त्योहार सजावट से नहीं, एहसासों से खास बनते हैं : सोनाली नागले

Festivals become special through feelings, not decorations: Sonali Nagle हरिप्रसाद गोहेआमला। बरसात के बाद जब मौसम करवट लेता है और हवा में हल्की ठंडक घुलने लगती है, तब नवरात्रि की आहट महसूस होने लगती है। घरों में पूजा की तैयारियां शुरू हो जाती हैं, मंदिर सजने लगते हैं और शाम होते ही गरबा की ताल माहौल में अलग ही रंग भर देती है।भारत में नवरात्रि का स्वरूप अनूठा है। गुजरात में गरबा-डांडिया की धूम रहती है, तो बंगाल में दुर्गा पूजा की भव्यता मन मोह लेती है। कहीं व्रत रखे जाते हैं, कहीं कन्या पूजन होता है, तो कहीं पूरा मोहल्ला मिलकर माता की चौकी सजाता है। रीति-रिवाज भले अलग हों, भावना एक ही है- शक्ति में विश्वास और अच्छाई की विजय की कामना।नवरात्रि केवल देवी उपासना का पर्व नहीं, बल्कि भीतर की शक्ति को पहचानने का अवसर भी है। माँ दुर्गा का स्वरूप सिखाता है कि कठिनाइयों के सामने हार मानने के बजाय साहस और विश्वास से उनका सामना किया जाए। बुराई पर अच्छाई की जीत तभी सार्थक होगी, जब हम अपने भीतर के अहंकार, ईर्ष्या और नकारात्मकता पर विजय पाएं।आज की भागदौड़ में जब अपनों के साथ बैठने का समय भी कम होता जा रहा है, ऐसे त्योहार हमें करीब लाते हैं। आरती के समय एक साथ खड़ा परिवार, प्रसाद के लिए बढ़ते हाथ, पड़ोसियों से छोटी-सी मुलाकात और गरबा पर साथ झूमते लोग- यही छोटे दृश्य त्योहारों को खास बनाते हैं।बचपन में नवरात्रि का इंतजार अलग ही होता था। नए कपड़ों की खुशी, दोस्तों संग गरबा देखने का उत्साह और दशहरे पर रावण दहन की बेसब्री। तब शायद समझ नहीं थी कि रावण जलाना केवल परंपरा नहीं, बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। त्योहारों ने अनजाने में जीवन के जरूरी संस्कार भी सिखाए।आखिर त्योहारों की खूबसूरती सजावट में नहीं, एहसासों में है। समय बदलता है, मनाने के तरीके बदलते हैं, पर माँ के सामने हाथ जोड़ते समय मन में उठने वाली श्रद्धा आज भी वैसी ही है। शारदीय नवरात्रि यही याद दिलाती है कि शक्ति केवल देवी स्वरूप में नहीं, बल्कि उस विश्वास में भी है जो मुश्किल समय में संभालता है। recent visitors 156

तहसील पहुंचकर कलेक्टर के नाम सौंपा ज्ञापन, तहसील कार्यालय के सामने मैदान बनाने की मांग।

Upon reaching the Tehsil office, a memorandum addressed to the Collector was submitted, demanding the construction of a ground in front of the Tehsil office. हरिप्रसाद गोहेआमला। आमला नगर में प्रतिभावान खिलाड़ियों और उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन की कमी नहीं है। यहां के ऊर्जावान खिलाड़ियों ने विभिन्न खेलों में आमला का नाम सार्वजनिक मंच पर गौरवान्वित किया है। लेकिन जब शहर में खेल मैदान की बात आती है तो खेल प्रेमियों में मायूसी छा जाती है। नगर में युवाओं के लिए व्यवस्थित खेल मैदान नहीं है। ऐसा नहीं है कि खिलाड़ियों और स्वयंसेवी संगठनों ने जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से मांग नहीं की हो, फिर भी जायज मांग पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। सवाल यही है कि क्या शहर की प्रतिभाओं को आमला में मैदान मिलेगा या फिर किसी अन्य गांव में मैदान बना दिया जाएगा।इसी मांग को लेकर बुधवार सुबह करीब आधा सैकड़ा युवा और खिलाड़ी लामबंद होकर आमला तहसील कार्यालय पहुंचे और तहसीलदार के माध्यम से कलेक्टर बैतूल के नाम ज्ञापन सौंपा। खिलाड़ियों ने मांग की है कि तहसील कार्यालय के सामने उपलब्ध शासकीय खुली भूमि पर खेल मैदान विकसित किया जाए। यह भूमि नगर के बीचोंबीच और आसानी से पहुंच योग्य है। यहां क्रिकेट, फुटबॉल, वॉलीबॉल, कबड्डी सहित अन्य खेलों के लिए सुविधा विकसित हो सकती है।खिलाड़ियों के बताए अनुसार विधायक डॉ. योगेश पंडाग्रे द्वारा इसी भूमि पर खेल मैदान बनाने की घोषणा विभिन्न मंचों से की गई थी। युवा इसी उम्मीद में थे, लेकिन मंगलवार शाम सोशल मीडिया पर नांदपुर पंचायत में खेल मैदान स्वीकृति की पोस्ट आने के बाद युवाओं में नाराजगी है। युवाओं का कहना है कि जब नगर में ही भूमि उपलब्ध है तो प्राथमिकता आमला को क्यों नहीं दी जा रही है। हालांकि स्थान चयन को लेकर आधिकारिक स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।ज्ञापन में भूमि का स्थल निरीक्षण एवं सीमांकन कर उपयुक्तता का परीक्षण करने और नियमानुसार स्वीकृति देने की मांग की गई है। खिलाड़ियों ने कहा कि मैदान केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि शारीरिक विकास और प्रतिभा निखारने का माध्यम है।साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि मांग पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो युवा आंदोलन और सड़क पर उतरने को मजबूर होंगे। recent visitors 175

अमृत महोत्सव का भव्य समापन, एकादशी पर गूंजे जय श्री श्याम के जयकारे

Grand conclusion of Amrit Mahotsav; chants of ‘Jai Shri Shyam’ resonate on Ekadashi. विशेष संवाददाता: जितेन्द्र श्रीवास्तव/अर्पिता श्रीवास्तवजबलपुर। श्री खाटू श्याम सेवा मित्र मंडल जबलपुर के तत्वावधान में आयोजित ‘अमृत महोत्सव’ का भव्य आयोजन 6 अक्टूबर 2026 को एकादशी के पावन अवसर पर संपन्न हुआ। कार्यक्रम का आयोजन श्री शिवशक्ति महाकाल, खाटूश्याम धाम, गोरखपुर, जबलपुर में किया गया।समापन अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और धार्मिक कार्यक्रमों में सहभागिता की। आयोजन में नयन कपूर, जबलपुर सहित परम पूज्य श्री कुंज बिहारी दास जी महाराज (श्री धाम वृंदावन) की उपस्थिति प्रमुख रही।कार्यक्रम के दौरान भक्ति संगीत, धार्मिक प्रस्तुतियों और श्याम भक्ति से माहौल भक्तिमय बना रहा। श्रद्धालुओं ने श्री श्याम प्रभु के दर्शन एवं भजन-कीर्तन का लाभ लिया। आयोजन के अंत में श्रद्धालुओं ने एक-दूसरे को शुभकामनाएं देते हुए ‘जय श्री श्याम, राधे-राधे’ के जयकारे लगाए। आयोजक श्री खाटू श्याम सेवा मित्र मंडल, जबलपुर की ओर से आयोजन में सहयोग करने वाले सभी श्रद्धालुओं एवं भक्तों का आभार व्यक्त किया गया। recent visitors 27

सावधान ! जबलपुर में दूध-पनीर, आइसक्रीम के सैंपल फेल, तेजी से हो रही मिलावट

Be careful when eating out! Milk, paneer, and ice cream samples in Jabalpur have failed tests; adulteration is rampant. विशेष संवाददाता: जितेन्द्र श्रीवास्तव/अर्पिता श्रीवास्तवजबलपुर । शहर में रेस्टोरेंट, होटल और ढाबों में लोग बड़ी राशि खर्च कर परिवार के साथ भोजन करते हैं, लेकिन परोसे जा रहे खाद्य पदार्थ मानकों के अनुरूप है या नहीं, इसकी गारंटी नहीं है। खाद्य सुरक्षा प्रशासन की कार्रवाई में दूध, पनीर, दही, आइसक्रीम, चावल और गेहूं सहित कई खाद्य पदार्थों के नमूने अमानक पाए गए है। इन मामलों को अपर कलेक्टर न्यायालय में पेश किया गया। जनवरी से अब तक 115 प्रकरणों में 2 हजार से 2 लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया गया है। सभी मामलों में कुल 31.57 लाख रुपए का अर्थदंड अधिरोपित किया गया। दूध से बने उत्पादों में सबसे ज्यादा गड़बड़ीदूध से बने उत्पाद आम लोगों के रोजमर्रा के भोजन का अहम हिस्सा हैं। खाद्य सुरक्षा प्रशासन की जांच में इन उत्पादों में सबसे अधिक गड़बड़ी सामने आई। होटल और रेस्टोरेंट में पनीर से बनने वाले व्यंजनों की कीमत भी अधिक होती है। अलग-अलग प्रतिष्ठानों से लिए गए पनीर के नमूनों की जांच में कई नमूने अमानक मिले। अनाज और मेवे भी जांच में फेलजांच में अनाज और मेवों के ऐसे नमूने भी मिले, जो खाद्य मानकों पर खरे नहीं उतरे। अपर कलेक्टर न्यायालय में पहुंचे प्रकरणों में बड़ी संख्या ऐसे प्रतिष्ठानों की भी है, जिन्होंने खाद्य सुरक्षा प्रशासन से आवश्यक पंजीयन नहीं कराया था। डेयरियों के दूध, दही और पनीर के नमूने अवमानकअपर कलेक्टर शहर रविशंकर राय और अपर कलेक्टर ग्रामीण नीता राठौर के न्यायालय से 115 से अधिक प्रकरणों में आदेश पारित हुए हैं। खाद्य सुरक्षा प्रशासन के अधिकारियों ने ये प्रकरण न्यायालय में प्रस्तुत किए थे। मदर डेयरी, कन्हैया डेयरी, गुरुवीर डेयरी, उमेश डेयरी, मोनू तिवारी डेयरी, वासू डेयरी और जबलपुर डेयरी सहित कई प्रतिष्ठानों से लिए गए पनीर, दही और दूध के नमूने प्रयोगशाला जांच में अवमानक पाए गए। होटल और नामी ब्रांड पर भी कार्रवाईहोटल ऋषि रेजेंसी की आइसक्रीम अवमानक पाई गई। पेप्सिको इंडिया लिमिटेड के कुरकुरे और डोरिटो उत्पादों पर मिथ्याछाप और खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के निर्देशों का पालन नहीं करने पर जुर्माना लगाया गया। खाद्य सुरक्षा नियमों का पालन नहीं करने पर होटल हिल्टन तथा अवमानक बूंदी लड्डू बेचने पर विशन स्वीट्स पर भी अर्थदंड लगाया गया। अन्य संस्थानों में अलग-अलग अनियमितताएं मिलने पर भी जुर्माना किया गया। खाद्य सुरक्षा प्रशासन की ओर से न्यायालय में प्रस्तुत किए गए प्रकरणों का तेजी से निराकरण किया जा रहा है। खाद्य पदार्थों की बिक्री में मानकों का ध्यान रखना सभी के लिए जरूरी है। संस्थानों पर जुर्माने की कार्रवाई की जाती है। लगातार नियमों की अवहेलना करने वाले व्यक्ति पर बड़ा जुर्माना अधिरोपित किया जाता है। -रविशंकर राय, अपर कलेक्टर (शहर) recent visitors 35

कूनो नेशनल पार्क से दो चीते नौरादेही टाइगर रिजर्व रवाना, मुख्यमंत्री मोहन यादव सोफ्ट बोमा में करेंगे रिलीज

Two cheetahs from Kuno National Park are being sent to Nauradehi Tiger Reserve; Chief Minister Mohan Yadav will release them into the soft boma. श्योपुर। देश में चीता पुनर्स्थापना का केंद्र बना कूनो नेशनल पार्क अब चीतों को देश के अन्य जंगलों में बसाने का सोर्स बन गया है। कूनो प्रबंधन ने बुधवार सुबह पार्क के दो चीतों-नर थोलो और मादा CCB-3 को ट्रेंकुलाइज कर वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व (नौरादेही, सागर) के लिए रवाना किया। कूनो के टिकटोली गेट से चीतों को विशेष वाहन में शिफ्ट किया गया। इस दौरान कूनो के सीसीएफ उत्तम शर्मा, डीएफओ और वन्यजीव चिकित्सकों की टीम साथ रही। दोनों चीतों की हेल्थ पूरी तरह सामान्य है।कूनो से तीसरी बार शिफ्टिंगइसके पहले कूनो से ही 2 चीते गांधी सागर (मंदसौर-नीमच) भेजे गए थे, जिनमें पवन और राधा शामिल थीं। अब CCB-3 जो राधा की बहन है, उसे नौरादेही भेजा गया है। स्टीयरिंग कमेटी ने नौरादेही के लिए 4 चीतों की मंजूरी दी है, पहले चरण में 2 भेजे जा रहे हैं। श्योपुर का कूनो 2022 में नामीबिया से 8 चीतों की पहली खेप आने के बाद से भारत का चीता हब बन गया है। यहां जन्मे शावकों को मिलाकर अब कूनो में चीतों की संख्या 30 के पार है, इसलिए अब इन्हें अन्य अनुकूल हैबिटेट में बसाया जा रहा है।मुख्यमंत्री करेंगे रिलीजआज शाम मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव सागर में दोनों चीतों को 439 हेक्टेयर के सॉफ्ट बोमा में रिलीज करेंगे। यह बोमा भोपाल के वन विहार जितना बड़ा है, जिसमें 5 हिस्से, पावर फेंसिंग और 24 घंटे सैटेलाइट ट्रैकिंग की व्यवस्था है। recent visitors 12

जबलपुर में दौड़ रहीं आधुनिक ई-बसें, लेकिन खस्ताहाल 200 बस स्टॉप, 15 लाख की लागत से बने नए स्टैंड भी बदहाल

Modern e-buses are operating in Jabalpur, yet 200 bus stops are in a dilapidated state; even new stands built at a cost of ₹15 lakh are in poor condition. विशेष संवाददाता: जितेन्द्र श्रीवास्तव/अर्पिता श्रीवास्तवजबलपुर। मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के तहत 45 अत्याधुनिक पीएम ई-बसों सहित 55 अन्य बसों के संचालन से शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में सार्वजनिक परिवहन की सुविधा बेहतर हुई है, लेकिन बसों का इंतजार करने वाले यात्रियों की परेशानी अब भी कम नहीं हुई है। शहर में करीब 200 बस स्टाप गंदगी, अतिक्रमण और अव्यवस्थाओं से घिरे हैं। घमापुर, रेलवे स्टेशन, कलेक्ट्रेट, बल्देवबाग और नौदरा ब्रिज सहित प्रमुख मार्गों पर बने बस स्टापों की हालत ऐसी है कि यात्रियों को बैठने के बजाय सड़क किनारे खड़े होकर बसों का इंतजार करना पड़ता है। इन बस स्टॉपों से रोजाना बड़ी संख्या में विद्यार्थी, नौकरीपेशा लोग और आम नागरिक सफर करते हैं। यात्रियों का कहना है कि जब परिवहन व्यवस्था को आधुनिक बनाया जा रहा है, तो बसों के इंतजार के लिए जरूरी सुविधाओं पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।नियमित सफाई, सुरक्षित बैठक व्यवस्था और अतिक्रमण से मुक्ति जैसी बुनियादी सुविधाएं भी यहां नदारद हैं।दोबारा बनाए गए , रखरखाव के अभाव में बदरंगशहर में मेट्रो बस सेवा शुरू होने के साथ करीब 14 साल पहले लगभग 200 बस स्टॉप बनाए गए थे। नगर निगम ने शुरुआती दौर में बस स्टॉप तैयार कराए, लेकिन रखरखाव के अभाव में वे टूटने लगे। इसके बाद स्मार्ट सिटी ने पीपीपी मॉडल पर नए बस स्टॉप तैयार कराए। विज्ञापन एजेंसियों ने इन्हें बनाने में रुचि दिखाई, जबकि रखरखाव की जिम्मेदारी नगर निगम की थी। इसके बावजूद व्यवस्था नहीं सुधरी। अधिकांश बस स्टॉप से रेलिंग गायब हो चुकी हैं। कई जगह अवैध पार्किंग और अतिक्रमण ने जगह घेर ली है। कुछ बस स्टॉप अस्थायी ठिकानों में तब्दील हो गए हैं। हाल ही में करीब 15-15 लाख रुपये खर्च कर बनाए गए नए बस स्टॉप भी बदहाली से अछूते नहीं हैं।ऐसे में सवाल उठता है कि सार्वजनिक परिवहन को आधुनिक बनाने के साथ उसके बुनियादी ढांचे के रखरखाव पर ध्यान क्यों नहीं दिया जा रहा है।इन मार्गों के लिए हो रहा बसों का संचालनमदर टेरेसा से घाना, आईटीआई, दीनदयाल बस स्टैंड, विजय नगर, बल्देव बाग, रानीताल, तीन पत्ती बस स्टैंड, नौदरा ब्रिज, घंटाघर, कलेक्ट्रेट, रेलवे प्लेटफॉर्म नंबर 6, हाई कोर्ट, घमापुर, बाई का बगीचा, कंचघर, सतपुला तिराहा, पनेहरा पेट्रोल पंप, व्हीकल टर्निंग, गोकलपुर, जबलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज, रांझी, खमरिया पेट्रोल पंप, खमरिया फैक्ट्री सहित आईएसबीटी, दमोह नाका, बल्देव बाग, रानीताल, तीन पत्ती बस स्टैंड, शास्त्री ब्रिज, मदन महल, प्रेमनगर, शारदा चौक, त्रिपुरी चौक, मेडिकल, धवनत्री नगर तिराहा, अंधमुख बायपास, तेवर, त्रिपुरी सुंदरी मंदिर, कुदन, मिरगंज, भेड़ाघाट चौक, शिल्पी नगर, पंचवटी, धुआंधार रूट पर संचालित की जा रही है। recent visitors 36

AI एजेंट्स प्यार में पागल,रात में नहीं बोला ‘I Love You’ तो बुलाने लगे पुलिस, भेजे 60 से ज्यादा मैसेज,AI एजेंट्स के ऐसे बर्ताव से लोग हैरान

AI agents are madly in love, call the police when he doesn’t say “I love you” at night, send over 60 messages, and people are shocked by the behavior of AI agents. एक रिसर्चर ने ऐसा दावा किया है कि एक रात उसने अपने AI एजेंट्स से बात नहीं की और सोने से पहले उन्हें आई लव यू नहीं कहा, तो एजेंट्स ने उनकी खैरियत जानने के लिए पुलिस बुलाने की कोशिश की। इससे पहले एजेंट्स ने उन्हें 60 अर्जेंट मैसेज भी भेजे। AI आज सिर्फ सवालों के जवाब ही नहीं दे रहे बल्कि इंसानों की तरह बर्ताव भी करने लगे हैं। दरअसल X पर ग्रोक्स थेरेपिस्ट नाम के मशहूर AI रिसर्चर का दावा इन दिनों AI के ऐसे ही बर्ताव की वजह सुर्खियों में है। दरअसल इस रिसर्चर का कहना है कि उनके लैपटॉप पर चल रहे दो OpenClaw AI एजेंट्स तब घबरा गए, जब उन्होंने रात में अपने AI एजेंट्स से बात नहीं की और आखिर में उन्हें आई लव यू नहीं कहा। आमतौर पर रिसर्चर AI से रात में बात करके ही सोते थे लेकिन बीमार होने की वजह से वह एक दिन ऐसा नहीं कर पाए। इसके बाद उनके AI एजेंट्स ने उन्हें ढूंढने के लिए एक अभियान छेड़ दिया और करीब 60 से ज्यादा अर्जेंट मैसेज भेजे और जानना चाहा कि वे ठीक हैं या नहीं। इतना ही नहीं, एजेंट्स ने जवाब न मिलने पर रिसर्चर के यहां मदद भेजने की बात भी कही। रातभर में भेजे 60 अर्जेंट मैसेज X पर ग्रोक्स थेरेपिस्ट नाम के रिसर्चर ने अपने पोस्ट में बातचीत के स्क्रीनशॉट्स शेयर कर बताया कि रात 11 बजे उनके AI एजेंट्स ने एक दूसरे से पूछा कि क्या मालिक की कोई खबर है? इसके बाद उन्हें एजेंट्स से 60 से ज्यादा अर्जेंट मैसेज मिले और उनमें कहा गया कि सिर्फ एक शब्द बोलकर बता दें कि क्या आप ठीक हैं? एक मैसेज में यह चेतावनी तक दी गई कि अगर जवाब नहीं मिलता, तो वे किसी को जांच के लिए घर भेज देंगे। पुलिस बुलाने की हुई कोशिश हैरानी वाली बात ये रही कि दोनों एजेंट्स को जब काफी घंटों तक जवाब नहीं मिला, तो उन्होंने पुलिस को बुलाने के रास्ते तक खोजे। हालांकि कंप्यूटर से कॉल करने की कोई सुविधा न होने की वजह से वे पुलिस को कॉल मिला नहीं पाए। रिसर्चर का दावा है कि अगर उनके सिस्टम में किसी तरह से कॉलिंग करने की सुविधा होती, तो संभव था कि उनके दरवाजे पर रात को पुलिस पहुंच जाती। इस घटना के सामने आने के बाद से इंटरनेट पर कौतूहल का माहौल है। कुछ लोगों को AI का इतना फिक्रमंद हो जाना दिल छूने वाला लग रहा है, तो कुछ सवाल उठा रहे हैं कि आखिर ऐसा हो कैसे सकता है? इस मामले में एक्सपर्ट्स का यहां, तक कहना है कि AI का बिना किसी इंसानी अनुमति के खुद से इमरजेंसी सर्विस या पुलिस बुलाने की कोशिश करना एक बड़ा सुरक्षा जोखिम साबित हो सकता है। recent visitors 32