मणिपुर में लोकतांत्रिक व्यवस्था की वापसी, राष्ट्रपति शासन समाप्त करने की अधिसूचना जारी

नई दिल्ली मणिपुर में राष्ट्रपति शासन समाप्त कर दिया गया है। गृह मंत्रालय ने इस संबंध में मंगलवार को आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर इसकी घोषणा की। यह फैसला 4 फरवरी 2026 से प्रभावी होगा। नोटिफिकेशन के अनुसार, संविधान के अनुच्छेद 356 के खंड (2) के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मणिपुर राज्य में 13 फरवरी 2022 को लागू की गई राष्ट्रपति शासन की उद्घोषणा को वापस ले लिया है। इस आदेश के साथ ही राज्य में केंद्रीय शासन की व्यवस्था समाप्त हो गई है। recent visitors 36

सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची ममता की पीड़ा: SIR केस में CJI से कहा— ‘हमें कहीं इंसाफ नहीं’

नई दिल्ली. पश्चिम बंगाल में हुए स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) के मुद्दे पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में तब अभूतपूर्व नजारा देखने को मिला, जब खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी दलीलें रखने के लिए पेश हुईं। उन्होंने एसआईआर का विरोध करते हुए सीजेआई सूर्यकांत की बेंच के सामने कहा कि हमें कहीं भी न्याय नहीं मिल रहा, हमने चुनाव आयोग को छह चिट्ठियां लिखी हैं। मैं एक बंधुआ मजदूर हूं। उन्होंने चुनाव आयोग पर पश्चिम बंगाल को जानबूझकर निशाना बनाने का आरोप लगाया। 'बार एंड बेंच' वेबसाइट के अनुसार, ममता की ओर से वरिष्ठ वकील श्याम दीवान भी पेश हुए और कहा कि अपमैप्ड वोटर 32 लाख हैं। लॉजिकल गड़बड़ी वाली लिस्ट में 1.36 करोड़ हैं। 63 लाख सुनवाई पेंडिंग है अभी। उन्होंने बड़ी संख्या में अनमैप्ड वोटर्स का जिक्र करते हुए कहा कि सुधार के उपायों के लिए बहुत कम समय बचा है। ममता के वकील की तरफ से कुछ उदाहरण भी पेश किए गए, जिसमें बताया गया कि कैसे नामों में गड़बड़ी आई। वकील ने कहा कि हमने आपको असली वोटर्स के उदाहरण दिए हैं। कृपया अपेंडिक्स एक देखें.. चिराग टिबरेवाल। उनकी गड़बड़ी पिता के नाम में मिसमैच थी क्योंकि पिता के नाम में बीच में कुमार आता है। मुझे नोटिस देकर बुलाया गया था। फिर आते हैं अजीमुद्दीन खान…पिता का नाम बंगाली में अलाउद्दीन खान दिखाता है… तो बंगाली से इंग्लिश में… इसमें गलती हो सकती है। 'मैं एक बंधुआ मजदूर हूं, हमें कहीं न्याय नहीं मिल रहा' सुनवाई के दौरान ममता बनर्जी ने भी दलीलें रखीं। उन्होंने कहा, ''मैं आपकी दया के लिए आभारी हूं। जब न्याय दरवाजे के पीछे रो रहा था, तब हमें लगा कि हमें कहीं से भी न्याय नहीं मिल रहा। हमने चुनाव आयोग को छह चिट्ठियां लिखीं। मैं एक बंधुआ मजदूर हूं। मैं यही पसंद करती हूं। मैं अपनी पार्टी के लिए लड़ रही हूं।'' पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने उदाहरण देते हुए कहा कि मैं आपको फोटो दिखाती हूं और यह तस्वीर मेरी नहीं है। यह बड़े अखबारों ने छापी है। एसआईआर प्रक्रिया सिर्फ डिलीट करने के लिए है। मान लीजिए शादी के बाद एक बेटी ससुराल जाती है। सवाल किए जाते हैं कि वह पति का सरनेम क्यों इस्तेमाल कर रही है। ये लोग यही कर रहे हैं। कुछ बेटियां जो ससुराल चली गई, उनके नाम डिलीट कर दिए गए। गरीब लोग कभी कभी फ्लैट खरीदते हैं, कभी-कभी वे शिफ्ट हो जाते हैं। ऐसे के भी नाम डिलीट कर दिए गए। चुनाव से पहले बंगाल को निशाना बनाया जा रहा उन्होंने आरोप लगाया कि यह गलत मैपिंग हो रही है। चुनाव से ठीक पहले सिर्फ पश्चिम बंगाल को निशाना बनाया जा रहा है। वे दो महीने में ही वह काम करना चाहते हैं, जिसमें दो साल लग जाते हैं। बीएलओ ने आत्महत्या कर ली और उन्होंने चुनाव अधिकारियों पर यह आरोप लगाया। पश्चिम बंगाल को निशाना बनाया गया, असम को क्यों नहीं? सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी करते हुए जवाब देने को कहा है। सोमवार को इस मामले की फिर से सुनवाई होगी। बता दें कि बनर्जी अपने वकीलों के साथ कोर्ट रूम नंबर एक में मौजूद रहीं। मंगलवार को मुख्यमंत्री के नाम पर एक गेट पास जारी किया गया था। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और विपुल एम पंचोली की बेंच ने बनर्जी और तीन अन्य लोगों की याचिकाओं पर सुनवाई की। इन याचिकाओं को मोस्तारी बानू और टीएमसी सांसदों डेरेक ओ'ब्रायन और डोला सेन ने दायर किया है।   recent visitors 38

योगी सरकार सख्त मूड में: समीक्षा बैठक में मंत्री बोले – गड़बड़ी मिली तो सीधे कार्रवाई

लखनऊ योगी सरकार में जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने कहा कि अगर विभागीय कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही, शिथिलता अथवा अनियमितता मिली तो सख्त ऐक्शन लेंगे। चेतावनी देते हुए कहा कि लापरवाही किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सम्मानित किया जाएगा, जिससे विभाग में सकारात्मक, उत्तरदायी एवं परिणामोन्मुखी कार्य संस्कृति को प्रोत्साहन मिलेगा। उन्होंने अधिकारियों को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कार्यों में कोताही पाई गई तो संबंधित अधिकारी एवं कार्मिकों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। उत्तर प्रदेश के जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने ये निर्देश मंगलवार को यहां उदयगंज स्थित सिंचाई विभाग मुख्यालय में सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में दिए। शारदा संगठन की समीक्षा बैठक के दौरान उन्होंने विभागीय कार्यों की प्रगति की गहन समीक्षा करते हुए स्पष्ट एवं कड़े निर्देश दिए। इसके साथ ही मंत्री ने विभिन्न निर्माण कार्यों की निर्माण कार्य के पूर्व की स्थिति एवं निर्माण पूर्ण होने के पश्चात की स्थिति का तुलनात्मक मूल्यांकन किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी निर्माण कार्य निर्धारित मानकों, गुणवत्ता एवं समयसीमा के अनुरूप पूर्ण किए जाएं, जिससे योजनाओं का वास्तविक लाभ किसानों एवं आम जनता तक पहुंच सके। मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने कहा कि वे स्वयं शीघ्र ही विभिन्न निर्माण कार्यों का भौतिक निरीक्षण करेंगे, ताकि जमीनी स्तर पर कार्यों की वास्तविक स्थिति का प्रत्यक्ष आकलन किया जा सके। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी स्तर पर गड़बड़ी अथवा अनियमितता की शिकायत नहीं मिलनी चाहिए। पूरी प्रक्रिया पूर्णतः पारदर्शी, निष्पक्ष एवं नियमों के अनुरूप होनी चाहिए। अंत में उन्होंने अधिकारियों से पूर्ण निष्ठा, ईमानदारी एवं जवाबदेही के साथ कार्य करने का आह्वान करते हुए कहा कि सरकार की प्राथमिकता सिंचाई परियोजनाओं को समयबद्ध रूप से पूर्ण कर प्रदेश के किसानों को अधिकतम लाभ पहुंचाना है। समीक्षा बैठक में प्रमुख सचिव सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग अनिल गर्ग, प्रमुख अभियंता एवं विभागध्यक्ष सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग संदीप कुमार, प्रमुख अभियंता परिकल्प एवं नियोजन अशोक कुमार सिंह, मुख्य अभियंता शारदा संगठन, मुख्य अभियंता शारदा सहायक, सिंचाई विभाग (यांत्रिक संगठन) के मुख्य अभियंता तथा संबंधित संगठनों के अधीक्षण अभियंता, अधिशासी अभियंता सहित सिंचाई विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।   recent visitors 36

सियासत से सीधे अदालत तक: ममता बनर्जी अब सुप्रीम कोर्ट में SIR केस की पैरवी को तैयार

कोलकाता पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई हैं। वह वकील के तौर पर शीर्ष अदालत में पहुंची हैं। आज का दिन अदालत के इतिहास में अनोखा है क्योंकि पहली बार कोई मौजूदा सीएम सुप्रीम कोर्ट में वकील की हैसियत से दलीलें देगा। पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग की ओर से चल रहे वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण को अदालत में चुनौती दी गई है। इस पर सुनवाई जारी है और इसी मामले में दलीलें देने के लिए ममता बनर्जी शीर्ष अदालत पहुंची हैं। चीफ मिनिस्टर ने अदालत में इंटरलॉक्युटरी ऐप्लिकेशन भी दाखिल की है। इसमें उन्होंने अदालत में पेश होने और निजी तौर पर दलीलें देने की मांग रखी है। मंगलवार को ही ममता बनर्जी के नाम का गेट पास सुप्रीम कोर्ट में बन गया था। सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट के अनुसार SIR वाले केस की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच कर रही है। इस बेंच में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली शामिल हैं। इस मामले में ममता बनर्जी के अलावा तीन और याचिकाएं दाखिल की गई हैं। इनमें से दो तो टीएमसी के सांसद ही हैं- डेरेक ओ ब्रायन और डोला सेन। ममता बनर्जी ने बंगाल में SIR को लेकर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि आखिर विपक्ष की सत्ता वाले तीन राज्यों में ही यह क्यों हो रहा है, जबकि असम में इसकी प्रक्रिया नहीं चल रही है, जहां भाजपा की सरकार है। यह याचिका 28 जनवरी को दाखिल हुई थी, जिसमें बंगाल सरकार ने कहा था कि चुनाव आयोग की कार्यवाही गैर-संवैधानिक है। बंगाल सरकार की दलील है कि SIR की पूरी प्रक्रिया जल्दबाजी में और अपारदर्शी तरीके से कराई जा रही है। इसकी कोई जरूरत नहीं है। ममता बनर्जी और अन्य याचियों की विशेष आपत्ति इस बात को लेकर है कि आखिर Logical Discrepancy वाली कैटेगरी में जिन वोटर्स के नाम डाले गए हैं, उनका ऑनलाइन प्रकाशन क्यों नहीं किया गया है। ममता बनर्जी का कहना है कि इन लोगों के नाम लिस्ट में ना डालने से साफ है कि यह प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है। उनका कहना है कि वोटर लिस्ट से यदि किसी का भी नाम कटता है तो उसके बारे में जानकारी देनी चाहिए और उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका भी मिलना चाहिए। बता दें कि ममता बनर्जी की चुनाव आयोग में भी एक मीटिंग हुई थी। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से ही वह बैठक के दौरान भिड़ गई थीं। उन्होंने चुनाव आयोग को चेतावनी देते हुए कहा कि मैं बंगाल से यहां 1 लाख लोगों को ला सकती हूं।   recent visitors 35

सुशांत की मौत के बाद बायकॉट झेलने वाली रिया चक्रवर्ती का 7 साल बाद कमबैक

मुंबई  सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद रिया चक्रवर्ती की जिंदगी पूरी तरह बदल गई थी, लेकिन अब एक्ट्रेस एक्टिंग में धमाकेदार कमबैक करने को तैयार हैं. मंगलवार शाम मुंबई में 'नेक्स्ट ऑन नेटफ्लिक्स' इवेंट में ऐलान हुआ. रिया नेटफ्लिक्स की सीरीज 'फैमिली बिजनेस' एक्टिंग की दुनिया में वापसी कर रही हैं. इसमें अनिल कपूर और विजय वर्मा भी लीड रोल में हैं. 7 साल बाद रिया का कमबैक रिया ने इंस्टाग्राम पर शो का टीजर शेयर किया है. टीजर के कैप्शन में लिखा है- नया खून पुराने पैसों से मिला. जब इतनी ताकत दांव पर हो, तो फैमिली और बिजनेस की लाइनें धुंधली पड़ जाती हैं. देखिए फैमिली बिजनेस, जल्द आ रही है, सिर्फ नेटफ्लिक्स पर. एक्ट्रेस ने इंस्टाग्राम स्टोरी पर टीजर शेयर करते हुए लिखा कि 7 साल बाद. उन्होंने कैप्शन के साथ हाथ जोड़ने वाला इमोजी भी बनाया.  फैन्स ने किया रिएक्ट  रिया चक्रवर्ती के कमबैक को लेकर फैन्स को एक्साइटेड हो उठे हैं. एक्ट्रेस के चाहने वालों ने वीडियो पर कमेंट करके खुशी जाहिर की है. एक यूजर ने उनके पोस्ट पर कमेंट किया, देर आए दुरुस्त आए. दूसरे ने लिखा, रिया को स्क्रीन पर वापस देखकर बहुत खुशी हुई. वो इस कमबैक की हकदार हैं. अन्य ने कहा कि इंतजार नहीं हो रहा. एक फैन ने कहा कि रिया की जर्नी हिम्मत की मिसाल है. उन्हें सिर्फ सम्मान नहीं, माफी भी मिलनी चाहिए.  जब विवादों में आईं रिया  2020 में सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद रिया की जिंदगी में बड़ा भूचाल आ गया था. सितंबर 2020 में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने उनके व्हाट्सएप पर ड्रग पेडलर्स के चैट्स मिलने पर उन्हें गिरफ्तार कर लिया था. बाद में उन्हें जमानत मिल गई थी, लेकिन लंबे समय तक ट्रैवल पर पाबंदी रही. उन्हें इंडस्ट्री ने भी बायकॉट कर दिया था. एक्ट्रेस से प्रोजेक्ट्स छीन लिए गए थे.  2025 में सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन ने अपनी क्लोजर रिपोर्ट में रिया को सभी आरोपों से क्लीन चिट दे दी, जिससे इस चैप्टर का आधिकारिक अंत हुआ. ये सब उनके लिए बहुत बड़ा झटका था.  तमाम ताने और आरोपों से गुजरने के बाद रिया एक्टिंग से धमाल मचाने के लिए तैयार हैं.  recent visitors 36

संकल्प, संवेदनशीलता और सशक्तिकरण की प्रेरणादायी कहानी

संकल्प, संवेदनशीलता और सशक्तिकरण की प्रेरणादायी कहानी लखनऊ खुशबू, निवासी पारा, जनपद लखनऊ, एक दिव्यांग महिला हैं जो दोनों पैरों से दिव्यांग होने के कारण लंबे समय से चलने-फिरने में अत्यधिक असमर्थ थीं। रोज़मर्रा के छोटे-छोटे कार्यों के साथ-साथ अपने 06 वर्षीय पुत्र के साथ आवागमन उनके लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ था। सीमित संसाधनों और शारीरिक कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अपनी समस्या को साहसपूर्वक प्रशासन के समक्ष रखा। दिनांक 29.01.2026 को जनता दर्शन के दौरान खुशबू ने जिलाधिकारी, लखनऊ महोदय को प्रार्थना पत्र देकर इलेक्ट्रिक व्हीलचेयर/ई-स्कूटी उपलब्ध कराने का अनुरोध किया, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें और अपने बच्चे की देखभाल के साथ-साथ सुरक्षित रूप से आवागमन कर सकें। जिलाधिकारी महोदय द्वारा मामले को गंभीरता एवं संवेदनशीलता से लेते हुए त्वरित कार्यवाही के निर्देश दिए गए। जिलाधिकारी के निर्देशन में जिला दिव्यांगजन अधिकारी श्री शशांक सिंह द्वारा न केवल उनकी समस्या का समाधान कराया गया, बल्कि इसी क्रम में उनके 06 वर्षीय पुत्र का विद्यालय में दाखिला भी जिलाधिकारी महोदय के सहयोग से सुनिश्चित कराया गया, जिससे खुशबू अत्यंत प्रसन्न हुईं। उल्लेखनीय है कि वर्तमान में दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग, उत्तर प्रदेश द्वारा दिव्यांगजनों हेतु ई-स्कूटी/ई-वाहन की कोई शासकीय योजना संचालित नहीं है। इस तथ्य को दृष्टिगत रखते हुए जिलाधिकारी महोदय द्वारा निर्देशित किया गया कि संबंधित दिव्यांग महिला को कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के माध्यम से आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाए। जिलाधिकारी महोदय के उक्त निर्देशों के अनुपालन में जिला दिव्यांगजन सशक्तिकरण अधिकारी श्री शशांक सिंह द्वारा तत्परता से प्रयास करते हुए CSR सहयोग के माध्यम से दिनांक 04.02.2026 को जिला दिव्यांगजन सशक्तिकरण कार्यालय, लखनऊ में खुशबू को इलेक्ट्रिक 3-व्हील स्कूटी उपलब्ध कराई गई। ई-स्कूटी प्राप्त कर खुशबू ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए बताया कि अब उनके जीवन में एक नया सकारात्मक परिवर्तन आया है। वे बिना किसी सहारे के अपने बच्चे के साथ आ-जा पा रही हैं, दैनिक कार्यों को सहजता से पूरा कर रही हैं तथा आत्मनिर्भर बनकर भविष्य में अपना रोजगार करने की दिशा में भी आगे बढ़ सकेंगी। इससे वे सम्मानपूर्वक जीवन यापन कर पाएंगी। श्रीमती खुशबू ने उत्तर प्रदेश सरकार, जिला प्रशासन, जिलाधिकारी महोदय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग का इस सहयोग हेतु हृदय से धन्यवाद ज्ञापित किया। recent visitors 29

नक्सल विरोधी अभियान में बड़ी जीत, 21 लाख के इनामी माओवादी सुखराम ने किया आत्मसमर्पण

जगदलपुर नक्सल मोर्चे पर ओडिशा पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। लंबे समय से सक्रिय 21 लाख रुपए के इनामी माओवादी सुखराम मरकाम उर्फ योगेश उर्फ सुरेश ने हथियार डाल दिया है। यह आत्मसमर्पण ओडिशा के मलकानगिरी जिले में किया गया, जहां सुरक्षा बलों के सामने माओवादी ने सरेंडर किया। आत्मसमर्पण के दौरान सुखराम मरकाम के पास से एक SLR राइफल के साथ विस्फोटक सामग्री भी बरामद की गई है। सुखराम मरकाम माओवादी संगठन में ACM रैंक का सक्रिय कैडर बताया जा रहा है। वह वर्ष 2010 से माओवादी संगठन से जुड़ा हुआ था। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार सुखराम कई नक्सली घटनाओं में शामिल रहा है। माओवादी सुखराम मरकाम मूल रूप से छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले का निवासी है। उसके खिलाफ अलग-अलग राज्यों में गंभीर नक्सली मामले दर्ज थे। लगातार दबाव और सघन ऑपरेशन के चलते माओवादी सुखराम ने आत्मसमर्पण का रास्ता चुना। मलकानगिरी एसपी विनोद पाटिल का कहना है कि यह नक्सल विरोधी अभियान में बड़ी उपलब्धि है। आत्मसमर्पण से माओवादी नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है। सुरक्षा बलों को उम्मीद है कि आगे भी अन्य माओवादी मुख्यधारा में लौटेंगे। recent visitors 25