भाड़े के शिक्षक मामले में सियासत तेज, उमंग सिंघार बोले- ‘स्कूलों में भी डबल इंजन की…’

Politics intensifies in the case of hired teachers, Umang Singhar said – ‘Double engine is used in schools also…’ सागर ! मझेरा गांव भाड़े के शिक्षक रखने के मामले में सुर्खियों में आ गया है. दरअसल, मझेरा गांव में स्थित शासकीय प्राथमिक स्कूल के शिक्षक ने अपने स्थान पर पढ़ाने के लिए किराए पर शिक्षिका रख ली. मामला उजागर होने के बाद से मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस, सरकार पर जमकर हमलावर है. नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने एक्स ट्वीट कर लिखा कि- मोहन बाबू क्या ये भी डबल इंजन वाली व्यवस्था है? सोशल मीडिया के एक्स पर कांग्रेस के अधिकृत अकाउंट से ट्वीट किया गया कि- मास्टर जी ने केंद्रीय मंत्री की सेवा चाकरी और जी हजूरी कर ली, फिर बच्चों का भविष्य बर्बाद हो तो भी परवाह किसे? मध्यप्रदेश में शिक्षा का स्तर लगातार गिरता जा रहा है. सत्ता के संरक्षण में शिक्षक पढ़ाने नहीं जाते. मोटी तनख्वाह वसूल रहे शिक्षक एवजी पर 3 हजार के मजदूर शिक्षक भेज देते हैं. मगर भारतीय जनता पार्टी सरकार को बच्चियों के भविष्य और शिक्षा की गुणवत्ता की कोई चिंता नहीं है. ‘स्कूलों में भी डबल इंजन की सरकार’ नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने एक्स पर ट्वीट कर लिखा कि लगता है प्रदेश के स्कूलों में भी डबल इंजन की सरकार चल रही. सागर जिले के ग्रामीण इलाके मझेरा के स्कूल का असल शिक्षक इंद्र विक्रम, मंत्री वीरेन्द्र खटीक का मुंह लगा है. इस शिक्षक ने अपनी जगह स्कूल में एवजी शिक्षक ममता को तीन हजार रुपए महीने पर नौकरी पर रख लिया, वो इनकी जगह क्लास लेती है और ये मंत्री के हाथों खीर खाते हैं. नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघा ने लिखा कि मोहन बाबू क्या ये भी डबल इंजन वाली व्यवस्था है? सिर्फ यही नहीं प्रदेश के कई सरकारी स्कूलों में ऐसे एवजी शिक्षक पढ़ा रहे हैं. राजनीतिक संरक्षण वाले शिक्षकों ने एवजियों को पढ़ाने का काम सौंप दिया और खुद राजनीति करते हैं. अब देखना है कि सागर जिले के शिक्षक इंद्र विक्रम पर सरकार क्या कार्रवाई करती है. शिक्षक का 40 हजार रुपए वेतन मझेरा गांव के शासकीय प्राथमिक स्कूल में पढ़ाने वाले शिक्षक इंद्र विक्रम सिंह परमार उर्फ वट्टू राजा का 40 हजार रुपए वेतन है, जबकि उन्होंने 3000 रुपए महीने में ममता नामक महिला को पढ़ाने के लिए रख रखा है, वह एक साल से इस स्कूल में पढ़ा रही हैं. इधर इस मामले में प्रधानाध्यापक धर्मेन्द्र सिंह का कहना है कि कई बार मना किया, फिर भी ममता स्कूल आ रही हैं. उपस्थिति रजिस्टर में लाइन खींच दी, फिर भी इंद्र महीने में एक बार आकर हस्ताक्षर कर रहे हैं. वहीं शिक्षक इंद्र का कहना है कि सुबह-शाम केंद्रीय मंत्री के साथ समय व्यतीत करता हूं. दिन में स्कूल जाता हूं. कभी-कभी नहीं जा पाता, वह अलग बात है. बता दें यह केवल एक स्कूल का हाल नहीं है, बल्कि सागर जिले के ही बिलहरा के बंजरिया, भलैयां, रेहटी, कजरई के अलावा नर्मदापुरम के खोकसर के स्कूलों में भी यही हाल है. यहां 40 से 80 हजार रुपए मासिक वेतन पाने वाले शिक्षकों ने किराए के शिक्षक रख रखे हैं. recent visitors 132

RGPV में घोटाला: स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के नाम पर बड़ा घपला, छात्रों ने उच्च शिक्षा मंत्री को सौंपा ज्ञापन

Scam in RGPV: Big scam in the name of sports complex, ABVP students submitted memorandum to Higher Education Minister भोपाल। राजधानी भोपाल का राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (RGPV) एक बार फिर सुर्ख़ियों में आ गया है। अब यहां स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के नाम पर बड़ा घोटाला किया गया है। जिसकी शिकायत अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार को ज्ञापन सौंपकर की है। साथ ही इस मामले की जांच कर कार्रवाई की मांग की है। ABVP के छात्रों ने आरोप लगाते हुए कहा कि RGPV यूनिवर्सिटी में स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के नाम पर करोड़ों का भ्रष्टाचार हुआ है। उन्होंने कहा कि 2015 में विश्वविद्यालय द्वारा आउटडोर-इनडोर स्पोर्ट्स कांप्लेक्स के निर्माण के लिए 16 करोड़ 50 लाख की राशि स्वीकृत की गई थी। साल 2019 में इस राशि को बढ़ाकर 19 करोड़ 16 लाख रुपए कर दिया गया। इसके निर्माण की जिम्मेदारी सीपीए को दी गई थी। वह निर्माण कार्य आज भी चल रहा है। ABVP के छात्रों का कहना है कि कोटेशन में दिखाए गए 10 एग्जॉस्ट फैन के स्थान पर एक भी एग्जॉस्ट फैन नहीं लगाया गया। वुडन फ्लोरिंग मे भी खराब प्लास्टिक का उपयोग किया गया है। उच्च शिक्षा मंत्री को ज्ञापन सौंपकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने पूरे मामले की जांच करने की मांग की है। recent visitors 125

शादी कैंसिल होने पर मैरिज गार्डन संचालक लौटाएंगे पूरी राशि : ‘आगे एडजस्ट कर लेंगे’ कह कर पैसे नहीं रख सकते; कंज्यूमर आयोग का फैसला

Marriage garden operators will return the entire amount if the wedding is cancelled: They cannot keep the money saying ‘we will adjust it later’; Consumer Commission’s decision भोपाल। अगर आप शादी हॉल या मैरिज गार्डन बुक करते हैं और किसी कारणवश कार्यक्रम कैंसिल हो जाए, तो मैरिज गार्डन या शादी हॉल संचालक को बुकिंग कैंसिल होने के तुरंत बाद रकम लौटानी होगी। संचालक एडवांस राशि वापस करने से यह कहकर इनकार नहीं कर सकते कि ‘आगे एडजस्ट कर लेंगे’ या ‘जब कार्यक्रम होगा, तब एडजस्ट कर लेंगे’। दरअसल, भोपाल कंज्यूमर आयोग की बेंच-1 ने ऐसा ही एक फैसला सुनाया हैं। आयोग ने कहा कि विपक्षी द्वारा बुकिंग राशि वापस न करना सेवा में कमी के तहत आता है। यह फैसला अध्यक्ष योगेश दत्त शुक्ल ने सुनाया। कोलार के वैभव मैरिज गार्डन के खिलाफ सुनाया फैसला शिवाजी नगर निवासी राजरूप पटेल ने अपनी बेटी की शादी के लिए नवंबर 2022 में कार्यक्रम रखा था। इसके लिए उन्होंने जून 2022 में 21 हजार रुपये में कोलार स्थित वैभव मैरिज गार्डन बुक किया। बाद में विवाह कैंसिल हो गया, और उन्होंने जुलाई 2022 में बुकिंग निरस्त कर दी। उन्होंने बार-बार गार्डन प्रबंधन से जमा राशि वापस करने की गुजारिश की। गार्डन प्रबंधन ने कहा कि भविष्य में होने वाले विवाह के समय राशि एडजस्ट कर दी जाएगी। इसके बावजूद लगभग दो वर्ष बीत गए, और विवाह गार्डन में आयोजित नहीं हुआ। इसके बाद भी गार्डन प्रबंधन ने राशि वापस करने से इनकार कर दिया। दूसरी तरफ नोटिस जारी होने के बाद भी गार्डन प्रबंधन की ओर से कोई भी आयोग में उपस्थित नहीं हुआ। आयोग ने उपभोक्ता के पक्ष में फैसला सुनाया उपभोक्ता ने 21 हजार रुपये एडवांस के तौर पर दिए थे। मामले में विपक्षी ने बुकिंग राशि वापस करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया। नोटिस के बावजूद विपक्षी ने न तो आयोग में उपस्थिति दर्ज कराई और न ही कोई दस्तावेज प्रस्तुत किए। आयोग ने कहा कि बुकिंग राशि वापस न करना सेवा में कमी का प्रमाण है। अब देना होगी ब्याज सहित राशि आयोग ने आदेश दिया कि विपक्षी, आदेश की प्रति प्राप्ति दिनांक से 2 माह के भीतर परिवादी को 21,000 रुपये की राशि 9% वार्षिक ब्याज सहित अदा करे। साथ ही, मानसिक कष्ट के लिए 5,000 रुपये और परिवाद व्यय के लिए 3,000 रुपये भी अदा किए जाएं। यदि राशि तय समय पर अदा नहीं की जाती, तो परिवाद प्रस्तुति दिनांक से अदायगी दिनांक तक 9% वार्षिक ब्याज देय होगा। recent visitors 179

भोपाल का न्यू हकीम होटल: किचन में बहते सीवेज के पास बन रहा खाना

Bhopal’s New Hakeem Hotel: Food being cooked near flowing sewage in the kitchen भोपाल। बोर्ड ऑफिस चैराहा स्थित न्यू हकीम होटल में अगर आप नाॅनवेज खाना खाने जाते हैं, तो सावधान हो जाइऐ। यहां नाॅनवेज खाना खुले में बह रहे सीवेज के पास तैयार हो रहा है। वहीं किचन के चारों तरफ गंदगी का अंबार लगा हुआ है। होटल के पीछे बनी किचन की जांच पडताल की गई तो खुले में सीवेज बहता मिला। वहीं होटल संचालक बेफिक्र है, क्योंकि इसके संचालक भोपाल जिला भाजपा कार्यकारिणी में बडे पद पर है। सूत्रों के अनुसार संचालक भाजपा जिला उपाध्यक्ष है, ऐसी होटल संचालक बताता है और कहता है कि मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता है। इसलिए प्रषासन भी दबाववष कार्यवाही करने की बजाय वह धीरे से अपनी जेब गरम करने में भलाई समझते हैं। इसके पहले भी इस होटल के साफ-सफाई और स्वास्थ्य मानकों की अनदेखी के गंभीर मामले सामने आ चुके हैं। यहां खाना गंदगी के बीच तैयार किया जा रहा है जो ग्राहकों की सेहत के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। नाॅनवेज किसका है यह नहीं बताया जाता होटल में जो मांस या मछली लोगों को परोसी जाती है, वह कितने दिन की रखी है। साथ ही लोगों को खिलाये जाने वाले मांस या मछली की क्या क्वालिटी है? इस मांस या मछली की क्वालिटी को किस डाॅक्टर ने खाने योग्य अपनी सहमति दी, यह किसी को नहीं बताया जाता है? कुछ लोगों ने बताया कि नानवेज की क्वालिटी बेकार है। किचन में स्वच्छता का अभाव होटल में देखा गया कि किचन में न तो सफाई की कोई व्यवस्था है और न ही स्वास्थ्य सुरक्षा के बुनियादी नियमों का पालन किया जा रहा है। खाना बनाने में इस्तेमाल होने वाले बर्तनों और सामग्री की हालत खराब है। ऐसे अस्वच्छ वातावरण में तैयार खाना लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है।संचालकों की लापरवाहीहोटल संचालकों द्वारा ग्राहकों की सेहत को नजरअंदाज किया जा रहा है। गंदगी के बीच भोजन तैयार करना न केवल गैर-जिम्मेदाराना है बल्कि यह स्वास्थ्य विभाग के नियमों का भी सीधा उल्लंघन है। स्थानीय प्रशासन की भूमिका इस मामले ने स्थानीय प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या ऐसे होटलों पर नियमित जांच और कार्रवाई की जा रही है? यदि नहीं, तो यह प्रशासन की बड़ी लापरवाही मानी जाएगी। इस मुद्दे पर लोगों ने प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है ताकि ऐसी लापरवाही दोबारा न हो।स्वास्थ्य सुरक्षा की अनदेखी बर्दाश्त नहींखाने-पीने की जगहों पर स्वच्छता और स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। गंदगी में तैयार खाना सिर्फ होटल आने वाले ग्राहकों को ही नहीं, बल्कि व्यापक स्तर पर समाज के स्वास्थ्य को भी प्रभावित करता है।इस तरह की घटनाएं न केवल होटल संचालकों की लापरवाही को उजागर करती हैं बल्कि प्रशासन की जिम्मेदारी पर भी कई सवाल खडे करती है? समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो इसके परिणाम समाज के स्वास्थ्य पर दूरगामी असर डाल सकते हैं। क्या होना चाहिए अगला कदम? recent visitors 638

दृश्य देखिए और फिर सरकारी दावा, हमारी आस्था भी,,,,?

See the scene and then the government’s claim, our faith also,,,,? इंदौर । कार्तिक पूर्णिमा को,नदी में स्नान करना और दीपदान करना चाहिए ऐसा कहां भी जाता है माना भी जाता है। नर्मदा नदी,चंबल नदी, कालीसिंध नदी, श्रिपा नदी कुछेक और हमारे प्रदेश में है। यह दृश्य श्रिपा गांव का है और श्रिपा नदी का है तथा इंदौर देवास सड़क के पूल से मैंने ही लिया है। इस क्षैत्र के जनप्रतिनिधि मप्र शासन के जल एवं सिंचाई विभाग के केबिनेट मंत्री तुलसीराम सिलावट है,,, तो इंदौर, उज्जैन के लिए श्रिपा नदी महत्वपूर्ण,,। इसके सामने के क्षेत्र में गांव के पास तट, मंदिर है वो थोड़ा साफ है। गंदगी होती,गंदे नाले का पानी आता तो मैं दृष्टिकोण अपना अलग रखता यह तो कज्जी है, मतलब पानी बहता हुआ नहीं है, एकत्रित पानी है,,,। और सरकारी ध्यान भी नहीं  धर्म आस्था और श्रद्धा का संगम आदिकाल से, कालांतर से चल रहा, पंरतु जागरुकता भी चलती रही, ईस्तेहार देकर करोड़ों रुपए खर्च करके इंवेट करने से नदी, जलाशय, तालाब स्वच्छ निर्मल नहीं हो सकते उसके खातिर सजगता और चाक चौबंद निगाहें भी चाहिए,,,कार में भले शीशे हो पर निगाह बान निगाहें चाहिए, सैकड़ों लोग रोज निकलते हैं पर आवाज भी निकलती, हम श्रिपा नदी की यह हालत देख रहे,, नर्मदा नदी की भी हालत भी बताऊंगा खूद जाकर देखकर,, क्या अधिकारियों को जनप्रतिनिधि गणों को नहीं दिखता, धार्मिक संगठन और सामाजिक संगठन चुप क्यों, सजगता की आवश्यकता है नदी पूजते हैं तो पूज्यनीय स्थल ऐसे होंगे, करोड़ों रुपए हर माह तनख्वाह बंटती है अधिकारियों की तनख्वाह में किस लिए,,, मैंने लिखा था मैं तह तक जाकर सही स्थिति हर नदी और तालाब की हर माह जाकर एक खुलासा करूंगा,,,। श्रिपा नर्मदा लिंक परियोजना के नाम पर खेल हुआ, जहां मां श्रिपा नदी का उद्गम हुआ वे वहां से 7किलो मीटर दूर तक विलुप्त है,,, उसके बाद आगे प्रगट होती है और श्रिपा नदी का यह रुप श्रिपा गांव में दिखता है,एक तट साफ है जहां मंदिर है। दुसरा तट ऐसा, जल्दी ही मैं आगे बढती इसी नदी का रुप दिखाऊंगा तथा फिर फैक्ट्री आदि मिलते फिर उज्जैन में रामघाट, मंगलनाथ मंदिर सामने का, फिर ड्रैनेज चैम्बरों के पानी के मिलते दृश्य, इंवेट और मैनेजमेंट को हकीकत का आईना दिखाइये,, मेरा यह अभिमत  “प्रमोद कुमार व्दिवेदी एड्वोकेट” recent visitors 140

भोपाल को झुग्गी मुक्त करने कलस्टरों में विभाजित करने की योजना, पीपीपी माेड के तहत बनाए जाएंगे पक्के मकान

भोपाल  राजधानी को झुग्गी मुक्त बनाने के लिए जिला प्रशासन ने तैयारियां शुरू कर दी हैं।दरअसल मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव के निर्देश पर शहर को नौ कलस्टरों में विभाजित करने की योजना बनाई है।इसके तहत सभी झुग्गी क्षेत्रों का सर्वे कर चिह्नांकन किया जाएगा और कुल कितनी शासकीय भूमि पर झुग्गी बनी हुई हैं इसकी रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इस रिपोर्ट के आधार पर डीपीआर तैयार कर शासन को भेजी जाएगी। इन सभी विषयों पर चर्चा करने के लिए कलेक्ट्रेट में गुरुवार को कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने बैठक ली। जिसमें नगर निगम आयुक्त हरेंद्र नारायन सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे। जिसमें तय किया गया कि झुग्गी हटाने के पहले चरण की शुरूआत मंत्रालय वल्लभ भवन से की जाएगी। यहां करीब 39 हेक्टेयर भूमि में बनी नौ झुग्गी बस्तियों को हटाया जाएगा और रहवासियों को पीपीपी मोड (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) के तहत पक्के मकान बनाकर दिए जाएंगे। बता दें कि नवदुनिया ने पूर्व में शासकीय भूमि पर झुग्गियों से संबंधित खबरें प्रकाशित की हैं। 12 हेक्टेयर में बनाए जाएंगे पक्के मकान पहले कलस्टर के प्रथम चरण में मंत्रालय के पास बनी नौ झुग्गी बस्तियों को चिह्नित किया गया है।इनमें ओम नगर, वल्लभ नगर, भीम नगर, दुर्गा नगर, अशोक सम्राट नगर, कुम्हार पुरा, झदा कॉलोनी और वल्लभ नगर दो के छह हजार 534 परिवारों को पक्के मकानों में शिफ्ट किया जाना है। इसके लिए अधिकारियों सर्वे पूरा कर लिया है और अब इसके आधार पर ही डीपीआर, डिजाइन, प्लानिंग पालिसी, एस्टीमेट और टेंडर तैयार किए जाएंगे। यह काम अधिकारियों को एक सप्ताह में पूरा करना है।यहां स्थित 39 हेक्टेयर भूमि में से 12 हेक्टेयर पर झुग्गीवासियों के लिए पीपीपी मोड पर पक्के मकान बनाए जाएंगे। बाकि 27 हेक्टेयर शासकीय भूमि पर सुराज अभियान और रिडेंसीफिकेशन नीति के तहत आवासीय परियोजनाओं में माल, व्यवसायिक कांप्लेक्स, प्राइम डेवलेपमेंट कार्य भी किए जाएंगे। दो महीने में करना है पूरी तैयारी जिले में साढ़े चार लाख मकान हैं,जिनमें से डेढ़ लाख झुग्गियां है।इन डेढ़ लाख झुग्गियों को शासकीय भूमि से हटाने के लिए दो महीने में पूरी तैयारी करनी है।इस दौरान अधिकारियों के द्वारा सर्वे कर रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इसी सर्वे रिपोर्ट के आधार पर नौ कलस्टर के तहत झुग्गी हटाने की कार्ययोजना तैयार की जाएगी। जिसे पहले सरकार को दिखाया जाएगा। सरकार से अनुमति मिलते ही इस पर काम शुरू कर दिया जाएगा। पांच वर्ष का रखा गया है लक्ष्य शहर को झुग्गी मुक्त बनाने के लिए पांच वर्ष का लक्ष्य रखा गया है।अगले एक वर्ष में करीब 25 हजार झुग्गी हटाने का प्रयास जिला प्रशासन, नगर निगम द्वारा किया जा रहा है।अधिकारियों ने दावा किया है कि दो महीने बाद ही पहले कलस्टर पर काम शुरू कर दिया जाएगा।इसके तहत झुग्गी पुनर्वास कार्यक्रम के तहत भी पक्के मकान लोगों को दिए जाएंगे। फैक्ट फाइल शहर में कुल मकान – 450000 शहर में कुल झुग्गियां – 150000 हटाने के लिए बनाए कलस्टर – 09 recent visitors 69

भाजपा ने विजयपुर में वोट नहीं डलने दिए, बुधनी में आंगनबाडी कार्यकर्ताओं द्वारा चुनाव को प्रभावित कराया गया, पटवारी ने लगाए भाजपा-सरकार पर गंभीर आरोप

BJP did not allow voting in Vijaypur, elections were influenced by Anganwadi workers in Budhni, Patwari made serious allegations against BJP-government. भोपाल। मध्यप्रदेश में 10 माह पहले विधानसभा चुनाव हुए थे। मोदी गारंटी को लेकर भाजपा सरकार में आई लेकिन भाजपा ने एक भी गारंटी पूरी नहीं की। भाजपा का मूल चरित्र जिसमें नये भारत में मंडी लगती है जनप्रतिनिधियों की। प्राचीन भारत में सुना था गुलाम बिकते हैं, लेकिन अभी आधुनिक भारत में जनप्रतिनिधियों की बोली लगती है। जिसमें मध्यप्रदेश इसमें सबसे ज्यादा ग्रसित रहा। भाजपा को जो मत मिला उससे वह मदहोष को गई है। बाबा साहेब अंबेडकर विरोधी, संविधान विरोधी मताधिकार विरोधी और लोकतंत्र विरोधी है भारतीय जनता पार्टी। कलेक्टर ने किया भाजपा एजेंट की तरह कार्य विजयपुर विधानसभा उपचुनाव में उपद्रव और आतंक के अनुमान को लेकर कांग्रेस ने चुनाव आयोग को क़रीब 100 शिकायते की, लेकीन चुनाव आयोग निष्पक्ष चुनाव संपन्न करवाने के बजाए भाजपा सरकार के आगे घुटने टेक कर ये दयनीय मंजर देखता रहा! श्योपुर कलेक्टर किशोर कन्याल विजयपुर उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी रामनिवास रावत के एजेंट की तरह कार्य करते रहे। कांग्रेस लगातार शिकायत करती रही, लेकिन चुनाव आयोग ने भी संज्ञान नहीं लिया! जिसका नतीजा यह उपद्रव है। विजयपुर चुनाव में रामनिवास रावत के गुंडों ने संविधान निर्माता बाबा साहब आंबेडकर जी की प्रतिमा को तोड़ दिया। दबंगई और गुंडई में रावत के गुंडों ने बाबा साहब आंबेडकर की प्रतिमा तोड़कर देश के प्रत्येक नागरिक, संविधान और वंचित वर्ग का अपमान किया है। सरकार के आगे घुटने टेक चुका प्रशासन यदि अपनी जिम्मेदारी निभाता, तो गुंडा तत्व भारत रत्न डॉं. भीमराव अंबेडकर जी की प्रतिमा तोड़ने की हिम्मत नहीं कर पाते। बंटी रावत ने चलाई गोलियां पटवारी ने कहा कि हमने जो संभावनाएं चुनाव में जाहिर की थी वह सब की सब सामने आयी। जैसे हमने कहा कि राजस्थान से डाकूं आयेंगे, आये, दलितों, आदिवासियों पर हमला होगा, दलितों के साथ मारपीट की जायेगी, ये सब हुआ। बंटी रावत नामक डकैत ने आदिवासियों के साथ मारपीट की। 10 बाईकों पर अपने 20 साथियों के आये बंटी रावत ने अंधाधुंध गोलियां चलाई जिससे क्षेत्र में भय और आतंक का माहौल निर्मित हुआ। सरकार की सह पर चुनाव आयोग पटवारी ने कहा कि चुनाव आयोग को कार्यवाही के लिए लगभग 100 शिकायतें भेजी, लेकिन सरकार की सह पर चुनाव आयोग ने कोई कार्यवाही नहीं की। विजयपुर विधानसभा के अंतर्गत जातिगत व्यक्ति का बीएलओ बनाये की षिकायत, संवेदनशील बूथों पर सुरक्षा-व्यवथा, पोलिंग बूथ पर कैमरे लगाये जाये, सरकारी कर्मचारियों पर अमला चाहे वन विभाग स्वास्थ्य, रेवेन्यु या अन्य विभाग हो की शिकायत आंगनबाडी कार्यकर्ताओं द्वारा भाजपा के पक्ष में कार्य करने की शिकायत, वहीं रामनिवास रावत के दो भाई जो आरटीओ में पदस्थ हैं जो चुनाव का संचालन कर रहे थे की शिकायत, 37 गांवों में जाटवों को पीटा गया। लोगों के घरों में आग लगायी गई, मतदाताओं को गुंडों से पिटवाने की घटना और हमें सबसे बड़ी शिकायत पर्यावरण विभाग का उपसचिव को अपने विजयपुर क्षेत्र में कलेक्टर बनाकर पदस्थ कराने की शिकायत। इस प्रकार कांग्रेस ने करीब 100 शिकायतें निर्वाचन आयोग को समय-समय पर की। पटवारी ने कहा कि नरेन्द्र मोदी और अमित शाह संविधान विरोधी है। प्रदेष के मुख्यमंत्री कहते हैं कि जैसे भी हो जो भी करना पड़े करो, लेकिन यह चुनाव जीतों, यानि लोकतंत्र की खुलकर हत्या करो।पटवारी ने कहा कि विजयपुर में आदिवासियों को पर्ची नहीं दी गई। उनके साथ मारपीट की गई। विजयपुर में राजस्थान के गुंडों द्वारा 20-22 गुंडों के साथ आदिवासियों पर गोलियां चलायी गईं, वहीं बुधनी में आंगनबाडी कार्यकर्ताओं द्वारा बूथों पर महिलाओं को भाजपा के पक्ष में मतदान कराने के लिए प्रेरित किया गया। भाजपा पागल हाथी की तरह हो गयी है। विजयपुर और बुधनी में इतना आंतक भाजपा ने करवाया इससे पहले कभी भी मप्र में ऐसा नहीं हुआ। फिर भी दोनों चुनाव कांग्रेस पार्टी जीतेगी। उन्होंने कहा कि कर्मचारी अधिकारी सर्विरू रूल के अनुसार काम करें, जिन्होंने बाबा साहेब की मूर्ति को क्षति पहुंचाई हैं उन्हें गिरफ्तार किया जाये।पटवारी ने कहा कि बाबा साहेब अंबेडकर की मूर्ति पर हमला करने वालों की 24 घंटे के भीतर गिरफ्तारी होना चाहिए। भाजपा का असली चेहरा, चाल-चरित्र है। लोकतंत्र विरोधी, बाबा साहेब के संविधान विरोधी है भाजपा। आखिर कैसा मप्र बनाना चाहती है। भाजपा का असली चेहरा यही है कि वह महिलाओं को 1200 रूपये देकर गुंडों से पिटवाती है। सरकार की मिलीभगत से बाबा साहेब की मूर्ति को तोड़ा पटवारी ने कहा कि सरकार की मिलीभगत से बाबा साहेब की मूर्ति को तोड़ा गया है, बाबा साहेब की मूर्ति तोड़ने की कांग्रेस पार्टी घोर निंदा करती है, कांग्रेस पार्टी ने निर्णय लिया है कि दलित विरोधी भाजपा जिन्होंने विजयपुर में बाबा साहेब की प्रतिमा तोडी, बाबा साहेब की मूर्ति तोड़े जाने की घटना के विरोध में उसके खिलाफ कांग्रेस पार्टी 18 नवम्बर को पूरे प्रदेष मेें प्रदेष स्तरीय आंदोलन कर भाजपा सरकार के खिलाफ विरोध दर्ज करायेगी और जिला और ब्लाक मुख्यालयों पर स्थिति बाबा साहेब की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया जायेगा और भाजपा सरकार का पुतला दहन किया जायेगा तथा जिले में कलेक्टर और ब्लाक में एसडीएम को ज्ञापन सौंपेगी और आरोपियों, उपद्रियों की गिरफ्तारी की मांग की जायेगी।पत्रकार वार्ता के दौरान मप्र कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक, प्रदेश कांग्रेस के उपाध्यक्ष राजीव सिंह, चुनाव आयोग कार्य प्रभारी जेपी धनोपिया भी उपस्थित थे। recent visitors 338