एमपी में कानून व्यवस्था ध्वस्त: पुलिस के सामने महिला सरपंच प्रत्याशी का नामांकन फार्म छीनकर भागे दबंग, लिपिक को कुचलने की कोशिश

Law and order collapses in MP: thugs snatch nomination form from female Sarpanch candidate in front of police, attempt to crush clerk छतरपुर। जिले में जनपद पंचायत राजनगर की ग्राम पंचायत सीलोन में सरपंच पद के उपचुनाव के लिए नामांकन जमा करने के अंतिम दिन मंगलवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब एक महिला प्रत्याशी का नामांकन फार्म रिटर्निंग आफिसर के सामने से कुछ युवक छीनकर कार से फरार हो गए। आरोप है कि फार्म लेकर भाग रही कार को रोकने का प्रयास करने पर जनपद पंचायत के लिपिक को वाहन से कुचलने की कोशिश भी की गई। घटना का वीडियो इंटरनेट मीडिया पर बहुप्रसारित हो रहा है। रिटर्निंग ऑफिसर के सामने से नामांकन पत्र लेकर भागे जानकारी के अनुसार, भूसौर निवासी दशोदा यादव सरपंच पद के लिए नामांकन जमा करने जनपद पंचायत राजनगर पहुंची थीं। दोपहर बाद नामांकन पत्र जांच के लिए रिटर्निंग आफिसर के समक्ष प्रस्तुत किया गया। इसी दौरान कुछ युवक वहां पहुंचे और नामांकन पत्र छीनकर बाहर निकल गए। इसके बाद वे सफेद रंग की कार में बैठकर भागने लगे। कार रोकने की कोशिश, लिपिक भी पीछे दौड़ा प्रत्याशी के पुत्र राजेश यादव के अनुसार, उनके स्वजन ने कार को रोकने का प्रयास किया, लेकिन आरोप है कि वाहन सवारों ने उन पर कार चढ़ाने की कोशिश की। इसी बीच जनपद पंचायत के लिपिक हरिनारायण कोरी युवकों के पीछे दौड़े, लेकिन आरोपित कार लेकर फरार हो गए। राजेश ने बताया कि उन्हें कुछ दिनों से धमकी मिल रहीं थी कि नामांकन दाखिल न करें। दो दर्जन से ज्यादा लोग धरने पर बैठे घटना के बाद जनपद पंचायत परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। प्रत्याशी के पक्ष से करीब दो दर्जन लोग शाम तक जनपद पंचायत में धरने पर बैठे रहे और आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग करते रहे। उनका कहना था कि पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में नामांकन पत्र छीनकर ले जाना गंभीर मामला है। दोबारा भरवाया नामांकन फार्म राजनगर के रिटर्निंग ऑफिसर एवं तहसीलदार धीरज गौतम ने बताया कि महिला प्रत्याशी का नामांकन फार्म दोबारा भरवा दिया गया है। मामले में एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं और संबंधित लोगों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। पुलिस बहुप्रसारित वीडियो और उपलब्ध जानकारी के आधार पर घटना में शामिल लोगों तथा वाहन की पहचान में जुटी है। गौरतलब है कि जनवरी में ग्राम पंचायत सीलोन की तत्कालीन सरपंच सोना रैकवार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित हुआ था। इसके बाद पिंकी रैकवार कार्यवाहक सरपंच के रूप में जिम्मेदारी संभाल रही थीं। recent visitors 21

नगर पालिका के धीमे निर्माण कार्य से व्यापारी परेशान, प्रदर्शन कर जताया विरोध।

Traders frustrated by the municipality’s slow construction work; staged a protest to voice their opposition. हरिप्रसाद गोहेआमला। नगर पालिका परिषद आमला द्वारा मुख्यमंत्री शहरी अधोसंरचना विकास योजना अंतर्गत कराये जा रहे सड़क, नाली एवं डिवाइडर निर्माण कार्य की धीमी गति ने व्यापारियों की परेशानी बढ़ा दी है। बताया जा रहा है कि रुद्र कंपनी के ठेकेदार के माध्यम से विगत कई महीनों से निर्माण कार्य कराया जा रहा है, लेकिन कार्य की गति बेहद धीमी है। कई स्थानों पर गड्ढे खोदकर अधूरा छोड़ दिया गया है तथा सड़क आवागमन के लिए बंद पड़ी है। इससे ग्राहक दुकानों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं और व्यापारियों के व्यवसाय में मंदी आ गई है। इसी से नाराज व्यापारियों ने सोमवार को प्रदर्शन कर नगर पालिका से शीघ्र निर्माण कार्य पूरा करने की मांग की। प्रदर्शन का नेतृत्व व्यापारी रवि साहू ने किया। इस दौरान व्यापारी बबलू गोस्वामी, मुन्ना सूरे, लोकेंद्र सिंह राठौर, महेंद्र राजपूत सहित बड़ी संख्या में व्यापारी व आमजन मौजूद रहे। सीएमओ ने कहा – जल्द होगा कार्य पूर्ण इस संबंध में मुख्य नगर पालिका अधिकारी प्रकाश देशमुख ने बताया कि हाईमास्क लाइट के लिए पोल लगाने का कार्य प्रगतिरत है। जल्द ही कार्य पूर्ण कर आवागमन बहाल किया जाएगा तथा व्यापारिक प्रतिष्ठानों के सामने समतलीकरण कर व्यवस्था बनाई जाएगी। recent visitors 128

मध्य प्रदेश में एससी, एसटी में शामिल हुईं कई नई जातियां, 4 जिलों में आरक्षण का मिलेगा लाभ

Several new castes have joined the SC, ST category in Madhya Pradesh, and reservation benefits will be available in four districts. SC ST Categories In MP । मध्यप्रदेश में एक बार फिर एससी, एसटी में कई नई जातियां शामिल हुईं हैं। प्रदेश के कई जिलों में जातियों की आरक्षित श्रेणी तय की गई है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार राज्य के 4 नवगठित जिलों में यह कवायद की गई है। जातियों की आरक्षित श्रेणी में जिन जातियों को शामिल किया गया है उन्हें अब आरक्षण का लाभ मिलेगा। नवगठित 2 जिलों में कु्हार, कु्हार (प्रजापति) और कुंभार को अनुसूचित जाति (एससी) में शामिल किया गया है। इसी तरह पारधी, बहेलिया व इससे संबंधित कुछ अन्य जनजाति को एक नवगठित जिले में अनुसूचित जनजाति (एसटी) में रखा गया है। यह स्पष्ट किया गया है कि नवगठित जिलों में जातियों की आरक्षित श्रेणी, सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देशों के अनुरूप तय की गई हैं। सीएम मोहन यादव ने मानव अधिकार आयोग के कार्यक्रम में अनुसूचित जातियों, जनजातियों के हितों के लिए काम करने का संकल्प दोहराया। एमपी के मैहर, मऊगंज, पांढुर्णा और निवाड़ी नवगठित जिले हैं। इन चारों जिलों में जातियों की आरक्षित श्रेणी तय कर दी गई है। मैहर, मऊगंज, पांढुर्णा और निवाड़ी जिलों में अब इसी के अनुरूप जाति प्रमाण पत्र बनाए जाएंगे। इसकी व्यवस्था भी शुरू कर दी गई है। अधिकारियों के अनुसार नवगठित 4 जिलों में जातियों की आरक्षित श्रेणी तय करते समय सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देशों का पूर्णत: पालन किया गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार मध्ययप्रदेश के कुछ जिलों में कु्हार, कु्हार (प्रजापति) और कुंभार अनुसूचित जाति (एससी) में हैं। मऊगंज और मैहर में भी इस जाति को अनुसूचित जाति के अंतर्गत रखा गया है। अधिकारियों ने बताया कि राज्य के छतरपुर, दतिया, पन्ना, रीवा, सतना, शहडोल, सीधी और टीकमगढ़ जिलों में कु्हार, कु्हार (प्रजापति) और कुंभार अनुसूचित जाति (एससी) में यानि आरक्षित श्रेणी में शामिल हैं। अब 2 अन्य नवगठित जिलों में भी इन जातियों की आरक्षित श्रेणी तय कर दी गई है। 3 नए जिलों में पनिका जाति को आरक्षित श्रेणी में शामिल किया इसी तरह पनिका जाति को राज्य के 3 नए जिलों में आरक्षित श्रेणी में शामिल किया गया है। अभी यह जाति छतरपुर, पन्ना, रीवा, सतना, शहडोल, उमरिया, सीधी, टीकमगढ़ और दतिया की सेंवढ़ा व दतिया तहसील में एसटी के रूप में मान्य है। अब उपरोक्त जिलों के साथ ही नए जिले मऊगंज, मैहर, निवाड़ी में पनिका जाति को अनुसूचित जाति के रूप में आरक्षित श्रेणी में शामिल किया गया है। इस प्रकार यह जाति अब राज्य के 12 जिलों में आरक्षित श्रेणी में शामिल हो गई है। नई जातियों में पारधी और बहेलिया व इनसे संबंधित अन्य उपजातियों को भी खासा लाभ आरक्षण के लिए नई जातियों में पारधी और बहेलिया व इनसे संबंधित अन्य उपजातियों को भी खासा लाभ मिला है। इन्हें नवगठित पांढुर्णा जिले में अनुसूचित जनजाति (एसटी) में रखा गया है। पारधी और बहेलिया के साथ ही बहेल्लिया, चिता पारधी, लंगोली पारधी, फांस पारधी, शिकारी, टाकनकार एवं टाकिया जनजाति को पांढुर्णा जिले में आरक्षित श्रेणी में शामिल किया गया है। recent visitors 96

सावधान: रेलवे रेल नीर और बेसन का सैंपल क्वालिटी जांच में पूरी तरह फेल, रोज होती हैं लाखों की सेल

सावधान: रेलवे रेल नीर और बेसन का सैंपल क्वालिटी जांच में पूरी तरह फेल, रोज होती हैं लाखों की सेल Caution: Railway Rail Neer and Gram Flour samples fail quality tests, selling lakhs of rupees daily. Caution: Railway Rail Neer and Gram Flour samples fail quality tests, selling lakhs of rupees daily भोपाल। ट्रेन के सफर में समय बहुत कम होता है। गाड़ी प्लेटफॉर्म पर कुछ मिनट के लिए रुकती है, यात्री जल्दी से नीचे उतरकर पानी की बोतल या खाने का पैकेट खरीदते हैं और सीटी बजते ही वापस कोच में चढ़ जाते हैं। डिब्बे के अंदर क्या है, इसकी जांच करने का मौका शायद ही कभी मिलता है। यह पूरा सौदा सिर्फ और सिर्फ भरोसे पर टिका होता है। लेकिन अब भोपाल रेलवे डिविजन में भरोसे की इस डोर पर बड़ा सवालिया निशान लग गया है, जब इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड कॉर्पोरेशन द्वारा सप्लाई किए जाने वाले ‘रेल नीर’ का एक सैंपल क्वालिटी जांच में पूरी तरह फेल हो गया। लैब की रिपोर्ट ने उड़ाई नींद, बेसन का सैंपल भी निकला घटिया जुलाई महीने में रूटीन टेस्टिंग के दौरान यह सैंपल कलेक्ट किया गया था। डिविजन की फाइंडिंग्स के मुताबिक, पानी का यह सैंपल तय मानकों पर खरा नहीं उतरा। सिर्फ पानी ही नहीं, बल्कि खाने-पीने की चीज़ों में इस्तेमाल होने वाले खुले बेसन का सैंपल भी क्वालिटी पैरामीटर्स में फेल पाया गया। यात्रियों के लिए यह केवल कोई लैबोरेटरी रिपोर्ट भर नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर उनकी सेहत से जुड़ा हुआ गंभीर मामला है, जो वे सफर के दौरान खाते और पीते हैं। भोपाल रेलवे डिविजन में रूटीन क्वालिटी चेक के दौरान रेल नीर और बेसन का सैंपल फेल हो गया है। भोपाल रेलवे डिविजन में रोजाना औसतन 1.14 लाख यात्री सफर करते हैं, जबकि अकेले भोपाल जंक्शन पर 150 से ज्यादा ट्रेनें रुकती हैं। मंडीदीप प्लांट से भोपाल डिविजन के स्टेशनों पर हर दिन करीब 5,000 रेल नीर की बोतलें सप्लाई होती हैं। इटारसी के बेस किचन में पहले भी छापेमारी कर एक्सपायरी और घटिया फूड मटीरियल नष्ट किया जा चुका है। क्या कहते हैं आंकड़े और यात्री? इस मामले की गंभीरता इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि हर दिन इस पर लाखों लोगों की जिंदगी निर्भर करती है। साल 2025-26 के दौरान भोपाल रेलवे डिविजन ने रोजाना लगभग 1.14 लाख यात्री सफर संभाले हैं। अकेले भोपाल जंक्शन पर रोज 150 से ज्यादा ट्रेनें रुकती हैं और करीब 70,000 यात्रियों का फुटफॉल रहता है। recent visitors 31

राहुल गांधी के छात्र संवाद से पहले नितिन नवीन का MP दौरा, तीन शहरों में कार्यक्रम

Nitin Naveen’s MP tour before Rahul Gandhi’s student dialogue, programs in three cities भोपाल । प्रदेश में इस माह दो बड़ी सियासी गतिविधियां होंगी। कांग्रेस सांसद और लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के 19 सितंबर को इंदौर में प्रस्तावित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम से ठीक पहले भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन 17 सितंबर को इंदौर आएंगे। नितिन नवीन के 17 सितंबर को इंदौर, मंदसौर और उज्जैन में तीन प्रमुख कार्यक्रम प्रस्तावित हैं। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद नवीन का मप्र का यह पहला दौरा होगा। इधर, राहुल गांधी के कार्यक्रम से पहले भाजपा ने कहा है कि जेन-जी किसी व्यक्ति के हाथ का खिलौना न बनें। ‘जेन-जी’ की समस्याओं के हल के लिए वह तत्पर है और नयी पीढ़ी को कथित साजिशों के जाल में फंसकर किसी व्यक्ति के हाथ का खिलौना नहीं बनना चाहिए। उज्जैन में दीपोत्सव कार्यक्रम में शामिल होंगे नितिन नवीन प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार नितिन नवीन ग्रामीण आबादी को जमीन का मालिकाना हक देने वाली स्वामित्व योजना के तहत इंदौर में निश्शुल्क रजिस्ट्री वितरण की शुरूआत करेंगे। नवीन उज्जैन में दीपोत्सव कार्यक्रम में भी शामिल होंगे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिन और सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर उज्जैन में 17 सितंबर को बड़ा दीपोत्सव कार्यक्रम होगा। क्षिप्रा नदी के घाटों और महाकाल लोक क्षेत्र में करीब 25 लाख दीप जलाए जाने की तैयारी है। भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन का इस आयोजन में भी शामिल होने का कार्यक्रम प्रस्तावित है। इसके अलावा नवीन का मंदसौर के गांधी सागर अभयारण्य में चीतों को छोड़ने का भी प्रस्तावित कार्यक्रम है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने बताया कि 17 सितंबर को भाजपा के नितिन नवीन का दौरा प्रस्तावित है, जल्द ही उनका दौरा फाइनल होगा, जिसकी सूचना दी जाएगी। उषा ठाकुर बोंली, विद्यार्थियों की मांगें सुनकर उनके समाधान के लिए पूरी भाजपा तत्पर लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का इंदौर में 19 सितंबर को ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम प्रस्तावित है। इसको लेकर पूर्व मंत्री व प्रदेश भाजपा प्रवक्ता उषा ठाकुर ने कहा कि इस विद्यार्थी संवाद अभियान के तहत राहुल गांधी भाजपा को प्रश्नपत्र लीक,महंगी शिक्षा, सरकारी भर्तियों में अनियमितताओं और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर घेरने का प्रयास कर रहे हैं। ‘जेन-जी’ (जेनरेशन जेड) से तात्पर्य उस पीढ़ी से है जिसका जन्म मुख्य रूप से वर्ष 1997 से 2012 के बीच हुआ है। उन्होंने दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले दिनों हुए छात्र आंदोलन का जिक्र करते हुए मीडिया से कहा,‘‘हमारे नेतृत्व ने बच्चों की बात सुनी। उनकी समस्याओं का जो समाधान ढूंढना है, हम वह अवश्य ढूंढेंगे। विद्यार्थियों की मांगें सुनकर उनके समाधान के लिए पूरी भाजपा तत्पर है।’’ recent visitors 28

जबलपुर: पर्युषण पर्व पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, दोपहर 12 बजे तक जैन कर्मचारियों को अदालत आने की अनुमति

Jabalpur: High Court issues major verdict on Paryushan festival, Jain employees allowed to come to court till 12 noon विशेष संवाददाता जितेन्द्र श्रीवास्तव/अर्पिता श्रीवास्तव  जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पर्युषण पर्व के धार्मिक अनुष्ठानों को ध्यान में रखते हुए जैन धर्मावलंबी कर्मचारियों को दो घंटे की विशेष छूट प्रदान की है। मुख्य न्यायाधीश अल्पेश यशवंत कोगजे के निर्देश पर रजिस्ट्रार जनरल धर्मेंद्र सिंह ने सोमवार को आदेश जारी किया, जिसमें स्पष्ट किया गया कि जैन कर्मचारी 15 से 26 सितंबर तक सुबह 10 बजे के बजाय दोपहर 12 बजे तक कार्यालय पहुंच सकेंगे। जबलपुर, इंदौर और ग्वालियर पीठों में मिलेगी छूट यह सुविधा हाई कोर्ट की मुख्यपीठ जबलपुर, इंदौर और ग्वालियर पीठों में लागू होगी। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस विशेष सुविधा से न्यायालयीन कार्य प्रभावित नहीं होना चाहिए। संबंधित अधिकारियों को कार्यालयीन व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। इस निर्णय से जैन कर्मचारियों को पर्युषण पर्व के दौरान अपनी धार्मिक परंपराओं का पालन करने में सहायता मिलेगी। recent visitors 40

जबलपुर में 150 करोड़ रुपये का कैंसर इंस्टीट्यूट, मशीन और सुविधाएं लापता, लोगों का बेहतर इलाज का सपना अधूरा

Jabalpur’s ₹150-crore cancer institute, missing machinery and facilities, leaves people’s dreams of better treatment unfulfilled. विशेष संवाददाता: जितेन्द्र श्रीवास्तव/अर्पिता श्रीवास्तव  जबलपुर। कैंसर से जंग में हर दिन और हर घंटा अहम होता है, लेकिन नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज के अंतर्गत स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट (एससीआई) में इलाज की आस लेकर पहुंच रहे मरीजों के सामने इंतजार और संसाधनों की कमी बड़ी चुनौती बन गई है। साल 2023 में करीब 150 करोड़ रुपए की लागत से शुरू हुए इस संस्थान से उम्मीद थी कि शहर समेत आसपास के आठ जिलों के मरीजों को कैंसर का समुचित इलाज यहीं मिल सकेगा। तीन साल से अधिक समय गुजरने के बाद भी संस्थान पूरी क्षमता से काम नहीं कर पा रहा। लीनियर एक्सीलेटर मशीन का इंतजार रेडिएशन के लिए जरूरी लीनियर एक्सीलरेटर मशीन का इंतजार है। विशेषज्ञ डॉक्टरों के स्वीकृत पदों के मुकाबले महज चार आन्कोलाजिस्ट पदस्थ हैं, जबकि आठ डाक्टरों की तत्काल जरूरत बताई जा रही है। नर्सिंग स्टाफ भी करीब 40 प्रतिशत कम है। कीमो वार्ड में एक नर्स पर 15 मरीजों की जिम्मेदारी है। इतना ही नहीं, जरूरी कीमो दवाएं भी 15 से 20 दिन तक स्टाक से बाहर हो जाती हैं। पिछले साल 6400 मरीजों ने यहां पंजीयन कराया, लेकिन सिर्फ 2100 को पूरा इलाज मिल सका। बाकी 4300 मरीजों को दूसरे शहरों या निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ा। आन्को सर्जरी उपकरणों की जरूरत संस्थान के लिए लीनियर एक्सीलरेटर के अलावा फ्लो साइटोमीटर, सीटी सिम्युलेटर, क्यूए टूल्स, मेमोग्राफी, अल्ट्रासाउंड और आन्को सर्जरी उपकरणों की जरूरत है। इनकी खरीदी के लिए कई बार टेंडर प्रक्रिया शुरू हुई, लेकिन तीन बार टेंडर निरस्त होने और प्रशासनिक स्तर पर लगातार हुए बदलावों के कारण प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। 12 विभागों में सिर्फ चार आन्कोलाजिस्ट एससीआई के पास चार आन्कोलाजिस्ट सहित सात से आठ विशेषज्ञ हैं, जबकि जरूरत 16 की है। नर्सिंग स्टाफ की संख्या भी बेहद सीमित है, मेडिकल कॉलेज के स्टाफ से अधिकांश काम एससीआई का चल रहा है। लीनियर एक्सीलरेटर का हो रहा इंतजार मेडिकल कॉलेज प्रशासन की मानें तो इस साल दिसंबर तक लीनियर एक्सीलरेटर मिल जाएगी। प्रस्तावित करीब 42 करोड़ रुपए से यह मशीन जर्मनी से आएगी, बजट को विभाग की हरी झंडी मिल चुकी है। लेकिन तब तक मरीजों का इंतजार जारी रहेगा। महत्वपूर्ण है कि एससीआई की घोषणा 2014-15 में हुई थी। भवन तीन साल में बनकर तैयार होना था, लेकिन 2020-21 तक कार्य चलता रहा। बाद में शुरूआत 2023 में हुई भी तो आधी-अधूरे संसाधनों के साथ। अब आलम यह है कि अनेक जांच मशीनों के अभाव में एक ही छत के नीचे सारा इलाज नहीं हो पा रहा है। recent visitors 174