‘जनता नहीं, अडानी के लिए सरकार चलाती है BJP’, जीतू पटवारी ने BJP पर लगाए बड़े आरोप

‘BJP runs the government for Adani, not the public’, Jitu Patwari made big allegations against BJP भोपाल। भारत के दिग्गज कारोबारी और अडानी समूह के प्रमुख गौतम अडानी पर अमेरिका में गंभीर आरोप लगे हैं। वहीं, कांग्रेस इस मुद्दे को भुनाने का मौका छोड़ना नहीं चाह रही है। इसी सिलसिले में मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने एक प्रेस वार्ता की। इस दौरान उन्होंने अडानी का मुद्दा उठाया। साथ ही भाजपा पर भी जमकर निशाना साधा। जीतू पटवारी ने कहा, “देश में मनोपोली चल रही है। कुछ ही लोगों को अमीर बनाया जा रहा है। नरेंद्र मोदी की मिलीभगत से आम जनता को लूटा गया। बिजली अधिकारियों को 2236 करोड़ रुपए की रिश्वत दी गई। बीजेपी प्रवक्ताओं ने अडानी के हितों की बात की और उनका पक्ष लिया। बीजेपी जनता के लिए नहीं बल्कि अडानी के लिए सरकार चलाती है। जिन्होंने भारत को लूटा, वह सभी मोदी के साथी क्यों हैं, ये जवाब देना चाहिए।” बता दें कि कल राहुल गांधी ने भी कहा था कि जब तक पीएम नरेंद्र मोदी और गौतम अडानी एक हैं तो सेफ हैं। हम जानते हैं कि सरकार अडानी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करेगी, क्योंकि अडानी अंदर जाएंगे तो पीएम मोदी भी जाएंगे। बीजेपी की फंडिंग अडानी से जुड़ी है। recent visitors 114

भोपाल के फूड विभाग ने खबर के तत्काल बाद न्यू हकीम होटल को भेजा नोटिस

Bhopal’s food department sent notice to New Hakeem Hotel immediately after the news. भोपाल। राजधानी भोपाल के बोर्ड ऑफिस के सामने न्यू हकीम होटल के किचन में पसरी गंदगी, बहते सीवेज और किचन को 15 दिनों में व्यवस्थित करना पड़ेगा, नहीं तो लाइसेंस निरस्त होगा। अब होटल संचालक की मनमानी नहीं चलेगी। बता दें, हाल ही 19 नवंबर 2024 को “माय सीक्रेट न्यूज़. कॉम” वेबसाइट” ने न्यू हकीम होटल की किचन में गंदगी और खुले में बहते सीवेज के बीच बन रहे नॉनवेज खाना की खबर को फोटो वीडियोज के साथ प्रसारित किया था। जिस पर फूड विभाग ने तत्काल संज्ञान लिया है। खबर प्रसारित होने के अगले दिन 20 नवंबर 2024 को फूड विभाग ने होटल संचालक को 15 दिन में सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के निर्देश दिए हैं। “My secret news. Com” वेबसाइट जनहितैषी और खोजपरक खबरों को खोज कर उसे प्राथमिकता से प्रसारित करता है। red https://mysecretnews.com/bhopals-new-hakeem-hotel लोगों का कहना है कि होटल संचालकों द्वारा लोगों की सेहत के साथ खेलने का काम उस शहर में चल रहा है, जहाँ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से लेकर उनके तमाम जिम्मेदार अधिकारी बैठे हों। न्यू हकीम होटल संचालक की लापरवाही के चलते हजारों लोगों की सेहत बहुत पर बुरा असर पड़ा होगा। लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने का सिलसिला वर्षों से चल रहा था। यह दशा किसी एक होटल की नहीं, बल्कि राजधानी के अमूमन सभी छोटे-बड़े होटलों की है। एक अनुमान के मुताबिक राजधानी में करीब 8 लाख की आबादी होटलों और रेस्टोरेंट के चाय, नाश्ता और खाना पर निर्भर है। इसमें वेज और नॉनवेज दोनों स्तर के लोग शामिल हैं। इतनी बड़ी आबादी के स्वास्थ्य को अँधेरे में रख उन्हें भोजन परोसा जा रहा है। यही कारण है कि राजधानी की सभी अस्पतालों में मरीजों की कतार दिन पर दिन बढ़ती जा रही है। इतनी गंभीर लापरवाही की ओर फूड विभाग के अधिकारियों को और अधिक सख़्ती दिखाना होगी, तभी विभाग की छवि स्वच्छ नजर आएगी। recent visitors 314

भाड़े के शिक्षक मामले में सियासत तेज, उमंग सिंघार बोले- ‘स्कूलों में भी डबल इंजन की…’

Politics intensifies in the case of hired teachers, Umang Singhar said – ‘Double engine is used in schools also…’ सागर ! मझेरा गांव भाड़े के शिक्षक रखने के मामले में सुर्खियों में आ गया है. दरअसल, मझेरा गांव में स्थित शासकीय प्राथमिक स्कूल के शिक्षक ने अपने स्थान पर पढ़ाने के लिए किराए पर शिक्षिका रख ली. मामला उजागर होने के बाद से मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस, सरकार पर जमकर हमलावर है. नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने एक्स ट्वीट कर लिखा कि- मोहन बाबू क्या ये भी डबल इंजन वाली व्यवस्था है? सोशल मीडिया के एक्स पर कांग्रेस के अधिकृत अकाउंट से ट्वीट किया गया कि- मास्टर जी ने केंद्रीय मंत्री की सेवा चाकरी और जी हजूरी कर ली, फिर बच्चों का भविष्य बर्बाद हो तो भी परवाह किसे? मध्यप्रदेश में शिक्षा का स्तर लगातार गिरता जा रहा है. सत्ता के संरक्षण में शिक्षक पढ़ाने नहीं जाते. मोटी तनख्वाह वसूल रहे शिक्षक एवजी पर 3 हजार के मजदूर शिक्षक भेज देते हैं. मगर भारतीय जनता पार्टी सरकार को बच्चियों के भविष्य और शिक्षा की गुणवत्ता की कोई चिंता नहीं है. ‘स्कूलों में भी डबल इंजन की सरकार’ नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने एक्स पर ट्वीट कर लिखा कि लगता है प्रदेश के स्कूलों में भी डबल इंजन की सरकार चल रही. सागर जिले के ग्रामीण इलाके मझेरा के स्कूल का असल शिक्षक इंद्र विक्रम, मंत्री वीरेन्द्र खटीक का मुंह लगा है. इस शिक्षक ने अपनी जगह स्कूल में एवजी शिक्षक ममता को तीन हजार रुपए महीने पर नौकरी पर रख लिया, वो इनकी जगह क्लास लेती है और ये मंत्री के हाथों खीर खाते हैं. नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघा ने लिखा कि मोहन बाबू क्या ये भी डबल इंजन वाली व्यवस्था है? सिर्फ यही नहीं प्रदेश के कई सरकारी स्कूलों में ऐसे एवजी शिक्षक पढ़ा रहे हैं. राजनीतिक संरक्षण वाले शिक्षकों ने एवजियों को पढ़ाने का काम सौंप दिया और खुद राजनीति करते हैं. अब देखना है कि सागर जिले के शिक्षक इंद्र विक्रम पर सरकार क्या कार्रवाई करती है. शिक्षक का 40 हजार रुपए वेतन मझेरा गांव के शासकीय प्राथमिक स्कूल में पढ़ाने वाले शिक्षक इंद्र विक्रम सिंह परमार उर्फ वट्टू राजा का 40 हजार रुपए वेतन है, जबकि उन्होंने 3000 रुपए महीने में ममता नामक महिला को पढ़ाने के लिए रख रखा है, वह एक साल से इस स्कूल में पढ़ा रही हैं. इधर इस मामले में प्रधानाध्यापक धर्मेन्द्र सिंह का कहना है कि कई बार मना किया, फिर भी ममता स्कूल आ रही हैं. उपस्थिति रजिस्टर में लाइन खींच दी, फिर भी इंद्र महीने में एक बार आकर हस्ताक्षर कर रहे हैं. वहीं शिक्षक इंद्र का कहना है कि सुबह-शाम केंद्रीय मंत्री के साथ समय व्यतीत करता हूं. दिन में स्कूल जाता हूं. कभी-कभी नहीं जा पाता, वह अलग बात है. बता दें यह केवल एक स्कूल का हाल नहीं है, बल्कि सागर जिले के ही बिलहरा के बंजरिया, भलैयां, रेहटी, कजरई के अलावा नर्मदापुरम के खोकसर के स्कूलों में भी यही हाल है. यहां 40 से 80 हजार रुपए मासिक वेतन पाने वाले शिक्षकों ने किराए के शिक्षक रख रखे हैं. recent visitors 136

RGPV में घोटाला: स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के नाम पर बड़ा घपला, छात्रों ने उच्च शिक्षा मंत्री को सौंपा ज्ञापन

Scam in RGPV: Big scam in the name of sports complex, ABVP students submitted memorandum to Higher Education Minister भोपाल। राजधानी भोपाल का राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (RGPV) एक बार फिर सुर्ख़ियों में आ गया है। अब यहां स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के नाम पर बड़ा घोटाला किया गया है। जिसकी शिकायत अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार को ज्ञापन सौंपकर की है। साथ ही इस मामले की जांच कर कार्रवाई की मांग की है। ABVP के छात्रों ने आरोप लगाते हुए कहा कि RGPV यूनिवर्सिटी में स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के नाम पर करोड़ों का भ्रष्टाचार हुआ है। उन्होंने कहा कि 2015 में विश्वविद्यालय द्वारा आउटडोर-इनडोर स्पोर्ट्स कांप्लेक्स के निर्माण के लिए 16 करोड़ 50 लाख की राशि स्वीकृत की गई थी। साल 2019 में इस राशि को बढ़ाकर 19 करोड़ 16 लाख रुपए कर दिया गया। इसके निर्माण की जिम्मेदारी सीपीए को दी गई थी। वह निर्माण कार्य आज भी चल रहा है। ABVP के छात्रों का कहना है कि कोटेशन में दिखाए गए 10 एग्जॉस्ट फैन के स्थान पर एक भी एग्जॉस्ट फैन नहीं लगाया गया। वुडन फ्लोरिंग मे भी खराब प्लास्टिक का उपयोग किया गया है। उच्च शिक्षा मंत्री को ज्ञापन सौंपकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने पूरे मामले की जांच करने की मांग की है। recent visitors 131

शादी कैंसिल होने पर मैरिज गार्डन संचालक लौटाएंगे पूरी राशि : ‘आगे एडजस्ट कर लेंगे’ कह कर पैसे नहीं रख सकते; कंज्यूमर आयोग का फैसला

Marriage garden operators will return the entire amount if the wedding is cancelled: They cannot keep the money saying ‘we will adjust it later’; Consumer Commission’s decision भोपाल। अगर आप शादी हॉल या मैरिज गार्डन बुक करते हैं और किसी कारणवश कार्यक्रम कैंसिल हो जाए, तो मैरिज गार्डन या शादी हॉल संचालक को बुकिंग कैंसिल होने के तुरंत बाद रकम लौटानी होगी। संचालक एडवांस राशि वापस करने से यह कहकर इनकार नहीं कर सकते कि ‘आगे एडजस्ट कर लेंगे’ या ‘जब कार्यक्रम होगा, तब एडजस्ट कर लेंगे’। दरअसल, भोपाल कंज्यूमर आयोग की बेंच-1 ने ऐसा ही एक फैसला सुनाया हैं। आयोग ने कहा कि विपक्षी द्वारा बुकिंग राशि वापस न करना सेवा में कमी के तहत आता है। यह फैसला अध्यक्ष योगेश दत्त शुक्ल ने सुनाया। कोलार के वैभव मैरिज गार्डन के खिलाफ सुनाया फैसला शिवाजी नगर निवासी राजरूप पटेल ने अपनी बेटी की शादी के लिए नवंबर 2022 में कार्यक्रम रखा था। इसके लिए उन्होंने जून 2022 में 21 हजार रुपये में कोलार स्थित वैभव मैरिज गार्डन बुक किया। बाद में विवाह कैंसिल हो गया, और उन्होंने जुलाई 2022 में बुकिंग निरस्त कर दी। उन्होंने बार-बार गार्डन प्रबंधन से जमा राशि वापस करने की गुजारिश की। गार्डन प्रबंधन ने कहा कि भविष्य में होने वाले विवाह के समय राशि एडजस्ट कर दी जाएगी। इसके बावजूद लगभग दो वर्ष बीत गए, और विवाह गार्डन में आयोजित नहीं हुआ। इसके बाद भी गार्डन प्रबंधन ने राशि वापस करने से इनकार कर दिया। दूसरी तरफ नोटिस जारी होने के बाद भी गार्डन प्रबंधन की ओर से कोई भी आयोग में उपस्थित नहीं हुआ। आयोग ने उपभोक्ता के पक्ष में फैसला सुनाया उपभोक्ता ने 21 हजार रुपये एडवांस के तौर पर दिए थे। मामले में विपक्षी ने बुकिंग राशि वापस करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया। नोटिस के बावजूद विपक्षी ने न तो आयोग में उपस्थिति दर्ज कराई और न ही कोई दस्तावेज प्रस्तुत किए। आयोग ने कहा कि बुकिंग राशि वापस न करना सेवा में कमी का प्रमाण है। अब देना होगी ब्याज सहित राशि आयोग ने आदेश दिया कि विपक्षी, आदेश की प्रति प्राप्ति दिनांक से 2 माह के भीतर परिवादी को 21,000 रुपये की राशि 9% वार्षिक ब्याज सहित अदा करे। साथ ही, मानसिक कष्ट के लिए 5,000 रुपये और परिवाद व्यय के लिए 3,000 रुपये भी अदा किए जाएं। यदि राशि तय समय पर अदा नहीं की जाती, तो परिवाद प्रस्तुति दिनांक से अदायगी दिनांक तक 9% वार्षिक ब्याज देय होगा। recent visitors 185

भोपाल का न्यू हकीम होटल: किचन में बहते सीवेज के पास बन रहा खाना

Bhopal’s New Hakeem Hotel: Food being cooked near flowing sewage in the kitchen भोपाल। बोर्ड ऑफिस चैराहा स्थित न्यू हकीम होटल में अगर आप नाॅनवेज खाना खाने जाते हैं, तो सावधान हो जाइऐ। यहां नाॅनवेज खाना खुले में बह रहे सीवेज के पास तैयार हो रहा है। वहीं किचन के चारों तरफ गंदगी का अंबार लगा हुआ है। होटल के पीछे बनी किचन की जांच पडताल की गई तो खुले में सीवेज बहता मिला। वहीं होटल संचालक बेफिक्र है, क्योंकि इसके संचालक भोपाल जिला भाजपा कार्यकारिणी में बडे पद पर है। सूत्रों के अनुसार संचालक भाजपा जिला उपाध्यक्ष है, ऐसी होटल संचालक बताता है और कहता है कि मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता है। इसलिए प्रषासन भी दबाववष कार्यवाही करने की बजाय वह धीरे से अपनी जेब गरम करने में भलाई समझते हैं। इसके पहले भी इस होटल के साफ-सफाई और स्वास्थ्य मानकों की अनदेखी के गंभीर मामले सामने आ चुके हैं। यहां खाना गंदगी के बीच तैयार किया जा रहा है जो ग्राहकों की सेहत के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। नाॅनवेज किसका है यह नहीं बताया जाता होटल में जो मांस या मछली लोगों को परोसी जाती है, वह कितने दिन की रखी है। साथ ही लोगों को खिलाये जाने वाले मांस या मछली की क्या क्वालिटी है? इस मांस या मछली की क्वालिटी को किस डाॅक्टर ने खाने योग्य अपनी सहमति दी, यह किसी को नहीं बताया जाता है? कुछ लोगों ने बताया कि नानवेज की क्वालिटी बेकार है। किचन में स्वच्छता का अभाव होटल में देखा गया कि किचन में न तो सफाई की कोई व्यवस्था है और न ही स्वास्थ्य सुरक्षा के बुनियादी नियमों का पालन किया जा रहा है। खाना बनाने में इस्तेमाल होने वाले बर्तनों और सामग्री की हालत खराब है। ऐसे अस्वच्छ वातावरण में तैयार खाना लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है।संचालकों की लापरवाहीहोटल संचालकों द्वारा ग्राहकों की सेहत को नजरअंदाज किया जा रहा है। गंदगी के बीच भोजन तैयार करना न केवल गैर-जिम्मेदाराना है बल्कि यह स्वास्थ्य विभाग के नियमों का भी सीधा उल्लंघन है। स्थानीय प्रशासन की भूमिका इस मामले ने स्थानीय प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या ऐसे होटलों पर नियमित जांच और कार्रवाई की जा रही है? यदि नहीं, तो यह प्रशासन की बड़ी लापरवाही मानी जाएगी। इस मुद्दे पर लोगों ने प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है ताकि ऐसी लापरवाही दोबारा न हो।स्वास्थ्य सुरक्षा की अनदेखी बर्दाश्त नहींखाने-पीने की जगहों पर स्वच्छता और स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। गंदगी में तैयार खाना सिर्फ होटल आने वाले ग्राहकों को ही नहीं, बल्कि व्यापक स्तर पर समाज के स्वास्थ्य को भी प्रभावित करता है।इस तरह की घटनाएं न केवल होटल संचालकों की लापरवाही को उजागर करती हैं बल्कि प्रशासन की जिम्मेदारी पर भी कई सवाल खडे करती है? समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो इसके परिणाम समाज के स्वास्थ्य पर दूरगामी असर डाल सकते हैं। क्या होना चाहिए अगला कदम? recent visitors 641

दृश्य देखिए और फिर सरकारी दावा, हमारी आस्था भी,,,,?

See the scene and then the government’s claim, our faith also,,,,? इंदौर । कार्तिक पूर्णिमा को,नदी में स्नान करना और दीपदान करना चाहिए ऐसा कहां भी जाता है माना भी जाता है। नर्मदा नदी,चंबल नदी, कालीसिंध नदी, श्रिपा नदी कुछेक और हमारे प्रदेश में है। यह दृश्य श्रिपा गांव का है और श्रिपा नदी का है तथा इंदौर देवास सड़क के पूल से मैंने ही लिया है। इस क्षैत्र के जनप्रतिनिधि मप्र शासन के जल एवं सिंचाई विभाग के केबिनेट मंत्री तुलसीराम सिलावट है,,, तो इंदौर, उज्जैन के लिए श्रिपा नदी महत्वपूर्ण,,। इसके सामने के क्षेत्र में गांव के पास तट, मंदिर है वो थोड़ा साफ है। गंदगी होती,गंदे नाले का पानी आता तो मैं दृष्टिकोण अपना अलग रखता यह तो कज्जी है, मतलब पानी बहता हुआ नहीं है, एकत्रित पानी है,,,। और सरकारी ध्यान भी नहीं  धर्म आस्था और श्रद्धा का संगम आदिकाल से, कालांतर से चल रहा, पंरतु जागरुकता भी चलती रही, ईस्तेहार देकर करोड़ों रुपए खर्च करके इंवेट करने से नदी, जलाशय, तालाब स्वच्छ निर्मल नहीं हो सकते उसके खातिर सजगता और चाक चौबंद निगाहें भी चाहिए,,,कार में भले शीशे हो पर निगाह बान निगाहें चाहिए, सैकड़ों लोग रोज निकलते हैं पर आवाज भी निकलती, हम श्रिपा नदी की यह हालत देख रहे,, नर्मदा नदी की भी हालत भी बताऊंगा खूद जाकर देखकर,, क्या अधिकारियों को जनप्रतिनिधि गणों को नहीं दिखता, धार्मिक संगठन और सामाजिक संगठन चुप क्यों, सजगता की आवश्यकता है नदी पूजते हैं तो पूज्यनीय स्थल ऐसे होंगे, करोड़ों रुपए हर माह तनख्वाह बंटती है अधिकारियों की तनख्वाह में किस लिए,,, मैंने लिखा था मैं तह तक जाकर सही स्थिति हर नदी और तालाब की हर माह जाकर एक खुलासा करूंगा,,,। श्रिपा नर्मदा लिंक परियोजना के नाम पर खेल हुआ, जहां मां श्रिपा नदी का उद्गम हुआ वे वहां से 7किलो मीटर दूर तक विलुप्त है,,, उसके बाद आगे प्रगट होती है और श्रिपा नदी का यह रुप श्रिपा गांव में दिखता है,एक तट साफ है जहां मंदिर है। दुसरा तट ऐसा, जल्दी ही मैं आगे बढती इसी नदी का रुप दिखाऊंगा तथा फिर फैक्ट्री आदि मिलते फिर उज्जैन में रामघाट, मंगलनाथ मंदिर सामने का, फिर ड्रैनेज चैम्बरों के पानी के मिलते दृश्य, इंवेट और मैनेजमेंट को हकीकत का आईना दिखाइये,, मेरा यह अभिमत  “प्रमोद कुमार व्दिवेदी एड्वोकेट” recent visitors 145