भाजपा MLA का अनोखा अन्दाज: पत्नी का नामांकन करने ले गये स्कूटर पर बैठा कर

लुधियाना। लुधियाना में निकाय चुनाव 21 दिसंबर को है। आज नामांकन भरने का आखिरी दिन है। बीती रात आम आदमी पार्टी ने अपने 94 उम्मीदवारों की घोषणा कर दी थी। वार्ड नंबर 70 से प्रत्याशी की घोषणा होना बाकी है। आज समस्त पार्टियों के उम्मीदवार नामांकन भरने के लिए अलग-अलग सेंटरों पर पहुंच रहे है। MLA गुरप्रीत गोगी पत्नी सुखचैन के साथ आज उनका नामांकन भरवाने स्कूटर पर सवार होकर पहुंचे। अक्सर विधायक गोगी चुनाव में किसी न किसी मुद्दे को लेकर चर्चा में रहते हैं। वहीं शिअद ने बीती रात 25 उम्मीदवारों की घोषणा की थी। अब शिअद के 33 उम्मीदवारों की घोषणा होना बाकी है। कांग्रेस ने अभी तक दो लिस्टें जारी करके कुल 76 उम्मीदवारों का ऐलान किया है। अब कांग्रेस के 19, शिअद के 33 और भाजपा के 2 उम्मीदवारों की सूची जारी होना बाकी है। भाजपा ने 2 वार्डों के बदले उम्मीदवार भाजपा ने 2 वार्डों से उम्मीदवार बदल दिए है। वार्ड नंबर 21 में भाजपा ने पहले इशप्रीत को टिकट दिया था लेकिन अब उसे हटा कर अनीता को उम्मीदवार बनाया है। इसी तरह वार्ड नंबर 33 से लखविंदर कौर को प्रत्याशी घोषित करने के बाद उसका टिकट काट कर कुलदीप कौर को दिया है। समस्त पार्टियों के वर्करों में निकाय चुनाव को लेकर काफी उत्साह है। 400 से अधिक उम्मीदवार आज करेंगे नामांकन नगर निगम चुनाव को लेकर 25 दावेदारों ने नॉमिनेशन किया है। आज बुधवार को नॉमिनेशन का आखिरी दिन है। आज 400 से अधिक दावेदार नामांकन दाखिल करेंगे। आखिरी दिन होने के कारण कई सेंट्ररो में छुटपुट बहसबाजी या झड़प के मामले भी सामने आ सकते हैं, जिस कारण पुलिस ने सेंटरों पर सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए हुए हैं। 9 दिसंबर से नामांकन प्रक्रिया शुरू हुई थी। 11 दिसंबर तक कुल 26 उम्मीदवारों के नामांकन पत्र भरे जा चुके हैं। जबकि कई दावेदारों को जरूरी दस्तावेज कम होने के कारण वापस लौटना पड़ा। वहीं, नगर निगम, गलाडा से एनओसी लेने के लिए दावेदारों की भीड़ लग रही है। भाजपा, कांग्रेस, आप, शिअद और अन्य दावेदारों ने एनओसी लेने के लिए बिल्डिंग ब्रांच, प्रॉपर्टी टैक्स आदि ब्रांचों का रुख किया। recent visitors 155

कमलनाथ ने मोहन सरकार को घेरा, कहा प्रदेश में निवेश तो दूर की बात, केन्द्रीय योजनाओं की राशि……..?

Kamal Nath targeted the government: Leave alone investment in MP, only half the amount of central schemes was received. भोपाल। कांग्रेस नेता एवं पूर्व सीएम कमलनाथ ने मध्यप्रदेश में निवेश को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि- मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव आए दिन प्रदेश में बड़े पैमाने पर निवेश के वादों की चर्चा करते रहते हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि निजी क्षेत्र से आने वाला यह निवेश तो दूर की बात है, केंद्र सरकार से प्रदेश में चल रही विभिन्न योजनाओं के लिए आने वाले पैसे को ही अब तक राज्य सरकार प्राप्त नहीं कर सकी है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक़ मध्य प्रदेश को चालू वित्त वर्ष में केंद्रीय योजनाओं के लिए केंद्र सरकार की ओर से 37,652 करोड़ रुपया मिलने थे लेकिन अब तक सिर्फ़ 16,194 करोड़ रुपये ही मिले हैं। उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा- जिन महत्वपूर्ण केंद्रीय योजनाओं के लिए पर्याप्त राशि नहीं मिली है उनमें -आयुष्मान योजना, आदिवासी समुदाय के छात्रों की छात्रवृत्ति, राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना, जल जीवन मिशन जैसी महत्वपूर्ण योजनाएं शामिल हैं। इसके अलावा केंद्रीय सड़क निधि, PM श्री स्कूल और अदालत के भवन निर्माण की राशि भी अटकी हुई है।मुख्यमंत्री यह सारी रकम मध्य प्रदेश की जनता का अधिकार और केंद्र पैसा देकर कोई एहसान नहीं कर रहा है। प्रदेश की जनता अपनी गाढ़ी कमाई से केंद्र सरकार को जो टैक्स देती है, उसी का एक छोटा सा हिस्सा केंद्रीय मदद के रूप में प्रदेश को वापस मिलता है। इसलिए आप दलगत राजनीति से ऊपर उठकर केंद्र सरकार पर प्रदेश को उसका अधिकार देने के लिए दबाव बनाएं। recent visitors 179

‘भाषण दिया, माला पहनी, अब रिजाइन करो’, वरना… हिम्मत रखकर निर्मला सप्रे से इस्तीफा ले BJP, जीतू पटवारी

‘Given speech, wore garland, resign now’, otherwise… BJP should take courage from Nirmala Sapre and resign, Jitu Patwari भोपाल । कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही है। हाईकोर्ट ने विधानसभा की सदस्यता रद्द करने की याचिका पर उन्हें नोटिस जारी किया है। कोर्ट के इस कदम के बाद जीतू पटवारी ने सप्रे पर तीखा हमला बोला। जीतू पटवारी ने कहा कि विधायक निर्मला सप्रे से कोर्ट ने जवाब मांगा है। वह अपना जवाब पेश करें, क्योंकि उन्होंने भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली। भारतीय जनता पार्टी के कार्यक्रम में मंच पर जाकर दिए भाषण पर निर्मला सप्रे अपना स्पष्ट जवाब दें, और इस्तीफा दें। अगर वह रिजाइन नहीं करेंगी तो दल-बदल कानून के अंतर्गत हम कोर्ट के माध्यम से इस्तीफा लेंगे और चुनाव करवा कर चुनाव जीतेंगे। दरअसल, विधायक निर्मला सप्रे की विधायकी निरस्त करने की मांग को लेकर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। जिसकी सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति सुबोध अभ्यंकर की एकल पीठ ने विधायक को नोटिस जारी किया था। अगली सुनवाई के लिए 19 दिसंबर की तारीख तय की है। बता दें कि निर्मला सप्रे बीते दिनों भाजपा के कार्यक्रम में भी शामिल हुई थी। इसके बाद कांग्रेस ने उन्हें विधानसभा में अपने साथ बैठाने से इंकार कर दिया था। निर्मला सप्रे की सदस्यता निरस्त करने के लिए कांग्रेस ने विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखा था। विधानसभा अध्यक्ष ने कांग्रेस की याचिका पर कोई फैसला नहीं दिया था। इसके बाद कांग्रेस ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। गौरतलब है कि विधानसभा का शीतकालीन सत्र जल्द ही शुरू होने वाला है। इसके पहले कांग्रेस ने निर्मला सप्रे की सदस्यता रद्द करने की मांग की है। कांग्रेस ने दलबदल कानून के तहत निर्मला सप्रे पर कार्रवाई की मांग की है। कांग्रेस का कहना है कि अनुसूची 10 के तहत अगर कोई विधायक दल बदलता है तो उसकी सदस्यता निरस्त होती है। निर्मला सप्रे पर भी इसी के तहत कार्रवाई हो। recent visitors 125

गोपाल और भूपेन्द्र ने एक दूसरे पर कटाक्ष को मन गलती, सुधार के साथ बदलाव का मास्टर प्लान हुआ तैयार

मध्यप्रदेश विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी को मिली प्रचंड जीत के प्रमुख चेहरों को किनारे करके पीछे की कतार को आगे ले जाकर के दुष्परिणाम मंत्रीमंडल विस्तार के बाद दिखाई देना शुरू हो गए । इन बदलावों को लेकर भारतीय जनता पार्टी की अनुभव और ग़ैरनुभव की चूक इस एक वर्ष के दौरान कई बार निकलकर सामने आ चुकी है। सागर ! राजनीति में खेमेबाजी न हो यह संभव नही । बात मध्यप्रदेश की करें तो शिवराज सिंह के मुखिया रहते इसका असर कभी खुलकर सामने नही आने पाया। अब जो हालात बने हैं वो स्प्ष्ट तौर पर प्रदेश में बीजेपी को कमजोर करने का काम कर रहे हैं। शिवराज सरकार में खेमेबाजी देखने को मिली पर उसका प्रभाव इतना नही हो पाया जिससे पार्टी को उसका नुकसान उठाना पड़ा हो। 2023 मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में बीजेपी को मिली प्रचंड जीत से सबके सामने यह सिद्ध हो चुका है। बुंदेलखंड में एक कहावत बहुत प्रसिद्ध है। इसमें लड़की पक्ष्य की शर्त में दूल्हे के साथ बुजुर्गों को आने की मनाही रहती है। जिसके उद्देश्य मे शादी रश्म के दौरान कठिन प्रश्नों को पूँछकर दूल्हा पक्ष्य को निरुत्तर करना होता है। इसके तोड़ के लिए वो होशियारी करके बारात में एक बुजुर्ग को साथ ले जाते हैं। जब वधु पक्ष्य सवाल करना शुरू करता है। बाराती गुप-चुप उस बुजुर्ग से सवालों के जबाब पूंछने लगते हैं। सही जबाब मिलने पर वधु पक्ष्य बगैर तजुर्बेकार के इनका जबाब देना कठिन है समझ जाता है। खोज करने पर बारात में बुजुर्ग के साथ आने की सच्चाई सामने आ जाती है। मोहन सरकार चलाने में दिख रही कमियों मे अनुभव की कमी बताने के लिए यह कहावत सटीक बैठ रही है। कहते हैं सही ज्ञान वहीं है जो जमीन से सीखकर मिला हो। किताबी ज्ञान का इससे कोई मुकाबला नही हो सकता। मध्यप्रदेश में नये को आगे लाकर सरकार चलाने के फार्मूले में हो रही निरंतर ख़ामियों में अनुभव और कुशल राजनेता को दरकिनार कर लिए निर्णय को उसका परिणाम माना जा रहा है। बात सागर जिले की राजनीति की करें तो आपको पूर्व मंत्री वर्तमान रहली विधायक पंडित गोपाल भार्गव और पूर्व गृहमंत्री वर्तमान खुरई विधायक भूपेंद्र सिंह की कमी दिख रही है। पार्टी के अंदर पनपी खेमेबाजी और प्रशासनिक लचरता से स्प्ष्ट है कि मोहन सरकार शिव के राज के करीब तक से होकर भी नही चल पा रही है। पार्टी के सीनियर विधायक की यह नाराजगी एक प्रकार से बीजेपी की भलाई होना माना जा सकता है। इन्होंने भारतीय जनता पार्टी में 1985 से सक्रिय राजनीति, उस दौरान के संघर्ष और अवसरवादी राजनीति से दूर रहकर आखिरी समय तक पार्टी से जुड़े रहने का कई बार संकल्प दोहराया है। आज जो हालात हैं उस पर चिंता जताना जिसमे मध्यप्रदेश में मंत्रीमंडल विस्तार को लेकर एक- एक नाम दिल्ली से फ़ाइनल हुआ मानकर चलें तो बेशक यह निर्णय गलत साबित हुआ है। आलाकमान को लीडरशिप में उन विशेष के बारे में अच्छी जानकारी होनी चाहिए जिनमे सबको साथ लेकर चलने की क्षमता दिखाई देती है। जहाँ वो दूसरों के अधिकारों और स्वतंत्रताओं की रक्षा करना खुद का कर्तव्य मानकर वैसे निर्णय लेते हैं। राजनीति सिद्धान्त के अन्तर्गत इसमें भिन्न- भिन्न पक्षों का अध्ययन किया जाता हैं। शिवराज और उनके मंत्रिमंडल में विभेदों को दूर करने के तरीके होते थे। वो क्रांति की भी वकालत करना जानते थे। राजनीतिक सिद्धांत में, स्वतंत्रता, समानता, न्याय, लोकतंत्र, और धर्मनिरपेक्षता जैसी अवधारणाओं का अर्थ स्पष्ट किया जाता है। साथ ही राजनीतिक सिद्धांत, विचारों और सार्वजनिक जीवन से जुड़ी अवधारणाओं का विश्लेषण किया जाता है। खुद को ताकतवर बनाने के लिए गुटबाजी एक विकल्प हो सकता है। मोहन मंत्रीमंडल में अनुभव की कमी को साफ तौर पर महसूस किया जा सकता है। मुखिया के ताकतवर बनने में जो कमियां पनपी हैं वो विपक्षियों को मजबूत बनाने में सहायक सिद्ध हो रही हैं। भारतीय जनता पार्टी आलाकमान मध्यप्रदेश और राजस्थान में किए इन प्रयोग के दुष्प्रभाव का बारीकी से अध्ययन कर रही है। जो सीनियर और अनुभवी को अभी कमजोर समझकर चल रहे हैं आने वाले कुछ समय बाद उनके सामने आलाकमान द्वारा चौकाने वाला निर्णय देखने को मिल सकता है। recent visitors 125

दुष्कर्म मामले में बीजेपी नेता पर FIR: जीतू पटवारी ने सरकार को घेरा, कहा- 5 से 10 भाजपा नेता लग गए होंगे उसे बचाने में…

भोपाल। मध्य प्रदेश के विदिशा में भाजपा जिला उपाध्यक्ष योगेंद्र सोलंकी पर रेप का मामला दर्ज होने पर पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने सरकार पर निशाना साधा है। राजधानी भोपाल में प्रेस कांफ्रेंस कर पटवारी ने कहा कि बीजेपी नेता का अपनी ही भतीजी के साथ बलात्कार करने का मामला आज सुर्खियां बनी हुई है। ये अराजकता और अद्भुत सरकार का फेलियर है। पटवारी ने कहा कि सरकार का आज तक कोई प्रयास इन घटनाओं को रोकने के लिए नहीं हुआ।10 दिन पहले एक शिक्षिका के साथ बालाघाट में बीजेपी के नेता ने दुष्कर्म किया, अक्टूबर में इंदौर के महू में सेना के जवानों के साथ जो महिलाएं थी, उनके साथ जो बीजेपी के नेताओं ने किया बहुत ही चर्चित मामला था। दतिया में भी भाजपा नेता ने कुछ लोगों के साथ मिलकर दो महिलाओं के साथ बलात्कार किया, तब नरोत्तम मिश्रा के मुंह में दही जम गया था। जबलपुर में नौकरी दिलाने के नाम पर 28 साल की युवती के साथ बीजेपी के नेता शशिकांत सोनी ने बलात्कार किया। पीसीसी चीफ ने कहा कि आखिर ऐसी सैकड़ों घटनाओं में बीजेपी के नेता ही सामने क्यों आते हैं यह सवाल तो है? उन्होंने कहा कि राजनीतिक दबाव में हजारों मामले दब जाते हैं। भोपाल विदिशा समेत पूरे प्रदेश के जिलों में 17 मिनट में एक बलात्कार हो रहे हैं, जनता सरकार का चाल चरित्र चेहरा पहचानें। भाजपा नेताओं पर इस तरीके के मामले सामने आते हैं, तो उन्हें बचाया जाता है ना की कार्रवाई की जाती है। जीतू पटवारी ने कहा कि अभी जो सोलंकी पर रेप का मामला दर्ज हुआ, उसमें 5 से 10 बीजेपी नेता लग गए होंगे उसे बचाने के लिए। recent visitors 128

विधायक निर्मला सप्रे की सदस्यता खतरे में! हाईकोर्ट ने विधानसभा अध्यक्ष से मांगा जवाब

इंदौर ! मध्यप्रदेश की बीना विधायक निर्मला सप्रे की सदस्यता खतरे में है। कांग्रेस की विधायक निर्मला सप्रे की सदस्यता के संबंध में हाईकोर्ट ने विधानसभा अध्यक्ष से जवाब मांगा है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार की याचिका पर हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने विधायक निर्मला सप्रे को भी नोटिस जारी किया है। कांग्रेस ने विधायक निर्मला सप्रे की सदस्यता निरस्त करने की मांग की है। इसके लिए नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार ने विधानसभा अध्यक्ष को आवेदन दिया था। अब कांग्रेस ने कोर्ट में याचिका दायर की है। बता दें कि निर्मला सप्रे लोकसभा चुनावों के दौरान बीजेपी में शामिल हो गई थीं लेकिन उन्होंने विधानसभा की सदस्यता से त्यागपत्र नहीं दिया है। recent visitors 131

बीना विधायक निर्मला सप्रे के खिलाफ लगाई याचिका में सुनवाई आज

भोपाल। बीना विधायक निर्मला सप्रे की विधायकी निरस्त करने की मांग करते हुए नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार द्वारा प्रस्तुत याचिका पर हाई कोर्ट सोमवार को सुनवाई करेगा। न्यायमूर्ति सुबोध अभ्यंकर की एकल पीठ के समक्ष सुनवाई होगी। याचिका में सिंघार ने कहा है कि बीना से विधायक सप्रे ने कांग्रेस की सदस्यता त्याग कर भाजपा का दामन थाम लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति में उन्होंने भाजपा की सदस्यता ग्रहण की थी। इस संबंध में सिंघार ने मप्र विधानसभा के अध्यक्ष नरेंद्रसिंह तोमर के समक्ष एक याचिका सप्रे की विधायकी निरस्त करने की गुहार लगाते हुए दायर की थी, लेकिन अध्यक्ष ने अब तक इसका निराकरण नहीं किया। इससे व्यथित होकर हाई कोर्ट की शरण लेना पड़ी है। याचिका में मांग की गई है कि सप्रे की विधानसभा सदस्यता शीतकालीन सत्र से पहले निरस्त की जाए। याचिका में यह भी कहा है कि संविधान की अनुसूची 10 के अनुसार अगर कोई विधायक दल बदलता है, उसकी विधानसभा से सदस्यता निरस्त की जानी चाहिए। अगर दल-बदल के बाद भी ऐसे व्यक्ति को विधायक बने रहना है तो उसे फिर से चुनाव लड़ना पड़ता है। recent visitors 135