आज शाम थम जाएगा दतिया में चुनावी शोर, 2.20 लाख मतदाता करेंगे 21 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला

Election campaigning in Datia will come to a halt this evening; 2.20 lakh voters will decide the fate of 21 candidates. विधानसभा उपचुनाव में मंगलवार शाम पांच बजे चुनाव प्रचार थम जाएगा। इसके बाद प्रत्याशी और उनके स्थानीय कार्यकर्ता ही घर-घर जाकर मतदाताओं से संपर्क कर सकेंगे। 30 जुलाई को होने वाले मतदान में 2 लाख 20 हजार 344 मतदाता 21 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला करेंगे। ईवीएम में प्रत्याशियों के साथ नोटा का विकल्प भी रहेगा। तीन अगस्त को नतीजे आएंगे। दतिया में कुल 2,20,344 मतदाता हैं। इनमें 1,16,088 पुरुष और 1,04,246 महिला मतदाता हैं। इसके अलावा 10 अन्य मतदाता भी अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। विधानसभा क्षेत्र में 1,372 दिव्यांग, 80 वर्ष से अधिक उम्र के 1,237 और 443 सर्विस वोटर भी हैं। यही मतदाता 30 जुलाई को ईवीएम में बटन दबाकर 21 प्रत्याशियों की किस्मत तय करेंगे। भाजपा ने विकास को बनाया मुख्य मुद्दाभाजपा ने चुनाव प्रचार में दतिया के विकास को मुख्य मुद्दा बनाया। पार्टी ने ढाई साल से क्षेत्र में विकास कार्य ठप होने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस को घेरा। भाजपा नेताओं ने मतदाताओं से कहा कि पार्टी प्रत्याशी के जीतने पर रुके हुए विकास कार्यों को पूरा कराया जाएगा। प्रचार के दौरान सरकार के काम और दतिया के विकास को लेकर भी जनता के बीच नेता पहुंचे। कांग्रेस ने नरोत्तम के साथ भाजपा को घेरावहीं कांग्रेस ने चुनाव प्रचार में दतिया उपचुनाव में भाजपा के दावेदार माने जा रहे पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को निशाने पर रखा। पार्टी ने उनके कार्यकाल के दौरान दतिया में कानून-व्यवस्था और कथित गुंडागर्दी को लेकर लगातार सवाल उठाए। कांग्रेस ने नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटे जाने को भी चुनावी मुद्दा बनाया और इसे लेकर भाजपा पर निशाना साधा। दोनों दलों ने जातीय समीकरण साधने लगाई पूरी ताकतदतिया उपचुनाव में भाजपा और कांग्रेस दोनों ने 40-40 स्टार प्रचारकों को मैदान में उतारा। भाजपा की ओर से प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल लगातार प्रचार में सक्रिय रहे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी रैली और जनसभा कर मतदाताओं से भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में मतदान की अपील की। करीब 10 से 15 कैबिनेट मंत्रियों को भी अलग-अलग क्षेत्रों में जातीय और स्थानीय समीकरण साधने की जिम्मेदारी दी गई। ग्वालियर-चंबल अंचल के नेताओं ने भी प्रचार में मोर्चा संभाला। कांग्रेस की ओर से प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी लगातार प्रचार करते रहे। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के अलावा हेमंत कटारे, जयवर्धन सिंह और ग्वालियर-चंबल क्षेत्र के अन्य नेताओं ने भी मोर्चा संभाला। दोनों दलों ने जातीय समीकरणों को साधने के लिए पूरी ताकत लगाई। आज पांच बजे के बाद बाहरी नेताओं की नो एंट्रीमंगलवार शाम पांच बजे प्रचार थमने के बाद बाहर से आए नेताओं को दतिया विधानसभा क्षेत्र की सीमा से बाहर जाना होगा। इसके बाद प्रत्याशी और स्थानीय कार्यकर्ता ही मतदाताओं से डोर-टू-डोर संपर्क कर सकेंगे। चुनाव प्रचार खत्म होने के बाद अब दोनों दलों का फोकस मतदान के दिन अधिक से अधिक मतदाताओं को बूथ तक पहुंचाने पर रहेगा। 30 को ईवीएम में बंद हो जाएगा प्रत्याशियों का भाग्य30 जुलाई को मतदान के साथ ही 2.20 लाख मतदाताओं का फैसला ईवीएम में बंद हो जाएगा। 21 प्रत्याशियों के साथ नोटा भी विकल्प होगा और मतगणना में तय होगा कि दतिया की जनता ने किसके पक्ष में अपना जनादेश दिया। recent visitors 21

मध्य प्रदेश: आज किसानों का भोपाल कूच व CM हाउस के घेराव की तैयारी, मूंग की 100% खरीदी पर अड़े; अब आगे क्या?

Madhya Pradesh: Farmers set to march to Bhopal and lay siege to the CM’s residence today, adamant on 100% procurement of moong; what next? मध्यप्रदेश में मूंग की पूरी उपज समर्थन मूल्य पर खरीदने समेत किसानों की आठ सूत्रीय मांगों को लेकर शुरू हुआ आंदोलन मंगलवार को और तेज हो गया है। नर्मदापुरम से भोपाल के लिए निकली संयुक्त किसान मोर्चा की पदयात्रा सोमवार को प्रशासन की रोक-टोक के बावजूद आगे बढ़ती रही। किसानों के भोपाल की ओर बढ़ने के साथ ओबैदुल्लागंज से भोपाल की तरफ जाने वाला हाईवे बंद है, वहीं जबलपुर की तरफ से सुल्तानपुर मार्ग भी प्रभावित है। किसान नेताओं ने साफ किया है कि वे मुख्यमंत्री आवास तक पहुंचकर अपनी मांगें रखेंगे। आंदोलन की सबसे प्रमुख मांग मूंग की शत-प्रतिशत खरीदी है। इसके अलावा ई-टोकन व्यवस्था खत्म करने, एमएसपी पर खरीद की कानूनी गारंटी, फसल बीमा में सुधार, बिजली कटौती बंद करने और ट्रांसफार्मर उपलब्ध कराने समेत अन्य मांगें भी शामिल हैं। नर्मदापुरम से निकले किसान, रास्ते में कई बार रोका गयाकिसान पदयात्रा सोमवार को नर्मदापुरम से आगे बढ़ी। प्रशासन ने रास्ते में बैरिकेडिंग कर किसानों को रोकने की कोशिश की, लेकिन प्रदर्शनकारी आगे बढ़ते रहे। नर्मदा पुल के पास से लेकर बुधनी क्षेत्र तक कई जगह पुलिस और किसानों के बीच आमना-सामना हुआ। किसानों ने रास्ते में लगाए गए पांच बैरिकेड हटाकर आगे का रास्ता बनाया। इसके बाद यात्रा बरखेड़ा तक पहुंची। रात में विश्राम के बाद मंगलवार को किसानों ने भोपाल की तरफ फिर कूच किया। सुबह से शाम तक पुलिस-किसानों में खींचतानपहले दिन करीब सुबह 9 बजे से शाम 7:30 बजे तक अलग-अलग स्थानों पर किसानों और पुलिस के बीच गतिरोध बना रहा। प्रशासन ने नर्मदापुरम शहर में प्रवेश से लेकर सेठानी घाट, इंदिरा चौक, भोपाल चौराहा और डोंगरवाड़ा सहित कई जगहों पर किसानों को रोकने का प्रयास किया। हालांकि, किसान पीछे हटने को तैयार नहीं हुए। पदयात्रा में युवा किसानों के साथ बुजुर्ग भी शामिल रहे। सोमवार की लंबी पैदल यात्रा के बाद किसान बरखेड़ा पहुंचे और मंगलवार को फिर राजधानी की ओर बढ़े। हाईवे पर यातायात प्रभावित, वैकल्पिक रास्तों का दबावकिसानों के भोपाल की ओर बढ़ने के कारण ओबैदुल्लागंज-भोपाल मार्ग पर यातायात प्रभावित है। इसके साथ जबलपुर की ओर से आने वाले वाहनों के लिए सुल्तानपुर मार्ग भी प्रभावित होने की सूचना है। ऐसे में भोपाल की तरफ आने-जाने वाले यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यह आंदोलन ऐसे समय तेज हुआ है जब मूंग की एमएसपी खरीदी को लेकर प्रदेश में किसान पहले से प्रदर्शन कर रहे हैं। इससे पहले भी किसानों ने हाईवे जाम और विधानसभा घेराव की चेतावनी दी थी। गुरुद्वारा बंद कराने का किसान नेताओं ने लगाया आरोपकिसान नेताओं ने आरोप लगाया कि औबेदुल्लागंज स्थित गुरुद्वारे में किसानों के ठहरने की व्यवस्था थी, लेकिन प्रशासन ने गुरुद्वारा बंद करा दिया। उनका कहना है कि नर्मदापुरम में आंदोलन के चलते देरी होने के बाद किसानों को रात बरखेड़ा में गुजारनी पड़ी। इन मांगों पर अड़े किसानकिसानों की मांगों की सूची में मूंग की 100 प्रतिशत उपज समर्थन मूल्य पर खरीदी जाए, ई-टोकन व्यवस्था खत्म की जाए, एमएसपी पर खरीद की कानूनी गारंटी दी जाए, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में सुधार किया जाए, अघोषित बिजली कटौती बंद की जाए, अनुदान पर ट्रांसफार्मर उपलब्ध कराए जाएं, ग्रामीण सड़कों का निर्माण कराया जाए, भारत-अमेरिका ट्रेड डील समाप्त करने की मांग की है। किसानों का ऐलान-मांग पूरी होने तक आंदोलनसंयुक्त किसान मोर्चा ने कहा है कि सिर्फ आश्वासन से आंदोलन खत्म नहीं होगा। किसानों का कहना है कि सरकार को मूंग की पूरी उपज एमएसपी पर खरीदने सहित सभी मांगों पर ठोस फैसला लेना होगा। इसके बाद ही आंदोलन वापस लेने पर विचार किया जाएगा। फिलहाल किसानों का काफिला राजधानी की तरफ बढ़ रहा है और दो प्रमुख मार्गों पर यातायात प्रभावित होने से प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था के साथ ट्रैफिक मैनेजमेंट की भी चुनौती खड़ी हो गई है। recent visitors 21

जीएडी के नियमों को ठेंगा बता पीएचई विभाग, पदोन्नति देने ठोकी अपनी शर्तें, अधिकारों से वंचित कर्मचारी

Flouting GAD rules, the PHE Department has imposed its own conditions for granting promotions, leaving employees deprived of their rights. भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशों एवं कर्मचारी हितैषी मंशा अनुरूप जीएडी के नियमों के मुताबिक सभी विभागों में पदोन्नति का बड़ा काम चल रहा है। लेकिन कुछ विभाग उदासीनता भी दिखा रहे हैं। ऐसा ही कुछ पीएचई विभाग में चल रहा है। विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की मनमानी से सैकड़ों कर्मचारी पदोन्नति से बाहर होने की कगार पर पहुंच गए हैं।वैसे तो जीएडी ने सभी विभागों को विस्तृत दिशा निर्देश दिए हैं। मध्यप्रदेश शासन के अनेक विभागों में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को तृतीय श्रेणी पदों पर पदोन्नत कर दिया गया है। कंप्यूटर डिप्लोमा एवं सीपीसीटी (CPCT) की अनिवार्यता पूर्ण करने के लिए 5 वर्ष का समय भी दिया गया है। जानकारी के अनुसार, लोक निर्माण विभाग (PWD), स्वास्थ्य विभाग, पशुपालन विभाग, उद्योग विभाग, जनसंपर्क विभाग तथा संभागीय उपायुक्त, वाणिज्यिक कर विभाग सहित कई विभागों में जीएडी नियमों के तहत कर्मचारियों की पदोन्नति का कार्य बड़ी तेजी से चल रहा है। वहीं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) विभाग में पात्र कर्मचारियों की पदोन्नति अब तक लंबित है। पीएचई विभाग के कर्मचारियों का कहना है कि जब समान शासन, समान सेवा नियम और समान परिस्थितियों में अन्य विभागों के कर्मचारियों को पदोन्नति का लाभ मिल चुका है, तब पीएचई विभाग के कर्मचारियों को इस अधिकार से वंचित रखा जा रहा है। इससे कर्मचारियों में असंतोष और भेदभाव की भावना उत्पन्न हो रही है। कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मांग की है कि पीएचई विभाग के कर्मचारियों को भी शासन की मंशा के अनुरूप तत्काल आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए जाएं, ताकि पात्र कर्मचारियों को शीघ्र पदोन्नति प्रदान की जा सके तथा कंप्यूटर डिप्लोमा एवं सीपीसीटी की पूर्ति के लिए अन्य विभागों की तरह पाँच वर्ष का अवसर उपलब्ध कराया जाए। कर्मचारियों ने विश्वास व्यक्त किया है कि मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप से पीएचई विभाग के कर्मचारियों को भी समान न्याय मिलेगा और पूरे प्रदेश में एक समान पदोन्नति नीति लागू होगी। recent visitors 28

छतरपुर:  गुरु पूर्णिमा महोत्सव , 29 जुलाई को रविदास मंदिर अबार बनेगा श्रद्धा और भक्ति का केंद्र

Chhatarpur: Guru Purnima Festival, on July 29, Ravidas Temple Abar will become a center of faith and devotion. छतरपुर/रामटौरिया। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर संत रविदास मंदिर अबार माता तहसील घुवारा जिला छतरपुर में 29 जुलाई 2026 बुधवार को गुरु पूजन एवं विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा। इस धार्मिक आयोजन को लेकर समिति द्वारा आमंत्रण पत्र जारी कर समाज के लोगों से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर धर्म लाभ अर्जित करने की अपील की गई है। आयोजन आल इंडिया आदि धर्म मिशन के तत्वाधान में रैदास समाज सेवा समिति रविदास मंदिर अबार, तथा रविदास मंदिर समिति अबार माता के तत्वावधान में संपन्न होगा। कार्यक्रम के अनुसार दोपहर 12 बजे गुरु पूजन किया जाएगा। जबकि शाम 4 बजे से प्रसाद वितरण एवं भंडारा प्रारंभ होगा। समिति ने अपने संदेश में समाज के सभी गुरु प्रेमी बंधुओं, माताओं, बहनों एवं युवाओं से तन, मन और धन से सहयोग करने का आह्वान किया है। आमंत्रण पत्र में श्रद्धालुओं से विनम्र आग्रह किया गया है कि वे परिवार सहित कार्यक्रम में पहुंचकर गुरुजनों का आशीर्वाद प्राप्त करें तथा धार्मिक आयोजन को सफल बनाने में सहभागिता निभाएं। कार्यक्रम में स्थानीय समाजजन, क्षेत्रवासी एवं आसपास के ग्रामीणों की बड़ी संख्या में शामिल होने की संभावना है। आयोजन स्थल रविदास मंदिर अवार (अबार माता), तह. घुवारा जिला छतरपुर निर्धारित किया गया है। समिति का संदेश: भजन मंडली एवं कीर्तन के साथ कार्यक्रम की शोभा बढ़ाएं तथा गुरु कृपा प्राप्त करें। recent visitors 51

एपी गज़ब फर्जी डॉक्टर ने सरकार को लगाया लाखों का चूना, एक साथ तीन जिलों में करता रहा नौकरी

Bizarre case from AP: Fake doctor swindles the government out of lakhs; held jobs in three districts simultaneously. मध्यप्रदेश में फर्जीवाड़े का एक बड़ा मामला सामने आया है। शहडोल के जयसिंहनगर विकासखंड स्थित उफरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ तथाकथित डॉक्टर महेश चंद शर्मा के रिश्वत लेते पकड़े जाने के बाद एक-एक कर चौंका देने वाले खुलासे हो रहे हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि तथाकथित फर्जी डॉक्टर एक ही समय में प्रदेश के तीन जिलों में नौकरी कर रहा था और वेतन ले रहा था। जानकारी के मुताबिक वो अब तक तीनों जिलों में मिलाकर 64 लाख रुपये के करीब वेतन ले चुका है। तीन जिलों में एक साथ नौकरीमध्यप्रदेश के शहडोल, खरगोन और श्योपुर तीनों जिलों में डॉक्टर महेश चंद शर्मा की अलग-अलग कर्मचारी आईडी, अलग-अलग पैन नंबर और अलग-अलग आधार संबंधी विवरण दर्ज थे, लेकिन एनएचएम और स्वास्थ्य विभाग की जांच प्रणाली इस फर्जीवाड़े को वर्षों तक पकड़ नहीं सकी। शुरुआती आंकलन के अनुसार आरोपी ने वेतन के रूप में सरकार को करीब 64 लाख रुपए की आर्थिक क्षति पहुंचाई है। तीन पहचान, नहीं पकड़ पाया सिस्टमजांच में सामने आया कि आरोपी ने प्रत्येक जिले में अलग-अलग दस्तावेजों के आधार पर नियुक्ति हासिल की। सबसे बड़ा सवाल यह है कि शहडोल में आधार का अधूरा नंबर जमा होने के बावजूद नियुक्ति कैसे मिल गई और दस्तावेजों का सत्यापन किस स्तर पर हुआ। घर बैठे लगती रही ऑनलाइन हाजिरीविभागीय सूत्रों के अनुसार आरोपी उफरी स्वास्थ्य केंद्र में शायद ही कभी दिखाई देता था। वह सार्थक ऐप के माध्यम से जिले और कई बार प्रदेश की सीमा से बाहर रहकर भी अपनी ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करा देता था। ब्लॉक और जिला स्तर के अधिकारियों के औचक निरीक्षण में भी वह कई बार अनुपस्थित मिला, जिसके कारण नोटिस भी जारी किए गए, लेकिन इसके बावजूद उसके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। लाखों रुपये वेतन लिया पड़ताल में सामने आया है कि आरोपी को तीनों जिलों से प्रतिमाह लगभग 50 से 55 हजार रुपए मानदेय मिलता था। अनुमानित भुगतान इस प्रकार है- इस प्रकार आरोपी ने तीनों जिलों से मिलाकर करीब 64 लाख रुपए का सरकारी भुगतान प्राप्त किया। स्वास्थ्य मंत्री बोले- एफआइआर भी होगी, वसूली भीमामले पर संज्ञान लेते हुए प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने शहडोल प्रवास के दौरान सख्त कार्रवाई के संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि आरोपी की सेवा समाप्त करने के साथ उसके द्वारा लिए गए पूरे वेतन की वसूली की जाएगी और उसके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई जाएगी। साथ ही उन अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय होगी, जिन्होंने दस्तावेजों का सत्यापन किए बिना नियुक्ति प्रक्रिया पूरी की, ऑनलाइन उपस्थिति पर निगरानी नहीं रखी और समय रहते अनियमितताओं की जानकारी उच्च अधिकारियों तक नहीं पहुंचाई। recent visitors 29

डेयरी की आड़ में चल रहा था अवैध बूचड़खाना, पुलिस ने किया खुलासा; बेटे-दामाद व मुख्य आरोपी गिरफ्तार

Illegal slaughterhouse operating under the guise of a dairy exposed by police; son, son-in-law, and main accused arrested. भोपाल । निशातपुरा थाना क्षेत्र के कमला नगर में मिला संदिग्ध मांस गोवंश का ही निकला है। हालांकि अभी तक एफएसएल की रिपोर्ट नहीं मिली है, लेकिन पुलिस ने एक गाय का धड़ बरामद करने के बाद यह मानकर चल रही है कि यह मामला गोकशी का ही है। पुलिस ने डेयरी की आड़ में अवैध बूचडख़ाना संचालित करने वाले मुख्य आरोपी अजीज और बेअे आसिफ तथा दामाद जुबैर को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी लंबे समय से सड़कों पर घूमने वाली आवारा गायों और गौवंश चुराकर लाते और लोगों को बताते की वह डेयरी का संचालन कर रहे हैं। हालांकि जहां कथित तौर पर डेयरी का संचालन आरोपी बता रहे हैं, वह जमीन भी शासकीय बताई जा रही है। जिला प्रशासन जमीन की भी जांच शुरू कर दिया है। अवैध अतिक्रमण कर कथित डेयरी के नाम पर बूचडख़ाना संचालित किए जाने का खुलासा होने के बाद मामला सुर्खियों में है। उल्लेखनीय है कि गुरुवार-शुक्रवार की दरमियानी देर रात बजरंगदल के डेढ़ दर्जन से अधिक कार्यकर्ताओं ने एक ऑटो से ले जाए जा रहे मांस को पकड़कर हंगामा कर गोकशी का आरोप लगाया था। इसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर तीनों आरोपियों को रिगफ्तार कर लिया है। गौपाल रखे हुए थे नजरपुलिस सूत्रों के अनुसार गोकशी के बाद गायों की हड्डियों और सिर को पास की बंजर जमीन और खेतों में गड्ढे कर मिट्टी के अंदर गाड़ देते थे, ताकि पड़ोसियों को गोकशी का पता नहीं चले। कमला नगर क्षेत्र में रहने वाले सत्येंद्र ने दावा किया कि पिछले तीन महीने में उनकी चार गायों चोरी हो चुकी हैं। मेरे साथ इस कॉलोनी और अन्य कॉलोनियों की कई गायों और गोवंश चोरी हो चुके हैं। इसके बाद हम लोग बजरंगदल के कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर गायों की निगरानी करते थे। जानें कैसे हुआ खुलासा?तभी पता चला कि अजीज और उससे जुड़े लड़के सड़कों पर घूमने वाली गायों को चुराते हैं। इसके बाद निगरानी की गई तो पता चला कि गायों तो चुराकर लाते हैं, लेकिन इनके यहां ज्यादा दिन तक गायें रहती रहीं। ऐसे में खुलासा हुआ कि जब यह व्यक्ति गायों को बेचता नहीं तो क्या करता है? इसके बाद गोकशी का खुलासा हुआ। कई दिनों से कॉलोनी के लड़के निगरानी कर रहे थे, तब पता चला कि यह गायों को काटकर मांस बेचने का कार्य कर रहा है। इसके बाद मांस को पकड़ा गया है। पुलिस अब यह भी पता कर रही है कि गोवंश की मांस की सप्लाई कहां की जा रही थी। संदिग्ध मांस की एफएसएल रिपोर्ट आने के बाद अगर गाय का मांस की रिपोर्ट आती है तौर कुछ और लोगों की गिरफ्तारी संभव है। recent visitors 35

डिंपल यादव बोलीं- BJP वाले सफेद चादर का कफन लेकर आए, सोनम वांगचुक को दबाना, देश की आत्मा को दबाना

Dimple Yadav said—the BJP has come with a white shroud; suppressing Sonam Wangchuk means suppressing the soul of the nation. समाजवादी पार्टी सांसद डिंपल यादव ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को पुलिस द्वारा अस्पताल ले जाने की घटना को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने अपने एक्स अकाउंट पर लिखा- ‘बीजेपी वाले देश के लिए सफेद चादर का कफन लेकर आए हैं। जब शांतिपूर्ण आवाजो को दबाया जाता है, तो संविधान और लोकतंत्र भी आहत होते हैं। सोनम वांगचुक जैसे लोगों की आवाज दबाना, देश की आत्मा को दबाना है।’ दरअसल, शनिवार सुबह दिल्ली के जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक को पुलिस सफदरजंग अस्पताल लेकर गई। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने पुलिस कार्रवाई का विरोध किया, जिससे मौके पर हंगामे की स्थिति बन गई। ये पुलिस नहीं आरएसएस के गुंडे हैंकॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया कि ‘सुबह सात बजे जब मैं फ्रेश होने के लिए यहां से निकला, तो पुलिस के गुंडे वहां आए। वे सोनम सर को गालियां देते हुए घसीटकर लेकर गए। 60 साल का एक व्यक्ति, जो 20 दिनों से भूख हड़ताल पर था उन्हें दिल्ली पुलिस जबरदस्ती घसीटकर यहां से लेकर गई। हमें नहीं पता कि कहां लेकर गए हैं। जैसे ही मुझे खबर मिली, मैं जंतर-मंतर आ रहा था, तो पुलिस ने मेरे साथ भी मारपीट की। ये पुलिस नहीं आरएसएस के गुंडे हैं। मैं विदेश से अपने देश वापस आया था, क्या मैं कोई अपराधी हूं? मुझे इन लोगों ने सड़कों पर मारा। सोनम वांगचुक 21 दिनों से अनशन पर बैठेसोनम वांगचुक पेपर लीक मामले की निष्पक्ष जांच और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर 21 दिनों से अनशन पर बैठे हैं। लंबे अनशन के कारण उनकी सेहत लगातार बिगड़ रही थी और उनका वजन करीब 9.5 किलोग्राम कम हो चुका है। इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को केंद्र और दिल्ली सरकार को निर्देश दिया था कि वांगचुक का प्रतिदिन मेडिकल परीक्षण कराया जाए और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें तत्काल उपचार उपलब्ध कराया जाए। इसी आदेश के अनुपालन में पुलिस उन्हें शनिवार सुबह अस्पताल लेकर गई। घटना के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। recent visitors 37