मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा अब हमारा लक्ष्य एक जिला-एक विश्वविद्यालय का होना चाहिए

लखनऊ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि विगत सात वर्षों में सतत प्रयासों से प्रदेश में एक मंडल-एक विश्वविद्यालय की परिकल्पना पूरी हो चुकी है। मंडलों के बाद अब हमारा लक्ष्य एक जिला-एक विश्वविद्यालय का होना चाहिए। मुख्यमंत्री योगी ने राज्य के उच्च शिक्षा क्षेत्र में निजी निवेश को प्रोत्साहन देने के लिए नई नीति तैयार करने के निर्देश दिए हैं।  इस संबंध में हुई महत्वपूर्ण बैठक में उन्होंने प्रमुख दिशा-निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि विगत सात वर्षों में सतत प्रयासों से प्रदेश में एक मंडल-एक विश्वविद्यालय की परिकल्पना पूरी हो चुकी है। सभी 18 मंडलों में विश्वविद्यालयों की स्थापना हो चुकी है। कई मंडलों में निर्माण कार्य जारी है। मंडलों के बाद अब हमारा लक्ष्य एक जिला-एक विश्वविद्यालय का होना चाहिए। वर्तमान में 35 जनपदों में विश्वविद्यालय की उपलब्धता है, शेष जिलों में विश्वविद्यालयों के लिए निजी क्षेत्र बड़ा सहयोगी बन सकता है। उन्होंने कहा कि निजी निवेश उच्च शिक्षा तक पहुंच बढ़ाने के सरकारी प्रयासों में सहायक हो सकता है। इससे छात्रों के लिए उपलब्ध संस्थानों, पाठ्यक्रमों और सीटों की संख्या में वृद्धि होगी, साथ ही शिक्षा और अनुसंधान की गुणवत्ता को बढ़ाने के प्रयासों में भी सहायता मिलेगी। योगी ने कहा कि वर्तमान में उत्तर प्रदेश की ग्रास एनरोलमेंट रेट (जीइआर) 25.6 फीसद है, जिसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनइपी) के अनुसार 2035 तक 50 प्रतिशत तक बढ़ाना आवश्यक है। निजी निवेश प्रोत्साहन नीति इस अंतर को पूरा कर सकती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उच्च शिक्षा में निजी निवेश वर्तमान समय की आवश्यकता है। अन्य राज्यों की सम्बंधित नीति का अध्ययन करें। स्टेकहोल्डर्स से संवाद करें और यथाशीघ्र उच्च शिक्षा प्रोत्साहन नीति तैयार कर प्रस्तुत करें। नई नीति में निवेशकों को स्टाम्प ड्यूटी में छूट, कैपिटल सब्सिडी आदि प्रोत्साहन को यथोचित स्थान दें। उन्होंने कहा कि नई नीति में आकांक्षात्मक जनपदों में विश्वविद्यालयों की स्थापना पर अतिरिक्त प्रोत्साहन का प्रावधान होना चाहिए। इसे प्राथमिकता दें। इसी प्रकार, विश्व की टॉप रैंकिंग वाले विश्वविद्यालयों के कैम्पस के प्रस्ताव पर भी विशेष प्रोत्साहन प्रावधान रखें।     recent visitors 107

एयरलाइन कंपनियों विस्‍तार, एयर इंडिया और इंडिगो ने ढाका आने-जाने वाली अपनी उड़ानें रद्द कर दी

नई दिल्‍ली बांग्‍लादेश की राजधानी ढाका के हालात को देखते हुए टाटा की अगुवाई वाली एयर इंडिया, विस्‍तारा और इंडिगो एयरलाइन कंपनियों ने अपनी सभी उड़ानें (कैंसिल) रद्द कर दी हैं। विमानन कंपनियों ने प्रधानमंत्री शेख हसीना के इस्तीफा के बाद ढाका के हालाताें को देखते हुए यह कदम उठाया है। आधिकारिक सूत्रों ने  दी जानकारी में बताया कि देश की प्रमुख एयरलाइन कंपनियों विस्‍तार, एयर इंडिया और इंडिगो ने ढाका आने-जाने वाली अपनी उड़ानें रद्द कर दी हैं। विस्‍तारा ने आज ढाका की फ्लाइट्स कैंसिल की हैं, जबकि एयर इंडिया और इंडिगो ने कल देर शाम अपनी उड़ानें रद्द कर दी थीं। विस्तारा के एक अधिकारी ने बताया कि एयरलाइन की उड़ानें प्रतिदिन मुंबई से ढाका और हफ्ते के तीन दिन दिल्ली से ढाका जाया करती थीं। लेकिन वहां के मौजूदा हालात को देखते हुए फिलाहल विस्तारा ने अपनी उड़ानें रद्द कर दी हैं। इससे पहले विस्‍तारा ने सोमवार को मुंबई से अपनी उड़ान को संचालित किया था। वहीं, एयर इंडिया और इंडिगो ने पहले ही अपनी उड़ानें रद्द कर दी थीं। उल्लेखनीय है कि बांग्‍लादेश में रिजर्वेशन पॉलिसी के विरोध में हिंसा चरम पर पहुंचने के बाद वहां की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने प्रधानमंत्री पद से इस्‍तीफा दे दिया है। फिलहाल वो भारत में हैं। अपनी सुबह की उड़ान रद्द कर दी एअर इंडिया के एक अधिकारी ने कहा कि कंपनी ने ढाका के लिए अपनी सुबह की उड़ान रद्द कर दी है और वह दिन में फैसला लेगी कि बांग्लादेश की राजधानी के लिए शाम की उड़ान संचालित की जाएगी या नहीं। समयसारिणी के अनुसार, एअर इंडिया दिल्ली से ढाका के बीच रोज दो उड़ानें संचालित करती है। रद्दीकरण शुल्क पर एकमुश्त छूट एअर इंडिया ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा था, “बांग्लादेश में उभरती स्थिति को देखते हुए, हमने ढाका जाने और वहां से आने वाली अपनी उड़ानों के निर्धारित परिचालन को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है।”उसने कहा था, “हम स्थिति पर लगातार नजर रख रहे हैं और ढाका से आने-जाने के लिए कन्फर्म टिकट वाले अपने यात्रियों को सहायता प्रदान कर रहे हैं, जिसमें पुनर्निर्धारण और रद्दीकरण शुल्क पर एकमुश्त छूट शामिल है।” अराजकता की स्थिति पैदा हो गई कंपनी ने कहा था, “यात्रियों और चालक दल की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।” बांग्लादेश में आरक्षण विरोधी हिंसक प्रदर्शनों के बीच प्रधानमंत्री शेख हसीना के अचानक इस्तीफा देने और देश छोड़कर जाने से वहां अराजकता की स्थिति पैदा हो गई है। हसीना सोमवार रात बांग्लादेशी वायुसेना के एक सी-130 जे सैन्य विमान से भारत पहुंचीं। बताया जा रहा है कि उनकी लंदन जाने की योजना है। recent visitors 101

बिहार पुलिस मुख्यालय ने बांग्लादेश की घटना को लेकर जारी किया अलर्ट

नई दिल्ली/पटना/ कोलकाता  बांग्लादेश के हालात लगातार बिगड़ रहे हैं। लोगों को निशाना बनाया जा रहा है। निशाने पर हिंदू मंदिर और सांस्कृतिक केंद्र भी हैं। हिंदुओं की स्थिति पर भाजपा नेता और विधायक हरिभूषण ठाकुर ने चिंता जताई है। हरिभूषण ठाकुर ने कहा, “बांग्लादेश में हिंदुओं के साथ जो हो रहा है, वह दु:खद और दुर्भाग्यपूर्ण है। वह हमारा मित्र राष्ट्र है और तख्तापलट की घटना ने हिंदुओं के लिए परेशानी बढ़ा दी है। दुःख की बात है कि वहां हिंदुओं की संपत्तियों को लूटा जा रहा है। मंदिरों पर हमला किया जा रहा है। इस घटना को लेकर भारत सरकार गंभीर है। आज सर्वदलीय बैठक हुई है और भारत सरकार वहां की स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए है।” उन्होंने पश्चिम बंगाल के भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी के बयान पर भी प्रतिक्रिया दी। कहा, “बांग्लादेश में हिंदुओं को तबाह किया जा रहा है और मंदिरों को जलाया जा रहा है। ऐसे हालातों में वहां के बेबस और लाचार हिंदू भारत का रूख करेंगे। अगर सुवेंदु अधिकारी ने कुछ कहा है तो यह गंभीर मामला है। भारत सरकार वहां के हालातों पर पल-पल की नजर रख रही है। सही समय पर उचित फैसला लिया जाएगा।” उन्होंने बिहार के सीमांचल क्षेत्र में रह रहे बांग्लादेशी मुस्लिम शरणार्थियों की मौजूदगी पर सवाल उठाए। कहा कि यह दुर्भाग्य की बात है। पाकिस्तान और बांग्लादेश की क्या स्थिति है, हम सब देख रहे हैं। भारत में भी इसका असर पड़ेगा। लेकिन, भारत सरकार पूरी तरह से मुस्तैद है। बता दें कि बांग्लादेश के हालात को लेकर मंगलवार को केंद्र सरकार ने सर्वदलीय बैठक बुलाई थी। संसद भवन परिसर में हुई इस बैठक में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सभी राजनीतिक दलों के नेताओं को बांग्लादेश के हालात की जानकारी दी। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बैठक में कहा कि हम बांग्लादेश आर्मी के टच में है। अभी वहां के हालात जटिल है। जैसे ही कुछ नया अपडेट होगा तो इस बारे में जानकारी साझा की जाएगी।   भारत-बांग्लादेश की जल सीमा पर बीएसएफ ने तैनात किए स्पेशल निगरानी बोट  बांग्लादेश में जारी राजनीतिक उथल-पुथल और हिंसा के चलते सीमा पर घुसपैठ की संभावना बढ़ गई है। इस स्थिति से निपटने के लिए बीएसएफ ने बांग्लादेश से लगती हजारों किलोमीटर लंबी सीमा को सील कर दिया है और सुंदरबन इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी है। बीएसएफ के डीजी दलजीत सिंह चौधरी ने सोमवार को ही सीमा क्षेत्रों का निरीक्षण किया और सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की। मंगलवार को बीएसएफ के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सुंदरबन क्षेत्र में समुद्र और नदी भारत बांग्लादेश के बीच प्राकृतिक सीमा रेखा है। यहां विशेष तौर पर सतर्कता बरती जा रही है और किसी भी तरह की घुसपैठ को रोकने के लिए विशेष निगरानी वोट तैनात किए गए हैं। बीएसएफ की खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, बांग्लादेश में अस्थिरता और हिंसा बढ़ने के साथ-साथ वहां के कई निवासी प्रभावित हो रहे हैं। इस कारण कुछ लोग भारत में घुसपैठ करने की कोशिश कर सकते हैं, जिसमें भारतविरोधी तत्व और आतंकवादी भी शामिल हो सकते हैं। इसलिए, बीएसएफ ने सीमा पर तत्काल सुरक्षा बढ़ाने का निर्णय लिया है और सोमवार दोपहर तक पूरे बांग्लादेश सीमा को सील कर दिया है। इसके बाद रात के समय पर अतिरिक्त निगरानी बढ़ाई गई है क्योंकि ऐसे ही समय पर घुसपैठ की आशंका बनी रहती है। बीएसएफ सूत्रों के मुताबिक, देश के अन्य क्षेत्रों से भी अतिरिक्त जवानों को पूर्वी क्षेत्र में तैनात किया जा रहा है। विशेष ध्यान नदी और समुद्री मार्गों पर दिया जा रहा है ताकि इन मार्गों से होने वाली घुसपैठ को रोका जा सके। रात में भी नदी सीमाओं की निगरानी के लिए जवानों को नाइट विजन बाइनोकुलर दिए गए हैं। अधिकारी ने बताया कि तीन अगस्त को एसएसबी के डीजी दलजीत सिंह चौधरी ने बीएसएफ के अतिरिक्त डीजी का कार्यभार संभाला और उत्तर 24 परगना और सुंदरबन की सीमाओं का दौरा किया। उनके साथ बीएसएफ के अतिरिक्त डीजी रवि गांधी, दक्षिण बंगाल के आईजी मनिंदर प्रताप सिंह और अन्य अधिकारी भी थे। उन्होंने नदी और समुद्री मार्गों की सुरक्षा की जांच की और सुरक्षा बढ़ाने के निर्देश दिए। सुंदरबन में घुसपैठ की संभावना को देखते हुए बीएसएफ ने वहां के सभी जलयानों पर कड़ी निगरानी रखी है। जवान दिन और रात में स्पीडबोट से गश्त कर रहे हैं ताकि किसी भी तरह की घुसपैठ को रोका जा सके। बिहार पुलिस मुख्यालय ने बांग्लादेश की घटना को लेकर जारी किया अलर्ट  बांग्लादेश में उपद्रव और हिंसा को लेकर बिहार में अलर्ट जारी किया गया है। पुलिस मुख्यालय ने सभी सीमावर्ती जिलों में पुलिस और एसएसबी को अलर्ट रहने को कहा है। सीमा वाले इलाकों में सघन जांच अभियान चलाने का निर्देश दिया गया है। इसके साथ साथ किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए बिहार पुलिस और एसएसबी को तैयार रहने को कहा गया है। सीमांचल में बांग्लादेश और बिहार की सीमा पर चौकसी बढ़ा दी गई है। कटिहार और किशनगंज से बांग्लादेश की सीमा सटी हुई है। ऐसे में बिहार पुलिस मुख्यालय ने सीमावर्ती जिलों को अलर्ट रहने का निर्देश दिया है। साथ ही एसएसबी को सतर्क किया गया है और 24 घंटे निगरानी रखने को कहा गया है। पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर पुलिस और एसएसबी अलर्ट मोड में आ गए हैं। बांग्लादेश और बिहार के सीमावर्ती इलाकों में गाड़ियों की और हर आने-जाने वालों की सघन जांच की जा रही है। पहचान पत्र देखने के बाद ही किसी को भी भारत में आने की अनुमति दी जा रही है। सीमावर्ती इलाकों में पेट्रोलिंग बढ़ा दी गई है। किसी भी संदिग्ध व्यक्ति या वस्तू की जानकारी होने पर तत्काल सूचना देने को कहा गया है। लोग किसी भी तरह की संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी स्थानीय थाना, जिले के एसपी या टॉल फ्री नंबर 14432 या डायल 112 पर देने की अपील की है उल्लेखनीय है कि बांग्लादेश में तख्तापलट के बाद हालात बेकाबू हो गए हैं। अबतक सैकड़ों लोगों की जान चली गई है जबकि बड़ी संख्या में लोगों को गिरफ्तार किया गया है। हालात इतने बेकाबू हो गए हैं कि क्या आम और क्या खास कोई भी सुरक्षित नहीं है। बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख … Read more

भगवान बिरसा मुण्डा स्वरोजगार योजना में 33.70 करोड़ और टंट्या मामा आर्थिक कल्याण योजना में 5.08 करोड़ की वित्तीय सहायता वितरित

भोपाल जनजातीय कार्य विभाग के अधीन मप्र आदिवासी वित्त एवं विकास निगम द्वारा तीन नई वित्तीय सहायता योजनाएं संचालित की जा रही हैं। भगवान बिरसा मुण्डा स्वरोजगार योजना, टंट्या मामा आर्थिक कल्याण योजना और मुख्यमंत्री अनुसूचित जनजाति विशेष परियोजना वित्त पोषण योजना के माध्यम से जनजातीय वर्ग के युवाओं को स्वरोजगार से जोड़कर उनके समग्र कल्याण के लिये हरसंभव प्रयास किये जा रहे हैं। मप्र आदिवासी वित्त एवं विकास निगम को 'भगवान बिरसा मुण्डा स्वरोजगार योजना' के तहत 1000 हितग्राही वार्षिक लक्ष्य के विरूद्ध 31 मार्च 2024 तक कुल 6 हजार 463 आवेदन मिले। इनमें से बैंकों द्वारा 1094 आवेदन मंजूर कर 904 पात्र हितग्राहियों को 33 करोड़ 70 लाख 47 हजार 620 रूपये की वित्तीय सहायता वितरित की गई। इस योजना में जनजातीय वर्ग के युवाओं को विनिर्माण गतिविधियों के लिए एक लाख से 50 लाख रूपये तथा सेवा व व्यवसाय गतिविधियों के लिए एक लाख से 25 लाख रूपये तक की वित्तीय सहायता बैंकों के माध्यम से दी जाती है। इसके लिए परिवार की वार्षिक आय 12 लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए। योजना के अन्तर्गत हितग्राहियों को बैंक द्वारा वितरित, शेष ऋण पर 5 प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से ब्याज अनुदान तथा बैंक ऋण गारंटी शुल्क प्रचलित दर पर अधिकतम 7 वर्षों तक मोरेटोरियम अवधि सहित निगम द्वारा वहन किए जाने का प्रावधान है। योजना में इच्छुक अभ्यर्थियों को प्रशिक्षण देने का भी प्रावधान है। योजना का क्रियान्वयन शासन द्वारा निर्धारित ‘समस्त पोर्टल’ के माध्यम से किया जा रहा है, तथा पोर्टल पर यह योजना 'मुख्यमंत्री उद्यम कांति योजना' से समन्वित होती है। जिलास्तर पर योजना का क्रियान्वयन सहायक आयुक्त/जिला संयोजक/शाखा प्रबंधक, मध्यप्रदेश आदिवासी वित्त एवं विकास निगम एवं महाप्रबंधक, जिला व्यापार एवं उद्योग केन्द्र के माध्यम से किया जा रहा है। योजना के तहत वर्ष 2024-25 हेतु सभी जिलों के सभी बैंकों को वार्षिक लक्ष्य तय कर दिये गये हैं। साथ ही संबंधित अधिकारियों को योजना के क्रियान्वयन के संबंध में समुचित निर्देश भी जारी किये गये है। योजना के तहत पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन प्रारम्भ हो चुके है। इच्छुक व्यक्ति पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन जमा कर सकते हैं। 'टंट्या मामा आर्थिक कल्याण योजना' के 10 हजार हितग्राही वार्षिक लक्ष्य के विरूद्ध निगम को 31 मार्च 2024 तक कुल 7 हजार 116 आवेदन मिले। बैंकों द्वारा 1130 आवेदन मंजूर कर 905 पात्र हितग्राहियों को 5 करोड़ 8 लाख रूपये से अधिक की वित्तीय सहायता वितरित की गई। योजना में जनजातीय युवाओं को 10 हजार से एक लाख रूपए तक की स्व-रोज़गार परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता बैंकों के माध्यम से दी जाती है। बैंक ऋण पर अधिकतम पाँच वर्षों के लिए सात प्रतिशत ब्याज अनुदान एवं बैंक गारंटी राज्य शासन द्वारा दी जाती है। इन दोनों योजनाओं से संबंधित विस्तृत जानकारी एवं लाभ प्राप्ति के लिए "समस्त पोर्टल" https://samast.mponline.gov.in पर लॉग-इन कर या जिलास्तर पर सहायक आयुक्त/जिला संयोजक, जनजातीय कार्य विभाग एवं अनुसूचित जाति कल्याण कार्यालय से संपर्क किया जा सकता है। इसी प्रकार 'मुख्यमंत्री अनुसूचित जनजाति विशेष परियोजना वित्त पोषण योजना' में जनजातीय युवाओं को आजीविका, स्वरोजगार एवं नवाचार से संबंधित सामुदायिक अधोसंरचना निर्माण तथा इससे जुड़ी अन्य गतिविधियों की दो करोड़ रूपये तक की ऐसी परियोजनाएं, जिनका क्रियान्वयन लाईन विभागों की किसी प्रचलित योजना/परियोजना में किया जाना संभव नहीं हो, उसका शत-प्रतिशत शासन अनुदान से वित्त पोषण किया जाता है। इस योजना का क्रियान्वयन लाईन विभागों/कलेक्टर के माध्यम से किया जा रहा है। योजना के अंतर्गत अब तक 8 विशेष परियोजनाएं स्वीकृत की गई, जिनमें 4 करोड़ 60 लाख 73 हजार रूपये का ऋण जनजातीय वर्ग के स्वरोजगारियों को परियोजना क्रियान्वयन के लिये वितरित किया गया।   recent visitors 105

स्लीमनाबाद टनल निर्माण कार्य समय-सीमा में पूर्ण करने और आवश्यक सावधानियों का ध्यान रखने के निर्देश दिये- Deputy Chief Minister Shukla

भोपाल उप-मुख्यमंत्री  राजेंद्र शुक्ल ने मंत्रालय में स्लीमनाबाद टनल निर्माण कार्य प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने निर्माण कार्य समय-सीमा में पूर्ण करने और आवश्यक सावधानियों का ध्यान रखने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि आवासीय क्षेत्र के नीचे टनल निर्माण करते हुए विशेष सावधानी बरती जाये। उल्लेखनीय है कि विगत दिवस मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा स्लीमनाबाद टनल निर्माण कार्य की प्रगति की समीक्षा की गई थी। बरगी व्यपवर्तन परियोजना से जबलपुर, कटनी, मैहर, सतना एवं रीवा सहित आस-पास के जिलों के कृषकों को सिंचाई और ग्रामीणों को पेयजल की सुविधा उपलब्ध होगी। औद्योगिक इकाइयों को भी नहर प्रणाली के माध्यम से जल आपूर्ति होगी। नगरीय विकास एवं आवास राज्यमंत्री श्रीमती प्रतिमा बागरी, प्रमुख सचिव वित्त श्री मनीष सिंह, प्रमुख सचिव स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा संदीप यादव सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।   स्लीमनाबाद टनल का निर्माण कार्य समय-सीमा में पूर्ण करें : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि स्लीमनाबाद टनल का निर्माण कार्य समय-सीमा में पूर्ण करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में स्लीमनाबाद टनल के निर्माण कार्य की प्रगति की समीक्षा कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आवासीय क्षेत्र के नीचे टनल निर्माण करते हुए विशेष सावधानी बरतें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बरगी व्यपवर्तन परियोजना के तहत निर्माणाधीन स्लीमनाबाद टनल प्रदेश के लिए एक मेगा प्रोजेक्ट है। इस प्रोजेक्ट से जबलपुर, कटनी, मैहर, सतना और रीवा सहित आसपास के जिलों के कृषकों को सिंचाई और ग्रामीणों को पेयजल की सुविधा उपलब्ध होगी। औद्योगिक इकाइयों को भी नहर प्रणाली के माध्यम से जल आपूर्ति होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के अन्य मेगा प्रोजेक्ट की सतत मॉनिटरिंग के लिए ऑनलाइन डैशबोर्ड बनाने के निर्देश भी दिये। बैठक मे बरगी व्यपवर्तन परियोजना और स्लीमनाबाद टनल की अद्यतन प्रगति पर आधारित प्रेजेंटेशन दिया गया। बैठक में उप मुख्यमंत्री श्री राजेंद्र शुक्ल, नगरीय विकास एवं आवास राज्यमंत्री श्रीमती प्रतिमा बागरी, मुख्य सचिव श्रीमती वीरा राणा, अपर मुख्य सचिव श्री राजेश राजौरा, प्रमुख सचिव नगरीय विकास एवं आवास श्री मनीष सिंह सहित नर्मदा घाटी विकास विभाग के सदस्य (अभियांत्रिकी एवं वित्त) श्री एच. आर. चौहान, सदस्य (ऊर्जा) श्री शिशिर कुशवाह, मुख्य अभियंता अपर नर्मदा जोन जबलपुर श्री डी.एल. वर्मा, सचिव श्री जी.पी. सोनकर, सचिव (प्रकोष्ठ) श्री मनीष ठाकुर एवं संबंधित अधिकारी उपस्थित रहें।   recent visitors 78

‘लोक परिसंपत्ति प्रबंधन जिला प्रोत्साहन योजना’ के अंतर्गत जिलों में मौजूद आधारभूत संरचनाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने की तैयारी

भोपाल लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग द्वारा इंदौर और जबलपुर शहरी क्षेत्र में नगर वन (सिटी फारेस्ट) विकसित करने की तैयारी की जा रही है। इसके लिये विभाग द्वारा योजनाबद्ध तरीके से तेजी से कार्य किया जा रहा है। विभाग द्वारा वित्त वर्ष 2024-25 की कार्य योजना में नगर वन विकसित करने संबंधी प्रस्ताव रखा गया है। लोक परिसम्पत्ति प्रबंधन विभाग द्वारा नेशनल टेक्सटाईल कॉर्पोरेशन से इंदौर, उज्जैन, भोपाल एवं बुरहानपुर जिले की बंद मिलों की भूमि को पुनः राज्य शासन के पक्ष में बंदोबस्त (वैष्ठित) कर लिया गया है। इसके विरुद्ध नेशनल टेक्सटाइल कॉर्पोरेशन ने इंदौर, उज्जैन एवं भोपाल की भूमि के संबंध में उच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई है। संबंधित जिलों के कलेक्टर्स से समन्वय स्थापित कर विभाग द्वारा इन भूमि प्रकरणों के जल्द से जल्द निराकरण की कार्यवाही की जा रही है। इंदौर जिले में स्थित यूनाइटेड मालवा मिल का एक प्रमुख भाग प्रबंधन की मंशा से नगर वन (सिटी फारेस्ट) के रूप में विकसित करने के लिये बेहद उपयुक्त पाया गया है। इस विकास प्रस्ताव पर विभागीय योजना बनाकर कार्यवाही की जा रही है एवं कल्याण मिल का उचित रूप से प्रबंधन किया जा रहा है। उज्जैन की विनोद मिल के शेष पार्सलों पर व्यवसायिक गतिविधियों के प्रोत्साहन केलिये विभागीय योजना तैयार की जा रही है एवं उज्जैन की हीरा मिल का समुचित प्रबंधन भी विभागीय तौर पर किया जा रहा है। लोक परिसम्पत्ति विभाग द्वारा जबलपुर शहरी क्षेत्र में बीएसएनएल द्वारा अधिग्रहित भूमि को पुनः राज्य शासन के पक्ष में बंदोबस्त (वैष्ठित) कर लिया गया है। अब यहाँ 'सिटी फारेस्ट' के लिये जरूरी विकास के मद्देनजर समुचित प्रबंधन एवं व्यवस्थाएँ की जा रही हैं। 'लोक परिसंपत्ति प्रबंधन जिला प्रोत्साहन योजना' के अंतर्गत विभाग द्वारा जिलों में मौजूद आधारभूत संरचनाओं को और अधिक सुदृढ़ कर इन्हें नई आवश्यकतानुसार विकसित करने के लिये गत वित्तीय वर्ष 2022-23 एवं 2023-24 में 20 जिलों को उनसे प्राप्त प्रस्तावों के अनुसार कुल 126 करोड़ 79 लाख रूपये वितरित किये गये। जारी वित्त वर्ष 2024-25 में इस योजना में 16 जिलों से पात्रतानुसार 65 करोड़ 49 लाख रूपये के विकास प्रस्ताव प्राप्त करने के लिये भी विभाग द्वारा नियमानुसार कार्यवाही की जा रही है।   recent visitors 103

राज्य पश्चिम बंगाल का मॉडल कोई नहीं अपनाना चाहेगा…अमित शाह

नई दिल्ली  केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने  पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस नीत ममता बनर्जी सरकार पर कटाक्ष करते हुए आश्चर्य जताया कि क्या कोई राज्य वामपंथी उग्रवाद को रोकने के संदर्भ में उनके मॉडल को लागू करना चाहेगा। लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगत रॉय ने छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, ओडिशा और आंध्र प्रदेश का हवाला देते हुए कहा कि वामपंथी उग्रवाद की समस्या पिछले 10-15 सालों से इन राज्यों में है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार वामपंथी उग्रवाद से निपटने में सफल रही है। उन्होंने सदन में गृह मंत्री से सवाल किया कि क्या वे पश्चिम बंगाल के मॉडल का अध्ययन कर इसे अन्य राज्यों में भी लागू करेंगे। सौगत रॉय के सवाल पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मुस्कुराते हुए खड़े हुए और कहा कि नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार को उन राज्यों के मॉडल को लागू करने में कोई दिक्कत नहीं है जिन्होंने अच्छा प्रदर्शन किया है, लेकिन मैं मानता हूं कि कोई भी राज्य नहीं चाहेगा कि वहां पश्चिम बंगाल का मॉडल अपनाया जाए। वामपंथी उग्रवाद की घटनाओं में 53 प्रतिशत की कमी वहीं, गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने प्रश्नों का उत्तर देते हुए कहा कि पिछले 10 सालों में वामपंथी उग्रवाद की घटनाओं में 53 प्रतिशत की कमी आई है। इन घटनाओं में सुरक्षा बलों की मौत के मामलों में भी 72 प्रतिशत की कमी हुई है। उन्होंने कहा कि वामपंथी उग्रवाद की गतिविधियों में शामिल लोग इस देश के संविधान और लोकतंत्र में विश्वास नहीं करते हैं। वो हथियार के माध्यम से सत्ता हथियाना चाहते हैं। 42 जिलों तक सिमटकर रह गया उग्रवाद नित्यानंदर राय ने संसद में कहा कि साल 2010 में 96 जिले वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित थे, लेकिन मोदी सरकार के प्रयासों के कारण 2023 में वामपंथी उग्रवाद 42 जिलों तक सिमटकर रह गया। राय का कहना था, 10 सालों में जो प्रयास किए गए हैं, उसका प्रभाव स्पष्ट दिखता है। आने वाले दिनों में वामपंथी उग्रवादियों को समाप्त कर दिया जाएगा।     recent visitors 100