जबलपुर: कंपनियों को लाभ पहुंचाने वाली शर्तों पर हाईकोर्ट सख्त, बिजली कंपनी की टेंडर प्रक्रिया पर लगाई रोक

Jabalpur: High Court takes a strict stance on terms favoring companies; stays power company’s tender process. विशेष संवाददाता: जितेन्द्र श्रीवास्तव/अर्पिता श्रीवास्तवमध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा नौ लॉट में आउटसोर्स मैनपावर उपलब्ध कराने के लिए जारी निविदा प्रक्रिया पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। चीफ जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे और जस्टिस विवेक रूसिया की युगलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिकाकर्ता उर्मिला इंटरनेशनल सर्विसेज, भोपाल सहित पांच कंपनियों की ओर से दायर याचिकाओं में कहा गया था कि निविदा में ऐसी शर्तें निर्धारित की गई हैं, जिन्हें केवल कुछ कंपनियां ही पूरा करती हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि निविदा में तकनीकी मूल्यांकन में प्राप्त अंक महत्वपूर्ण हैं, जबकि मूल्य बोली निर्धारित है। मापदंड तय करने के लिए 50 अंकों का विशेष टेक्नो-कमर्शियल स्कैनिंग सिस्टम बनाया गया है। इसमें 51 करोड़ रुपए से अधिक का टर्नओवर करने वाली कंपनियों को 35 अंक दिए जाने का प्रावधान है। जिस कंपनी के पास सबसे अधिक मैनपावर सप्लाई का अनुभव होगा, उसे पांच अतिरिक्त अंक दिए जाएंगे। इसके अलावा प्रदेश की ऊर्जा कंपनी में दस साल का अनुभव भी अनिवार्य किया गया है। याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि वे पिछले तीन वर्षों से विद्युत वितरण कंपनी के लिए तकनीकी और गैर-तकनीकी आउटसोर्स कर्मचारियों की सेवाएं उपलब्ध करा रहे हैं। इस दौरान उन्हें कार्य के लिए प्रशंसा प्रमाण पत्र भी मिले हैं। इसके बावजूद ऐसे प्रतिबंधात्मक मापदंड निर्धारित किए गए हैं, जिनसे उन्हें निविदा प्रक्रिया से बाहर किए जाने की आशंका है। याचिकाकर्ताओं ने यह भी कहा कि देशभर में प्राप्त समान अनुभव को तकनीकी मूल्यांकन में उचित महत्व नहीं दिया गया है। ऐसे में तकनीकी अंकों और बराबरी की स्थिति में अपनाए जाने वाले मापदंडों का निविदा के परिणाम पर सीधा प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने इन मापदंडों को मनमाना, भेदभावपूर्ण और समान अवसर के सिद्धांत के विपरीत बताया। युगलपीठ ने याचिकाओं की सुनवाई के बाद निविदा प्रक्रिया पर रोक लगाते हुए अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता राम बिहारी गौतम और अधिवक्ता शुभम शुक्ला ने पैरवी की। recent visitors 22

मप्र जल निगम का बदलेगा नाम, अब कहलाएगा एमपी वाटर एंड सेनिटेशन कार्पोरेशन, मीटिंग में प्रस्ताव पास

MP Jal Nigam to be renamed ‘MP Water and Sanitation Corporation’; proposal passed in meeting. भोपाल: सीएम मोहन यादव की अध्यक्षता में एमपी जल निगम के संचालक मंडल की 26वीं बैठक हुई है। बैठक सीएम हाउस में हुई है। इस बैठक में एमपी जल निगम मर्यादित को पुनर्गठित कर अब मध्यप्रदेश वाटर एंड सेनिटेशन कार्पोरेशन बनाने का अहम प्रस्ताव पारित हुआ है। कैबिनेट में मंजूरी के लिए भेजादरअसल, बैठक में वर्तमान मप्र जल निगम मर्यादित (एमपीजेएनएम) को पुर्नगठित कर अब मध्यप्रदेश वाटर एंड सेनिटेशन कार्पोरेशन (एमपी-वास्को) बनाने का अहम प्रस्ताव पारित किया गया। संचालक मंडल ने यह महत्वपूर्ण प्रस्ताव अंतिम अनुमोदन के लिए मंत्रि-परिषद् को भेजने की मंजूरी दे दी। जल विकास और स्वच्छता प्रबंधन में नए लक्ष्यों पर काम करेगाबैठक में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश जल निगम अब अपने नए नाम (एमपी-वास्को) और नई जिम्मेदारियों के साथ प्रदेश में जल विकास एवं स्वच्छता प्रबंधन में नए लक्ष्यों और अतिरिक्त संसाधनों के साथ काम करेगा। सीएम ने मप्र जल निगम द्वारा विचार और अनुमोदन के लिए रखे गए विभिन्न एजेंडा प्रस्तावों को मंजूरी दी। मोहन यादव ने जल निगम के वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए तैयार संचालक मण्डल के प्रतिवेदन और वित्तीय वर्ष 2024-25 के अनअंकेक्षित वार्षिक लेखाओं का अनुमोदन किया। बजट अनुमान 57 करोड़ रुपए करने का अनुमोदनमोहन यादव ने कैप्टिव मोड के तहत 60 मेगावॉट ग्रिड-कनेक्टेड पवन ऊर्जा परियोजना विकसित करने के लिए गठित परियोजना कंपनी में मप्र जल निगम के प्रतिनिधित्व के लिए प्रबंध संचालक को अधिकृत कर दिया। साथ ही इसी परियोजना के विकास के लिए गठित प्रोजेक्ट कंपनी में डीमैटीरियलाइज्ड रूप में 26 प्रतिशत इक्विटी शेयर रखने का अनुमोदन किया। उन्होंने मप्र जल निगम के इक्विटी शेयरों के नए पदाधिकारियों को हस्तांतरण और जल निगम द्वारा वर्तमान वित्त वर्ष 2026-27 के लिए तैयार किए गए बजट अनुमान 57 करोड़ रुपए का अनुमोदन किया टेंडर मंजूरी की तय सीमा बढ़ीसीएम यादव ने मप्र जल निगम के संचालक मण्डल में स्वतंत्र निदेशक के पद पर सुमित बोस की पुनः नियुक्ति का भी अनुमोदन किया। उन्होंने प्रोजेक्ट इम्प्लीमेंटेशन और एक्जी़क्यूशन मेथोडोलॉजी के अनुसार मप्र जल निगम के एमडी की टेंडर मंजूरी की तय सीमा 5 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 25 करोड़ रुपए करने के प्रस्ताव का भी अनुमोदन किया। recent visitors 25

मोदी के चीता प्रोजेक्ट के 4 साल : 8 चीतों में कौन-कौन जिंदा? आशा-ज्वाला ने बढ़ाया कुनबा, बाकी 6 अब कहां हैं?

Four Years of Modi’s Cheetah Project: Which of the 8 Cheetahs Are Still Alive? Asha and Jwala Have Expanded the Pride—Where Are the Other 6 Now? मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में चीता प्रोजेक्ट के चार साल पूरे हो गए हैं। 17 सितंबर 2022 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नामीबिया से लाए गए आठ चीतों को कूनो में छोड़ा था। उस समय इन आठ चीतों के साथ भारत में चीता पुनर्वास की शुरुआत हुई थी। चार साल बाद इन आठ में से तीन चीते ही जीवित हैं, जबकि पांच की अलग-अलग कारणों से मौत हो चुकी है। खास बात यह है कि शुरुआती आठ में शामिल आशा और ज्वाला ने भारत में प्रजनन कर चीता कुनबा बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है। बता दें अभी भारत में जन्मे जीवित शावकों की संख्या 32 और देश में कुल चीतों की संख्या 52 पहुंच गई थी। इसमें 49 कूनो में और तीन गांधी सागर में हैं। पीएम ने इन आठ चीतों को छोड़ा था17 सितंबर 2022 को नामीबिया से लाए गए आठ चीतों में पांच मादा और तीन नर थे। बाद में इनके नाम बदले गए। आशा का नाम आशा, ओबान का पवन, सवाना का नाभा, सियाया का ज्वाला, एल्टन का गौरव, फ्रेडी का शौर्य और तिब्लिसी का धात्री रखा गया। आठवां चीता साशा अपने इसी नाम से जाना गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 17 सितंबर 2022 को कूनो में छोड़े गए आठ चीतों में अब आशा, ज्वाला और गौरव ही बचे हैं। अब कौन-कौन जिंदा है?आशा: यह शुरुआती आठ चीतों में शामिल मादा है। कूनो में इसने प्रजनन किया और भारत में जन्मे चीतों की नई पीढ़ी बढ़ाने में योगदान दिया। आशा ने पहले लीटर में तीन और दूसरे लीटर में पांच शावकों को जन्म दिया।ज्वाला: इसका पुराना नाम सियाया था। ज्वाला अब इस प्रोजेक्ट की अहम मादा चीतों में शामिल है। पहले लीटर में चार शावकों को जन्म दिया, लेकिन इसमें एक ही शाव बच पाया। दूसरे लीटर में चार शावको को जन्म दिया, जिसमें तीन जिंदा और तीसरे लीटर में पांच शावकों को जन्म दिया। यह पांचों जिंदा हैं।गौरव: इसका पुराना नाम एल्टन था। यह भी 2022 में आए आठ चीतों में शामिल है और अब जीवित तीन चीतों में है।पांच चीतों की हो चुकी है मौतसाशा: मार्च 2023 में इसकी मौत हुई। जांच में किडनी से जुड़ी गंभीर बीमारी सामने आई थी।धात्री: इसका पुराना नाम तिब्लिसी था। अगस्त 2023 में इसकी मौत हो गई।शौर्य: इसका पुराना नाम फ्रेडी था। जनवरी 2024 में इसकी मौत हुई।पवन: इसका पुराना नाम ओबान था। अगस्त 2024 में इसकी मौत हो गई।नाभा: इसका पुराना नाम सवाना था। जुलाई 2025 में चोटों के बाद इसकी मौत हुई।आठ से शुरू हुआ सफर, अब नई पीढ़ी संभाल रही कमानकूनो में सितंबर 2022 में पहले आठ चीते लाए गए थे। इसके बाद फरवरी 2023 में दक्षिण अफ्रीका से 12 और चीते भारत पहुंचे। आगे चलकर चीतों का प्रजनन शुरू हुआ और भारत में ही शावकों का जन्म होने लगा। मार्च 2026 में ज्वाला के पांच शावकों के जन्म के बाद देश में चीतों की कुल संख्या 52 और भारत में जन्मे जीवित शावकों की संख्या 32बताई गई थी। यानी चार साल पहले जिन आठ चीतों से भारत में दोबारा चीते बसाने की शुरुआत हुई थी, उनमें से तीन आज भी इस सफर का हिस्सा हैं। वहीं, आशा और ज्वाला से जन्मी नई पीढ़ी ने कूनो की कहानी को एक नए दौर में पहुंचा दिया है। अप्रैल 2026 में भारत में जन्मी एक मादा चीते ने भी कूनो के जंगल में चार शावकों को जन्म दिया, जिससे प्राकृतिक परिस्थितियों में प्रजनन की एक और उपलब्धि सामने आई।कठिन अनुभवों से मिली सीखवन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पहला साल कूनो की टीम ने परिस्थितियों के साथ तालमेल बैठाया। पहला साल कठिन अनुभवों से मिली उम्मीद के साथ खत्म हुआ। इससे यह सीख मिली कि चीतों को दोबारा बसाना कोई एक बार में पूरा होने वाली प्रक्रिया नहीं है। इसमें लगातार सीखना, परिस्थितियों के अनुसार बदलाव करना, चुनौतियों का सामना करना और उनसे उबरना शामिल है। इसके बाद सफल प्रजनन से उम्मीद बढ़ती गई। recent visitors 37

6 साल पुराने मारपीट के मामले में ₹4 हजार का इनामी वारंटी गिरफ्तार, किशोर न्याय बोर्ड में किया पेश

Warrantee with a ₹4,000 reward on his head arrested in a 6-year-old assault case; produced before the Juvenile Justice Board. छतरपुर। थाना भगवां पुलिस ने वर्ष 2020 के मारपीट के एक पुराने प्रकरण में लंबे समय से फरार चल रहे ₹4,000 के इनामी वारंटी को अभिरक्षा में लेकर न्यायालय में पेश किया। यह कार्रवाई पुलिस के “न्याय पथ अभियान” के तहत की गई। पुलिस के अनुसार, प्रकरण में किशोर न्याय बोर्ड द्वारा स्थायी वारंट जारी किया गया था। फरार वारंटी की तलाश के बाद पुलिस टीम ने उसे अभिरक्षा में लिया। इसके बाद आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी कर उसे किशोर न्याय बोर्ड, छतरपुर के समक्ष पेश किया गया। कार्रवाई एसडीओपी बड़ा मलहरा रोहित अलावा के मार्गदर्शन में थाना प्रभारी भगवां निरीक्षक श्रद्धा शुक्ला, प्रधान आरक्षक कल्याण सिंह, आरक्षक शीलेन्द्र सिंह, सत्येंद्र कुमार सहित पुलिस टीम द्वारा की गई। छतरपुर पुलिस के अनुसार, फरार आरोपियों की गिरफ्तारी और लंबित प्रकरणों के निपटारे के लिए अभियान लगातार जारी है। recent visitors 113

पन्ना में ‘चिता आंदोलन’ के दौरान बुजुर्ग महिला की मौत, पांचवें दिन भी नदी में डटे विस्थापित; बोले- ‘न्याय दो या मार दो’

Elderly woman dies during ‘Chita Andolan’ in Panna; displaced people remain camped in the river for the fifth day, declaring: ‘Give us justice or kill us.’ पन्ना। केन-बेतवा लिंक परियोजना, मझगाय और रुंझ बांध के साथ सिंगरौली-ललितपुर रेलवे लाइन से प्रभावित विस्थापितों का ‘चिता आंदोलन’ बुधवार को पांचवें दिन भी जारी है। आंदोलन के दौरान टपरिया निवासी एक बुजुर्ग महिला की मौत हो गई। इसके बाद प्रदर्शनकारियों में आक्रोश और बढ़ गया। आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक विस्थापित परिवारों को उनका हक और उचित पुनर्वास नहीं मिलता, आंदोलन जारी रहेगा।नदी में ‘जिंदा चिता’ बनाकर प्रदर्शनआंदोलन का नेतृत्व कर रहे जय किसान संगठन के नेता और सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर के मुताबिक केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित आदिवासी परिवार नदी में ‘जिंदा चिता’ बनाकर धरना दे रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उन्होंने कभी विकास परियोजनाओं का विरोध नहीं किया, बल्कि ग्रामसभा की भूमिका, पारदर्शी प्रक्रिया और उचित पुनर्वास की मांग की है।आरोप है कि प्रभावित परिवारों की जमीनों पर कार्रवाई के दौरान निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। आंदोलनकारी पानी में बनाई गई चिताओं पर लेटकर अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं।‘घर डूब रहे, सरकार परियोजना का काम आगे बढ़ा रही’भटनागर ने आरोप लगाया कि आंदोलन को रोकने के लिए पहले धारा 144 और अब धारा 163 के तहत कार्रवाई की गई तथा प्रदर्शनकारियों पर मुकदमे दर्ज किए गए। उनके मुताबिक कई परिवारों को अब तक मुआवजा नहीं मिला है, जबकि उनके घर डूब क्षेत्र में आ रहे हैं। कुछ मकानों के गिरने और पुलिस कार्रवाई के भी आरोप लगाए गए हैं।उन्होंने कहा कि प्रभावितों की समस्या केवल मुआवजे तक सीमित नहीं है। यह जीवन, संविधान और गरिमा से जुड़ा सवाल है। आंदोलनकारियों का आरोप है कि सिंचित जमीन को रिकॉर्ड में असिंचित बताकर मुआवजा कम किए जाने की स्थिति भी सामने आई है।5 लाख से 12.50 लाख के पैकेज का मुद्दाआंदोलनकारियों के अनुसार पहले पुनर्वास पैकेज के तहत 5 लाख रुपये का प्रावधान था। जुलाई में हुए आंदोलन के बाद मुख्यमंत्री ने कैबिनेट में इसे बढ़ाकर 12.50 लाख रुपये करने की घोषणा की थी। हालांकि प्रदर्शनकारियों का दावा है कि कई प्रभावित परिवारों को अभी तक पहले घोषित 5 लाख रुपये की राशि भी पूरी तरह नहीं मिली है।‘परियोजनाएं अलग, पीड़ा एक’आंदोलन में मझगाय, रुंझ, केन-बेतवा लिंक और सिंगरौली-ललितपुर रेलवे लाइन से प्रभावित परिवार एक मंच पर आए हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि भले ही परियोजनाएं अलग-अलग हों, लेकिन विस्थापन और पुनर्वास की समस्या समान है।महिला आंदोलनकारियों दिव्या अहिरवार और हिसाबी राजपूत ने कहा कि वे बच्चों के साथ धरने पर इसलिए बैठी हैं क्योंकि उनकी समस्याएं सुनने वाला कोई नहीं है।न्याय की मांगअमित भटनागर ने कहा कि आंदोलन का नारा ‘न्याय दो या मार दो’ प्रभावित परिवारों की बेबसी को दर्शाता है। उनका कहना है कि वे मौत नहीं, न्याय की मांग कर रहे हैं और बिजली-पानी जैसी सुविधाएं रोककर उनकी आवाज दबाई नहीं जा सकती।आंदोलनकारियों ने डूब क्षेत्र के प्रत्येक परिवार का सत्यापन कराने, लंबित मुआवजे का भुगतान करने, मकान और जमीन का उचित मूल्यांकन करने तथा घोषित 12.50 लाख रुपये के पुनर्वास पैकेज को तत्काल लागू करने की मांग की है। उनका कहना है कि मांगें पूरी होने तक ‘चिता आंदोलन’ जारी रहेगा। recent visitors 18

एमपी राज्यपाल देने वाले हैं इस्तीफा? हाई कोर्ट के फैसले पर टिकी सब की नजरें

MP Governor about to resign? All eyes on the High Court’s decision विशेष संवाददाता: जितेन्द्र श्रीवास्तव/अर्पिता श्रीवास्तव  जबलपुर । राज्यपाल मंगूभाई पटेल के कार्यकाल को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हुई. जबलपुर कृषि विश्वविद्यालय की सेवानिवृत्त प्रोफेसर डॉ. एमए खान की ओर से दायर याचिका में दावा किया गया है कि मंगूभाई पटेल का 5 वर्ष का कार्यकाल पूरा हो चुका है. इसलिए उन्हें पद से इस्तीफा देना चाहिए. हाई कोर्ट ने इस मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया है. याचिका में पद छोड़ने की मांग याचिका की सुनवाई हाई कोर्ट की जस्टिस आरएन पाठक और जस्टिस बीपी शर्मा की खंडपीठ में हुई. याचिकाकर्ता की ओर से संविधान के अनुच्छेद 153 और 156 का हवाला देते हुए कहा गया “राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं और उनका सामान्य कार्यकाल 5 वर्ष का होता है.” याचिका में मांग की गई है “5 वर्ष पूरे हो जाने पर राज्यपाल अपना पद छोड़ देते हैं पहले ऐसे उदाहरण सामने आए हैं. नया राज्यपाल नियुक्त होने तक राज्यपाल के कामकाज की जिम्मेदारी मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को सौंपी जाए.” केंद्र सरकार ने रखा अलग पक्ष इस मामले में भारत सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ने दलील दी “संविधान के अनुच्छेद 156 के अनुसार राज्यपाल 5 वर्ष की अवधि के लिए पद पर रहते हैं, लेकिन उनका कार्यकाल नए राज्यपाल के पदभार ग्रहण करने तक जारी रह सकता है. ऐसे में केवल 5 वर्ष पूरे होने के आधार पर राज्यपाल का पद स्वतः रिक्त नहीं माना जा सकता.” दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाई कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है. गुजरात में मंत्री रह चुके हैं मंगूभाई राज्यपाल मंगू भाई पटेल का जन्म 1 जून 1944 को गुजरात के नवसारी में हुआ. उन्होंने गुजरात की राजनीति में लंबे समय तक सक्रिय भूमिका निभाई. वह नवसारी से 5 बार और गांदेवी से एक बार विधायक रहे. गुजरात सरकार में वे आदिवासी कल्याण तथा बाद में वन एवं पर्यावरण विभाग के मंत्री रहे. वर्ष 2013 में वे गुजरात विधानसभा के उपाध्यक्ष भी बने. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने जुलाई 2021 में मंगूभाई पटेल को मध्य प्रदेश का राज्यपाल नियुक्त किया था. उन्होंने 8 जुलाई 2021 को मध्य प्रदेश के राज्यपाल के रूप में शपथ ली थी. याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अजय रायजादा ने पक्ष रखा. recent visitors 26

मध्य प्रदेश में लंपी वायरस से मचा हड़कंप, अब तक लगभग तीन दर्जन से अधिक गायों की मौत

Lumpi virus causes panic in Madhya Pradesh, more than three dozen cows have died so far. ग्वालियर। लंपी बीमारी के चलते लगातार गायों की मौतों ने जिम्मेदार सिस्टम में हड़कंप मचा दिया है। गायों की मौत का आंकड़ा मंगलवार को 34 पहुंच गया है। रतवाई गौशाला जिसे आइसोलेशन सेंटर बनाया गया है वहां इलाज के नाकाफी इंतजाम की पोल खुलने के बाद मंगलवार से प्रशासन ने 24 घंटे चिकित्सकों की डयूटी लगाने के निर्देश दिए हैं। कलेक्टर रुचिका चौहान ने लंपी वायरस के संबंध में कलेक्ट्रेट में अफसरों की बैठक बुलाई और व्यवस्थाओं की समीक्षा कर लगातार मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए। पशुपालन विभाग द्वारा अब तक जिले में 25 हजार से अधिक गोवंश को गोट पॉक्स वैक्सीन लगाने का दावा किया है इसके बावजूद संक्रमण की रफ्तार पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। शहर के साथ-साथ भितरवार, डबरा और घाटीगांव जैसे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजाना दर्जनों नए संक्रमित मवेशी सामने आ रहे हैं और बीमारी से होने वाली मौतों का आंकड़ा भी लगातार बढ़ रहा है। मंगलवार को भी रतवाई गोशाला में चार संक्रमित गोवंश की मौत हुई है। यह आंकड़ा केवल रतवाई का है जिले की पूरी स्थिति विभाग को भी स्पष्ट नहीं है। रतवाई आइसोलेशन में 24 घंटे तैनात रहेंगे चिकित्सक जिले में गोवंश को लंपी वायरस से बचाने के लिए प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। कलेक्टर रुचिका चौहान ने मंगलवार को कलेक्ट्रेट में नगर निगम, जिला पंचायत और पशु चिकित्सा विभाग के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए। कलेक्टर ने रतवाई गोशाला स्थित आइसोलेशन सेंटर को और व्यवस्थित बनाने के निर्देश दिए। सेंटर पर मवेशियों के लिए शेड, पेयजल और पर्याप्त दवाओं के भंडारण के साथ-साथ तीन पारियों (शिफ्टों) में डाक्टरों की तैनाती की जाएगी। इसके अलावा रात के समय निगरानी और इलाज के लिए एक विशेष मेडिकल टीम तैनात रहेगी। नगर निगम आयुक्त अभिषेक चौधरी ने बताया कि प्रभावित गोवंश को रतवाई सेंटर पहुंचाने के लिए सात विशेष वाहन और एंबुलेंस संचालित की जा रही हैं। जिला पंचायत सीईओ सोजान सिंह रावत ने बताया कि टीकाकरण की निरंतर मॉनिटरिंग की जा रही है। बैठक में उप संचालक पशु चिकित्सा डॉक्टर डीके गुप्ता सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। उप संचालक पशु पालन डॉक्टर गुप्ता के मुताबिक, अभी तक 14 सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं, लेकिन अभी तक रिपोर्ट नहीं आई है। उनका कहा है कि रिपोर्ट केवल एक औपचारिकता है। बीमारी की वजह लंपी वायरस ही है। हालांकि, रिपोर्ट जल्द आ जाएगी। वहीं रतवाई गौशाला में सनातन सेना की टीम ने मंगलवार को गायों को ड्रिप लगवाई और व्यवस्थाओं में सहयोग भी किया। वैक्सीन भी बेअसर, म्यूटेशन और वर्षा बनी बड़ी चुनौती उप संचालक पशु चिकित्सा डॉक्टर दिलीप गुप्ता के मुताबिक, इस बार वायरस का असर ज्यादा खतरनाक साबित हो रहा है। इसके पीछे तीन मुख्य कारण सामने आ रहे हैं। अन्य वायरल बीमारियों की तरह इस बार भी लंपी वायरस के स्ट्रेन में बदलाव आया है, जिससे पुरानी एंटीबाडीज उतनी प्रभावी साबित नहीं हो पा रही हैं। जिन गोवंश में वायरस के शुरुआती लक्षण जैसे बुखार, शरीर पर गांठें बनना आ चुके हैं, उन पर वैक्सीन का कोई प्रभाव नहीं पड़ता। टीकाकरण केवल स्वस्थ गोवंश को बचाने के लिए होता है। लंपी की कोई सटीक एंटीवायरल दवा नहीं होने के कारण मवेशियों का इलाज केवल बुखार, दर्द और घाव सुखाने के लक्षणों के आधार पर ही किया जा रहा है। नमी और मक्खी-मच्छरों का मौसम होने के कारण यह वायरस हवा और कीटों के जरिए तेजी से फैल रहा है। लंपी का इतिहास और बीते दो वर्षों की स्थिति ग्वालियर-चंबल अंचल में लंपी वायरस का पहला बड़ा हमला वर्ष 2022 के मध्य में देखा गया था, जब राजस्थान और गुजरात से सटे सीमावर्ती जिलों के रास्ते यह संक्रमण ग्वालियर पहुंचा था। साल 2022-23 में तीन हजार से अधिक मवेशी इसकी चपेट में आए थे और सैकड़ों गोवंश की मौत हुई थी। इसके बाद प्रशासन ने पशु मेलों, अंतरराज्यीय पशु परिवहन और खुले बाजारों पर प्रतिबंध लगा दिया था। recent visitors 18