10,001mAh बैटरी वाला Realme स्मार्टफोन जल्द भारत में होगा लॉन्च, जानिए तारीख

नई दिल्ली  Realme भारत में एक नया स्मार्टफोन लेकर आ रहा है, जिसका नाम Realme Narzo Power 5G होगा. कंपनी ने बताया है कि यह फोन भारत में 5 मार्च को लॉन्च होगा और इसमें 10,001mAh की बैटरी दी जाएगी. साथ ही इसमें मीडिटेक डाइमेंसिटी 7300 चिपसेट का यूज किया है. बैक पैनल पर 50MP का कैमरा मिलेगा.  Amazon India पर इसकी एक माइक्रोसाइट तैयार की है, जहां अपकमिंग हैंडसेट की डिटेल्स को लिस्ट किया है. डिटेल्स में बताया है कि इसमें 10,001mAh की बैटरी और 38 दिन का स्टैंडबाय बैकअप मिलेगा.  डुअल चिपसेट का यूज करेगी लिस्ट डिटेल्स में बताया है कि इसमें डुअल चिप सिस्टम का यूज किया गया है. इसमें मीडियाटेक डाइमेंसिटी डाइमेंसिटी 7400 चिपसेट और Hyper Vision AI चिप का यूज किया गया है.  रियलमी ने किया पोस्ट  मिलेगा 144Hz रिफ्रेश रेट्स  रियलमी के इस अपकमिंग हैडंसेट में 6.8-inch curved AMOLED डिस्प्ले दिया गया है. इसमें  6500 nits पीक ब्राइटनेसम मिलेगी. Realme Narzo Power 5G में 144Hz HyperGlow 4D कर्व प्लस डिस्प्ले दिया जाएगा. इसमें 144Hz का रिफ्रेश रेट्स मिलेगा, जिसकी मदद से  बेहतर गेमिंग एक्सपीरियंस मिलेगा.  Realme Narzo Power 5G  का कैमरा  Realme Narzo Power 5G में ट्रिपल रियर कैमरा सेटअप दिया जा सकेगा. इसमें 50MP सोनी OIS कैमरा दिया गया है. कंपनी ने बताया है कि इसमें NEXT AI, Realme UI 7.0 का सपोर्ट मिलेगा. कंपनी ने बताया है कि यह सिर्फ 219 ग्राम का स्मार्टफोन होगा. इसमें 27W का रियर चार्जिंग सपोर्ट भी मिलेगा.  recent visitors 53

यूपी में जनगणना 2027 की तैयारियां तेज, पहले चरण के लिए अधिकारियों को मिले कड़े आदेश

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में जनगणना 2027 की तैयारियां तेज हो गई हैं. पहले चरण में मकानों की सूची तैयार करने और उनकी गणना का काम किया जाएगा. इस चरण में स्व-गणना की प्रक्रिया 7 मई से 21 मई तक चलेगी. इसके बाद 22 मई से 20 जून तक अधिकारी घर-घर जाकर फील्ड कार्य पूरा करेंगे. राज्य में तय समय सीमा के अंदर काम हो सके इसके लिए प्रशिक्षण व्यवस्था को भी चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है.  राज्य में जनगणना के लिए अधिकारियों को सभी काम तय समय-सीमा के भीतर पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं. ये प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी और बिना त्रुटि के पूरी की जाए इसके लिए भी अधिकारियों को निर्देशित किया गया है. जनगणना की प्रक्रिया पूरी तरह से डिजिटल तरीके से की जाएगी. इसमें डेटा संग्रह, प्रविष्टि और निगरानी सब कुछ ऑनलाइन होगा.  छह लाख कर्मचारियों की लगेगी ड्यूटी उत्तर प्रदेश में जनगणना 2027 के लिए क़रीब छह लाख से ज्यादा कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाएगी. यही नहीं इस बार पहली बार ऐसा होगा जब लोगों को मोबाइल एप के ज़रिए ख़ुद गणना करने का ऑप्शन भी मिलेगा. इसका मतलब ये होगा कि लोग ख़ुद भी अपनी जानकारी ऑनलाइन या डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के जरिए जमा कर सकेंगे.  डिजिटल तरीके से की जाएगी जनगणना राज्य में जनगणना का काम काफी बड़ा है जिसे देखते हुए बड़ी संख्या में कर्मचारियों को लगाया जाएगा. जो घर-घर जाकर लोगों की गिनती और आवास की संख्या का डेटा जुटाएंगे. डेटा इकट्ठा करने और उसे सत्यापित करने का काम डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से किया जाएगा. इसके लिए राज्य स्तर प एक राज्य नोडल कार्यालय भी स्थापित किया जाएगा, जहां पूरी प्रक्रिया की निगरानी रखी जाएगी और ये सुनिश्चित किया जाएगा कि काम तय योजना के अनुसार हो रहा है.  नियमों के मुताबिक इस साल होने वाली जनगणना के कार्यक्रम को देखते हुए एक जनवरी 2026 से 31 मार्च 2027 तक राज्य में नए तहसीलों, शहरी निकायों, ग्राम पंचायतों आदि के गठन पर रोक लगा दी जाएगी. ताकि जनगणना के दौरान किसी तरह का बदलाव न हो जिससे डेटा पर कोई प्रभाव न आए.  recent visitors 42

अवैध कॉलोनियों पर कड़ी कार्रवाई, तीन महीने में नया कानून आएगा, 10 साल की सजा और 1 करोड़ का जुर्माना

भोपाल  प्रदेश में तेजी से बढ़ रही अवैध कॉलोनियों पर रोक लगाने के लिए राज्य सरकार सख्त रुख अपनाने जा रही है। मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में नगरीय क्षेत्र (कॉलोनी विकास) अधिनियम-2021 में संशोधन का मसौदा तैयार किया जा रहा है। प्रस्तावित बदलावों के तहत अवैध कॉलोनाइजरों के खिलाफ दंड और जुर्माने को कई गुना बढ़ाने की तैयारी है। इसमें अवैध कॉलोनियों की शिकायत मिलने पर 90 दिन में एफआईआर दर्ज करने, अधिकतम सजा 10 साल तक करने और एक करोड़ रुपये जुर्माने का प्रावधान प्रस्तावित है। हालांकि, नया कानून पुरानी कॉलोनियों पर लागू होगा या नई कॉलोनियों, पर इसको लेकर निर्णय लिया जाना है। शनिवार को विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अधिकारियों के साथ संशोधित मसौदा की समीक्षा बैठक करेंगे।  विस में मंत्री विजयवर्गीय ने दिए सख्त संदेश शुक्रवार को अवैध कॉलोनियों को लेकर विधायक रीति पाठक के प्रश्न के जवाब में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने विधानसभा में कहा कि अब अवैध कॉलोनियों पर कड़ा कानून लागू किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ तेज कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश में तीन महीने के भीतर सख्त नियम लागू होंगे।  90 दिन में दर्ज करनी होगी एफआईआर जानकारी के अनुसार नए प्रस्तावित प्रावधान के अनुसार यदि किसी अवैध कॉलोनी को लेकर थाने में शिकायत मिलती है, तो 90 दिनों के भीतर एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य होगा। समय सीमा का पालन नहीं करने वाले पुलिस अधिकारियों पर भी कार्रवाई का प्रावधान रखा गया है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शिकायतों को लंबित रखने से  दोषियों को मिलने वाली राहत न मिल सके। हालांकि, अभी यह प्रस्तावित है।  बहुत कम मामलों में केस हुए दर्ज बता दें, आंकड़ों के अनुसार, अब तक अवैध कॉलोनियों के  खिलाफ हजारों शिकायतें मिलने के बावजूद बहुत कम मामलों में एफआईआर दर्ज हो पाई है। कार्रवाई की धीमी गति को देखते हुए जवाबदेही तय करने की जरूरत महसूस की गई है। सजा और जुर्माने में बड़ा इजाफा जानकारी के अनुसार मौजूदा कानून में अवैध कॉलोनी विकसित करने पर तीन से सात वर्ष तक की सजा और 10 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। संशोधन के बाद इसे बढ़ाकर अधिकतम 10 वर्ष की सजा और एक करोड़ रुपये तक के आर्थिक दंड में बदलने की तैयारी है। इससे अवैध प्लॉटिंग और बिना अनुमति कॉलोनी काटने वालों को कड़ा संदेश जाएगा। अधिकारियों की जिम्मेदारी भी होगी तय  नए कानून में केवल कॉलोनाइजर ही नहीं, बल्कि लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर भी शिकंजा कसा जाएगा। प्रस्तावित कानून में यह व्यवस्था की गई है कि शिकायत मिलने के बावजूद कार्रवाई नहीं करने वाले प्रशासनिक या नगरीय निकाय के अधिकारी दोषी पाए जाने पर दंडित किए जा सकेंगे। इसमें एक वर्ष तक की सजा और आर्थिक दंड का प्रावधान शामिल है।  4 हजार से अधिक अवैध कॉलोनियां  बता दें, प्रदेश में चार हजार से अधिक अवैध कॉलोनियां हैं। इन कॉलोनियों में सड़क, सीवरेज, पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं की कमी है। सरकार को इनसे संबंधित 5 हजार से अधिक शिकायतें प्राप्त हो चुकी है। इनमें से 600 से ज्यादा के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की गई है।  recent visitors 30

मार्च में अवकाश के सभी दिनों में बिजली बिल भुगतान केंद्र खुले रहेंगे

मार्च में सभी अवकाश दिनों में बिजली बिल भुगतान केन्द्र खुलेंगे भोपाल  मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के कार्यक्षेत्र के अंतर्गत 07 मार्च, 14 मार्च, 21 मार्च, 28 मार्च शनिवार एवं 01 मार्च, 08 मार्च, 15 मार्च, 22 मार्च, तथा 29 मार्च रविवार, 03 मार्च होली, 19 मार्च गुड़ी पड़वां, 20 मार्च जमात- उल-विदा/ ईद उल-फितर के ठीक पूर्व का दिवस/ रानी अवंती बाई का बलिदान दिवस, 27 मार्च रामनवमीं तथा 31 मार्च महावीर जयंती को बिल भुगतान केन्द्र सामान्य कार्य दिवसों की तरह कार्य करते रहेंगे। भोपाल शहर वृत्त के अंतर्गत चारों शहर संभाग यथा पश्चिम, पूर्व, दक्षिण तथा उत्तर संभाग के अंतर्गत सभी जोनल कार्यालय और दानिश नगर, मिसरोद, मण्डीदीप में बिल भुगतान केन्द्र उक्त अवकाश के दिन भी सामान्य कार्य दिवस की तरह खुले रहेंगे। बिजली उपभोक्ता राजधानी के जोनल आफिस में पीओएस (pos) मशीन से कैश के जरिए बिल भुगतान तथा ऑनलाइन माध्यम से भी बिल भुगतान कर सकते हैं। कंपनी ने यह भी निर्देश दिए हैं कि कंपनी कार्यक्षेत्र के सभी 16 जिलों में बिजली वितरण केन्द्र/बिल भुगतान केन्द्र अवकाश के दिनों में खुले रहेंगे। इसके लिए सभी मैदानी महाप्रबंधकों को निर्देशित किया गया है। ऑनलाइन भुगतान करें और पाएं छूट मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा निम्नदाब घरेलू उपभोक्ताओं को ऑनलाइन भुगतान करने पर उनके कुल बकाया बिल पर 0.50 प्रतिशत की छूट प्रदान की जा रही है। साथ ही अधिकतम छूट के लिए कोई सीमा बंधन नहीं है। इसी प्रकार उच्चदाब उपभोक्ताओं को प्रति बिल कैशलेस भुगतान पर 100 रूपये से 1000 रुपये तक की छूट दी जा रही है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने उपभोक्ताओं से बिजली का बिल ऑनलाइन भुगतान करने की अपील की है। कंपनी ने कहा है कि उपभोक्ताओं को एम.पी.ऑनलाईन, कॉमन सर्विस सेन्टर, कंपनी पोर्टल portal.mpcz.in (नेट बैंकिंग, क्रेडिट/डेबिट कार्ड, यूपीआई, ईसीएस, बीबीपीएस, कैश कार्ड एवं वॉलेट आदि) फोन पे, अमेजान पे, गूगल पे, वॉट्सऐप पे, पेटीएम एप एवं उपाय मोबाइल एप के माध्यम से बिल भुगतान की सुविधा उपलब्ध है।   recent visitors 31

फाइलों का बोझ कम करने में जल संसाधन विभाग पीछे ई-ऑफिस व्यवस्था नहीं हो पाई लागू 

The Water Resources Department lags behind in reducing file burden. The e-office system has not been implemented.  भोपाल। मध्य प्रदेश के सरकारी महकमों में फाइल कल्चर को खत्म करने के लिए ई ऑफिस सिस्टम सभी विभागों में लागू किया गया है, लेकिन जल संसाधन विभाग में इसका असर दिखाई नहीं दे रहा है। ऐसे में विभाग के मुखिया की तरफ से निकले एक सख्त फरमान ने विभागीय कर्मचारियों और इंजीनियरों में हडकंप मचा दिया है। प्रमुख अभियंता विनोद कुमार देवड़ा ने मुख्य अभियंताओं समेत सभी इंजीनियरों और स्टाफ को चेतावनी देते हुए साफ कर दिया है कि अब आगे से कोई बहानेबाजी नहीं चलेगी, बल्कि एक सप्ताह के भीतर विभाग का सारा कामकाज ई-ऑफिस के जरिए ही करना होगा।  जल संसाधन विभाग द्वारा जारी अर्द्धशासकीय पत्र में प्रमुख अभियंता ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा है कि बार-बार निर्देश देने के बावजूद अधीनस्थ कार्यालयों में ई-ऑफिस प्रणाली को लेकर कोई गंभीर कार्यवाही नहीं की गई। पत्र में लिखा गया है कि यह खेद का विषय है कि बार-बार निर्देशित करने के बाद भी ई-ऑफिस प्रणाली प्रचलन में नहीं लाई गई है। इतना ही नहीं इस आदेश में यह भी चेतावनी दी गई है कि यदि एक सप्ताह के भीतर सभी मुख्य अभियंता और उनके अधीनस्थ कार्यालय इस डिजिटल सिस्टम से नहीं जुड़ते हैं और पूर्णता प्रमाण पत्र नहीं सौंपते हैं, तो किसी भी अप्रिय स्थिति के लिए वे स्वयं जिम्मेदार होंगे। विभाग ने फरमान का पालन न करने पर अफसरों पर कार्रवाई की तैयारी भी कर ली है। recent visitors 66

वन्दे मातरम’ की अनिवार्यता…जनता का ध्यान भटकाने भाजपा सरकार की साजिश: सपा- यश भारतीय

The necessity of ‘Vande Mataram’… a conspiracy by the BJP government to divert public attention: SP- Yash Bharatiya भोपाल। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता यश भारतीय ने ‘वन्दे मातरम’ की अनिवार्यता को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि यह सरकार बुनियादी मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने के लिए इस तरह के भावनात्मक और अनिवार्य फैसलों का सहारा ले रही है।  संविधान निमार्ताओं का सम्मान यश भारतीय ने स्पष्ट किया कि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पहले ही कहा है कि यदि ‘वन्दे मातरम’ की अनिवार्यता आवश्यक होती, तो डॉ. भीमराव अंबेडकर और अन्य महान संविधान निमार्ताओं ने इसे संविधान में पहले ही अनिवार्य कर दिया होता। इसे स्वैच्छिक रखना उन सभी महापुरुषों का एक सामूहिक और विचारशील निर्णय था। बुनियादी सुविधाओं में विफल सरकार सपा राष्ट्रीय प्रवक्ता ने भाजपा सरकार की विफलताओं को गिनाते हुए कहा कि जो सरकार जनता को शुद्ध पानी, स्वच्छ हवा, और सुरक्षित दवाइयां (जैसे कफ सिरप) तक उपलब्ध नहीं करा पा रही है, वह अब देशभक्ति के नाम पर अपनी कमियों को छिपा रही है। शिक्षा व्यवस्था की हालत यह है कि सरकारी और निजी स्कूल लगातार बंद हो रहे हैं। तानाशाही और नागपुर का एजेंडा उन्होंने भाजपा की कार्यशैली की तुलना हिटलर और तानाशाही शासन से करते हुए कहा कि भाजपा केवल नागपुर से आने वाले संदेशों का अनुसरण करती है। वे जनता को गुलामों की तरह इस्तेमाल करना चाहते हैं, जो कि पूरी तरह से गलत और निंदनीय है। देशभक्ति थोपी नहीं जा सकती यश भारतीय ने जोर देकर कहा कि देशभक्ति भक्ति का विषय है, अनिवार्यता का नहीं। किसी से जबरदस्ती गायन करवाकर उसकी देशभक्ति प्रमाणित नहीं की जा सकती। समाजवादी पार्टी भाजपा सरकार के इस तानाशाही रवैये का पुरजोर विरोध करती है और मांग करती है कि सरकार प्रतीकों की राजनीति छोड़कर शिक्षा, स्वास्थ्य और आम जनता की बुनियादी सुविधाओं पर ध्यान केंद्रित करे। recent visitors 73

बुलेट ट्रेन को एक लाख करोड़ और बुंदेलखंड में रेलों को पांच फीसदी भी नहीं: रघु ठाकुर 

One lakh crore for the historic train and not even five percent for the railways: Raghu Thakur भोपाल। सरकार यदि आबादी के हिसाब से बजट आवंटित करे तो बुंदेलखंड जैसे अंचलों का पिछड़ापन, बेरोजगारी और गरीबी दूर हो सकती है, लेकिन सरकार एक ओर बुलेट ट्रेन पर एक लाख करोड़ खर्च कर सकती है लेकिन बुंदेलखंड को उसकी जरूरत के मुताबिक रेल लाइन के लिए पांच हजार करोड़ भी नहीं देना चाहती। सही नीति से इसे ठीक किया जा सकता है। सोशलिस्ट चिंतक व जननेता रघु ठाकुर ने आज दिल्ली के जंतर-मंतर पर बुंदेलखंड सर्वदलीय नागरिक संघर्ष मोर्चा के धरना में बोलते हुए यह बात कही। उन्होंने आह्वान किया कि सरकार की  भेदभावपूर्ण नीति का प्रतीकात्मक विरोध आने वाली होली से शुरू किया जाये। इस धरने में शामिल होने व समर्थन देने बुंदेलखंड सहित छत्तीसगढ़ व विदर्भ से भी लोग आये थे।  रघु ठाकुर की अगुवाई में साल 2009 से यह धरना हर साल जाड़ों में होता है। इस साल धरने के तहत भारतीय हॉकी के गौरव मेजर ध्यानचंद व सागर विश्वविद्यालय के संस्थापक हरिसिंह गौर को भारतरत्न से अलंकृत करने, बुंदेलखंड को रेल सेवाओं से जोड़ने व अंचल में पर्यटन परिपथ विकसित करने की मांग मुख्य रूप से शामिल है। जिन मार्गों पर रेल सेवा शुरू करने की मांग की गई है उनमें भिंड- बांदा-महोबा, ललितपुर-सागर, सागर- छिंदवाड़ा, छतरपुर-सागर, झांसी-शिवपुरी और ललितपुर-चंदेरी मार्ग शामिल हैं। धरने के बाद प्रधानमंत्री, रेलमंत्री व वनमंत्री को ज्ञापन सौंपा गया। धरने को राज्यसभा सदस्य व आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह सहित अनेक गणमान्य लोगों ने संबोधित किया। संजय सिंह ने केन्द्र सरकार की नीतियों की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि लगातार जनविरोधी और किसान-विरोधी फैसले लिए जा रहे हैं। हाल का भारत – अमरीका व्यापार समझौता इसका ताजा प्रमाण है, जिसमें अमेरिका तो भारतीय माल पर मनमाना आयात कर लगा रहा है, लेकिन भारत में अमेरिकी माल आने की पूरी छूट का इंतजाम कर दिया गया है। यह समझौता नहीं, बल्कि किसानों के ‘डेथ वारंट’ पर दस्तखत हैं जिसके चलते भारत के किसान बर्बाद होंगे और अमरीका के उन किसान मुनाफा कमाएंगे, जिन्हें वहां की सरकार अच्छी खासी सब्सिडी देती है। संजय सिंह ने भाजपा की सरकार को ‘भारतीय जुमला पार्टी ‘ बताते हुए कहा कि हर साल दो करोड़ नौकरी, फसल का दाम दोगुना करने , हर खाते में पंद्रह लाख रुपए आने जैसे वादे तो पूरे किए नहीं, उल्टे देशभर में एक लाख स्कूल बंद कर दिए गए, प्रति व्यक्ति आय घटती चली गई और देश तरक्की के मामले में 142 वें नंबर पर चला गया। संजय सिंह ने इन नीतियों के विरोध में सड़क से संसद तक संघर्ष करने की जरूरत बताई। रघु ठाकुर ने कहा कि विभिन्न अंचल के जनप्रतिनिधि बंधुआ मजदूर जैसा व्यवहार कर रहे हैं। उन्हें लगातार अंचल के हित में मांग करनी चाहिए, लेकिन वे चुप रहते हैं। दूसरी ओर विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री राजे रजवाड़ों के अंदाज में लोकलुभावन घोषणाएं कर रहे हैं, जबकि हर क्षेत्र को उसकी जनसंख्या के हिसाब से बजट मिलना चाहिए। आखिर जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा है। रघु ठाकुर ने योजना के लागू होने में विलम्ब का विषय उठाते हुए याद दिलाया कि अटल विहारी वाजपेई के प्रधानमंत्री काल में छतरपुर में केन-वेतवा परियोजना की घोषणा की थी जिसे अमली जामा पहनाने में दो दशक से ज्यादा लग गये। धरने में आये लोगों को कांग्रेसी पूर्व विधायक तरवर सिंह, आप की नेत्री अनीता सिंह लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शंभूदयाल बघेल, उपाध्यक्ष श्यामसुंदर यादव व मुकेश चंद्रा, जावेद लोसपा महासचिव, मप्र के अध्यक्ष विन्ध्येश्वरी पटेल, हरपाल सिंह जयंत तोमर, सतीश भारतिय ब्रिज किशोरजेन(ललितपुर) अनूप सिंह (छिंदवाड़ा), अशोक पंडा (छत्तीसगढ़),  प्रवीण पांडे फतेहपुर, दया शंकर शर्मा, मसौढ़ी से  धीरेन्द्र पासवान, निसार  कुरेशी, हकीम असगर खान शिव नेताम (धमतरी, छत्तीसगढ़), डॉ शिवा श्रीवास्तव आप के सर्वेश मिश्रा आदि ने संबोधित किया। रामकुमार पचौरी ने संचालन किया। recent visitors 67