मध्य प्रदेश में एससी, एसटी में शामिल हुईं कई नई जातियां, 4 जिलों में आरक्षण का मिलेगा लाभ

Several new castes have joined the SC, ST category in Madhya Pradesh, and reservation benefits will be available in four districts. SC ST Categories In MP । मध्यप्रदेश में एक बार फिर एससी, एसटी में कई नई जातियां शामिल हुईं हैं। प्रदेश के कई जिलों में जातियों की आरक्षित श्रेणी तय की गई है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार राज्य के 4 नवगठित जिलों में यह कवायद की गई है। जातियों की आरक्षित श्रेणी में जिन जातियों को शामिल किया गया है उन्हें अब आरक्षण का लाभ मिलेगा। नवगठित 2 जिलों में कु्हार, कु्हार (प्रजापति) और कुंभार को अनुसूचित जाति (एससी) में शामिल किया गया है। इसी तरह पारधी, बहेलिया व इससे संबंधित कुछ अन्य जनजाति को एक नवगठित जिले में अनुसूचित जनजाति (एसटी) में रखा गया है। यह स्पष्ट किया गया है कि नवगठित जिलों में जातियों की आरक्षित श्रेणी, सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देशों के अनुरूप तय की गई हैं। सीएम मोहन यादव ने मानव अधिकार आयोग के कार्यक्रम में अनुसूचित जातियों, जनजातियों के हितों के लिए काम करने का संकल्प दोहराया। एमपी के मैहर, मऊगंज, पांढुर्णा और निवाड़ी नवगठित जिले हैं। इन चारों जिलों में जातियों की आरक्षित श्रेणी तय कर दी गई है। मैहर, मऊगंज, पांढुर्णा और निवाड़ी जिलों में अब इसी के अनुरूप जाति प्रमाण पत्र बनाए जाएंगे। इसकी व्यवस्था भी शुरू कर दी गई है। अधिकारियों के अनुसार नवगठित 4 जिलों में जातियों की आरक्षित श्रेणी तय करते समय सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देशों का पूर्णत: पालन किया गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार मध्ययप्रदेश के कुछ जिलों में कु्हार, कु्हार (प्रजापति) और कुंभार अनुसूचित जाति (एससी) में हैं। मऊगंज और मैहर में भी इस जाति को अनुसूचित जाति के अंतर्गत रखा गया है। अधिकारियों ने बताया कि राज्य के छतरपुर, दतिया, पन्ना, रीवा, सतना, शहडोल, सीधी और टीकमगढ़ जिलों में कु्हार, कु्हार (प्रजापति) और कुंभार अनुसूचित जाति (एससी) में यानि आरक्षित श्रेणी में शामिल हैं। अब 2 अन्य नवगठित जिलों में भी इन जातियों की आरक्षित श्रेणी तय कर दी गई है। 3 नए जिलों में पनिका जाति को आरक्षित श्रेणी में शामिल किया इसी तरह पनिका जाति को राज्य के 3 नए जिलों में आरक्षित श्रेणी में शामिल किया गया है। अभी यह जाति छतरपुर, पन्ना, रीवा, सतना, शहडोल, उमरिया, सीधी, टीकमगढ़ और दतिया की सेंवढ़ा व दतिया तहसील में एसटी के रूप में मान्य है। अब उपरोक्त जिलों के साथ ही नए जिले मऊगंज, मैहर, निवाड़ी में पनिका जाति को अनुसूचित जाति के रूप में आरक्षित श्रेणी में शामिल किया गया है। इस प्रकार यह जाति अब राज्य के 12 जिलों में आरक्षित श्रेणी में शामिल हो गई है। नई जातियों में पारधी और बहेलिया व इनसे संबंधित अन्य उपजातियों को भी खासा लाभ आरक्षण के लिए नई जातियों में पारधी और बहेलिया व इनसे संबंधित अन्य उपजातियों को भी खासा लाभ मिला है। इन्हें नवगठित पांढुर्णा जिले में अनुसूचित जनजाति (एसटी) में रखा गया है। पारधी और बहेलिया के साथ ही बहेल्लिया, चिता पारधी, लंगोली पारधी, फांस पारधी, शिकारी, टाकनकार एवं टाकिया जनजाति को पांढुर्णा जिले में आरक्षित श्रेणी में शामिल किया गया है। recent visitors 81

जबलपुर: पर्युषण पर्व पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, दोपहर 12 बजे तक जैन कर्मचारियों को अदालत आने की अनुमति

Jabalpur: High Court issues major verdict on Paryushan festival, Jain employees allowed to come to court till 12 noon विशेष संवाददाता जितेन्द्र श्रीवास्तव/अर्पिता श्रीवास्तव  जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पर्युषण पर्व के धार्मिक अनुष्ठानों को ध्यान में रखते हुए जैन धर्मावलंबी कर्मचारियों को दो घंटे की विशेष छूट प्रदान की है। मुख्य न्यायाधीश अल्पेश यशवंत कोगजे के निर्देश पर रजिस्ट्रार जनरल धर्मेंद्र सिंह ने सोमवार को आदेश जारी किया, जिसमें स्पष्ट किया गया कि जैन कर्मचारी 15 से 26 सितंबर तक सुबह 10 बजे के बजाय दोपहर 12 बजे तक कार्यालय पहुंच सकेंगे। जबलपुर, इंदौर और ग्वालियर पीठों में मिलेगी छूट यह सुविधा हाई कोर्ट की मुख्यपीठ जबलपुर, इंदौर और ग्वालियर पीठों में लागू होगी। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस विशेष सुविधा से न्यायालयीन कार्य प्रभावित नहीं होना चाहिए। संबंधित अधिकारियों को कार्यालयीन व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। इस निर्णय से जैन कर्मचारियों को पर्युषण पर्व के दौरान अपनी धार्मिक परंपराओं का पालन करने में सहायता मिलेगी। recent visitors 33

हाईकोर्ट ने सरकार ने मांगा जवाब,डकैत नहीं, फिर भी ग्वालियर-चंबल में डकैती एक्ट में 1000 से ज्यादा FIR

The High Court has asked the government to respond, stating that there are no dacoits, yet over 1,000 FIRs have been filed under the Dacoity Act in Gwalior-Chambal region. प्रतिनिधि: संतोष सिंह तोमर  ग्वालियर। जिस कानून को कभी ग्वालियर-चंबल के बीहड़ों में डकैतों के आतंक से निपटने के लिए बनाया गया था, उसकी आज की जरूरत पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने ही सवाल उठा दिया है। पूर्व गृह मंत्री डॉ. गोविंद सिंह की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने सरकार से पूछा है कि जब प्रदेश में अब कोई सूचीबद्ध डकैत गिरोह सक्रिय नहीं है, तो मध्य प्रदेश डकैती एवं व्यपहरण प्रभावित क्षेत्र अधिनियम, 1981 को खत्म क्यों न कर दिया जाए। याचिका में दावा किया गया है कि वर्ष 2020 से 2026 के बीच ग्वालियर-चंबल संभाग के ग्वालियर, शिवपुरी, दतिया, भिंड, मुरैना और श्योपुर जिलों में इस विशेष कानून के तहत एक हजार से अधिक एफआईआर दर्ज की गईं। याचिकाकर्ता का आरोप है कि कई मामलों में सामान्य विवाद, जमीन-जायदाद के झगड़े और मारपीट जैसी घटनाओं में भी इस कानून की कठोर धाराएं जोड़ दी जाती हैं। हाई कोर्ट में उठा सवाल- जब डकैत गिरोह नहीं तो कानून क्यों? याचिका में कहा गया है कि 2020 से 2026 के बीच विधानसभा में तत्कालीन गृह मंत्री तीन अलग-अलग मौकों पर यह जानकारी दे चुके हैं कि प्रदेश में कोई सूचीबद्ध डकैत गिरोह सक्रिय नहीं है। इसके बावजूद इसी अवधि में ग्वालियर-चंबल के छह जिलों में इस कानून के तहत बड़ी संख्या में एफआईआर दर्ज होने का दावा किया गया है। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव शर्मा ने कोर्ट के समक्ष तर्क दिया कि जिस विशेष परिस्थिति से निपटने के लिए 1981 में यह कानून बनाया गया था, वह स्थिति अब समाप्त हो चुकी है। इसके बावजूद कानून का इस्तेमाल जारी रहना नागरिकों के समानता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मौलिक अधिकारों से जुड़े सवाल खड़े करता है। धारा 11 और 13 पर क्यों है आपत्ति? याचिका में अधिनियम की धारा 11 और 13 के इस्तेमाल पर विशेष आपत्ति जताई गई है। धारा 11 के तहत गिरफ्तारी के बाद हिरासत से जुड़े विशेष प्रावधान हैं और ऐसे मामलों में अग्रिम जमानत का प्रावधान नहीं है। धारा 13 दोषसिद्धि की स्थिति में न्यूनतम सजा का प्रावधान करती है, जो तीन वर्ष से कम नहीं हो सकती। याचिकाकर्ता का आरोप है कि आपसी रंजिश, जमीन विवाद या सामान्य मारपीट जैसे मामलों में भी इन धाराओं को जोड़ने से आरोपितों के लिए कानूनी राहत हासिल करना मुश्किल हो जाता है। खासतौर पर ग्रामीणों, किसानों और युवाओं के खिलाफ इसके इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाए गए हैं। 1981 में क्यों बनाया गया था कानून? यह विशेष कानून वर्ष 1981 में उस दौर में लागू किया गया था, जब ग्वालियर-चंबल के बीहड़ों के अलावा सतना और पन्ना के जंगलों में डकैत गिरोह सक्रिय थे। अपहरण, डकैती और सामूहिक हत्याओं जैसी गंभीर वारदातों से निपटने के लिए सामान्य कानूनों से अलग कठोर प्रावधान किए गए थे। अब याचिका में यही सवाल उठाया गया है कि जब वह परिस्थितियां बदल चुकी हैं और प्रदेश में कोई सूचीबद्ध डकैत गिरोह सक्रिय नहीं है, तो इस विशेष कानून को बनाए रखने का औचित्य क्या है। सरकार से चार सप्ताह में जवाब हाई कोर्ट ने मामले में गृह विभाग के प्रमुख सचिव, पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और ग्वालियर, शिवपुरी, दतिया, भिंड, मुरैना व श्योपुर के पुलिस अधीक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं। सभी से चार सप्ताह में जवाब मांगा गया है। सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता धर्मेंद्र शर्मा ने बताया कि इस अधिनियम के तहत दर्ज मामलों की सुनवाई विशेष न्यायालय में होती है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि पिछले कई वर्षों से जंगल या बीहड़ क्षेत्र में कोई सूचीबद्ध डकैत गिरोह सक्रिय नहीं है। recent visitors 35

जबलपुर: बिल्डर्स से लेकर किसानों तक की टेंशन बढ़ी, 62 गांवों के भविष्य का फैसला करेगा नया मास्टर प्लान

Jabalpur: Tensions rise for everyone from builders to farmers, as a new master plan will determine the future of 62 villages. विशेष संवाददाता : जितेन्द्र श्रीवास्तव/अर्पिता श्रीवास्तव  जबलपुर। जबलपुर के प्रस्तावित मास्टर प्लान 2041 को लेकर एक बार फिर जमीन के उपयोग को लेकर हलचल तेज हो गई है। वर्ष 2022 में नियोजन क्षेत्र का दायरा बढ़ाकर 62 गांवों को शामिल किए जाने के बाद अब इन क्षेत्रों के संभावित लैंड यूज को लेकर चर्चाएं जोर पकड़ रही हैं। पाटन, जबलपुर और पनागर तहसील के कुछ गांवों में बड़े हिस्से को अंतिम योजना में कृषि या ग्रीन बेल्ट के रूप में रखे जाने की संभावना चर्चा में है। इससे जमीन मालिकों और रियल एस्टेट कारोबार से जुड़े लोगों की निगाहें अंतिम लैंड यूज मैप पर टिक गई हैं। हालांकि, अभी इसे अंतिम निर्णय नहीं माना जा सकता। संबंधित गांवों का वास्तविक भू-उपयोग मास्टर प्लान की प्रक्रिया पूरी होने और सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति के बाद जारी होने वाली अंतिम अधिसूचना से ही स्पष्ट होगा। इन गांवों की जमीन पर सबसे ज्यादा नजर पाटन तहसील के नुहारी, बिनेकी और टिमरी, जबलपुर तहसील के खमरिया, पिपरिया कला, नौमखेड़ा और कोसमघाट तथा पनागर तहसील के पिपरिया, मगेला, पटना और बरौदा सहित कुछ गांवों को लेकर भू-उपयोग की चर्चाएं अधिक हैं। यदि इन क्षेत्रों का बड़ा हिस्सा कृषि या ग्रीन बेल्ट में निर्धारित होता है तो वहां आवासीय कॉलोनी, टाउनशिप अथवा अन्य गैर-कृषि विकास भू-उपयोग नियमों और सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के अधीन होगा। इसके विपरीत आवासीय या मिश्रित उपयोग वाले क्षेत्रों में नियोजित विकास की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। 2022 में बढ़ा था नियोजन क्षेत्र शहर के अनियोजित विस्तार को नियंत्रित करने और भविष्य के विकास को व्यवस्थित करने के उद्देश्य से वर्ष 2022 में जबलपुर के नियोजन क्षेत्र का विस्तार किया गया था। इसमें 62 गांवों को शामिल किया गया। इसके साथ इन क्षेत्रों में आवासीय, वाणिज्यिक, औद्योगिक, परिवहन और हरित क्षेत्र के नियोजन की प्रक्रिया नगर तथा ग्राम निवेश व्यवस्था के दायरे में आ गई। अब जमीन मालिकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण यह है कि अंतिम योजना में उनकी भूमि किस श्रेणी में आती है। यही स्थिति भविष्य में जमीन के विकास और उपयोग की दिशा तय करेगी धारा 16 के तहत विकास योजना अहम मध्यप्रदेश नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम, 1973 के तहत विकास योजना के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों के नियोजित भू-उपयोग का निर्धारण किया जाता है। ऐसे में 62 गांवों के लिए तैयार किए जा रहे अंतिम लैंड यूज मैप को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जमीन मालिकों और डेवलपर्स की चिंता इसलिए भी बढ़ी है क्योंकि प्रस्तावित उपयोग के आधार पर भूमि पर भविष्य की विकास गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं। खासकर जिन क्षेत्रों को शहरी विस्तार की संभावनाओं के आधार पर निवेश योग्य माना जा रहा है, वहां अंतिम भू-उपयोग का निर्धारण महत्वपूर्ण होगा। डेवलपर्स को भी अंतिम नक्शे का इंतजार 62 गांवों के नियोजन क्षेत्र में आने के बाद रियल एस्टेट क्षेत्र की गतिविधियां भी इस बात पर निर्भर करेंगी कि किन इलाकों को आवासीय, मिश्रित, कृषि या हरित क्षेत्र में रखा जाता है। क्रेडाई सहित रियल উভয় एस्टेट क्षेत्र से जुड़े संगठन भी मास्टर प्लान को स्पष्ट रूप से लागू करने और भू-उपयोग की स्थिति जल्द सामने लाने की मांग करते रहे हैं। देरी ने बढ़ाया असमंजस मास्टर प्लान 2041 की प्रक्रिया लंबे समय से चर्चा में है। सितंबर 2025 में प्रकाशित रिपोर्ट में भी 62 गांवों को नियोजन क्षेत्र में शामिल किए जाने, योजना के मसौदा स्तर पर होने तथा आपत्तियों और सुझावों की प्रक्रिया का उल्लेख किया गया था। अंतिम स्वरूप सामने नहीं आने से जमीन मालिकों के लिए यह तय करना मुश्किल बना हुआ है कि भविष्य में उनकी भूमि का नियोजित उपयोग क्या होगा।जबलपुर के विस्तार की दृष्टि से 62 गांवों का नियोजन क्षेत्र में शामिल होना महत्वपूर्ण है। लेकिन इसका वास्तविक असर तभी स्पष्ट होगा, जब अंतिम मास्टर प्लान और लैंड यूज मैप सामने आएगा। फिलहाल कृषि या ग्रीन बेल्ट से संबंधित चर्चाओं को संभावित प्रस्ताव से अधिक नहीं माना जा सकता। इस संबंध में असिस्टेंट डायरेक्टर टीएनसीपी विपुल माहुले ने कहा कि फिलहाल मास्टर प्लान से जुड़ी जानकारी उनके पास है यह कार्य शासन स्तर पर होना है। recent visitors 26

भाजपा के सांसद-विधायक पहुंचे SP ऑफिस,जुआ फड़ पर पुलिस की रेड, पूर्व BJP मंडल अध्यक्ष का नाम आते ही मचा बवाल

BJP MPs and MLAs arrive at the SP’s office, police raid a gambling den, and the former BJP Mandal president’s name sparks uproar. विशेष संवाददाता: राम मेहरा  भोपाल। जिले में पुलिस की जुआ विरोधी कार्रवाई के बाद अब सियासी हलचल तेज हो गई है। सेवढ़ा क्षेत्र में पुलिस द्वारा जुआरियों के खिलाफ की गई कार्रवाई के दो दिन बाद भिंड-दतिया सांसद संध्या राय और सेवढ़ा विधायक प्रदीप अग्रवाल दतिया एसपी कार्यालय पहुंचे। दोनों जनप्रतिनिधियों ने कार्रवाई को गलत बताते हुए पुलिस अधीक्षक से मामले की जांच की मांग की। एसपी ने मामले की जांच एएसपी मंजीत चावला को सौंप दी है। क्या है पूरा मामला? मामला 10 सितंबर की रात का बताया जा रहा है। पुलिस अधीक्षक मयूर खंडेलवाल के निर्देश पर जिले में जुआ-सट्टे के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत अतरैटा थाना, लांच थाना और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने सेवढ़ा के भगुवापुरा थाना क्षेत्र में अमित चौहान ढाबे के पास रात करीब डेढ़ बजे दबिश दी। पुलिस के मुताबिक, मुखबिर से सूचना मिली थी कि ढाबे के पास जुआ खेला जा रहा है। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने मौके पर घेराबंदी की और कथित तौर पर जुआ खेलते हुए आठ लोगों को गिरफ्तार किया। पुलिस ने मौके से नकदी और ताश के पत्ते भी जब्त किए। पकड़े गए आरोपियों की पहचान नरेन्द्र नरवरिया, जितेन्द्र चौहान निवासी बस्तूरी, श्रीकांत शाक्य निवासी भिंड, कोमल चौहान निवासी बस्तूरी, आकाश राजपूत निवासी मौ, पुत्तू शाक्य निवासी भिंड, सोनू उर्फ सुरेन्द्र सिंह चौहान निवासी बस्तूरी और पान सिंह कुशवाह निवासी डिरोलीपार के रूप में हुई है। पूर्व मंडल अध्यक्ष का नाम सामने आने से मामला बढ़ गया  पुलिस कार्रवाई के बाद मामला उस समय चर्चा में आ गया, जब गिरफ्तार किए गए लोगों में सोनू उर्फ सुरेन्द्र सिंह चौहान का नाम सामने आया। बताया जा रहा है कि सुरेन्द्र सिंह चौहान भाजपा के पूर्व मंडल अध्यक्ष और पूर्व जिला मंत्री रह चुके हैं। इसके बाद स्थानीय भाजपा नेताओं और संगठन से जुड़े लोगों में कार्रवाई को लेकर नाराजगी सामने आई। पार्टी से जुड़े नेताओं ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे गलत बताया और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। सांसद-विधायक पहुंचे एसपी कार्यालय मामले को लेकर शनिवार को भिंड-दतिया सांसद संध्या राय और सेवढ़ा विधायक प्रदीप अग्रवाल दतिया एसपी कार्यालय पहुंचे। दोनों ने पुलिस अधीक्षक मयूर खंडेलवाल से मुलाकात कर पूर्व मंडल अध्यक्ष के खिलाफ की गई जुआ एक्ट की कार्रवाई पर आपत्ति जताई और मामले की जांच की मांग करते हुए ज्ञापन सौंपा। बताया जा रहा है कि सांसद और विधायक ने एसपी से बंद कमरे में करीब एक घंटे तक चर्चा की। इस दौरान भाजपा प्रदेश प्रवक्ता एवं पूर्व विधायक घनश्याम पिरोनिया, पूर्व जिलाध्यक्ष विक्रम सिंह बुंदेला, पूर्व जिला उपाध्यक्ष कालीचरण कुशवाह, पूर्व मंडल अध्यक्ष प्रवीण श्रीवास्तव, जीतू कमरिया सहित बड़ी संख्या में भाजपा नेता मौजूद रहे। बैठक के बाद पुलिस अधीक्षक मयूर खंडेलवाल ने मामले की निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया। इसके बाद जांच की जिम्मेदारी एएसपी मंजीत चावला को सौंप दी गई। जांच रिपोर्ट पर टिकी नजर पुलिस की कार्रवाई के बाद अब मामले को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। एक ओर पुलिस का कहना है कि अभियान के तहत जुआ खेलने वालों के खिलाफ कार्रवाई की गई, वहीं भाजपा नेताओं ने कार्रवाई को गलत बताते हुए जांच की मांग की है। अब एएसपी मंजीत चावला की जांच रिपोर्ट महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि पुलिस की कार्रवाई नियमों के तहत सही थी या कार्रवाई को लेकर लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है। फिलहाल मामले ने पुलिस कार्रवाई के साथ-साथ स्थानीय राजनीति में भी हलचल बढ़ा दी है और अब सभी की नजर जांच के नतीजे पर टिकी हुई है। recent visitors 14

सावधान कहीं आपके साथ तो नहीं हो रहा: 2 माह के राशन के लिए लगवाए अंगूठे, मिला सिर्फ 1 माह का राशन

Be careful, this isn’t happening to you: Thumb impressions for 2 months’ ration, only received 1 month’s ration शिवपुरी । बामौरकलां में शासकीय उचित मूल्य दुकान पर राशन वितरण को लेकर हितग्राहियों ने गड़बड़ी का आरोप लगाया है। आरोप है कि 2-2 माह के राशन के लिए अंगूठे लगवाने के बाद केवल 1-1 माह का राशन दिया गया, जिसके विरोध में हितग्राहियों ने दुकान पर पहुंचकर प्रदर्शन किया। मामला सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद सामने आया। इसके बाद सहायक विक्रेता धर्मेंद्र लोधी दुकान पर पहुंचे और हितग्राहियों को बचा हुआ राशन वितरित किया। खाद्य विभाग ने दुकान के पोर्टल रिकॉर्ड की जांच की है और सेल्समैन व सहायक विक्रेता को नोटिस देने की बात कही है। तीन दिन दुकान बंद मिलने से बढ़ा विवाद बामौरकलां आदिवासी बस्ती के 40 से अधिक हितग्राही अपने पंच गब्बर सिंह यादव के साथ उचित मूल्य दुकान पहुंचे थे। हितग्राहियों का कहना था कि अंगूठे लगवाने के बाद उन्हें एक माह का राशन ही मिला था। शेष राशन बाद में देने का आश्वासन दिया गया था। इसी उम्मीद में हितग्राही लगातार तीन दिनों तक दुकान पहुंचे, लेकिन दुकान बंद मिली और उन्हें बिना राशन लिए लौटना पड़ा। 11 सितंबर को दुकान पर जताया विरोध 11 सितंबर को हितग्राही दोबारा दुकान पहुंचे। उन्होंने दुकान पर बैठकर विरोध दर्ज कराया। पंच गब्बर सिंह यादव ने इस दौरान वीडियो बनवाया, जो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो सामने आने के बाद सहायक विक्रेता धर्मेंद्र लोधी राशन बांटने पहुंचे। इसके बाद हितग्राहियों को उनका बचा हुआ राशन दे दिया गया। पोर्टल रिकॉर्ड में 7, 8 और 9 सितंबर की एंट्री पिछोर के कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी गौरव कदम के अनुसार, हितग्राहियों के अंगूठे एक दिन पहले लगाए गए थे और शुक्रवार को राशन का वितरण कर दिया गया। दुकान के पोर्टल रिकॉर्ड की जांच में 10 सितंबर को कोई ट्रांजेक्शन नहीं मिला। वहीं 7, 8 और 9 सितंबर को एक-एक ट्रांजेक्शन दर्ज मिला। सेल्समैन और सहायक विक्रेता को नोटिस जेएसओ गौरव कदम ने कहा कि मामले को लेकर सेल्समैन और सहायक विक्रेता को नोटिस जारी किया जाएगा। पोर्टल पर उपलब्ध रिकॉर्ड को भी जांच के दायरे में लिया गया है। बामौरकलां में सामने आया यह मामला ऐसे समय में सामने आया है, जब कोलारस और पोहरी क्षेत्र में PDS राशन वितरण में धांधली के मामलों में FIR दर्ज हो चुकी है। जिला आपूर्ति अधिकारी ने जांच की बात कही जिला आपूर्ति अधिकारी शिवपुरी तुलेश्वर कुरें ने कहा कि राशन के संबंध में जेएसओ कदम दुकान पर गए थे। यदि पहले हितग्राहियों के अंगूठे लगवाए गए थे और राशन बाद में वितरित किया गया है, तो मामले की जांच कराई जाएगी। तुलेश्वर कुरें, जिला आपूर्ति अधिकारी शिवपुरी ने कहा कि पूरे घटनाक्रम की स्थिति जांच के बाद स्पष्ट होगी। recent visitors 22

लाइव सर्जरी से डॉक्टरों ने सीखे घुटनाप्रत्यारोपण के तरीके: जबलपुर में यूनिकॉम्पार्टमेंटल नी रिप्लेसमेंट डे पर हुई मास्टर क्लास, इंदौर के विशेषज्ञ भी हुए शामिल

Doctors learned knee replacement techniques through live surgery: A master class was held in Jabalpur on Unicompartmental Knee Replacement Day, with experts from Indore also attending. विशेष संवाददाता : जितेन्द्र श्रीवास्तव/अर्पिता श्रीवास्तव  जबलपुर । मध्य प्रदेश इंडियन ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन (MPIOA), एनएससीबी (NSCB) मेडिकल कॉलेज के अस्थि रोग विभाग और जबलपुर ऑर्थोपेडिक्स सोसाइटी ने मिलकर “यूनिकॉम्पार्टमेंटल नी रिप्लेसमेंट (UKR) डे” मनाया। इस मौके पर एक अकादमिक और क्लिनिकल मास्टरक्लास का आयोजन किया गया। इसका मकसद डॉक्टरों को घुटने के सीमित हिस्से के गठिया, सही मरीज चुनने और आधुनिक सर्जरी की नई जानकारी देना था। इसका विषय “Together for Better Mobility” रखा था। मेडिकल कॉलेज से लाइव प्रसारण कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण एनएससीबी मेडिकल कॉलेज से लाइव प्रसारित यूकेआर सर्जरी थी। होटल में मौजूद डॉक्टरों ने रिमोट लाइव वीडियो के जरिए ऑपरेशन, बोन प्रिपरेशन, इंस्ट्रूमेंटेशन और इम्प्लांट पोजिशनिंग के अलग-अलग चरणों को ध्यान से देखा। साथ ही, सम्मेलन में घुटने की बायोमैकेनिक्स, यूकेआर के सिद्धांत और सर्जरी की प्रक्रियाओं पर विशेषज्ञों ने विस्तार से बताया। क्लिनिकल केस प्रेजेंटेशन डॉक्टरों के प्रैक्टिकल स्किल को बेहतर बनाने के लिए क्लिनिकल केस प्रेजेंटेशन के साथ ‘हैंड्स ऑन सॉबोन मॉडल वर्कशॉप’ भी हुई। इसमें शामिल लोगों ने इम्प्लांट लगाने का सीधा अभ्यास किया। इस मास्टरक्लास में इंदौर से आए विशेषज्ञ डॉ. हेमंत मांडोवरा और डॉ. अनुराग पंवेल के साथ इलाके के कई सीनियर ऑर्थोपेडिक सर्जन भी शामिल हुए। आधुनिक तकनीक की जानकारी मिली आयोजन अध्यक्ष डॉ. केके पांडे और आयोजन सचिव डॉ. उत्सव कटाकवार ने बताया कि ऐसे प्रैक्टिकल ट्रेनिंग से डॉक्टरों को आधुनिक तकनीकों की जानकारी मिलती है इसका सीधा फायदा मरीजों को सुरक्षित इलाज और जल्दी ठीक होने के रूप में मिलता है। यह आयोजन जबलपुर में ऑर्थोपेडिक शिक्षा और घुटना प्रत्यारोपण सेवाओं को बढ़ाने में एक अहम कदम रहा। recent visitors 24