दिग्विजय सिंह ने कही “मान की बात ” किया बड़ा ऐलान बोले…अब राज्यसभा जाने का मन नहीं

दिग्विजय सिंह ने कही “मान की बात ” किया बड़ा ऐलान बोले…अब राज्यसभा जाने का मन नहीं

Digvijay Singh said “Mann Ki Baat” and made a big announcement saying… now he does not feel like going to Rajya Sabha. भोपाल। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने पॉडकास्ट के जरिये अपने मन की बात बताई है। इस दौरान उन्होंने अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर बड़ा बयान दिया। 78 वर्षीय दिग्विजय सिंह ने स्पष्ट किया कि अब उनका फोकस चुनावी राजनीति से पीछे हटकर संगठन में नई पीढ़ी को आगे बढ़ाने पर रहेगा। उन्होंने कहा कि पिछला लोकसभा चुनाव उन्होंने परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए लड़ा था, पर अब यह समय नए नेतृत्व को मौके देने का है। बता दें सिंह पीएम मोदी से 3 वर्ष बड़े हैं। चर्चा है कि उन्होंने अपनी बढ़ती उम्र के मद्देनजर यह राजनैतिक फैसला लिया है। वे पीएम मोदी की तरह नहीं कि अपनी पार्टी की गाइलाइन को दरकिनार कर पद नहीं छोड़ रहे हैं। नेतृत्व को यह दी सलाह राज्यसभा उम्मीदवारी पर रायदिग्विजय सिंह ने राज्यसभा सीटों पर अपने विचार साझा किए। उनका मानना है कि किसी भी सांसद को लगातार दो बार राज्यसभा की सीट नहीं दी जानी चाहिए। इसके पीछे उनका तर्क है कि यह नई ऊर्जा और सक्रिय नेतृत्व के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि वे इस निर्णय से पूरी तरह संतुष्ट हैं और इसे पार्टी के लिए सकारात्मक बदलाव मानते हैं। लोकसभा चुनाव से इंकारमध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में पार्टी को हुई हार के बाद दिग्विजय सिंह ने साफ कर दिया कि वे आगामी लोकसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे। राजगढ़ के खिलचीपुर में बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि उनकी राज्यसभा सदस्यता अभी जारी है और उनका कार्यकाल दो साल से अधिक बचा है। इसलिए चुनाव लड़ना उनके लिए वर्तमान में विकल्प नहीं है। राजगढ़ से 2024 में चुनाव हारे दिग्विजय सिंह ने राजगढ़ लोकसभा सीट से 2024 में चुनाव लड़ा था, लेकिन भाजपा उम्मीदवार रोडमल नागर से करीब 1.45 लाख वोटों से हार गए थे। राजगढ़ लोकसभा क्षेत्र में उनका प्रभाव वाला राघौगढ़ इलाका आता है और उन्हें 2020 में राज्यसभा भेजा गया था। उन्होंने यह भी कहा कि आगामी चुनाव में उम्मीदवार तय करने का अधिकार कांग्रेस पार्टी का है। नया नेतृत्व समय की जरूरत दिग्विजय सिंह ने यह भी बताया कि उनके पास भविष्य के लिए एक योजना है, हालांकि उन्होंने इसका विवरण साझा नहीं किया। उनका मानना है कि पार्टी में नए विचार और सक्रिय नेतृत्व लाना ही वर्तमान समय की जरूरत है। recent visitors 95

मध्य प्रदेश में छात्रों के आत्महत्या करने के मामले में इंदौर पहले और भोपाल दूसरे नंबर पर

मध्य प्रदेश में छात्रों के आत्महत्या करने के मामले में इंदौर पहले और भोपाल दूसरे नंबर पर

Indore is at first place and Bhopal is at second place in the number of student suicides in Madhya Pradesh. भोपाल ! देशभर में स्वच्छता में पहले स्थान पर आने वाला इंदौर लोगों में बढ़ते तनाव को कम करने में काफी पीछे है। खासकर विद्यार्थियों में तनाव बढ़ता जा रहा है, जिसके कारण वह आत्महत्या कर रहे हैं। इंदौर के कोचिंग संस्थानों (Coaching institutes) में पढ़ने वाले 20 से अधिक विद्यार्थी हर वर्ष तनाव में आत्महत्या कर रहे हैं। सबसे अधिक तनाव नीट(NEET) और जेईई (JEE) की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों में है। आत्महत्या की दर ने सरकार की चिंता बढ़ाईविद्यार्थियों में बढ़ रही आत्महत्या की दर ने सरकार की भी चिंता बढ़ा दी है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) 2023 की रिपोर्ट बताती है कि 2023 में देशभर में 15 हजार से अधिक बच्चों ने आत्महत्या की है। 1668 मामलों के साथ मध्य प्रदेश देश में दूसरे नंबर (महाराष्ट्र के बाद) पर है। वहीं प्रदेश में भी इंदौर पहले और भोपाल जिला दूसरे स्थान पर है। एक्शन में सरकार, एसटीएफ का गठनमानसिक स्वास्थ्य में सुधार के लिए एसटीएफ का गठन सरकार ने बच्चों को आत्मघात से बचाने की जिम्मेदारी शिक्षकों-अफसरों को सौंपी है। उच्चशिक्षा विभाग ने अभिनव प्रयोग करते हुए स्टेट टास्क फोर्स (एसटीएफ) का गठन किया है। यह बल सभी विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और कोचिंग संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी उपायों की निगरानी और सुधार की रूपरेखा तय करेगा। शैक्षणिक संस्थानों में नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं। कॉलेजों में काउंसलिंग कार्यक्रम शुरू किया जा रहा है। एसटीएफ में स्कूल शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा, स्वास्थ्य, पुलिस, बाल सुरक्षा, सामाजिक न्याय तथा नगरीय प्रशासन विभागों के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया गया है। इंदौर में पांच हजार से अधिक कोचिंगइंदौर प्रदेश का कोचिंग हब है। यहां पांच हजार से अधिक कोचिंग संस्थान संचालित होते हैं। इसमें से 200 से अधिक नीट, जेईई और आईआईटी (IIT) की तैयारी की कोचिंग है। भंवरकुआं, गीताभवन, पलासिया, विजय नगर आदि क्षेत्रों में बड़ी संख्या में कोचिंग संस्थान हैं। यहीं सबसे अधिक विद्यार्थी रहते भी हैं। इंदौर में आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में विद्यार्थी पढ़ाई के लिए आते हैं। पढ़ाई का दबाव बना जानलेवाकेस 1ः फरवरी 2025 में भंवरकुआं थाना क्षेत्र में नीट की परीक्षा में चयन न होने से परेशान छात्रा ने फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली थी। छात्रा का नाम गारगी सुमन (23) निवासी श्रीराम नगर पालदा था। गारगी कई वर्षों से नीट की तैयारी कर रही थी। दो बार कम अंक आने के कारण वह सफल नहीं हो सकी। इसके बाद उसने बैंक की परीक्षा की तैयारी की, लेकिन इसमें भी वह सफल नहीं हो सकी। केस 2ः वर्ष 2024 में भंवरकुआं क्षेत्र में एक छात्र ने नोट लिखा कि मैं जीवन में सफल नहीं हो पाया और आत्महत्या कर ली। छात्र नीट की तैयारी कर रहा था। मूलरूप से शिवनी जिले का रहने वाला था। केस 3ः फरवरी 2024 में 20 वर्षीय आर्यन तिवारी ने फांसी लगा ली थी। वह मूलरूप से हुजूर (रीवा) का रहने वाला था। इंदौर रहकर वह नीट की तैयारी कर रहा था। केस 4ः मई 2025 में नर्सिंग की छात्रा आशा कानूनगो (25) ने आत्महत्या कर ली। वह मूलरूप से सिवनी की रहने वाली थी। उसकी दीवार पर कई नोट चिपके हुए थे। उनमें लिखा था कि वह सरकारी नर्स नहीं बन सकती और डिप्रेशन में है।केस 5ः मई 2025 में संयोगितागंज थाना क्षेत्र में नर्स यास्मित्रा ने आत्महत्या की। वह निजी मेडिकल कॉलेज में आगे की पढ़ाई कर रही थी। आशंका जताई गई थी कि पढ़ाई के दबाव के चलते यह कदम उठाया है। विशेषज्ञ ने बताया क्या करें माता-पितामनोचिकित्सक डॉ. राहुल माथुर ने बताया कि अब बच्चों में तनाव सहने की क्षमता कम हो गई है। पढ़ाई का तनाव इतना अधिक ले लेते हैं कि आत्महत्या जैसे कदम उठाते हैं। माता-पिता को ध्यान रखना चाहिए कि वह बच्चों से उम्मीद रखने के बजाय उनके सहायक की भूमिका निभाएं। उनसे खुलकर बात करें। यदि बच्चा कई दिनों से चुपचाप है, अकेला रहने लगा है, रात में जल्दी नहीं सो रहा है, तो हमें इन लक्षणों को पहचानकर विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए। बच्चों को यह लगता है कि परीक्षा में फेल हो गया तो क्या होगा। उन्हें यह समझना होगा कि जो व्यक्ति परीक्षा में सफल नहीं हो पाते हैं, वह भी आगे बढ़ते हैं। विद्यार्थियों में इन लक्षणों को पहचानें recent visitors 97

जिन सरपंचों ने 20 फीसदी कमीशन जमा किया, उन्हें भी नहीं मिल रहा काम : दिग्विजय सिंह

जिन सरपंचों ने 20 फीसदी कमीशन जमा किया, उन्हें भी नहीं मिल रहा काम : दिग्विजय सिंह

Even those sarpanches who deposited 20% commission are not getting work: Digvijay Singh भोपाल। प्रदेश स्तरीय पंचायत कार्यशाला को लेकर राज्यसभा सांसद एवं पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा है कि भाजपा को 22 साल बाद पंचायत प्रतिनिधियों की याद आई है। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों के अधिकारों के मुद्दे पर मुख्यमंत्री मोहन यादव और पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रह्लाद पटेल को खुली बहस की चुनौती दी है। दिग्विजय सिंह ने कहा कि भाजपा को 22 साल बाद पंचायत प्रतिनिधियों को अधिकार देने की याद आई है। हमने सोचा था कि वे पंचायत प्रतिनिधियों को ऐसें अधिकार देंगे, जिससे अधिकारी उनके नियंत्रण में आ सकें। लेकिन केवल एक ही घोषणा हुई है कि जिला पंचायतों और जनपद पंचायत के उपाध्यक्ष जो शिक्षा समिति का अध्यक्ष होता है, उनको विद्यालयों के निरीक्षण का अधिकार दिया है। उन्हें सिर्फ जांच करने का अधिकार देने की बात तो कही गई है, लेकिन निरीक्षण पर कार्रवाई का अधिकार अधिकारी-कर्मचारी के पास ही रहेगा। मंत्री पटेल के कार्यकाल में चल रहा कमीशन का खेल सिंह ने कहा कि मुझे सीएम डॉ मोहन यादव के मुकाबले पंचायत मंत्री प्रह्लाद पटेल से ज्यादा उम्मीद थी। क्योंकि वे ग्रामीण परिवेश के हैं। पंचायत का जितना अनुभव प्रह्लाद पटेल को होगा, उतना सीएम डॉ मोहन यादव को नहीं होगा। लेकिन मुझे इस बात का दुख है कि उनके कार्यकाल में भी खुलेआम प्रदेश स्तर पर कमीशनखोरी हो रही है।जो पैसा सीधा पंचायत के पास जाना चाहिए वो नहीं जा रहा है। दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाते हुए कहा कि इससे पहले पंचायत मंत्री थे महेंद्र सिसोदिया। उन्होंने सिस्टम बना रखा था कि “20 फीसदी दो और मंजूरी लो” वो आज भी कायम है। मेरे चुनाव क्षेत्र राजगढ़ के कई सरपंचों ने बताया कि उन्होंने एडवांस बुकिंग भी कर दी 20 फीसदी कमीशन जमा भी कर दिया, लेकिन पैसा उन्हें नहीं मिला। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव और मंत्री प्रह्लाद पटेल से कहा कि कम से कम जिसने कमीशन दे दिया है, उनका तो काम कर दीजिए। इन अधिकारों की मांग दिग्विजय सिंह ने कहा कि इससे ज्यादा इस सरकार से उम्मीद भी नहीं है। उन्होंने मुख्यमंत्री dr यादव और मंत्री पटेल से पूछा है कि कि क्या वे पंचायत प्रतिनिधियों को शिक्षक नियुक्ति का अधिकार देंगे? आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की नियुक्ति का अधिकार देंगे? सीएम इतना ही करें कि तृतीय श्रेणी में जो पंचायत विभाग में काम करते हैं या ग्रामीण विकास में काम करते हैं उनकी नियुक्ति का अधिकार देंगे? उन्होंने पूछा कि जिस धारा 40 का धौंस दिखाकर सरपंचों को पृथक करते हैं क्या उसे वापस लेंगे? बेकार की बात करते हैं सीएम यादव पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कहा कि मोहन यादव बेकार की बात करते हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव और प्रह्लाद पटेल को बहस करने की खुली चुनौती दी है। साथ ही कहा कि भले वे भाजपा के ही पंचायत प्रतिनिधियों को साथ लेकर आएं। उन्होंने कहा कि पंचायत प्रतिनिधियों की कोई सुनवाई नहीं हो रही है। जिला परिषद अध्यक्ष को गाड़ी और राज्यमंत्री का दर्जा है, लेकिन राजगढ़ में जिला परिषद अध्यक्ष को एक कॉन्स्टेबल मंच पर चढ़ने से रोक देता है। ये आपका पंचायत प्रतिनिधियों के प्रति सम्मान है? recent visitors 73

वेंटिलेटर पर मंडला जिला अस्पताल की व्यवस्थायें, जिम्मेदार बेफिक्र

Mandla District Hospital’s arrangements on ventilator, responsible unconcerned मंडला। जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था अपनी बदहाली के कारण एक बार फिर सवालों के घेरे में है। धरती के भगवान कहे जाने वाले डॉक्टरों की मनमानी और अव्यवस्थाओं के चलते जिला अस्पताल अब इलाज का केंद्र नहीं, बल्कि मरीजों के लिए परेशानी का सबब बन गया है। सबसे गंभीर आरोप सिविल सर्जन की भूमिका पर लग रहे हैं, जिनकी निष्क्रियता के चलते पूरी व्यवस्था चरमरा गई है।जानकारी अनुसार जिला अस्पताल में ओपीडी का समय सुबह 9:30 बजे निर्धारित है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि यहां पदस्थ अधिकांश डॉक्टर 10:30 या 11 बजे के बाद ही अपनी कुर्सियों पर नजर आते हैं। वहीं दोपहर 2 बजते ही केबिन सख्ती से बंद कर दिए जाते हैं। दूर-दराज के गांवों से सुबह 7 बजे आकर कतार में लगे मरीजों को अक्सर बिना इलाज के बैरंग लौटना पड़ता है। बुजुर्गों के लिए न लाइन, न सम्मान, स्वच्छता अभियान दिखा रहा ठेंगा निजी अस्पतालों में जहाँ वरिष्ठ नागरिकों को प्राथमिकता मिलती है, वहीं जिला अस्पताल में बुजुर्ग और दिव्यांग घंटों लाइन में धक्के खाने को मजबूर हैं। चलने में असमर्थ मरीजों के लिए व्हीलचेयर तो हैं, लेकिन वे शो-पीस बनी हुई हैं। बताया गया कि वार्डों में गंदगी और शौचालयों की बदबू ने स्वच्छ भारत अभियान की पोल खोलकर रख दी है। मरीजों को स्वस्थ माहौल देने के बजाय गंदगी के बीच रहने को मजबूर किया जा रहा है। पार्किंग और ब्लड बैंक में वसूली का खेल : अस्पताल परिसर में पार्किंग के नाम पर अवैध वसूली और अभद्रता की शिकायतें आम हो गई हैं। वहीं जीवन रक्षक माने जाने वाले ब्लड बैंक में भी नियमों के बजाय जान-पहचान और मनमर्जी हावी है। आरोप है कि बिना सिफारिश के खून उपलब्ध नहीं होता, जो मानवता को शर्मसार करने जैसा है। सामाजिक संगठनों और जागरूक नागरिकों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। लोगों का सवाल है कि वर्षों से एक ही पद पर जमे जिम्मेदार पर कार्रवाई क्यों नहीं होती? क्या राजनीतिक संरक्षण जनता की सेहत से बड़ा है? प्रमुख मांगें: सामाजिक संगठनों और जागरूक नागरिकों ने मांग की है कि सिविल सर्जन को तत्काल प्रभाव से हटाया जाए।बायोमेट्रिक हाजिरी से डॉक्टरों की उपस्थिति सुनिश्चित हो। अस्पताल की नियमित सफाई और बुजुर्गों के लिए अलग काउंटर की व्यवस्था हो। recent visitors 75

बालाघाट में एसआईआर के दबाव में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता का मौत

Anganwadi worker dies under pressure from SIR in Balaghat बालाघाट। बालाघाट विधानसभा क्षेत्र-111 के अंतर्गत मतदान केन्द्र क्रमांक -10 बोट्टा की बीएलओ आंगनबाड़ी कार्यकर्ता 50 वर्षीय अनिता पति नरेश नागेश्वर का उपचार के दौरान निधन हो गया। जिससे हड़कंप की स्थिति है। वहीं मृतिका के पति ने एसआईआर कार्य का लोड होने से तनाव में आने के कारण बीमार होने का आरोप लगाया है। अनीता नागेश्वर का रात्रि में उपचार के दौरान आकस्मिक निधन हो गया। विगत 13 नवम्बर से उनका गोंदिया में उपचार चल रहा था और गंभीर होने पर रात्रि में नागपुर ले जाने के दौरान रस्ते में मौत गई। बीएलओ अनीता नागेश्वर के निधन पर विधायक अनुभा मुंजारे ने शोक व्यक्त किया है। विधायक अनुभा मुंजारे ने कहा कि यह दुखद खबर है कि हमारे क्षेत्र की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और बीएलओ का कार्य कर रही अनीता नागेश्वर का निधन हो गया। जैसी उन्हें जानकारी परिजनों से मिली है कि उनपर एसआईआर कार्य का लोड था और इसी के चलते वह बीमार हो गई। जिससे उपचार के लिए उन्होंने बालाघाट और गोंदिया में उपचार कराया। नागपुर ले जाने के दौरान निधन हो गया। उन्होंने बताया कि एसआईआर कार्य कराने के नाम पर काम का बोझ या दबाव नहीं बनाना चाहिए। कर्मचारियों के साथ तनाव के कारण ऐसी घटना सामने आना चिंतनीय है। प्रशासन को एसआईआर कार्य करना है तो कर्मचारियों को विश्वास में ले और सद्भावना के तहत कार्य कराए। दबाव बनाकर कार्य नहीं कराया जाना चाहिए। recent visitors 79

रीवा मेडिकल कालेज के जर्जर आवासीय भवन को बगैर टेंडर गिराने का खेल

रीवा मेडिकल कालेज के जर्जर आवासीय भवन को बगैर टेंडर गिराने का खेल

The game of demolishing the dilapidated residential building of Rewa Medical College without tender रीवा। श्यामशाह मेडिकल कालेज के आवासीय जर्जर भवन को गिराने का खेल चल रहा है। बगैर टेंडर एवं मूल्यांकन कराए चहेते ठेकेदार को भवन गिराने का काम दे दिया गया। इसके पूर्व गांधी मेमोरियल अस्पताल के पीछे जर्जर वार्ड और नर्सिंग कालेज के जर्जर भवन को गिराया गया था जिसका टेंडर नही कराया गया था। डिप्टी सीएम के ड्रीम प्रोजेक्ट की आड़ में चहेते ठेकेदार को अधिकारी अनुचित लाभ पहुंचाने के लिये नियमो को ताक में रखकर काम कर रहे है। जल्द ही इस मामले की शिकायत ईओडब्ल्यू में की जाएगी। दरअसल टेंडर और मूल्यांकन न कराकर शासन के राजस्व का नुकसान किया गया है। विभागीय सूत्रो की माने तो इस्तयाक नामक ठेकेदार को मौखिक आदेश देकर भवन गिराया जा रहा है। इसमें डीजीएम की अहम भूमिका है। सवाल यह उठता है कि अगर इतनी जल्दी थी तो टेंडर की प्रक्रिया क्यो नही की गई? केवल प्रोजेक्ट के आड़ में चेहेते ठेकेदार को अधिकारी उपकृत कर रहे है। लगातार जर्जर भवन गिराए जाने का खेल जारी है। शासन को भले ही राजस्व के रूप में कुछ न मिले लेकिन बेश कीमती पत्थर-पटिया आदि से ठेकेदार को पैसा जरूर मिल रहा है। चहेते दो ठेकेदारो पर अधिकारी मेहरबान शहर के अंदर कही भी सरकारी जर्जर भवन अगर गिराया जाना है तो उसका काम केवल दो ही चर्चित ठेकेदारो को मिलता है। राजनीतिक संरक्षण प्राप्त इन ठेकेदारो पर अधिकारी भी मेहरबान है। मेडिकल कालेज के जर्जर आवासीय भवन गिराने का काम चल रहा है। बगैर टेंडर प्रक्रिया के चहेते ठेकेदार को काम दे दिया गया जो लगातार भवन को गिरा रहे है। विभागीय सूत्रो ने बताया कि इस्तयाक और इकबाल नामक दो ठेकेदारो को काम दिया गया है। सवाल यह उठता है कि ऐसी आखिर क्या जल्दी थी कि बगैर टेंडर और मूल्यांकन कराए भवन गिराने का काम दे दिया गया। इन ठेकेदारो के अलावा भी कई लोग है जो भवन गिराने का काम करते है।शासन के राजस्व का नुकसानमेडिकल कालेज परिसर में स्थित जर्जर आवासीय भवन एवं नर्सिंग कालेज का भवन गिराने का काम किया गया। जिसका कोई टेंडर नही कराया गया है। म.प्र भवन विकास निगम के डीजीएम अजय ठाकुर द्वारा चहेते ठेकेदार को भवन गिराने की अनुमति दे दी गई। टेंडर तो दूर कोई मूल्यांकन भी नही कराया गया और न ही राशि जमा कराई गई। ऐसी क्या जल्दी थी कि बगैर मूल्यांकन के आनन-फानन भवन को गिराया गया. कही न कही यह आर्थिक अनियमितता है और शासन के राजस्व का नुकसान हुआ है। प्रोजेक्ट के कारण गिराए गए भवन: डीजीएमम.प्र भवन विकास निगम के डिप्टी जीएम अजय ठाकुर ने बताया कि मेडिकल कालेज परिसर में वही भवन बगैर टेंडर के गिराए गए है जो प्रोजेक्ट में बाधा बन रहे थे और टेंडर प्रक्रिया में समय लगता। ऐसे में प्रोजेक्ट को गति देने के लिये मूल्यांकन कराकर जर्जर भवन गिराया गया है और जो शेष आवासीय भवन है उनका टेंडर कराने की प्रक्रिया चल रही है, टेंडर होने के बाद ही गिराया जायेगा। recent visitors 69

जेएन कंसोटिया का 21 साल बाद इस्तीफा, आईएएस संतोष वर्मा के हाथ में अजाक्स की कमान 

JN Kansotia resigns after 21 years, IAS Santosh Verma takes charge of Ajax  भोपाल। मप्र अनुसूचित जाति जनजाति अधिकारी कर्मचारी संघ (अजाक्स) की प्रांतीय साधारण सभा में आईएएस संतोष वर्मा आम सहमति से नए प्रान्तध्यक्ष चुने लिए गए हैं। रविवार को राजधानी के तुलसी नगर सेकण्ड स्टॉप डॉ. आम्बेडकर जयंती मैदान में आम सभा सम्पन्न हुई। इसी सभा में 21 साल से अजाक्स की अपने हाथ में कमान रखने वाले जेएन कंसोटिया ने निजी कारणों का हवाला देते हुए प्रान्ताध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। उन्हें संरक्षक और सेवानिवृत्त प्रकोष्ठ का अध्यक्ष बनाकर जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया गया। उनके अलावा अन्य नियुक्तियां भी की गई। बता दें उनका कार्यकाल सितम्बर 2026 तक है, लेकिन इस्तीफा दें दिया। इस्तीफे की जानकारी जैसे ही महासचिव इंजी एसएल सूर्यवंशी ने सभा में रखी तो सभी ने एक स्वर में अस्वीकार कर दिया। प्रान्ताध्यक्ष कंसोटिया ने स्वयं मंच से इसे स्वीकार करने का आग्रह किया। जिसके बाद नए अध्यक्ष पर विचार मंथन हुआ। संघ के महासचिव राजवीर अग्निहोत्री ने नए प्रान्ताध्यक्ष के नाम पर  कार्यवाहक अध्यक्ष आईएएस संतोष वर्मा के नाम का प्रस्ताव रखा। जिसको सभी ने ध्वनि मत से अपना समर्थन दिया।  कार्यक्रम का प्रारंभ संविधान निर्माता बाबा साहब और धरती आबा बिरसा मुण्डा के चित्र पर माल्यार्पण के साथ शुरू हुआ और नए प्रान्ताध्यक्ष के स्वागत व नारेबाजी के साथ ही आयोजन का समापन हुआ। आयोजन में राज्यसभा सदस्य बालयोगी उमेशनाथ महाराज का पुष्पगुच्छ देकर सम्मान किया। साधारण सभा का संचालन घनश्याम भकोरिया एवं प्रवक्ता विजय शंकर श्रवण ने किया। जबकि आभार भोपाल जिलाध्यक्ष विनोद बट्टी ने व्यक्त किया। कंसोटिया ने समाज के साथ हो रहे भेदभाव पर जताई चिंता  जेएन कांसोटिया ने अजाक्स संगठन की ताकत का उल्लेख किया गया। समाज के शासन और सामाजिक स्तर पर हो रहे भेदभाव पर विस्तार से प्रकाश डाला और नए नेतृत्व को इन मुद्दों को प्रमुखता से उचित मंच पर रखने का आव्हान किया। उन्होंने सिविल जजों की भर्ती में अजा-जजा का चयन ना होना, बैकलॉग की पूर्ती न होने पर चिन्ता व्यक्त करते हुए अजाक्स को और अधिक प्रभावी रुप से कदम उठाने पर बल दिया।   कंसोटिया ने कहा कि समाज ही अजाक्स है और अजाक्स ही समाज है। यही संघठन की ताकत है, तभी प्रदेश के अधिकारी कर्मचारी डिमोशन से बच गए। यह बहुत बड़ा चेलेंज है कि हमको सरकारी सिस्टम से बाहर किया जा रहा है। उन्होंने सिविल जज भर्ती पर भी सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि आज उद्योग धंधे में जीरो, सेवाक्षेत्र में जीरो, निर्णय प्रक्रिया, मीडिया में हमारी भागीदारी जीरो है। ग्वालियर में बाबा साहब के बारे में लोग गलत टिप्पणी कर रहे हैं, यह गलत है इसका विरोध करना है। ग्वालियर ओर दिल्ली में सीजेआई की घटना पर कोई कार्यवाही नहीं हुई, यह बड़ा प्रश्न है। उन्होंने कहा कि घर -घर अम्बेडकर, हर दिन अम्बेडकर अभियान पर अजाक्स तेजी से काम कर रहा है। सामाजिक भेदभाव बढ़ता जा रहा है। यह भी हमारे लिए बड़ा चैलेज है। सफाई कर्मियों के साथ भी बड़ा भेदभाव हो रहा है। जाति छुपाना बड़ी मानसिकता है, इसे दूर करना होगा। उन्होंने क्रिमिलेयर पर भी सवाल उठाया। साथ ही 20 आईएएस अफसरों के बेटे क्या बने, यह रिपोर्ट बताई। अंत में उन्होंने 21 साल से मिले सम्मान का भी जिक्र किया और आगे भी अजाक्स के लिए काम करने का वचन दिया। हमारा ज़ब कारवाँ बढ़ेगा तो हमें कोई रोक नहीं सकता: संतोष वर्मा नए प्रांताध्यक्ष आईएएस संतोष वर्मा ने कहा कि संघ के लिए  हमको समय देना होगा। अगर साल में एक दिन भी नहीं दिया तो हमारा अस्तित्व नहीं बचेगा। आईएएस कंसोटिया मेरे गुरु रहे हैं और आज हमें फिर उनके मार्गदर्शन में काम करने का मौका मिला है। अभी संघठन की स्तिथि ठीक नहीं है। 2016 में हमने ताकत दिखाई ओर हम माँ के लाल बन गए। क्या हमने हजारों सालो से पीड़ा नहीं झेली है। उन्होंने कहा कि यदि अब भी नहीं जागे तो आने वाली पीढ़ी नहीं बचेगी। उन्होंने सिविल जज परीक्षा पर भी सवाल उठाया। ज़ब हमारे बच्चे आईएएस, आईपीएस डिप्टी कलेक्टर, डीएसपी बन सकते हैं तो जज क्यों नहीं बन सकते है। हमारे भविष्य का बीज नष्ट किया जा रहा है। मैंने मंत्रालय में 8 महीने की सर्विस में देखा है कि किस तरह से हमारे वर्ग के सेवकों की सीआर बिगाड़ी जाती है। एक अफसर को एक छोटी सी गलती के लिए 12 साल तक परेशान किया गया। हमारी लड़ाई किसी धर्म से नहीं, बल्कि दोषी व्यवस्था से है। व्यक्ति को अपने के साथ समाज के लिए जीना चाहिए। प्रशासन में हमारे समाज की ज्यादा संख्या बढ़ाना होगी, तभी हमारे अधिकार सुरक्षित रहेंगे। उन्होंने कहा कि हमारा ज़ब कारवाँ बढ़ेगा तो हमें कोई रोक नहीं सकता है। प्रांतीय महासचिव इंजी सूर्यवंशी ने संघ के एजेंडे पर की चर्चा  साधारण सभा का प्रारंभ प्रांतीय महासचिव इंजी. एसएल सूर्यवंशी ने संघ के एजेण्डा बिन्दुओं को बताते हुए अजाक्स की 30 वर्षीय संघर्षमयी यात्रा का उल्लेख किया। उन्होंने आरक्षण अधिनियम 199, पदोन्नति नियम 2002 छात्रवृत्ति मंहगाई सूचकांक जोडने, निजी  इंजीनियरिंग तथा मेडिकल कॉलेज फीस का शासन से वहन कर सुप्रीम कोर्ट से बैक वर्ड नेस के डाटा की अनिवार्यता समाप्त करने, शासकीय खरीदी में 30% खरीदी आरक्षित वर्ग से करने, सिविल जज परीक्षा में आरक्षित वर्ग के मेरिट होल्डर को अनारक्षित कोटे में शामिल करने का निर्णय उच्च न्यायालय से हटाने सहित अजाक्स भवन, विभिन्न जिलों जैसे सिंगरौली, रीवा, सतना, ग्वालियर अनुपपुर इत्यादि में निःशुल्क कोचिंग क्लासेस की शुरुआत तथा उच्च शिक्षा के लिए भेजे जाने वाले आरक्षित वर्ग की सीट में बढ़ोतरी करने जैसी उल्लेखनीय सफलताओं का जिक्र किया। इसके अलावा सूर्यवंशी ने आउट सोर्स, मंदिरों में पुजारियों की नियुक्ति, पदोन्नति और निजी क्षेत्र आदि में आरक्षण देने जैसे विषयों पर न्यायालय मे अजाक्स द्वारा दायर याचिकाओं के बारे मे बताया। उन्होंने एकजुटता बनाये रखने की भी बात कही। सूर्यवंशी ने बैकलॉग पूर्ति करने वरीष्ठता के आधार पर उच्च पदों का प्रभार देने छात्रवृत्ति समय पर देने छात्रावासों में छात्रा-छात्राओं के लिए जिला स्तर पर 5000 सीट तथा संभाग स्तर पर 10000 वृद्धि करने की मांग रखी। प्रदेश भर की नगर पालिकाओं नगर निगमों तथा पंचायतों सहित अन्य क्षेत्रो मे कार्यरत सफाई कामगारों को … Read more