वन विभाग के कर्मचारी के घर EOW का छापा, 50 लाख की दुकान समेत सोना-चांदी मिली; आय से अधिक संपत्ति का आरोप

EOW raids Forest Department employee’s home; gold, silver, and a shop worth ₹50 lakh found; accused of amassing assets disproportionate to known sources of income. विशेष संवाददाता जितेन्द्र श्रीवास्तव अर्पिता श्रीवास्तव जबलपुर जबलपुर। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) की टीम ने बुधवार सुबह मंडला में वन विभाग के सहायक ग्रेड-3 कर्मचारी के घर छापामार कार्रवाई की। पश्चिम सामान्य वन मंडल मंडला में पदस्थ श्वेतांक चौरसिया के राज राजेश्वरी वार्ड स्थित आवास पर ईओडब्ल्यू की टीम ने आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने की शिकायत के आधार पर तलाशी शुरू की है। कार्रवाई के दौरान टीम को लाखों रुपये की नकदी, सोने-चांदी के आभूषण, वाहन, बैंक खातों और अन्य संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज मिले हैं। ईओडब्ल्यू डीएसपी मंजीत सिंह के मुताबिक, श्वेतांक चौरसिया के खिलाफ आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति अर्जित करने की शिकायत ईओडब्ल्यू जबलपुर में की गई थी। शिकायत की गोपनीय जांच में उनकी आय और व्यय के बीच करीब 290 प्रतिशत का अंतर प्रारंभिक तौर पर सामने आया था। इसके बाद ईओडब्ल्यू ने मंडला न्यायालय से तलाशी वारंट प्राप्त किया और बुधवार सुबह टीम ने उनके आवास पर सर्च की कार्रवाई शुरू की। 50 लाख की दुकान खरीद की भी जांचईओडब्ल्यू के अनुसार, चौरसिया की वैधानिक आय करीब 55 से 60 लाख रुपये के बीच बताई गई है। तलाशी के दौरान उनके भवन में करीब 50 लाख रुपये की दुकान खरीदने से संबंधित जानकारी सामने आई है। आरोप है कि इस सौदे में बड़ी मात्रा में नकद भुगतान किया गया और रजिस्ट्री में संपत्ति की कीमत कम दर्शाई गई। EOW करीब 45 से 50 लाख रुपये के कथित नकद भुगतान की भी जांच कर रही है। घर से कैश, सोना-चांदी और वाहनों की जानकारीतलाशी के दौरान घर से करीब 5 लाख रुपये नकद, लगभग 150 से 200 ग्राम सोना और 3 से 4 किलो चांदी मिलने की जानकारी EOW ने दी है। इसके अलावा तीन वाहनों, एलआईसी पॉलिसियों, चार बैंक खातों और बैंक लॉकर से संबंधित जानकारी भी सामने आई है। इन सभी संपत्तियों और निवेश का मूल्यांकन किया जा रहा है। ईओडब्ल्यू डीएसपी ने बताया कि प्रारंभिक जांच में खर्च आय की तुलना में करीब 290 प्रतिशत अधिक मिला था। तलाशी के दौरान सामने आ रही संपत्तियों और खर्चों के मूल्यांकन के बाद यह अनुपात करीब 400 प्रतिशत या उससे अधिक पहुंचने की संभावना है। हालांकि, अंतिम आंकड़ा विस्तृत जांच और वैल्यूएशन पूरा होने के बाद ही स्पष्ट होगा। recent visitors 37

MP News: एनालॉग पनीर पर सख्ती, कर्मचारियों की पदोन्नति में CPCT नहीं बनेगी बाधा

MP News: Crackdown on analogue paneer; CPCT will not be a hurdle in employee promotions. भोपाल। मध्य प्रदेश में खाद्य पदार्थों में मिलावट के खिलाफ सरकार ने सख्त रुख अपनाने के संकेत दिए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश में एनालॉग पनीर के उपयोग और बिक्री पर प्रभावी रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के सरकारी कर्मचारियों की पदोन्नति में CPCT परीक्षा को बाधा नहीं बनने देने के संबंध में जल्द सकारात्मक निर्णय लेने के निर्देश भी दिए गए हैं। एनालॉग पनीर पर सरकार सख्त मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश में एनालॉग पनीर के उपयोग और बिक्री पर प्रभावी रोक के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाए। खाद्य सुरक्षा से जुड़े अधिकारियों को ऐसे उत्पादों की निगरानी करने और नियमों का उल्लंघन मिलने पर कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।सरकार का कहना है कि प्रदेशवासियों को गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराना प्राथमिकता है। मिलावट के खिलाफ होगी निगरानी एनालॉग पनीर से जुड़े मामलों में खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। बाजार में ऐसे उत्पादों की पहचान, जांच और नियमानुसार कार्रवाई को लेकर निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।सरकार के इस कदम से मिलावटी या निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाए जाने वाले खाद्य उत्पादों के खिलाफ कार्रवाई तेज होने की उम्मीद है। कर्मचारियों को पदोन्नति में बड़ी राहत के संकेत मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सरकारी तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की पदोन्नति में CPCT परीक्षा उत्तीर्ण करने की अनिवार्यता को लेकर भी जल्द सकारात्मक निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं।मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि CPCT परीक्षा के कारण किसी पात्र कर्मचारी को पदोन्नति से वंचित न किया जाए और न ही किसी कर्मचारी को रिवर्ट किया जाए।इस संबंध में नियमों और व्यावहारिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए आवश्यक प्रक्रिया जल्द पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। लंबे समय से पदोन्नति का इंतजार कर रहे कर्मचारियों को उम्मीद CPCT की अनिवार्यता को लेकर लंबे समय से पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के लिए यह निर्देश महत्वपूर्ण माना जा रहा है।हालांकि, अंतिम राहत सरकार द्वारा लिए जाने वाले औपचारिक निर्णय और लागू किए जाने वाले नियमों पर निर्भर करेगी। CM के दो बड़े निर्देश, दो अलग-अलग वर्गों को राहत की उम्मीद मुख्यमंत्री के निर्देशों का असर एक ओर खाद्य सुरक्षा और उपभोक्ता स्वास्थ्य से जुड़े मामलों पर पड़ सकता है, वहीं दूसरी ओर सरकारी कर्मचारियों की पदोन्नति से जुड़ी लंबे समय से चली आ रही समस्या के समाधान की उम्मीद जगी है।एक तरफ मिलावट पर शिकंजा, दूसरी तरफ कर्मचारियों की पदोन्नति का रास्ता आसान करने की तैयारी।अब नजर इस बात पर रहेगी कि इन निर्देशों को लागू करने के लिए संबंधित विभाग कितनी जल्दी ठोस आदेश जारी करते हैं। मुख्य सवाल एनालॉग पनीर पर रोक के लिए सरकार की कार्रवाई कितनी सख्त होगी? और CPCT को लेकर कर्मचारियों को वास्तविक राहत कब मिलेगी? recent visitors 26

ना मावा, ना चीनी, ना गैस जलाना! सावन में खाएं भुने चने की ‘सुपर-हेल्दी’ बर्फी, नोट करें सीक्रेट रेसिपी

sawan special sugar free healthy roasted chana barfi recipe लाइफस्टाइल डेस्क। सावन तीज-त्योहार वाला मौसम है और इस मौसम में घेवर और मिठाइयां बड़े चाव से खाई जाती हैं। वहीं जो लोग एक सख्त डाइट फॉलो कर रहे हैं या अपनी सेहत से खिलवाड़ नहीं करना चाहते, उन्हें अक्सर इन मिठाइयों से परहेज करना पड़ता है। ऐसे में आइए आपको मिठाई बनाने का हेल्दी तरीका बताते हैं, जो प्रोटीन रिच होने के साथ-साथ आपकी मीठे के क्रेविंग को भी शांत करेगी। हम बात कर रहे हैं भुने हुए चने से बनने वाली बर्फी की जिसकी सबसे खास बात यह है कि इसे बिना गैस जलाए फटाफट तैयार किया जा सकता है। सामग्री विधि चने की बर्फी के फायदेभुने हुए चने प्रोटीन के साथ-साथी फाइबर, आयरन और कैल्शियम से भी भरपूर होते हैं। वहीं ये बर्फी आर्टिफिशियल शुगर से भी फ्री है जो डायबिटीज और वजन कंट्रोल करने वालों के लिए एक परफेक्ट मिठाई हो सकती है। recent visitors 29

बदल जाएगी बुंदेलखंड की तस्वीर और तकदीर, अगर मिल जाएं ये दो नई रेल लाइन

The face and fortune of Bundelkhand will change if these two new rail lines are sanctioned. सागर | सागर सांसद लता वानखेड़े इन दिनों बुंदेलखंड में रेल सुविधाएं बढ़ाए जाने को लेकर प्रयासरत हैं. इसी कड़ी में सागर लोकसभा की रेल कनेक्टिविटी को नई गति देने की दिशा में बड़े प्रयास कर रही हैं. नई दिल्ली में केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से सागर सांसद लता वानखेड़े ने मुलाकात कर सागर लोकसभा की रेल सुविधाओं एवं विकास से जुड़ी विभिन्न महत्वपूर्ण मांगों पर चर्चा की. आरओबी में लेटलतीफी सांसद लता वानखेड़े ने रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव को सागर लोकसभा में निर्माणाधीन सभी रेलवे ओवर ब्रिज (ROB) की प्रगति, सर्विस रोड एवं रेलवे कार्यों से अवगत कराया. रेलमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को ROB कार्यों में तेजी लाने एवं इनकी समीक्षा के निर्देश दिए. बीना-भोपाल नई रेल लाइन सांसद लता वानखेड़े ने रेलमंत्री वैष्णव से बीना भोपाल के बीच नई रेल लाइन बीना, कुरवाई, पठारिया, सिरोंज, आरोन, लटेरी, सुठालिया, ब्यावरा, भोपाल के सर्वे के आदेश शीघ्र जारी करने का अनुरोध किया, जिससे रेल सुविधा से वंचित लाखों नागरिकों को लाभ मिल सके. भोपाल-खजुराहो के लिए नई रेल लाइन वहीं, भोपाल से खजुराहो के लिए सागर होते नई लाइन भोपाल, रायसेन, सागर, छतरपुर, खजुराहो नई रेल लाइन के सर्वे हेतु बजट स्वीकृत होने के बाद अब DPR शीघ्र तैयार कराने एवं परियोजना को आगे बढ़ाने का अनुरोध सांसद लता वानखेड़े ने रेलमंत्री से किया. यह रेल लाइन सागर को मजबूत रेलवे जंक्शन के रूप में विकसित करने, भोपाल एवं छतरपुर से कनेक्टिविटी बेहतर करने तथा पर्यटन, उद्योग और रोजगार को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण होगी. सागर को मजबूत रेल जंक्शन बनाना प्राथमिकता इसके अलावा सांसद ने खुरई रेलवे स्टेशन पर महत्वपूर्ण एक्सप्रेस ट्रेनों के ठहराव तथा स्टेशन के विकास एवं यात्री सुविधाओं के विस्तार की मांग रखी. सांसद लता वानखेड़े ने कहा कि “सागर लोकसभा की रेल सुविधाओं का विस्तार, सागर को मजबूत रेल जंक्शन बनाना और क्षेत्र के हर हिस्से को बेहतर रेल कनेक्टिविटी से जोड़ना हमारी प्राथमिकता है. रेल मंत्री ने सभी मांगों पर सकारात्मक रुख व्यक्त करते हुए संबंधित विभागीय अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई हेतु निर्देशित किया है. recent visitors 38

MP में UCC पर बड़ा अपडेट: राज्यपाल ने मांगी कानूनी राय, राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद लागू होगा कानून

Major update on UCC in MP: Governor seeks legal opinion; law to be implemented after President’s assent. भोपाल। मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) को लागू करने की दिशा में प्रक्रिया आगे बढ़ती दिखाई दे रही है। मध्य प्रदेश विधानसभा से पारित यूसीसी विधेयक को अनुमति देने से पहले राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने इसके प्रावधानों पर कानूनी राय मांगी है। इसके लिए विधेयक को लोकभवन की विधि एवं विधायी शाखा के पास भेजा गया है।कानूनी परीक्षण और आवश्यक अभिमत की प्रक्रिया पूरी होने के बाद विधेयक को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की मंजूरी के लिए भेजे जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलने के बाद ही यह विधेयक राज्य में कानून का रूप ले सकेगा। क्यों जरूरी है राष्ट्रपति की मंजूरी? यूसीसी विधेयक के कई प्रावधान ऐसे व्यक्तिगत और पारिवारिक कानूनों से संबंधित हैं, जिनका संबंध केंद्रीय कानूनों से भी है। यही वजह है कि विधेयक को आगे बढ़ाने से पहले इसके संवैधानिक और कानूनी पहलुओं का परीक्षण महत्वपूर्ण माना जा रहा है।राज्यपाल की विधि एवं विधायी शाखा द्वारा विधेयक के प्रावधानों का परीक्षण किए जाने के बाद आगे की संवैधानिक प्रक्रिया तय होगी।इसके बाद राष्ट्रपति कार्यालय स्तर पर भी विधेयक के प्रावधानों और संबंधित कानूनों के साथ उसके तालमेल का परीक्षण किया जाएगा। UCC में किन मुद्दों पर है जोर? मध्य प्रदेश के प्रस्तावित समान नागरिक संहिता विधेयक में विवाह, तलाक और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे विषयों से संबंधित प्रावधान शामिल किए गए हैं।इसके अलावा विधेयक में बहुविवाह और निकाह हलाला पर रोक से संबंधित प्रावधान भी बताए गए हैं।यानी कानून लागू होने की स्थिति में राज्य में विवाह और पारिवारिक संबंधों से जुड़े कई मौजूदा प्रावधानों में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकते हैं। 21 जुलाई को विधानसभा से पारित हुआ था विधेयक मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता वाली सरकार ने 19 जुलाई को यूसीसी विधेयक के प्रारूप को मंजूरी दी थी। इसके बाद इसे विधानसभा में प्रस्तुत किया गया।21 जुलाई को मध्य प्रदेश विधानसभा ने विधेयक को ध्वनिमत से पारित किया। इसके बाद विधि एवं विधायी विभाग के माध्यम से विधेयक को 6 अगस्त को राज्यपाल की अनुमति के लिए भेजा गया।अब राज्यपाल ने विधेयक को कानूनी परीक्षण के लिए अपनी विधि एवं विधायी शाखा के पास भेज दिया है। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद क्या होगा? कानूनी परीक्षण पूरा होने के बाद राज्यपाल के अभिमत के साथ विधेयक को राष्ट्रपति के समक्ष भेजे जाने की प्रक्रिया होगी।इसके बाद राष्ट्रपति स्तर पर विधेयक के संवैधानिक प्रावधानों और संबंधित केंद्रीय कानूनों के संदर्भ में परीक्षण किया जाएगा।राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद ही मध्य प्रदेश में यूसीसी को कानून के रूप में लागू करने का रास्ता साफ होगा। उत्तराखंड के बाद MP की ओर देश की नजर देश में उत्तराखंड समान नागरिक संहिता लागू करने वाला पहला राज्य बन चुका है। इसके बाद कई अन्य राज्यों में भी यूसीसी को लेकर प्रक्रिया आगे बढ़ी है।गुजरात विधानसभा से यूसीसी विधेयक पारित होकर केंद्र की अनुमति के लिए भेजा जा चुका है, जबकि असम में भी समान नागरिक संहिता को लेकर प्रक्रिया जारी है।ऐसे में मध्य प्रदेश का यूसीसी विधेयक अब राष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। क्या MP में जल्द लागू होगा UCC? राज्यपाल की ओर से कानूनी राय मांगे जाने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि विधेयक राष्ट्रपति के पास कब भेजा जाएगा और राष्ट्रपति की मंजूरी कब तक मिलेगी।राज्य सरकार की ओर से इसे जल्द आगे बढ़ाने के प्रयास किए जाने की संभावना है। हालांकि, अंतिम निर्णय संवैधानिक प्रक्रिया पूरी होने और राष्ट्रपति की स्वीकृति पर निर्भर करेगा। MP UCC: अब आगे क्या? विधानसभा से पारित विधेयक → राज्यपाल का कानूनी परीक्षण → राज्यपाल की राय → राष्ट्रपति के पास भेजने की प्रक्रिया → राष्ट्रपति की मंजूरी → राज्य में कानून लागू होने का रास्ता साफ बड़ा सवाल मध्य प्रदेश में यूसीसी लागू होने की दिशा में प्रक्रिया अब महत्वपूर्ण चरण में पहुंच चुकी है। लेकिन इसके साथ कई संवैधानिक, कानूनी और सामाजिक सवाल भी जुड़े हैं।क्या राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद मध्य प्रदेश उत्तराखंड के बाद यूसीसी लागू करने वाला अगला बड़ा राज्य बनेगा? अब निगाहें राज्यपाल की कानूनी राय और राष्ट्रपति की मंजूरी पर टिकी हैं। recent visitors 42

स्थाई शिक्षक भर्ती 2018 को पूर्ण करने पात्र अभ्यर्थियों ने डिप्टी सीएम से लगाई गुहार

Eligible candidates appealed to the Deputy CM to complete the Permanent Teacher Recruitment 2018. निराशा के नहीं छट रहे बादल, तीसरी काउंसलिंग की मांग  भोपाल। मध्य प्रदेश में स्थाई शिक्षकों की भारी कमी होने के बावजूद शिक्षा विभाग पद भरने को लेकर गंभीर दिखाई नहीं दे रहा है। वर्ष 2018 की स्थाई शिक्षक भर्ती आज तक अधूरी है। जिसको तीसरी काउंसलिंग के साथ पूर्ण कराने की मांग को लेकर चयनित अभ्यर्थियों ने उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा को ज्ञापन पत्र सौंपा है। पांच सदस्यों के प्रतिनिधिमंडल ने उपमुख्यमंत्री के अलावा, मुख्यमंत्री कार्यालय एवं आयुक्त लोक शिक्षण संचालनालय को ज्ञापन देकर भर्ती प्रकिया पूरी करने की मांग की है। 2018 से चल रही प्रक्रिया फिर भी अधूरी, हो रहे ओवरयेज  शिक्षक भर्ती 2018 के चयनित उम्मीदवार नियुक्ति पत्र का इंतजार पिछले 6 से 7 वर्षों से कर रहे हैं। चयनित अभ्यर्थियों की मुख्य मांग है कि उच्च माध्यमिक शिक्षक के 5,935 और माध्यमिक शिक्षक के 2,237 पहली काउंसिलिंग से रिक्त रहे पदों पर तीसरी काउंसलिंग आयोजित की जाए, ताकि शेष पदों पर चयन सूची जारी हो और नियुक्ति पत्र वितरित किए जाएं। अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि विभाग की उदासीनता के कारण कई उम्मीदवार ओवरएज हो चुके हैं, जिससे उनका भविष्य अधर में लटक गया है। अधिकार मिलने तक लड़ाई जारी पात्रता परीक्षा संघ के प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल रविदास सहित दिनेश बामनिया, लीलेश कुमार आदि ने बताया कि हमने वर्षों तक मेहनत की और परीक्षा पास की, लेकिन सरकार और शिक्षा विभाग की लापरवाही के कारण हमें नियुक्ति नहीं मिल रही। हमारी मांग है कि तत्काल शेष पदों पर तीसरी काउंसलिंग कर भर्ती प्रक्रिया पूरी की जाए।अभ्यर्थियों का साफ कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होती हैं, तब तक आंदोलन जारी रखेंगे। recent visitors 27

सीएम हेल्पलाइन चीख रही है, राजधानी बेहाल, व्यवस्था बदहाल, शिकायतों ने खोल दी सरकार की पोल

The CM Helpline is screaming for attention; the capital is in distress, the system is in shambles, and the complaints have exposed the government. भोपाल । मध्य प्रदेश में विकास के दावों की चमक जितनी तेज़ दिखाई जाती है, सीएम हेल्पलाइन के आंकड़े उतनी ही तेजी से उस चमक की परतें उधेड़ रहे हैं। सवाल सिर्फ इतना नहीं कि जुलाई 2026 में नगरीय निकायों से जुड़ी 51,610 शिकायतें दर्ज हुईं। असली सवाल यह है कि आखिर जनता को अपनी बुनियादी समस्याओं के समाधान के लिए बार-बार मुख्यमंत्री की हेल्पलाइन तक क्यों पहुंचना पड़ रहा है?क्या नगर निगम और नगर पालिकाएं अपने मूल दायित्व निभाने में विफल हो चुकी हैं? या फिर शिकायतों का अंबार इस बात का प्रमाण है कि प्रशासनिक व्यवस्था जनता की अपेक्षाओं से बहुत पीछे छूट गई है?स्थिति और गंभीर तब हो जाती है जब 44,126 शिकायतें ग्रेडिंग अवधि तक लंबित रह जाती हैं और 10,136 शिकायतें 50 दिन से अधिक समय तक फाइलों में धूल खाती रहती हैं। इसका सीधा अर्थ है कि हजारों नागरिकों की समस्याएं सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटती रहीं, लेकिन समाधान नहीं मिला। ‘डी’ रेटिंग… क्या यह सिर्फ एक ग्रेड है या शासन की असफलता का प्रमाण? प्रदेश के नगरीय निकायों को मिला ‘डी’ रेटिंग केवल एक प्रशासनिक रिपोर्ट नहीं है। यह उस व्यवस्था का रिपोर्ट कार्ड है, जो शहरों को साफ रखने, सड़कें दुरुस्त करने, सीवर व्यवस्था संभालने, पेयजल उपलब्ध कराने और स्ट्रीट लाइट जैसी बुनियादी सुविधाएं देने के लिए बनाई गई है।जब पूरी व्यवस्था को ‘डी’ ग्रेड मिले, तो सवाल उठना स्वाभाविक है—क्या यह केवल अधिकारियों की नाकामी है, या फिर निगरानी और जवाबदेही की पूरी व्यवस्था कमजोर पड़ चुकी है? राजधानी भोपाल सबसे ऊपर… क्या यही मॉडल राजधानी है? सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि भोपाल पूरे प्रदेश में शिकायतों के मामले में पहले स्थान पर है।6,469 शिकायतें।यानी मध्य प्रदेश की हर आठवीं शिकायत राजधानी से।यदि मुख्यमंत्री, मंत्रालय और अधिकांश वरिष्ठ अधिकारियों का शहर ही नागरिक सुविधाओं के संकट से जूझ रहा है, तो छोटे शहरों और कस्बों की वास्तविक स्थिति का अंदाजा सहज लगाया जा सकता है।भोपाल में हजारों शिकायतें लंबित रहना यह संकेत देता है कि समस्या केवल संसाधनों की नहीं, बल्कि कार्यसंस्कृति, जवाबदेही और निगरानी की भी है। जनता की मजबूरी: टैक्स दो… फिर शिकायत करो… फिर इंतजार करो एक नागरिक टैक्स देता है ताकि उसे साफ सड़कें, स्वच्छ कॉलोनियां, नियमित पेयजल, बेहतर सीवर व्यवस्था और सुरक्षित सार्वजनिक सुविधाएं मिल सकें।लेकिन वास्तविकता यह है कि नागरिक पहले समस्या झेलता है, फिर शिकायत दर्ज करता है, फिर महीनों इंतजार करता है, और कई मामलों में समाधान फिर भी नहीं मिलता। क्या यही सुशासन है? क्या ‘गुड गवर्नेंस’ सिर्फ भाषणों तक सीमित है? हर सरकारी कार्यक्रम में सुशासन, डिजिटल प्रशासन और जनसेवा की बातें होती हैं। लेकिन यदि लाखों लोग अपनी छोटी-छोटी समस्याओं के समाधान के लिए हेल्पलाइन का सहारा लेने को मजबूर हों और उनमें से बड़ी संख्या समय पर हल ही न हो, तो यह डिजिटल सफलता नहीं, बल्कि प्रशासनिक विफलता का संकेत माना जाएगा।सरकार को यह भी बताना चाहिए कि वर्षों से चल रही शिकायतों के बावजूद आखिर कौन-सी स्थायी सुधार योजना लागू हुई, जिससे शिकायतों की संख्या कम होती दिखाई दे? सबसे बड़ा सवाल: जिम्मेदार कौन? जब किसी निजी कंपनी का प्रदर्शन लगातार खराब होता है तो उसके प्रबंधन से जवाब मांगा जाता है।लेकिन सरकारी व्यवस्था में हजारों शिकायतें लंबित रहने के बाद भी क्या किसी अधिकारी की जवाबदेही तय होती है?क्या किसी नगर निगम आयुक्त, मुख्य नगर पालिका अधिकारी या संबंधित विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से सार्वजनिक रूप से जवाब मांगा गया?यदि नहीं, तो फिर सुधार की उम्मीद किस आधार पर की जाए? लोकतंत्र में सरकार की सबसे बड़ी ताकत जनता का विश्वास होता है। जब नागरिकों की आवाज़ लगातार हेल्पलाइन पर दर्ज होती रहे और समाधान की गति शिकायतों से पीछे रह जाए, तो यह केवल प्रशासनिक कमी नहीं, बल्कि विश्वास का संकट बन जाता है।‘डी’ रेटिंग किसी रिपोर्ट की एक पंक्ति भर नहीं है। यह उन हजारों परिवारों की कहानी है, जिन्हें साफ पानी, टूटी सड़क, जाम सीवर, अंधेरी गलियों और बदहाल नागरिक सेवाओं के बीच जीना पड़ रहा है।सरकार के सामने चुनौती अब नई योजनाएं घोषित करने की नहीं, बल्कि यह साबित करने की है कि सीएम हेल्पलाइन शिकायत दर्ज करने का माध्यम भर नहीं, बल्कि समाधान दिलाने की गारंटी भी है। क्योंकि जनता को आश्वासन नहीं, परिणाम चाहिए। recent visitors 30