकारी उसी पद के प्रशासनिक, तकनीकी एवं वित्तीय निर्णय ले रहे हैं, जबकि नियमित पदोन्नति के लिए उन्हें पात्र नहीं माना गया। समकक्ष अधिकारियों में पनप रही कुंठा संघ पदाधिकारियों का कहना है कि इस व्यवस्था से मण्डल संवर्ग के वरिष्ठ एवं पात्र अधिकारियों के वैधानिक अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। अनेक अधिकारी 35 से 38 वर्षों की सेवा पूर्ण करने के बाद भी अपनी पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जबकि उनके लिए सुरक्षित पदों पर अन्य संवर्ग के अधिकारियों से करंट चार्ज के माध्यम से कार्य कराया जा रहा है। इस भेदभावपूर्ण व्यवस्था से समकक्ष अधिकारियों में कुंठा का भाव पनप रहा है। कार्यपालन यंत्री के करंट चार्ज की निष्पक्ष समीक्षा की मांग मध्यप्रदेश विद्युत मण्डल पत्रोपाधि अभियंता संघ भोपाल के प्रभारी अध्यक्ष केके आर्य ने राज्य शासन एवं विद्युत कंपनी प्रबंधन से मांग की है कि बोर्ड संवर्ग के लिए सुरक्षित कार्यपालन यंत्री पदों पर दिए गए सभी करंट चार्ज की निष्पक्ष समीक्षा कराई जाए। संबंधित आदेशों को सार्वजनिक किया जाए। पात्र अधिकारियों को ही उक्त पदों का दायित्व सौंपा जाए। recent visitors 19

बच्चों के वार्ड के बेड पर कुत्ता! MP के सरकारी अस्पताल का VIDEO वायरल, स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़े सवाल

A dog on a bed in the children’s ward! Video from an MP government hospital goes viral; serious questions raised about the healthcare system. छतरपुर । जिले में स्थित एक सरकारी अस्पताल के वायरल वीडियो ने स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा दिया। जिले के लवकुशनगर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में स्वास्थ्य व्यवस्था और साफ-सफाई की पोल खोलती एक गंभीर वीडियो सामने आई है। अस्पताल के वार्ड में मरीजो और बच्चों के इलाज के लिए लगाए गए बेड पर एक कुत्ते के आराम करने का मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है और स्थानीय लोगों में गहरा आक्रोश है। वीडियो सामने आने के बाद मरीजों में इन्फेक्शन के खतरे को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। इलाज कराने आए तीमारदार ने बनाया वीडियो, मरीजों के स्वास्थ्य से खिलवाड़मिली जानकारी के मुताबिक, अस्पताल में अपने मरीज का इलाज कराने आए एक तीमारदार ने बच्चो के वार्ड में बेड पर कुत्ते को आराम फरमाते हुए देखा और इसे अपने कैमरे में कैद कर लिया। सोशल मीडिया पर वीडियो (Children Ward Dog Video)सामने आते ही अस्पताल प्रशासन की लापरवाही, सैनिटाइजेशन और सुरक्षा इंतजामों को लेकर प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े होने लगे हैं। सरकारी अस्पतालों में संक्रमण रोकने के लिए जहां सख्त सफाई के दावे किए जाते है, वहीं बच्चों के वार्ड तक आवारा कुत्ते का पहुंच जाना मरीजों के स्वास्थ्य के साथ सीधा खिलवाड़ माना जा रहा है। मरीजों में आक्रोश, तत्काल सुधार की रखी मांगमरीज के परिजनों का कहना है कि अस्पताल परिसर और वार्डों में आवारा जानवरों की मौजूदगी से हमेशा इंफेक्शन और काटने का खतरा बना रहता है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही से व्यवस्था लचर होतीं जा रही हैं। उन्होंने प्रबंधन से परिसर में बाहरी जानवरो के प्रवेश पर सख्त रोक लगाने और सुरक्षा व्यवस्था में तत्काल सुधार की मांग की है। मरीजों की सेहत से खिलवाड़: संक्रमण का बड़ा खतराइन्फेक्शन का खतरा: आवारा कुत्तों से रैबीज, त्वचा रोग और अन्य गंभीर संक्रामक बीमारियां फैलने का जोखिम हमेशा बना रहता है। स्वच्छता पर सवाल: जिस बेड पर मरीज को रखकर इलाज किया जाना है, वहां जानवरों का बैठना साफ-सफाई के दावों पर सीधा तमाचा है। सीएमएचओ ने दिए जांच के निर्देशइस पूरे मामले पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आरपी गुप्ता ने संज्ञान लेते हुए बताया कि प्रकरण ध्यान में आया है। संबंधित अस्पताल प्रभारी व अधिकारियों से तत्काल इस लापरवाही पर जवाब-तलब किया गया है और मामले की जांच के निर्देश दिए गए है। recent visitors 21

MP में 24×7 खुलेंगे Hotel-Mall-Shops! राज्यपाल की मंजूरी के बाद नए नियम लागू, जानिए पूरी खबर

Hotels, malls, and shops in MP to remain open 24×7! New rules implemented following the Governor’s approval—read the full story. भोपाल । मध्यप्रदेश में होटल, मॉल, रेस्टोरेंट और अन्य व्यवसायिक संस्थान अब दिन ही नहीं, बल्कि पूरी रात भी खुले रह सकेंगे. मध्यप्रदेश विधानसभा के बाद अब राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने मध्यप्रदेश कार्यस्थल सशक्तिकरण संहिता 2026 को अपनी मंजूरी दे दी है. इसके साथ ही यह अधिनियम अब प्रदेश भर में लागू हो गया है. प्रदेश में होटल, मॉल आदि प्रतिष्ठिान 24 घंटे और सभी 7 दिन खुल सकेंगे. इससे लोग रात में भी जाकर खरीदारी कर सकेंगे. इसके साथ ही लोगों को भी रात में काम के अवसर मिलेंगे. संस्थानों को अलग-अलग शिफ्ट में कर्मचारियों को रखना होगा. हालांकि, शराब की दुकानों की समय सीमा का निर्णय स्थानीय प्रशासन लेगा. कराना होगा सिर्फ एक बार रजिस्ट्रेशनराज्य सरकार ने नए अधिनियम में संस्थानों के लिए अपने प्रतिष्ठिान के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया भी आसान कर दी है. अब संस्थान को इसकी नियमानुसार विभाग को सूचना देनी होगी. इसके बाद उनका रजिस्ट्रेशन कर उन्हें इसका सर्टिफिकेट दे दिया जाएगा. रजिस्ट्रेशन बार-बार रिन्यु नहीं कराना होगा. संस्थान बंद होने पर लिखित में इसकी सूचना देनी होगी, इसके बाद रजिस्ट्रेशन निरस्त कर दिया जाएगा. काम के घंटे लेबर लॉ के हिसाब से हीभले ही मॉल, दुकान और अन्य संस्थानों को 24 घंटे खोलने का नियम बना दिया गया हो, लेकिन संचालकों को कर्मचारियों को रखने और उसने कार्य कराने के लिए श्रम विभाग के न्यूनतम कार्य के घंटों के नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा. किसी भी कर्मचारी से हर दिन के निर्धारित और साप्ताहिक 48 घंटों से अधिक काम कराने की अनुमति नहीं होगी. रात्रि के समय महिलाओं को भी काम की अनुमति होगी, लेकिन इसके लिए नियोक्ता को सुरक्षा, परिवहन और बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था करनी होगी. अतिरिक्त काम कराने के लिए संस्थान को ओवरटाइम वेतन कर्मचारी को देना होगा. दवाब बनाने नहीं रख सकेंगे कर्मचारी के डॉक्युमेंटनए नियमों में कर्मचारियों के मूल डॉक्युमेंट और कोई अन्य सामान संस्थान द्वारा रखे जाने पर रोक लगा दी है. दरअसल, कई बार शिकायतें सामने आती हैं कि नियोक्ता द्वारा कर्मचारी के मूल दस्तावेज या कोई दूसरा सामान रख लिया जाता है, ताकि कर्मचारी काम छोड़कर न जा सके. नई संहिता में कर्मचारियों की सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाओं के संबंध में भी प्रावधान किया गया है. प्रतिष्ठान को कार्यस्थल पर साफ-सफाई, सुरक्षा उपकरण और आपात स्थिति से बचाव के लिए पर्याप्त व्यवस्था करनी होगी. शिकायतों के लिए बनाई जाएंगी समितियांकर्मचारियों की समस्याओं को निपटाने के लिए समितियां बनाई जाएंगी. कर्मचारी संबंधित समितियों और इसके बाद प्रशासनिक अधिकारी को अपनी शिकायत दर्ज करा सकें. श्रम विभाग को अधिकार होंगे कि वे जरूरत पड़ने पर संबंधित प्रतिष्ठिान की जांच कर सकेंगे और दस्तावेज मांगकर उसकी जांच कर सकेंगे. यदि जांच के दौरान किसी तरह के नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जा सकेगी. recent visitors 16

भारत माता की प्रतिमा में तिरंगे की जगह RSS का झंडा; राजगढ़ के ब्यावरा में बड़ा सियासी बवाल

RSS flag replaces the Tricolour in a statue of Bharat Mata; major political uproar in Rajgarh’s Biaora. राजगढ़/ ब्यावरा । नगर पालिका द्वारा गुना बाईपास स्थित कमला लॉज के सामने शासकीय भूमि पर लगाई जा रही भारत माता की प्रतिमा को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।शहर एवं ब्लॉक कांग्रेस कमेटी ने आरोप लगाया है कि प्रतिमा में राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे के स्थान पर आरएसएस का झंडा लगाया जा रहा है, जो राष्ट्रीय ध्वज का अपमान है। तिरंगे का अपमान करने का आरोपकांग्रेस ने कहा कि भाजपा एक ओर तिरंगा यात्रा निकाल रही है, दूसरी ओर तिरंगे का अपमान कर रही है। जिलाध्यक्ष प्रियव्रत सिंह के निर्देश पर कांग्रेस ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि विमोचन से पहले प्रतिमा के हाथों में सम्मान के साथ राष्ट्रीय ध्वज स्थापित किया जाए।इस मांग को लेकर कांग्रेस द्वारा 13 अगस्त को दोपहर 12 बजे एसडीएम कार्यालय में ज्ञापन दिया जाएगा। recent visitors 23

रसोई का बजट बिगड़ा! 4.45% पहुंची महंगाई, जानिए क्या-क्या हुआ महंगा

Kitchen budget hit! Inflation reaches 4.45%; find out what has become costlier. रसोई घर से लेकर आपकी जेब तक, महंगाई का दबाव एक बार फिर बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है। सरकार द्वारा बुधवार को जारी ताजा आर्थिक आंकड़ों ने आम लोगों की चिंता थोड़ी बढ़ा दी है। जुलाई के महीने में देश की खुदरा महंगाई दर (सीपीआई) बढ़कर 4.45% पर पहुंच गई है, जो इससे पिछले महीने यानी जून में 4.38% थी। हालांकि यह आंकड़ा अर्थशास्त्रियों के 4.50% के अनुमान से थोड़ा कम जरूर है, लेकिन यह अभी भी भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के 4% के तय लक्ष्य से लगातार ऊपर बना हुआ है। यह इस साल नए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) की नई शृंखला और नए कंजम्पशन बास्केट को अपनाने के बाद से महंगाई का सबसे उच्चतम स्तर है। जुलाई में महंगाई अचानक क्यों बढ़ गई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है?इस तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारण खाने-पीने की चीजों (खाद्य पदार्थों) के ऊंचे दाम हैं, जिन्होंने आम जनता के बजट को प्रभावित किया है। खाद्य महंगाई दर (कंज्यूमर फूड प्राइस इंडेक्स) जून के 5.32% से उछलकर जुलाई में 5.52% पर पहुंच गई है। चिंता की बात यह है कि गांवों में रहने वाले लोगों पर इसकी मार शहरों से ज्यादा पड़ी है। आंकड़ों के मुताबिक, ग्रामीण क्षेत्रों में खाद्य महंगाई 5.79% रही, जबकि शहरी इलाकों में यह थोड़ा कम यानी 5.05% दर्ज की गई। किन सब्जियों ने रसोई का बजट बिगाड़ा और कहां मिली थोड़ी राहत?यदि आप सब्जी मंडी जा रहे हैं, तो कुछ खास मसालों और सब्जियों के दाम आपके होश उड़ा सकते हैं: प्याज: प्याज की महंगाई दर जून के 4.73% से सीधे छलांग लगाकर जुलाई में 22.54% पर पहुंच गई है।लहसुन: लहसुन की महंगाई दर भी 17.93% से बढ़कर 35.36% हो गई है।अदरक: अदरक ने तो सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए; इसकी महंगाई दर 50.41% से बढ़कर सीधे 83.62% के बेहद खौफनाक स्तर पर पहुंच गई है। हालांकि, इस चौतरफा तेजी के बीच कुछ सब्जियों के दामों में गिरावट (डिफ्लेशन) भी दर्ज की गई जिससे थोड़ी राहत मिली। आलू के दाम पिछले साल की तुलना में 16.56% कम हुए। भिंडी में 5.52% की गिरावट आई, जबकि मटर (-5.27%) और टमाटर (-4.59%) भी सस्ते हुए हैं। रोजमर्रा की दूसरी जरूरतें और सेवाएं कितनी महंगी हुई हैं?महंगाई की यह आंच सिर्फ रसोई तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्य क्षेत्रों में भी कीमतें बढ़ी हैं: यातायात:ट्रांसपोर्ट महंगाई जून के 4.31% से बढ़कर जुलाई में 4.43% हो गई, जबकि माल ढुलाई की दरें 7.77% पर आ गईं।पर्सनल केयर: व्यक्तिगत देखभाल, सामाजिक सुरक्षा और विविध सेवाओं की महंगाई दर सबसे अधिक 14.77% पर बनी हुई है, जिसमें अन्य व्यक्तिगत सामानों के दाम 43.54% तक बढ़े हैं।होटल और रेस्टोरेंट: रेस्टोरेंट और आवास सेवाओं की महंगाई दर 7.72% दर्ज की गई।शिक्षा और स्वास्थ्य: इस दौरान कपड़े और जूते-चप्पलों में 3.38%, शिक्षा में 3.64%, मकान किराए में 2.22% और स्वास्थ्य क्षेत्र में 1.34% की महंगाई दर्ज की गई। आरबीआई का महंगाई पर क्या सोचना है और क्या आगे राहत मिलेगी?भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को खुदरा महंगाई दर को 4% पर बनाए रखने की जिम्मेदारी मिली हुई है, जिसमें 2% से 6% का एक सहिष्णुता बैंड तय है। आरबीआई के अधिकारी मल्होत्रा ने साफ किया है कि कीमतों में स्थिरता बनाए रखना और महंगाई पर काबू पाना उनकी सबसे पहली प्राथमिकता है। एक राहत की बात यह है कि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी और सप्लाई सुधरने की वजह से आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) के लिए अपने महंगाई के अनुमान को 5.1% से घटाकर 5% कर दिया है। इसके अलावा, मुख्य कीमती धातुओं को छोड़कर अन्य कोर महंगाई अभी भी नियंत्रण में बनी हुई है। आने वाले महीनों में महंगाई की रफ्तार कैसी रहेगी?आरबीआई और आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले निकट भविष्य में मुख्य महंगाई दर में अभी थोड़ा और उछाल आ सकता है और इस साल की तीसरी तिमाही (Q3) में यह अपने चरम पर पहुंच सकती है। आरबीआई के तिमाही अनुमानों के मुताबिक: दूसरी तिमाही (Q2): महंगाई दर 4.7% रहने का अनुमान है (पहले के 5.1% के अनुमान से कम)।तीसरी तिमाही (Q3): इसमें उछाल आ सकता है और यह 5.9% के स्तर को छू सकती है।चौथी तिमाही (Q4): इसके बाद इसमें थोड़ी नरमी आएगी और यह घटकर 5.5% पर आ जाएगी।इसके बाद वित्तीय वर्ष के अंत तक कोर महंगाई और सामान्य महंगाई में स्थिरता आने की उम्मीद की जा रही है। recent visitors 23

वन विभाग के कर्मचारी के घर EOW का छापा, 50 लाख की दुकान समेत सोना-चांदी मिली; आय से अधिक संपत्ति का आरोप

EOW raids Forest Department employee’s home; gold, silver, and a shop worth ₹50 lakh found; accused of amassing assets disproportionate to known sources of income. विशेष संवाददाता जितेन्द्र श्रीवास्तव अर्पिता श्रीवास्तव जबलपुर जबलपुर। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) की टीम ने बुधवार सुबह मंडला में वन विभाग के सहायक ग्रेड-3 कर्मचारी के घर छापामार कार्रवाई की। पश्चिम सामान्य वन मंडल मंडला में पदस्थ श्वेतांक चौरसिया के राज राजेश्वरी वार्ड स्थित आवास पर ईओडब्ल्यू की टीम ने आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने की शिकायत के आधार पर तलाशी शुरू की है। कार्रवाई के दौरान टीम को लाखों रुपये की नकदी, सोने-चांदी के आभूषण, वाहन, बैंक खातों और अन्य संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज मिले हैं। ईओडब्ल्यू डीएसपी मंजीत सिंह के मुताबिक, श्वेतांक चौरसिया के खिलाफ आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति अर्जित करने की शिकायत ईओडब्ल्यू जबलपुर में की गई थी। शिकायत की गोपनीय जांच में उनकी आय और व्यय के बीच करीब 290 प्रतिशत का अंतर प्रारंभिक तौर पर सामने आया था। इसके बाद ईओडब्ल्यू ने मंडला न्यायालय से तलाशी वारंट प्राप्त किया और बुधवार सुबह टीम ने उनके आवास पर सर्च की कार्रवाई शुरू की। 50 लाख की दुकान खरीद की भी जांचईओडब्ल्यू के अनुसार, चौरसिया की वैधानिक आय करीब 55 से 60 लाख रुपये के बीच बताई गई है। तलाशी के दौरान उनके भवन में करीब 50 लाख रुपये की दुकान खरीदने से संबंधित जानकारी सामने आई है। आरोप है कि इस सौदे में बड़ी मात्रा में नकद भुगतान किया गया और रजिस्ट्री में संपत्ति की कीमत कम दर्शाई गई। EOW करीब 45 से 50 लाख रुपये के कथित नकद भुगतान की भी जांच कर रही है। घर से कैश, सोना-चांदी और वाहनों की जानकारीतलाशी के दौरान घर से करीब 5 लाख रुपये नकद, लगभग 150 से 200 ग्राम सोना और 3 से 4 किलो चांदी मिलने की जानकारी EOW ने दी है। इसके अलावा तीन वाहनों, एलआईसी पॉलिसियों, चार बैंक खातों और बैंक लॉकर से संबंधित जानकारी भी सामने आई है। इन सभी संपत्तियों और निवेश का मूल्यांकन किया जा रहा है। ईओडब्ल्यू डीएसपी ने बताया कि प्रारंभिक जांच में खर्च आय की तुलना में करीब 290 प्रतिशत अधिक मिला था। तलाशी के दौरान सामने आ रही संपत्तियों और खर्चों के मूल्यांकन के बाद यह अनुपात करीब 400 प्रतिशत या उससे अधिक पहुंचने की संभावना है। हालांकि, अंतिम आंकड़ा विस्तृत जांच और वैल्यूएशन पूरा होने के बाद ही स्पष्ट होगा। recent visitors 35

MP News: एनालॉग पनीर पर सख्ती, कर्मचारियों की पदोन्नति में CPCT नहीं बनेगी बाधा

MP News: Crackdown on analogue paneer; CPCT will not be a hurdle in employee promotions. भोपाल। मध्य प्रदेश में खाद्य पदार्थों में मिलावट के खिलाफ सरकार ने सख्त रुख अपनाने के संकेत दिए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश में एनालॉग पनीर के उपयोग और बिक्री पर प्रभावी रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के सरकारी कर्मचारियों की पदोन्नति में CPCT परीक्षा को बाधा नहीं बनने देने के संबंध में जल्द सकारात्मक निर्णय लेने के निर्देश भी दिए गए हैं। एनालॉग पनीर पर सरकार सख्त मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश में एनालॉग पनीर के उपयोग और बिक्री पर प्रभावी रोक के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाए। खाद्य सुरक्षा से जुड़े अधिकारियों को ऐसे उत्पादों की निगरानी करने और नियमों का उल्लंघन मिलने पर कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।सरकार का कहना है कि प्रदेशवासियों को गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराना प्राथमिकता है। मिलावट के खिलाफ होगी निगरानी एनालॉग पनीर से जुड़े मामलों में खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। बाजार में ऐसे उत्पादों की पहचान, जांच और नियमानुसार कार्रवाई को लेकर निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।सरकार के इस कदम से मिलावटी या निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाए जाने वाले खाद्य उत्पादों के खिलाफ कार्रवाई तेज होने की उम्मीद है। कर्मचारियों को पदोन्नति में बड़ी राहत के संकेत मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सरकारी तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की पदोन्नति में CPCT परीक्षा उत्तीर्ण करने की अनिवार्यता को लेकर भी जल्द सकारात्मक निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं।मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि CPCT परीक्षा के कारण किसी पात्र कर्मचारी को पदोन्नति से वंचित न किया जाए और न ही किसी कर्मचारी को रिवर्ट किया जाए।इस संबंध में नियमों और व्यावहारिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए आवश्यक प्रक्रिया जल्द पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। लंबे समय से पदोन्नति का इंतजार कर रहे कर्मचारियों को उम्मीद CPCT की अनिवार्यता को लेकर लंबे समय से पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के लिए यह निर्देश महत्वपूर्ण माना जा रहा है।हालांकि, अंतिम राहत सरकार द्वारा लिए जाने वाले औपचारिक निर्णय और लागू किए जाने वाले नियमों पर निर्भर करेगी। CM के दो बड़े निर्देश, दो अलग-अलग वर्गों को राहत की उम्मीद मुख्यमंत्री के निर्देशों का असर एक ओर खाद्य सुरक्षा और उपभोक्ता स्वास्थ्य से जुड़े मामलों पर पड़ सकता है, वहीं दूसरी ओर सरकारी कर्मचारियों की पदोन्नति से जुड़ी लंबे समय से चली आ रही समस्या के समाधान की उम्मीद जगी है।एक तरफ मिलावट पर शिकंजा, दूसरी तरफ कर्मचारियों की पदोन्नति का रास्ता आसान करने की तैयारी।अब नजर इस बात पर रहेगी कि इन निर्देशों को लागू करने के लिए संबंधित विभाग कितनी जल्दी ठोस आदेश जारी करते हैं। मुख्य सवाल एनालॉग पनीर पर रोक के लिए सरकार की कार्रवाई कितनी सख्त होगी? और CPCT को लेकर कर्मचारियों को वास्तविक राहत कब मिलेगी? recent visitors 19