हरियाली की ताकत बनेंगे पतझड़ के सूखे पत्ते, गोल्डन कम्पोस्ट से फिर से हरी-भरी होगी धरती

Autumn’s dry leaves will become a source of greenery, golden compost will restore the earth’s greenery. भोपाल। राजधानी में अब सूखे पत्तों को जलाने की बजाय उन्हें उपयोगी बनाने का इनोवेशन किया जा रहा है। स्वच्छता किटी ब्रांड एम्बेसडर ग्रुप ने गोल्डन लीफ कम्पोस्ट बनाने का अभियान शुरू किया है। इसके तहत कालोनियों, पार्कों, स्कूलों और बड़े परिसरों में पतझड़ के दौरान गिरने वाले सूखे पत्तों से जैविक खाद तैयार की जा रही है। स्कूल, कालोनियों और अन्य संस्थानों के लोगों को प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। पहल का उद्देश्य पत्तियों को फेंकने या जलाने की बजाय उन्हें खाद में बदलकर हरियाली और स्वच्छता को बढ़ावा देना है। पत्तियों को कचरा नहीं, गोल्डन लीफ माने: स्वच्छता किटी ब्रांड एम्बेसडर ग्रुप की सदस्य रुचिका सचदेवा का कहना है कि शहर की हर सड़क, पार्क और गार्डन में सूखी पत्तियों के ढेर नजर आते हैं। लोग इन्हें कचरा समझकर फेंक देते हैं या जला देते हैं। उनके घर में भी कई पेड़ हैं और हर साल बड़ी मात्रा में पत्तियां गिरती हैं। पहले इन पत्तियों को भी कचरे में डाल दिया जाता था। जब इस विषय पर काम शुरू किया गया तो पता चला कि ये पत्तियां वास्तव में गोल्डन लीफ हैं। यदि इन्हें सही तरीके से उपयोग में लाया जाए तो यह बेहतरीन जैविक खाद में बदल सकती हैं। शहर में लगाए जाएंगे 100 लीफ कम्पोस्ट यूनिट: रुचिका का कहना है कि कॉलोनियों, स्कूलों, पार्कों और बड़े परिसरों में ऐसे स्थान चिह्नित किए जा रहे हैं, जहां बड़े पेड़ हैं और पतझड़ के दौरान बड़ी मात्रा में पत्तियां गिरती हैं। लगभग 100 स्थानों पर लीफ कम्पोस्टिंग यूनिट लगाने का लक्ष्य रखा गया है। हर यूनिट से कम से कम 100 किलो जैविक खाद तैयार होगी। इस तरह लगभग 10 टन खाद तैयार करने की योजना है।   तीन से चार महीने में बनती है जैविक खाद: रुचिका ने बताया, लीफ कम्पोस्ट बनाने की प्रक्रिया बेहद सरल है। जालीदार संरचना वाली यूनिट बनाई जाती है ताकि हवा का आवागमन बना रहे। सूखी पत्तियों को इसमें इकट्ठा कर हल्की नमी बनाए रखने समय-समय पर पानी का छिड़काव किया जाता है। तीन से चार महीने के भीतर ये पत्तियां सड़कर बेहतरीन जैविक खाद में बदल जाती हैं। इस खाद का उपयोग बागवानी और पौधारोपण में किया जा सकता है। पत्तियां जलाना पर्यावरण के लिए नुकसानदायक: सदस्यों का कहना है कि पत्तियां जलाना पर्यावरण के लिए नुकसानदायक है। कई बार पत्तियों के ढेर में प्लास्टिक और अन्य कचरा भी मिल जाता है। जब इन्हें जलाया जाता है तो जहरीला धुआं फैलता है और पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है। पत्तियों के साथ कई उपयोगी सूक्ष्म जीव भी नष्ट हो जाते हैं जो प्राकृतिक रूप से इन्हें खाद में बदलने में मदद करते हैं। इसलिए पत्तियों को जलाने की बजाय उन्हें खाद में बदलना ज्यादा बेहतर विकल्प माना जा रहा है। स्वच्छता किटी ग्रुप कर रहा कई सामाजिक कार्य: स्वच्छता किटी ग्रुप में करीब 95 सदस्य हैं और हर सदस्य हर महीने 100 रुपए का योगदान देता है। इसी सहयोग से ग्रुप शहर में स्वच्छता और पर्यावरण से जुड़े कई छोटे-छोटे अभियान चलाता है। ग्रुप के सदस्य पार्कों की सफाई, तालाबों के आसपास कचरा हटाने, गार्बेज पाइंट्स को साफ और सुंदर बनाने जैसे कार्य भी करते हैं। लोगों को कचरे को संसाधन में बदलने और घर पर ही जैविक खाद बनाने की ट्रेनिंग भी दी जाती है। recent visitors 49

परिचय सम्मेलन: युवतियां- नशामुक्त जीवनसाथी और युवक-पारिवारिक जिम्मेदारियां उठाने में सक्षम को प्राथमिकता

Introduction Conference: Preference given to young women – drug-free life partners and young men – capable of shouldering family responsibilities भोपाल। मप्र माझी, कीर आदिवासी एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं उत्थान समिति के तत्वावधान में रेलवे स्टेशन प्लेट फार्म एक की ओर स्थित रेलवे इंस्टीटयूट परिसर में रविवार को युवक-युवती परिचय सम्मेलन आयोजित किया गया। इसमें करीब 200 से अधिक युवक-युवतियों ने अपना परिचय दिया और जीवनसाथी की तलाश के लिए प्राथकिताएं बताईं। किसी ने नशामुक्त तो किसी ने नौकरी पेशा या बिजनेस करने वाले जीवनसाथी को प्राथमिकता दी। वहीं युवकों ने पारिवारिक जिम्मेदारियों का निर्वहन और शिक्षित जीवनसाथी की आवश्यकता पर जोर दिया।  समिति के अध्यक्ष मुकेश बाथम ने बताया कि समाज में योग्य युवक-युवतियां हैं। कई बार उन्हें उनके अनुकूल योग्य जीवनसाथी नहीं मिल पाता है, इसकी पूर्ति परिचय सम्मेलन करते हैं। इसी बात को ध्यान में रखते हुए यह परिचय सम्मेलन आयोजित किया गया। जिसमें प्रदेश भर से युवक-युवतियों, उनके परिजन, समाजसेवी व अधिकारी वर्ग शामिल हुए। सभी ने युवक-युवतियों का हौंसला बढ़ाया और आगे बढ़ने के लिए टिप्स बताए।  हॉस्टल बनाने 25 लाख देने का ऐलान:  सेवानिवृत्त आईएएस बीके बाथम ने कहा कि बच्चों को अपना भविष्य चुनने के लिए माता-पिता सहयोग करें। बाथम ने बच्चों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए हॉस्टल बनाने 25 लाख रुपए देने का ऐलान किया। इस मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में नरेला विस के मंत्री, निगम परिषद अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी के अलावा समिति के प्रदेश उपाध्यक्ष मनोज बाथम, महामंत्री बालकिशन बाथम, महासचिव आशुतोष बाथम, सचिव राहुल रायकवार, मुख्य कोषाध्यक्ष राधेश्याम रायकवार, कोषाध्यक्ष भागचंद बाथम, महामंत्री मुन्ना राकेश बाथम, सुरेश आचार्य, महिला प्रकोष्ठ अध्यक्ष ममता बाथम समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। recent visitors 84

जन औषधि केंद्रों की सुविधाओं का स्थानीय लोगों को दिलाएं लाभ : कुमरे

Provide benefits of Jan Aushadhi Centres to local people: Kumre  शहडोल। इंडियन रेडक्रॉस सोसायटी मध्यप्रदेश राज्य शाखा के चैयरमैन डॉ. श्याम सिंह कुमरे ने जिला रेडक्रॉस सोसायटी शहडोल के द्वारा किए जा रहे कार्यों की प्रगति की समीक्षा की।    चैयरमैन रेडक्रॉस सोसायटी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिला रेडक्रॉस सोसायटी द्वारा संचालित शहडोल जिले में प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि क्रेंद्रो के माध्यम से दी जाने वाली सुविधाओं का लाभ प्रत्येक जरूरतमंद मरीजों को दिलाना अनिवार्य करें। जिन विकासखंडों में जन औषधि केंद्र संचालित नहीं हुए है, वहां जल्द प्रारंभ कराएं। जन औषधि केंद्रो में दी जाने वाली सुविधाओं का लाभ दिलाने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार कराएं। जन औषधि केंद्रो में पर्याप्त मात्रा में दवाईयां उपलब्ध रहें, यह भी ध्यान रखें।   चैयरमैन ने कहा कि मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि जिला रेडक्रॉस सोसायटी के माध्यम से युवाओं, आपदा मित्रों एवं जनमानस को सीपीआर, सांप काटने पर बचाव, आग से बचाव, सड़क दुर्घटनाओं से बचाव जैसे अन्य आपदाओं से निपटने के लिए कैंप आयोजित कर समय-समय पर उन्हें प्रशिक्षण दें एवं जिला रेडक्रॉस सोसायटी में वॉलिंटियर एवं रक्तदाताओं को पंजीकृत करें।  उन्होंने कुपोषण की स्थिति की जानकारी लेते हुए कहा कि शहडोल जिले को कुपोषण मुक्त करने के लिए अधिकारी समाजसेवियों का भी सहयोग लें। अतिकुपोषित वाली आॅगनवाड़ीे केंद्रों को रेडक्रॉस सोसायटी को सौंपे तथा रेडक्रॉस सोसायटी के माध्यम से एनआरसी केंद्रों का संचालन भी कराएं।  श्री कुमरे ने शहडोल जिले में दर्ज कुपोषित, अतिकुपोषित एवं मध्यम कुपोषित बच्चों की स्थिति के संबंध में भी जानकारी ली। मेडिकल कॉलेज शहडोल में ब्लड बैंक एवं जन औषधि केंद्र को एक सप्ताह के भीतर प्रारंभ कराने के निर्देश दिए। रेडक्रॉस सोसायटी के माध्मय से स्वास्थ्य शिविर, नेत्र जांच शिविर,  बहुदिव्यांग प्रमाण पत्र  प्रदान करने के लिए शिविरों के आयोजन करने के सीएमएचओ को निर्देश दिए।  जिला रेडक्रॉस के समिति के गठन, स्कूलों में जूनियर रेडक्रॉस के गठन पर चर्चा एवं अंशदान, विश्वविद्यालयों महाविद्यालयों में युवक रेडक्रॉस के गठन पर चर्चा एवं अंशदान पर चर्चा, जिला रेडक्रास शाखा द्वारा संचालित प्रकल्पों की जानकारी, सिकल सेल एनीमिया से पीड़ित मरीजों के उपचारार्थ सहायतार्थ क्षय रोग से ग्रसित मरीजों की सहायतार्थ बनाये गए नि:क्षय मित्र की जानकारी, वृद्धजनों एवं दिव्यांगजनों की सहायतार्थ कार्य, जिला रेडक्रास ईकाइयों में आपदा मित्रों तैयार करने, निरोगी काया अभियान के अंतर्गत महिला एवं युवतियों में स्वास्थ्य एवं स्वच्छता के प्रति जागरूकता सहित अन्य विषयों की जानकारी ली। इन जानकारी के संबंध में कलेक्टर डॉ. केदार सिंह ने विस्तृत जानकारी साझा की।  बैठक में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत शिवम प्रजापति, अनुविभागीय अधिकारी राजस्व अमृता गर्ग, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजेश मिश्रा, डीपीसी अमरनाथ सिंह सहित जिला रेडक्रॉस सोसायटी के सदस्य मौजूद रहे। recent visitors 54

अमरूद की खेती से चमकी किस्मत: किसान अभिषेक दांगी ने कमाए एक सीजन में 10 लाख रुपये

Guava farming brings fortune: Farmer Abhishek Dangi earns Rs 10 lakh in one season भोपाल। मध्यप्रदेश में पारंपरिक खेती के साथ उद्यानिकी फसलों की ओर बढ़ता रुझान किसानों की आय बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहा है। केंद्र सरकार की ‘एक जिला-एक उत्पाद’ (ओडीओपी) योजना के तहत भोपाल जिले को अमरूद उत्पादन के लिए चयनित किया गया है। उद्यानिकी विभाग द्वारा किसानों को आधुनिक तकनीक, उच्च गुणवत्ता के पौधे, ड्रिप सिंचाई और तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे जिले में अमरूद की खेती तेजी से बढ़ रही है। भोपाल जिले के बरखेड़ा बरामद गांव के प्रगतिशील किसान अभिषेक दांगी ने अमरूद की खेती से सफलता की नई मिसाल पेश की है। उन्होंने करीब तीन वर्ष पहले अपनी साढ़े चार एकड़ जमीन में बीएनआर किस्म के 1660 अमरूद के पौधे लगाए थे। उद्यानिकी विभाग से मिली ड्रिप सिंचाई और तकनीकी मार्गदर्शन की मदद से उनकी फसल ने अच्छा उत्पादन दिया। वर्तमान में उनके बाग से करीब 6400 किलोग्राम अमरूद का उत्पादन हो रहा है। अभिषेक दांगी बताते हैं कि अमरूद की खेती से उन्हें एक सीजन में करीब 10 लाख रुपये की आय प्राप्त हुई है। उनके अमरूद की मांग भोपाल के साथ अन्य राज्यों में भी बढ़ रही है। उद्यानिकी विभाग के सहायक संचालक राजकुमार सगर के अनुसार पिछले पांच वर्षों में भोपाल जिले में अमरूद की खेती का रकबा और उत्पादन करीब 70 प्रतिशत तक बढ़ा है। जिले की लगभग 50 ग्राम पंचायतें अमरूद उत्पादन के नए क्लस्टर के रूप में विकसित हो चुकी हैं। किसानों को पौधारोपण, ड्रिप सिंचाई, ऋण और तकनीकी सहयोग देकर आधुनिक खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।  अमरूद की खेती से जिले के मनमोहन पाटीदार, अरुण दांगी और अभिषेक दांगी जैसे किसान न केवल अपनी आय बढ़ा रहे हैं, बल्कि अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रहे हैं। recent visitors 59

नगर निगम शहरवासियों को मूलभूत सुविधाएं देने में विफल, कांग्रेसियों ने महापौर मालती राय का पुतला जलाया, मांगा इस्तीफा

The Municipal Corporation failed to provide basic amenities to the city residents; Congressmen burnt the effigy of Mayor Malti Rai and demanded her resignation. भोपाल। राजधानी भोपाल में गोमांस तस्करी और दूषित पेयजल आपूर्ति को लेकर सियासी घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है। सोमवार को कांग्रेस नेताओं और कार्यकतार्ओं ने भोपाल नगर निगम के सामने प्रदर्शन करते हुए महापौर का पुतला जूते-चप्पलों से पीटा और दहन किया। प्रदर्शनकारियों ने नगर निगम पर गोहत्या को संरक्षण देने और शहरवासियों को मूलभूत सुविधाएं देने में विफल रहने का आरोप लगाते हुए महापौर से तत्काल इस्तीफे की मांग की। सनातनी सरकार ने साधी चुप्पी पूर्व जिला अध्यक्ष और कांग्रेस नेता मोनू सक्सेना ने कहा कि भोपाल मध्य प्रदेश का हृदय है और भोपाल का हृदय जिंसी चौराहा है। उसी जिंसी चौराहे के नीचे गोहत्या हो रही है। हजारों लाखों टन मांस दूसरे प्रदेशों में निर्यात किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि खुद को सनातनी बताने वाली सरकार झूठे वादे कर रही है। और इस पूरे मामले पर प्रधानमंत्री से लेकर राज्य सरकार तक चुप्पी साधे हुए है। स्लाटर को नियम विरुद्ध एमआईसी ने दिया टेंडर मोनू सक्सेना ने कहा, नगर निगम ने नियमों के विरुद्ध जाकर स्लाटर हाउस का टेंडर दिया है, जिसमें महापौर मालती राय और एमआईसी का संरक्षण है। उन्होंने आरोप लगाया कि शहरवासी तमाम तरह के टैक्स दे रहे हैं। इसके बावजूद न अच्छी सड़क मिल रही है और न ही साफ पानी। नालियों की हालत भी बदतर है। ऐसे में गोहत्या को संरक्षण देने वाली महापौर को इस्तीफा देना चाहिए। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि असलम चमड़ा उर्फ असलम कुरैशी एक मंत्री के सीधे संपर्क में हैं और उसे महापौर व उनके पति का संरक्षण प्राप्त है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार सच्चाई जानना चाहती है तो पूर्व जजों की उच्च स्तरीय समिति बनाकर जांच कराई जाए। इससे पूरे नेटवर्क का खुलासा हो जाएगा। बिना परिषद में क्यों नहीं लाया गया प्रस्ताव सक्सेना ने कहा कि जिन कर्मचारियों पर अब तक कार्रवाई हुई है, उनका इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है। वे 25 दिवसीय कर्मचारी हैं और उनके हस्ताक्षर तक नहीं हैं। जिस डॉक्टर को सस्पेंड किया गया है, वह चार महीने पहले ही निगम में पदस्थ हुआ था और उसका टेंडर प्रक्रिया से कोई संबंध नहीं है। स्लाटर हाउस का प्रस्ताव एमआईसी में चुपके से पारित किया गया और परिषद की बैठक में भी नहीं लाया गया। आयुक्त को सौंपा ज्ञापन, सीएम हाउस घेरने की चेतावनी प्रदर्शन के बाद नगर निगम आयुक्त संस्कृति जैन को ज्ञापन सौंपा गया। इसमें दूषित जल आपूर्ति की तत्काल जांच, गंदे पानी की सप्लाई रोकने, जल शुद्धिकरण संयंत्रों और पाइप लाइनों की नियमित सफाई, स्लॉटर हाउस में पाए गए गोमांस की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग की गई। कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि महापौर को बर्खास्त नहीं किया गया तो आंदोलन मुख्यमंत्री निवास तक जाएगा और हर कार्यक्रम में काले झंडे दिखाए जाएंगे। recent visitors 67

समाज की एकता ही उसकी होती है असली ताकत: महापौर मालती

Unity of society is its real strength: Mayor Malti भोपाल। मप्र रविकिरण समाज कल्याण समिति भोपाल द्वारा रविवार को पॉलिटेक्निक चौराहा स्थित हिंदी भवन में संत शिरोमणी रविदास महाराज की 649वी जयंती महोत्सव एवं सम्मान समारोह आयोजित किया गया। समारोह में मुख्य अतिथि महापौर मालती राय ने संत रविदास के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलित कर समारोह का शुभारंभ किया।  महापौर राय ने विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्यों में अपना विशिष्ट योगदान और संगठन में सेवा देने वाले दिवंगतों के परिजनों तथा समाज के वरिष्ठजनों को सम्मानित किया। कार्यक्रम में सदस्यों का पारिवारिक परिचय और सांस्कृतिक आयोजन किए गए। इस दौरान नन्हें-मुन्ने बच्चों ने आत्मरक्षा के तरीके बताकर बच्चियों को सुरक्षित रहने का संदेश दिया।  महापौर मालती ने कहा कि कोई भी समाज हो, उसकी ताकत का एहसास तभी होता है, जब वह एक हो। आयोजन भी इसी कड़ी का हिस्सा है। आयोजन में जब बड़ी संख्या में लोग आएंगे तो राजनैतिक पार्टियों तक भी इसका संदेश जाता है। उन्होंने कहा कि नशा करना चाहिए, लेकिन वह शराब या अन्य नशीली चीजों का नहीं, बल्कि-वह समाज सेवा, धर्म की रक्षा, शिक्षा जैसी उन्नतशील सेवाओं का होना चाहिए।  वहीं राजू भारती बैरसिया ने अपने गीतों के माध्यम से युवाओं को नशा से दूर रहने का संदेश दिया। इस मौके पर मुख्य सरंक्षक गुणवन्त सेवतकर, प्रदेशाध्यक्ष रामभाऊ बिंजाड़े, कोषाध्यक्ष सीआर झाडे, सहायक कोषाध्यक्ष केवल नकले, कार्यकारी अध्यक्ष बबलू मोहबे, उपाध्यक्ष महेंद्र टांडेकर, सचिव संगीता मोहबे, अरूण अहिरवार, कमल पटेल, दीपक अहीरे, दिनेश बरखने बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। recent visitors 59

भोपाल में बनेगी AI और नॉलेज सिटी, 3700 एकड़ में होगा विकास, देश का सबसे उन्नत शहर बनेगा

 भोपाल  भोपाल अब देश के भविष्य के टेक–एजुकेशन मैप पर एक नई पहचान बनाने जा रहा है। राजधानी के भौंरी क्षेत्र में 3700 एकड़ (1500 हेक्टेयर) भूमि पर देश की सबसे उन्नत नॉलेज एंड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सिटी विकसित की जाएगी। यह प्रोजेक्ट केवल एक एजुकेशन टाउनशिप नहीं होगा, बल्कि रिसर्च, स्टार्टअप्स, इंडस्ट्री और ग्लोबल यूनिवर्सिटीज का एकीकृत इकोसिस्टम तैयार किया जाएगा, जिससे मध्य प्रदेश को देश का बड़ा AI हब बनाने की दिशा में काम होगा। इस परियोजना के लिए 20 से अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने अर्बन प्लानिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर डिजाइन और डेवलपमेंट के लिए एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EOI) दाखिल किए हैं। एजेंसी चयन की प्रक्रिया अंतिम चरण में है और फरवरी के अंत तक डेवलपमेंट एजेंसी तय होने की संभावना है। भौंरी में 3700 एकड़ जमीन पर भारत की सबसे उन्नत नॉलेज एंड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) सिटी विकसित होने जा रही है। यह प्रोजेक्ट केवल एजुकेशन टाउनशिप नहीं होगा, बल्कि यह रिसर्च, स्टार्टअप्स, इंडस्ट्री और ग्लोबल यूनिवर्सिटीज का एक इंटीग्रेटेड इकोसिस्टम बनेगा। बीडीए इसकी नोडल एजेंसी है, जबकि आइसर (इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, एजुकेशन एंड रिसर्च) इसका पूरा रोडमैप तैयार करेगा। प्रोजेक्ट के लिए अर्बन प्लानिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर डिजाइन और डेवलपमेंट को लेकर 20 से ज्यादा ग्लोबल एजेंसियों ने एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट दाखिल किया है। चयन प्र्रक्रिया अंतिम चरण में है। इस माह के अंत तक डेवलपमेंट एजेंसी तय होने की संभावना है। नॉलेज एवं एआई सिटी के रोडमैप पर गुरुवार को राष्ट्रीय स्तर की बैठक भी रखी गई है। इसमें नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय सहित केंद्रीय संस्थानों के निदेशक, कुलपति और प्राचार्य भाग लेंगे। नगरीय प्रशासन विभाग ने आइसर को एक्शन प्लान तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी है। इसके लिए 8 सदस्यीय कोर कमेटी बनी है, जिसके कन्वीनर प्रो. सौरभ दत्ता हैं। सुपरविजन आइसर डायरेक्टर गोवर्धन दास कर रहे हैं। बीडीए ने जमीन की पहचान के बाद ईओआई प्रक्रिया पूरी कर ली है। बीडीए सीईओ श्यामवीर सिंह ने बताया कि देश-विदेश की 20 से ज्यादा एजेंसियों ने रुचि दिखाई है। डेवलपमेंट एजेंसी क्या करेगी     पूरे प्रोजेक्ट का मास्टर प्लान तैयार करेगी     ग्रीन बिल्डिंग कांसेप्ट पर कैंपस डिजाइन     बड़े पैमाने पर ग्रीन जोन और ओपन स्पेस     ईवी, सीएनजी और हाइड्रोजन आधारित स्मार्ट ट्रांसपोर्ट     पीपीपी मॉडल, जॉइंट वेंचर और इंटीग्रेटेड पार्टनरशिप के विकल्प भौंरी क्षेत्र में पहले से मौजूद है एजुकेशन इको-सिस्टम देश के कई राज्य जैसे तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र एजुकेशन सिटी की दिशा में काम कर रहे हैं, लेकिन भोपाल की नॉलेज–AI सिटी का कॉन्सेप्ट अलग होगा। भौंरी क्षेत्र में पहले से आईसर भोपाल, निफ्ट, राष्ट्रीय फॉरेंसिक रिसर्च इंस्टीट्यूट, अटल बिहारी वाजपेयी पॉलिसी रिसर्च सेंटर, एमपी पुलिस अकादमी और शंकर दयाल शर्मा आयुर्वेदिक इंस्टिट्यूट मौजूद हैं। इसी क्लस्टर में ट्रिपल आईटी (IIIT) कैंपस के निर्माण का प्रस्ताव भी है। इन संस्थानों की मौजूदगी से यहां पहले से एक ऐसा इकोसिस्टम तैयार है, जहां AI, स्पेस टेक, फॉरेंसिक, पब्लिक पॉलिसी, हेल्थ और डिजाइन जैसे क्षेत्रों में साझा रिसर्च की जा सकेगी। IISER तैयार कर रहा है रोडमैप नगरीय प्रशासन विभाग, मप्र शासन ने नॉलेज–AI सिटी के लिए एक्शन प्लान तैयार करने की जिम्मेदारी IISER भोपाल को सौंपी है। IISER ने पिछले वर्ष फरवरी में एक ब्रेन स्टॉर्मिंग सेशन किया था, जिसके बाद इस परियोजना को सभी संस्थानों को साथ लेकर आगे बढ़ाने की बात कही गई थी। पूरे प्रोजेक्ट की निगरानी IISER के डायरेक्टर गोवर्धन दास कर रहे हैं। फरवरी के आखिर तक एजेंसी नियुक्त होगी भोपाल विकास प्राधिकरण (BDA) ने जमीन की पहचान के बाद EOI प्रक्रिया पूरी कर ली है। पहले यह परियोजना 2000 एकड़ में प्रस्तावित थी, जिसे बढ़ाकर अब 3700 एकड़ कर दिया गया है। लक्ष्य है कि वर्ष 2026 में नॉलेज–AI सिटी को धरातल पर उतारने का काम शुरू हो जाए। प्रोजेक्ट के कन्वीनर प्रोफेसर सौरभ दत्ता ने बताया कि इस परियोजना पर पिछले एक वर्ष से योजना बनाई जा रही है। नॉलेज और AI सिटी के माध्यम से ऐसा इकोसिस्टम तैयार करने का लक्ष्य है, जहां शिक्षा के साथ रिसर्च और इंडस्ट्री मिलकर काम करें। यह एक पूरी सिटी होगी, जिसे हायर एजुकेशन के साथ अर्बन डेवलपमेंट, हॉस्पिटल और मेट्रो से भी जोड़ा जाएगा। recent visitors 36