सरकार को भाजपा के चुनावी संकल्प पत्र 2023 के पृष्ठ 81 को दिलाया याद

Reminded the government of page 81 of the BJP’s election manifesto 2023 भोपाल। राजधानी के गांधी भवन में मध्य प्रदेश के आउटसोर्स कर्मचारियों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में भोपाल दक्षिण-पश्चिम क्षेत्र के विधायक भगवानदास सबनानी भी शामिल हुए।  विधायक सबनानी ने कर्मचारियों की मेहनत की सराहना करते हुए कहा कि सरकारी तंत्र को सुचारू रूप से चलाने में आउटसोर्स कर्मचारियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।  उन्होंने विश्वास दिलाया कि वे उनकी जायज मांगों को सरकार के समक्ष उचित पटल पर रखेंगे। विधायक ने कर्मचारियों को आश्वस्त किया कि उनकी समस्याओं का सहानुभूतिपूर्वक विचार कर ठोस समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने प्रतिनिधि मंडल को मुख्यमंत्री से मिलाने की भी बात कही। इस दौरान आउटसोर्स कर्मचारी प्रतिनिधि मंडल ने विधायक सबनानी को मांग पत्र भी सौंपा और उस पर विचार करने का आग्रह किया।   बैठक में कर्मचारी नेताओं ने कई बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा हुई और कर्मचारियों में एकता बनाए रखने की बात पर जोर दिया गया। बैठक में वरिष्ठ कर्मचारी नेता अनिल वाजपेयी ने कहा कि यह वर्ग वर्षों से सरकार की दोहरी नीति से आर्थिक नुकसान उठा रहा है।  नौकरी की सुरक्षा की मांग  बैठक में प्रदेश के विभिन्न विभागों में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों ने अपनी मांगों और कार्यस्थल पर आ रही समस्याओं को विस्तार से साझा किया। कर्मचारियों ने संकल्प पत्र 2023 के पृष्ठ क्र 81 अनुसार मुख्य रूप से वेतन वृद्धि, नौकरी की सुरक्षा और शोषण मुक्त कार्य वातावरण की मांग की। बैठक में आउटसोर्स कर्मचारी संगठन के पदाधिकारी, सैकड़ों की संख्या में कर्मचारी और स्थानीय जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। recent visitors 94

कविता के केंद्र में लोक कल्याण का होना आवश्यक: कुमार सुरेश 

Public welfare must be at the centre of poetry: Kumar Suresh  भोपाल। कविता स्वानताय सुखाय भले लिखी जाए, लेकिन जब उसे लोक को अर्पित कर दिया तो फिर वह कवि की नहीं लोक की हो जाती है। कविता के केंद्र में लोक कल्याण का भाव होना आवश्यक है। यह उदगार वरिष्ठ साहित्यकार कुमार सुरेश ने साहित्यकार संदीप नेमा ‘दीप ‘ के प्रकाशित कविता संग्रह ‘मनसुख ‘ के लोकार्पण के दौरान कही।  दुष्यंत कुमार पाण्डुलिपि संग्रहालय में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि शिक्षाविद एवं उपायुक्त केंद्रीय विद्यालय संगठन भोपाल शाहिदा परवीन ने कहा कि कविता केवल शब्दों का संयोजन नहीं, बल्कि भावों की अभिव्यक्ति है। प्रस्तुत संग्रह में जीवन के विविध अनुभवों की झलक कविता के रूप में दिखाई देती है।  इस आयोजन में रचनाकार संदीप नेमा ने अपनी सृजन यात्रा के अनुभव साझा करते हुए संग्रह से कुछ चुनिंदा कविताओं का वाचन किया, जिन्हें उपस्थित श्रोताओं द्वारा खूब सराहा गया। इस पुस्तक पर केंद्रित विमर्श में भाग लेते हुए वरिष्ठ साहित्यकार दीपक पगारे ने कहा कि इन कविताओं में आशावाद है। सहज सरल शिल्प में बुनी गई भाव प्रधान कविताएं हैं।  समीक्षक वरिष्ठ नवगीतकार मनोज जैन मधुर ने कहा कि यह कविताएं कवि के अनुभव और अंतर्मन से उपजी कविताओं का संग्रह है। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ साहित्यकार घनश्याम मैथिल अमृत और स्वागत उद्बोधन रजनीश सक्सेना एवं आभार शिवांश नेमा ने व्यक्त किया। recent visitors 50

अग्रवाल परिचय सम्मेलन: जीवनसाथी को लेकर युवक-युवतियों ने बताई अपनी पसंद

Agarwal Parichay Sammelan: Young men and women expressed their choice regarding life partner भोपाल। अग्रवाल युवक-युवती परिचय सम्मेलन पॉलिटेक्निक चौराहा स्थित मानस भवन में आयोजित किया गया। इसमें मध्यप्रदेश के अलावा विभिन्न राज्यों से करीब 600 युवक-युवतियां और उनके परिजन शामिल हुए। युवक-युवतियों ने बेझिझक जीवन साथी को लेकर अपनी पसंद बताई।  अग्रवाल समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेश ऐरन ने कहा कि हमारा उद्देश्य समाज के विवाह योग्य युवक-युवतियों को परिचय के लिए मंच और माध्यम उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि 1997 से परिचय सम्मेलन की शुरूआत की गई थी। तब से 14 राज्यों में इसका आयोजन कर चुके हैं। हर महीने ऑनलाइन और ऑफलाइन के माध्यम से परिचय पत्रिका और सम्मेलन आयोजित किए जा रहे हैं। राजेश ने कहा कि यह 136वां परिचय सम्मेलन है और करीब 10 हजार युवक-युवतियां इसके माध्यम से जीवनसाथी की तलाश कर चुके हैं।  आयोजन में मुख्य रूप से राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अखिल गर्ग, राष्ट्रीय महिला अध्यक्ष नीलम शाह, महामंत्री बबीता अग्रवाल, संभागीय अध्यक्ष भोपाल तृप्ति अग्रवाल, जिला अध्यक्ष भोपाल रिचा गोयल, उपाध्यक्ष भोपाल श्वेता अग्रवाल और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मंजू गुप्ता समेत बड़ी संख्या में समाजबंधु शामिल हुए। recent visitors 53

हरियाली की ताकत बनेंगे पतझड़ के सूखे पत्ते, गोल्डन कम्पोस्ट से फिर से हरी-भरी होगी धरती

Autumn’s dry leaves will become a source of greenery, golden compost will restore the earth’s greenery. भोपाल। राजधानी में अब सूखे पत्तों को जलाने की बजाय उन्हें उपयोगी बनाने का इनोवेशन किया जा रहा है। स्वच्छता किटी ब्रांड एम्बेसडर ग्रुप ने गोल्डन लीफ कम्पोस्ट बनाने का अभियान शुरू किया है। इसके तहत कालोनियों, पार्कों, स्कूलों और बड़े परिसरों में पतझड़ के दौरान गिरने वाले सूखे पत्तों से जैविक खाद तैयार की जा रही है। स्कूल, कालोनियों और अन्य संस्थानों के लोगों को प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। पहल का उद्देश्य पत्तियों को फेंकने या जलाने की बजाय उन्हें खाद में बदलकर हरियाली और स्वच्छता को बढ़ावा देना है। पत्तियों को कचरा नहीं, गोल्डन लीफ माने: स्वच्छता किटी ब्रांड एम्बेसडर ग्रुप की सदस्य रुचिका सचदेवा का कहना है कि शहर की हर सड़क, पार्क और गार्डन में सूखी पत्तियों के ढेर नजर आते हैं। लोग इन्हें कचरा समझकर फेंक देते हैं या जला देते हैं। उनके घर में भी कई पेड़ हैं और हर साल बड़ी मात्रा में पत्तियां गिरती हैं। पहले इन पत्तियों को भी कचरे में डाल दिया जाता था। जब इस विषय पर काम शुरू किया गया तो पता चला कि ये पत्तियां वास्तव में गोल्डन लीफ हैं। यदि इन्हें सही तरीके से उपयोग में लाया जाए तो यह बेहतरीन जैविक खाद में बदल सकती हैं। शहर में लगाए जाएंगे 100 लीफ कम्पोस्ट यूनिट: रुचिका का कहना है कि कॉलोनियों, स्कूलों, पार्कों और बड़े परिसरों में ऐसे स्थान चिह्नित किए जा रहे हैं, जहां बड़े पेड़ हैं और पतझड़ के दौरान बड़ी मात्रा में पत्तियां गिरती हैं। लगभग 100 स्थानों पर लीफ कम्पोस्टिंग यूनिट लगाने का लक्ष्य रखा गया है। हर यूनिट से कम से कम 100 किलो जैविक खाद तैयार होगी। इस तरह लगभग 10 टन खाद तैयार करने की योजना है।   तीन से चार महीने में बनती है जैविक खाद: रुचिका ने बताया, लीफ कम्पोस्ट बनाने की प्रक्रिया बेहद सरल है। जालीदार संरचना वाली यूनिट बनाई जाती है ताकि हवा का आवागमन बना रहे। सूखी पत्तियों को इसमें इकट्ठा कर हल्की नमी बनाए रखने समय-समय पर पानी का छिड़काव किया जाता है। तीन से चार महीने के भीतर ये पत्तियां सड़कर बेहतरीन जैविक खाद में बदल जाती हैं। इस खाद का उपयोग बागवानी और पौधारोपण में किया जा सकता है। पत्तियां जलाना पर्यावरण के लिए नुकसानदायक: सदस्यों का कहना है कि पत्तियां जलाना पर्यावरण के लिए नुकसानदायक है। कई बार पत्तियों के ढेर में प्लास्टिक और अन्य कचरा भी मिल जाता है। जब इन्हें जलाया जाता है तो जहरीला धुआं फैलता है और पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है। पत्तियों के साथ कई उपयोगी सूक्ष्म जीव भी नष्ट हो जाते हैं जो प्राकृतिक रूप से इन्हें खाद में बदलने में मदद करते हैं। इसलिए पत्तियों को जलाने की बजाय उन्हें खाद में बदलना ज्यादा बेहतर विकल्प माना जा रहा है। स्वच्छता किटी ग्रुप कर रहा कई सामाजिक कार्य: स्वच्छता किटी ग्रुप में करीब 95 सदस्य हैं और हर सदस्य हर महीने 100 रुपए का योगदान देता है। इसी सहयोग से ग्रुप शहर में स्वच्छता और पर्यावरण से जुड़े कई छोटे-छोटे अभियान चलाता है। ग्रुप के सदस्य पार्कों की सफाई, तालाबों के आसपास कचरा हटाने, गार्बेज पाइंट्स को साफ और सुंदर बनाने जैसे कार्य भी करते हैं। लोगों को कचरे को संसाधन में बदलने और घर पर ही जैविक खाद बनाने की ट्रेनिंग भी दी जाती है। recent visitors 58

परिचय सम्मेलन: युवतियां- नशामुक्त जीवनसाथी और युवक-पारिवारिक जिम्मेदारियां उठाने में सक्षम को प्राथमिकता

Introduction Conference: Preference given to young women – drug-free life partners and young men – capable of shouldering family responsibilities भोपाल। मप्र माझी, कीर आदिवासी एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं उत्थान समिति के तत्वावधान में रेलवे स्टेशन प्लेट फार्म एक की ओर स्थित रेलवे इंस्टीटयूट परिसर में रविवार को युवक-युवती परिचय सम्मेलन आयोजित किया गया। इसमें करीब 200 से अधिक युवक-युवतियों ने अपना परिचय दिया और जीवनसाथी की तलाश के लिए प्राथकिताएं बताईं। किसी ने नशामुक्त तो किसी ने नौकरी पेशा या बिजनेस करने वाले जीवनसाथी को प्राथमिकता दी। वहीं युवकों ने पारिवारिक जिम्मेदारियों का निर्वहन और शिक्षित जीवनसाथी की आवश्यकता पर जोर दिया।  समिति के अध्यक्ष मुकेश बाथम ने बताया कि समाज में योग्य युवक-युवतियां हैं। कई बार उन्हें उनके अनुकूल योग्य जीवनसाथी नहीं मिल पाता है, इसकी पूर्ति परिचय सम्मेलन करते हैं। इसी बात को ध्यान में रखते हुए यह परिचय सम्मेलन आयोजित किया गया। जिसमें प्रदेश भर से युवक-युवतियों, उनके परिजन, समाजसेवी व अधिकारी वर्ग शामिल हुए। सभी ने युवक-युवतियों का हौंसला बढ़ाया और आगे बढ़ने के लिए टिप्स बताए।  हॉस्टल बनाने 25 लाख देने का ऐलान:  सेवानिवृत्त आईएएस बीके बाथम ने कहा कि बच्चों को अपना भविष्य चुनने के लिए माता-पिता सहयोग करें। बाथम ने बच्चों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए हॉस्टल बनाने 25 लाख रुपए देने का ऐलान किया। इस मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में नरेला विस के मंत्री, निगम परिषद अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी के अलावा समिति के प्रदेश उपाध्यक्ष मनोज बाथम, महामंत्री बालकिशन बाथम, महासचिव आशुतोष बाथम, सचिव राहुल रायकवार, मुख्य कोषाध्यक्ष राधेश्याम रायकवार, कोषाध्यक्ष भागचंद बाथम, महामंत्री मुन्ना राकेश बाथम, सुरेश आचार्य, महिला प्रकोष्ठ अध्यक्ष ममता बाथम समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। recent visitors 97

जन औषधि केंद्रों की सुविधाओं का स्थानीय लोगों को दिलाएं लाभ : कुमरे

Provide benefits of Jan Aushadhi Centres to local people: Kumre  शहडोल। इंडियन रेडक्रॉस सोसायटी मध्यप्रदेश राज्य शाखा के चैयरमैन डॉ. श्याम सिंह कुमरे ने जिला रेडक्रॉस सोसायटी शहडोल के द्वारा किए जा रहे कार्यों की प्रगति की समीक्षा की।    चैयरमैन रेडक्रॉस सोसायटी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिला रेडक्रॉस सोसायटी द्वारा संचालित शहडोल जिले में प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि क्रेंद्रो के माध्यम से दी जाने वाली सुविधाओं का लाभ प्रत्येक जरूरतमंद मरीजों को दिलाना अनिवार्य करें। जिन विकासखंडों में जन औषधि केंद्र संचालित नहीं हुए है, वहां जल्द प्रारंभ कराएं। जन औषधि केंद्रो में दी जाने वाली सुविधाओं का लाभ दिलाने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार कराएं। जन औषधि केंद्रो में पर्याप्त मात्रा में दवाईयां उपलब्ध रहें, यह भी ध्यान रखें।   चैयरमैन ने कहा कि मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि जिला रेडक्रॉस सोसायटी के माध्यम से युवाओं, आपदा मित्रों एवं जनमानस को सीपीआर, सांप काटने पर बचाव, आग से बचाव, सड़क दुर्घटनाओं से बचाव जैसे अन्य आपदाओं से निपटने के लिए कैंप आयोजित कर समय-समय पर उन्हें प्रशिक्षण दें एवं जिला रेडक्रॉस सोसायटी में वॉलिंटियर एवं रक्तदाताओं को पंजीकृत करें।  उन्होंने कुपोषण की स्थिति की जानकारी लेते हुए कहा कि शहडोल जिले को कुपोषण मुक्त करने के लिए अधिकारी समाजसेवियों का भी सहयोग लें। अतिकुपोषित वाली आॅगनवाड़ीे केंद्रों को रेडक्रॉस सोसायटी को सौंपे तथा रेडक्रॉस सोसायटी के माध्यम से एनआरसी केंद्रों का संचालन भी कराएं।  श्री कुमरे ने शहडोल जिले में दर्ज कुपोषित, अतिकुपोषित एवं मध्यम कुपोषित बच्चों की स्थिति के संबंध में भी जानकारी ली। मेडिकल कॉलेज शहडोल में ब्लड बैंक एवं जन औषधि केंद्र को एक सप्ताह के भीतर प्रारंभ कराने के निर्देश दिए। रेडक्रॉस सोसायटी के माध्मय से स्वास्थ्य शिविर, नेत्र जांच शिविर,  बहुदिव्यांग प्रमाण पत्र  प्रदान करने के लिए शिविरों के आयोजन करने के सीएमएचओ को निर्देश दिए।  जिला रेडक्रॉस के समिति के गठन, स्कूलों में जूनियर रेडक्रॉस के गठन पर चर्चा एवं अंशदान, विश्वविद्यालयों महाविद्यालयों में युवक रेडक्रॉस के गठन पर चर्चा एवं अंशदान पर चर्चा, जिला रेडक्रास शाखा द्वारा संचालित प्रकल्पों की जानकारी, सिकल सेल एनीमिया से पीड़ित मरीजों के उपचारार्थ सहायतार्थ क्षय रोग से ग्रसित मरीजों की सहायतार्थ बनाये गए नि:क्षय मित्र की जानकारी, वृद्धजनों एवं दिव्यांगजनों की सहायतार्थ कार्य, जिला रेडक्रास ईकाइयों में आपदा मित्रों तैयार करने, निरोगी काया अभियान के अंतर्गत महिला एवं युवतियों में स्वास्थ्य एवं स्वच्छता के प्रति जागरूकता सहित अन्य विषयों की जानकारी ली। इन जानकारी के संबंध में कलेक्टर डॉ. केदार सिंह ने विस्तृत जानकारी साझा की।  बैठक में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत शिवम प्रजापति, अनुविभागीय अधिकारी राजस्व अमृता गर्ग, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजेश मिश्रा, डीपीसी अमरनाथ सिंह सहित जिला रेडक्रॉस सोसायटी के सदस्य मौजूद रहे। recent visitors 64

अमरूद की खेती से चमकी किस्मत: किसान अभिषेक दांगी ने कमाए एक सीजन में 10 लाख रुपये

Guava farming brings fortune: Farmer Abhishek Dangi earns Rs 10 lakh in one season भोपाल। मध्यप्रदेश में पारंपरिक खेती के साथ उद्यानिकी फसलों की ओर बढ़ता रुझान किसानों की आय बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहा है। केंद्र सरकार की ‘एक जिला-एक उत्पाद’ (ओडीओपी) योजना के तहत भोपाल जिले को अमरूद उत्पादन के लिए चयनित किया गया है। उद्यानिकी विभाग द्वारा किसानों को आधुनिक तकनीक, उच्च गुणवत्ता के पौधे, ड्रिप सिंचाई और तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे जिले में अमरूद की खेती तेजी से बढ़ रही है। भोपाल जिले के बरखेड़ा बरामद गांव के प्रगतिशील किसान अभिषेक दांगी ने अमरूद की खेती से सफलता की नई मिसाल पेश की है। उन्होंने करीब तीन वर्ष पहले अपनी साढ़े चार एकड़ जमीन में बीएनआर किस्म के 1660 अमरूद के पौधे लगाए थे। उद्यानिकी विभाग से मिली ड्रिप सिंचाई और तकनीकी मार्गदर्शन की मदद से उनकी फसल ने अच्छा उत्पादन दिया। वर्तमान में उनके बाग से करीब 6400 किलोग्राम अमरूद का उत्पादन हो रहा है। अभिषेक दांगी बताते हैं कि अमरूद की खेती से उन्हें एक सीजन में करीब 10 लाख रुपये की आय प्राप्त हुई है। उनके अमरूद की मांग भोपाल के साथ अन्य राज्यों में भी बढ़ रही है। उद्यानिकी विभाग के सहायक संचालक राजकुमार सगर के अनुसार पिछले पांच वर्षों में भोपाल जिले में अमरूद की खेती का रकबा और उत्पादन करीब 70 प्रतिशत तक बढ़ा है। जिले की लगभग 50 ग्राम पंचायतें अमरूद उत्पादन के नए क्लस्टर के रूप में विकसित हो चुकी हैं। किसानों को पौधारोपण, ड्रिप सिंचाई, ऋण और तकनीकी सहयोग देकर आधुनिक खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।  अमरूद की खेती से जिले के मनमोहन पाटीदार, अरुण दांगी और अभिषेक दांगी जैसे किसान न केवल अपनी आय बढ़ा रहे हैं, बल्कि अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रहे हैं। recent visitors 69