भगवान विश्‍वकर्मा की जयंती बड़े ही हर्ष उल्लास के साथ मनाई गई

Lord Vishwakarma’s birth anniversary was celebrated with great joy सुशील दामले (विशेष संवाददाता) भोपाल। राजधानी में ब्रह्मांड के रचयिता भगवान विश्‍वकर्मा की जयंती बड़े ही हर्ष उल्लास के साथ मनाई गई,धार्मिक शास्त्रों के अनुसार माघ शुक्ल त्रयोदशी तिथि को भगवान विश्वकर्मा के पूजन का विशेष महत्व है,भगवान विश्वकर्मा को देवताओं का शिल्पी माना गया है,उन्होंने ब्रह्मांड की हर वस्तु की रचना की है,उन्होंने कई नगर,अस्त्र शस्त्र सहित कई बड़े मंदिरों और महलों का निर्माण भी किया है उसी कड़ी में राजधानी स्थित सिद्ध श्री हनुमान मंदिर व विश्वकर्मा भगवान मंदिर, भेल स्टेट ऑफिस के सामने पिपलानी में, भगवान विश्‍वकर्मा की जयंती बड़े ही हर्ष उल्लास के साथ मनाई गई,कार्यक्रम मे मुख्य अतिथि के रूप में वार्ड क्रमांक 67के पार्षद ममता विश्वकर्मा एवं मनोज विश्वकर्मा उपस्थित हुए,कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलित कर भगवान विश्‍वकर्मा की आरती के साथ हुई,साथ ही कार्यक्रम में समाज के होनहार बच्चों को सम्मानित किया गया,कार्यक्रम में मुख्य रूप से विश्वकर्मा भेल मंदिर समिति अध्यक्ष रमेश विश्वकर्मा,उपाध्यक्ष रूप सिंह विश्वकर्मा,सतीश विश्वकर्मा एवं समाज के वशिष्ठ समाजसेवी उपस्थित रहे भगवान विश्वकर्मा मंदिर,भेल मंदिर समिति,पिपलानी, भोपाल में विश्वकर्मा समाज के द्वारा सृष्टि के रचयिता भगवान विश्वकर्मा जी का प्राकट्योत्सव बड़े ही धूमधाम से मनाया गया। जिसमें समाज के कई वरिष्ठ समाजसेवी सम्मिलित हुए। अध्यक्ष रमेश विश्वकर्माउपाध्यक्ष रूप सिंह विश्वकर्मासतीश विश्वकर्माहरिनारायण विश्वकर्माराम बाबू विश्वकर्मागोविन्द विश्वकर्माराधे श्याम विश्वकर्मासन्तोष विश्वकर्माविनोद विश्वकर्मालखन लाल विश्वकर्मा recent visitors 296

एप अटेंडेंस सिस्टम: एमपी के IAS अधिकारी हाजिरी लगाने तैयार नहीं: सुबह 10 से शाम 6 बजे तक ऑफिस में रुकना होगा

App Attendance System: IAS officers of MP are not ready to mark attendance भोपाल। मध्यप्रदेश के प्रशासनिक मुख्यालय वल्लभ भवन में एप से अटेंडेंस का प्रयोग IAS अधिकारियों की बेरुखी के कारण अटक गया है। मंत्रालय में फेस अटेंडेंस सिस्टम को 1 जनवरी से लागू किया जाना था लेकिन ये 1 फरवरी से भी लागू नहीं हो पाया है। अधिकारियों के रजिस्ट्रेशन नहीं होने के चलते इसे फरवरी में भी लागू नहीं किया जा सका है। हालात ये हैं कि जिन प्रशासनिक अधिकारियों पर व्यवस्था बनाने की जिम्मेदारी है, वह ही नई व्यवस्था का पालन नहीं कर रहे हैं। वल्लभ भवन में पदस्थ 50 से ज्यादा IAS में से सिर्फ 6 ही आधार बेस्ड फेस अटेंडेंस एप से हाजिरी लगा रहे हैं। आईएएस को भी करनी होगी 8 घंटे नौकरी प्रदेश में इनकम शो करने के बाद अब आईएएस अधिकारियों को काम पर आने-जाने का हिसाब भी देना होगा। आईएएस अधिकारियों को कर्मचारियों की तरह आठ घंटे की ड्यूटी पूरी करनी होगी और इसके लिए जियो टैगिंग बेस्ड एप पर हाजिरी लगानी होगी। मंत्रालय से शुरू किए जा रहे फेस अटेंडेंस एप के माध्यम से हाजिरी लगाने की प्रक्रिया में कर्मचारियों के साथ सभी अधिकारियों को भी शामिल किया गया है। व्यवस्था को लागू करने वाले सामान्य प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव संजय दुबे बताते हैं कि हम केवल कर्मचारियों को इसमें शामिल नहीं कर रहे हैं, बल्कि प्रदेश में पहली बार आईएएस अधिकारियों को भी एप से हाजिरी लगानी होगी। देश में पहली बार ऐसा सबसे बड़ा प्रयोग प्रमुख सचिव दुबे बताते हैं कि इस तरह की अटेंडेंस प्रक्रिया देश का अपनी तरह का सबसे बड़ा प्रयोग है। अभी तक किसी राज्य ने आधार बेस्ड फेस रिकॉग्नाइजेशन से अटेंडेंस लगानी शुरू नहीं की है। यह बहुत सरल एप है, जो आधार से जुड़ा है। इसे लागू करने वालों से लेकर अटेंडेंस लगाने वालों तक को न तो कोई इक्यूपमेंट खरीदना है, न ही डाटा ही अलग से इकट्‌ठा किया जाना है। बिना बड़े बजट के खर्च किए मंत्रालय के सभी अधिकारियों–कर्मचारियों की उपस्थिति एप के माध्यम से दर्ज हो रही है। प्रदेश भर में लागू होगा एप बेस्ड अटेंडेंस सिस्टम प्रदेश के मंत्रालय में इस तरह एप से अटेंडेंस लगाने का प्रयोग नए मुख्य सचिव अनुराग जैन के आने के बाद शुरू हुआ है। यह कहा जाता है कि प्रशासनिक मुखिया का विचार है कि सबसे पहले मंत्रालय में सभी अधिकारी-कर्मचारी एक व्यवस्था के तहत नियम से अपने ड्यूटी आवर्स पूरे करें, इसके बाद इस प्रयोग को पूरे प्रदेश में लागू किए जाने की योजना है। इसकी पुष्टि करते हुए सामान्य प्रशासन के प्रमुख सचिव संजय दुबे कहते हैं कि जब मंत्रालय में एप से अटेंडेंस हो सकती है तो बाकी कार्यालयों में क्यों नहीं? हम इसे सफलतापूर्वक यहां लागू करेंगे। इसके बाद कलेक्टर कार्यालयों में और प्रदेश के अन्य कार्यालयों में ले जाया जाएगा। इससे सरकारी कर्मचारियों की यह छवि सुधरेगी कि वे देर से दफ्तर आते हैं और जल्दी चले जाते हैं। जनता में छवि बेहतर होगी तो कर्मचारियों की उत्पादकता बढ़ेगी और प्रशासनिक कार्यों में गति आएगी। अधिकारी ही बन रहे व्यवस्था में रोड़ा प्रशासनिक मुखिया भले ही बेहतर सोच के साथ नई व्यवस्था को लागू कर रहे हों, लेकिन इसकी राह में सबसे बड़ा रोड़ा प्रशासनिक अधिकारी ही बन रहे हैं। फरवरी के पहले सप्ताह तक 1266 कर्मचारी ऐसे थे, जो अटेंडेंस पोर्टल पर जाकर रजिस्ट्रेशन कर चुके हैं। वहीं, कुल रजिस्टर्ड डिवाइस 755 हैं यानी जिन्होंने अपने एंड्रॉयड डिवाइस में एप डाउनलोड कर लिया है। इनमें से आधे यानी करीब 350 प्रतिदिन इस एप से हाजिरी लगा रहे हैं, लेकिन मात्र 10 प्रतिशत अधिकारी ही इसका पालन कर रहे हैं। सामान्य प्रशासन विभाग के एक अधिकारी बताते हैं कि मंत्रालय में करीब 50 आईएएस पदस्थ हैं। इनमें से छह ही एप की मदद से हाजिरी लगा रहे हैं। हाजिरी लगाने वालों में व्यवस्था को लागू करने वाले विभाग सामान्य प्रशासन के उप सचिव अजय कटेसरिया, वित्त विभाग के प्रमुख सचिव मनीष रस्तोगी सहित उनके विभाग के आईएएस तन्वी सुंद्रियाल, राजीव मीणा, रोहित सिंह और लोकेश जाटव शामिल हैं। इसके अतिरिक्त पूरे मंत्रालय से इक्का-दुक्का आईएएस ही इस व्यवस्था का पालन कर रहे हैं। 1 से 3.30 तक लंच पर चले जाते हैं आईएएस नायक बताते हैं कि कर्मचारियों के बारे में कहा जाता है कि वह शाम को जल्दी घर चले जाते हैं, लेकिन आईएएस बैठे रहते हैं। हकीकत कौन नहीं जानता, सभी आईएएस एक बजे लंच पर घर चले जाते हैं। साढ़े तीन बजे ही आते हैं। कोई मंत्रालय में लंच टाइम में आईएएस से मिलकर दिखा दे। उनके पास घोड़ा है, गाड़ी है, ड्राइवर है। कर्मचारी दो-तीन बसें बदलकर आता है। recent visitors 204

भारतीय किसान संघ का आज भोपाल में वल्लभ भवन का घेराव करेंगे; बिजली-फसल रेट मुख्य मुद्दे

Bharatiya Kisan Sangh will surround Vallabh Bhawan in Bhopal today; electricity and crop rates are the main issues भोपाल में प्रदर्शन को लेकर भारतीय किसान संघ गांव-गांव जाकर बैठकें भी कर चुका है। भोपाल। बिजली और फसल के रेट जैसे कई मुद्दों पर हजारों किसान बुधवार को भोपाल में बड़ा प्रदर्शन करेंगे। भारतीय किसान संघ के बैनर तले ये प्रदर्शन होगा। लिंक रोड नंबर-1 पर पहले धरना, फिर अन्नदाता अधिकार रैली और वल्लभ भवन का घेराव किया जाएगा। प्रदर्शन को लेकर प्रशासन अलर्ट मोड पर है। इधर, किसान संघ ने सख्त चेतावनी दी है कि बाहर से आने वाले किसानों को पुलिस नहीं रोकें। वर्ना, वे वहीं पर धरना प्रदर्शन शुरू कर देंगे। भारतीय किसान संघ ने मध्यप्रदेश सरकार के खिलाफ विरोध का बिगुल फूंका है। लिंक रोड नंबर-1 स्थित भाकिसं कार्यालय के सामने सुबह 11 बजे बाद धरना शुरू होगा। दोपहर 3 बजे से रैली के रूप में किसान वल्लभ भवन पहुंचेंगे और घेराव करेंगे। संघ के मध्य भारत प्रांत अध्यक्ष सर्वज्ञ दीवान ने कहा, प्रदेश में किसान राजस्व विभाग के फौती नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन, बटांकन, नक्शा सुधार जैसे कार्यों में की जा रही लूट से परेशान हो गया है। निरंकुश अफसरशाही के खिलाफ प्रदेश का किसान खेतों से निकलकर राजधानी की सड़कों पर 5 फरवरी को अपने अधिकार के लिए अन्नदाता अधिकार रैली और वल्लभ भवन घेराव कार्यक्रम में शामिल होगा। ज्ञापन देने के बावजूद नहीं चेती सरकार भाकिसं के पदाधिकारियों का कहना है कि किसान संघ ने किसानों की समस्याओं को लेकर तहसील व जिला स्तर मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपे, लेकिन आज तक किसानों की किसी भी समस्या पर प्रशासन ने कोई ध्यान नहीं दिया है। इसलिए किसान अपनी समस्याओं को सुनाने और निदान के लिए सरकार के दरवाजे पर आने के लिए मजबूर है। ये हैं किसानों की प्रमुख मांगें फौती नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन, बटांकन, ऑनलाइन रिकॉर्ड और नक्शा सुधारा जाए। हॉर्स पावर क्षमता वृद्धि वापस ली जाए। जले ट्रांसफॉर्मर और लाइनें समय सीमा में बदली जाए। डीएपी, यूरिया खाद सहकारिता के माध्यम से नगद वितरण समय पर किया जाए। सभी मंडियों में फ्लेट कांटों से तुलाई अनिवार्य हो। मंडी परिसर में ही भुगतान हो। नकली दूध बनाने वालों पर सख्त कार्रवाई हो। प्रदेश में गो-अभयारण्य खोले जाएं। प्रस्तावित और स्वीकृत नहरों के कार्य जल्द पूरा हो। सभी फसलों को एमएसपी से नीचे नहीं खरीदा जाए। किसानों के झूठे प्रकरण वापिस हों। पूसा बासमती धान को जीआई टैग दिलाया जाए। धान 3100 रुपए व गेहूं 2700 रुपए प्रति क्विंटल खरीदा जाए। गांव-गांव में किसानों की हुई बैठकें अन्नदाता अधिकार रैली और वल्लभ भवन के घेराव में किसानों को शामिल करने के लिए किसान संघ के ग्राम समिति से लेकर प्रांत स्तर तक के पदाधिकारियों ने गांव-गांव बैठकें कीं। जिसमें किसानों की विभिन्न समस्याओं की चर्चा कर भोपाल आने के लिए आमंत्रित किया गया। बढ़े हुए बिजली बिलों से किसान त्रस्त किसानों का कहना है कि बिजली विभाग के द्वारा कृषि विद्युत कनेक्शन में हॉर्स पावर भार वृद्धि करने के कारण किसानों को बढ़े हुए बिजली के बिल भेजे जा रहे हैं। जिससे वे नाराज हैं। किसान बिजली कंपनियों द्वारा बिना जांच के भार वृद्धि करने के कारण आंदोलन के मूड में हैं और उसने सरकार के खिलाफ खुला मोर्चा खोल दिया है। recent visitors 165

बड़ामलहरा : सचिव और रोजगार सहायक द्वारा अवैध वसूली के खिलाफ सरपंच और ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट का किया घेराव

Badamalhara: Sarpanch and villagers gheraoed the collectorate against illegal recovery by the secretary and employment assistant सरपंच बोलीं- जो पैसे नहीं देते, उन्हें योजनाओं का लाभ नहीं मिलता सरपंच ने पंचायत सचिव और रोजगार सहायक पर अवैध वसूली के आरोप लगाए। छतरपुर । बड़ामलहरा जनपद की ग्राम पंचायत भोजपुरा में भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। महिला सरपंच राजकुमारी अहिरवार ने मंगलवार को दो दर्जन से अधिक ग्रामीणों के साथ कलेक्टर की जनसुनवाई में पहुंचकर पंचायत सचिव अभिषेक जैन और रोजगार सहायक अजेंद्र सिंह परमार पर अवैध वसूली के आरोप लगाए हैं। सरपंच प्रतिनिधि लखन लाल अहिरवार के अनुसार, दोनों अधिकारी सरकारी योजनाओं का लाभ देने के लिए ग्रामीणों से अवैध वसूली करते हैं। राशन कार्ड, वृद्धावस्था पेंशन, आवास योजना और मृत्यु प्रमाण-पत्र जैसे आवश्यक दस्तावेजों के लिए पैसों की मांग की जाती है। जो लोग पैसे नहीं दे पाते, उन्हें योजनाओं से वंचित कर दिया जाता है। वहीं,रोजगार सहायक अजेंद्र सिंह परमार पर आरोप है कि वह पिछले 15 वर्षों से अपनी दबंग छवि का दुरुपयोग कर रहे हैं। आवास योजना में पात्र लोगों की अनदेखी कर संपन्न परिवारों को लाभ पहुंचाया जा रहा है। एक ग्रामीण रमेश आदिवासी का मामला सामने आया है, जिनका नाम 2017 की आवास योजना सूची से बिना किसी कारण के काट दिया गया। व्यक्तिगत दुश्मनी के कारण की जा रही शिकायतें हालांकि, बड़ामलहरा जनपद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एसके मिश्रा का कहना है कि इस तरह की शिकायत पहले भी आई थी। इंस्पेक्टर से कराई गई जांच में रिश्वत के आरोप निराधार पाए गए थे। उनका मानना है कि यह शिकायतें व्यक्तिगत दुश्मनी के कारण की जा रही हैं। अधिकारियों को हटाने की मांग सरपंच और ग्रामीणों ने कलेक्टर से दोनों अधिकारियों को तत्काल हटाकर नई नियुक्तियां करने की मांग की है। recent visitors 242

केन्द्र सरकार ने दी मंजूरी, एमपी के 10 शहरों में ‘कचरे’ से बनेगी ‘बिजली’

electricity will be produced from waste in 10 urban bodies of mp नगरीय विकास विभाग ने घरेलू कचरे के निस्तारण के मामले में बड़े जुर्माने से बचने के लिए प्रयास शुरू किए हैं। इसके तहत कहीं कचरे से सीएनजी बनाने के प्लांट लगाए जा रहे हैं तो कहीं कंपोस्टिंग के प्लांट लग रहे हैं। इसी सिलसिले में अब मध्यप्रदेश के 10 शहरों में कचरे से बिजली बनाने के प्लांट लगाए जा रहे हैं। इन्हें केन्द्र से अनुमति मिल गई है। यह वर्ष 2026 तक शुरू होने की संभावना है। सरकार ने प्रदेश में नगरीय निकायों को वर्ष 2027 तक कचरा प्रबंधन में आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य तय किया है। यहां पहले से बनाई जा रहीरीवा, जबलपुर में कचरे से बिजली बनाने की यूनिट संचालित हैं। प्रतिदिन 950 टन कचरे का प्र-संस्करण कर 18 मेगावॉट बिजली पैदा की जा रही है। लीगेसी वेस्ट खत्म करने में मिलेगी मदद एनजीटी ने 2022 में सॉलिड वेस्ट प्रबंधन में लापरवाही के लिए 3 हजार करोड़ का जुर्माना लगाया था। तत्कालीन सीएस ने छह माह में प्रबंधन करने का शपथ-पत्र दिया था। इसके बाद जुर्माना स्थगित किया गया, लेकिन अब भी निकायों की डंपिंग साइट पर 25 लाख टन से ज्यादा लीगेसी वेस्ट जमा है। बिजली प्लांट बनने से वेस्ट भी खत्म करने में मदद मिलेगी। जुर्माने से बचा जा सकेगा। हाल ही में गीले कचरे की कंपोस्टिंग के लिए कटनी, सागर में स्वचालित यूनिट लगाई गई हैं। इन 10 नई इकाइयों को अनुमति 10 नगरीय निकायों के लिए क्लस्टर आधार पर 1018.85 टन प्रतिदिन क्षमता की इकाइयों के लिए मंजूरी मिली है। इन निकायों में सांची, हरदा, नया हरसूद, शाहगंज, आलीराजपुर, देपालपुर, उन्हेल, बाबई, धारकोटि और इंदौर शामिल हैं। इनमें आसपास के स्थानों को भी जोड़ा गया है। जहां कचरा कम निकलता है वहां समीपस्थ अन्य शहरों को जोड़ा गया है। इंदौर-उज्जैन को मिलाकर 607 टन कचरे से बिजली बनाने की यूनिट्स का काम प्रस्तावित है। इसके शुरू होने से 12.15 मेगावाट बिजली बन सकेगी। recent visitors 134

डीजे बजाया कैसे तूने… शोर सुनकर थानेदार पर चढ़ी वर्दी की गर्मी!

How did you play DJ? Hearing the noise, the heat of the uniform reached the police officer! सीधी ! यहां पर डीजे कैसे बजाया तूने, अभी सब सो रहे हैं तुम्हें नहीं पता है क्या… अपने बंगले से तमतमाए निकले टीआई साहब वर्दी की गर्मी से उबल रहे थे। डीजे बजाने वालों की मां-बहन एक करने पर उतारू थे। एक बुजुर्ग हाथ जोड़कर उनसे माफी मांग रहे थे लेकिन टीआई पर कोई असर नहीं हो रहा था। वह सिंघम वाले अंदाज में डीजे बजाने वाले कर्मियों की पिटाई करने में लगे थे। एक-एक को पकड़कर गाड़ी के अंदर डाल रहे थे। अब वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो टीआई का कहना है कि इसे काट छांट कर पेश किया गया है। वहीं, रीवा डीआईजी ने अब इस पर एक्शन लिया है। वायरल वीडियो पर सफाई वहीं, वीडियो वायरल होने के बाद टीआई की सफाई आई है। उन्होंने कहा कि जो वीडियो वायरल हुआ है, उसे काट छांट कर वायरल किया जा रहा है। टीआई पुष्पेंद्र मिश्रा ने कहा कि टीआई साहब की माने तो डीजे बजाने के वक्त मौजूद काफी लोग नशे में थे। पहले तो उन्हें तेज आवाज में डीजे बजाने से रोका गया और जब नहीं माने तो गुस्सा आ गया। पुष्पेंद्र मिश्रा चुरहट थाने में टीआई हैं। क्या है मामला बताया जा रहा है कि सीधी जिले के चुरहट में 31 जनवरी को गणपति पटेल नाम के शख्स पीएचई विभाग से रिटायर हुए, गणपति जब रिटायर्ड हुए तो पीएचई विभाग के उनके परिवार और साथियों ने उनकी विदाई के लिए पार्टी रखी, इसमें डीजे भी आया। दावा किया जा रहा है कि विदाई का काफिला जब सरकारी, पुलिस कॉलोनी के पास से गुजरा तो जनचर्चा के मुताबिक टीआई साहब अपने बंगले में आराम कर रहे थे। डीजे के शोर की वजह से चुरहट के टीआई साहब और भी ज्यादा भड़क गए। फोन पर बुलाया पुलिस बल उन्होंने फोन पर अपने दल-बल को बुलाया और अभद्र गालियां देते हुए कुछ लोगों के बाल पकड़कर गाड़ी में ठूंसकर थाने ले गए। तीन लोगों के खिलाफ एफआईआर हुई है। पुलिस के व्यवहार को लेकर हो रही किरकिरी हालांकि प्रशासनिक तौर डीजे संचालकों के लिए मापदंड तय हैं। प्रावधान से अधिक आवाज में बजाने पर कार्रवाई के नियम हैं। लेकिन कार्रवाई के नाम पर गाली गलौज के नियम हैं। वायरल वीडियो में साफ दिख रहा है कि पुलिस अधिकारी वर्दी की धौंस दिखा रहे हैं। इससे पुलिस की फजीहत हो रही है। कांग्रेस ने शेयर किया वीडियो वहीं, इस घटना का वीडियो कांग्रेस ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर शेयर किया है। साथ ही एमपी पुलिस के रवैए पर सवाल उठाया है। छह धाराओं में केस दर्ज इसके साथ ही चुरहट पुलिस ने तीन आरोपियों आर्यन पटेल, प्रकाश पटेल और कार्तिक पटेल के खिलाफ कोलाहल नियंत्रण अधिनियम के सेक्सन 15 के अलावा बीएनएस की धारा 132, 121, 221, 351 (3) 3 (5) के तहत व अपराध दर्ज करते हुए, उन्हें जेल भेज दिया है। बचाव में टीआई ने क्या कहा इस मामले में चुरहट टीआई पुष्पेंद्र मिश्रा ने कहा कि दिन में भी डीजे बजाने के लिए अनुमति होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर वायरल साढ़े 4 मिनट का वीडियो पूरा सच नहीं है। उन्होंने कहा कि घटनाक्रम का पूरा वीडियो 50 मिनट का है। टीआई ने कहा कि तेज आवाज में डीजे बजाने की शिकायत पर जब सतेन्द्र द्विवेदी और प्रतीक पांडेय ने हस्तक्षेप किया तो आरोपी ने पुलिसकर्मियों से मारपीट शुरु कर दी, जिससे उन्हें चोटें भी आई हैं। थानेदार पर हो गया एक्शन वीडियो सामने आने के बाद थानेदार पर एक्शन हो गया है। डीआईजी रीवा ने थाना प्रभारी चुरहट को 1 वर्ष की वेतन वृद्धि रोके जाने के दंड से दंडित किया है। साथ ही मामले की विस्तृत जांच की जा रही है। इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। [/more] recent visitors 171

किस कानून में लिखा है कि सीएम के कार्यक्रम में निगमायुक्त डीजल भरवाए? मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का सवाल

HIGHCOURT ON NO DIESEL PAYMENT जबलपुर ! मध्य प्रदेश में मोहन यादव सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री का सम्मान कार्यक्रम जबलपुर में रखा गया था, जिसमें बसों के डीजल का मामला कोर्ट पहुंच गया है. दरअसल, सीएम के सम्मान कार्यक्रम के लिए अधिग्रहित की गई बसों में भरे गए डीजल का अबतक भुगतान नहीं किया गया है, जिसके बाद एक पेट्रोल पंप संचालक ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है. सीएम के कार्यक्रम के लिए 6 लाख का डीजल दरअसल, जबलपुर के आईएसबीटी बस स्टैंड के पास स्थित पेट्रोल पंप के संचालक सुगम चंद्र जैन ने ये याचिका दायर की है. याचिका में कहा गया था कि 3 जनवरी 2024 को मुख्यमंत्री के सम्मान कार्यक्रम का आयोजन जबलपुर में किया गया था. कार्यक्रम के लिए अधिग्रहित बसों में डीजल भरने के लिए नगर निगम के खाद्य अधिकारी ने व्यक्तिगत रूप से आकर निर्देश दिए थे. उन्होंने कहा था कि निगमायुक्त ने उक्त निर्देश दिए थे. कार्यक्रम के लिए अधिग्रहित बसों में लगभग 6 लाख रु का डीजल उनके पेट्रोल पंप से भरा गया था. बिल भुगतान कराने के लिए की कई बार की मांग अगस्त 2024 में याचिकाकर्ता ने बिल भुगतान के लिए संयुक्त कलेक्टर व जिला आपूर्ति अधिकारी व निगमायुक्त से संपर्क किया. इसके अलावा कलेक्टर कार्यालय से निगमायुक्त को राशि भुगतान के संबंध में आदेश जारी किए गए थे, पर भुगतान नहीं हुआ. एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता से पूछा कि अधिग्रहित बस में डीजल भरने के लिए प्रशासन की ओर से पीओएल जारी किया गया था या नहीं? याचिकाकर्ता ने इसपर जवाब दिया कि सिर्फ मौखिक आदेश जारी किए गए थे. बिना पीओल कैसे भर दिया बसों में डीजल? एकलपीठ ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए अपने आदेश में कहा है कि बिना किसी प्राधिकरण के याचिकाकर्ता ने बसों में कैसे डीजल भरा? इसके साथ ही कोर्ट ने संयुक्त कलेक्टर, जिला आपूर्ति अधिकारी व निगमायुक्त से एसोसिएशन व उसके सदस्य को पीओएल की प्रतिपूर्ति करवाने के निर्देश दिए हैं. कोर्ट ने कलेक्टर से मांगा जवाब कोर्ट ने इसके अलावा कलेक्टर से जवाब मांगा है कि किस कानून में यह लिखा है कि निगमायुक्त का दायित्व है कि वह मुख्यमंत्री की रैली में लगी बसों में डीजल भरवाए? एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि प्रथम दृष्टया यह सार्वजनिक धन के बड़े पैमाने पर गोलमाल का मामला प्रतीत हो रहा है. इस संबंध में एकलपीठ ने जिला कलेक्टर को हलफनामे में जवाब पेश करने के आदेश जारी किए हैं. एकलपीठ ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि याचिकाकर्ता अब याचिका वापस लेने का हकदार नहीं होगा. याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता आशीष रावत ने पैरवी की,,, recent visitors 152